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पहली और दूसरी प्रेगनेंसी में क्या फर्क होता है

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पहली और दूसरी प्रेगनेंसी में क्या फर्क होता है, गर्भवती महिला में पहली और दूसरी प्रेगनेंसी में आते हैं यह बदलाव, पहली और दूसरी प्रेगनेंसी में होते हैं यह फर्क, प्रेगनेंसी से जुड़े टिप्स

प्रेगनेंसी किसी भी महिला के लिए बहुत ही प्यारा अहसास होता है फिर चाहे वो पहली बार हो या दूसरी बार हो। लेकिन ऐसे बहुत से बदलाव हैं जो गर्भवती महिला में पहली और दूसरी प्रेगनेंसी के बीच देखने को मिलते हैं। जैसे की पहली प्रेगनेंसी के दौरान महिला में डर और चिंता बहुत अधिक होती है, वहीँ दूसरी प्रेगनेंसी के दौरान महिला थोड़ी निश्चित हो जाती है। इसके अलावा और भी बहुत से बदलाव है जो गर्भवती महिला में पहली और दूसरी प्रेगनेंसी के दौरान देखने को मिलते हैं तो आइये अब जानते हैं की वो बदलाव कौन से हैं।

चिंता होती है कम

पहली बार प्रेगनेंसी के दौरान झना महिला छोटी छोटी बातों को लेकर चिंता करती रहती है, हर बात के बारे में सबसे पूछती रहती है, जैसे की क्या सही है क्या गलत है, अपने शरीर में होने वाले हर बदलाव को लेकर परेशान रहती है, आदि। वहीँ दूसरी प्रेगनेंसी के दौरान महिला को ज्यादातर चीजों के बारे में पता चल जाता है। जिससे महिला की चिंता कम हो जाती है।

डर होता है कम

गर्भवती महिला में प्रेगनेंसी के दौरान गर्भ में पल रहे शिशु को लेकर हमेशा डर रहता है की उसका विकास अच्छे से हो रहा है या नहीं, उसे कोई परेशानी तो नहीं है, महिला द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली हर छोटी छोटी चीज को लेकर महिला डरती रहती है की इसका इस्तेमाल करना चाहिए या नहीं, जबकि दूसरी बार प्रेगनेंसी के दौरान महिला का यह डर कम हो जाता है। हालाँकि शिशु को लेकर हमेशा डर रहता है, लेकिन उसका विश्वास भी बढ़ जाता है क्योंकि गर्भ में पल रह शिशु के लिए क्या सही क्या नहीं इसके बारे में महिला को जानकारी मिल जाती है।

हो जाता है अनुभव

पहली बार माँ बनने के दौरान जहां महिला घर के हर बड़े से राय लेती है, किताबो में, इंटरनेट से इसके बारे में जानकारी इक्कठा करती है। वहीँ दूसरी बार माँ बनने पर शरीर में होने वाले बदलाव आदि से महिला अनजान नहीं रहती है जिससे उसे प्रेगनेंसी का अनुभव हो जाता है, जिससे अब हो सकता है की महिला दूसरों को प्रेगनेंसी में सही क्या है और गलत क्या है इस बारे में राय देने लगती है।

बॉडी शेप को लेकर कम होती है चिंता

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला के शरीर में बदलाव आना बहुत ही आम बात होती है, ऐसे में पेट का आकार बढ़ना, शरीर के बाकी हिस्सों में भी बदलाव देखकर पहली बार महिला जहां बहुत परेशान हो सकती है, वहीँ दूसरी बार महिला शरीर में होने वाले इन बदलाव को जानती है ऐसे में शारीरिक रूप से हो रहे इस बदलाव को देखकर भी महिला ज्यादा चिंता नहीं करती है।

खाने को लेकर समस्या

पहली बार माँ बनने पर जहां महिला इस बात की जानकारी इक्कठा करती है की महिला को क्या खाना चाहिए, क्या नहीं खाना चाहिए, वहीँ दूसरी बार माँ बनने पर महिला को इस बारे में भी पता चल जाता है की गर्भवती महिला के स्वास्थ्य और गर्भ में पल रहे शिशु के लिए क्या सही है और क्या नहीं है। इसीलिए खान पान को लेकर महिला की चिंता कम हो जाती है।

सवाल होते हैं कम

कोई भी महिला जब पहली बार माँ बनती है तो उसके दिमाग में लगातार प्रश्नो का उठना आम बात होती है। जैसे की गर्भ में शिशु का विकास कैसे होता है, प्रेगनेंसी के दौरान सही क्या है, गलत क्या है, क्या करना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए, आदि। लेकिन दूसरी बार माँ बनने पर महिला के मन में उठ रहे यह प्रश्न कम हो जाते हैं।

उत्साह होता है कम

घर में आने वाला शिशु केवल महिला के लिए ही नहीं बल्कि पूरे घर में आने वाली ख़ुशी का कारण बनता है। लेकिन कहीं न कहीं ज्यादातर लोग इस बात को मानेंगे की पहले शिशु के आने पर जहां घर में ज्यादा उत्साह होता है वहीँ दूसरी बार महिला में यह उत्साह कम देखने को मिलता है।

तो यह हैं कुछ बदलाव जो गर्भवती महिला में पहली और दूसरी प्रेगनेंसी के दौरान देखने को मिलते हैं। ऐसे में महिला में जो भी बदलाव आये लेकिन महिला को प्रेगनेंसी के दौरान किसी भी तरह की लापरवाही न करते हुए अपना ख्याल अच्छे से रखना चाहिए।

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