प्रेगनेंसी के चौथे से छठे महीने तक गर्भवती महिला को क्या परेशानियां होती है

गर्भावस्था का चौथे से छठा महीना प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही होती है और इस समय को प्रेगनेंसी का हैप्पी पीरियड भी कहा जाता है। क्योंकि इस दौरान गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में होने वाली शारीरिक परेशानियों से थोड़ा निजात मिल जाता है। साथ ही इस समय में महिला को शिशु की पहली हलचल, पेट का बढ़ता आकार जैसे अनुभव भी होते हैं। लेकिन ऐसा भी नहीं है की महिला को इस दौरान बिल्कुल भी परेशानी नहीं होती है। थोड़ी बहुत परेशानियों का होना प्रेगनेंसी के दौरान बहुत आम बात होती है। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में महिला को क्या परेशानियां होती है इस बारे में बताने जा रहे हैं।

कब्ज़ व् सीने में जलन

गर्भाशय के आकार के बढ़ने, पेट में शिशु के वजन के बढ़ने के कारण पेट के निचले हिस्से पर दबाव महसूस होता है। जिसके कारण पाचन क्रिया धीमी पड़ जाती है और खाने को हज़म करने में महिला को दिक्कत होती है जिससे कब्ज़ की समस्या होती है। कब्ज़ के कारण महिला को सीने में जलन व् खट्टे डकार आने जैसी समस्या भी हो सकती है।

भूख में बढ़ोतरी के कारण हो सकती है परेशानी

प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में महिला के खाने की इच्छा में बढ़ोतरी होती है जो की एक अच्छी बात होती है लेकिन इस चक्कर में यदि महिला बहुत ज्यादा खाती है तो इसके कारण महिला का जरुरत से ज्यादा वजन बढ़ने की समस्या हो सकती है। साथ ही महिला यदि इस समय जंक फ़ूड, मसालेदार भोजन आदि का सेवन भी करती है तो इसके कारण पेट से सम्बंधित समस्या महिला को हो सकती है। ऐसे में भूख में बढ़ोतरी के कारण होने वाली परेशानी से बचने के लिए महिला को उतना ही खाना चाहिए जितना जरुरी है और जंक फ़ूड आदि के सेवन से परहेज करना चाहिए।

पीठ व् पेट में दर्द

बच्चे का विकास बढ़ने के साथ गर्भाशय का आकार भी बढ़ता है जिसकी वजह से पेट व् पीठ की मांसपेशियों में खिंचाव आता है। और पेट के आगे की और बढ़ने के कारण रीढ़ की हड्डी पर दबाव बढ़ जाता है जिसकी वजह से गर्भवती महिला को पीठ में दर्द जैसी परेशानी होती है। साथ ही इस दौरान महिला को हल्का फुल्का पेट में दर्द होना भी आम बात होती है।

खर्राटे की समस्या

कुछ महिलाओं को वजन बढ़ने के कारण खर्राटे की समस्या भी प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में अधिक होती है। लेकिन यदि बहुत ज्यादा खर्राटे आएं तो इसे अनदेखा भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि बहुत ज्यादा खर्राटे आना गेस्टेशनल शुगर का लक्षण होता है। साथ ही हो सकता है की कुछ गर्भवती महिलाओं को कई बार नाक से खून निकलता हुआ भी महसूस हो, ऐसे में ज्यादा परेशानी होने पर एक बार डॉक्टर से जरूर बात करें।

सूजन

बढ़ते वजन के कारण कुछ महिलाओं को प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही के आखिर में पैरों में हलकी सूजन भी महसूस हो सकती है। और इसे लेकर गर्भवती महिला को घबराना नहीं चाहिए क्योंकि यह गर्भावस्था के दौरान महसूस होने वाला एक सामान्य लक्षण है।

सांस फूलना

प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में गर्भाशय का आकार बढ़ने के साथ फेफड़ों पर दबाव भी बढ़ता है। जिसकी वजह से गर्भवती महिला को थोड़ा सा काम करने पर ही बहुत जल्दी जल्दी सांस फूलने की परेशानी होती है।

बार बार यूरिन पास करने की इच्छा

हो सकता है की प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में आपको बार बार बाथरूम में जाने की इच्छा हो। क्योंकि गर्भाशय का आकार बढ़ने के कारण पेट के निचले हिस्से पर दबाव बढ़ता है जिसकी वजह से बार बार यूरिन पास करने की इच्छा होती है।

सफ़ेद पानी

प्रेगनेंसी के चौथे से छठे महीने में गर्भवती महिला को थोड़ा बहुत सफ़ेद पानी गिरने की समस्या भी हो सकती है। ऐसे में प्राइवेट पार्ट की साफ़ सफाई का खस ध्यान रखें ताकि इन्फेक्शन आदि से बचे रहने में मदद मिल सके।

बवासीर

पेट का आकार बढ़ने के कारण पेट के आस पास की मांसपेशियों में खिंचाव भी बढ़ता है जिसके कारण महिला को बवासीर जैसी परेशानी भी हो सकती है। साथ ही जिन महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान कब्ज़ अधिक रहती है। उन्हें भी बवासीर की परेशानी होने की सम्भावना अधिक होती है।

तो यह हैं कुछ परेशानियां जो प्रेग्नेंट महिला को प्रेगनेंसी के चौथे से छठे महीने में अधिक हो सकती है। और इस बात का ध्यान रखें की थोड़ी बहुत परेशानी होना प्रेगनेंसी के दौरान आम बात होती है। लेकिन यदि कोई भी परेशानी ज्यादा हो तो इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। और तुरंत डॉक्टर से बात करनी चाहिए।