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प्रेगनेंसी के दौरान कैसे सोना चाहिए?

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प्रेगनेंसी एक ऐसा समय होता है जहां गर्भवती महिला को छोटी छोटी बातों का अच्छे से ध्यान रखना पड़ता है। क्योंकि कई बार छोटी सी लापरवाही बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है। जैसे की प्रेगनेंसी के दौरान महिला को भरपूर नींद लेनी चाहिए। लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान महिला को बहुत सी शारीरिक समस्या जैसे की उल्टी होना, जी मिचलाना, पेट व कमर में दर्द जैसी समस्या होती है। जिसके कारण महिला को नींद लेने दिक्कत हो सकती है। साथ ही वजन बढ़ने के कारण महिला को सोते समय भी बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

और जो महिलाएं पहली बार माँ बन रही होती है। उन्हें तो हो सकता है की यह भी न पता हो की आखिर प्रेगनेंसी में किस तरह सोना चाहिए और किस तरह सोना गर्भावस्था में नुकसानदायक हो सकता है। क्योंकि गर्भवती महिला यदि गलत तरीके से सोती है तो इसके कारण गर्भ में पल रहे शिशु के विकास में बाधा उत्पन्न हो सकती है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम प्रेगनेंसी के दौरान महिला को एक से नौ महीने तक सोते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए इस बारे में बताने जा रहे हैं।

प्रेगनेंसी में कितनी देर की नींद गर्भवती महिला को लेनी चाहिए?

यह जानने से पहले की प्रेगनेंसी में महिला को किस तरह सोना चाहिए। उससे पहले यह जानना जरुरी होता है की गर्भवती महिला को कितनी नींद प्रेगनेंसी के दैरान लेनी चाहिए। एक स्वस्थ व्यक्ति को एक दिन में कम से कम आठ घंटे की नींद जरूर लेनी चाहिए। लेकिन यदि आप प्रेग्नेंट हैं तो आपको इससे थोड़ा ज्यादा सोना चाहिए। क्योंकि गर्भावस्था के दौरान महिला को बॉडी को रिलैक्स रखने के लिए ज्यादा ऊर्जा की जरुरत होती है। और पर्याप्त नींद प्रेग्नेंट महिला व शिशु को स्वस्थ रखने में मदद करती है।

गर्भावस्था के दौरान कम नींद या गलत तरीके से सोना शिशु को नुकसान पहुंचा सकता है?

जी हाँ, प्रेग्नेंट महिला यदि भरपूर नींद नहीं लेती है तो इससे शिशु तक खून व ऑक्सीजन की मात्रा सही तरीके से नहीं पहुँचती है। जिससे शिशु के विकास में कमी आ सकती है। साथ ही भरपूर नींद न लेने के कारण महिला की स्वास्थ्य सम्बन्धी दिक्कतें बढ़ सकती हैं। जिससे भ्रूण भी प्रभावित हो सकता है।

प्रेगनेंसी में सोने का सही तरीका क्या है?

गर्भावस्था के दौरान महिला को केवल खान पान का ही नहीं बल्कि अपने सोने के तरीके का भी ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि जिस तरह से गलत खान पान शिशु पर बुरा असर डाल सकता है। वैसे ही गलत तरीके से सोना भी प्रेग्नेंट महिला व शिशु पर बुरा असर डाल सकता है। तो आइये अब जानते हैं की गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान तीनों तिमाही में किस तरह से सोना चाहिए ताकि गर्भवती महिला व शिशु को कोई दिक्कत न हो।

गर्भावस्था की पहली तिमाही में किस तरह सोना चाहिए

  • प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में गर्भ में शिशु का वजन कम ही होता है साथ ही पेट का आकार भी नहीं बढा हुआ होता है।
  • ऐसे में प्रेग्नेंट महिला करवट लेकर सोना चाहे तो करवट लेकर सो सकती है या फिर पीठ के बल सोना चाहे तो भी सो सकती है।
  • लेकिन प्रेग्नेंट महिला को जितना हो पेट के बल नहीं सोना चाहिए।
  • क्योंकि इससे गर्भस्थ शिशु को दिक्कत हो सकती है।
  • साथ ही पीठ के बल भी ज्यादा देर सोने से अच्छा है की थोड़ी थोड़ी देर बाद अपनी पोजीशन को बदलते रहना चाहिए।

प्रेगनेंसी के दौरान दूसरी तिमाही में किस तरह सोना चाहिए

  • दूसरी तिमाही तक आते आते महिला का पेट थोड़ा बाहर निकल आता है साथ ही शिशु का वजन भी बढ़ जाता है।
  • ऐसे में महिला को पेट के बल तो बिल्कुल नहीं सोना चाहिए साथ ही पीठ के बल सोने से भी बचना चाहिए।
  • क्योंकि पीठ के बल सोने से प्रेग्नेंट महिला को गर्भाशय का भार पीठ की मांसपेशियों व रीढ़ की हड्डी पर पड़ सकता है।
  • जिसके कारण बॉडी में ब्लड फ्लो का अच्छे से नहीं होना, मांसपेशियों में सूजन, पीठ में दर्द जैसी समस्या प्रेग्नेंट महिला को हो सकती है।
  • ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को करवट लेकर सोना चाहिए और बाईं तरफ करवट लेकर सोना प्रेग्नेंट महिला के सोने के लिए सबसे सही पोजीशन होती है।

प्रेगनेंसी के दौरान तीसरी तिमाही में प्रेग्नेंट महिला को किस तरह सोना चाहिए

  • गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में महिला का वजन तेजी से बढ़ता है क्योंकि गर्भ में शिशु का विकास भी पहले की अपेक्षा तेजी से होता है।
  • ऐसे में न तो महिला को पीठ के बल सोना चाहिए और न ही दाईं और करवट लेकर ज्यादा देर सोना चाहिए।
  • क्योंकि इससे शिशु तक ऑक्सीजन व ब्लड का प्रवाह अच्छे से नहीं हो पाता है।
  • साथ ही प्रेग्नेंट महिला को इस समय जितना हो बाईं और करवट लेकर ही सोना चाहिए।
  • क्योंकि इससे न केवल प्रेग्नेंट महिला को बेहतर नींद लेने में मदद मिलती है बल्कि शिशु को भी किसी तरह की दिक्कत नहीं होती है।

प्रेगनेंसी में कम नींद लेने के नुकसान

  • महिला को थकावट, कमजोरी व अन्य स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या होने का खतरा रहता है।
  • तनाव जैसी समस्या से प्रेग्नेंट महिला को परेशान होना पड़ सकता है।
  • सिजेरियन डिलीवरी होने के चांस बढ़ जाते हैं।
  • प्रेग्नेंट महिला के इम्यून सिस्टम पर बुरा असर पड़ता है।
  • महिला को स्किन सम्बन्धी समस्या हो सकती है।
  • जन्म के समय शिशु के वजन में कमी जैसी परेशानी हो सकती है।

तो यह है प्रेगनेंसी के दौरान सोने से जुड़े कुछ खास टिप्स, जिनका गर्भवती महिला को जरूर ध्यान रखना चाहिए। ताकि प्रेग्नेंट महिला व शिशु को होने वाली हर दिक्कत से बचाव करने में मदद मिल सके।

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