प्रेगनेंसी के सातवें महीने में इन बातों का ध्यान रखना जरुरी होता है?

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प्रेगनेंसी के दौरान एक से लेकर नौ महीने तक महिला बहुत से उतार चढ़ाव से गुजरती है ऐसे में महीने दर महीने महिला को लाइफ स्टाइल रहन सहन में कुछ न कुछ बदलाव जरूर करना पड़ता है साथ ही महिला को पूरी सावधानी भी बरतनी जरुरी होती है। ताकि प्रेग्नेंट महिला और बच्चा दोनों स्वस्थ रह सकें। आज इस आर्टिकल में हम आपसे प्रेगनेंसी के सातवें महीने में महिला को कौन कौन सी सावधानी बरतने की जरुरत होती है उसके बारे में बात करने जा रहे हैं।

गर्भावस्था का सातवां महीना

प्रेगनेंसी के सातवें महीने में महिला का वजन बढ़ा हुआ होता है, पेट बाहर की तरफ निकल जाता है, गर्भ में शिशु का विकास तेजी से हो रहा होता है, महिला की शारीरिक परेशानियां बढ़ सकती है, गर्भ में शिशु की हलचल बढ़ जाती है, यदि किसी तरह की लापरवाही की जाये तो समय से पहले जन्म का खतरा होता है, ऐसे ही कुछ बदलाव का अनुभव प्रेगनेंसी के सातवें महीने में महिला करती है। ऐसे में माँ और बच्चे को कोई दिक्कत नहीं हो इसके लिए जरुरी है की महिला पूरी सावधानी बरतें।

गर्भावस्था के सातवें महीने में महिला को कौन कौन सी सावधानियां बरतनी चाहिए

प्रेगनेंसी के सातवें महीने में महिला को कोई दिक्कत नहीं और और शिशु का विकास अच्छे तरीके से हो इसके लिए महिला को कौन कौन सी सावधानी बरतनी चाहिए आइये उसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

वजन उठाने से बचें

प्रेग्नेंट महिला को सातवें महीने में भारी वजन उठाने से बचना चाहिए। क्योंकि भरे चीजों को उठाने के कारन महिला के पेट पर दबाव पड़ता है जिसकी वजह से माँ और बच्चे दोनों को परेशानी का अनुभव करना पड़ सकता है।

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झुककर काम नहीं करें

ऐसा कोई भी काम नहीं करें जिसमे महिला को झुकना पड़े क्योंकि प्रेगनेंसी के सातवें महीने में महिला का पेट बाहर की और निकला हुआ होता है। ऐसे में झुककर किसी भी काम को करने की वजह से प्रेग्नेंट महिला और बच्चे को परेशानी का अनुभव करना पड़ सकता है।

भागादौड़ी नहीं करें

गर्भावस्था के सातवें महीने में महिला को ज्यादा भागादौड़ी नहीं करनी चाहिए क्योंकि इसके कारण संकुचन होने का खतरा बढ़ जाता है। जिसकी वजह से गर्भ में शिशु को समस्या होने का खतरा रहता है।

खाते समय रखें इस बात का ध्यान

गर्भावस्था के दौरान महिला की पाचन क्रिया धीमी पड़ सकती है और सातवें महीने गर्भाशय का आकार बढ़ने के कारण महिला को पाचन क्रिया से जुडी समस्या होने का खतरा अधिक रहता है। ऐसे में सातवें महीने में महिला को पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लेने के साथ इस बात का ध्यान रखना चाहिए की महिला थोड़ा थोड़ा करके अच्छे से चबाकर खाये। ताकि गर्भवती महिला को कब्ज़, अपच, गैस, जी मिचलाना, सीने में जलन, जैसी परेशानियों से बचे रहने में मदद मिल सके।

सोने की पोजीशन का रखें ध्यान

प्रेगनेंसी के सातवें महीने में पेट बाहर आने के कारण महिला को नींद लेने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में गहरी नींद के लिए महिला को प्रेगनेंसी पिल्लो का इस्तेमाल करना चाहिए या फिर महिला को बाईं और करवट लेकर सोना चाहिए इन दोनों ही तरीकों से प्रेग्नेंट महिला को गेंरी नींद लेने मदद मिलती है।

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घर का काम करते समय बरतें सावधानी

प्रेगनेंसी के सातवें महीने में घर के केवल वो काम करने चाहिए जिनमे महिला को किसी तरह की परेशानी नहीं हो। साथ ही महिला को ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए जिन्हे करने पर महिला को ज्यादा जोर लगाना पड़े, महिला के पेट पर दबाव पड़े या महिला को लम्बे समय तक एक ही जगह खड़े रहना पड़े। क्योंकि इन सभी कामों को करने से महिला की शारीरिक परेशानियां बढ़ सकती है।

स्ट्रेचमार्क्स

प्रेगनेंसी के सातवें महीने में महिला को स्ट्रेचमार्क्स की समस्या अधिक न हो इसके लिए कोई न कोई घरेलू नुस्खा जरूर ट्राई करना चाहिए।

व्यायाम

प्रेगनेंसी के सातवें महीने में महिला का वजन बढ़ जाता है ऐसे में महिलाएं अपने वजन को कम करने के लिए गलती से भी डाइट नहीं करें। क्योंकि यदि महिला डाइट करेंगी यानी अपने खान पान में लापरवाही बरतेंगी तो इसका असर माँ और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य को बुरी तरह से प्रभावित करेगा।

दवाइयों का सेवन

गर्भावस्था के सातवें महीने में महिला को जो विटामिन्स की दवाइया डॉक्टर ने लेने के लिए कहा है उनका समय से सेवन करना चाहिए। साथ ही यदि महिला को कोई दिक्कत हो तो उसके इलाज के लिए अपनी मर्ज़ी से किसी भी दवाई का सेवन नहीं करना चाहिए।

नशीले पदार्थों का सेवन नहीं करें

गर्भावस्था के सातवें महीने में महिला को किसी भी तरह के नशीले पदार्थ का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि इन चीजों के सेवन से समय से पहले बच्चे का जन्म जैसी परेशानी होने का खतरा रहता है।

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तनाव नहीं लें

गर्भावस्था के सातवें महीने में महिला को बिल्कुल भी टेंशन नहीं लेनी चाहिए। क्योंकि तनाव लेने के कारण माँ और बच्चे दोनों को दिक्कत हो सकती है।

मौसम के साथ सावधानी

यदि आपको प्रेगनेंसी का सातवां महिला चल रहा है साथ ही मौसम में भी बदलाव हो रहा है तो महिला को बदलते मौसम के साथ अपनी सेहत का ज्यादा ध्यान रखना चाहिए। ताकि बदलते मौसम के साथ महिला को किसी भी तरह की परेशानी नहीं।

तो यह हैं कुछ सावधानियां जो प्रेगनेंसी के सातवें महीने में महिला को बरतनी चाहिए। यदि महिला इन सावधानियों का ध्यान रखती है और किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करती है तो ऐसा करने से प्रेग्नेंट महिला और बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

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