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बच्चे की दिल, दिमाग और विकास को प्रभावित कर सकती है ये आदत

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जैसे ही कोई महिला प्रेग्नेंट होती है उसके को घर परिवार वालों की ख़ुशी का पारावार नहीं रहता है। पूरा घर नन्हे मेहमान की प्रतीक्षा में लग जाते है और उसके कई सारे सपने भी बुनने लगते है। इस दौरान अक्सर गर्भवती महिला को ख़ुशी के साथ साथ तनाव भी होने लगता है। इस तनाव के कई कारण हो सकते है जैसे गर्भवती महिला के मानसिक और शारीरिक बदलाव या अन्य।

पर क्या आप जानते है के गर्भावस्था के दौरान आप जो भी करते है उसका सीधा असर आपको होने वाले शिशु पर भी पड़ता है। इसीलिए घर के बुजुर्ग हमे कई प्रकार की सलाह भी देते है की हमे क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए। अक्सर बड़ों की दी हुई सलाह हमारे काम भी आती है। एक शोध के अनुसार यह पता चलता है के गर्भवस्था के दौरान जो महिला ज्यादा तनाव और चिड़चिड़ी हो जाती है उनके शिशु का अच्छे ढंग से मानसिक और शारीरिक विकास नहीं हो पाता है।

आइये जानते है गर्भावस्था के दौरान किन आदतों से शिशु का दिल, दिमाग और विकास प्रभावित हो सकता है।

तनाव और चिड़चिड़ापन

गर्भावस्था के पहले तिमाही में बहुत तेजी से हार्मोनल बदलाव होते है जिस कारण थकान, सर दर्द, उलटी, जी घबराना, मिचली, तनाव और चिड़चिड़ापन बहुत समान्य होती है। ऐसा जरुरी नहीं के हर महिला को इन सभी समस्याओं से गुजरना पड़ता है। कुछ महिलाओं को इनमे से कोई भी परेशानी नहीं होती और कुछ महिलाओं की हालत बहुत ज्यादा खराब हो जाती है।

शुरूआती महीनो की इन मुश्किलों के कारण कुछ गर्भवती महिलायें बहुत ज्यादा स्ट्रेस ले लेती है जिस वजह से सीधा असर उनके शिशु की ग्रोथ पर पड़ता है। ऐसे शिशु पर कई बार इतना मानसिक प्रभाव पड़ता है के उसकी सिखने और समझने की शक्ति अच्छे से विकसित नहीं हो पाती है।

ब्लड प्रेशर

प्रेगनेंसी के दौरान कुछ महिलाओं को हाई ब्लड प्रेशर की प्रॉब्लम भी हो जाती है। ब्लड प्रेशर के ज्यादा बढ़ने से गर्भाशय तक ब्लड सहीं से नहीं पहुंच पाता जिस वजह से शिशु की ग्रोथ अच्छे से नहीं हो पाती। कई बार हाई ब्लड के कारण समय से पहले ही डिलीवरी होने का खतरा भी बढ़ जाता है। इसके अतिरिक्त हाई ब्लड प्रेशर के दौरान नार्मल डिलीवरी भी सम्भव नहीं हो पाती है।

जिन महिलाओं को गर्भ धारण करने से पूर्व ही ब्लड प्रेशर की समस्या होती है उन्हें प्रेगनेंसी के दौरान और भी ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसीलिए अपने डॉक्टर से पहले ही अपनी मेडिकल हिस्ट्री की बारे में बता दे। कुछ गर्भवती महिला को यह समस्या सिर्फ गर्भावस्था के नो महीनो में ही होती है। इसमें से भी शुरूआती तीन महीनो में ब्लड प्रेशर ज्यादा होता है। डिलीवरी के बाद हाई ब्लड प्रेशर अपने आप ही ठीक हो जाता है।

इन्फेक्शन या वायरल

गर्भावस्था के समय हमारी इम्युनिटी यानि की रोग प्रतिरोधक क्षमता पहले से कमजोर हो जाती है। इसीलिए बदलते मौसम का असर सबसे पहले गर्भवती महिला को घेरता है। गर्भवती महिला को खांसी, जुकाम, वायरल या बुखार आदि होना अच्छा नहीं होता है। ज्यादा खांसी होने से शिशु हार्ट बीट पर भी असर पड़ता है। खाँसी के समय सिर्फ हमारी आंते ही नहीं खींचती बल्कि शिशु पर भी जोर पड़ता है। बुखार और जुकाम होने से शिशु का विकास धीमा हो जाता है।

वैसे तो बदलते मौसम में गर्भवती महिला को अच्छे तरीके से अपना ध्यान रखना चाहिए। अच्छे पौष्टिक आहार का सेवन करना चाहिए जिससे आपकी इम्युनिटी स्ट्रांग हो सके। फिर भी अगर आपको कोई फ्लू या इन्फेक्शन हो जाता है तो तुरंत अपने डॉक्टर से मिलना चाहिए। अगर समय पर दवा ना ली जाएँ और फ्लू या बैक्टीरिया का इलाज ना किया जाये तो शिशु को जन्म के समय कोई विकार हो सकता है।

डायबिटीज

कई बार गर्भावस्था के दौरान कुछ महिलाओं को हार्मोनल बदलावों के वजह से हाई ब्लड शुगर हो जाता है। इसके आलावा कई गर्भवती महिला की लापरवाही की कारण भी ऐसा हो जाता है। इस दौरान हमारे टेस्ट बड्स बदल जाते है जिस कारण हमारा अधिक मीठा खाने का मन करता है परन्तु अपने मुँह के स्वाद का ध्यान रखते रखते हम अपनी और शिशु की सेहत का ध्यान रखना भूल जाते है। अधिक मीठे के सेवन से भी ब्लड शुगर बढ़ जाता है।

गर्भावस्था के दौरान कोशिश करे के आप एक संतुलित और पौष्टिक भोजन का सेवन करें। किसी भी चीज की अधिकता इस दौरान आपके और शिशु के लिए हानिकारक हो सकती है। यदि फिर भी आपको डायबिटीज हो गयी है तो तुरंत अपने डॉक्टर से मिले और डॉक्टर द्वारा बताया गया पूर्ण इलाज करवाएं।

प्रेगनेंसी के दौरान इन सभी परेशानियों के लिए एक अच्छी दिनचर्या अपनाये और खुश रहे जिससे आपके शिशु में भी अच्छी आदतों, अच्छे व्यवहार का विकास हो सके। इस समय में खुश रहना बहुत जरुरी है इसीलिए हमेशा खुश रहे तनाव को अपने ऊपर हावी ना होने दे फिर भी अगर तनाव से निजात पाने में असमर्थ है तो योगा और मैडिटेशन अपनाये और अपने डॉक्टर से सलाह लें। बिमारियों से बचने के लिए संतुलित आहार, दूध, दही, फल और हरी सब्जियों सेवन जरूर करें।

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