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प्रेग्नेंट महिला का करवा चौथ का व्रत कैसा होना चाहिए

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साल भर में बहुत से व्रत आते हैं लेकिन महिलाओं के लिए करवा चौथ का व्रत बहुत ही खास होता है। क्योंकि यह व्रत महिलाएं अपने पति की लम्बी उम्र के लिए रखती है। ज्यादातर व्रत में जहां दिन भर में चाय पानी पीना, फलाहार लेना, एक समय भोजन किया जा सकता है। वहीँ करवा चौथ का व्रत निर्जला उपवास होता है इसमें महिला को रात को चाँद देखकर अर्ध्य देने के बाद ही खाने की अनुमति होती है। और बहुत से लोग इस व्रत में थोड़ी सी भी चूक हो जाये तो इसे बहुत ही अशुभ मानते हैं, ऐसे में करवा चौथ का व्रत रखना गर्भवती महिला के लिए थोड़ा परेशानी भरा हो सकता है। क्योंकि गर्भवती महिला अकेली नहीं होती है बल्कि गर्भ में पल रहा शिशु भी महिला पर ही निर्भर करता है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को करवा चौथ का व्रत रखते समय बहुत सी बातों का ध्यान रखना पड़ता है।

प्रेग्नेंट महिला करवा चौथ रखते समय इन टिप्स का ध्यान रखें

यदि आप गर्भवती है, और करवा चौथ का व्रत आने वाला है, और किसी भी कीमत पर आप उस व्रत को करना चाहती है। तो ऐसी बहुत सी बातें हैं जिनका ध्यान रखना गर्भवती महिला के लिए बहुत जरुरी होता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की गर्भवती महिला का करवा चौथ का व्रत कैसा होना चाहिए।

डॉक्टर से ले राय

महिला को व्रत रखने से पहले एक बार डॉक्टर से जरूर राय लेनी चाहिए, क्योंकि महिला की शारीरिक स्थिति के बारे में डॉक्टर से बेहतर कोई नहीं बता सकता है। साथ ही करवा चौथ का व्रत रखते समय किन किन बातों का ध्यान रखना जरुरी है इस बारे में भी डॉक्टर आपको बहुत अच्छे से बता सकते हैं।

सरगी

करवा चौथ व्रत की शुरुआत होती है सरगी से, यह महिला को सुबह सूर्योदय से पहले खानी होती है। ऐसे में गर्भवती महिला को अपनी सरगी में हेल्दी चीजों, तरल चीजों को भरपूर शामिल करना चाहिए। ताकि पूरा दिन निर्जला रहने के बाद भी महिला को कमजोरी का अहसास न हो। और इसके लिए महिला पानी, जूस, दूध, ड्राई फ्रूट, फल, आदि का महिला को सेवन करना चाहिए। इसके अलावा जो दवाई आपको दिन में लेनी होती है और भी सुबह ले लें, ताकि दिनभर में कोई परेशानी न हो।

कपडे

करवा चौथ पर क्या पहनना है इसकी तैयारी महिला बहुत पहले से ही शुरू कर देती है। और हर महिला भारी से भारी सूट, लहंगे, साडी, हैवी ज्वेलरी पहनना पसंद करती है। लेकिन यदि आप गर्भवती है तो आपको व्रत के दिन आपको अपने पहनावे का भी ध्यान रखना चाहिए, ज्यादा भारी व् ज्यादा टाइट कपडे पहनने के कारण आपको दिक्कत हो सकती है ऐसे में आपको आरामदायक कपड़ो का ही चुनाव करना चाहिए। कथा के लिए आप अपने सिर पर भारी दुपट्टा या अपनी शादी की चुनरी रख सकती है। इससे गर्भवती महिला को कपड़ो के कारण करवा चौथ के दिन कोई परेशानी नहीं होगी।

आराम करें

शाम को पांच बजे के बाद ही करवा चौथ की पूजा शुरू होती है, ऐसे में महिला को उससे पहले थोड़ा आराम करना चाहिए। ताकि महिला को रेस्ट मिले और थोड़ा टाइम भी पास हो जाये। इससे महिला को करवा चौथ के दिन प्यासे रहने के बाद भी थोड़ा आराम मिलेगा।

खुद को बिज़ी रखें

यदि आप चाहे तो अपने आप को किसी न किसी काम में बिज़ी रख सकती है, टीवी देख सकती है, संगीत सुन सकती हैं, आदि। ऐसा करने से भी महिला को भूख प्यास को भुलाने में मदद मिलती है और महिला का समय भी पास हो जाता है।

कथा जल्दी सुनें

वैसे तो करवा चौथ में कथा का समय शाम का होता है लेकिन यदि आप गर्भवती है तो आपको जल्दी कथा सुन लेनी चाहिए। इसके लिए आप व्रत कथा किताब या घर के किसी बड़े या पंडतानी को बुलाकर सुन सकती है। क्योंकि करवा चौथ में कथा सुनना जरुरी होता है। ऐसे में आप डेढ़ या दो बजे के आस पास कथा सुनें और कथा सुनने के बाद चाय या फलाहार का सेवन कर लें, ऐसा करने से आपको थोड़ी एनर्जी मिलेगी और फिर थोड़ा आराम करें उसके बाद थोड़ा ही समय रह जायेगा और आपको भूखे रहने के कारण होने वाली परेशानी से निजात पाने में मदद मिलेगी।

पूजा के बाद कुछ आहार लें

जैसे ही आप पूजा करके आती है आप चाहे तो उसके बाद दूध, फलाहार का सेवन कर सकती है। और बहुत सी महिलाएं पूजा के बाद ऐसा करती है, तो गर्भवती महिला को तो ऐसा जरूर करना चाहिए। इससे महिला को एनर्जी मिलती है और कमजोरी व् प्यास से थोड़ा आराम मिलता है, साथ ही शिशु तक भी पोषण पहुँचता है।

व्रत खोलने के बाद

व्रत खोलने के बाद महिला को एक दम से खाना नहीं खाना चाहिए क्योंकि इसके कारण महिला को पेट सम्बन्धी समस्या हो सकती है। बल्कि सबसे पहले महिला को एक या दो गिलास पानी के पीने चाहिए। उसके बाद महिला को दस मिनट बाद खाना खाना चाहिए और खाने में भी अधिक मसालों का सेवन करने की बजाय हल्के आहार का सेवन करना चाहिए ताकि खाने को पचाने में महिला को किसी भी तरह की परेशानी न हो।

तो यह हैं कुछ टिप्स जो गर्भवती महिला को करवा चौथ का व्रत रखते समय ध्यान रखना चाहिए। इसके कारण गर्भवती महिला को व्रत रखने में आसानी होने के साथ परेशानी से बचे रहने में भी मदद मिलती है।