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प्रेगनेंसी में देर रात खाना खाने से शिशु को क्या नुकसान पहुँचता है?

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प्रेगनेंसी के दौरान दिनचर्या का सही होना बहुत जरुरी है यानी की महिला का खाने का, सोने का, आराम करने का, दवाई लेने का, व्यायाम आदि करने का एक सही समय होना बहुत जरुरी होता है। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान महिला की दिनचर्या जितनी सही होती है उतना ही ज्यादा महिला की हेल्थ को बेहतर रहने में मदद मिलती है।

खासकर प्रेगनेंसी के दौरान अपनी डाइट का सही समय से सेवन करना बहुत जरुरी होता है क्योंकि सही समय से डाइट लेने और पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लेने से गर्भवती महिला के शरीर में पोषक तत्वों की मात्रा को सही रहने में मदद मिलती है साथ ही खाना अच्छे से हज़म भी हो जाता है। जिससे महिला तो स्वस्थ रहती है साथ ही बच्चे के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है।

ऐसे में महिला को सुबह से लेकर रात के खाने तक का सही रूटीन बना लेना चाहिए। लेकिन यदि कोई गर्भवती महिला अपने खान पान को सही समय पर नहीं लेती है तो इसकी वजह से गर्भ में शिशु और महिला दोनों की हेल्थ को नुकसान पहुँचने का खतरा रहता है। तो आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेग्नेंट महिला को रात को देरी से खाना खाने के कारण कौन कौन से नुकसान होते हैं उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

गर्भावस्था के दौरान रात को देरी से खाना खाने के कारण शिशु को होने वाले नुकसान

यदि महिला परिवार के चक्कर में, टीवी देखने के चक्कर में या अन्य किसी कारण रात के खाने में देरी करती है और ऐसा एक दिन नहीं बल्कि रोजाना होता है। तो इसकी वजह से महिला को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है और जब महिला को दिक्कत होती है तो गर्भ में पल रहे शिशु पर भी इसका बुरा असर पड़ता है। जैसे की:

वजन बढ़ने के कारण होती है शिशु को समस्या

गर्भवती महिला यदि रात का खाना देरी से खाती है तो इसकी वजह से खाना अच्छे से हज़म नहीं होता है और मेटाबोलिज्म रेट भी कम हो जाता है। जिसके कारण बॉडी पर फैट का जमाव होना शुरू हो जाता है और महिला का वजन जरुरत से ज्यादा बढ़ने लगता है जिसकी वजह से महिला को स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानी होने लगती है। साथ ही महिला का वजन बढ़ने के कारण गर्भ में शिशु के विकास पर भी बुरा असर पड़ता है क्योंकि जब महिला को वजन बढ़ने के कारण दिक्कत होती है तो इसका बुरा असर शिशु पर भी पड़ता है।

नींद सही तरीके से न लेने के कारण पड़ता है शिशु के विकास पर असर

लेट खाना खाने के कारण आपको सोने में देरी हो सकती है साथ ही खाना लेट खाने के कारण नींद से जुडी समस्या होने का भी खतरा होता है। और यदि महिला की नींद पूरी नहीं होती है या अनिद्रा की समस्या महिला को हो जाती है तो इसके कारण महिला को स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानी होने का खतरा रहता है। और जब प्रेग्नेंट महिला को कोई दिक्कत होती है तो उसका नकारात्मक असर गर्भ में शिशु पर भी पड़ता है।

नाश्ते में देरी के कारण होती है शिशु के लिए जरुरी पोषक तत्वों की कमी

यदि गर्भवती महिला रात को खाना लेट खाती है तो सोने में देरी होती है जिसकी वजह से सुबह उठने में देरी होती है और महिला का नाश्ता करने का कोई समय नहीं रहता है और उस चक्कर में दो समय का खाना एक समय के खाने में बदल जाता है। जिसकी वजह से शरीर में पोषक तत्वों की कमी होने का खतरा होता है और यदि गर्भवती महिला के शरीर में पोषक तत्वों की कमी होती है तो इसकी वजह से शिशु को अपने विकास के लिए जरुरी पोषक तत्व भरपूर नहीं मिलते हैं जिससे शिशु के विकास में कमी आने का खतरा होता है।

तनाव डालता है शिशु के विकास पर असर

खाना लेट खाने के कारण आपके अगले दिन का रूटीन सही से शुरू ही नहीं होता है क्योंकि पहले आप उठते लेट हैं, उसके बाद नाश्ते में देरी और फिर हर काम लेट होता जाता है। जिसके कारण महिला को चिड़चिड़ापन, स्ट्रेस जैसी समस्या होने का खतरा बढ़ जाता है। और गर्भवती महिला यदि तनाव लेती है तो इसका बुरा असर शिशु के शारीरिक व् मानसिक विकास पर पड़ता है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी में रात का खाना देरी से खाने पर शिशु को होने वाले नुकसान, ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान शिशु के विकास में किसी तरह की कमी नहीं आये और महिला भी हेल्दी रहे। इसके लिए गर्भवती महिला को रात का खाना समय से खाना चाहिए ताकि आपका रूटीन सही से सेट हो सके।

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