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प्रेग्नेंट महिला 6 से 9 महीने तक न करे यह गलतियां

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प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही

माँ बनना महिला के लिए एक बहुत बड़ी जिम्मेवारी की तरह होता है, और जैसे जैसे प्रेगनेंसी में समय आगे बढ़ता है। वैसे वैसे महिला की परेशानियां भी बढ़ सकती है, क्योंकि शिशु का विकास बढ़ने के कारण महिला के वजन में बढ़ोतरी होती है। और वजन के बढ़ने के कारण प्रेग्नेंट महिला को तरह तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में महिला को डिलीवरी को लेकर भी परेशानी होती रहती है, जैसे की कुछ महिलाएं तो यह सोचती रहती हैं की पता नहीं डिलीवरी के दौरान कितना दर्द होगा, डिलीवरी सिजेरियन होगी, प्रसव के दौरान शिशु को किसी तरह की परेशानी तो नहीं होगी, आदि। ऐसे में महिला के लिए सबसे जरुरी होता है की वो अपना ध्यान अच्छे से रखे ताकि महिला के साथ गर्भ में शिशु को भी स्वस्थ रहने में मदद मिल सके, क्योंकि प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में शिशु का शारीरिक विकास तेजी से होता है। और ऐसे में महिला द्वारा की गई कोई लापरवाही न केवल शिशु के विकास पर बुरा असर डाल सकती है बल्कि इससे डिलीवरी के दौरान भी परेशानी बढ़ सकती है।

प्रेग्नेंट महिला को 6 से 9 महीने तक क्या नहीं करना चाहिए

प्रेग्नेंट महिला जितने अच्छे तरीके से अपनी केयर करती है उतना ही शिशु के विकास को बेहतर तरीके से होने में मदद मिलने के साथ प्रेगनेंसी की शुरुआत से डिलीवरी तक आने वाली परेशानियों को कम करने में मदद मिलती है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में कौन सी गलतियां नहीं करनी चाहिए।

खान पान

प्रेगनेंसी की आखिरी तिमाही में शिशु का शारीरिक विकास तेजी से बढ़ता है ऐसे में बॉडी में भरपूर मात्रा में पोषक तत्वों का होना बहुत जरुरी होता है। लेकिन स्वस्थ व् पौष्टिक आहार का सेवन करने के साथ गर्भवती महिला को कुछ ऐसी चीजें भी हैं जिनका सेवन करने से परहेज करना चाहिए क्योंकि उनके कारण गर्भवती महिला की दिक्कतें बढ़ने के साथ गर्भ में शिशु के विकास से जुडी परेशानियों का सामना भी महिला को करना पड़ सकता है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में गर्भवती महिला को क्या नहीं खाना चाहिए।

  • क्रीम से बने दूध, पनीर आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • जंक फ़ूड, ज्यादा तेल मसाले वाले आहार, के सेवन से भी गर्भवती महिला को परहेज करना चाहिए। क्योंकि यह पाचन क्रिया को बुरी तरह प्रभावित करते हैं जिससे कब्ज़, एसिडिटी आदि की समस्या बढ़ सकती है।
  • कच्चे अंडे का सेवन भी नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे भी महिला को पेट सम्बन्धी समस्या का सामना महिला को करना पड़ सकता है।
  • कच्चे मांस के सेवन से भी गर्भवती महिला को परहेज करना चाहिए।
  • नशीले पदार्थो का सेवन भी गर्भवती महिला को करने से बचना चाहिए।
  • बिना धुले फल, सब्जियां, आदि भी महिला को खाने में प्रयोग नहीं करने चाहिए।
  • नामक व् मीठे का सेवन अधिक मात्रा में करने से बचना चाहिए।

घर के काम

वजन अधिक बढ़ने और पेट के बाहर निकलने के कारण महिला को काम करने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में महिला घर के छोटे छोटे काम तो कर सकती है लेकिन जिन काम को करने में पेट पर दबाव महसूस हो, पेट पर जोर पड़े, ज्यादा देर खड़े रहना पड़े, झुककर काम करना पड़े, आदि काम को करने से बचना चाहिए। जैसे की पोछा लगाना, पैर के भार बैठकर कपडे धोना आदि काम भी महिला को नहीं करने चाहिए। साथ ही घर में यदि कोई पालतू जानवर है तो उसके काम करने से बचना चाहिए और यदि करना भी पड़े तो मास्क और ग्लव्स का इस्तेमाल करके ही काम को करना चाहिए। साथ ही ही घर के काम जैसे की पोछा लगाने आदि में जिन केमिकल का इस्तेमाल होता है उसका इस्तेमाल करने से भी गर्भवती महिला को करने से बचना चाहिए।

व्यायाम

प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में महिला हल्का फुल्का व्यायाम कर सकती है, लेकिन बहुत अधिक व्यायाम करने से महिला को बचना चाहिए। जैसे की महिला को फिट रहने के लिए सैर जरूर करनी चाहिए लेकिन ज्यादा तेजी से नहीं चलना चाहिए। व्यायाम करना चाहिए लेकिन जिस व्यायाम को करने में महिला को परेशानी हो या पेट पर दबाव महसूस हो उस तरीके के व्यायाम को महिला को नहीं करना चाहिए।

घूमना फिरना

भीड़भाड़ वाली जगह, प्रदूषण वाली जगह, ट्रैवेलिंग, अधिक सीढ़ियां चढ़ना आदि से प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में महिला को बचना चाहिए। क्योंकि इस समय गर्भ में शिशु का विकास तेजी से हो रहा होता है ऐसे में ट्रैवेलिंग करने के कारण जहां झटका लगने के कारण पेट में दर्द, समय पूर्व प्रसव का खतरा जैसी समस्या हो सकती है है वहीँ प्रदूषण वाली जगह जाने के कारण या भीड़भाड़ में जाने के कारण इन्फेक्शन का खतरा रहता है।

तनाव

जैसे जैसे डिलीवरी का समय पास आता है वैसे वैसे गर्भवती महिला यह सोचकर परेशान हो सकती है की उसकी डिलीवरी सिजेरियन होगी या नोर्मल, प्रसव के दौरान शिशु पर कोई असर तो नहीं पड़ेगा, आदि। ऐसे में महिला को तनाव से बचना चाहिए क्योंकि यदि महिला इन सब बातों को सोचकर तनाव लेती है, तो इसके कारण परेशानी कम होने की बजाय बढ़ सकती है।

पेट के बल सोना

वजन बढ़ने के कारण महिला को सोने में इस दौरान परेशानी हो सकती है, लेकिन महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की महिला पेट के भार न सोये। क्योंकि इससे गर्भ में शिशु की दिक्कत हो सकती है, साथ ही सीधे होकर भी न सोये क्योंकि इसके कारण पैरों तक ब्लड फ्लो में रूकावट आ सकती है जिसके कारण महिला को पैरों में सूजन व् उठते समय चक्कर आदि की परेशानी भी हो सकती है। ऐसे में सोते समय महिला को करवट लेकर सोना चाहिए और बार बार करवट बदलते रहना चाहिए।

सम्बन्ध

शिशु का वजन बढ़ने के कारण इस दौरान महिला का पेट बाहर की तरफ आ जाता है जिसके कारण यदि महिला और पुरुष सम्बन्ध बनाते हैं तो इससे पेट पर दबाव पड़ने का खतरा रहता है। और ऐसे में गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु को भी परेशानी हो सकती है। इसीलिए इससे बचने के लिए गर्भवती महिला को जितना हो सके प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए साथ ही इसके लिए आप एक बार चाहे तो डॉक्टर से भी राय ले सकते हैं।

डॉक्टर से जांच

प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में गर्भवती महिला को लगातार डॉक्टर के संपर्क में रहना चाहिए। इस दौरान अपना रूटीन चेक अप समय से करवाना चाहिए, साथ ही यदि कोई भी परेशानी हो तो उसे बिल्कुल भी अनदेखा नहीं करना चाहिए। डॉक्टर द्वारा बताई गई सभी दवाइयों का सेवन समय से करना चाहिए इसमें बिल्कुल भी लापरवाही नहीं करनी चाहिए। क्योंकि इस दौरान की गई थोड़ी सी भी लापरवाही शिशु की सेहत पर बुरा असर डाल सकती है।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिनका ध्यान गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में रखना चाहिए, और साथ ही ऊपर दिए गए कामों को करने से बचना चाहिए ताकि गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके। और डिलीवरी के दौरान किसी भी तरह की समस्या से बचने में मदद मिल सके।