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क्यों जरुरी होता है प्रेगनेंसी के आखिरी महीनों में ज्यादा ध्यान रखना?

गर्भावस्था के पूरे नौ महीने महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है क्योंकि जितना अच्छे से महिला अपना ध्यान रखती है। उतना ही प्रेगनेंसी को आसान बनाने के साथ माँ व् बच्चे को हेल्दी रहने में मदद मिलती है। लेकिन प्रेगनेंसी के शुरूआती समय और प्रेगनेंसी के आखिरी समय में महिला को अपना और भी ज्यादा ध्यान रखना होता है क्योंकि यह दोनों समय ही महिला के लिए बहुत नाजुक होते हैं। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी के आखिरी महीनों में ज्यादा ध्यान रखना क्यों जरुरी होता है उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

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बच्चे का विकास तेजी से हो रहा होता है

गर्भावस्था के नौवें महीने में गर्भ में शिशु का विकास तेजी से हो रहा होता है साथ ही शिशु अपने जन्म लेने की सही पोजीशन में आने की कोशिश करता रहता है। ऐसे में गर्भ में शिशु को किसी भी तरह की दिक्कत नहीं हो इस परेशानी से बचे रहने के लिए गर्भवती महिला को मदद मिल सके और शिशु का विकास अच्छे से हो सके इसके लिए प्रेगनेंसी के आखिरी महीने में महिला को अपना ज्यादा ध्यान रखने की जरुरत होती है।

पेट बाहर निकलने के कारण दिक्कत नहीं हो

प्रेगनेंसी के आखिरी समय में महिला का पेट पूरी तरह से बाहर निकल चूका होता है जिसकी वजह से महिला को उठने, बैठने, सोने, खड़े रहने, आदि में दिक्कत होती है। और महिला को कोई दिक्कत नहीं हो इसके लिए महिला को अपने उठने बैठने सोने आदि की सही पोजीशन का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा महिला किसी अन्य काम को करने में भी दिक्कत नहीं हो इसके लिए महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।

डिलीवरी का समय पास होता है

प्रेगनेंसी के आखिरी महीने में यदि महिला किसी भी तरह की लापरवाही करती है तो इसकी वजह से महिला की डिलीवरी में कॉम्प्लीकेशन्स आने का खतरा रहता है। ऐसे में महिला की डिलीवरी में कोई परेशानी नहीं हो, जन्म के बाद शिशु को कोई दिक्कत नहीं हो इससे बचे रहने के लिए महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।

महिला डिलीवरी को लेकर परेशान हो सकती है

प्रसव को लेकर महिला ज्यादा परेशान हो सकती है जिसकी वजह से महिला घबराहट में आकर तनाव में आकर कोई गलती कर सकती है। और उसका असर माँ और बच्चे की सेहत पर पड़ सकता है। ऐसे में माँ या बच्चे की सेहत को किसी तरह की परेशानी नहीं हो इससे बचे रहने के लिए महिला को प्रेगनेंसी के आखिरी महीने में अपना अच्छे से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।

महिला की भावनाओं में उतार चढ़ाव होने के कारण

प्रेगनेंसी के नौवें महीने में महिला की भावनाओं में उतार चढ़ाव आ सकते हैं जिसकी वजह से महिला तनाव में आ सकती है। और तनाव का होना माँ और बच्चे की सेहत पर बुरा असर डाल सकता है ऐसे में ऐसी कोई दिक्कत नहीं हो इससे बचे रहने के लिए महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।

प्रेगनेंसी के नौवें महीने में इन बातों का ध्यान रखें

  • ज्यादा लम्बे समय तक खड़ी न रहे साथ ही एक ही पोजीशन में ज्यादा देर तक नहीं बैठें।
  • खान पान में बिल्कुल भी लापरवाही नहीं करें और पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लें जिससे महिला को प्रसव के लिए ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिल सकें।
  • डिलीवरी को लेकर बिल्कुल भी परेशान नहीं हो।
  • पेट के बल किसी भी काम को न करें।
  • डिलीवरी का समय नजदीक आने पर सम्बन्ध बनाने से बचें।
  • शरीर में तरल पदार्थों की कमी नहीं होने दें।
  • सोने के समय अपनी पोजीशन का ध्यान रखें और जितना हो सके बाईं और करवट लेकर सोएं क्योंकि यह प्रेगनेंसी में सोने के लिए सबसे सही पोजीशन होती है।
  • नोर्मल डिलीवरी हो इसके चक्कर में शरीर पर ज्यादा जोर नहीं डालें।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से महिला को अपना ज्यादा ध्यान रखने की जरुरत होती है। यदि आपका भी प्रेगनेंसी का आखिरी समय चल है। तो आपको भी अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए ताकि आपको और आपके होने वाले बच्चे को किसी भी तरह की दिक्कत नहीं हो।

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