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प्रेगनेंसी के शुरूआती दिनों में क्या क्या समस्या आती है?

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प्रेगनेंसी के शुरूआती दिनों में क्या क्या समस्या आती है?:-

प्रेगनेंसी का समय किसी भी महिला के लिए उसकी जिंदगी का अगला पड़ाव होता है, और साथ ही नए अनुभवों से भरा हुआ होता है, प्रेगनेंसी की शुरुआत होते ही महिलाओ में बहुत से बदलाव आते है, जैसे की उनके स्वाभाव में परिवर्तन आता है, कई बार उन्हें ज्यादा बात करने वाले लोगो से छिड़ होती है, और ये भी कई बार समझ नहीं आता है, की क्या बात अच्छी लगती है, और कब कौन सी बात बुरी लग जाती है, इसके अलावा महिला को शरीरिक रूप से भी बहुत समस्या आने लगती है, जिसके कारण उन्हें कई बार बहुत परेशानी होने लगती है।

प्रेगनेंसी के समय में महिला के शरीर में थकान की समस्या उत्त्पन्न हो जाती है, क्योंकि महिला के शरीर में पहले से ज्यादा दबाव पड़ने लगता है, खून बनने की प्रक्रिया तेजी से होती है, ताकि बच्चे को कोई परेशानी न हो, और उसके लिए सभी पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में उसे मिल सकें, बार बार महिला को पेशाब आने की परेशानी होने लगती है, क्योंकि किडनी में भी दुगुना कार्य होता है, कई महिलाओंकी त्वचा में भी बहुत बदलाव आता है जैसे की आँखों के नीचे काले घेरे की समस्या हो जाती है।

खाने पीने का मन नही करता है, जीभ का स्वाद कड़वा हो जाता है, सिर्फ खट्टा ही खाने का दिल करता है, और खान पान के सही न होने के कारण शरीर में कमजोरी आने लगती है, कई महिलाओ को शोर से एलर्जी हो जाती है, तो कई महिलाएं उलटी के कारण परेशान हो जाती हैं, सर दर्द जैसी समस्या प्रेगनेंसी में आम हो जाती है, ऐसी ही कुछ समस्या होती है जो प्रेगनेंसी के समय आती है, इसके अलावा महिला के शुरूआती दिनों में यदि लापरवाही जैसे भारी सामान उठाना, तेजी से सीढिया चढ़ना, या पेट के बल कोई काम करने से गर्भपात का खतरा भी बन रहता है।

ऐसी कोई भी परेशानी न हो ये किसी एक से दो महिलाओ को ही होता है, और वो अपने आप को भाग्यशाली समझ सकती है, परंतु आपको फिर भी इन परेशानियो से घबराना नहीं चाहिए, क्योंकि कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है, जैसे ही वो नवजात शिशु आपकी गोद में आता है, वैसे ही आप अपनी इन परेशानियों को भूल कर अपनी जिंदगी के इस खास लम्हे को खूब खुशियो को मनाती है, तो आइये अब विस्तार से जानते है की गर्भावस्था के शुरूआती दिनों में महिला को क्या क्या समस्या आती है।

प्रेगनेंसी के शुरूआती दिनों में महिला को आने वाले समस्या:-

त्वचा से जुडी समस्या होती है:-

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प्रेगनेंसी के शुरूआती दिनों में महिलाओ की त्वचा में काफी परिवर्तन आता है, क्योंकि प्रेगनेंसी के समय में महिला की त्वचा काफी संवेदनशील होती है, और महिला के शरीर में हो रहें परिवर्तन के कारण महिला की त्वचा सूर्य के प्रकाश को भी बर्दाश्त नहीं कर पाती है, और इन्ही परिवर्तन के कारण त्वचा में बदलाव जैसे महिलाओ की आँखों के नीचे डार्क सर्कल आ जाते है, तो ऐसे में आपको घबराना नहीं चाहिए, बल्कि बच्चे के जन्म के बाद ये समस्या अपने आपही ठीक हो जाती है, यदि आप अपना पूरा ख्याल रखते है।

सपने अधिक आते है:-

गर्भावस्था के शुरूआती दिनों में महिला को बहुत अधिक सपने आते है, ऐसे मे महिला सपने में यदि कुछ भी देखती है तो उसे घबराहट होने लग जाती है, और इस समस्या से बचने के लिए महिला को पहले से भी अधिक आराम की आवश्यकता पड़ती है, ताकि महिला को स्वास्थ्य संबंधी कोई और परेशानी न हो।

मूड बदलने लगता है:-

वैसे तो ये समस्या महिलाओ को पुरे गर्भावस्था में ही रहती है, परंतु शुरुवाती दिनों में महिला के शरीर में होने वाले परिवर्तन के कारण कई बार उसे समझ नहीं आता है की क्या हो रहा है, ऐसा हर महिला के साथ हो ये भी जरुरी नहीं होता है, कई बार महिला का पता ही नहीं चलता है की कब उसे किस बात पर गुस्सा आ जाता है, और कब उसे क्या बात अच्छा लगता है, कई महिलाएं तो चिड़चिड़ी भी हो जाती है, ऐसे में आपको घबराना नहीं चाहिए, क्योंकि समस्या के साथ धीरे धीरे इसमें भी सुधार आ जाता है।

मुँह का स्वाद अजीब हो जाता है:-

गर्भावस्था में महिला को खान पान की बहुत अधिक समस्या होती है, क्योंकि महिला को किसी भी चीज का स्वाद समझ नहीं आता है, और उनका मुँह कड़वा हो जाता है, और कई महिलाओ तो कुछ भी नहीं खाती है, बल्कि उन्हें सिर्फ उन्हें सिर्फ खट्टी चीजो का ही स्वासद समझ में आता है, परंतु महिला को खान पान की बहुत जरुरत होती है, क्योंकि प्रेगनेंसी में आने वाली कमजोरी को दूर करने का सरल उपाय तो खान पान ही होता है।

ब्लीडिंग की समस्या हो जाती है:-

कई बार प्रेगनेंसी के शुरूआती समय में कुछ महिलाओ को ब्लीडिंग होने लगती है, परंतु ये उतनी नहीं होती है, जितनी की मासिक धर्म में होती है, इसीलिए ऐसे में आपको घबराना नहीं चाहिए, बल्कि अपने डॉक्टर को दीखना चाहिए, ताकि ये परेशानी आगे न बढ़ सकें, और महिला को ऐसा कोई काम भी नहीं करना चाहिए शुरूआती दिनों में जिससे उसके पेट पर दबाव पढ़ें, और उसे ऐसी किसी समस्या से गुजरना पढ़ें।

थकान की समस्या होती है:-

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प्रेगनेंसी के शुरूआती समय में महिला को थकान की समस्या होती है, और आखिरी तक होती रहती है, क्योंकि महिला का वजन भी तेजी से बढ़ता है, और साथ ही महिला के शरीर में रक्त की मात्रा भी तेजी से बढ़ने लगती है, ऐसा इसीलिए होता है, की गर्भ में पल रहें शिशु को किसी भी तरह की कोई कमी न हो, बल्कि उसके विकास में जिन जिन पोषक तत्वो की जरुरत होती है, वो उसे रक्त के रास्ते उसमे पुरे किये जा सकें, तो जब आपका शरीर तेजी से कार्य करेगा, तो ऐसे में थकान होना बहुत ही स्वाभाविक होता है।

बार बार पेशाब आने की समस्या हो जाती है:-

गर्भावस्था के शुरूआती समय में महिला को बार बार पेशाब आने की समस्या उत्त्पन्न हो जाती है, क्‍योंकि इस समय में किडनी दोगुना काम करती है। प्रेगनेंसी की इस अवस्‍था में कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन नामक हॉर्मोन शरीर में बनता है, जो की पेल्विक भाग में रक्‍त के प्रवाह को बढ़ाता है। इसीलिए, महिला को कई बार तो हर दूसरे मिनट पेशाब आने लगता है, यदि ये परेशानी आपको पुर समय में रहती हैं तो ऐसे में आप चाहे तो डॉक्टर की राय भी ले सकते है।

सर दर्द रहने लगता है:-

महिला को गर्भावस्था के शुरूआती दिनों में से दर्द की समस्या भी आम होती है, क्योंकि शरीर में रक्त का प्रवाह तेजी से होने के कारण, और साथ ही महिला की के शरीर में होने वाले बहुत से परिवर्तनों को महिला को झेलना पड़ता है, इसी कारण कई बार महिला को बहुत अधिक सर में दर्द होता है, साथ हो कई महिलाओ में होने वाले कमजोरी के कारण उन्हें चक्कर भी आने लगते है, परंतु ये समस्या समय के साथ ठीक हो जाती है, तो इसके लिए ज्यादा घबराना नहीं चाहिए।

उल्टियां होने लगती है:-

कई महिलाओ को ये समस्या प्रेगनेंसी के शुरूआती समय में होती है तो कुछ महिलाएं इस समस्या से पुरे नौ महीने परेशान रहती है, कई बार महिलाओ को पाचन क्रिया में भी दिक्कत होती है, ऐसे में जैसे ही वो कुछ भी खाती है तो उन्हें साथ की सार्थ उलटी आ जाती है, ऐसे में महिला को अपना खान पान नहीं छोड़ना चाहिए, बल्कि कुछ न कुछ खाते रहना चाहिए, क्योंकि यदि आप खाना पीना छोड़ देती है तो इसका सीधा असर आपके बच्चे के विकास पर पड़ता है, इसीलिए खाते रहना चाहिए।

गर्भपात का खतरा होता है:-

प्रेगनेंसी के शुरूआती दिनों में अपना बहुत ज्यादा ख्याल रखना पड़ता है, क्योंकि थोड़ी सी भी असावधानी खतरा साबित हो सकती है, क्योंकि कई महिलाये जो इस दौरान भारी सामान उठाती है, या पेट के बल काम करि है, सेक्स के प्रति असावधानी बरतती है, या तेजी से सीढिया चढ़ती है, ऐसे में गर्भपात का ख़तरा लगातार बना रहता है, इसीलिए यदि आपके साथ ऐसी कोई भी समस्या होती तो आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

ऐसा सभी महिलाओ के साथ हो ऐसा भी जरुरी नहीं होता है, बल्कि ये हर महिला के हॉर्मोन्स में होने वाले परिवर्तन पर निर्भर करता है, क्योंकि हर महिला के जीन्स और हॉर्मोन्स में अलग अलग तरह से बदलाव आता है और गर्भावस्था के समय के शुरूआती दिनों में आने वाले परिवर्तन को बिलकुल भी नज़रअंदाज़ न करते हुए डॉक्टर से नियमित रूप से जाँच करवानी चाहिए, ताकि समय रहते यदि कोई परेशानी बढ़ भी गई हो तो आप उसका इलाज़ कर सकें।

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