क्यों होती है प्रीमैच्योर डिलीवरी?

गर्भावस्था के दौरान महिला को बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लेकिन यदि महिला अपना अच्छे से ध्यान रखती है तो इन परेशानियों से बचा भी जा सकता है। आज हम प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली एक ऐसी परेशानी के बारे में बात करने जा रहे हैं जिससे माँ व् बच्चे दोनों को परेशानी हो सकती है। और वो समस्या है समय से पहले बच्चे का जन्म यानी प्रीमैच्योर डिलीवरी। लेकिन ऐसा जरुरी नहीं है की यह समस्या आपको होगी। क्योंकि यदि आप प्रेगनेंसी के दौरान अपना अच्छे से ध्यान रखती है तो आपको इस परेशानी से बचने में मदद मिलती है।

क्या होती है प्रीमैच्योर डिलीवरी?

सामान्य गर्भावस्था 40 हफ्तों में पूरी होती है, लेकिन बच्चे का शारीरिक विकास 37 हफ्ते तक पूरी तरह से हो जाता है। इसीलिए प्रेगनेंसी के सेंतीस हफ़्तों के बाद शिशु के जन्म होना सुरक्षित माना जाता है। लेकिन यदि 37 हफ्ते पूरे होने से पहले ही यदि बच्चे का जन्म हो जाता है तो इसे प्रीमैच्योर डिलीवरी या प्रीटर्म बर्थ भी कहा जाता है। साथ ही गर्भावस्था पूरी होने के जितने हफ्तों पहले प्रसव होगा, मां और शिशु के लिए उतना ही असुरक्षित होता है। प्रीमैच्योर डिलीवरी को तीन कैटेगरी में बांटा गया है जैसे की:

एक्सट्रिमली प्रीमैच्योर डिलीवरी:- यदि महिला को डिलीवरी 23वें से 28वें हफ्ते के बीच में हो जाती है तो इसे एक्सट्रिमली प्रीमैच्योर डिलीवरी कहा जाता है।

मॉडरैटली प्रीमैच्योर डिलीवरी:- यदि बच्चे का जन्म प्रेगनेंसी के 29वें से 33वें हफ्ते के बीच होता है तो इसे मॉडरेटली प्रीमैच्योर डिलीवरी कहा जाता है।

लेट प्रीमैच्योर डिलीवरी:- यदि महिला का प्रसव 34वें से 37वें हफ्तों के बीच होता है तो इसे लेट प्रीमैच्योर डिलीवरी कहते हैं।

प्रीमैच्योर डिलीवरी होने के कारण

प्रीमैच्योर डिलीवरी डिलीवरी होने का कोई एक कारण नहीं होता है बल्कि ऐसे बहुत से कारण होते हैं जिनकी वजह से बच्चे का जन्म हो जाता है। यह कारण महिला की लापरवाही, गलत जीवनशैली, मेडिकल से जुड़े होते हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की समय से पहले बच्चे के जन्म होने के क्या कारण होते हैं।

उम्र

गर्भवती महिला की उम्र यदि पेंतीस से ज्यादा और अठारह वर्ष से कम होती है। तो उन महिलाओं के समय से पहले बच्चे के जन्म देने के चांस होते हैं।

पहली डिलीवरी

यदि आपने दूसरी बार गर्भधारण किया है और आपकी पहली डिलीवरी प्रीमैच्योर डिलीवरी हुई है। तो ऐसे में महिला की दुअरी डिलीवरी भी प्रीमैच्योर डिलीवरी होने का खतरा होता है।

गर्भ में शिशु

गर्भवती महिला के गर्भ में एक से ज्यादा शिशु होने पर भी बच्चे का जन्म समय से पहले होने का खतरा रहता है।

अनुवांशिक प्रभाव

आपकी मम्मी, बहन या घर में किसी अन्य की प्रीमैच्योर डिलीवरी हुई है तो उस कारण आपको भी प्रीटर्म बर्थ हो सकता है।

शारीरिक बीमारियां

यदि प्रेग्नेंट महिला शुगर, हाई ब्लड प्रेशर, खून की कमी, संक्रमण की समस्या, शरीर में पोषक तत्वों की कमी होने के कारण कमजोरी अधिक होती है। तो ऐसे केस में भी महिला की सेलीवेरय समय से पहले होने का खतरा होता है।

तनाव

प्रेग्नेंट महिला का तनाव अधिक लेना भी प्रीमैच्योर डिलीवरी का कारण हो सकता है। साथ ही इसके कारण जन्म के समय बच्चे का वजन कम होने जैसी परेशानी हो सकती है।

मोटापा

यदि गर्भवती महिला का वजन जरुरत से ज्यादा होता है। तो इस कारण भी प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स बढ़ने का खतरा होता है जिसके कारण महिला की डिलीवरी समय से पहले होने का खतरा होता है।

नशीले पदार्थों का सेवन

प्रेग्नेंट महिला यदि शराब, धूम्रपान, गलत दवाइयों आदि का सेवन करती है तो इसके कारण भी गर्भ पर बुरा असर पड़ता है जिसकी वजह से महिला की प्रीमैच्योर डिलीवरी होने का खतरा बढ़ जाता है।

महिला द्वारा की गई गलतियां

प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला पेट पर दबाव पड़ने वाले काम अधिक करती है, बहुत ज्यादा ज्यादा समय तक खड़ी रहती है, भारी सामान उठाती है, ट्रैवेलिंग करती है, या ऐसा कोई काम करती है जिसकी वजह से पेट पर झटका लगे या गर्भाशय में संकुचन बढ़ें। तो ऐसे में काम को करने पर भी महिला की डिलीवरी समय से पहले होने का खतरा बढ़ जाता है।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से गर्भवती महिला को समय से पहले बच्चे के जन्म होने का खतरा बढ़ जाता है। यदि आप भी माँ बनने वाली हैं तो आपको इन सभी बातों का ध्यान रखना चाहिए। ताकि आपको डिलीवरी में किसी भी तरह की परेशानी न आए।