एमनियोटिक फ्लूड की कमी के क्या कारण होते हैं, गर्भाशय में शिशु का प्रत्यारोपण होने के साथ ही गर्भाशय में एमनियोटिक थैली बनती है जिसे की एमनियोटिक बैग भी कहा जाता है। इस बैग में द्रव होता है जिसे की एमनियोटिक द्रव कहा जाता है। और इसी द्रव में गर्भ में शिशु नौ महीने तक रहता है। यह द्रव शिशु के लिए बहुत फायदेमंद होता है क्योंकि गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में मदद करने के साथ यह शिशु को बीमारियों से सुरक्षित रखने में भी मदद करता है। गर्भाशय में एमनियोटिक फ्लूड की मात्रा सही होने पर शिशु गर्भ में बेहतर तरीके से मूव भी कर पाता है। तो आइये अब जानते हैं एमनियोटिक फ्लूड से जुडी कुछ अन्य बातें।

एमनियोटिक फ्लूड की मात्रा के बारे में कैसे पता चलता है?

गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास को जानने के लिए गर्भवती महिला जांच करवाने डॉक्टर के पास जाती रहती है। ऐसे में जब डॉक्टर अल्ट्रासॉउन्ड करता है या खून की जांच करता है तो इन्ही टेस्ट के माध्यम से गर्भाशय में एमनियोटिक फ्लूड की सही मात्रा के बारे में पता लगाया जाता है।

गर्भाशय में एमनियोटिक फ्लूड की कमी के लक्षण

  • महिला के पेट का आकार कम होना।
  • अल्ट्रासॉउन्ड जांच में एमनियोटिक फ्लूड की मात्रा में कमी आना।
  • गर्भ में शिशु कि हलचल का कम होना।
  • प्राइवेट पार्ट से द्रव के रिसाव की समस्या अधिक होना।

एमनियोटिक फ्लूड में कमी के क्या कारण होते हैं

गर्भ में पल रहे शिशु के लिए एमनियोटिक फ्लूड की सही मात्रा का होना बहुत जरुरी होता है। क्योंकि इससे गर्भ में पल रहे शिशु को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। लेकिन कई बार गर्भाशय में एमनियोटिक फ्लूड की मात्रा में कमी आ सकती है। और गर्भाशय में एमनियोटिक फ्लूड की कमी का कोई एक कारण नहीं होता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की गर्भाशय में एमनियोटिक फ्लूड की कमी के क्या कारण होते हैं।

शिशु के अंगो के विकास में दिक्कत

  • गर्भ में पल रहे शिशु के मूत्र मार्ग में या किडनी में किसी तरह की कोई दिक्कत होती है जिसके कारण वो यूरिन पास नहीं कर पाता है।
  • तो इसके कारण एमनियोटिक फ्लूड में कमी आ सकती है।

पानी की थैली से जुडी समस्या

  • यदि एमनियोटिक फ्लूड की थैली में से हमेशा थोड़ थोड़ा द्रव रिसता रहता है या पानी की थैली की झिल्ली फट जाती है।
  • तो इस कारण भी एमनियोटिक फ्लूड में कमी आ सकती है।

प्लेसेंटा में समस्या

  • यदि प्रेग्नेंट महिला को प्लेसेंटा में जुडी समस्या हो जाती है तो इसके कारण भी एमनियोटिक फ्लूड पर असर पड़ता है।
  • जिसके कारण प्रेगनेंसी के दौरान एमनियोटिक फ्लूड में कमी की समस्या हो सकती है।

डिलीवरी में देरी

  • यदि प्रेग्नेंट महिला को चालीस हफ्ते से ऊपर की प्रेगनेंसी हो जाती है तो ऐसे में धीरे धीरे एमनियोटिक फ्लूड की कमी होना शुरू हो सकता है।
  • ऐसे में यदि आपका भी डिलीवरी की दी गई तारीख से ज्यादा समय हो गया है तो आपको एक बार डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

पानी की कमी

  • प्रेगनेंसी के दौरान पानी का भरपूर सेवन करने की सलाह दी जाती है।
  • क्योंकि यह गर्भवती महिला को बहुत सी परेशानियों से सुरक्षित रखने के साथ बॉडी को हाइड्रेट रखने में मदद करता है।
  • जिससे एमनियोटिक फ्लूड की मात्रा को सही रहने में भी मदद मिलती है।
  • लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला पानी का भरपूर सेवन नहीं करती है।
  • तो इसके कारण एमनियोटिक फ्लूड में कमी की समस्या हो सकती है।

प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली दिक्कतें

  • गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला बहुत सी परेशानियों से गुजरती है।
  • ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला को खून की कमी, शुगर, तनाव जैसी दिक्कत प्रेगनेंसी के दौरान अधिक रहती है।
  • तो इसके कारण भी एमनियोटिक फ्लूड में कमी जैसी परेशानी का सामना प्रेग्नेंट महिला को करना पड़ सकता है।

शिशु के विकास में एमनियोटिक फ्लूड कैसे काम करता है

  • जब शिशु एमनियोटिक फ्लूड में घूमता है तो इससे शिशु की हड्डियों व् मांसपेशियों के बेहतर विकास में मदद मिलती है।
  • जब गर्भ में शिशु तरल पदार्थ को ग्रहण करता है तो इससे पाचन तंत्र का विकास करने में मदद मिलती है।
  • एमनियोटिक फ्लूड गर्भनाल को सही रखने में मदद मिलती है जिससे शिशु तक पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्वों को पहुंचाने में मदद मिलती है।
  • शिशु जब तरल पदार्थ अपने अंदर लेकर जाता हैं तो इससे शिशु के फेफड़ों के विकास में मदद मिलती है।
  • गर्भ में पल रहे शिशु के नाजुक अंगो के विकास में एमनियोटिक फ्लूड मदद करता हैं।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से एमनियोटिक फ्लूड में कमी आ सकती है। ऐसे में इस बारे में डॉक्टर से राय लेना ही सबसे सही विकल्प होता है। इसके अलावा प्रेगनेंसी में बॉडी में कोई भी असहज लक्षण महसूस हो तो जल्दी से जल्दी डॉक्टर से बात करनी चाहिए। ताकि गर्भाशय में एमनियोटिक फ्लूड की मात्रा को सही रखकर शिशु के बेहतर विकास में मदद मिल सके।