पीरियड्स में कम ब्लीडिंग होने के कारण

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आजकल के बदलते लाइफस्टाइल के कारण महिलाओ में पीरियड्स की प्रॉब्लम आम हो गयी है। किसी को हैवी ब्लीडिंग और किसी को कम ब्लीडिंग के प्रॉब्लम सुनने में बहुत ही साधारण लगती है। पर इन दोनों ही चीज़ो की अपनी अपनी अलग वजह हो सकती है।आईये आज बात करते है पीरियड्स में होने वाली कम ब्लीडिंग की। कम ब्लीडिंग होने के के कारण है जैसे की सही समय पर ना खाना, तनाव, किसी गंभीर बीमारी का होना , मीनोपॉज के नजदीक पहुंचना व अन्य। आइये डिटेल में जानते है इन कारणों के बारे में।

१. उम्र

  • पीरियड्स के दौरान कम ब्लीडिंग होने की एक ख़ास वजह है, उम्र।
  • १४ से २८ की उम्र में ब्लीडिंग का फ्लो सही होना चाहिए। शुरुआत में जब पीरियड्स शुरू होते है तो पहले एक और दो साल कम ब्लीडिंग हो सकती , परन्तु लगातार आगे भी कम ब्लीडिंग होती है तो कुछ विशेष समस्या हो सकती है। ऐसे में डॉक्टरों से मिलना सही रहता है।
  • २८ से ३८ साल की उम्र में, पहले की उपेक्षा कम ब्लीडिंग हो सकती है। परन्तु बहुत ज्यादा कम ब्लीडिंग और पेट में दर्द भी रहे तो डॉक्टर से मिल लेंगे जरुरी है।
  • ३८ से ५० की उम्र में मीनोपॉज वाली स्तिथि नजदीक होती है। ऐसे में हार्मोन्स में बदलाव होने लगता है, जिसके कारण भी कम ब्लीडिंग या पीरियड्स में ज्यादा अंतराल आने लगता है। इसी समय को प्री मीनोपॉज भी कहते है।

२. तनाव

  • तनाव से महिलाओ के होर्मोनेस पर अत्याधिक असर पड़ता है। जिससे पूरी पीरियड्स साइकिल असंतुलित हो जाती है ऐसे में पीरियड्स के दौरान कम ब्लीडिंग ही होती है।
  • यदि आप ८-९ घंटे की नींद भी पूरी नहीं लेते तो आपके शरीर में कोर्टिसोल ज्यादा मात्रा में बढ़ने लगता है ये एक स्ट्रेस हॉर्मोन है, जो की आपकी पीरियड साइकिल को बिगाड़ देता है।
  • हालाँकि ऐसा देखा गया है, जैसे ही तनाव का असर कम होता है , वैसे ही पीरियड्स नार्मल फ्लो में आ जाते है।

३. अनियमित खानपान

  • यदि महिलाये समय पर खाती पीती नहीं, जरुरी पोषक तत्व को अपने भोजन में शामिल नहीं करने से भी कम ब्लीडिंग होती है।
  • जरुरी है की हरी सब्जिया , फल, दूध , दही, अंडे , सूखे मेवा को भी अपने भोजन में शामिल करे।

४. हेल्थ प्रोब्लेम्स

  • अगर आपको थाइरोइड बीमारी है, जो की महिलाओ को आमतोर पर होती है, तो ऐसे में भी पीरियड्स में कम ब्लीडिंग होती है।
  • यदि किसी महिला को पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम है, आम भाषा में अंडाशय में ग्रंथियों का बनना , ऐसी स्तिथि में भी पीरियड्स खुल कर नहीं होते।
  • सर्वाइकल स्टेनोसिस जैसी हेल्थ प्रॉब्लम में भी ब्लीडिंग कम ही होती है
  • खून की कमी के कारण भी ब्लीडिंग खुल कर नहीं होती। जो लोग एनिमिक होते है उन्हें ये प्रॉब्लम अक्सर रहती है।

५. बर्थ कण्ट्रोल पिल्स

जो महिलाये बर्थ कण्ट्रोल पिल्स का इस्तेमाल करती है , उनके शरीर में अंडे पर्याप्त मात्रा में नहीं बनते, ऐसे में भी ब्लीडिंग कम ही होती है।

६. स्तनपान करवाना

जो महिलाये बच्चो को दूध पिलाती है , उनके शरीर में भी अंडे सृजन कम होने लगता है। तो ऐसे में भी ब्लीडिंग कम होती है।