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नौवें महीने में डिलीवरी कब होती है?

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डिलीवरी कब होती है

प्रेगनेंसी का आठवां महीना जैसे ही खत्म होता है वैसे ही गर्भवती महिला सोचने लगती है की डिलीवरी कब होगी। वैसे डॉक्टर द्वारा एक तिथि दी जाती है जिससे अनुमान लगाया जा सकता है की महिला की डिलीवरी उस समय के आस पास ही होगी। लेकिन ऐसा कोई जरुरी नहीं होता है की उसी तारीख को ही महिला शिशु को जन्म दे। क्योंकि यह पूरी तरह से महिला के स्वास्थ्य और गर्भ में शिशु के विकास और पोजीशन पर निर्भर करता है। बहुत से केस ऐसे भी देखने को मिलते हैं जहां नौवें महीने की शुरुआत में ही डिलीवरी हो जाती है तो कुछ महिलाएं नौवा महीना खत्म होने के बाद भी शिशु को जन्म देती है। ऐसे में महिला के लिए यह समझ पाना थोड़ा मुश्किल हो सकता है की डिलीवरी शुरुआत में होगी, महीने के बीच में ही हो जाएगी या आखिर तक महिला को इंतज़ार करना पड़ेगा।

नौवें महीने किस समय होती है डिलीवरी?

डिलीवरी को लेकर यदि बात की जाये तो यदि गर्भ में शिशु स्वस्थ है, शिशु अपनी डिलीवरी की सही पोजीशन में आ चूका है, और बॉडी में प्रसव के लक्षण दिखाई देते हैं तो डिलीवरी किसी भी समय हो सकती है। लेकिन कई बार पूरे नौ महीने खत्म होने के बाद भी महिला को प्रसव पीड़ा का अहसास होता है तो उस समय शिशु का जन्म हो सकता है। पर कुछ केस में गर्भ में शिशु सही पोजीशन में नहीं आ पाता है, गर्भनाल को शिशु लपेट लेता है, महिला को कोई परेशानी होती है, शिशु गर्भ में मल पास कर देता है तो ऐसे केस में प्रेगनेंसी के नौवें महीने की शुरुआत में भी डॉक्टर डिलीवरी के लिए बोल सकते हैं। और ऐसी परिस्थितियां होने पर महिला की डिलीवरी नोर्मल की बजाय सिजेरियन की जाती है ताकि महिला और शिशु दोनों को किसी भी तरह का नुकसान न हो।

साथ ही कुछ केस ऐसे भी देखने को मिलते हैं जहां डॉक्टर की देय तिथि के बाद भी महिला को प्रसव पीड़ा का अहसास नहीं होता है। ऐसे केस में शिशु को गर्भ में कोई परेशानी न हो तो डॉक्टर आर्टिफिशल दर्द लगाकार या सिजेरियन डिलीवरी द्वारा प्रसव की राय देते हैं। ऐसे में नौवें महीने में हर गर्भवती महिला की डिलीवरी एक ही समय हो ऐसा भी कोई जरुरी नहीं होता है क्योंकि हर महिला की शारीरिक परिस्थितियां और लक्षण अलग अलग हो सकते हैं। जिसके कारण किसी महिला को प्रेगनेंसी के पहले हफ्ते तो किसी महिला को आखिरी हफ्ते में भी डिलीवरी हो सकती है। साथ ही ही कई बार तो आठवें महीने में भी कुछ महिलाएं शिशु को जन्म दे देती हैं जिसे प्री मेच्योर डिलीवरी कहा जाता है। इसीलिए डिलीवरी के लिए सही समय का अनुमान लगा पाना थोड़ा मिश्किल हो सकता है क्योंकि हर गर्भवती महिला की स्थिति अलग अलग हो सकती है।

डिलीवरी के लक्षण

डिलीवरी एक ही दम नहीं हो जाती है बल्कि डिलीवरी होने से पहले महिला की बॉडी कुछ संकेत दे सकती है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की डिलीवरी होने से पहले गर्भवती महिला की बॉडी कौन -कौन से संकेत दे सकती है।

  • पेट में नीचे की और अधिक भार महसूस होने के साथ पेट व् सीने में हल्कापन महसूस होना।
  • गर्भाशय में संकुचन अधिक होने के कारण।
  • रुक रुक कर पेट में दर्द का अहसास होना, कभी तेजी से दर्द का अहसास होना तो कभी हल्के फुल्के दर्द का अनुभव होना।
  • एमनियोटिक फ्लूड का बाहर आना, और फ्लूड के साथ हल्के खून के धब्बे महसूस होना।
  • कब्ज़ की समस्या का अधिक होना, या बहुत जल्दी जल्दी यूरिन पास करने की इच्छा होना।
  • मांसपेशियों में खिंचाव का अनुभव होना, पेट और पीठ की मांसपेशियों के खिचाव के साथ दर्द का बढ़ना।
  • गर्भवती महिला की भावनाओं में उतार चढ़ाव होना या शिशु की आने की तैयारी में जुट जाना भी महिला के प्रसव का समय पास आने का लक्षण होता है।

तो यह हैं गर्भवती महिला की डिलीवरी से जुडी कुछ बातें, साथ ही महिला की डिलीवरी जब होने वाली होती है उससे जुड़े कुछ लक्षण। ऐसे में यदि महिला को इनमे से कोई भी लक्षण महसूस हो तो महिला को बिना देरी किये तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए। साथ ही नौवें महीने में हमेशा डॉक्टर के साथ संपर्क में बने रहना चाहिए।