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प्रेगनेंसी में करेला खाना चाहिए या नहीं?

प्रेगनेंसी के दौरान महिलाएं इस बात को लेकर सबसे ज्यादा असमंजस में रहती है की आखिर गर्भवती महिला को क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए। खासकर जब पहली प्रेगनेंसी हो तो खान पान को लेकर डर और भी ज्यादा होता है। लेकिन यदि महिला खाने पीने से जुडी जानकारी इक्कठी करती है और उसके बाद अपनी डाइट का चुनाव करती है। तो इससे महिला को प्रेगनेंसी के दौरान सही खान पान से फायदा मिलता है। जिससे माँ और बच्चा दोनों स्वस्थ रहते हैं आज इस आर्टिकल में हम आपसे प्रेगनेंसी के दौरान करेले के सेवन के बारे में बात करने जा रहे हैं।

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क्या प्रेग्नेंट महिला के लिए करेला खाना सेफ हैं?

गर्भावस्था के दौरान महिला को केवल उन्ही चीजों का सेवन करना चाहिए जो माँ व् बच्चे की सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं। न की उन चीजों का सेवन करना चाहिए जो महिला को खाने में पसंद होते हैं। जहां तक बात करेले के सेवन की आती है तो अधिकतर लोग यहां तक की डॉक्टर्स भी प्रेगनेंसी में करेले का सेवन न करने की सलाह देते हैं। क्योंकि करेले और इसके बीजों में क्‍यूनिन, मोमोर्डिका और ग्‍लाइकोसिड नामक तत्‍व मौजूद होते हैं।

जो प्रेग्नेंट महिला व् गर्भ में पल रहे शिशु के लिए सही नहीं होते हैं। और यह तत्व शरीर में पहुंचकर महिला की शारीरिक परेशानियों को बढ़ाने के साथ शिशु के खतरा बन सकते हैं। ऐसे में यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी करेले का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान नहीं करना चाहिए साथ ही इसका जूस भी पीने से बचना चाहिए। आप चाहे तो इसके लिए एक बार अपने डॉक्टर से भी राय ले सकती हैं।

यदि वो आपको हफ्ते दस दिन में थोड़ा बहुत करेला खाने की सलाह दे तो आप खा भी सकती है। लेकिन यदि करेला खाने पर आपको थोड़ी भी दिक्कत हो या आपको लारेल की सुगंध या टेस्ट से कोई परेशानी हो तो आपको करेले का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। तो आइये अब आगे जानते हैं की प्रेगनेंसी में करेला खाने से कौन कौन सी सेहत सम्बन्धी परेशानियां हो सकती है।

गर्भावस्था में करेला खाने से होते हैं यह नुकसान

यदि आप प्रेग्नेंट हैं और करेले के सेवन के बारे में सोच रहे हैं तो उससे पहले जान लें की गर्भवती महिला यदि करेले का सेवन करती है तो इससे माँ व् बच्चे को कौन कौन से नुकसान पहुँचने का खतरा रहता हैं:

पाचन सम्बन्धी समस्या

करेले का सेवन करने से महिला को कब्ज़, पेट में दर्द, डायरिया, उल्टियां, जैसी परेशानी होने का खतरा अधिक होता है। जिसकी वजह से महिला की दिक्कत बढ़ सकती है और डायरिया होने पर तो थकान कमजोरी, चक्कर जैसी परेशानी होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

ब्लड शुगर लौ होने का खतरा

प्रेग्नेंट महिला यदि करेले का सेवन करती है तो इसकी वजह से महिला का शुगर लेवल लौ हो सकता है जिसके कारण महिला को थकान, चक्कर, कमजोरी, सिर दर्द जैसी परेशानियां होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

गर्भपात व् समय से पहले डिलीवरी का खतरा

करेले का सेवन करने से गर्भवती महिला को ब्लीडिंग होने का खतरा अधिक होता है जिसकी वजह से शुरूआती समय में महिला का गर्भपात होने का जोखिम बढ़ जाता हैं। वहीँ तीसरी तिमाही में करेले का सेवन करने से गर्भाशय में संकुचन बढ़ सकता है जिसकी वजह से महिला की डिलीवरी समय से पहले होने का खतरा बढ़ जाता है। जो माँ व् बच्चे दोनों की सेहत के लिए सही नहीं होता है।

जन्म दोष का खतरा

करेले के साथ यदि महिला करेले के बीजों का सेवन भी करती है तो इसकी वजह से शिशु को जन्म दोष होने का खतरा भी बढ़ जाता है। जिसके कारण आपका बच्चा किसी न किसी समस्या से जूझ सकता है।

तो यह है प्रेगनेंसी के दौरान करेले के सेवन से जुडी जानकारी तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी प्रेगनेंसी के दौरान करेले के सेवन से पहले इन बातों का ध्यान रखना चाहिए। ताकि आपको या आपके होने वाले बच्चे को करेले के सेवन के कारण होने वाले नुकसान से बचे रहने में मदद मिल सके।

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