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प्रेगनेंसी में 1 से 9 महीने तक क्या-क्या सावधानियां रखें

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प्रेगनेंसी महिला के लिए एक बहुत ही सुखद अहसास होने के साथ बहुत ख़ुशी का पल भी होता है। लेकिन साथ ही इस दौरान गर्भवती महिला में शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक रूप से बहुत से बदलाव आ सकते हैं। इसमें घबराने की बात नहीं होती है क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान ऐसा होना आम बात होती है। लेकिन इस बदलाव के कारण गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु पर किसी तरह का बुरा असर न पड़े इसके लिए प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपना दुगुना ध्यान रखना पड़ता है। और हर काम करने से पहले इस बात का ध्यान रखना जरुरी होता है, की उसे करने से शिशु को कोई नुकसान न हो। फिर चाहे वो आपके खान पान से जुड़ा हो या किसी अन्य काम से, क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान बरती गई थोड़ी सी लापरवाही गर्भवती महिला और शिशु के लिए नुकसानदायक हो सकती है।

प्रेगनेंसी के दौरान बरतें यह सावधानियां

गर्भावस्था के दौरान महिला अकेली नहीं होती है बल्कि गर्भ में पल रही नन्ही सी जान भी पूरी तरह से महिला पर ही निर्भर करती है। ऐसे में महिला को प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने सावधानी बरतने की जरुरत होती है ताकि गर्भवती महिला और शिशु को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेग्नेंट महिला को पूरे नौ महीने तक कौन-कौन सी सावधानियां बरतनी चाहिए।

खान पान

गर्भवती महिला को खाने पीने की चीजों में सावधानी बरतना जरुरी होता है जैसे की महिला को पता होना चाहिए की कौन सी चीज का सेवन गर्भावस्था के दौरान नहीं करना चाहिए, कितनी मात्रा में सेवन करना चाहिए, अच्छे से धोने के बाद और ताजे फलों व् सब्जियों को खाने में प्रयोग करना चाहिए, बासी व् ठन्डे भोजन से परहेज करना चाहिए, जंक फ़ूड व् ज्यादा मसाले वाले भोजन के सेवन से बचना चाहिए, आदि।

फलों के जूस का सेवन

अब आप यह सोच रहे होंगे की हम फलों का रस पीने में सावधानी बरतने की सलाह क्यों दे रहे हैं क्योंकि फलों का सेवन तो प्रेगनेंसी के दौरान अच्छा होता है। लेकिन शायद आप यह नहीं जानते हैं फलों का रस निकलने के बाद उसमे शुगर की मात्रा बढ़ जाती है। ऐसे में यदि महिला अधिक जूस का सेवन करती है तो इससे महिला का वजन बढ़ने के साथ ब्लड में शुगर लेवल बढ़ने का भी खतरा रहता है। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान महिला को गेस्टेशनल शुगर जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

कच्चे अंडे व् नॉन वेज

गर्भवती महिला को इस बात की भी सावधानी बरतनी चाहिए की जब भी वह अंडे या नॉन वेज का सेवन करती है तो इस बात का ध्यान रखे की वो अच्छे से पका हुआ हो। क्योंकि कच्चे अंडे या अच्छे से न पका हुआ नॉन वेज खाने के कारण महिला को पेट सम्बंधित समस्या का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही मछली का सेवन करते समय इस बात का ध्यान रखें की मछली में मर्क्युरी की मात्रा मौजूद न हो।

गंध का ध्यान

गर्भवती महिला को उन केमिकल का प्रयोग नहीं करना चाहिए जिनकी गंध तेज हो, जैसे की कपडे धोने में इस्तेमाल किया जाने वाला सामान, पोछा लगाने के लिए इस्तेमाल किये जाने वाला केमिकल, यदि कहीं पेंट आदि हो रहा है तो, आदि। क्योंकि उसके कारण जब आप सांस लेते हैं तो उस केमिकल का असर बॉडी में फ़ैल सकता है। जिसके कारण गर्भवती महिला को इन्फेक्शन जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, जिससे शिशु को भी खतरा हो सकता है। और यदि आप इनका इस्तेमाल करती है तो हाथों में ग्लव्स और मुँह पर मास्क लगाने के बाद ही इनका इस्तेमाल करना चाहिए।

स्किन के लिए इस्तेमाल किये जाने वाले प्रोडक्ट्स

प्रेगनेंसी के दौरान आपको अपनी स्किन केयर प्रोडक्ट्स का भी अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि इन्हे बनाने के लिए केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है। और जब आप इन्हे अपनी स्किन पर लगाती है तो आपकी स्किन इसे अवशोषित कर लेती है ऐसे में गर्भ में पल रहे शिशु तक इस केमिकल का प्रभाव पहुँच सकता है। जिससे शिशु को नुकसान पहुँच सकता है, ऐसे में शिशु के बेहतर विकास में लिए महिला को स्किन केयर प्रोडक्ट का इस्तेमाल करते समय भी सावधानी बरतनी चाहिए।

गरम पानी से नहाना

प्रेग्नेंट महिला को गरम पानी से नहाने से बचना चाहिए क्योंकि यदि महिला गरम पानी से नहाती है तो इसके कारण बॉडी का तापमान बढ़ सकता है, महिला का ब्लड प्रेशर लौ हो सकता है, आदि। और प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में यदि आप ऐसा करती है तो बॉडी का तापमान बढ़ने के कारण गर्भपात तक होने का खतरा रहता है। ऐसे में महिला चाहे तो गुनगुने पानी से नहा सकती है लेकिन पानी का तापमान अधिक नहीं होना चाहिए, और वो भी ठंड के मौसम में, गर्मी से गुनगुने पानी नहाने से भी गर्भवती महिला को बचना चाहिए।

भारी सामान उठाना

गर्भवस्था के दौरान महिला को भारी सामान को उठाने से भी बचना चाहिए, क्योंकि इसके कारण पेट पर जोर पड़ता है जिसके कारण महिला और शिशु दोनों को परेशानी हो सकती है।

पेट के बल काम

गर्भवती महिला को पेट पर जोर पड़ने वाले काम को करने से बचना चाहिए यहां तक की झुककर भी किसी काम को नहीं करना चाहिए। और किचन में काम करते हुए पेट के बल खड़े होकर काम नहीं करना चाहिए।

यात्रा

प्रेगनेंसी के दौरान चाहे छोटा सफर हो या लम्बा गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए। क्योंकि सफर के दौरान झटका अदि लगने का खतरा रहता है, साथ ही महिला को बहुत देर तक एक ही पोजीशन में बैठने के कारण परेशानी भी हो सकती है। ऐसे में शिशु और महिला दोनों को स्वस्थ रहने के लिए गर्भवती महिला को सफर करने से बचना चाहिए।

ज्यादा देर तक एक जगह खड़े रहना

प्रेग्नेंट महिला को बहुत देर तक न तो एक ही पोजीशन में बैठना चाहिए, न खड़े होना चाहिए, न ही सोना चाहिए, क्योंकि यह सब महिला के लिए परेशानी खड़ी कर सकते हैं, इसके अलावा गर्भवती महिला को ज्यादा तेजी से चलने और सीढ़ियां चढ़ने से भी बचना चाहिए।

तनाव

गर्भवती महिला को तनाव लेने से भी बचना चाहिए क्योंकि प्रेग्नेंट महिला यदि किसी चीज को लेकर मानसिक रूप से परेशान रहती है। तो इससे न केवल गर्भवती महिला की परेशानियां बढ़ती है बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु पर भी असर पड़ सकता है।

नशा

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला महिला को न तो किसी तरह का नशा करना चाहिए और न ही उस जगह पर बैठना चाहिए जहां कोई धूम्रपान कर रहा हो या अल्कोहल का सेवन कर रहा हो। क्योंकि इससे शिशु के विकास पर नकारात्मक असर पड़ता है।

भीड़भाड़

जहां पर बहुत ज्यादा लोग हो, प्रदूषण हो, ज्यादा शोर हो ऐसी जगह पर भी गर्भवती महिला को नहीं जाना चाहिए। क्योंकि इसके कारण गर्भ में पल रहे शिशु को इन्फेक्शन होने का खतरा रहता है जिससे शिशु को जन्म दोष होने का खतरा रहता है।

व्यायाम

प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में महिला को बिल्कुल भी व्यायाम नहीं करना चाहिए क्योंकि इस समय महिला द्वारा बरती गई लापरवाही शिशु के लिए घातक सिद्ध हो सकती है। इसके अलावा दूसरी तीसरी तिमाही में महिला चाहे तो हल्का फुल्का व्यायाम शुरू कर सकती है।

पीठ के बल सोना

प्रेग्नेंट महिला को नींद के प्रति लापरवाही न करने के साथ अपने सोने की पोजीशन का भी ध्यान रखना चाहिए। न तो गर्भवती महिला को पीठ के बल सोना चाहिए और न ही पेट के बल सोना चाहिए। क्योंकि पेट के बल सोने के कारण जहां शिशु को दिक्कत हो सकती है वहीँ पीठ के बल सोने के कारण गर्भाशय का भार दूसरे अंगो पर पड़ने लगता है जिसके कारण बॉडी में ब्लड फ्लो अच्छे से नहीं हो पाता है और महिला को सेहत सम्बन्धी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

घर के पालतू जानवर का काम

प्रेग्नेंट महिला को घर में पालतू जानवर का काम करने से भी बचना चाहिए क्योंकि इसके कारण भी महिला और शिशु को इन्फेक्शन होने का खतरा रहता है।

डॉक्टर से जांच

महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की डॉक्टर द्वारा बताई गई सभी दवाइयों का सेवन समय से करने के साथ सभी टेस्ट महिला को समय से करवाने चाहिए। इसके अलावा जब भी आपको डॉक्टर ने बुलाया है आपको समय से जाना चाहिए और बिल्कुल भी देरी नहीं करनी चाहिए, साथ ही डॉक्टर के संपर्क में हमेशा रहना चाहिए। ताकि जब भी कोई दिक्कत हो आप डॉक्टर से राय ले सके।

तो यह हैं कुछ सावधानियां जो गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान एक से नौ महीने तक बरतनी चाहिए। ऐसा करने से गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में मदद मिलती है। साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में कोई भी असामान्य लक्षण महसूस होने पर उसे अनदेखा नहीं करना चाहिए।