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नवजात शिशु की देखभाल कैसे करें?

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दुनिया का सबसे कठिन काम है बच्चा पालना। पल तो दुनिया के सारे बच्चे जाते हैं, पर आप अपने बच्चों की देखभाल कैसे कर रही हैं वो महत्वपूर्ण है। शिशु की देखभाल उचित तरीके से हो इसके लिए सही जानकारी का होना बहुत जरुरी है। जरा सी लापरवाही आपके शिशु को बीमार कर सकती है। इसलिए आज हम आपको नवजात शिशु की देखभाल कैसे करें बता रहे हैं।

नवजात शिशु की केयर

साफ-सफाई का ध्यान रखें

सबसे पहले आप खुद साफ़ सुथरी रहें, समय पर नहाएं, समय पर अपने दैनिक क्रिया करें। मुंह हमेशा साफ़ रखें, क्यूंकि अगर आप समय पर ब्रश नहीं करेंगी तो आपकी साँस के द्वारा कीटाणु शरीर के भीतर जाकर इंफेक्शन पैदा कर सकते हैं। जो शिशु के लिए बहुत हानिकारक होता है। क्यूंकि शिशु को इंफेक्शन बहुत छोटी चीजों से हो जाता है जो आप सोचती भी नहीं है। इसलिए आप सबसे पहले खुद की साफ-सफाई का ध्यान रखें और साफ कॉटन के कपडे पहनें। जब तक आपका शिशु 9 महीने से ऊपर न हो जाए।

खान-पान का ध्यान रखें

अपने खान-पान का ध्यान रखें। आपको ये जानकर हैरानी होगी आप जो भी खाती हैं, उसी से दूध बनता है। जैसा भोजन आप करेंगी शिशु को भी वैसा ही फील होगा सिर्फ दूध पीने से। अगर आप ज्यादा तीखा खाएंगी और शिशु दूध पिएगा तो शिशु को लूज़ मोशन हो जाएगा। आप ज्यादा ठोस चीजें खाएंगी तो आपका पेट खराब हो या न हो शिशु का पेट जरूर खराब हो जाएगा। और रात को ज्यादा ठंडी चीजें नहीं खाएं। नहीं तो शिशु को सर्दी हो जाएगी। हमेशा कम मसालेदार, कम तला भुना, नार्मल पौष्टिक आहार लें। कम से कम छह महीने तक आपको इस बात का ध्यान रखना है।

दूध पिलाते समय

जब भी आप शिशु को दूध पिलाएं, तो अपना दूध थोड़ा बाहर निकाल दें। क्यूंकि आपके स्तन के दूध निकलने वाले छिद्रों में बैक्टीरिया हो जाते हैं, इसलिए पहला दूध थोड़ा सा बाहर करें उसके बाद पिलाएं। आपका शिशु कभी बीमार नहीं होगा। जब भी शिशु को दूध पिलाएं शिशु का सिर ऊपर होना चाहिए, आपके स्तन से ऊपर। पुरे होशो हवास में रहें। कई बार कुछ महिलाएं अपने बेबी को दूध पिलाती हैं आँचल या दुपट्टे से ढक लेती हैं और बातें करने लगती है। ऐसा भूलकर भी नहीं करें। क्यूंकि आपके स्तन से शिशु की सांसे रुक सकती हैं। आपको पता भी नहीं चलेगा, और शिशु को भी बचाव का तरीका पता नहीं है। इस बात का बहुत ख्याल रखें।

घूमाते समय ध्यान रखें

जब भी शिशु को बाहर लेकर जाएं आप अपने पुरे होशो-हवास में रहें। ढक कर रखें। और किसी तरह का कोई दबाब नहीं पड़े इस बात का ध्यान रखें। कई महिलाएं होती हैं, बाइक पर जा रही होती हैं और अपने बच्चे को फुटबाल की तरह पकडे हुए होती हैं। ऐसी लापरवाही नहीं करें।

नाखून काटते रहें

बच्चे के नाखून हरेक सप्ताह काटती रहें या जब भी बढ़ जाए। नहीं तो वो खुद का नुकसान कर लेगा। इसलिए नेल्स हमेशा कटा हुआ होना चाहिए।

कैसे नहलाएं?

शिशु को नहाना भी बहुत जरुरी है। पर ध्यान रहे पानी न तो ठंडा हो और न हो गर्म। ठंडे पानी से तो बिलकुल भी नहीं नहलाएं। नार्मल तापमान के पानी से नहलाएं। आपको पता होगा शिशु के सिर में पपड़ी जम जाती है। आप डॉक्टर से पूछ सकती हैं की कैसे साफ करें। पर दो महीने तक इसमें भी दिमाग नहीं लगाएं। क्यूंकि शिशु के मस्तिष्क का ऊपरी हिस्सा बहुत नाजुक होता है। कभी भी दबाब नहीं दें। कभी भी आप अपने घर के किसी बच्चे को मस्तिष्क के ऊपरी भाग को छूने नहीं दें, बताएं नहीं। नहीं तो जब आप नहीं होंगी तो वो छूकर देखेगा।

नींद पूरी होने दें

शिशु को सोने दें। जितना सो सकता है, पर आप समय-समय पर दूध पिलाती रहें। आप बेवजह उठाने की कोशिश न करें। क्यूंकि जन्म के बाद शिशु 20 से 22 घंटे तक सो सकता है। ये धीरे-धीरे कम होता है। आपकी उम्र आते-आते 6 से 8 घंटा सोता है। इसलिए बेवजह न उठाएं। जितना सोएगा शिशु का विकास उतना ही अच्छा होगा।

अपना दूध पिलाएं

छह महीने तक शिशु को अपना दूध जरूर पिलाएं। ये आपके लिए भी बढियाँ है और शिशु के लिए तो अमृत समान है। अगर आप छह महीने तक दूध पिलाती हैं, तो आने वाले समय में शिशु तुरंत बीमार नहीं पडेगा। उसकी आँखों पर चश्मा नहीं लगेगा, शरीर कमजोर नहीं होगा, सर्दी खांसी कम होगी, रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ जाएगी। छह महीने के बाद आप उसको दाल, और रोटी खिलाती रहें। और दूध पिलाती रहें।

सिर का ध्यान रखें

शिशु को कभी भी गीले बिस्तर और डायपर पर सुलाकर नहीं रखें। उसके सूखने का इन्तजार नहीं करें। शिशु के पहनने के कपडे, बिछावन, हमेशा साफ-सुथरी रखें। शिशु का सिर सुलाते समय छोटी तकिये पर रखें, जो मार्किट में मिलती है। ताकि आपके शिशु का सिर गोल रहे। अगर इसके बारे में आपको जानकारी नहीं है तो घर में ही छोटा सा राई का तकिया बना लें। राई के तकिये से भी शिशु का सिर गोल होता है।

नवजात शिशु की तेल मालिश

शिशु की मालिश करना बहुत जरुरी है। मालिश से आपके शिशु का विकास होगा। इसके लिए आप डॉक्टर की सलाह लेकर आयल खरीदें और उसका इस्तेमाल करें। शुद्ध सरसों का तेल आपके शिशु के लिए बहुत फायदेमंद रहेगा। शिशु को रोजाना दो बार मालिश करें। इससे शिशु की हड्डियां मजबूत होंगी और ग्रोथ भी होगी। मालिश बहुत जरुरी है।

बीमारी होने पर डॉक्टर से सम्पर्क करें

कोई भी दिक्क्त हो, डॉक्टर से सम्पर्क करें। खुद डॉक्टर नहीं बनें और यूट्यूब चैनल देखकर इलाज नहीं करें। कई बार ऐसा देखा गया है की एक बार शिशु को उलटी और दस्त हो गए आप डॉक्टर दिखाने गयीं, उन्होंने आपको जो दवाएं दी उसे पिलाने के बाद शिशु ठीक हो जाता है। दवाइयां आधी रखी रहती है, शिशु को फिर वैसी ही तकलीफ होती है और महिलाएं उसी दवाई को शिशु को पिला देती हैं। ऐसा नहीं करें। आप खुद सोचिये, उस समय किसी इंफेक्शन की वजह से उलटी दस्त हुए हो और इस बार फीवर होने की वजह से। दोनों की मेडिसिन एक जैसी नहीं हो सकती। इसलिए इस बात का ध्यान रखें।

वैक्सीनेशन का ध्यान रखें

टीके समय पर लगवाएं। और डॉक्टर ने जो शिशु के लिए मेडिसिन दी है उसका इस्तेमाल सही समय पर करें।

अब आप समझ गए होंगे की आपका शिशु स्वस्थ, हेल्दी, खुश कैसे रहेगा। बस आप इतना समझ लीजिए। आप जो भी करेंगी, शिशु पर उसका प्रभाव पड़ेगा। और शिशु को कुछ होगा तो परेशान आप होंगी। इसलिए आप खुद का भी ख्याल रखें और शिशु का भी ख्याल रखें।