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हर एक गर्भवती महिला को आती हैं यह 10 मुसीबतें

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प्रेगनेंसी में आने वाली परेशानियां

गर्भावस्था किसी भी महिला के लिए उसकी जिंदगी का सबसे प्यारा और खास अहसास है, लेकिन इस दौरान गर्भवती महिला को बहुत सी जटिलताओं का सामना भी करना पड़ सकता है। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान लगातार बॉडी में हार्मोनल बदलाव होते रहते हैं, शुरुआत में यह बदलाव बहुत तेजी से होते है, इसीलिए प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने बहुत ही सावधानी से रहने की सलाह दी जाती है। क्योंकि हार्मोनल बदलाव के कारण महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन ऐसा भी कोई जरुरी नहीं है की हर महिला को प्रेगनेंसी के दौरान परेशानी का अनुभव हो, या सभी गर्भवती महिलाओं को एक ही तरह की परेशानी हो। प्रेगनेंसी के दौरान होने वाले बदलाव या परेशानियां पूरी तरह से गर्भवती महिला के शारीरिक सरंचना और महिला के शरीर में होने वाले हार्मोनल चेंज पर निर्भर करते हैं।

प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली मुसीबतें

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान तरह तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है, और इन परेशानियों का होना प्रेगनेंसी में आम बात होती है। इन्हे लेकर गर्भवती महिला को घबराना नहीं चाहिए बल्कि इनसे निजात पाने के लिए अपने स्वास्थ्य का बेहतर तरीके से ध्यान रखना चाहिए। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान महिला को कौन सी मुसीबतों क सामना करना पड़ सकता है।

मॉर्निंग सिकनेस

ज्यादातर महिलाएं प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में मॉर्निंग सिकनेस की समस्या से परेशान हो सकती है, जिसका कारण बॉडी में एस्ट्रोजन हॉर्मोन के स्तर का बढ़ना हो सकता है। और इस समय उल्टी, चक्कर, जी मिचलाना, सिर में दर्द आदि का अनुभव होना आम बात होती है।

पेट से जुडी समस्या

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को पेट से सम्बंधित समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है, जैसे की बहुत सी गर्भवती महिलाएं कब्ज़ की समस्या से परेशान रहती हैं। साथ ही एसिडिटी, पाचन क्रिया का धीमा पड़ना, पेट में ऐंठन आदि भी हो सकती है। और इनके कारण महिला को हार्ट बर्न यानी की सीने में जलन और खट्टी डकार जैसी परेशानी का अनुभव भी हो सकता है।

थकान व् कमजोरी

पहली तिमाही में जहां बॉडी में तेजी से होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण वही तीसरी तिमाही में वजन के अधिक बढ़ने के कारण महिला को थकान व् कमजोरी का अनुभव अधिक हो सकता है। ऐसे में महिला को चाहिए की वो अपनी बॉडी को पूरा आराम दें, क्योंकि इस दौरान बॉडी में एस्ट्रोजन हॉर्मोन का स्तर बढ़ने के कारण थकान व् कमजोरी का अनुभव अधिक महसूस हो सकता है।

पेट व् पीठ में दर्द

हल्का फुल्का पेट या पेट के निचले हिस्से में प्रेग्नेंट महिला को दर्द का अनुभव होता रहता है। और इसका कारण गर्भ में शिशु का वजन बढ़ना और गर्भाशय के आकार के बढ़ने के कारण मांसपेशियों में होने वाले खिंचाव के कारण हो सकता है। इसके अलावा कमर व् पीठ में दर्द के कारण भी प्रेग्नेंट महिला बहुत परेशान रहती है, और आखिरी तिमाही में तो पीठ के दर्द का अनुभव बढ़ सकता है, क्योंकि शिशु का आकार बढ़ने के कारण वजन बढ़ता है जिसके कारण पीठ की मांसपेशियों में खिंचाव हो सकता है जिसके कारण यह परेशानी हो सकती है। और यदि प्रेग्नेंट महिला को पहले से ही यह परेशानी रहती है तो प्रेगनेंसी के दौरान यह समस्या बढ़ सकती है।

मूड स्विंग्स

बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव का असर गर्भवती महिला पर केवल शारीरिक रूप से ही नहीं पड़ता है। बल्कि इसके कारण महिला के व्यवहार में भी बदलाव आ सकता है, जैसे की महिला के मूड स्विंग्स होने लगते हैं, जैसे की कभी महिला खुश होने लगती है तो कभी अधिक गुस्सा करने के साथ चिड़चिड़ापन भी महसूस कर सकती है। ऐसे में घबराने के बात नहीं होती है डिलीवरी के बाद यह सब परेशानियां ठीक होने लगती है।

बार बार यूरिन पास करने की समस्या

प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में बॉडी में हार्मोनल बदलाव बहुत तेजी से होते हैं जिसके कारण किडनी का काम बढ़ जाता है और वह अधिक सक्रिय हो जाती है, जिसके कारण गर्भवती महिला को बार बार यूरिन पास करने की इच्छा हो सकती है। और प्रेगनेंसी की आखिरी तिमाही में भी गर्भवती महिला को इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि पेट का आकार बढ़ने के कारण मूत्राशय पर दबाव पड़ने लगता है, जिसके कारण बार बार यूरिन पास करने की इच्छा हो सकती है।

सूजन की समस्या

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी की आखिरी तिमाही में हाथों, पैरों, में सूजन की समस्या का सामना भी करना पड़ सकता है। इसका कारण महीअल के पेट का आकार बढ़ने के कारण पैरों तक ब्लड फ्लो का सही न होना हो सकता है, साथ ही यदि महिला पैरों के भार बहुत देर तक खड़ी रहती है तो इसके कारण भी गर्भवती महिला को यह परेशानी हो सकती है। प्रेगनेंसी के दौरान सूजन आना काफी आम बात है लेकिन यदि सूजन बढ़ने लगे यानी की हाथ, पैर, मुँह आदि पर होने लगे और साथ ही दर्द भी अधिक हो तो इसे अनदेखा न करते हुए डॉक्टर से चेक करवाना चाहिए।

उल्टी की समस्या

उल्टी आना गर्भावस्था के महत्वपूर्ण लक्षणों में से एक है, और ज्यादातर गर्भवती महिलाओं को प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। जबकि कुछ महिलाएं प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने तक इस समस्या से परेशान रह सकती है। उल्टी की समस्या अधिक होने के कारण गर्भवती महिला को कमजोरी का अनुभव अधिक हो सकता है ऐसे में महिला को अपने खान पान का बेहतर तरीके से ध्यान रखें चाहिए।

गंध से एलर्जी

गर्भवती महिला के शरीर में होने हार्मोनल बदलाव के कारण कई महिलाओं को खाने पीने या अन्य चीजों की गंध से भी एलर्जी हो सकती है। और यदि महिला को खाने पीने की चीजों की गंध से एलर्जी होती है तो इसके कारण खाने का मन न करना, उल्टी आ जाना, भूख में कमी आदि की समस्या भी हो सकती है।

नींद में कमी

शरीर में कमजोरी आने के कारण, शारीरिक परेशानियों के कारण, वजन बढ़ने की वजह से, तनाव होने के कारण कई बार गर्भवती महिला को अनिंद्रा जैसी परेशानी भी हो सकती है। लेकिन गर्भवती महिला को अपनी नींद का अच्छे से ख्याल रखना चाहिए क्योंकि नींद में कमी गर्भवती महिला की शारीरिक परेशानियों को बढ़ा सकता है।

तो यह हैं कुछ परेशानियां जिनका सामना गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान करना पड़ सकता है। ऐसे में यदि कभी प्रेग्नेंट महिला को परेशानी का अधिक अनुभव हो या फिर महिला को असहज महसूस हो तो इसे अनदेखा न करते हुए तुरंत डॉक्टर से राय लेनी चाहिए, और घर में किसी भी तरह की दवाई का सेवन करने से बचना चाहिए।