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इन कारणों से गर्भ में शिशु को परेशानी होती है?

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गर्भ में पल रहा शिशु पूरी तरह से अपनी माँ पर निर्भर करता है इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखने की सलाह भी दी जाती है ताकि गर्भ में पल रहा शिशु स्वस्थ रहे। ऐसे में जितना अच्छे से महिला प्रेगनेंसी के दौरान केयर करती है उतना ही फायदा माँ व् बच्चे दोनों के स्वास्थ्य को मिलता है। साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान गर्भ में पल रहे शिशु को कोई दिक्कत नहीं हो इसके लिए महिला के पास यह जानकारी होना भी जरुरी होता है की कौन कौन सी चीजों से गर्भ में शिशु को परेशानी हो सकती है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान किन कारणों से गर्भ में शिशु को परेशानी होती है उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

पोषण की कमी के कारण

गर्भावस्था के दौरान महिला को पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लेने की सलाह दी जाती है जिससे प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने और गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास में मदद मिल सके। लेकिन यदि महिला पोषक तत्वों से भरपूर डाइट नहीं लेती है तो इसकी वजह से गर्भ में शिशु के विकास पर भी बुरा असर पड़ता है। जिसकी वजह से गर्भ में शिशु परेशानी का अनुभव कर सकता है।

पेट पर दबाव पड़ने की वजह से

गर्भ में शिशु एमनियोटिक फ्लूड में बिल्कुल सेफ होता है लेकिन यदि महिला पेट पर अधिक दबाव डालती है या ऐसा कोई काम करती है जिसकी वजह से पेट पर दबाव पड़ने के साथ झटका आदि लगने का खतरा होता है। तो इनकी वजह से भी गर्भ में शिशु असहज महसूस कर सकता है परेशानी का अनुभव कर सकता है।

प्रदूषित वातावरण

प्रदूषित वातावरण का भी सेहत पर बहुत बुरा असर पड़ता है यदि महिला ऐसी जगह पर जाती है जहां भीड़भाड़ व् बहुत ज्यादा प्रदूषण होता है। तो ऐसी जगह जाने पर महिला को इन्फेक्शन, आपकी सांस लेने के माध्यम से धुआं आदि शरीर में जाने के कारण सेहत पर बहुत उल्टा प्रभाव पड़ता है। और इनके उल्टे प्रभाव से गर्भवती महिला को दिक्कत होने के साथ गर्भ में शिशु को दिक्कत होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

गलत खान पान

प्रेगनेंसी के समय महिला को ताजा, संतुलित व् पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लेने की सलाह दी जाती है। लेकिन महिला इसकी बजाय यदि जंक फ़ूड, ज्यादा मसाले और तेल वाले आहार, बासी व् ठन्डे भोजन का सेवन करती है। तो इसकी वजह से गर्भवती महिला के शरीर में पोषक तत्वों की कमी होने का खतरा रहता है। जिसके कारण शिशु के विकास में कमी आ सकती है और शिशु को दिक्कत हो सकती है।

नींद में कमी के कारण

गर्भवती महिला यदि समय से सोती नहीं है या नींद पूरी नहीं लेती है तो इसके कारण महिला की शारीरिक के साथ मानसिक रूप से परेशानी बढ़ने का भी खतरा रहता है। और प्रेगनेंसी के दौरान जब महिला किसी दिक्कत का सामना करती है तो उसका असर शिशु पर पड़ने का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे में महिला के नींद पूरी न लेने के कारण भी गर्भ में शिशु को परेशानी का अनुभव होता है।

तेज आवाज़ के कारण

गर्भ में दूसरी तिमाही के आखिर तक शिशु की सुनने की क्षमता में थोड़ी वृद्धि होने लगती है। ऐसे में यदि महिला तेज आवाज़ वाली जगह पर रहती है। तो शिशु तेज आवाज़ सुनकर चौंक जाता है घबरा जाता है जिसकी वजह से शिशु असहज महसूस करके ज्यादा हलचल करने लग जाता है। साथ ही ज्यादा तेज आवाज़ होने के कारण शिशु के सुनने की क्षमता पर भी बुरा असर पड़ता है।

स्ट्रैस

गर्भावस्था के समय कुछ महिलाएं स्ट्रैस की समस्या से परेशान रहती है इसका कारण होता है की महिला प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली दिक्कतों व् प्रेगनेंसी व् बच्चे के बारे में ज्यादा सोच सोच कर मानसिक रूप से परेशान रहती है। और इस चक्कर में महिला को शारीरिक रूप से भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। और जब महिला को शारीरिक रूप से और मानसिक रूप से दिक्कत होती है तो गर्भ में शिशु को भी परेशानी होने का खतरा बढ़ जाता है।

नशीली चीजों का सेवन करने के कारण

प्रेग्नेंट महिला यदि धूम्रपान, शराब, जरुरत से ज्यादा कैफीन आदि का सेवन करती है तो इनके कारण भी गर्भ में शिशु को बहुत ज्यादा दिक्कत होने का खतरा रहता है।

तो यह हैं कुछ चीजें जिनकी वजह से गर्भ में शिशु को परेशानी का अनुभव हो सकता है ऐसे में गर्भवती महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की महिला ऐसी कोई भी हरकत नहीं करे जिससे गर्भ में शिशु को परेशानी का अनुभव हो।