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शिशु जब बाहर की आवाज़ सुनने लगता है गर्भ में

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माँ बनना हर महिला का सबसे खूबसूरत लम्हा होता है साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान महिला हर पल केवल अपने गर्भ में पल रहे शिशु के बारे में ही सोचती है। प्रेगनेंसी के दौरान चाहे कितनी ही परेशानियां आये लेकिन महिला के लिए शिशु का विकास सबसे जरुरी होता है। और हर गर्भवती महिला यह जानने के लिए उत्सुक रहती है की गर्भ में शिशु का विकास अच्छे से हो रहा है या नहीं। ऐसे में शिशु की पहली हलचल का अनुभव करना महिला के लिए बहुत खास होता है, और गर्भ में शिशु के घूमता ही नहीं है बल्कि बाहर क्या हो रहा है उसे सुन भी सकता है। प्रेगनेंसी की शुरुआत से नहीं बल्कि जैसे जैसे गर्भ में शिशु का विकास बढ़ता है वैसे वैसे शिशु के अंग विकसित होते हैं और जैसे जैसे शिशु के अंग विकसित होते हैं वैसे वैसे शिशु की सुनने की क्षमता में भी वृद्धि होती है।

शिशु की सुनने की क्षमता

प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने में शिशु के सभी अंग की आकृतियां बननी शुरू हो जाती है। और लगभग तीसरे महीने तक सभी अंग बन भी जाते हैं, और उसके बाद जैसे जैसे प्रेगनेंसी के समय आगे बढ़ता है वैसे वैसे शिशु का विकास भी तेजी से आगे बढ़ता है। और शिशु के सभी अंग अपने काम करने शुरू करने लगते हैं, और शिशु लगभग अपने हलचल के माध्यम से गर्भ के बाहर हो रही गतिविधियों पर अपनी प्रक्रिया दे सकता है। क्योंकि तेज आवाज़, तेज रौशनी, आदि को गर्भ में शिशु महसूस कर सकता है। और जब शिशु इन्हे महसूस करता है तो आपको गर्भ में शिशु की हलचल ज्यादा मसहूस हो सकती है। और शिशु के कान बनने की प्रक्रिया पांचवें महीने के आस पास पूरी हो जाती है और शिशु की सुनने की क्षमता धीरे धीरे बढ़ने लगती है।

क्या शिशु गर्भ में बाहर की आवाज़ सुनता है?

जी हाँ, प्रेगनेंसी के पांचवें महीने के आस पास शिशु की सुनने की क्षमता बढ़ने लगती है, जिससे वो बाहर हो रही गतिविधियों को सुन सकता है और गर्भ में हलचल करके उन पर अपनी प्रतिक्रिया भी दे सकता है। जैसे की यदि आप यदि तेज आवाज़ में गाने सुनती हैं, या भीड़भाड़ वाली जगह पर जाती है, तो शिशु गर्भ में चौंक सकता है। जिससे गर्भ में शिशु की हलचल भी ज्यादा महसूस हो सकती है। लेकिन महिला को ज्यादा भीड़भाड़ वाली जगह पर नहीं जाना चाहिए। क्योंकि ऐसी जगह पर जाने से इन्फेक्शन का खतरा रहता है जिससे गर्भ में शिशु के विकास पर असर पड़ सकता है। साथ ही महिला को गर्भ में शिशु से थोड़ी देर बातें भी करनी चाहिए क्योंकि गर्भ में शिशु न केवल आपकी बातें सुन सकता है। बल्कि इससे गर्भ में शिशु के बेहतर मानसिक विकास में मदद भी मिलती है।

तो यह हैं गर्भ में शिशु की सुनने की क्षमता से जुडी कुछ बातें, ऐसे में शिशु के बेहतर विकास के लिए महिला को अपनी अच्छे से केयर करने के साथ शिशु के साथ थोड़ा समय भी बिताना चाहिए। ताकि शिशु की सुनने की क्षमता में वृद्धि होने के साथ शिशु के मस्तिष्क के बेहतर विकास में भी मदद मिल सके।

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