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गर्भावस्था में नींद नहीं आना कितना खतरनाक हो सकता है जानिये

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गर्भावस्था में जितनी आपकी ख़ुशी बढ़ती है उतना ही आपका स्ट्रेस लेवल भी बढ़ता जाता है। इस समय में आप बहुत से हार्मोनल और शारीरिक बदलावों से गुजरते है। इसी कारण गर्भवती महिला की पूरी रूटीन भी बदल जाती है। एक रिसर्च के अनुसार 70 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं को नींद से जुडी समस्याएँ होने लगती है।

प्रेगनेंसी में दौरान आप जितनी नींद लेते है वह सिर्फ आपको और आपके बच्चे को ही इफ़ेक्ट नहीं करती बल्कि आपके डिलीवरी और लेबर को भी इम्पैक्ट करती है। गर्भावस्था में नींद की कमी डिलीवरी के समय बहुत से कम्प्लीकेशन लाती है। नींद के कमी के कारण गर्भवती महिला का ब्लड प्रेशर और किडनी पर असर पड़ता है जिसके कारण समय से पहले डिलीवरी के चान्सेस बढ़ जाते है। इस स्थिति को प्रीक्लैम्प्सिआ के नाम से भी जाना जाता है। जरुरी है के गर्भवती महिला की नींद का खास ख्याल रखें।

जब आप प्रेग्नेंट होते है, तो सबसे पहला लक्षण होता है के आप थके हुए दिखने लगते है। नींद आपकी इसी थकान को दूर करने के काम आती है। आपमें इस बदलाव के लिए आप अपने अंदर बदलते  हार्मोन्स को जिम्मेदार मान सकते है, खासतौर पर वो प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन्स जो गर्भवती होते ही आपके अंदर तेजी से बढ़ने लगते है।  शुरुआत के दिनों में प्रेगनेंसी के कारण आपका ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर दोनों ही कम हो जाते है जिस वजह से आप ज्यादा थकान महसूस करने लगती है। 

जल्दी ही गर्भावस्था के शुरूआती तीन महीने बीतने पर आपकी एनर्जी फिर से लौटने लगेगी। और कुछ समय बाद जब प्रेगनेंसी के आखिरी के तीन महीनो शुरू होने के साथ साथ आपकी थकान फिर से बढ़ने लगेगी। इस समय में शिशु का विकास होने लगता है आपका पेट बाहर की और आ जाता जिससे आपकी पूरी बॉडी में स्ट्रेस सा आने लगता है इसी वजह से आपका तनाव और थकान बढ़ जाता है। यह समय होता है जब आप प्रॉपर नींद नहीं ले पाती। चाहे आपको पहले कभी भी नींद से जुडी समस्या ना हुई हो फिर भी यह समय ऐसा होता है जब नींद आने में समस्या आने ही लगती है।

इन कारणों के आलावा किडनी बहुत मुश्किलों से काम कर रही होती है पानी को फ़िल्टर करने के लिए इसी प्रक्रिया के दौरान यूरिन ज्यादा बनता है। और जैसे की आपके गर्भाशय में शिशु आकर भी बढ़ रहा है तो आपके ब्लैडर पर भी प्रेशर होता है। इसी कारण आपको बार बार बाथरूम जाना पड़ता है। कई बार रात में ज्यादा बाथरूम जाने की जरुरत पड़ती है अगर आपका शिशु रात के समय ही एक्टिव रहता है तो। इसी कारण गर्भवती महिला की राति की नींद पूरी तरीके से खराब हो जाती है।

आपके हार्ट को पहले से ज्यादा तेजी से काम करना पड़ता है। क्योंकि आपके गर्भाशय को ज्यादा ब्लड सप्लाई की जरुरत पड़ती है। इसीलिए गर्भावस्था के दौरान हमारी हार्टबीट भी बढ़ जाती है। इसके आलावा यदि गर्भाशय का आकार ज्यादा बड़ा है तो उसका प्रेशर हमारे लंग्स पर भी आ जाता है जिस वजह से हमे साँस लेने में भी कई बार परेशानी होने लगती है। इस प्रकार और भी कई अन्य कारण होते जिससे गर्भवती महिलाओं की नींद खराब हो जाती है।

नींद हमारे लिए सुविधा नहीं बल्कि यह हमारी सेहत के लिए बहुत ही जरुरी होती है। यह देखा गया है के गर्भवती महिला की अस्वस्थ नींद उसके और शिशु के लिए खतरनाक स्थितियां पैदा कर सकती है जैसे की हाइपरटेंशन, प्रीक्लैम्प्सिआ, गेसटीशनल डायबिटीज, पुलमोनोरी हाइपरटेंशन आदि। तो आप समझ सकते है यह समस्याएँ कितनी चिंताजनक हो सकती है।

यह देखने में आया है के जिन गर्भवती महिलाओं को रात में स्नोरिंग यानि की खर्राटों की समस्या हो, उनमे से 50 प्रतिशत से ज्यादा महिलाओं को प्रीक्लैम्प्सिआ की प्रॉब्लम हो जाती है। नींद में रूकावट के कारण भूर्ण तक सही से ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती जिस वजह से भूर्ण का अच्छे से विकास नहीं हो पाता है। एक अध्य्यन के अनुसार जो महिलाये 6 घंटे से कम की नींद लेती है ज्यादातर केसेस में उन्हें सी सेक्शन डिलीवरी के लिए जाना पड़ता है।

इन सभी कॉम्प्लीकेशन्स से बचने के लिए शुरआत से ही हमे सोने के सहीं आदतों को अपनाना चाहिए। आपको जिस पोजीशन में सोना पसंद, या जो आपके लिए कम्फर्टेबल है उसी पोजीशन को अपनाये। जैसे की राइट साइड में करवट लेकर थोड़ा सा घुटनों को मोड़ कर सोने से सबसे ज्यादा आराम मिलता है। इस पोजीशन में सोने से लार्ज वेन पर प्रेशर भी नहीं पड़ता और हार्ट आसानी से हमारे पैरो और टांगो में ब्लड का सर्कुलेशन कर पाता है।  पर कुछ डॉक्टर लेफ्ट साइड के पोजीशन में सोना ज्यादा एडवाइस करते है। उनका मानना है के लेफ्ट साइड सोने से लिवर पर प्रेशर नहीं पड़ता क्योंकि लिवर हमारे राइट साइड में होता है। कुछ डॉक्टरों का मानना है के लेफ्ट साइड की पोजीशन में सोने से ब्लड का फ्लो भूर्ण, गर्भाशय और किडनी की तरफ अच्छा होता है। इसीलिए सबसे बेहतर यही होता है के आप अपने डॉक्टर से जरूर सलाह लें।

पर किस साइड सोना इस चीज को लेकर ज्यादा टेंशन नहीं लेना है।  ये सिर्फ एक तरीका है जिससे गर्भवती महिला आरामदायक पोजीशन में अच्छी नींद ले सके। और अक्सर जब हम सो रहे होते है तब हमे पता भी नहीं चलता की कब हमने पोजीशन बदल ली है। अगर आपको कमर दर्द है तो कमर की निचे तकिया लगाकर आराम लेने की कोशिश करें।

इन सभी बातों के आलावा अगर आपको नींद की कमी हो रही है तो अपने भोजन में कैफीन की मात्रा को कम कर दे। कैफीन जो के हमे चाय, कॉफ़ी, सोडा, कोल्ड ड्रिंक्स आदि से मिलता है। यह हमारी नींद को कम करता है। रात के समय सिर्फ सलाद, फल और जूस के सहारे न रहकर, अच्छे से भोजन करें। अपने रात के सोने एक समय फिक्स कर लें। इसके आलावा तनाव से दूर रहने के लिए योगा क्लासेस भी ज्वाइन कर सकते है। योग और एक्सरसाइज करने से पहले अपने डॉक्टरों से जरूर सलाह लें।

इन सभी बदलावों के बावजूद भी आप सो नहीं पा रही है तो अपने डॉक्टर को जरूर बताये। ताकि आपका डॉक्टर आपका अच्छे से चेक-अप करें की कहीं कोई ज्यादा परेशानी की बात तो नहीं है। क्योंकि गर्भावस्था में आपके और शिशु के लिए सेहतमंद नींद बहुत ही आवश्यक है।

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