इस वजह से गर्भ में शिशु को साँस लेने में परेशानी होती है

माँ के गर्भ में शिशु को सांस लेने में दिक्कत होती है या नहीं, इसके बारे में जानने से पहले यह जानना जरुरी होता है। की माँ के गर्भ में बच्चा सांस लेता है या नहीं? तो इसका जवाब है की जैसे जैसे प्रेगनेंसी आगे बढ़ती है वैसे वैसे गर्भ में पल रहे शिशु के फेफड़ों का विकास भी बढ़ता है। लेकिन गर्भ में जब शिशु होता है तो शिशु के फेफड़ों में फ्लूड भरा होता है। जो शिशु के जन्म लेने के बाद शिशु के पहली बार रोने पर बाहर निकलता है और उसके बाद शिशु अपनी सांस लेना शुरू करता है। लेकिन यह बात भी सच है की शिशु तक यदि ऑक्सीजन का प्रवाह अच्छे से नहीं होता है तो गर्भ में शिशु को खतरा हो सकता है।

और शिशु तक यह ऑक्सीजन खून के साथ पहुंचाई जाती है। जिससे शिशु का विकास दिन प्रतिदिन आगे बढ़ता है। और इसका मतलब यह होता है की जिस तरह गर्भ में शिशु अपने विकास के लिए, पोषक तत्वों के लिए अपनी माँ पर निर्भर करता है। वैसे ही गर्भ में पल रहे शिशु की जगह सांस भी उसकी माँ ही लेती है। तो आइये अब जानते हैं की शिशु तक ऑक्सीजन का फ्लो कब अच्छे से नहीं होता है या शिशु कब गर्भ में सांस अच्छे से नहीं ले पाता है।

खून की कमी होने पर

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को ज्यादा खून की जरुरत पड़ती है। ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला के शरीर में खून की कमी हो जाये तो इसके कारण बच्चे के विकास के लिए पर्याप्त खून बच्चे तक नहीं पहुँच पाता है। जिसकी वजह से बच्चे को ऑक्सीजन भी पर्याप्त मात्रा में नहीं मिलती है। और इस वजह से गर्भ में बच्चा दिक्कत भी महसूस कर सकता है।

गर्भनाल के सूखने पर

गर्भवती महिला के शरीर में पानी की कमी हो तो इसकी वजह से न केवल एमनियोटिक फ्लूड की कमी हो जाती है। बल्कि गर्भनाल पर भी इसका बुरा असर पड़ जाता है जिसकी वजह से कुछ केस में देखने को मिलता है। की गर्भनाल सूखने लगती है और गर्भनाल सूखने की वजह से शिशु तक ब्लड व् ऑक्सीजन का प्रवाह अच्छे से नहीं हो पाता है। जिसकी वजह से गर्भ में बच्चा दिक्कत महसूस करता है। ऐसे में इस परेशानी से बचने के लिए गर्भवती महिला को शरीर में तरल पदार्थों की कमी नहीं होने देनी चाहिए।

बच्चे के ज्यादा टाइट गर्भनाल को गर्दन में लपेटने पर

गर्भ में बच्चे जब मूवमेंट करता है तो कई बार गर्भनाल को अपनी गर्दन या बॉडी में लपेट लेता है। ऐसा करना बहुत आम होता है और फिर शिशु इससे बाहर भी निकल जाता है। लेकिन प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में बच्चे का विकास बढ़ चूका होता है ऐसे में कुछ केस में जब बच्चा गर्भनाल को गर्दन में लपेट लेता है तो वो टाइट हो जाती है और बच्चा उसे खोल नहीं पाता है। जिसकी वजह से बच्चे तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुँच पाती है। ऐसे में केस में बच्चे की जान बचाने के लिए डॉक्टर्स सिजेरियन डिलीवरी करवाने की सलाह देते हैं।

बॉडी में ब्लड फ्लो सही न होने पर

गर्भावस्था के दौरान यदि प्रेग्नेंट महिला के शरीर में ब्लड फ्लो अच्छे से नहीं होता है तो इस कारण भी बच्चे तक खून व् ऑक्सीजन अच्छे से नहीं पहुँचती है। जिसके कारण गर्भ में बच्चा परेशानी महसूस कर सकता है।

तो यह हैं कुछ परिस्थितियां जब शिशु तक ऑक्सीजन का प्रवाह अच्छे से नहीं हो पाता है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान महिला को इन सभी बातों का ध्यान रखना चाहिए। ताकि गर्भ में पल रहे बच्चे का विकास अच्छे से हो सके। और शिशु तक खून व् ऑक्सीजन के फ्लो में किसी भी तरह की दिक्कत न आएं।