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डिलीवरी के बाद एक महीने तक क्या-क्या समस्या आती है

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प्रेगनेंसी के दौरान महिला के शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण गर्भवती महिला को बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। और ऐसा भी नहीं है की जैसे ही शिशु का जन्म होता है तो महिला को इन सब परेशानियों से निजात मिल जाता है, बल्कि डिलीवरी के बाद भी एक महीने तक महिला तरह तरह की समस्याओं से परेशान रहती है। और शिशु के जन्म के बाद महिला की जिम्मेवारी बढ़ने के कारण इन सब परेशानियों से राहत पाने में थोड़ा समय लगता है, इसीलिए डिलीवरी के बाद रिकवर होने के लिए महिला को अपनी सेहत का अच्छे से ध्यान रखने, भरपूर आराम करने, पोषक तत्वों का भरपूर सेवन करने की सलाह दी जाती है। ताकि महिला को जल्दी फिट होने और स्वस्थ रहने के साथ शिशु के विकास में भी किसी तरह की कमी न आये, तो आइये अब जानते हैं की डिलीवरी के बाद महिला को कौन कौन सी परेशानियां आ सकती है।

ब्लीडिंग की समस्या

प्रसव के तुरंत बाद गर्भवती महिला को ब्लीडिंग शुरू हो जाती है। और यह ब्लीडिंग मासिक धर्म के मुकाबले काफी अधिक होती है। कई महिलाओं को डिलीवरी के बाद तीन से चार हफ्ते तक ब्लीडिंग की समस्या से परेशान होना पड़ता है। लेकिन यदि आपको ब्लीडिंग यदि बहुत ज्यादा हो और घंटे पैड बदलने की जरुरत पड़े तो इसके लिए एक बार डॉक्टर को जरूर दिखाना चाहिए।

पेट के निचले हिस्से में दर्द

ब्लीडिंग होने के साथ नोर्मल डिलीवरी के दौरान आये टाँके के कारण महिला को पेट के निचले हिस्से में दर्द की समस्या से भी परेशान होना पड़ सकता है। ऐसे में गर्भवती महिला को सिकाई आदि करनी चाहिए जिससे इस समस्या से राहत मिल सके।

संक्रमण का डर

डिलीवरी के बाद महिला को यूरिन इन्फेक्शन, गर्भाशय में संक्रमण आदि की समस्या भी हो सकती है। ऐसा जरुरी नहीं है की हर महिला को यह समस्या हो लेकिन कुछ महिलाओं को यह परेशानी हो सकती है। और इसके कारण यूरिन करते समय दर्द, जलन, गर्भाशय में सूजन, सफ़ेद पानी अधिक आना, तेज बुखार जैसी समस्या हो सकती है। यदि आपको ऐसा कोई भी लक्षण दिखाई दे तो इसके लिए जल्दी से जल्दी डॉक्टर से मिलना चाहिए।

उठने बैठने में परेशानी

शिशु के जन्म के बाद महिला के शरीर में बहुत कमजोरी आ जाती है, और टाँके लगे होने के कारण गर्भवती महिला को उठने बैठने में परेशानी होने लगती है। ऐसे में महिला चाहे तो कमर के लिए बेल्ट का इस्तेमाल कर सकती है इससे महिला को उठने बैठने में आसानी होती है। साथ ही आपको उठने बैठने में बिल्कुल भी तेजी नहीं करनी चाहिए।

ब्रेस्ट से जुडी समस्या

जिस तरह गर्भ में शिशु अपने पोषण के लिए अपनी माँ पर निर्भर करता है उसी तरह जन्म के बाद भी शिशु अपने आहार के लिए महिला पर ही निर्भर करता है। ऐसे में शुरुआत में महिला को स्तनपान करवाने में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही ब्रेस्ट में दर्द व् सूजन की समस्या भी हो सकती है, इसका कारण शिशु के दूध का न पीना, स्तन में दूध भरे रहने के कारण, या शिशु के लिए पर्याप्त दूध का उत्पादन न होना हो सकता है।

कब्ज़ व् बवासीर

डिलीवरी के बाद गर्भाशय का आकार थोड़ा बढ़ा हुआ होता है जिसके कारण गर्भ के नीचे की मांसपेशियों पर दबाव पड़ सकता है। और कब्ज़ व् बवासीर की परेशानी हो सकती है ऐसे में इस समस्या से निजात पाने के लिए महिला को अपने आहार में फाइबर से भरपूर आहार को शामिल करना चाहिए, जिससे इस परेशानी से निजात मिलने में मदद मिल सके।

बाल झड़ना

शिशु के जन्म के बाद महिला को बालों के झड़ने जैसी समस्या का सामना भी करना पड़ सकता है, लेकिन धीरे धीरे यह ठीक होने लग जाती है।

वजन

डिलीवरी के बाद फिट रहने के लिए महिला को आहार में भरपूर मात्रा में पोषक तत्व खासकर घी का भरपूर सेवन करने के लिए कहा जाता है। और इस समय महिला को किसी भी तरह का व्यायाम न करने की सलाह भी दी जाती है ऐसे में इस दौरान महिला को अधिक वजन बढ़ने की समस्या से भी परेशान होना पड़ सकता है।

नींद में कमी

प्रसव के बाद महिला को शिशु के बारे में भी अच्छे से जानकारी नहीं होती है, शिशु कब सोता है कब उठता है, साथ ही शरीर में आई कमजोरी व् दर्द की समस्या होने के कारण महिला को नींद में कमी की समस्या का सामना भी करना पड़ सकता है।

तनाव

कुछ महिलाओं को डिलीवरी के बाद तनाव जैसी समस्या भी हो सकती है, खासकर जो महिलाएं पहली बार माँ बनती है उन्हें यह परेशानी ज्यादा हो सकती है। क्योंकि कई बार महिला शिशु की केयर और अपनी सेहत को लेकर उलझन में पड़ जाती है और उन्हें समझ नहीं आता है की क्या सही है और क्या गलत है। ऐसे में महिला को किसी घर के व्यक्ति को अपने साथ रखना चाहिए ताकि महिला को जब भी जरुरत हो तो उनकी मदद के लिए कोई न कोई मौजूद हो।

तो यह हैं कुछ परेशानियां जो डिलीवरी के बाद महिला को हो सकती है, ऐसे में महिला को घबराना नहीं चाहिए बल्कि इस समय को भी एन्जॉय करना चाहिए। साथ ही अपनी सेहत के प्रति बिल्कुल भी लापरवाही नहीं करनी चाहिए। ताकि महिला को डिलीवरी के बाद जल्दी फिट होने में मदद मिल सके।