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डिलीवरी डेट निकल जाने पर क्या परेशानियां हो सकती हैं?

प्रेगनेंसी कन्फर्म होने के बाद महिला सबसे पहले डॉक्टर से मिलती है। और डॉक्टर द्वारा महिला के लास्ट पीरियड की तिथि को जानकर डॉक्टर द्वारा एक अनुमानित डिलीवरी डेट महिला को बता दी जाती है। और यह डिलीवरी डेट महिला द्वारा प्रेगनेंसी में करवाए जाने के बाद भी डॉक्टर द्वारा बताई जा सकती है। लेकिन ऐसा कोई जरुरी नहीं होता है की जो डेट डॉक्टर ने दी है उसी दिन आपके शिशु का जन्म होगा। बल्कि उससे पहले या बाद में भी शिशु का जन्म हो सकता है। सेंतीस से चालीस हफ़्तों के बाच में महिला की डिलीवरी होना बिल्कुल सही माना जाता है। लेकिन कई बार महिला की इस समय डिलीवरी नहीं होती है और डिलीवरी डेट निकल जाती है।

लेकिन इसमें किसी तरह की घबराने की बात नहीं होती है। क्योंकि डिलीवरी डेट से दो चार दिन ऊपर नीचे हो सकते हैं। और उसके बाद भी यदि आपको प्रसव का कोई लक्षण अपनी बॉडी में नहीं दिखाई देता है। तो डॉक्टर आपको आर्टिफिशल पेन देकर डिलीवरी या सिजेरियन डिलीवरी करवा सकते हैं। क्योंकि डिलीवरी डेट के निकल जाने के बाद और उसके बाद भी समय बीतने पर यदि डिलीवरी नहीं होती है तो प्रेग्नेंट महिला और भ्रूण को बहुत सी परेशानियां हो सकती है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की डिलीवरी डेट निकल जाने पर कौन कौन सी दिक्कतें हो सकती है।

डिलीवरी डेट निकल जाने पर शिशु को हो सकती है दिक्कत

  • डिलीवरी तक आने तक शिशु का विकास गर्भ में शिशु का वजन बढ़ चूका होता है।
  • साथ ही इस दौरान हो सकता है की गर्भनाल अपना काम उतनी अच्छी तरह से न कर पाए जिस तरह पहले कर रही थी।
  • जिसके कारण शिशु तक पहुँचने वाले पोषक तत्वों व् ऑक्सीजन के प्रवाह में समस्या आ सकती है।
  • जिसके कारण शिशु की हलचल में कमी, शिशु की जान को रिस्क आदि हो सकता है।
  • ऐसे में डिलीवरी डेट निकल जाने पर आपको जल्द से जल्द डॉक्टर से बात करनी चाहिए।
  • ताकि शिशु को किसी भी तरह की दिक्कत न हो और आप एक स्वस्थ शिशु को जन्म दे सकें।

महिला को हो सकती है दिक्कत

  • डिलीवरी डेट निकल जाने के बाद महिला को तनाव अधिक हो सकता है।
  • जो महिला की दिक्कतों को बढ़ा सकता है।
  • पेल्विक एरिया, पीठ, आदि की मांसपेशियों पर दबाव बढ़ सकता है।
  • जिसके कारण महिला का कमर दर्द, पेट के निचले हिस्से में दर्द जैसी परेशानी बढ़ सकती है।
  • शिशु के जन्म की नियत तिथि निकल जाने के बाद केवल शिशु को ही रिस्क नहीं होता है।
  • बल्कि महिला को भी स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानी होने का खतरा रहता है।

तो यह हैं कुछ दिक्कतें जो महिला को डिलीवरी डेट निकल जाने के बाद हो सकती हैं। ऐसे में इस बात को अनदेखा न करते हुए जल्द से जल्द डॉक्टर से मिलना चाहिए। ताकि प्रेग्नेंट महिला व् शिशु को हर दिक्कत से बचे रहने में मदद मिल सके।