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गर्भ में पल रहे बच्चे से ऐसे बनाएं भावनात्मक सम्बन्ध

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गर्भावस्था का समय किसी भी महिला के जीवन के सबसे सुनहरे पलो में से एक होता है, और ये उसकी जिंदगी का एक नया अनुभव भी होता है, जैसे ही महिला को ये पता चलता है की वो माँ बनने वाली है, वैसे ही वो अपने शिशु के लिए सपने संजोने लगती है, और माँ को बच्चे से प्रेम होने लगता है, तीन से चार महीने के बाद बच्चा भी अपनी हरकते करनी शुरू कर देता है, ऐसे में माँ को चाहिए कि वो अपने अजन्मे बच्चे से सम्बन्ध बनाएं, ताकि वो आपको महसूस कर सकें, गर्भ में पल रहा शिशु भी बाहर की गतिविधियों को समझ सकता है, और यदि आप अपने पेट पर हाथ लगाती है तो वो आपको महसूस भी करता है।

इसीलिए बच्चे कई बार ज्यादा तेज शोर वाली जगह में जाने पर डर कर लाते भी मारने लगते है, इसीलिए आपको गर्भ से ही बच्चे की गतिविधियों पर ध्यान रख कर उनसे भावनात्मक सम्बन्ध बनाना चाहिए, और बच्चा जैसे ही जन्म लें तो बच्चा उसके स्पर्श को पहले से ही जनता हो, और वो उसे अनोखी न लगें डॉक्टर्स भी इस विषय में आपको बहुत सी राय देते है, की किस प्रकार आप गर्भ में पल रहे शिशु से भावनात्मक सम्बन्ध बना सकती है, तो आइये आज हम आपको इसी बारे में कुछ बताने जा रहे है, जो आपको गर्भ में पल रहे शिशु से भावनात्मक सम्बन्ध बनाने में मदद करती है।

बच्चे को अपना स्पर्श दें:-

गर्भावस्था के दौरान महिला को अपने अजन्मे शिशु से सम्बन्ध बनाने के लिए अपने पेट को स्पार्ह करते रहना चाहिए, इसके लिए आप तेल की मदद से अपने पेट की हलके हाथो से मालिश करते हुए बच्चे को अपने स्पर्श का अहसास दिला सकते है, जब आप अपने पेट पर मालिश करते है तो बच्चा हलकी सी कम्पन का अहसास करता है, और धीरे धीरे उसे आपके स्पर्श की पहचान हो जाती है, और बच्चे के जन्म के बाद भी आपके हाथो के स्पर्श का उसे पता चल जाता है।

बच्चे के साथ बातें करें:-

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जब बच्चा गर्भ में होता है तब वह आपको सुन सकता है, इसीलिए आपको अकेले में बच्चे से बातें करनी चाहिए, और आप चाहे तो कहानियां भी उन्हें सुना सकती है, इसके कारण बच्चा आपकी आवाज़ से अपिरिचित नहीं रहता है, वे जन्म के बाद भी आपका बच्चा उन आवाज़ के साथ सहज महसूस करता है, आप अपने पति के साथ बैठकर भी इस लम्हे का आनंद उठा सकती है, ऐसे में बच्चा अपने पापा की आवाज़ को भी पहचानने लगता है।

गर्भ में पल रहे बच्चे की हरकत पर प्रतिक्रिया दें:-

पहले लोग कहते थे की बच्चा जब पेट में कोई हरकत करता है तो वो आपसे कुछ कहना चाहता है, ऐसे में आपको अपने बच्चे के साथ भावनात्मक सम्बन्ध बनाने के लिए चाहिए की आप बच्चे को अपनी प्रतिक्रिया दें, या तो आप उनसे बातें करें, या फिर उन्हें गाना सुनाएँ, ऐसा करने से बच्चा महसूस करता है, और आपको भी अच्छा महसूस होता है।

बच्चे को संगीत सुनाएँ:-

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गर्भ में पल रहे बच्चे को आपको पुरे नौ महीने संगीत सुनना चाहिए, क्योंकि इससे बच्चे गर्भ के अंदर भी इसे महसूस कर सकते है, क्योंकि बच्चा भी उस संगीत का अहसास कर सकता है, और उसके बाद जन्म के बाद जब भी बच्चा रोता है, तो उसे आप वही संगीत सुनाएँ, ऐसा करने से आपको खुद ही पता चलेगा की बच्चा जब वो संगीत सुनते ही चुप हो जायेगा, की बच्चा उस संगीत को पहचानता है, ऐसा करने से भी आप गर्भ में पलरहे शिशु से भावनात्मक रूप से जुड़ने में मदद ले सकते है।और हमेशा के लिए अपनी इन यादों को संजो कर भी रख सकते है।

अच्छी अच्छी बातों को सोचें:-

गर्भावस्था के समय आपको किसी भी प्रकार का तनाव नहीं लेना चाहिए, और हमेशा खुश रहना चाहिए, क्योंकि इसका सीधा असर आपके गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ता है, और यदि आप चाहते है की आपका बच्चा हँसता हुआ इस दुनिया में आएं, तो उसके लिए जरुरी होता है की माँ खुद भी खुश रहें, क्योंकि माँ जो भी करता है बच्चा उसे अच्छे से समझते है, और उसे महसूस भी करता है।

योगा करें:-

योगा करना गर्भावस्था में केवल महिला के लिये ही नहीं बल्कि बच्चे के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है, क्योंकि गर्भावस्था में अलग तरह का योगा करवाया जाता है, जो महिला को आराम पहुँचाता है, और इसके कारण बच्चे को भी आराम महसूस होता हैं, और बच्चा इसे महसूस भी करता है, इसीलिए महिला को इस तरीके का इस्तेमाल करके बच्चे और अपने स्वास्थ्य को भी ठीक रख सकती है।

पापा को भी दे थोड़ा समय:-

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केवल माँ को ही नहीं बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु के पिता को भी उसे समय देना चाहिए, उससे बातें करनी चाहिए, महिला के पेट पर स्पर्श करके बच्चे को अपने स्पर्श का अहसास दिलाना चाहिए, उसके साथ उससे बातें भी करनी चाहिए, ऐसा करने से बच्चा अपने माँ और पिता दोनों की ही आवाज़ और स्पर्श को अच्छे से पहचान सकता है, और उन्हें जन्म के बाद महसूस भी कर सकता है।

इसके अलावा गर्भावस्था के दौरान महिला को किसी भी ऐसे स्थान पर नहीं जाना चाहिए, जहाँ ज्यादा शोर हो, क्योंकि इसके कारण बच्चा असहज महसूस करता है, अपने आपको को तनाव में नहीं रखना चाहिए, थोड़े थोड़े समय के बाद बच्चे को अपना स्पर्श देते रहना चाहिए, उससे बातें करनी चाहिए, ऐसा करने से भी आप अपने बच्चे से भावनात्मक रूप से जुड़ने में और अपने अहसास को उस तक पहुचाने में सफल हो सकते है, इसके साथ आपको गर्भावस्था के नौ महीने की एक बाबे एल्बम बनानी चाहिए, ताकि आपके बच्चे के बड़े होने पर आपसे इस तोहफे को गिफ्ट के रूप में देकर खुश कर सकें।

 

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