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गर्भावस्था में घरेलू हिंसा का प्रभाव शिशु पर कैसा पड़ता है?

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गर्भ में शिशु के होने पर उसका विकास पूरी तरह से गर्भवती महिला पर निर्भर करता है। और यह भी सच है की महिला जो भी खाती, पीती है उसका असर शिशु पर जरूर पड़ता है। केवल खान पान का ही नहीं बल्कि महिला करती है, क्या सुनती है, क्या देखती है, या महिला मानसिक रूप से रिलैक्स रहती है है या नहीं इसका असर भी शिशु पर पड़ता है। खान पान बेहतर न होने के कारण जहां शिशु का शारीरिक विकास अच्छे से नहीं हो पाता है, वहीँ महिला के तनाव में रहने के कारण, घरेलू हिंसा से गुजरना या कहीं पर देखने के कारण, डरावनी फिल्मे देखने का असर भी शिशु के मानसिक विकास पर पड़ सकता है। इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान महिला को इन सब चीजों से दूर रहने की सलाह दी जाती है, और महिला को अपने स्वास्थ्य का बेहतर तरीके से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।

क्या गर्भावस्था में घरेलू हिंसा का प्रभाव शिशु पर पड़ता है?

कुछ महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान घरेलू हिंसा का शिकार हो सकती है या फिर घरेलू हिंसा को अपनी आँखों से देखती है। जिसके कारण महिला तनाव में आ सकती है, और इस कारण महिला की तनाव का बॉडी पर असर दिखाने वाली प्रणाली पर असर पड़ता है। जिसके कारण प्रेग्नेंट महिला की बॉडी में क्रिस्टोल नामक हॉर्मोन बढ़ता है, और गर्भ में भ्रूण पर भी इसका असर बढ़ने लगता है। और क्रिस्टोल एक न्यूरोटॉक्सिक हॉर्मोन है। जिससे गर्भ में पल रहे शिशु के दिमागी विकास पर बुरा असर पड़ सकता है। तो आप कह सकते हैं की जी हाँ, गर्भावस्था में घरेलू हिंसा का प्रभाव शिशु पर जरूर पड़ता है, जिसके कारण शिशु में उसके कुछ लक्षण जन्म के बाद दिखाई दे सकते हैं।

घरेलू हिंसा के शिशु पर पड़ने वाले बुरे प्रभाव

प्रेग्नेंट महिला का घरेलू हिंसा का शिकार होना या अपने सामने घरेलू हिंसा को होते हुए देखना महिला को तनाव में डालने के साथ शिशु पर भी बहुत बुरा असर डाल सकता है। और यह असर केवल गर्भ में ही नहीं बल्कि शिशु के जन्म के बाद भी शिशु में देखने को मिल सकता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की घरेलू हिंसा का शिशु पर क्या प्रभाव पड़ता है।

समय पूर्व प्रसव

घरेलू हिंसा से परेशान गर्भवती महिला को तनाव की समस्या अधिक हो सकती है, और तनाव का अधिक होना गर्भवती महिला को शारीरिक व् मानसिक रूप से परेशान कर सकता है। जिसके कारण महिला को समय पूर्व प्रसव यानी समय से पहले ही शिशु का जन्म जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

शिशु के वजन में कमी

यदि गर्भवती महिला घरेलू हिंसा का शिकार होती है या घरेलू हिंसा होते हुए देखती है, तो इसके कारण शिशु के शारीरिक विकास पर भी बुरा असर पड़ सकता है। जिसके कारण महिला को जन्म के समय शिशु के वजन में कमी जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

जन्म के बाद शिशु को होने वाली दिक्कतें

घरेलू हिंसा से यदि गर्भवती महिला परेशान होती है तो इसके कारण गर्भवती महिला पर बुरा असर पड़ता है और साथ ही इसके कारण गर्भ में पल रहा शिशु भी प्रभावित होता है। और इसका असर शिशु के जन्म के बाद भी शिशु पर देखने को मिल सकता है, जैसे की शिशु सोते सोते डर कर उठ जाता है और रोने लगता है, तेज रौशनी में शिशु परेशान होने लगता है, थोड़ी सी ऊँची आवाज़ सुनकर भी शिशु घबरा जाता है, लोगो को देखकर घबराहट महसूस करते हैं, आदि। और ऐसे शिशु बहुत अधिक रोते भी हैं।

तो यह हैं कुछ बुरे प्रभाव जो घरेलू हिंसा के कारण गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ सकते हैं। ऐसे में महिला को यह कोशिश करनी चाहिए की जहां भी लड़ाई झगड़ा हो वहां से दूर रहना चाहिए, यहां तक की ऐसी फिल्मे भी नहीं देखनी चाहिए साथ ही आपके पार्टनर को भी प्रेगनेंसी के दौरान इस बात का खास ख्याल रखना चाहिए। ताकि प्रेगनेंसी के दौरान महिला और शिशु दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके। साथ ही यदि महिला घरेलू हिंसा से बहुत अधिक परेशान है तो इससे बचने के लिए महिला को कुछ न कुछ जरूर करना चाहिए।