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गर्भ में शिशु का विकास रुकने के यह कारण होते हैं?

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गर्भावस्था के नौ महीने महिला और शिशु दोनों के लिए बहुत अहम होते हैं। क्योंकि इस दौरान महिला अपने गर्भ में नन्ही जान को पाल रही होती है जो उसका हिस्सा होता है साथ ही बच्चे का पूरा विकास माँ पर ही निर्भर करता है और नौ महीने बाद उस नवजात शिशु के आने से महिला की खुशियां दुगुनी हो जाती है। साथ ही गर्भ में शिशु का विकास दिन प्रतिदिन बढ़ता है इसीलिए वो नौ महीने बच्चे के लिए भी बहुत खास होते हैं। लेकिन कुछ केस में गर्भ में शिशु का विकास अच्छे से नहीं हो पाता है और ऐसा होने का कोई एक नहीं बल्कि कई कारण होते हैं। तो आइये अब जानते हैं की गर्भ में शिशु का विकास सही नहीं होने के क्या क्या कारण होते हैं।

भरपूर पोषक तत्व नहीं मिलना

गर्भावस्था के दौरान खान पान बहुत अधिक महत्व रखता है लेकिन यदि महिला सही खान पान की बजाय गलत खान पान जैसे की जंक फ़ूड, कच्चा खाना, बासी खाना, पोषक तत्व जिस आहार में मौजूद नहीं है वो खाना खाती है, सही समय से आहार का सेवन नहीं करती है, आदि तो इसके कारण शिशु को भरपूर पोषक तत्व नहीं मिलते हैं। जिसकी वजह से शिशु के विकास में कमी आती है।

महिला का तनाव लेना

प्रेगनेंसी के दौरान जो महिलाएं बहुत ज्यादा टेंशन में रहती हैं तनाव लेती हैं। तो इसका बुरा असर भी गर्भ में पल रहे शिशु पर देखने को मिलता है जिसकी वजह से शिशु के विकास में कमी आती है।

एमनियोटिक फ्लूड की कमी

गर्भ में शिशु एमनियोटिक फ्लूड में होता है और एमनियोटिक फ्लूड गर्भ में शिशु के बेहतर विकास में मदद करता है। लेकिन यदि महिला के गर्भाशय में एमनियोटिक फ्लूड की कमी होती है तो इस कारण बच्चे के विकास में कमी होने का खतरा बढ़ जाता है।

नशीले पदार्थों का सेवन

जो प्रेग्नेंट महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान किसी भी तरह के नशे का सेवन करती हैं जैसे की अल्कोहल, धूम्रपान, आदि। तो इन नशों का बुरा प्रभाव पड़ने के कारण शिशु का शारीरिक और मानसिक विकास बुरी तरह प्रभावित होता है। जिसकी वजह से शिशु के वजन में कमी, शिशु के मानसिक विकास में कमी जैसी समस्याएँ बच्चे को होती है।

दवाइयों का सेवन

गर्भावस्था के दौरान महिला को बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में इन परेशानियों से बचे रहने के लिए महिला यदि अपनी मर्ज़ी से दवाइयों का सेवन करती है। तो इन दवाइयों का प्रभाव गर्भनाल के रास्ते शिशु तक भी पहुँचता है जिसकी वजह से शिशु के विकास में कमी आ सकती है।

संक्रमण

गर्भावस्था के दौरान यदि महिला को किसी भी तरह का संक्रमण हो जाता है तो इसके कारण गर्भ में शिशु भी प्रभावित हो सकता है। जिसकी वजह से शिशु के विकास में कमी आ सकती है।

सही टीकाकरण न होने के कारण

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को कुछ दवाइयों का सेवन व् टीकाकरण करवाने के लिए कहा जाता है। लेकिन यदि महिला न तो अपनी दवाइयों को समय से लेती है और न ही टीकाकरण करवाती है तो इसके कारण महिला के साथ शिशु के विकास पर भी बुरा असर पड़ता है।

गर्भ में शिशु के बेहतर विकास के लिए यह करें

  • महिला अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखें ताकि महिला को स्वस्थ रहने और गर्भ में शिशु के बेहतर विकास में मदद मिल सके।
  • फोलेट, आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन्स से भरपूर पोषक तत्वों का सेवन महिला को करना चाहिए।
  • गर्भ में शिशु के बेहतर विकास के लिए महिला गर्भ में शिशु से बातें करें, शिशु को कहानियां सुनाएँ, पेट पर हाथ फिराएं।
  • गलत खान पान व् नशीले पदार्थों के सेवन से गर्भवती महिला दूरी रखें।
  • प्रेग्नेंट महिला जितना हो सके अपने आप को खुश रखें और टेंशन नहीं ले।
  • इम्युनिटी को मजबूत रखें ताकि बिमारियों व् संक्रमण से बचे रहने में मदद मिल सके।
  • भरपूर आराम करें।
  • गर्भावस्था के दौरान किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करें।
  • सही समय पर गर्भवती महिला अपने जांच करवाएं, टीकाकरण करवाएं, और दवाइयों का सेवन करें।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से गर्भ में शिशु का विकास सही नहीं हो पाता है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान महिला को इन सभी बातों का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। ताकि महिला को किसी भी तरह की दिक्कत नहीं हो और शिशु का विकास भी अच्छे तरीके से हो सके।

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