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सातवें या आठवें महीने में डिलीवरी होने के क्या कारण होते हैं?

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समय पूर्व प्रसव

प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। पहली तिमाही में शुरुआती समय होने के कारण थोड़ी सी भी लापरवाही के कारण महिला को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। वहीँ प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही भी महिला के लिए बहुत अहम होती है। क्योंकि इस दौरान महिला का वजन बढ़ जाता हैं, शिशु का विकास तेजी से बढ़ रहा होता है ऐसे में महिला यदि थोड़ी सी भी लापरवाही करती है तो इसके कारण समय पूर्व प्रसव यानी समय से पहले शिशु का जन्म होने का खतरा रहता है। और यदि शिशु का जन्म समय से पहले हो जाता है तो शिशु को वजन में कमी, रोगो के लगने का डर, जन्म के समय होने वाली बीमारियों का खतरा, जैसी समस्या का सामना कारण पड़ सकता है, साथ ही ऐसा होने के कारण महिला को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

समय पूर्व प्रसव के कारण

गर्भवस्था के दौरान महिला को डिलीवरी के लिए एक तिथि दी जाती है और उस तिथि के आस पास शिशु का जन्म होने के चांस सबसे अधिक होते हैं। लेकिन कई बार महिला की दिए गए समय से पहले यानी सातवें या आठवें महीने में ही महिला का प्रसव हो जाता है, और हर महिला को एक ही वजह से समय पूर्व प्रसव की समस्या हो ऐसा कोई जरुरी नहीं होता है। बल्कि ऐसे बहुत से कारण होते हैं जिनकी वजह से महिला को समय पूर्व प्रसव की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की महिला को समय पूर्व प्रसव होने का क्या कारण होता है।

वजन

प्रेगनेंसी के दौरान महिला का वजन बढ़ना जरुरी होता है क्योंकि इसका कारण गर्भ में शिशु के विकास का होना होता है। लेकिन यदि महिला का वजन तेजी से बढ़ने के साथ जरुरत से ज्यादा बढ़ने लगे तो इसके कारण न केवल प्रेगनेंसी के दौरान महिला की कॉम्प्लीकेशन्स बढ़ती है बल्कि इसके कारण समय पूर्व प्रसव का खतरा भी बढ़ सकता है। इसके अलावा यदि महिला का वजन बहुत कम भी होता है तो भी महिला को यह समस्या हो सकती है।

जल्दी प्रेगनेंसी

जिन महिलाओं को पहले शिशु के जन्म के बाद बहुत जल्दी प्रेगनेंसी हो जाती है उन्हें भी इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि हो सकता है की गर्भाशय में कमजोरी हो, महिला शारीरिक रूप से फिट न हो, ऐसे में भी समय से पहले शिशु के होने के चांस बढ़ सकते हैं।

अनुवांशिक

यदि आपके घर में या आपको ही पहले समय पूर्व प्रसव हुआ है तो भी दूसरी बार आपको यह समस्या हो सकती है। ऐसे में महिला को इस परेशानी से बचने के लिए अपना बहुत ज्यादा ख्याल रखने की जरुरत होती है।

एक से ज्यादा शिशु

कुछ महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान जुड़वां या तीन बच्चों को इक्कठे जन्म दे सकती है, ऐसे में यदि महिला के गर्भ में एक से ज्यादा शिशु होते हैं। तो भी गर्भवती महिला को इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

ब्लीडिंग की समस्या

प्रेगनेंसी के दौरान महिला बहुत सी परेशानियों का सामना कर सकती है। ऐसे में कुछ महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान ब्लीडिंग की समस्या से भी परेशान हो सकती है। और यदि कोई भी गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान पहली तिमाही में साथ तीसरी तिमाही में भी रक्तस्त्राव की समस्या से परेशान होती है तो इसके कारण भी महिला को समय पूर्व प्रसव जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

महिला को होने वाली शारीरिक परेशानियां

गर्भवस्था के दौरान यदि कोई महिला हाई ब्लड प्रैशर, किसी तरह के संक्रमण आदि से अधिक परेशान रहती है। तो यदि महिला की यह सब परेशानियां अधिक बढ़ जाती है तो इसके कारण भी महिला को समय से पहले शिशु के जन्म के होने का खतरा रहता है।

शिशु का नीचे की तरफ होना

यदि पूरी प्रेगनेंसी के दौरान गर्भ में शिशु का भार नीचे की तरफ होता है तो ऐसा होने के कारण महिला को पूरी तरह से आराम करने की सलाह दी जाती है। ताकि महिला या शिशु को किसी भी तरह की परेशानी न हो। लेकिन यदि महिला ऐसे में अपना ख्याल अच्छे से नहीं रखती है तो इसके कारण समय से पहले प्रसव पीड़ा होने का डर रहता है।

आयरन की कमी

जिन गर्भवती महिला में प्रेगनेंसी के दौरान आयरन की कमी होती है उन महिलाओं को भी इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। और केवल महिला ही नहीं इसके कारण शिशु पर भी बुरा असर पड़ सकता है इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को पर्याप्त मात्रा में आयरन लेने की सलाह दी जाती है।

गर्भाशय

इन्फेक्शन या किसी अन्य कारण की वजह से महिला का गर्भाशय यदि कमजोर होता है, ऐसे में शिशु के बढ़ते वजन के कारण गर्भाशय का मुख समय से पहले खुलने की आशंका रहती है। जिसके कारण भी महिला को समय से पहले डिलीवरी होने की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

डॉक्टर की राय

कई बार गर्भ में पल रहे शिशु की हलचल कम होने लगती है, शिशु का विकास रुक जाता है, शिशु को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है, या गर्भ में शिशु को कोई समस्या होती है तो कुछ केस में डॉक्टर भी समय से पहले ही महिला को डिलीवरी करवाने की राय दे सकते हैं।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से महिला की डिलीवरी समय से पहले होने का खतरा रहता है, ऐसे में यदि आप गर्भवती है तो आपको ऐसी कोई परेशानी न हो इसके लिए आपको अपना बेहतर तरीके से ख्याल रखने के साथ डॉक्टर के संपर्क में रहना चाहिए ताकि कोई भी परेशानी होने से बचने में मदद मिल सके। और समय पूर्व प्रसव के खतरे से बचने के साथ जन्म के बाद शिशु और महिला दोनों को ही हर तरह की समस्या से सुरक्षित रखने में मदद मिल सके।