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गर्भावस्था में यह 8 लक्षण हैं तो खुश हो जाएँ

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गर्भावस्था का अनुभव

प्रेगनेंसी किसी भी महिला के लिए उसकी जिंदगी के बेहतरीन लम्हो में से एक होता है, ऐसे में गर्भवती महिला के लिए प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने नए अनुभवों और बदलाव से भरे हुए होते हैं। इस दौरान महिला के गर्भ में पल रहे शिशु का विकास भी दिन प्रतिदिन बढ़ता रहता है। प्रेगनेंसी के समय महिला शारीरिक, मानसिक व् भावनात्मक रूप से अपने अंदर बदलाव महसूस करती है। चाहे फिर वो महिला के शरीर की शेप में आया बदलाव हो, या फिर शिशु की पहली किक का अनुभव, प्रेगनेंसी का हर दिन महिला को कुछ नया सोचने के लिए प्रेरित करता है। ऐसे में महिला की बॉडी हमेशा कुछ न कुछ संकेत जरूर देती है जो की न केवल महिला के स्वास्थ्य के बारे में बताते हैं बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु के विकास से भी जुड़े हुए होते हैं।

प्रेगनेंसी में यह लक्षण होते हैं ख़ुशी की वजह

प्रेग्नेंट महिला यदि प्रेगनेंसी के दौरान यदि कुछ ऐसे लक्षण होते हैं जिनका अनुभव यदि महिला करती है, तो यह प्रेगनेंसी के दौरान महिला के लिए बहुत ख़ुशी की बात होती है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान किन लक्षणों को देखकर महिला को खुश होना चाहिए।

शिशु की हार्ट बीट

दिल की धड़कन का होना एक आम आदमी की जिंदगी में क्या महत्व रखता है इस बारे में तो आप सब जानते ही होंगे। वैसे ही गर्भ में शिशु की धड़कन को पहली बार सुनना हर गर्भवती महिला के लिए उसके शिशु का करीब से अनुभव करने जैसा ही होता है, और यह गर्भवती महिला के लिए बहुत ही ख़ुशी भरा पल भी होता है। प्रेगनेंसी के पहले अल्ट्रासॉउन्ड के दौरान आप शिशु की हार्ट बीट आ गई है इस बारे में सुनकर गर्भवती महिला बहुत खुश होती है। साथ ही उसके बाद जब भी आप शिशु की धड़कन को सुनना चाहते है तो जब भी अपने रूटीन चेक अप के लिए जाएँ तो इसके लिए अपने डॉक्टर से कहें वो आपको जरूर सुनाएगी।

गर्भवती महिला का वजन

गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला के शरीर में बहुत से बदलाव आते हैं, ऐसे में महिला के वजन में बदलाव आना भी आम बात होती है। क्योंकि शिशु का विकास जैसे जैसे बढ़ता है वैसे वैसे महिला का वजन भी बढ़ता है। ऐसे में यदि महिला का वजन यदि सही तरीके से बढ़ रहा हो, तो यह भी गर्भवती महिला के लिए ख़ुशी की वजह होती है की सही तरीके से वजन का बढ़ना गर्भ में शिशु के बेहतर विकास होने की तरफ इशारा करता है।

फीटल किक

गर्भ में शिशु का विकास तो आप अल्ट्रासॉउन्ड के माध्यम से देख सकते हैं, लेकिन गर्भ में पल रहे शिशु का पहला अहसास गर्भ में शिशु की किक करने पर ही होता है, जो हर गर्भवती महिला के लिए उसके प्रेगनेंसी के सभी अनुभवों में से सबसे खास होता है। प्रेगनेंसी के बीसवें हफ्ते के आस पास गर्भ में शिशु हलचल करनी शुरू करता है। और शुरुआत में शिशु की हलचल थोड़ी कम महसूस होती है, लेकिन जैसे जैसे शिशु का विकास बढ़ता है वैसे वैसे शिशु की मूवमेंट भी बढ़ने लगती है और महिला ज्यादा समय के लिए इस अनुभव का आनंद ले सकती है।

ब्लड

ब्लड टेस्ट प्रेगनेंसी के दौरान किया जाता है, और ऐसे में यदि टेस्ट में ब्लड की कमी आये तो इसके कारण गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन यदि ब्लड रिपोर्ट में गर्भवती महिला के शरीर में आयरन पूरा आता है, तो यह गर्भवती महिला के लिए बहुत ख़ुशी की बात होती है, क्योंकि बॉडी में आयरन का पर्याप्त मात्रा में होना गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली परेशानियों से बचाने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में भी मदद करता है।

शारीरिक परेशानियों का कम होना

गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला अपने स्वास्थ्य का बेहतर तरीके से ध्यान रखती है तो इससे प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियों को कम करने में मदद मिलती है। और जितना प्रेगनेंसी के दौरान महिला स्वस्थ रहती है उतना ही गर्भ में शिशु का विकास बेहतर होने साथ डिलीवरी के दौरान आने वाली परेशानियों को कम करने के साथ नोर्मल डिलीवरी के चांस को बढ़ाने में भी मदद मिलती है।

खाने पीने में परेशानी न होना

बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण कई गर्भवती महिलाओं को भूख में कमी, जीभ के स्वाद में परिवर्तन, खाने की खुशबू के कारण उल्टी जैसा महसूस होना जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन यदि आप प्रेग्नेंट हैं और आपको ऐसी कोई भी परेशानी नहीं है तो यह बहुत ही ख़ुशी की बात है। क्योंकि गर्भवती महिला जितना बेहतर तरीके से अपने आहार का सेवन करती है उतना ही बॉडी को पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मिलते हैं। जिससे गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने और गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में मदद मिलती है।

बेहतर नींद

वजन बढ़ने, तनाव के कारण, प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली शारीरिक परेशानियों के कारण हो सकता है की गर्भवती महिला को नींद में कमी जैसी परेशानी का सामना करना पड़ जाए। लेकिन यदि आप गर्भवती है और आपको नींद से जुडी कोई समस्या नहीं है और आप नींद को भरपूर मात्रा में लेती हैं तो यह भी प्रेगनेंसी के दौरान खुश होने वाली बात होती है।

एक्टिव रहना

प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले बदलाव, बॉडी में हो रहे हार्मोनल बदलाव के बाद भी यदि गर्भवती महिला अपने आप को फिट रखती है, एनर्जी से भरपूर रहती है, एक्टिव रहती है। तो यह भी प्रेग्नेंट महिला के लिए बहुत ख़ुशी की बात होती है, क्योंकि जितना महिला प्रेगनेंसी के दौरान एक्टिव रहती है उतना ही ज्यादा गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं वह लक्षण जिन्हे महसूस करना गर्भवती महिला के लिए ख़ुशी की बात होती है। इसके अलावा यदि गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान किसी शारीरिक समस्या के कारण परेशान होती है या असहज महसूस करती है तो गर्भवती महिला को इसे बिल्कुल भी अनदेखा नहीं करना चाहिए और इस समस्या से बचने के लिए जितना जल्दी हो सके एक बार डॉक्टर से राय लेनी चाहिए। ताकि प्रेग्नेंट महिला को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।