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IVF की जरुरत कब होती है?

हर महिला के लिए माँ बनना उसकी जिंदगी के बेहतरीन लम्हो में से एक होता है। लेकिन कई बार महिला और पुरुष के बहुत कोशिश करने के बाद भी महिला का गर्भधारण नहीं हो पाता है। ऐसे में महिलाओं द्वारा IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) जो की मेडिकल द्वारा दी गई एक सुविधा है। उसका इस्तेमाल करके महिला का गर्भधारण किया जाता है। जिससे महिला को गर्भधारण करने में मदद मिलती है। अधिकतर लोगो ने इसके बारे में सुना होगा, और आजकल तो बहुत जगह इसके लिए स्पेशल हॉस्पिटल भी खुल गए हैं। लेकिन यह प्रक्रिया क्या होती है इसके बारे में शायद कम लोग ही जानते हैं। तो आइये अब जानते हैं की IVF क्या होता है, और कब IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) की जरुरत होती है।

IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) क्या होता है?

यह एक ऐसी प्रक्रिया होती है जिसमे महिला के अंडाशय से अंडे को बाहर निकाल लेते हैं, और उसी तरह पुरुष का शुक्राणु भी ले लेते हैं। फिर बाहर दोनों की निषेचन प्रक्रिया को करवाकर अंडे को फिर से महिला के गर्भाशय में स्थापित किया जाता है। जिससे महिला का गर्भधारण होने में मदद मिलती है। तो आइये अब जानते हैं की IVF कैसे किया जाता है।

  • सबसे पहले पुरुष के शुक्राणु को लैब में साफ़ किया जाता है।
  • जिसमे सक्रिय यानी अच्छे और असक्रिय यानी बेकार शुक्राणुओं को अलग किया जाता है।
  • उसके बाद इंजेक्शन के ज़रिए महिला के अंडाशय से अंडे को बाहर निकालकर फ्रीज किया जाता है।
  • फिर लैब में पेट्री डिश में अंडे के ऊपर सक्रिय शुक्राणु को रखा जाता है।
  • और उन्हें छोड़ दिया जाता है ताकि प्राकृतिक रूप से निषेचन हो सके।
  • उसके बाद प्रजनन यानी की अंडे और शुक्राणु को साथ रखने पर लगभग तीसरे दिन तक भ्रूण तैयार हो जाता है।
  • फिर कैथिटर जो एक लचकदार नली की तरह दिखता है, उसकी मदद से महिला के गर्भाशय में भ्रूण को प्रत्यारोपित किया जाता है।
  • कुछ केस में तीसरे दिन की जगह पांचवें दिन ऐसा किया जाता है क्योंकि 5 दिन वाले भ्रूण में बेहतर प्रेगनेंसी होने के चांस बढ़ जाते हैं।

कब किया जाता है IVF?

यह प्रक्रिया महिला या पुरुष में प्रजनन क्षमता से जुडी समस्याएँ होने पर किया जाता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की IVF कब किया जाता है।

पुरुष के शुक्राणुओं में कमी होने पर

यदि किसी पुरुष के शुक्राणु की गुणवत्ता अच्छी नहीं है, शुक्राणु की संख्या में कमी है, शुक्राणु का आकार या गति सही नहीं है, तो इसके कारण यह प्रक्रिया की जाती है। क्योंकि पुरुष के शुक्राणुओं से जुडी समस्या होने पर पुरुष के शुक्राणु और महिला के अंडे का मिलन अच्छे से नहीं हो पाता है। जिसके कारण महिला के गर्भधारण में समस्या आ सकती है।

महिला के शुक्राणु में कमी होने पर

महिला की किसी एक परेशानी के कारण नहीं बल्कि ऐसी बहुत परेशानियां होती है जिसके कारण महिला का गर्भधारण नहीं हो पाता है। और महिला को आईवीएफ के माध्यम से गर्भधारण की जरुरत पड़ती है। तो आइये अब जानते हैं की महिला को कब आईवीएफ की जरुरत पड़ती है।

पीरियड्स: यदि महिला को पीरियड्स समय पर नहीं आते हैं, कभी ज्यादा तो कभी कम पीरियड आते हैं, पीरियड्स के दौरान अधिक दर्द व् ब्लीडिंग की समस्या होती है, तो इसके कारण महिला को गर्भधारण में समस्या आ सकती है। साथ ही समय पर पीरियड न आने के लिए सही ओवुलेशन पीरियड का पता नहीं चल पाता है जिसके कारण महिला का गर्भ नहीं ठहर पाता है।

अंडो का विकास: कई बार महिला के अंडाशय में रखे अंडो का विकास अच्छे से नहीं हो पाता है जिसके कारण महिला को गर्भधारण से जुडी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में कई बार महिला को इंजेक्शन लगाकर अंडाशय में रखे अंडो का सही विकास होने में मदद मिलती है।

फैलोपियन ट्यूब में कमी: यदि किसी महिला की फैलोपियन ट्यूब बंद है, या फैलोपियन ट्यूब में कोई और परेशानी है। तो इसके कारण भी महिला का गर्भधारण नहीं हो पाता है।

IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) से शिशु के कोई दिक्कत तो नहीं होती है?

बहुत से लोग ऐसा सोचते हैं की IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) द्वारा जन्म लेने वाले बच्चों के विकास में कुछ कमी रह जाती है, जबकि ऐसा नहीं है। क्योंकि यह बच्चे भी एक सामान्य गर्भधारण की तरह माँ के गर्भाशय में ही विकसित होते हैं। और शिशु का विकास पूरी तरह से महिला पर ही निर्भर करता है। ऐसे में यह सोचना गलत होगा की IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) द्वारा जन्म लेने वाले शिशु में कुछ कमी होती है।

तो यह है IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) से जुडी बातें, तो यदि आप भी गर्भधारण से जुडी परेशानियों का सामना कर रही हैं तो आपको भी एक बार डॉक्टर से जरूर बात करनी चाहिए। हो सकता है की आपको भी आसानी से गर्भधारण में मदद मिल सके।