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मिसकैरिज रिस्क को कैसे कम करें? जानिए

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मिसकैरिज रिस्क, माँ बनना किसी भी महिला के लिए उसकी जिंदगी का सबसे बेहतरीन अहसास होता है। लेकिन उतना ही दुखद अहसास तब होता है जब महिला बच्चे को जन्म देना चाहती है। और किसी कारण महिला का गर्भपात हो जाता है। बहुत सी महिलाओं को इस सदमे से उभरने में बहुत समय लग जाता है। और ऐसा भी जरुरी नहीं होता है की हर महिला का गर्भपात होने का एक ही कारण हो। बल्कि मिसकैरिज होने के भी कई कारण हो सकते हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की मिसकैरिज होने के क्या कारण होते हैं? और किस तरह से महिला मिसकैरिज के रिस्क को प्रेगनेंसी के दौरान कम कर सकती है।

मिसकैरिज क्या होता है?

जब गर्भ में 20 हफ्ते पूरे होने से पहले ही गर्भ में शिशु ख़त्म हो जाए। तो उसे गर्भपात कहते हैं। कुछ महिलाओं को गर्भपात अपने आप ही हो जाता है। तो कुछ महिलाएं जिनका अनचाहा गर्भ होता है वो गर्भपात करवा देती है।

मिसकैरिज होने के कारण

  • बॉडी में हार्मोनल अंसतुलन होना।
  • महिला का मैसक रूप से बहुत अधिक परेशान रहना।
  • शारीरिक रूप से महिला का बहुत कमजोर होना।
  • गर्भाशय से जुडी कोई समस्या होना।
  • शुगर, थायरॉयड जैसी समस्या से महिला ग्रसित होना।
  • इम्युनिटी कमजोर होना।
  • महिला को किस तरह का गर्भ से जुड़ा संक्रमण होने के कारण ऐसा हो सकता है।
  • बहुत अधिक धूम्रपान, कैफीन, नशीले पदार्थों का सेवन करने के कारण।
  • महिला द्वारा बरती गई लापरवाही भी गर्भपात का कारण हो सकती है।
  • बढ़ती उम्र में गर्भधारण करने से भी मिसकैरिज होने के चांस अधिक होते हैं।

गर्भपात के लक्षण

  • महिला को पीरियड्स की तरफ ब्लीडिंग शुरू हो जाती है।
  • पेट या पीठ में असहनीय दर्द शुरू हो जाता है।
  • पेट के निचले हिस्से में ऐंठन का अधिक महसूस होना भी गर्भपात का लक्षण होता है।

मिसकैरिज रिस्क से बचने के उपाय

यदि आप गर्भधारण करना चाहती हैं और चाहती है की आपकी प्रेगनेंसी में किसी भी तरह की समस्या न आए। और मिसकैरिज जैसी परेशानी भी न हो। तो इस समस्या से बचाव के लिए महिला को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की मिसकैरिज से बचने के लिए महिला को क्या क्या करना चाहिए।

मिसकैरिज रिस्क को कम करने के लिए जांच करवाएं

  • सबसे पहले महिला को अपने शरीर की अच्छे से जांच करवानी चाहिए।
  • जैसे की कोई शारीरिक बिमारी तो नहीं है, गर्भाशय से जुडी कोई समस्या तो नहीं है, किसी तरह का संक्रमण तो नहीं है, आदि।
  • यदि इनमे से कोई समस्या है तो उसका इलाज करवाए और उसके बाद प्रेगनेंसी का फैसला लें।
  • ताकि गर्भपात जैसी परेशानी से बचाव होने में मदद मिल सके।

लापरवाही से बचे

  • यदि आपके पीरियड मिस हो गए हैं और प्रेगनेंसी की जाँच करवाने पर परिणाम पॉजिटिव आता है।
  • तो जितना हो सके आपको भरपूर आराम करना चाहिए।
  • किसी भी तरह की लापरवाही से बचना चाहिए।
  • क्योंकि महिला द्वारा बरती गई लापरवाही जैसे की भारी सामान उठाना, यात्रा करना, भागादौड़ी अधिक करना, खाने में लापरवाही, आदि गर्भपात का कारण हो सकती है।

फिट रहें और उम्र का ध्यान रखें

  • वजन में कमी और अधिक उम्र में गर्भधारण यह दोनों कारण मिसकैरिज का कारण हो सकते हैं।
  • ऐसे में यदि आपका गर्भधारण करना चाहते हैं तो वजन को सही करने के साथ सही उम्र में माँ बनने का फैसला लेना चाहिए।

मिसकैरिज रिस्क को कम करने के लिए न लें तनाव

  • केवल शारीरिक स्वस्थता ही माँ बनने के लिए काफी नहीं है।
  • बल्कि माँ बनने के लिए महिला को मानसिक रूप से भी स्वस्थ होना चाहिए।
  • क्योंकि महिला यदि तनाव लेती है, हमेशा छोटी छोटी बातों को लेकर परेशान हो जाती है।
  • तो महिला द्वारा ऐसी हरकतें गर्भ पर नकारात्मक असर डालती है।
  • ऐसे में यदि आप चाहती है की आपको मिसकैरिज जैसी समस्या न हो तो इससे बचाव के लिए आपको तनाव लेने से बचना चाहिए।

प्राइवेट पार्ट की सफाई

  • कुछ महिलाओं के गर्भपात का कारण प्राइवेट पार्ट में संक्रमण का होना भी हो सकता है।
  • ऐसे में यदि आप चाहती है की आपको मिसकैरिज जैसी समस्या न हो तो प्रेगनेंसी के दौरान प्राइवेट पार्ट की साफ़ सफाई का ध्यान रखें।

मिसकैरिज रिस्क को कम करने रखें नशे से दूरी

  • यदि कोई महिला किसी भी तरह के नशे का सेवन करती है तो इसके कारण भी महिला को गर्भपात जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
  • ऐसे में मिसकैरिज से बचाव के लिए जरुरी होता है की महिला किसी भी तरह के नशे का सेवन नहीं करें।

थोड़ा रुकें

  • यदि आपका पहले भी गर्भपात हो चूका है तो दोबारा गर्भधारण करने के लिए थोड़ा इंतज़ार करना चाहिए।
  • क्योंकि बहुत जल्दी जल्दी गर्भधारण करने के कारण भी मिसकैरिज का रिस्क बढ़ जाता है।

तो यह हैं मिसकैरिज के कारण व् उनसे बचने के कुछ आसान तरीके। और यदि प्रेग्नेंट महिला पूरी केयर के साथ प्रेगनेंसी के दौरान अपना ध्यान रखती है। हर छोटी से छोटी बात में पूरी सतर्कता बरतती है। तो प्रेग्नेंट महिला को इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

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