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दूध असली है या नकली? पहचानने के ये है तरीके!

आजकल के समय में खाने की हर दूसरी वस्तु में मिलावट हो रही है. आटा, दाल चावल यहाँ तक की सब्जियों को उगाने के लिए भी गलत तरीकों का इस्तेमाल किया जाने लगा है. दूध हर घर की मुख्य जरूरतों में से एक है, खासतौर पर भारतीय घरों की. यहाँ कोई खाली दूध पियें या न पीये लेकिन इससे बनी चाय का शौक़ीन हर भारतीय है. इसके अलावा सभी घरों में अलग-अलग रूप से दूध का इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन अक्सर दूध में मिलावट की शिकायतें आती रहती है. जिसके चलते कई बार यह पहचानना मुश्किल हो जाता है की दूध असली है या नकली?

दूध में मिलावट करना तो लोगों की पुरानी आदत है जिसे कोई नहीं छुड़ा सकता लेकिन आजकल दूध में मिलावट के नए-नए तरीके देखने को मिलते है. पहले-पहले लोग दूध में केवल पानी मिलाया करते, ताकि दूध पतला लगे और इसकी मात्रा भी बढ़ जाए.

लेकिन आजकल दूध में मिलावट के तरीके भी बदल गए है. दूध में मिलावट करने की बजाय अब वे सीधे ही गलत तरीके से दूध बनाने लगे है. कोई इसमें डिटर्जेंट, और कपडे धोने वाला साबुन मिलाते है तो कोई इसमें यूरिया मिलाकर बेचता है. ऐसे में कई बार यह पहचानना मुश्किल हो जाता है की दूध असली है या नकली? इसीलिए आज हम आपको असली और नकली दूध की पहचान करने के कुछ ट्रिक्स देने जा रहे है जिनकी मदद से आप भी अपने घर में दूध में मिलावट का पता लगा सकते है.

इन तरीकों से तैयार होता है नकली दूध :-

1. दूध में पानी मिलाना दुधिया की आदत बन चूका है. लेकिन कुछ लोग इसमें गंदा पानी मिलाते है जो आपके स्वास्थ्य के लिए बेहद नुकसानदेह होता है.
2. आजकल अधिकतर लोग दूध में यूरिया जैसे नुकसानदेह केमिकल मिलाने लगे है, जो सीधे तौर पर आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है. ‘
3. पहले ऐसा नहीं होता था लेकिन आजकल लोग सिंथेटिक और अन्य चीजों के इस्तेमाल से केमिकल दूध तैयार करने लगे है. जिसका सेवन बहुत घातक सिद्ध हो सकता है.

कैसे बनाया जाता है सिंथेटिक दूध?

  • सिंथेटिक दूध बनाने के लिए सबसे पहले थोड़े से दूध मे यूरिया डालकर उसे हल्की आंच पर उबाला जाता है.
  • उसके बाद कपडे धोने वाले डिटर्जेंट, सोडा स्टार्च, फोरेमैलिन और वाशिंग पाउडर को उसमे मिलाया जाता है.
  • अंत में असली पहचान देने के लिए उसमे असली दूध भी मिला दिया जाता है.

ऐसे पहचाने दूध असली है या नकली?

1. चिकनी लकड़ी या पत्थर :-

दूध में की गयी मिलावट को जांचने के लिए किसी चिकनी लकड़ी या पत्थर की सतह पर दूध की कुछ बुध टपकाएं और देखें. यदि दूध बहता हुआ नीचे की ओर गिरे और सफ़ेद धार सा निशान बन जाए तो दूध शुद्ध है.

2. दूध की चिकनाहट :-

दूध की चिकनाहट को पहचानकर भी यह पता लगाया जा सकता है की दूध असली है या नकली? इसके लिए दूध को हाथों के बीच रगड़े, यदि कोई चिकनाहट महसूस नहीं होती तो वह दूध असली है. वहीं अगर नकली दूध को हाथों के बीच रगड़ा जाए तो आपको डिटर्जेंट जैसी चिकनाहट महसूस होगी.

3. कांच की शीशी या टेस्ट ट्यूब :-

दूध में डिटर्जेंट की मिलावट की गई है या नहीं? इसे जानने के लिए दूध की 5-10 mg मात्रा को किसी कांच की शीशी या टेस्ट ट्यूब में लेकर उसे हिलाएं. यदि झाग बनते है और लम्बे समय तक रहे तो समझ लीजिये इस दूध में डिटर्जेंट मिला है.

4. यूरिया मिलने से आता है ये रंग :-

दूध के रंग को पहचानकर आप पता लगा सकते है की उसमे यूरिया की मात्रा मिली है या नहीं. यदि असली दूध में यूरिया मिलाया जाए तो यह हलके पीले रंग का हो जाता है, वहीं अगर सिंथेटिक दूध में यूरिया मिलाया जाए तो ये गाढ़े पीले रंग का दिखने लगता है.

5. उबालकर भी पहचाना जा सकता है :-

दूध को बर्तन में लम्बे वक्त तक उबालें. इस बीच दूध को लगातार चम्मच से हिलाते रहे. ऐसा दूध के गाढ़ा होने तक करें. यदि गाढ़ा हुआ दूध 2 से 3 घंटे बाद तैलीय हो जाते तो समझे की दूध अच्छा है.

6. दुध के स्वाद से :-

असली दूध जा स्वाद हल्का मीठा होता है, जबकि नकली दूध का स्वाद कड़वा होता है क्योंकि इसमें डिटर्जेंट और सोडा मिलाया जाता है.

7. दूध के रंग से :-

असली दूध को कितना ही उबाल लें उसके रंग में परिवर्तन नहीं आएगा जबकि नकली दूध को उबालने पर वह पीले रंग का हो जाता है.

8. उसकी सुगंध से :-

सिंथेटिक दूध में साबुन जैसी गंध आती है जबकि असली दूध की गंध कुछ खास नहीं होती.

9. लिटमस पपेर टेस्ट :-

उपरोक्त तरीकों के अलावा आप एक अन्य तरीके से भी दूध की असलियत की पहचान कर सकते है. इसके लिए चम्मच भर दूध को टेस्ट ट्यूब या कांच की शीशी में डालें. अब उसमे आधा चम्मच सोयाबीन का पीठ डालें. टेस्ट ट्यूब हिलाने के बाद उसमे लिटमस पेपर डालें. यदि पेपर नीला हो जाता है तो समझ लीजिए की उसमे यूरिया मिला है.

इन तरीकों से भी कर सकते है असली या नकली दूध की पहचान :-

  • असली दूध को स्टोर करने से इसका रंग नहीं बदलता जबकि नकली दूध कुछ देर रखने के बाद पीला पड़ने लगता है.
  • यदि असली दूध में यूरिया भी हो तो ये हलके पीले रंग का ही होता है. वहीं दूसरी ओर यदि सिंथेटिक दूध में यूरिया मिलाया जाये तो ये गाढ़े पीले रंग का दिखने लगता है.
  • असली दूध को हाथों के बीच रगड़ने से कोई चिकनाहट महसूस नहीं होती जबकि नकली दूध रगड़ने पर डिटर्जेंट जैसी चिकनाहट महसूस होती है.
  • नकली दूध का सेवन करने पर वह कड़वा लगता है जबकि असली दूध का स्वाद हल्का मीठा होता है.
  • सिंथेटिक दूध में से बदबू आती है जबकि असली दूध की कोई खास खुशबु नहीं होती.

तो ये, है कुछ तरीके जिनकी मदद से आप पहचान सकते है की आपके में असली दूध आता है या नकली. क्योंकि दूध आपकी रोजमर्रा की जरूरत है और इसके साथ की गई लापरवाही आपके स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकती है.

पेट में बच्चे का मूवमेंट कब से शुरू होता है? और क्या क्या मूवमेंट होता है

शिशु का जन्म चाहे नौ महीने बाद होता है, लेकिन उसकी हरकते माँ के गर्भ में ही शुरू हो जाती है। किसी भी महिला के लिए माँ बनने का अनुभव सबसे ख़ास होता है। महिला गर्भावस्था के पूरे नौ महीने किसी न किसी बदलाव से गुजरती है। और डिलीवरी के बाद भी शिशु की हर नै हरकत उसके लिए एक नया अनुभव होती है। लेकिन माँ गर्भ में बच्चा जब मूवमेंट करता है तो उसे केवल एक माँ ही महसूस करती है। चाहे वो बच्चे का लात मरना हो या गर्भ में घूमना हो।

जो महिला पहली बार माँ बनती है उसे बच्चे की मूवमेंट का थोड़ा लेट अहसास होता है, लेकिन दूसरी बार माँ बनने वाली महिला को इसका आराम से पता चल जाता है। गर्भ में शिशु लगभग पांचवे महीने में मूव करना शुरू कर देता है। लेकिन शुरुआत में बच्चे के मूवमेंट कम होते है, जैसे जैसे शिशु का गर्भ में विकास होता है, तो आपको आराम से पता चल जाता है की आपका बच्चा मूव कर रहा है। तो आइये जानते है शिशु के गर्भ में मूवमेंट के बारे में कुछ बातें।

शिशु गर्भ में कबसे हरकत करनी शुरू करता है:-

गर्भ में पल रहा शिशु 16 हफ्तों के आस पास मूव करने लगता है, जिसका अहसास महिला को भी होता है। शुरुआत में शिशु कम घूमता है, लेकिन जैसे जैसे शिशु का विकास होता है, वैसे वैसे आप उसकी ज्यादा हरकतों का अनुभव करने लगती है। गर्भ में पल रहे शिशु की हरकत को केवल माँ ही अनुभव कर सकती है। और यदि बीस हफ्तों के बाद भी शिशु किसी तरह की कोई हरकत नहीं करता है तो आपको बिना देरी किए एक बार अपने डॉक्टर को जरूर दिखाना चाहिए।

शिशु गर्भ में कौन कौन सी हरकते करता है:-

मुड़ने लगता है:-

गर्भ में पल रहा शिशु लगभग सात से आठ हफ्तों में ही मुड़ना, चौंकना, शुरू कर देता है, लेकिन अच्छे से विकास न होने के कारण आप इसे महसूस नहीं कर पाते है।

हिचकी लेता है:-

शिशु केवल जन्म के बाद ही नहीं बल्कि माँ के गर्भ में भी नौवे सप्ताह तक हिचकी लेना शुरू कर देता है। और जान शिशु गर्भ में थोड़ा बड़ा होता है तो उसकी हिचकी लेने पर आपको भी धक्के का अनुभव होता है।

आँखे घुमाता है:-

धीरे धीरे शिशु अपनी आँखे भी घुमाने लगता है, और लगभग चौहदवे हफ्ते में शिशु अपनी आँखों को घूमना शुरू कर देता है, और ऐसा आप अपने तीसरे महीने के अल्ट्रासाउंड के दौरान देख भी सकते है।

अंगड़ाई लेता है:-

शिशु भी माँ के गर्भ में आराम करता है, और इस आराम के बाद उसे भी अंगड़ाई आती है, जम्हाई आती है, और ऐसा शिशु ग्याहरवे हफ्ते के बाद ही शुरू कर देता है।

घूमने लगता है लात मारता है:-

लगभग बीस से चौबीस हफ्ते के बाद शिशु अधिक गतिशील होने लगता है, और गर्भ में जब वो कला बाज़िया करता है, लत मारता है, तो महिला को इसका अनुभव थोड़ी थोड़ी देर बाद होता रहता है, शुरुआत में कम और आठवे नौवे महीने में आपको इसका अनुभव और भी अधिक होने लगता है।

चौंकता है:-

माँ के गर्भ में भी शिशु बाहर की सभी बातों को सुन सकता है, तेज लाइट को महसूस करता है। इसके लिए आपने अभिमन्यु का नाम तो सुना ही होगा। इसीलिए कहा जाता है की शिशु के गर्भ में होने पर आपको अच्छा ही सोचना चाहिए, अच्छी चीजों में ध्यान लगाना चाहिए, तेज शोर और भीड़भाड़ में नहीं जाना चाहिए। क्योंकि इसके कारण कई बार बच्चा गहरा कर पेट में ज्यादा हलचल करने लगता है।

अपनी पोजीशन बदलता है:-

जैसे जैसे डिलीवरी का समय नजदीक आता है, तो इसे लेकर केवल माँ ही उत्साहित नहीं होती है, बल्कि शिशु भी बाहर आने के लिए बेसब्र रहता है। और अपनी पोजीशन भी बदलता है, आम तौर पर प्रेगनेंसी के आखिरी दिनों में शिशु का सर नीचे की तरफ और पैर ऊपर की तरफ होते है, जिससे वो बाहर आने के लिए तैयार होता है।

तो शिशु की मूवमेंट का हर महिला को ध्यान रखना चाहिए और साथ ही शिशु यदि लम्बे समय तक मूवमेंट न करें, तो इसे अनदेखा न करते हुए अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ताकि किसी भी तरह की कोई परेशानी न हो। इसके अलावा आपको गर्भ में पल रहे शिशु के भरपूर विकास के लिए अपना दुगुना ध्यान रखना चाहिए, ताकि शिशु हष्ट पुष्ट, और बुद्धिमान हो।

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क्या कारण होते हैं गर्भधारण न होने के?

माँ बनना बहुत ही अनमोल और प्यारा अहसास होता है और इस बेहतरीन अनुभव का अहसास केवल महिलाओं को ही होता है। इसीलिए महिला को भी अपनी जिंदगी में इस खास अनुभव के होने का इंतज़ार भी रहता है। और शादी के बाद कुछ कपल जल्द से जल्द प्रेगनेंसी के बारे में सोच लेते हैं तो कुछ थोड़ा समय लेते हैं। लेकिन कुछ कपल ऐसे भी हैं जो अपनी फैमिली को आगे बढ़ाना तो चाहते हैं। लेकिन कई बार किसी न किसी कारण महिला का गर्भधारण नहीं हो पाता है। और ऐसा भी जरुरी नहीं है की यदि महिला प्रेग्नेंट नहीं हो रही है तो हर महिला के प्रेग्नेंट न होने का एक ही कारण हो। तो आइये आज हम आपको इस बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं की यदि महिला का गर्भधारण नहीं हो रहा है तो इसके क्या कारण हो सकता है।

मासिक धर्म

मासिक धर्म का अनियमित होना भी महिला के गर्भधारण में आ रही परेशानी का एक कारण हो सकता है। क्योंकि मासिक धर्म के अनियमित होने के कारण ओवुलेशन पीरियड भी अनियमित हो सकता है, और ओवुलेशन पीरियड ही निषेचन के लिए सबसे सही समय होता है। ऐसे में जिन महिलाओं को मासिक धर्म के अनियमित होने की समस्या होती है उन महिलाओं को दूसरी महिलाओं की अपेक्षा गर्भधारण करने में अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

अनियमित ओवुलेशन पीरियड

कई बार वजन कम या ज्यादा होने के कारण, तनाव की वजह से, बॉडी में हार्मोनल असंतुलन के कारण, बहुत ज्यादा व्यायाम के कारण, ओवुलेशन पीरियड अनियमित हो सकता है। और यदि ओवुलेशन पीरियड अनियमित होता है तो इसके कारण कई बार अंडाशय से अंडा परिपक्व होकर बाहर नहीं आ पाता है। और जब अंडा ही बाहर नहीं आता है तो निषेचन संभव नहीं होता है। ऐसे में ओवुलेशन पीरियड को नियमित रखने के लिए महिला को तनाव नहीं लेना चाहिए, वजन नियंत्रित रखना चाहिए, अधिक व्यायाम करने से बचना चाहिए, आदि।

फैलोपियन ट्यूब

गर्भधारण की प्रक्रिया में फैलोपियन ट्यूब एक अहम भूमिका निभाती है, क्योंकि निषेचन की प्रक्रिया फैलोपियन ट्यूब में ही होती है और फैलोपियन ट्यूब ही निषेचित अंडे को गर्भाशय तक पहुंचाने में मदद करती है। लेकिन यदि महिला की फैलोपियन ट्यूब में कोई गड़बड़ी होती है तो इसके कारण अंडे और शुक्राणु आपस में नहीं मिल पाते हैं। जिस कारण महिला का गर्भधारण नहीं हो पाता है।

अंडे की गुणवत्ता

एक उम्र के बाद ( 30 वर्ष ) अंडाशय में अंडो की संख्या में कमी आने के साथ अंडो की गुणवत्ता में भी कमी आ सकती है। और प्रेग्नेंट होने के लिए अंडो की गुणवत्ता का बेहतर होना जरुरी होता है, जिसके कारण भी महिला को प्रेगनेंसी न होने से जुडी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम

कई बार बॉडी में हार्मोनल असंतुलन के कारण महिला को पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। और यदि महिला इस समस्या से ग्रसित होती है। तो इसके कारण तो इसके कारण महिला के अंडाशय में छोटी छोटी गांठे बनने लगती है जिसके कारण निषेचन के लिए अंडाशय से अंडा परिपक्व होकर बाहर नहीं आ पाता है। और अंडे के बाहर न आने के कारण निषेचन नहीं हो पाता है जिसके कारण महिला के गर्भ ठहरने में समस्या हो सकती है।

गर्भपात

जो महिलाएं प्रेग्नेंट तो होती है लेकिन किसी न किसी कारण उनका बार बार गर्भपात हो जाता है, और वो महिलाएं फिर भी जल्दी माँ बनने के लिए ट्राई करती है। और अपनी न तो अच्छे से जांच करवाती हैं और न ही गर्भपात के बाद गर्भाशय को सही होने के लिए समय देती है। ऐसी महिलाओं को भी बार बार गर्भपात होने के कारण बाद में प्रेगनेंसी से जुडी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में इस परेशानी से बचाव के लिए महिला को पहले गर्भपात के कारण का पता करने के साथ अपनी सही से जांच करवानी चाहिए। और एक बार गर्भपात होने के बाद दुबारा प्रेग्नेंट होने के बीच थोड़ा समय का गैप रखना चाहिए।

गर्भनिरोधक गोलियां

जो महिलाएं प्रेगनेंसी से बचाव के लिए गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन बहुत अधिक करती है। ऐसे में उन महिलाओं के शरीर में उन दवाइयों के कारण हार्मोनल असंतुलन होने के साथ गर्भाशय की झिल्ली भी कमजोर हो सकती है। जिसके कारण भी महिला को जब वो प्रेग्नेंट होना चाहती है उस दौरान प्रेगनेंसी न होने जैसी परेशानी का सामना उन महिलाओं को करना पड़ सकता है।

वजन व् उम्र

जिन महिलाओं का वजन बहुत ज्यादा या बहुत कम होता है उन महिलाओं को भी प्रेग्नेंट होने में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि वजन कम या ज्यादा होने के कारण बॉडी में हार्मोनल इम्बैलेंस हो सकता है जिसके कारण गर्भधारण में समस्या आ सकती है। यदि महिला की उम्र बहुत ज्यादा है तो ऐसे में अंडे की गुणवत्ता में फ़र्क़ आने के कारण भी महिला को प्रेगनेंसी न होने जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

बिमारी

यदि कोई महिला बहुत लम्बे समय से किसी शारीरिक बिमारी जैसे की थायरॉइड आदि से परेशान है। तो ऐसे में उन महिला के शरीर में भी कमजोरी, हार्मोनल असंतुलन, वजन से जुडी समस्या आदि होने के कारण भी महिला को गर्भधारण करने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

मानसिक परेशानी

ऐसा नहीं है की केवल शारीरिक रूप से ही परेशान होना गर्भधारण न होने का कारण हो सकता है बल्कि यदि आप दिमागी रूप से बहुत ज्यादा परेशान हैं, तनाव में रहती है तो भी गर्भधारण होने में आपको परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

शुक्राणु में कमी

माँ बनना या न बनना केवल महिला के हाथ में ही नहीं होता है बल्कि महिला के गर्भधारण न कर पाने का कारण कई बार पुरुष से जुड़ा भी हो सकता है। क्योंकि यदि पुरुष के शुक्राणु की गुणवत्ता सही नहीं है, पुरुष के शुक्राणु की संख्या में कमी है, तो महिला के अंडे तक न तो शुक्राणु पहुँच पाते हैं और यदि पहुँच जाते हैं तो गुणवत्ता बेहतर न होने के कारण अंडे को निषेचित नहीं कर पाते, जिस कारण महिला का गर्भ नहीं ठहर पाता है। इसीलिए महिला का गर्भधारण होने पर केवल महिला को ही नहीं बल्कि पुरुष को भी एक बार जांच जरूर करवानी चाहिए।

प्रेग्नेंट होने के लिए क्या करें?

यदि महिला का गर्भधारण नहीं हो रहा है तो इसके लिए सबसे पहले महिला अपनी जांच अच्छे से करवानी चाहिए। और केवल महिला को ही नहीं बल्कि पुरुष को भी अपनी जांच करवानी चाहिए। उसके बाद महिला को जो भी समस्या है चाहे तो फैलोपियन ट्यूब से जुडी है, पुरुष से जुडी है, महिला के गर्भाशय से जुडी है, महिला के अंडाशय में अंडे से जुडी है, आदि। उस परेशानी का इलाज़ करें, ताकि महिला को गर्भधारण में किसी भी तरह की परेशानी न आये और महिला को भी माँ बनने के अहसास का अनुभव लेने में मदद मिल सके।

तो यह हैं प्रेगनेंसी न होने के कारण व् उनसे बचने के कुछ उपाय, तो यदि आप भी प्रेगनेंसी के ट्राई कर रही है। और गर्भधारण नहीं हो रहा है तो समय पर ही आपको जल्द से जल्द इसके कारण का पता करना चाहिए, ताकि इलाज हो सके और आपको माँ बनने में आ रही परेशानियों को दूर करके इस खास अहसास का अनुभव लेने में मदद मिल सके।

ऐसे पता करें बच्चेदानी का मुँह खुल गया है

बच्चेदानी का मुँह खुलने के लक्षण, प्रेगनेंसी के दौरान महिला उस पल का बेसब्री से इंतज़ार करती है की कब उसकी नन्ही जान उसी गोद में आएगी। लेकिन जैसे जैसे डिलीवरी का समय पास आता है वैसे वैसे महिला के मन में डिलीवरी को लेकर डर भी लगा रहता है। खासकर जो महिलाएं पहली बार माँ बन रही होती है। उन्हें यह परेशानी ज्यादा होती है लेकिन आपको इस दौरान डरने की नहीं बल्कि शांति और मजबूती से काम लेने की जरुरत होती है।

तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको डिलीवरी से जुडी कुछ बातें बताने जा रहे हैं जिनसे महिला को यह पता चल सकता है। की अब बच्चेदानी का मुँह खुल रहा है और महिला की डिलीवरी होने का समय पास आ गया है। तो आइये अब जानते हैं की वो लक्षण कौन से हैं। और इन लक्षणों को प्रेगनेंसी के किसी भी महीने में अनदेखा नहीं करना चाहिए और तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए। क्योंकि कई बार समय पूर्व प्रसव होने पर भी महिला को यह लक्षण महसूस हो सकते है।

ब्लड आना

  • जब महिला की बच्चेदानी का मुँह खुलने लगता है।
  • तो महिला को प्राइवेट पार्ट से रेड या हल्के गुलाबी रंग का ब्लड आता हुआ महसूस हो सकता है।
  • और ब्लड आने के साथ महिला को पीरियड्स के दौरान जिस तरह दर्द होता है वैसा दर्द भी महसूस हो सकता है।

बच्चेदानी का मुँह खुलने का लक्षण है सफ़ेद पानी आना

  • प्रेगनेंसी के दौरान महिला को सफ़ेद पानी आने की समस्या हो सकती है।
  • लेकिन यदि महिला को सफ़ेद पानी अधिक मात्रा में आए।
  • तो यह सफ़ेद पानी नहीं बल्कि एमनियोटिक फ्लूड हो सकता है।
  • जो इस बात की और इशारा करता है की शिशु जन्म लेने के लिए पूरी तरह से तैयार है।
  • और महिला की डिलीवरी अब होने वाली है।
  • और हो सकता है की आपको सफ़ेद पानी के साथ भी हल्के खून के धब्बे महसूस हो।

दर्द महसूस होना

  • यदि प्रेग्नेंट महिला पेट के निचले हिस्से में और पीठ में अधिक दर्द का अनुभव करती है।
  • और यह दर्द पहले तो महिला को रुक रुक कर होता है।
  • लेकिन फिर धीरे धीरे बढ़ता जाता है।
  • यदि प्रेगनेंसी की अंतिम तिमाही में महिला को इस तरह का दर्द होता है।
  • तो यह भी बच्चेदानी का मुँह खुलने की तरफ इशारा करता है।

तो यह हैं कुछ लक्षण जिनसे महिला अंदाज़ा लगा सकती है की महिला की बच्चेदानी का मुँह खुल रहा है। और अब उसे जल्द से जल्द डॉक्टर के पास जाना चाहिए। ताकि महिला की डिलीवरी को अच्छे से होने में मदद मिल सके। उसके बाद डॉक्टर प्राइवेट पार्ट को चेक करके आपको बता देते हैं की आपकी बच्चेदानी का मुँह अच्छे से खुला है या नहीं।

जननी सुरक्षा योजना क्या है? क्या हैं इसके फायदे

जननी सुरक्षा योजना

प्रेगनेंसी व् प्रसव के दौरान होने वाली परेशानियों व् बीमारियों से बचाव का इलाज न मिल पाने के कारण बहुत सी प्रेग्नेंट औरतें इन बीमारियों व् परेशानियों से लड़ते हुए हार जाती है। और इस समस्या का असर इतना गंभीर हो सकता है की महिला को अपनी जिंदगी से हार माननी पड़ती है। ऐसे में गर्भवती महिला और गर्भ में शिशु को इन परेशानियों से बचाने के लिए सरकार द्वारा एक योजना चलाई गई है जिसे जननी सुरक्षा योजना कहा जाता है। और इस योजना की शुरुआत सरकार ने 12 अप्रैल 2005 को की थी। और सलाना इस योजना पर लगभग 1600 करोड़ रूपए तक सरकार खर्च कर रही है और उसका लाभ लगभग एक करोड़ गर्भवती महिलाओं को मिल रहा है।

जननी सुरक्षा योजना राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के द्वारा शुरू किया गया एक सुरक्षित मातृत्व कार्यक्रम है, जिसका संकल्प देश की गरीबी रेखा से नीचे आने वाली गर्भवती महिलाओं के सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देना है। ताकि गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान और प्रसव के दौरान और प्रसव के बाद होने वाली बीमारियों से सुरक्षित रखने में मदद मिल सके, और उनका अच्छे से इलाज हो सके। जिससे महिला को स्वस्थ रहने के साथ स्वस्थ शिशु को जन्म देने में मदद मिल सके। केंद्र सरकार इस योजना के तहत गर्भवती महिलाओं को आर्थिक मदद देती है, जिसमे गर्भवती महिला की डिलीवरी होने पर महिला और बच्चे दोनों को पर्याप्त पोषण उपलब्ध कराने के लिए सीधे उनके बैंक अकाउंट में रुपये ट्रांसफर कर दिए जाते हैं।

जननी सुरक्षा योजना का रजिस्ट्रेशन कहां करें?

  • जननी सुरक्षा योजना के रेजिस्ट्रेशन के लिए आप अपने नजदीकी आंगनवाड़ी में जा सकती है।
  • शिशु के जन्म के समय सरकारी हॉस्पिटल में भी रजिस्ट्रेशन करवाया जा सकता है।
  • नाम रजिस्टर करवाने के बाद महिला को एमसीएच और जननी सुरक्षा योजना कार्ड मिलता है और वह कार्ड इस योजना का लाभ उठाने के लिए बहुत जरुरी होता है।
  • जननी सुरक्षा योजना दी जाने वाली धनराशि सीधा अकाउंट में ट्रांसफर की जाती है।

किन महिलाओं को मिलता है जननी सुरक्षा योजना का फायदा

उन्नीस वर्ष की गर्भवती महिला जो की गरीबी रेखा से नीचे आती है उस महिला को इस योजना का फायदा मिल सकता है। और यह लाभ वह अपने दो शिशु के जन्म तक उठा सकती है।

जननी सुरक्षा योजना के लाभ

  • इस योजना के तहत गरीबी रेखा से नीचे रहने वाली महिलाओं के सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा मिलता है।
  • सुरक्षित प्रसव होने के कारण जच्चा और बच्चा के जान के जोखिम को कम करने में मदद मिलती है।
  • और इस योजना के चलते महिला का नोर्मल प्रसव हो या सिजेरियन, उसका पूरा इलाज, सभी दवाइयां, हॉस्पिटल में रहना, खाना पीना, सभी आपको फ्री में दिया जाता है।
  • इस योजना के कारण प्रेगनेंसी के दौरान और प्रसव के बाद महिला को शिशु की अच्छी देखभाल होने में मदद मिलती है।
  • इस योजना के चलते ग्रामीण क्षेत्र वाली महिलाओं को 1400 व् शहर में रहने वाली महिलाओं को 1000 रूपए दिया जाते हैं।
  • इसके अलावा यदि जन्म के बाद शिशु को भी कोई परेशानी है तो उसका इलाज भी फ्री में किया जाता है।

तो यह हैं जननी सुरक्षा योजना से जुडी सम्पूर्ण जानकारी, और जो महिलाएं अपना रजिस्ट्रेशन करवाना चाहती है उन्हें अपने पास के सरकारी हॉस्पिटल या नजदीकी आंगनवाड़ी में जाकर रजिस्ट्रेशन करवाकर अपना कार्ड बनवा लेना चाहिए। ताकि उन महिलाओं को भी इस योजना का लाभ मिल सके।

ख़ुशी जीवन बिताने के लिए इन चीजो की जरुरत होती हैं

ख़ुशी जीवन बिताने के लिए इन चीजो की जरुरत होती हैं:-

जीवन में खुश रहना हार व्यक्ति का हक़ होता हैं| और हार व्यक्ति को खुश रहना भी चाहिए| परंतु आज कल की इस भगति दौड़ती जिंदगी मे लोग इतने ज्यादा व्यस्त हो गए हैं,की उनकेपास खुश रहने का भी समय भी नहीं हैं| और इस तनाव भरी जिंदगी में चाह कर भी वो अपने लिए ख़ुशी के लम्हे ढूंढ नहीं पातें हैं| परंतु ऐसा भी नहीं हैं की खुशिया आपके पास नहीं हैं, जिंदगी हर पल आपको खुश रहने का मौका देती हैं, जरूरत होती हैं टोब्स उस मौके को पहचान कर गले लगाने की|

खुश रहने के लिए सबसे जरुरी होता हैं की आप अपनी सोच में परिवर्तन लाएं| कभी भी गलत विचारो को अपने मन में पनपने न दें, अपने आप की तुलना कभी किसी और से न करें, गुस्से को अपनी लाइफ के अच्छे लम्हो से बाहर ही रखें, सबके साथ प्यार से रहे, ख़ुशी के हर एक मौके कोअच्छे से जीएं, अपने अंदर आत्मविश्वास को जगायेँ व् भरपूर रखें, बीती यादो को कभी कुरेद कर अपने मन को दुखी न करें, अच्छी अच्छी किताबे पढ़ें, ऐसा करने से आपको जरूर ख़ुशी मिलेगी|

तो आइये आज हम आपको कुछ ऐसे ही टिप्स देने जा रहे हैं, जो एक अच्छा और खुशहाल जीवन जीने के लिए जरुरी होता हैं, इसके साथ आपको इन्हें ऐसा नहीं हैं कि सिर्फ पड़ना हैं, बल्कि अपने जीवन में इन्हें शामिल कीजिये इससे आपको ही अच्छा महसूस होगा, और साथ ही जीवन के रास्ते में सकारात्मक सोच रखने के कारण तरक्की के रास्ते आपके लिए खुलते चले जायेंगे| तो आइये विस्तार में जानते हैं ऐसे ही कुछ टिप्स के बारे में जो आपको खुश रहने में मदद कर सकते हैं|

ख़ुशी जीवन बिताने के लिए करें इन बातों को अपने जीवन में शामिल:-

किसी से भी अपनी तुलना न करें:-

यदि आप खुश रहना चाहते हैं तो सबसे पहले तो अपनी तुलना किसी और से करना छोड़ दें, जो आपके साथ हैं, आपके पास हैं उसी में संतुष्ट रहना चाहिए| दुसरो से अपने आप की तुलना करके हम अपनी बेस्ती खुद कर देते हैं| और अपने पास हैं यदि हम उसमें खुश रहकर अपना जीवन बिताते हैं तो उसमे आपको ज्यादा ख़ुशी मिलती हैं|

सोच को सकारात्मक रखें:-

जीवन बहुत लंबा होता हैं और इसमे कुछ ऐसी घटनाएं होती हैं, जिसके कारण हमे बहुत दुःख भी होता हैं| परंतु ऐसे में इनसे हार नहीं माननी चाहिए| बल्कि इन घटनाओ से सीख लेकर जीवन के आगे की राह आसान करनी चाहये, और ख़ुशी के रास्ते को अपनाना चाहिए|

खुशिया बाँटें:-

यदि आप खुशिया बाटते हैं तो आपको भी दुसरो से ख़ुशी ही मिलती हैं| इसीलिए जीवन में कभी भी खुशियो के लिए मौके नहीं ढूंढने चाहिए| बल्कि खुशियो को मौका बना लेना चाहिए| ऐसा करने से आपको जीवन में खुशिया अपने आप मिल जाती हैं|

उन लोगो से मिले जो आपको ख़ुशी देते हैं:-

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अकेलेपन से खुशियो के रास्ते में पत्थर पड़ जाते हैं| इसीलिए आपको उन लोगो से मिलना चाहिए, जिन्हें मिलने से आपकी ख़ुशी और भी बढ़ जाती हैं| और इससे आपको अपने बारे में भी जानने का मौका मिलेगा| इसीलिए अकेला नहीं रहना चाहिए| बल्कि अपने समय उन लोगो के साथ बिताएं जिनके साथ आपको ख़ुशी मिलती हैं|

कुछ अलग करें:-

आपको खुश रहने के लिए कुछ अलग या फिर वो काम करना चाहिए, जिससे आपको ख़ुशी मिलती हैं| और आपको कुछ लग और क्रिएटिव करके अपने अंदर के छुपे हुए व्यक्ति को बाहर निकलना चाहिए| जिससे आपको ख़ुशी भी मिलती हैं| और साथ ही आपको अच्छा भी लगता हैं|

आत्मविश्वास को भरपूर रखें:-

खुश रहने के लिए आपको आत्मविश्वास से भी भरपूर रहना चाहिए| यदि आप आत्मविश्वास से भरपूर रहते हैं तो खुशिया भी आपकी और ऐसे आकर्षित होती हैं, जैसे की लोहा चुम्बक की तरफ आकर्षित होता हैं| इसीलिए ख़ुशी से भरपूर रहना चाहते हैं तो कभी भी अपने अंदर आत्मविश्वास की कमी न आने दें|

किताबे पढ़ें:-

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कई व्यक्तियों की आदत होती हैं की वो बहुत कम बात करते हैं, ऐसे में उन्हें अपने आप को ख़ुशी देने के लिए बुक्स और मैगज़ीन्स का सहारा लेना चाहिए| ऐसा करने से आपको मन से बहुत ख़ुशी मिलने के साथ कुछ सीखने के लिए भी मिलता हैं| और आपका मन भी खुश रहता हैं|

समस्या का समाधान ढूंढे:-

कई बार जिंदगी में आपके साथ यदि कोई घटना घट जाएँ तो इसका ये मतलब बिलकुल भी नहीं होता हैं , की आप उस बात को पकड़ कर बैठ जाएँ, और दुखी होते रहें, बल्कि आपको उस समस्या का समाधान ढूंढना चाहिए ताकि उस समस्या को खत्म किया जा सकें| और ख़ुशी के रास्ते पर चला जा सकें|

कुछ स्पेशल करें:-

जिंदगी इतनी बड़ी होती हैं, इसीलिए हर दम इसे एक ही तरीके से नहीं जीना चाहिए| बल्कि आपको अपनी जिंदगी को खुशहाल बनाने के लिए कुछ न कुछ स्पेशल करना चाहिए| ताकि आपको उस पल का मज़ा लेने का मौका मिले, और उस ख़ुशी के लम्हे को आप अपनी जिंदगी में शामिल कर सकें|

अपने चेहरे पर मुस्कराहट रखें:-

यदि आप ख़ुश रहना चाहते हैं, और आप चाहते हैं की आपके आस पास भी ख़ुशी का माहौल रहें, तो इसके लिए आपको भी हमेशा अपने चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कराहट रखनी चाहिए| ताकि आपको इस ख़ुशी का अनुभव भी अच्छे से हो सकें|

कुछ नया करें:-

जिंदगी का मज़ा तभी आता हैं, जब आप कुछ नया कुछ अलग कुछ क्रिएटिव करते हैं| ये आपकी पर्सनल और प्रोफेशनल जिंदगी दोनों को ही अलग रखना चाहिए| इसीलिए यदि जिंदगी में खुश रहना चाहते हैं तो कुछ न कुछ अलग करते रहना चाहिए|

संतुलित आहार करें:-

यदि आप जिंदगी में खुश रहना चाहते हैं, तो इसके लिए जरुरी हैं की आप अपने खान पान पर भी पूरा ध्यान दें, इससे आपको स्वस्थ रहने में भी मदद मिलेगी| इसके लिए आपको सुबह का नाश्ता एक प्रिंस की तरह करना चाहिए, और दोपहर का लंच एक किंग की तरह करना चाहिए|

यादगार लम्हो को याद करें:-

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हर किसी की जिंदगी के कुछ खास लम्हे होते हैं जिन्हें याद करके हमेशा चेहरे पर मुस्कराहट आ जाती हैं| इसीलिए यदि आप कभी भी उदास बैठे हो तो अपनी जिंदगी के उन खास लम्हो को याद करना चाहिए| जिससे उनके चेहरे पर मुस्कराहट आ जाती हैं| आपको अपने आप ख़ुशी मिल जाएगी|

गलत चीजो का साथ न दें:-

क्रोध, ईर्ष्या, घमंड जैसी चीजो को अपनी जिंदगी में कभी भी न आने दें, ऐसा करने से आपको कभी भी प्यार नहीं मिल पायेगा, लोग आपसे दूर भागने लगाएंगे, इसीलिए आपको कभी भी इन बातों को अपनी खुशियो में शामिल नहीं करना चाहिए| क्योंकि ये खुशियो को ख़त्म करने का काम करती हैं|

परिवार के साथ समय बिताएं:-

जिंदगी में सबसे जरूरी होता हैं की आप अपने अपनों को कभी न भूलें, क्योंकि आपको असली ख़ुशी का अहसास उनके साथ ही होता हैं| और वो ही आपको जिंदगी में सबसे ज्यादा खुश रहने में आपकी मदद कर सकते हैं| इसीलिए अपने अपनों को कभी भूलना नहीं चाहिए, बल्कि उन्हें अपने जीवन का एक अंग बनाना चाहिए|

ख़ुशी जीवन बिताने के लिए अन्य टिप्स:-

  • नींद को भरपुर मात्रा में लें|
  • संगीत को अपनी ख़ुशी का एक माध्यम बनाएं|
  • व्यायाम योगा करना चाहिए|
  • दुसरो से कभी भी अपेक्षा न करें|
  • न ही दुसरो पर कभी भी निर्धारित रहें|
  • भगवान् को अपनी प्यारी सी जिंदगी के लिए धन्यवाद कहें|
  • छोटी छोटी खुशियो में खुश होना सीखें|

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वैक्सिंग करने के क्या-क्या नुकसान हो सकते हैं?

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शरीर के अनचाहे बालों को हटाने के लिए वैक्सिंग सबसे असरदार उपाय माना जाता है। आसान होने के साथ-साथ यह लंबे समय के लिए त्वचा को अनचाहे बालों से बचाने में मदद करता है। हालाँकि इस प्रक्रिया में काफी दर्द भी होता है लेकिन यह लंबे समय तक त्वचा को अनचाहे बालों से छुटकारा दिलाने का काम करता है। इसलिए अधिकतर महिलाएं शरीर के अनचाहे बाल हटाने के लिए वैक्सिंग का इस्तेमाल करती हैं।

लेकिन क्या आप जानती हैं की हेयर रिमूविंग की यह तकनीक आपकी त्वचा के लिए बहुत नुकसानदेह हो सकती है। जी हां, वैक्सिंग अनचाहे बालों को निकालने के लिए जितनी फायदेमंद होती है स्किन के लिए उतनी ही नुकसानदेह होती है। आज हम वैक्सिंग करने से क्या-क्या नुकसान होते हैं, उनके बारे में विस्तार से बता रहे हैं।

वैक्सिंग कराने के नुकसान

लोच की कमी

लड़कियों को स्किन पर अनचाहे बाल अच्छे नहीं लगते। जिन्हे हटाने के लिए वे जल्दी-जल्दी वैक्सिंग करवाने लगती है। लेकिन क्या आप जानती हैं की थोड़े-थोड़े गैप में बार-बार वैक्सिंग कराने से त्वचा की लोच खत्म हो जाती है। जी हां, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता की आप वैक्स स्ट्रिप को कितनी आराम से निकालती हैं। लेकिन बार-बार वैक्स कराने से निश्चित रूप से त्वचा ढीली हो जाती है।

झुर्रियों की समस्या

थोड़े-थोड़े समय में वैक्सिंग करवाने से त्वचा पर झुर्रियां पड़ने की संभावना बढ़ जाती है। क्यूंकि बार-बार स्ट्रिप को खींचने से स्किन अपनी लोच खो देती है और धीरे-धीरे झुर्रियां पड़ने लगती हैं।

जलन और लालिमा

बार-बार वैक्सिंग कराने से त्वचा में जलन और लालिमा की समस्या हो जाती है। कुछ महिलाओं को तो वैक्सिंग के बाद लाल दाने भी हो जाते हैं। और अगर आपकी त्वचा संवेदनशील है तो आप इस तरह की समस्यायों का सामना करना पड़ सकता है। इसमें आराम पाने केलिए स्किन पर बर्फ लगाएं।

रैशेस और लाल चकत्ते

वैक्सिंग कराने के बाद आपको खुजली और इरिटेशन भी महसूस हो सकती है। और अगर आप उस हिस्से पर खुजली करती हैं तो आपकी त्वचा पर लाल चकत्ते या लाल दाने उभरे सकते हैं। खासकर संवेदनशील हिस्सों जैसे बिकनी वैक्सिंग में। अगर वैक्सिंग के बाद ये समस्या हो तो आपको स्विमिंग पूल में जाने से बचना चाहिए।

त्वचा जल सकती है

अगर आप हॉट वैक्स करा रही हैं और बहुत अधिक गर्म वैक्स स्किन पर लगाई जाती है तो उसके बाद त्वचा काली पड़ सकती है और जलने की संभावना भी रहती है। अधिक गर्म वैक्स लगाने से त्वचा पर कहीं-कहीं लाल या भूरे रंग के चकत्ते दिख सकते है। हो सकता है यह समस्या सबके साथ ना हो। लेकिन फिर भी ध्यान रखना बेहद जरुरी है।

ब्लीडिंग

वैक्सिंग के बाद हल्की ब्लीडिंग हो सकती है। यह समस्या संवेदनशील त्वचा वाली महिलाओं को ज्यादा होती है। वैक्स स्ट्रिप खींचने के बाद पोर्स से खून आने लगता है। ठंडा सेक लगाने के बाद खून आना बंद हो जाता है और बाद में लाल दाग भी नहीं होते।

एलर्जी रिएक्शन

ऐसा अधिकतर वैक्स और बाकि प्रोडक्ट्स के कारण होता है। खराब और घटिया क्वालिटी के वैक्स प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करने से एलर्जी रिएक्शन हो सकते हैं। इसके कारण स्किन में रैशेस, दानें हो सकते हैं। अगर आपके साथ ऐसा कुछ हो तो जल्द से जल्द स्किन स्पेशलिस्ट के पास जाएं और स्किन चेकअप कराएं।

ये हैं वैक्सिंग कराने के कुछ नुकसान। अगर आपके साथ भी ऐसी समस्याएं हो रही हैं तो वैक्सिंग कराते समय खास सावधानी बरतें। और किसी भी प्रोडक्ट के इस्तेमाल से पहले पैच टेस्ट जरूर करा लें। ताकि बाद में परेशानी ना हो।

पीठ पर से काले दाग कैसे हटाएँ

पीठ पर दाग कैसे हटाएँ, चेहरे पर एक भी दाग हो जाए तो उसे ठीक करने के लिए महिलाएं तरह तरह के फेस वाश, क्रीम, घरेलू उपाय का इस्तेमाल करती है। ताकि वह दाग जल्द से जल्द ठीक हो जाए और आपके चेहरे को आकर्षक दिखने में मदद मिल सके। लेकिन यह समस्या केवल चेहरे पर ही नहीं बल्कि बॉडी के अन्य हिस्सों पर भी हो सकती है। जैसे की बहुत सी महिलाओं को पीठ पर काले काले दाग होने लगते हैं। जिसके कारण महिलाओं को डीप नैक ड्रेस, साड़ी आदि पहनने में समस्या हो सकती है।

क्योंकि इन ड्रेस के पहनने पर महिला की पीठ के दाग दीखते है। जो काफी भद्दे लगते हैं लेकिन यह कोई ऐसी परेशानी नहीं है की जिसका कोई इलाज न हो। बल्कि यदि आपको यह समस्या है तो आप कुछ आसान तरीको का इस्तेमाल करके आसानी से इस परेशानी से निजात पा सकते हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की पीठ पर काले निशान होने के क्या कारण होते हैं और आप किस प्रकार इस परेशानी से निजात पा सकते हैं।

पीठ पर काले दाग होने के कारण

  • बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण ऐसा हो सकता है।
  • शरीर में पोषक तत्वों की कमी कारण भी पीठ पर दाग हो सकते हैं।
  • नहाते समय पीठ की अच्छे से साफ़ सफाई न होने के कारण पीठ पर मृत कोशिकाओं का जमाव होने लगता है, जिसके कारण यह काले दाग का रूप लें सकते हैं।
  • जो महिला या पुरुष तेज मिर्च मसालों का सेवन करते हैं उन्हें भी यह समस्या हो सकती है।
  • मानसिक रूप से तनाव लेना भी स्किन से जुडी परेशानी का कारण हो सकता है।
  • पसीना अधिक आने के कारण भी यह समस्या हो सकती है।
  • प्रदूषण के कारण भी आपको चेहरे के साथ पीठ पर भी काले दाग की समस्या हो सकती है।
  • कई बार पीठ पर छोटे छोटे दाने निकल जाते हैं यदि आप उनपर खुजली कर देते हैं तो उस जगह पर दाग पड़ सकता है।

पीठ पर होने वाले काले दाग हटाने के टिप्स

यदि आपको पीठ पर काले दाग हो गए हैं तो कुछ आसान टिप्स का इस्तेमाल करके आप आसानी से इस परेशानी से निजात पा सकते हैं। तो आइये अब जानते हैं की वो उपचार कौन से हैं।

पीठ पर दाग से बचने के लिए इस्तेमाल करें एलोवेरा

  • स्किन से जुडी परेशानियों के समाधान के लिए एलोवेरा का इस्तेमाल करने से बहुत जल्दी फायदा मिलता है।
  • इस टिप्स का इस्तेमाल करने के लिए दो चम्मच एलोवेरा जैल में दो चम्मच टमाटर का गुद्दा पीसकर मिला लें।
  • अब इस पेस्ट को अच्छे से मिक्स कर लें और दो से मिनट तक पीठ पर मसाज करते हुए इसे सूखने के लिए छोड़ दें।
  • सूखने के बाद इसे गुनगुने पानी से साफ़ कर दें, ऐसा हफ्ते में दो से तीन बार करें।

बेसन

  • दो चम्मच बेसन में मलाई व् निम्बू का रस मिलाएं।
  • अब इस पेस्ट को अच्छे से मिक्स करके पीठ पर लगाएं और दो मिनट के लिए मसाज करें और फिर सूखने के लिए छोड़ दें।
  • सूखने के बाद साफ़ पानी का इस्तेमाल करके इसे साफ़ कर दें।

पीठ पर दाग से बचने के लिए इस्तेमाल करें शहद और निम्बू

  • शहद और निम्बू दोनों ही स्किन के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं।
  • पीठ पर से काले दाग हटाने के लिए इस पेस्ट को अपनी पीठ पर लगाएं।
  • और सूखने के बाद गुनगुने पानी का इस्तेमाल करके मसाज करते हुए इसे साफ़ कर दें।
  • ऐसा हफ्ते में दो से तीन बारे करें।

हल्दी व् मुल्तानी मिट्टी

  • स्किन की ख़ूबसूरती को निखारने के लिए हल्दी और मुल्तानी मिट्टी का इस्तेमाल पुराने समय से ही लोग करते आ रहे हैं।
  • ऐसे में पीठ पर होने वाले काले दाग की समस्या के लिए भी हल्दी व् मुल्तानी मिट्टी का इस्तेमाल बहुत फायदेमंद होता है।
  • इस तरीके का इस्तेमाल करने के लिए एक कटोरी में आधा चम्मच हल्दी, एक चम्मच मुल्तानी मिट्टी, एक चम्मच तुलसी का रस, एक चम्मच पुदीने का रस और थोड़ा पानी मिलाकर एक पतला लेप बनाएं।
  • उसके बाद इस लेप को पीठ पर लगाएं और सूखने के लिए को छोड़ दें।
  • उसके बाद साफ़ पानी का इस्तेमाल करके मसाज करते हुए इसे साफ़ कर दें।

पीठ पर दाग से बचने के लिए इस्तेमाल करें जायफल और कच्चा दूध

  • जरुरत अनुसार जायफल का पाउडर एक कटोरी में लें और उसमे कच्चा दूध मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें।
  • अब इस पेस्ट को पीठ पर लगाएं और सूखने के लिए छोड़ दें।
  • सूखने के बाद साफ़ पानी का इस्तेमाल करके इसे साफ़ कर दें।

दालचीनी पाउडर

  • दालचीनी पाउडर में थोड़ा सा पुदीने का रस और पानी मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें।
  • अब इस पेस्ट को पीठ पर लगाएं और सूखने के लिए छोड़ दें।
  • सूखने के बाद साफ़ पानी का इस्तेमाल करके अपनी पीठ को साफ़ कर दें।
  • ऐसा करने से भी आपको पीठ पर काले दाग की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

गुलाबजल और निम्बू का रस

  • दो चम्मच गुलाबजल, दो चम्मच निम्बू का रस, और थोड़ी सी ग्लिसरीन को मिक्स करके एक पेस्ट तैयार करें।
  • अब इस पेस्ट को रात को सोने से पहले अपनी पीठ पर लगाएं।
  • उसके बाद सुबह नहाते समय इस साफ़ कर दें।
  • इसे हफ्ते में दो से तीन बार जरूर करें।

तो यह कुछ आसान तरीके जिनका इस्तेमाल करने से पीठ पर होने वाले काले निशान की समस्या से निजात पाने में मदद मिल सकती है। इनमे से किसी भी एक टिप्स का इस्तेमाल कुछ दिनों तक करें आपकी परेशानी का हल आपको जरूर मिलेगा।

प्रेगनेंसी चेक करने के अलग अलग 5 तरीके

प्रेगनेंसी की जांच

जब महिला के ओवरीज़ में होने वाले किसी अंडे के साथ पुरुष के शुक्राणु मिलते हैं, और निषेचन की प्रक्रिया होने पर जब महिला का गर्भ ठहरता है। तो उसी समय से ही बॉडी में हार्मोनल बदलाव शुरू हो जाते हैं, जो कई बार महिला के बॉडी में प्रेगनेंसी के कुछ लक्षणों के रूप में महसूस भी हो सकते हैं, और प्रेगनेंसी का सबसे अहम लक्षण होता है की महिला के पीरियड्स मिस हो जाते हैं। लेकिन जब तक आप किसी घरेलू तरीके या प्रेगनेंसी टेस्ट का इस्तेमाल करके चेक नहीं करते हैं की महिला गर्भवती है या नहीं तब तक प्रेगनेंसी कन्फर्म नहीं होती है। प्रेगनेंसी की जांच करने के कई तरीके होते हैं, लेकिन घर में चेक करने के बाद एक बार डॉक्टर को जरूर चेक करवाना चाहिए, ताकि पूरी तरह से प्रेगनेंसी कन्फर्म हो सके।

प्रेगनेंसी कन्फर्म करने के तरीके

पीरियड्स मिस होने के बाद यदि आपको ऐसा लगे की आपका गर्भ ठहर गया है, तो आप घर पर ही कुछ आसान तरीको का इस्तेमाल करके अपना प्रेगनेंसी टेस्ट कर सकती है। और घर में प्रेगनेंसी टेस्ट करने का कोई एक तरीका नहीं होता है बल्कि कई तरीको का इस्तेमाल करके आप आसानी से प्रेग्नेंय टेस्ट कर सकती है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं कुछ तरीके जिनका इस्तेमाल करके आप प्रेगनेंसी टेस्ट कर सकती है।

मार्किट से लाए प्रेगनेंसी टेस्ट किट

पीरियड्स मिस होने पर आप प्रेग्नेंट हैं या नहीं इसे जानने के लिए आज कल मार्किट में आसानी से उपलब्ध प्रेगनेंसी टेस्ट किट का आप इस्तेमाल कर सकती है। इस टेस्ट को करने से पहले इस बात का ध्यान रखें की इसके लिए सुबह का सबसे पहले यूरिन इस्तेमाल करें, क्योंकि उस दौरान यूरिन में HCG हॉर्मोन अधिक सक्रिय होता है जिससे रिजल्ट सही आने के चांस बढ़ जाते हैं। और यदि आप शाम या किसी अन्य समय पर टेस्ट करती है, तो ध्यान रखें की आप टेस्ट से तीन या चार घंटे पहले वाशरूम न गई हो।

इस टेस्ट को करने के लिए सुबह एक सूखे ढक्कन में यूरिन लें, फिर प्रेगनेंसी टेस्ट किट को खोलें और उसमे से ड्रॉपर निकालें, ड्रॉपर में यूरिन लेकर टेस्ट किट में निर्धारित जगह पर दो से तीन बुँदे यूरिन की डालें। उसके बाद टेस्ट किट को सूखी और समतल जगह पर रखें, और चार से पांच मिनट बाद देखे, यदि उसमे दी गई दो लाइन डार्क हो जाती है, तो मुबारक हो आपका रिजल्ट पॉजिटिव है यदि एक ही लाइन डार्क रहती है तो यह नेगेटिव रिजल्ट होता है। आप चाहे तो प्रेगनेंसी टेस्ट को दो दिन बाद दुबारा भी करके देख सकती है।

टूथपेस्ट

घर पर मौजूद टूथपेस्ट भी प्रेगनेंसी टेस्ट करने के लिए एक बेहतरीन विकल्प है, इस टेस्ट को करने के लिए आप एक खुली कटोरी में थोड़ा यूरिन लें, ध्यान रखें यह यूरिन भी सुबह का सबसे पहला यूरिन होना चाहिए। उसके बाद उसमे उतनी की मात्रा में सफ़ेद टूथपेस्ट भी मिलाएं। अब इसे अच्छे से किसी चीज से मिक्स कर लें, और रख दें। अब उसे दो से तीन मिनट बाद देखें, यदि उसमे झाग उठने लगे और उसका रंग नीला होने लग जाए तो इसका मतलब है की आपका परिणाम पॉजिटिव है, और यदि ऐसा कुछ भी न हो तो इसका मतलब रिजल्ट नेगेटिव है।

डेटॉल

डेटॉल का इस्तेमाल करके भी आप आसानी से घर में प्रेगनेंसी का पता कर सकते हैं, इस तरीके को करने के लिए आप एक कांच का गिलास ले लें, ध्यान रखें की गिलास सूखा हुआ हो। उसके बाद उसमे सुबह का थोड़ा पहला यूरिन (लगभग 15 मिली) लें, और उतना ही उसमे डेटॉल डाल दें। अब इसे अच्छे से मिक्स करके रख दें, दो से तीन मिनट बाद देखें यदि डेटॉल और यूरिन अच्छे से मिक्स हो गए है और पूरा मिश्रण सफ़ेद हो गया है तो यह प्रेगनेंसी रिपोर्ट के नेगेटिव होने की तरफ इशारा करते हैं। जबकि यदि डेटॉल यूरिन के ऊपर तेल की तरह तैरता हुआ दिखाई दें, और दोनों मिक्स न होकर अलग अलग हो जाए तो इसका मतलब आपका प्रेगनेंसी टेस्ट पॉजिटिव है।

चीनी

थोड़े से यूरिन में थोड़ी सी चीनी डालकर उसे मिक्स करने की कोशिश करें, यदि चीनी यूरिन में घुलने की बजाए आपस में इक्कठी होने लग जाए। तो इसका मतलब यह होता है की आपका टेस्ट पॉजिटिव है और यदि चीनी यूरिन में घुल जाएँ तो यह नेगेटिव प्रेगनेंसी की तरफ इशारा करता है।

विनेगर

विनेगर यानी सिरका, सिरका का इस्तेमाल करके भी आप घर पर आसानी से प्रेगनेंसी टेस्ट कर सकती है। इस टेस्ट को करने के लिए आप यूरिन और सिरका को बराबर मात्रा में मिलाएं। यदि आपको सिरके के रंग में कोई बदलाव नज़र आता है तो यह प्रेगनेंसी टेस्ट पॉजिटिव का संकेत होता है, जबकि यदि यह अच्छे से मिक्स नहीं होते हैं और इसके रंग में कोई बदलाव नहीं आता है तो इसका मतलब यह नेगेटिव प्रेगनेंसी टेस्ट का संकेत देता है।

तो यह हैं वो पांच आसान तरीके जिन्हे आप पीरियड्स मिस होने के बाद प्रेगनेंसी है या नहीं, इसे जानने के लिए घर पर इस्तेमाल कर सकते हैं। और यदि आपकी रिपोर्ट नेगेटिव आती है तो दो दिन बाद दुबारा टेस्ट करें, उसके बाद भी यदि जाँच नेगेटिव ही रहे तो इसके लिए एक बार डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए की पीरियड्स के मिस होने का असली कारण क्या है।

बिकनी बॉडी चाहिए तो ये है टिप्स

बढ़ता हुआ वजन किसी को भी पसंद नहीं होता है, खासकर जब जीरो फिगर का ट्रेंड चल रहा हो, लेकिन कई बार गलत दिनचर्या और खराब जीवनशैली के साथ आप अपनी बॉडी की शेप को खराब कर बैठते है, लेकिन उसके बाद जब कोई भी ड्रेस आप पर नहीं जचती है, या मोटे होने के कारण जब आपको सबसे बीच हास्य का विषय बनना पड़ता है, तो आपको लगता है, की आप अपने वजन को कम करके बिकनी बॉडी पाकर रहेंगी, और इसके लिए दस में से नौ महिलाएं अपने खान पान का त्याग कर देती है, इससे आपका वजन तो कम हो जाता है, परन्तु शरीर में कमजोरी होने लगती है, पोषक तत्वों की कमी हो जाती है, जिसके कारण आपको बाद में परेशान होना पड़ता है।

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क्या आप भी बिकनी बॉडी पाना चाहती हैं? क्या आप भी चाहती हैं की एक बार यदि कोई आपको देखे तो बस देखता ही रह जाएँ? लेकिन इसके लिए आपको मेहनत करनी पड़ती है, और वो भी नियमित रूप से, और हम आपको आज कुछ ऐसे टिप्स बताएंगे, जिनसे आपको बिकनी बॉडी भी मिलेगी, और आपके स्वास्थ्य को भी किसी तरह का कोई नुक्सान नहीं होगा, क्या आप भी जानना चाहती हैं की वो टिप्स कौन से होते है, लेकिन इस बात का भी आपको ध्यान रखना होगा, की आपको उन्हें नियमित रूप से अपनी दिनचर्या और अपने आहार में इन्हे शामिल करना होगा, तो आइये जानते हैं की बिकनी बॉडी पाने के लिए आप क्या क्या कर सकते है।

ब्लूबेरीज़ का सेवन करें:-

जी हाँ खाने में खट्टे मीठे लगने वाले जामुन आपको बिकनी बॉडी देने में मदद करते है, क्योंकि ब्लूबेरीज़ में कैलोरी की मात्रा कम होने के साथ पानी और फाइबर भरपूर मात्रा में होता है, साथ ही यह आपके मेटाबोलिज्म को भी बढ़ा देता है, जिसके कारण आपको फिट रहने के साथ धीरे धीरे अपने वजन को कम करके परफेक्ट स्लिम फिट बॉडी पाने में मदद मिलती है।

एवोकाडो का सेवन करें:-

यह फल यदि आप नियमित रूप से अपनी डाइट में शामिल करते हैं तो ये सोचिये की बीमारियों से दूर रहने में मदद मिलेगी, क्योंकि इसमें विटामिन और अन्य पोषक भरपूर मात्रा में होते है, साथ ही इसके सेवन से आपको अपने वजन को घटाने में भी मदद मिलती है, जिससे आपको सेक्सी फिगर और परफेक्ट बॉडी शेप पाने में मदद मिलती है।

कॉर्न का सेवन करें:-

कॉर्न का सेवन करने से भी आपको अपने वजन को कम करने में मदद मिलती है, क्योंकि इसमें फाइबर की मात्रा भरपूर होती है, साथ ही इसके सेवन से आपको काफी देर तक पेट भरा हुआ लगता है, जिससे कुछ खाने की इच्छा नहीं होती है, साथ ही इसका सेवन करते समय आप निम्बू, और काली मिर्च का सेवन न करें।

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ग्रीन टी पीएं:-

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ग्रीन टी भी आपके वजन कम करने का सबसे अच्छे नेचुरल उपाय में से एक है, इससे न सिर्फ शरीर में नमी बरकरार रहती है बल्कि आपके मेटाबोलिज्म को बेहतर होने में मदद मिलती है, साथ ही आपका पाचन तंत्र भी ठीक ढंग से काम करने लगता है, इसलिए यदि आप फिट दिखना चाहते है तो आज से ही रोजाना सुबह एक कप ग्रीन टी पीने की आदत डाल लें, और पुरे दिन में दो से तीन कप ग्रीन टी का सेवन करें, इससे आपको बीमारियों से भी बचाव करने में मदद मिलेगी।

पीच ( आड़ू ) का सेवन करें:-

पीच में फाइबर भरपूर मात्रा में होता है जिसके कारण आपको न से पेट फूलने और न ही अपच जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, इसके अलावा यदि आप इसका सेवन करते है तो आपके शरीर में पानी की कमी भी नहीं होती है और आप पूरी तरह फिट रहते हैं, इसलिए नियमित रूप से पीच ज़रूर खाएं, जब इसका मौसम हो, इससे आपको अपनी बॉडी को बिकनी डालने के लिए एक परफेक्ट शेप देने में मदद मिलेगी।

व्यायाम को अपनी दिनचर्या का अंग बनाएं:-

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व्यायाम करने से भी आपको अपनी दिनचर्या को बेहतर बनाने में मदद मिलती है, क्योंकि इससे आपके शरीर में जमी चर्बी को पसीने की मदद से कम किया जा सकता है, जिससे धीरे धीरे आपकी बॉडी की शेप बनने लगती है, और यदि आप नियमित व्यायाम करते है तो आपको फिट रहने में भी मदद मिलती है, और नियमित यदि आप इसे करते है, तो आपको अपनी बॉडी को परफेक्ट शेप मिलती है, जिससे आपको अपनी लुक को सेक्सी बनाने में मदद मिलती है, व्यायाम के साथ आपको योगासन भी करना चाहिए ऐसा करने से भी आपको अपनी बॉडी को परफेक्ट शेप देने में मदद मिलती है।

साइकिलिंग और पुश अप्स करें:-

नियमित आधा घंटा साइकिलिंग करें, और कम से कम चालीस से पचास पुश अप्स लगाएं, ऐसा करने से आपके शरीर की मांसपेशियों को खुलने में मदद मिलेगी, और वो सुचारु रूप से काम भी करेंगी, इसके साथ आपकी बॉडी पर जमी अतिरिक्त चर्बी को कम करके आपकी बॉडी को एक परफेक्ट बिकनी शेप देने में भी मदद मिलेगी।

ज्यादा कैलोरीज़ और मसालेदार, तले हुए खाने से परहेज रखें:-

महिलाओ को आदत होती है की वो चटपटे का सेवन अधिक मात्रा में करती है, और कई महिलायें तो खाना खाने के बाद मीठे का सेवन भी जरूर करती है, यदि आप भी ऐसा करती है और अपनी बॉडी को परफेक्ट शेप देना चाहती है, तो आपको इन सब चीजों का त्याग करना चाहिए, ऐसा करने से आपको अपने शरीर को फिट रखने में मदद मिलती है, साथ ही बॉडी पर चर्बी नहीं जमती है, इसीलिए स्वस्थ व् पौष्टिक आहार का सेवन करें, और वो भी नियमित रूप से, ताकि आपको फिट रहने में मदद मिल सकें।

तो ये कुछ उपाय हैं जिनका इस्तेमाल करने से आपको परफेक्ट बॉडी शेप पाने में मदद मिलती है, इसके अलावा आपको अपनी नींद को भरपूर लेना चाहिए, ज्यादा मीठे व् नमक के सेवन से परहेज करना चाहिए, आलस नहीं करना चाहिए, खाने के बाद एक दम से सोना नहीं चाहिए, रात के खाने को समय से खाना चाहिए, इन कुछ तरीको का इस्तेमाल करने से भी आपको अपनी बॉडी को फिट रखने में मदद मिलती है।

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