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प्रेगनेंसी में होने वाले संकुचन का मतलब समझें

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प्रेगनेंसी किसी भी महिला के लिए आसान समय नहीं होता है, क्योंकि इस दौरान गर्भवती महिला को बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इस दौरान संकुचन का होना भी आम बात होती है, और इसे लेकर गर्भवती महिला का घबराना भी आम बात होती है। क्योंकि संकुचन का अनुभव प्रसव के दौरान सबसे ज्यादा होता है। इसके अलावा नौ महीने तक बहुत बार महिला संकुचन का अनुभव हो सकता है। ऐसे में किसी एक ही कारण से संकुचन हो ऐसा कोई जरुरी नहीं होता है, और संकुचन का अनुभव होना हमेशा सेलीवेरय होने का ही संकेत नहीं देता है। तो लीजिये आज हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान समय समय पर होने वाले संकुचन का क्या मतलब होता है उस बारे में बताने जा रहे हैं।

पहली तिमाही में संकुचन होने का कारण

प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में भी गर्भवती महिला को संकुचन का अनुभव हो सकता है, और इस तरह के संकुचन होने के कई कारण हो सकते हैं। जैसे की पेट में ऐंठन होने के कारण, गर्भाशय के लिगामेंट्स में खिंचाव होने के कारण, गर्भाशय का आकार बढ़ने के कारण, गर्भपात होने के कारण भी संकुचन का अनुभव हो सकता है।

डिहाइड्रेशन होने के कारण

गर्भवती महिला को पानी भरपूर मात्रा में पीने की सलाह दी जाती है। क्योंकि यह गर्भवती महिला को फिट रखने के साथ गर्भ में में पल रहे शिशु के स्वास्थ्य के लिए भी जरुरी होता है। लेकिन यदि बॉडी में पानी में कमी होती है, तो इसके कारण मांसपेशियों में सिकुड़न आने के साथ डिहाइड्रेशन की समस्या हो जाती है। जिसके कारण संकुचन का अनुभव गर्भवती महिला को हो सकता है। इसके अलावा अधिक मात्रा में कैफीन, कोल्ड ड्रिंक आदि का भी अधिक सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसके कारण भी डिहाइड्रेशन जैसी परेशानी का सामना आपको करना पड़ सकता है।

गर्भपात

यदि गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में संकुचन का बहुत अधिक अनुभव होता है, और साथ ही ब्लीडिंग या स्पॉटिंग की समस्या होती है। तो इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए क्योंकि यह एक्टोपिक प्रेगनेंसी या गर्भपात का लक्षण हो सकता है।

कब्ज़ के कारण

गर्भवती महिला को पेट में ऐंठन, गैस, एसिडिटी की समस्या अधिक होना भी संकुचन का कारण हो सकता है। ऐसे में कब्ज़ से राहत पाने के लिए फाइबर युक्त आहार का सेवन करने के साथ ज्यादा कब्ज़ की समस्या रहने पर डॉक्टर से भी राय लेनी चाहिए।

सम्बन्ध बनाने के बाद संकुचन

स्वस्थ प्रेगनेंसी होने पर प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध बनाने में किसी तरह की समस्या नहीं होती है, लेकिन यदि प्रेगनेंसी में किसी तरह की समस्या है। और उसके बाद भी कपल सम्बन्ध बनाता है तो ऐसे में भी संकुचन का अनुभव हो सकता है, और इसके कारण गर्भ में पल रहे शिशु को भी नुकसान पहुँचने का खतरा रहता है।

प्रसव के दौरान संकुचन

डिलीवरी पेन का अनुभव जब शुरुआत में होता है तो रुक रुक कर संकुचन का अनुभव हो सकता है। उसके बाद संकुचन के साथ प्राइवेट पार्ट से डिस्चार्ज आता हुआ महसूस हो तो यह डिलीवरी का लक्षण हो सकता है। ऐसे में इसे अनदेखा न करते हुए जितना जल्दी हो सके डॉक्टर के पास जाना चाहिए, और इस समय लम्बी साँसे लेनी चाहिए इससे गर्भवती महिला को राहत का अहसास होता है।

तो यह है प्रेगनेंसी के दौरान समय -समय पर होने वाले संकुचन के बारे में जानकारी, इसके अलावा यदि आपको बहुत ज्यादा असहज महसूस हो, या कोई परेशानी ज्यादा हो जाये तो उसे अनदेखा न करते हुए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए ताकि गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को होने वाली सभी परेशानियों से निजात पाने में मदद मिल सके।

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