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गर्भ में शिशु को दिक्कत होने के कारण गर्मियों में

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प्रेगनेंसी के दौरान हर गर्भवती महिला को गर्भ में पल रहे शिशु को लेकर बहुत उत्साहित होती है। ऐसे में गर्भ में शिशु को किसी तरह की दिक्कत न हो और बच्चे का विकास भी बेहतर तरीके से हो इसके लिए प्रेग्नेंट महिला किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करती है। लेकिन गर्मी का मौसम प्रेग्नेंट महिला के लिए परेशान कर देने वाला हो सकता है ऐसे में गर्भवती महिला को होने वाली परेशानी का असर बच्चे पर भी पड़ सकता है। इसके अलावा यदि महिला किसी भी तरह की लापरवाही करती है तो उसके कारण भी बच्चा परेशान हो सकता है। तो आइये अब हम आपको गर्भ में शिशु को गर्मियों में क्या दिक्कत हो सकती है इस बारे में जानते हैं।

शरीर का तापमान

गर्भवती महिला यदि गर्मी के मौसम में गर्म जगह पर ज्यादा रहती है, धूप में बाहर जाती है, गैस आदि के सामने ज्यादा काम करती है, तो ऐसे में गर्भवती महिला के शरीर का तापमान बढ़ सकता है। जिसके कारण पेट में बच्चे को परेशानी हो सकती है। और एक बार के लिए आप गर्मी में थोड़ा एडजस्ट कर सकती है लेकिन आपका बच्चा बिल्कुल भी एडजस्ट नहीं करेगा। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को शिशु को होने वाली इस दिक्कत से बचने के लिए गर्मी से बचना चाहिए और थोड़े ठन्डे माहौल में रहने की कोशिश करनी चाहिए।

पानी की कमी

गर्भावस्था के दौरान शरीर में पानी की कमी होना महिला व् बच्चे दोनों के लिए दिक्कत खड़ी कर सकती है। और गर्मी के मौसम में तो शरीर में पानी की कमी का होना बच्चे पर बहुत बुरा असर डाल सकता है। ऐसे में बच्चे को ऐसी कोई दिक्कत न हो उससे बचने के लिए गर्भवती महिला को पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए। पानी का भरपूर सेवन करने से एमनियोटिक फ्लूड की मात्रा को सही रहने में भी मदद मिलती है जिससे बच्चे के विकास को सही रहने में मदद मिलती है।

धूप के कारण

यदि किसी कारण प्रेग्नेंट महिला धूप में निकलती है तो धूप की तेज किरणे बॉडी पर पड़ती है जिससे बॉडी का तापमान अचानक से बढ़ सकता है। और बॉडी का तापमान बढ़ने के कारण पेट में बच्चा असहज महसूस कर सकता है साथ ही इसके कारण ब्लीडिंग व् गर्भपात जैसी समस्या हो सकती है।

दोपहर में नहाने के कारण

गर्मी के मौसम में यदि महिला दोपहर के समय नहाती है और टंकी का पानी गर्म होता है तो इसके कारण भी बॉडी के तापमान में फ़र्क़ आ सकता है। जिसके कारण बच्चा असहज महसूस कर सकता है। साथ ही बॉडी का तापमान यदि अधिक बढ़ जाता है तो शुरूआती दिनों में इस कारण महिला को ब्लीडिंग या गर्भपात होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

नींद कम लेने के कारण

गर्मी अधिक महसूस होने के कारण हो सकता है की गर्भवती महिला को नींद लेने में दिक्कत हो और महिला की नींद पूरी न हो। ऐसे में बच्चे का विकास बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। क्योंकि नींद पूरी न होने के कारण महिला को थकान, कमजोरी, आलस, आदि की समस्या होने के साथ शरीर की क्रियाएं भी प्रभावित हो सकती है। जिससे शिशु पर बुरा प्रभाव पड़ने के कारण बच्चे को दिक्कत हो सकती है।

भूख कम लगने की वजह से

गर्मी के मौसम में भूख कम लगना बहुत आम बात होती है लेकिन गर्भवती महिला को इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। और अपने आहार का भरपूर सेवन करने के साथ भोजन में भरपूर मात्रा में पोषक तत्वों को भी शामिल करना चाहिए। यदि प्रेग्नेंट महिला अपने आहार में लापरवाही करती है तो इसके कारण बच्चे के विकास पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है।

प्रेग्नेंट महिला के एक्टिव न रहने के कारण

गर्मी में आलस, कमजोरी, थकान महसूस होना बहुत आम बात होती है जिसके कारण गर्भवती महिला एक्टिव नहीं रहती है। ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला एक्टिव नहीं रहती है तो पेट में बच्चा भी एक्टिव नहीं रहता है।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से प्रेगनेंसी के दौरान गर्मियों के मौसम में पेट में पल रहे बच्चे को दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में महिला को इन सभी बातों का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। ताकि प्रेग्नेंट महिला व् बच्चे को दिक्कत न हो और माँ के साथ बच्चे को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

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