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गर्भावस्था के दूसरे महीने में शिशु का विकास और गर्भवती महिला के शरीर में बदलाव

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गर्भावस्था किसी भी महिला के लिए बहुत ही खास पल होता है। पुरे नौ महीनों तक वो कई नए-नए अनुभवों को महसूस करती हैं। पर ये भी सच है की इस दौरान गर्भवती महिलाओं को कई तरह की शारीरिक परेशानियों से जूझना पड़ता है। आज हम आपको बता रहे हैं की गर्भावस्था के दूसरे महीने में गर्भ के भीतर शिशु का विकास किस तरह होता है और दूसरे महीने में गर्भवती महिला के शरीर में क्या-क्या बदलाव होते हैं?

गर्भधारण के बाद गर्भवती महिलाएं अपना बहुत खास ध्यान रखने लगती है। पहले महीने में शिशु का आकार तिल के समान होता है और गर्भ में अंडे का प्रत्यारोपण मात्र होता है। गर्भधारण के पहले महीने में गर्भवती महिला में कुछ शुरुवाती लक्षण दिखते हैं जिससे पता चलता है की गर्भधारण हो गया है।

गर्भावस्था का दूसरा महीना और शिशु में विकास

दूसरे महीने से शिशु का विकास होना शुरू हो जाता है। दूसरे महीने के पहले सप्ताह से शिशु का दिल धड़कने लगता है जिसे आप इस महीने के अंतिम सप्ताह तक डॉक्टरी चेकअप में उल्ट्रासॉउन्ड की मदद से सुन सकती हैं।

गर्भावस्था के दूसरे महीने से शिशु अपना आकार लेने लगता है। इस महीने में शिशु के महत्वपूर्ण अंगों का आकार बनने लगता है, शिशु के हाथ, पैर, आँख, कान, नाक और मुंह की आकृतियां बनना शुरू हो जाती हैं। 

दूसरे महीने से शिशु के मस्तिष्क का विकास होना शुरू हो जाता है और शिशु के फेफड़ों का निर्माण शुरु हो जाता है। इस महीने से शिशु का वजन बढ़ने लगता है और शिशु की उँगलियाँ आकार लेने लगती हैं।

गर्भावस्था के दूसरे महीने में गर्भवती महिला के शरीर में बदलाव

दूसरे महीने में गर्भवती महिला के शरीर में भी कई बदलाव आते हैं। दूसरे महीने में गर्भवती महिला के गर्भाशय का आकार थोड़ा बड़ा हो जाता है ताकि गर्भ में शिशु का विकास सही तरह से हो सके, हार्मोनल बदलाव के कारण बार-बार यूरिन पास करने की इच्छा होता है, गर्भवती महिला को कुछ खाने का मन नहीं करता, प्राइवेट पार्ट में दर्द या खुजली की समस्या हो सकती है। शरीर में बदलाव होने के कारण कई महिलाओं को इस समय साँस लेने में तकलीफ हो सकती है। 

दूसरे महीने से गर्भवती महिला का वजन धीरे-धीरे बढ़ने लगता है। उन्हें कई चीजों की गंध पसंद नहीं आती, कभी खाने का भी मन नहीं करता। जो भी चीजें देखती हैं वोमिटिंग होने की संभावना रहती है, एसिडिटी के कारण सीने में जलन की समस्या भी हो सकती है। दूसरे महीने में गर्भवती महिला को वोमिटिंग की समस्या बहुत अधिक होती हैं, जी मिचलाने लगता है, कई बार चक्कर भी आने लगते है।

खान पान में बदलाव होने के चलते महिलाओं को इस समय पेट से सम्बंधित समस्याए हो जाती हैं, कई महिलाओं की त्वचा के रंग में परिवर्तन आने लगते हैं, गर्भ में शिशु आने पर स्तनों में भारीपन भी महसूस होता है और पेट के निचले हिस्से में काफी दर्द हो सकता है। 

ऐसे में गर्भवती महिला को अपने खान-पान का खास ध्यान रखना चाहिए, समय पर आहार लेना चाहिए, डॉक्टर से चेकअप कराते रहना चाहिए, सही दिनचर्या अपनानी चाहिए और भरपूर आराम करना चाहिए। ताकि गर्भ में पल रहे शिशु का विकास सही तरीके से हो सके और गर्भवती महिला को भी प्रेग्नेंसी के दौरान कोई समस्या ना हो।

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