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इन वजहों से गर्भ तीन महीनों में ही गिर जाता है

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तीन महीनो के अंदर अचानक से ही गर्भ के गिर जाने को गर्भपात कहा जाता है। एक अध्ययन के अनुसार कुल गर्भवती महिलाओं में से 10 से 25 प्रतिशत महिलाओं का गर्भपात हो जाता है। लेकिन असल में गर्भपात के सहीं नंबर बहुत ज्यादा है। बहुत सी महिलाओं का गर्भ इतनी जल्द गिर जाता है के उन्हें पता भी नहीं होता के वह गर्भवती है। गर्भपात एक साधारण समस्या पर फिर भी बहुत मुश्किल अनुभव होता है।

गर्भवस्था के समय हमारा शरीर ही शिशु तक भोजन, पानी और जरुरी पोषक तत्व पहुंचता है। शुरुआती तीन महीनों में गर्भपात का सबसे बड़ा कारण होता है भ्रूण का असाधारण विकास। गर्भपात के होने के और भी बहुत से अलग अलग कारण होते है। आइये जानते है आज उन सभी कारणों के बारे में जिनकी वजह से गर्भ तीन महीनों के अंदर ही गिर जाता है।

जेनेटिक इशू

ज्यादातर गर्भपात क्रोमोसम प्रोब्लेम्स की वजह से होते है। यह जेनेटिक समस्या किसी भी समय भ्रूण के सेल्स बनते समय हो सकती है। इस परेशानी के कारण भ्रूण खराब हो जाता है या उसका विकास बीच में ही रुक जाता है।

लम्बे समय से खराब सेहत

यदि पिछले कुछ समय से गर्भवती महिला की सेहत अच्छी नहीं चल रही हों तो भी शुरूआती तीन महीनों के अंदर अंदर गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है। अगर गर्भवती महिला को बहुत पहले से ही हाई ब्लड शुगर, थाइरोइड, हाइपरटेंशन, हार्ट और किडनी से संबंधित बीमारियां है तो ऐसे में उस महिला को गर्भपात का खतरा बहुत बढ़ जाता है।

गर्भपात से बचने के लिए जरुरी है के गर्भ धारण करने से पूर्व ही आप अपने डॉक्टर से मिले और अपनी मेडिकल हिस्ट्री के बारे में बताये। शुगर, हाइपरटेंशन जैसी बिमारियों को कण्ट्रोल करने के बाद ही बेबी के लिए प्लान करें।

इन्फेक्शन

गर्भावस्था के शुरूआती तीन महीनें बहुत ही महत्वपूर्ण होते है इस बीच गर्भवती महिला को बहुत से हार्मोनल बदलावों से गुजरना पड़ता है। इन तीन महीनो के दौरान महिला की इम्युनिटी पावर यानि की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कमजोर हो जाती है। अगर इसी समय में महिला को कोई इन्फेक्शन हो जाए जैसे की मलेरिया, चेचक, एड्स आदि तो गर्भपात का खतरा बहुत अधिक बढ़ जाता है।

इसीलिए गर्भवस्था के इस पहले भाग में जितना हो सके अपना अच्छे से खास ख्याल रखें। इस समय में कुछ भी समस्या होने पर आपने डॉक्टर से बिना देर किये सलाह ले। अगर आप इन्फेक्शन के खतरे को टाल दें और गर्भपात का खतरा भी टल जाता है।

कमजोर गर्भाशय

तीसरे महीने में होने वाले ज्यादातर गर्भपात कमजोर गर्भाशय के कारण होते है। गर्भाशय या उसकी मसल्स इतनी कमजोर होती है के भ्रूण को पकड़ नहीं पाती है। गर्भाशय या इसकी मसल्स की कमजोरी किसी पुरानी चोट या करवाए गए ऑपरेशन के कारण हो सकती है।

गर्भाशय के कमजोर होने की वजह से कई बार गर्भाशय का द्वार बहुत पहले यानि के गर्भावस्था के तीसरे महीने में खुल जाता जिस कारण गर्भपात हो जाता है।

आयु

महिला के अधिक आयु होने से भी गर्भपात का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है। माना जाता के 35 और 40 की उम्र की महिला में गर्भपात का खतरा कई गुना ज्यादा बढ़ जाता है, छोटी उम्र की महिला की तुलना में।

कैफीन

डॉक्टरों के अनुसार जो गर्भवती महिलाएं कैफीन का ज्यादा सेवन करती है, उन्हें भी शुरूआती तीन महीनों में गर्भपात का खतरा बना रहता है। कैफीन एक ऐसा नशीला प्रदार्थ होता है जो के चाय, कॉफ़ी, कोल्ड ड्रिंक्स और चॉकलेट में भी पाया जाता है। इसीलिए जरुरी है के गर्भधारण करते है इन प्रदार्थों का सेवन त्याग दिया जाए।

बासी या खमीरा भोजन

जो गर्भवती महिला बहुत अधिक बासी भोजन या खमीर हुए भोजन का इस्तेमाल करती है। उनके गर्भ गिरने का खतरा भी बना रहता है। बासी भोजन में विषैले और हानिकारक बैक्टीरिया पैदा होते है जो आपके पेट में जाकर और विषैले तत्वों का निर्माण करते है।

इसके अतरिक्त कच्चे या आधे पक्के हुए भोजन का इस्तेमाल भी नहीं करना चाहिए, जैसे की कच्चे अंडे। इस तरह के भोजन से भी गर्भपात का खतरा बढ़ता है।

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