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प्रेगनेंसी में क्या नहीं करें

प्रेगनेंसी में क्या नहीं करें
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गर्भवती महिला के लिए प्रेगनेंसी सुखद अहसास होने के साथ जटिलताओं से भरा समय होता है। क्योंकि इस दौरान बॉडी में हार्मोनल बदलाव चलते रहते हैं, और इनके कारण महिला को बहुत सी शारीरिक समस्याएं जैसे की उल्टी, मॉर्निंग सिकनेस, पेट में दर्द, थकान, कमजोरी, आदि का अनुभव होना आम बात होती है। लेकिन इन सब परेशानियों से बचाव के लिए और गर्भ में पल रहे शिशु के स्वस्थ रहने और शिशु के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास के लिए गर्भवती महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। और प्रेगनेंसी के दौरान कुछ सावधानियां महिला को बरतनी चाहिए। तो लीजिये आज हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान क्या नहीं करना चाहिए इस बारे में कुछ टिप्स बताने जा रहे हैं।

खान पान में बरते सावधानी

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान पोषक तत्वों से भरपूर आहार लेने की सलाह दी जाती है। लेकिन खान पान में उन चीजों को शामिल नहीं करना चाहिए जिनका सेवन करने से गर्भवती महिला या गर्भ में पल रहे शिशु को परेशानी का अनुभव हो। जैसे की कच्चा पपीता, कटहल, ज्यादा मात्रा में अंगूर, कच्चा व् अधपका मास, कच्चे अंडे, जंक फ़ूड, मर्क्युरी युक्त मछली, चाइनीज़ फ़ूड, कच्चा दूध, ज्यादा मात्रा में चाय कॉफ़ी, कच्चे अंकुरित अनाज, आदि। साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान किसी भी चीज का सेवन जरुरत से ज्यादा नहीं करना चाहिए क्योंकि आवश्यकता से अधिक किसी भी चीज का सेवन गर्भवती महिला के लिए परेशानी का कारण बन सकता है।

भूखे नहीं रहें

बॉडी में प्रेगनेंसी के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण जीभ के स्वाद में परिवर्तन आने या उल्टी या किसी अन्य शारीरिक आदि समस्या अधिक होने के कारण गर्भवती महिला का खाने का मन नहीं करता है। ऐसे में महिला को भूखे नहीं रहना चाहिए बल्कि मन न होने पर भी थोड़े थोड़े समय बाद कुछ न कुछ खाते रहना चाहिए। क्योंकि गर्भवती महिला का भूखा रहना गर्भवती महिला की समस्या बढ़ाने के साथ शिशु के विकास में कमी का कारण भी बन सकता है।

नशे का सेवन

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को अल्कोहल, धूम्रपान, कैफीन युक्त चाय कॉफ़ी, या अन्य किसी भी तरह के नशे का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि यदि गर्भवती महिला यदि नशे का सेवन करती है तो इसका असर गर्भनाल के रास्ते शिशु तक पहुँच जाता हैं जिससे शिशु के शारीरिक के साथ मानसिक विकास में भी बाधा उत्पन्न हो सकती है।

ज्यादा भागदौड़ व् यात्रा

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान ज्यादा भागदौड़ वाले काम, तेजी से सीढ़ियां चढ़ना, यात्रा करना जैसे काम नहीं करना चाहिए। खासकर प्रेगनेंसी की शुरुआत में इस तरह के काम करने से गर्भपात होने के चांस भी बढ़ जाते हैं।

संक्रमण होने वाली जगह व् चीजों से दूरी

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को भीड़भाड़ वाली जगह पर नहीं जाना चाहिए, घर में इस्तेमाल किये जाने वाले केमिकल के प्रयोग से बचना चाहिए जैसे की पोछा लगाते समय केमिकल का इस्तेमाल, किसी भी संक्रमित व्यक्ति के पास नहीं जाना चाहिए, घर में यदि कोई पालतू जानवर है तो उसके काम को करने से बचना चाहिए, आदि। क्योंकि इन सब कामो को करने से गर्भवती महिला को इन्फेक्शन होने का खतरा रहता है, जो गर्भ में शिशु को भी नुकसान पहुंचा सकता है।

गरम पानी से नहाना

गर्भवती महिला को नहाने के लिए ज्यादा गरम पानी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, क्योंकि गरम पानी से नहाने के कारण गर्भवती महिला के शरीर का तापमान बढ़ सकता है। जिसके कारण गर्भपात होने के चांस भी हो जाते हैं।

तनाव

तनाव व्यक्ति को केवल शारीरिक रूप से ही नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी बीमार बना देता है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को तनाव लेने से बचना चाहिए, क्योंकि यह गर्भवती महिला की सेहत सम्बन्धी बढ़ाने के साथ, शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास में समस्या उत्पन्न कर सकते है।

व्यायाम

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान व्यायाम न करने की सलाह दी जाती है, क्योंकि यदि आप फिटनेस के चक्कर में अधिक व्यायाम करती हैं तो इससे गर्भवती महिला को गर्भपात जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही अधिक योगासन करने से भी बचना चाहिए, और यदि आप व्यायाम व् योगासन करना चाहते हैं तो डॉक्टर के साथ ट्रेनर की राय भी लेनी चाहिए ताकि प्रेगनेंसी के दौरान आपको हर परेशानी से बचाव करने में मदद मिल सकें।

पेट के बल काम नहीं करना चाहिए

गर्भ में शिशु को सुरक्षित रखने के लिए गर्भवती महिला को ऐसा कोई भी काम नहीं करना चाहिए जिससे पेट पर किसी भी तरह का जोर पड़े। क्योंकि इससे गर्भ में पल रहे शिशु को परेशानी का अनुभव हो सकता है। जैसे की झुककर किसी काम को न करें, पैरों के भार बैठकर कोई भी काम न करें, आदि।

दवाइयों का सेवन

बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के समय बहुत सी शारीरिक परेशानियां हो सकती है। लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं होता है की गर्भवती महिला दर्द से राहत के लिए घर में दवाइयों का सेवन करना शुरू कर दें, क्योंकि यह शिशु के लिए नुकसानदायक हो सकता है। साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान किसी भी समस्या के बढ़ने पर आपको एक बार डॉक्टर से राय लेनी चाहिए।

पेट के बल सोना

वजन बढ़ने के कारण गर्भवती महिला को सोने में परेशानी का अनुभव करना पड़ सकता है, लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को सोने में सावधानी बरतनी चाहिए। क्योंकि ऐसे सोने से गर्भ में शिशु असहज महसूस कर सकता है। साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान सोने के लिए सबसे बेहतरीन पोजीशन बाई तरफ करवट लेकर सोना होता है। साथ ही दिन में आठ से दस घंटे की नींद जरूर लेनी चाहिए क्योंकि नींद में कमी के कारण गर्भवती महिला को थकान, कमजोरी, चिड़चिड़ापन आदि की समस्या हो सकती है।

तो यह हैं कुछ काम ज गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान करने से बचना चाहिए। क्योंकि इन कामो को करने से गर्भवती महिला और गर्भ में शिशु को परेशानी हो सकती है। साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान किसी भी समस्या को इग्नोर नहीं करना चाहिए, और कभी भी असहज महसूस होने पर लापरवाही न करते हुए तुरंत डॉक्टर से बात करनी चाहिए।