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गर्भ में शिशु की हलचल इन 5 गलतियों की वजह से कम हो जाती है?

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गर्भावस्था के दौरान गर्भ में शिशु का किक मारना महिला के लिए प्रेगनेंसी का सबसे खूबसूरत अनुभव होता है। और जब शुरुआत में शिशु हलचल करना शुरू करता है तो महिला उस वक्त का बेसब्री का इंतज़ार करती है की कब शिशु दोबारा हलचल करेगा। प्रेगनेंसी के अठारह से बाइसवें हफ्ते के बीच में शिशु की हलचल गर्भ में पहली बार महसूस हो सकती है। जो महिलाएं दूसरी बार माँ बन रही होती है वो आसानी से गर्भ में शिशु की हलचल को समझ जाती है।

लेकिन यदि महिला पहली बार माँ बन रही हो तो महिला को शिशु की हलचल को समझने में समय लग सकता है। शुरुआत में शिशु की हलचल महिला को कम महसूस होती है लेकिन जैसे जैसे शिशु का विकास बढ़ता है वैसे वैसे शिशु ज्यादा समय के लिए हलचल करता है। लेकिन गर्भावस्था के दौरान यदि महिला कुछ गलतियां करती है तो इसके कारण गर्भ में शिशु की हलचल में कमी आ सकती है। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम गर्भवती महिला द्वारा की जाने वाली ऐसी गलतियों के बारे में बताने जा रहे हैं।

पोषक तत्वों से भरपूर डाइट नहीं लेने के कारण

प्रेगनेंसी के दौरान यदि गर्भवती महिला पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लेती है तो इससे गर्भवती महिला को स्वस्थ व् फिट रहने में मदद मिलती है। साथ ही गर्भ में शिशु का विकास भी अच्छे से होता है और शिशु का सही हलचल करना इस बात को बताता है की गर्भ में शिशु का विकास अच्छे से हो रहा है व् गर्भ में शिशु स्वस्थ है। लेकिन यदि महिला अपनी डाइट को सही तरीके से नहीं लेती है, पोषक तत्वों से भरपूर डाइट नहीं लेती है तो इसके कारण शिशु के विकास में कमी आती है। और जब शिशु का विकास अच्छे से नहीं होता है और गर्भ में शिशु कमजोर होता है तो महिला को शिशु की हलचल कम महसूस होती है।

संक्रमण के कारण

यदि गर्भवती महिला अपना अच्छे से ध्यान नहीं रखती है और किसी कारण संक्रमण से ग्रसित हो जाती है। तो उस संक्रमण के वायरस शिशु तक भी पहुँच सकते हैं। जिसके कारण शिशु भी गर्भ में बीमार हो सकता है और शिशु के बीमार होने के कारण शिशु के विकास में कमी आती है साथ ही शिशु की हलचल में भी कमी आ सकती है। महिला को संक्रमण होने के कारण महिला का गलत खान पान, साफ़ सफाई का ध्यान न रखना, आदि हो सकते हैं।

पेट पर दबाव डालने के कारण

प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला ऐसा कोई भी काम करती है जिससे महिला के पेट पर दबाव पड़ता है जैसे की उल्टा होकर सोती है, पेट से सटकर काम करती है, आदि। तो इसके कारण गर्भ में शिशु असहज महसूस कर सकता है जिसके कारण शिशु की हलचल या तो बहुत ज्यादा होने लगती है या फिर शिशु की हलचल कम हो जाती है।

नेगेटिव सोचने के कारण

गर्भावस्था के दौरान बच्चे का विकास पूरी तरह से माँ पर ही निर्भर करता है यह तो आप सभी जानते हैं। ऐसे में यदि गर्भवती महिला खुश रहती है तो गर्भ में शिशु भी एक्टिव रहता है लेकिन यदि महिला ही नेगेटिव सोचती रहती है और उदास रहती है साथ ही तनाव का शिकार हो जाती है। तो इसकी वजह से शिशु भी गर्भ में शिशु भी उदास रहता है साथ ही इसके कारण शिशु का शारीरिक और मानसिक विकास भी बुरी तरह से प्रभावित हो सकता है। और गर्भ में जब शिशु उदास रहता है तो इस कारण शिशु की हलचल में कमी आ सकती है।

गर्भनाल गले में लपेटने के कारण

गर्भ में कुछ शिशु की गर्दन गर्भनाल में लिपट जाती है जिसकी वजह से भी शिशु की हलचल में कमी आ सकती है। बच्चे के गर्भनाल लपेटने का कारण गर्भ में एक से ज्यादा शिशु का होना, शिशु का किसी कारण बहुत हलचल करना, एमनियोटिक फ्लूड की मात्रा अधिक होना, आदि हो सकते हैं।

ध्यान रखें: प्रेगनेंसी के दौरान यदि आपको लम्बे समय तक गर्भ में शिशु की हलचल महसूस नहीं हो तो तुरंत डॉक्टर से मिलें। क्योंकि गर्भ में शिशु के हलचल न हो तो यह इस बात की और इशारा करता है की गर्भ में शिशु ठीक नहीं है। ऐसे में किसी भी बुरे परिणाम से बचने के लिए जल्द से जल्द डॉक्टर से मिलें।

तो यह हैं गर्भ में शिशु की हलचल में कमी होने के कारण, यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी इन बातों का ध्यान रखना चाहिए। और प्रेगनेंसी के दौरान अपना भी अच्छे से ध्यान रखना चाहिए ताकि गर्भ में शिशु को भी स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

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