प्रेगनेंसी की खबर सुनते ही महिला का अपने गर्भ में नन्हे शिशु से भावनात्मक रूप से लगाव हो जाता है और अपने आप ही महिला में मातृत्व की भावना बढ़ने लगती है। महिला प्रेगनेंसी में कुछ भी करने से पहले केवल यही सोचती है की जो वो कर रही है उसका शिशु पर कोई बुरा प्रभाव तो नहीं होगा। और गर्भावस्था का पूरा समय महिला केवल इसी बारे में ही सोचती रहती है की उसका शिशु गर्भ में क्या कर रहा होगा, उसका विकास कैसे हो रहा होगा, जिस तरह शिशु की हलचल से माँ अपने बच्चे को महसूस करती है क्या उसी तरह बच्चा भी माँ को महसूस कर रहा होगा, आदि। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको गर्भ में पल रहा शिशु किन किन चीजों को करता है महसूस करता है उस बारे में बताने जा रहे हैं।
स्वाद
जो भी आहार गर्भवती महिला खाती है तो गर्भनाल के रास्ते उस आहार में मौजूद पोषक तत्व व् स्वाद शिशु तक भी पहुँचता है। और कुछ ऐसी चीजें होती है जिनका स्वाद शिशु को बहुत अच्छा लगता है तो कुछ ऐसी भी होती है जिनका स्वाद शिशु को अच्छा नहीं लगता है। और जिन शिशु चीजों का स्वाद शिशु को अच्छा लगता है उन चीजों का स्वाद लेने के बाद हो सकता है शिशु आपको अपनी हलचल के माध्यम से प्रतिक्रिया भी दे।
माँ का पेट पर हाथ फेरना
गर्भ में पल रहे शिशु को केवल महिला ही अनुभव नहीं कर सकती है। बल्कि जब प्रेग्नेंट महिला या कोई और गर्भवती महिला के पेट को हाथ लगाकर शिशु को प्यार देता है। तो शिशु उसे भी महसूस करता है और ऐसा करने से शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है।
आस पास की आवाज़ें
जब शिशु गर्भ में होता है तो शुरुआत में उसके अंग बनते हैं और फिर धीरे धीरे वो अंग काम भी करने लगते हैं। जैसे की शिशु के बढ़ते विकास के साथ शिशु की सुनने की क्षमता में भी वृद्धि होती है। और जब आप मधुर संगीत सुनते हैं तो शिशु उसे महसूस करता है और हो सकता है की वह संगीत सुनकर गर्भ में खुश भी हो। साथ ही बहुत तेज आवाज़ में संगीत सुनंने के कारण गर्भ में शिशु चौक भी सकता है और गर्भ में शिशु ज्यादा हलचल करने लगता है। इसीलिए प्रेग्नेंट महिला को हमेशा कम आवाज़ में और मधुर संगीत ही सुनना चाहिए। संगीत के अलावा यदि महिला गर्भ में शिशु से बातें करती है, बोल बोल कर किताबे पढ़ती है तो इन चीजों को भी शिशु महसूस करता है।
महिला को होने वाली दिक्कत
यदि गर्भवती महिला तेज चिल्लाती है या महिला के साथ कोई दुर्व्यवहार हो रहा होता है, या किसी अन्य कारण की वजह से महिला परेशान रहती है। तो महिला को होने वाली परेशानी का अनुभव गर्भ में शिशु को भी होता है। इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान महिला को खुश रहने की सलाह दी जाती है ताकि गर्भ में शिशु भी खुश रह सके।
तो यह हैं कुछ अहसास जो गर्भ में पल रहा शिशु महसूस कर सकता है। ऐसे में यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी इन बातों का ध्यान रखना चाहिए, ताकि आप भी अपने बच्चे को खुश रख सके।
इन विट्रो फर्टिलाइजेशन एक ऐसा तरीका है जिसके इस्तेमाल से इनफर्टिलिटी की समस्या का समाधान हो सकता है। मेडिकल द्वारा दी गई इस सुविधा के कारण जो दम्पति माँ बाप नहीं बन सकते है। उन्हें भी माँ बाप बनने का सुख प्राप्त होता है, इन विट्रो फर्टिलाइजेशन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमे अंडे को निषेचित करने की प्रक्रिया के बाद महिला के गर्भ में प्रत्यारोपित कर दिया जाता है। और उसके बाद महिला के गर्भ में ही शिशु का सम्पूर्ण विकास होता है।
आईवीएफ के बाद महिलाओ को अपनी बहुत ज्यादा केयर करनी पड़ती है, खासकर यदि आप शुरुआत में गलतियां करते है तो इसके कारण आईवीएफ के फेल होने का खतरा होता है। जैसे की महिला और पुरुष को सम्भोग करने से बचना चाहिए, महिला को जितना हो सके आराम करना चाहिए, इसके अलावा और भी बहुत सी सावधानियां है जो महिला को बरतनी चाहिए। आइये विस्तार से जानते है उन सावधानियों के बारे में वो क्या है।
आईवीएफ (IVF precaution) के बाद बरते यह सावधानियां:-
सम्बन्ध न बनाएं:-
आईवीएफ की प्रक्रिया के बाद महिला और पुरुष को जब तक शारीरिक सम्बन्ध नहीं बनाने चाहिए जब तक की डॉक्टर इसकी परमिशन न दें। यदि आप ऐसा करते है तो इससे महिला को वजाइनल इन्फेक्शन होने का खतरा रहता है, साथ ही इससे गर्भाशय को भी चोट लगने का खतरा रहता है। इसीलिए जितना हो सके महिला और पुरुष को इससे परहेज रखना चाहिए।
प्रोजेस्टेरोन लें:-
ओवुलेशन के बाद प्रेगनेंसी में कोई समस्या न हो इसके लिए शरीर में प्रोजेस्टेरोन का उचित मात्रा में होना बहुत जरुरी होता है। यह एक ऐसा हॉर्मोन है जिसका उत्पादन महिला की ओवरी में होता है। आईवीएफ की प्रक्रिया के दौरान यह हॉर्मोन कृत्रिम रूप से इंजेक्शन के द्वारा महिला को दिए जाते है। यह हॉर्मोन महिला को प्रेगनेंसी के बाहरवें हफ्ते तक दिए जाते है। जब तक महिला के शरीर में खुद इस हॉर्मोन का उत्पादन होना शुरू नहीं होता है।
नशा न करें:-
प्रेगनेंसी के दौरान किसी भी तरह का नशा महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु पर भी बुरा असर डालता है। ऐसे में आईवीएफ के दौरान भी आपको किसी भी तरह के नशे से परहेज करना चाहिए, क्योंकि इससे भी आपको नुकसान पहुँच सकता है।
कैफीन के सेवन से बचें:-
ज्यादा कैफीन जैसे चाय कॉफ़ी आदि का सेवन करने से भी आपको परहेज करना चाहिए। इससे आपको गैस या पेट सम्बन्धी अन्य परेशानी हो सकती है। जिसके कारण आईवीएफ की प्रक्रिया पर बुरा असर पड़ता है। और आपको परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
व्यायाम न करें:-
आईवीएफ की प्रक्रिया के बाद महिलाओ को किसी भी तरह का कड़ा व्यायाम और एरोबिक्स आदि न करने की सलाह दी जाती है। और यदि आपका व्यायाम करना चाहते है तो आप हल्का फुल्का टहल सकते है या फिर थोड़ी देर मैडिटेशन भी कर सकते है। इससे न तो आपको कोई नुकसान होता है और साथ ही तनाव से राहत मिलने में भी मदद मिलती है।
नहाएं नहीं शावर लें:-
डॉक्टर्स के अनुसार जब आईवीएफ की प्रक्रिया होती है उसके बाद महिला को कम से कम दो हफ्तों तक बैठकर नहीं नहाना चाहिए। इससे आईवीएफ प्रक्रिया पर असर पड़ता है जिसके कारण अंडा अपने प्रत्यारोपित स्थान से हट सकता है। ऐसे में आपकी आईवीएफ प्रक्रिया फेल हो सकती है, इसीलिए आप चाहे तो खड़े होकर थोड़ा शावर ले सकते है लेकिन बैठकर नहाने से परहेज करना चाहिए।
भारी सामान न उठाएं:-
प्रेगनेंसी के शुरूआती दिनों में भरी सामान का उठाना गर्भपात का कारण बन सकता है, और बाद में यदि आप भारी सामान उठाते है तो इससे आपके पेट पर दबाव पड़ता है। जिसके कारण आपको परेशानी हो सकती है। आईवीएफ के दौरान जब तक आपकी डिलीवरी नहीं हो जाती है न तो आपको ज्यादा झुककर काम करना चाहिए और न ही अधिक भार उठाना चाहिए।
अधिक भागदौड़ न करें:-
प्रेगनेंसी के दौरान ज्यादा भागदौड़ आपके गर्भपात का कारण बन सकती है, और जब शिशु आईवीएफ के जरिए हो तो आपको दुगुना ध्यान रखना चाहिए। ऐसे में इस दौरान आपको न तो यात्रा करनी चाहिए, और न ही ज्यादा भागदौड़ वाला काम करना चाहिए। ऐसा करने से आपको इस दौरान होने वाली परेशानी से बचने में मदद मिलती है।
डॉक्टर से जांच करवाएं:-
नियमित जांच और थोड़ी सी भी परेशानी होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना आईवीएफ में बहुत जरुरी होता है। क्योंकि आपकी थोड़ी सी लापरवाही आपके लिए नुकसानदायक हो सकती है। इसीलिए जब भी आपको थोड़ी सी भी परेशानी हो तो आपको तुरंत डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए।
तो यदि आप भी आईवीएफ के जरिए माँ बनने जा रही है तो आपको अपना दुगुना ध्यान रखना चाहिए। और साथ ही इस दौरान आपको किसी भी तरह की परेशानी न हो इससे बचने के लिए आपको ऊपर दिए गए टिप्स का इस्तेमाल करना चाहिए। ताकि माँ और होने वाले शिशु दोनों को ही स्वस्थ रहने में मदद सकें और आपको भी माँ बाप बनने के सुखमयी अहसास हो सकें।
किचन की बदबू दूर करने की टिप्स हिंदी में, किचन की दुर्गन्ध दूर करने के उपाय, how do you get rid of cooking odors, cooking odor, how to get rid of cooking smells, how to remove fish odor from kitchen, किचन से खाना बनाने की बदबू, खाना बनाने की बदबू, किचन की दुर्गन्ध, किचन की स्मेल, रसोई की बदबू दूर करने के उपाय
खाना बनाने के दौरान और खाना बनाने के कुछ समय बाद किचन से आने वाली दुर्गन्ध वाकई अजीब होती है। कितनी ही सफाई क्यों न कर लें लेकिन यह दुर्गन्ध जाती ही नहीं। जिसका कारण होता है खाना बनाने में इस्तेमाल होने वाले मसाले। एक्सपर्ट्स की मानें तो खाने में इस्तेमाल होने वाले मसालें की सुगंध खाने को तो जायका दे देती है लेकिन उसके कारण पुरे घर में एक अजीब सी दुर्गन्ध भर जाती है, विशेषकर किचन में। थोड़े समय तक यह महक सभी को भाति है लेकिन एक दो दिन बाद यही महक परेशानी का कारण बन जाती है।
आपने भी अक्सर देखा होगा बहुत से लोगों की किचन में एक अजीब से गंध आती है। जिसे महसूस करके हर कोई यही सोचता है की यह अपनी किचन ढंग से साफ़ नहीं करते। जबकि ऐसा नहीं है यह गंध सिर्फ उन मसालों की होती है जो खाना बनाने में इस्तेमाल किये जाते है। लेकिन आपको परेशान होने की आवश्यकता नहीं है अगर आप भी इस समस्या से परेशान है तो आज हम आपको कुछ ऐसी टिप्स देने जा रहे है जिनकी मदद से आपकी किचन 24 x 7 महकती रहेगी। लेकिन इन उपायों के साथ साथ आपको कुछ विशेष बातों का भी ध्यान रखना होगा जिनके बारे में हम आपको आगे बताएंगे।
किचन से आने वाली बदबू (दुर्गन्ध) दूर करने के उपाय :-
1. नींबू का इस्तेमाल करें :
अगर आप फ्रिज को किचन में रखती है तो जाहिर है आपकी फ्रिज से भी यह अजीब से दुर्गन्ध आने लगी होगी। इस स्थिति में आप नींबू का इस्तेमाल कर सकती है। इसके लिए गर्म नींबू पानी से भरा हुआ एक कटोरा फ्रिज में रख दें। कुछ ही घंटों में पूरी बदबू फ्रेशनेस में परिवर्तित हो जाएगी।
2. बेकिंग सोडा का प्रयोग :
किचन के छोटे से छोटे काम में बेकिंग सोडा का इस्तेमाल करना फायदेमंद होता है। किचन की बदबू दूर करने के लिए आप इसे खाना बनाने और रखने वाली हर जगह पर छिड़क दें, जिससे उन जगहों पर बदबू नहीं भरेगी। और खाने के मसाले व् जलने की बदबू भी नहीं आएगी।
3. किचन की खिड़की को खोलें :
रसोई में बदबू आने का मुख्य कारण वहां मौजूद खाने की स्मेल होती है। ऐसे में अगर आप खाना बनाते समय कुछ देर के लिए अपनी किचन की खिड़की खोल देते है तो वो स्मेल किचन में इकट्ठी नहीं होगी और बदबू नहीं आएगी। इसके अलावा अगर आप किचन को बंद करके खाने में छोंक लगाते है तो भी स्मेल आ सकती है। इसलिए कभी भी खाना किचन बंद करके नहीं बनाना चाहिए।
4. फर्श को फिनाइल से साफ़ करें :
किचन की बदबू को दूर करने के लिए आप फिनाइल का इस्तेमाल कर सकती है। जी हां, फिनाइल की स्मेल काफी स्ट्रोंग होती है जो किसी भी बदबू को खत्म कर सकता है। इतना ही नहीं यह रसोई के फर्श और स्लिप पर लगे दाग भी साफ़ कर देता है और वहां मौजूद कीटाणुओं का भी सफाया करता है।
5. कूड़ा इक्कठा न होने दें :
अधिकतर लोग किचन के कूड़े का अलग डस्टबिन बनाते है जिसे वे किचन में ही रख देते है। जबकि ऐसा करना उनके किचन से आने वाली बदबू का बड़ा कारण होता है। क्योंकि किचन के कूड़े में अधिकतर खराब सब्जियां, दूध का खाली पैकेट, सब्जियों के छिलके आती होते है। जो इक्कठा होकर बहुत बदबू देते है इसलिए कोशिश करें की किचन का डस्टबिन किचन से दूर ही रखें। और इस तरह के किसी भी कूड़े को किचन में जमा न होने दें।
6. किचन का कपडा साफ़ रखें :
किचन की साफ़ सफाई करते समय यूज किये जाने वाला कपड़ा अक्सर बहुत गंदा हो जाता है। जिसे अगर थोड़ी देर भी बिना धुले रख दिया जाए तो उसमे से काफी गन्दी स्मेल आने लगती है। और यही स्मेल आपकी किचन से आने वाली बदबू का भी कारण होती है। जी हां, अगर आप भी अपनी किचन के कपडे से कुछ साफ़ करके उसे ऐसे ही बिना धुले रख देती है तो यह अच्छी बात नहीं है। किचन की बदबू को दूर करने के लिए आपको इसकी सफाई पर भी ध्यान देना होगा। इसके लिए इसे हमेशा साफ़ पानी से धोकर धुप में सुखाएं। दूध आदि गिरने पर कपडें को दो से तीन बार साफ़ करें और उसे सर्फ से भी साफ़ करें। और धुप में ही सुखायें। इससे उसकी बदबू भी निकल जाएगी और आपकी किचन की सफाई भी हो जाएगी।
7. सिंक को गंदा न रखें :
सिंक में हम पुरे दिन बर्तन आदि साफ़ करते है लेकिन बहुत से लोग उसकी साफ़ सफाई पर बिलकुल ध्यान नहीं देते। जिसके कारण किचन से सिंक से भी बदबू आने लगती है। ऐसे में आपको चाहिए की आप अपनी किचन की सिंक की भी अच्छे से सफाई करें। उसे समय समय पर साबुन या सर्फ़ से मांजती रहें। बेहतर होगा अगर आप इसे हर बार बर्तन साफ करते समय माजेंगी। अगर इस पर पानी की दाग जमे हुए है तो आप उसे नींबू या एसिड की मदद से हटा सकती है। इससे आपकी सिंक तो साफ़ होगी ही साथ साथ आपकी किचन से आने वाली बदबू भी दूर हो जाएगी।
8. सडन वाली चीजों का ध्यान रखें :
किचन में बदबू फैलाने वाला एक कारण सडन वाली चीजें जैसे सड़े हुए आलू प्याज, पुरानी सब्जियां, आदि भी होती है। जिनकी वजह से पूरी सफाई बेकार लगती है। ऐसे में आपको इन सबके बारे में भी ध्यान रखना होगा। अर्थात अगर आप प्याज व् आलू अधिक मात्रा में लाते है तो देखें की कहीं उसमे कोई पीस खराब तो नहीं। अगर है तो उसे तुरंत निकाल कर फेंक दें। इसके अलावा ज्यादा पुरानी सब्जियों को किचन में अधिक दिनों तक न रखें। एक दिन से ज्यादा बनी हुई (पकी हुई) सब्जियां स्टोर न करें।
9. संतरे का छिलका :
संतरे में विटामिन सी पाया जाता है जो किसी भी दुर्गन्ध को दूर करने की क्षमता रखता है। इसकी स्ट्रोंग स्मेल काफी अच्छी होती है और बदबू को खत्म करने में मदद करती है। इसके उपयोग के लिए एक कटोरे में पानी लें और उसे धीमी आंच पर गर्म कर लें। कुछ समय में संतरे के छिलके इसमें डाल दें। उसके बाद इस पानी को उबलने दें और फिर दालचीनी डाल दे। वैसे आओ इसमें इलायची भी डाल सकती है। इस पानी को किचन में ही रखें रहने दें। किचन की दुर्गन्ध दूर हो जाएगी।
10. शुगर सोप से जाएगी बदबू :
सी फ़ूड (जैसे – मछली, झींगा, झींगा मछली, क्रैब, आदि) को बनाने के बाद भी किचन और हाथों से अजीब दुर्गन्ध आने लगती है। जिसे हटाने के कितने ही प्रयास क्यों न कर लिए जाए वह नहीं जाती। ऐसे में आप शुगर सोप का इस्तेमाल कर सकती है। इससे हाथों से बदबू दूर हो जाएगी। और किचन की बदबू के लिए भी इस सोप को किचन में रख दें।
11. सिरके से इस्तेमाल से हटेगा धुंआ :
खाना बनाने के बाद किचन का धुँआ हटाने के लिए आप सिरके का इस्तेमाल कर सकती है। इसके लिए पोंछा लगाते समय पानी में सफ़ेद सिरके की 2 बूंद डाल दें। और उसी पानी से पोंछा लगायें। साथ ही इसी पानी से प्लेटफार्म पर भी पोंछा मारें। बदबू और धुंआ दोनों समाप्त हो जाएँगे।
12. टोस्ट का इस्तेमाल :
सुनने में थोडा अटपटा जरुर है लेकिन वाकई में यह आपकी किचन की दुर्गन्ध को दूर करने में आपकी मदद कर सकता है। इसके लिए एक टोस्ट निकालने किचन में ऐसे ही खुला छोड़ दें। बदबू अपने आप दूर हो जाएगी।
इसके अलावा आपको स्लिप का भी खास ध्यान रखना होगा। क्योंकि खाना बनाने के दौरान आपकी स्लिप पर थोडा बहुत खाना गिर जाता है। जो बाद में बदबू देता है। इसलिए इसकी सफाई का भी ध्यान रखें। साथ ही किचन में कभी भी दूध न गिरने दें। और अगर गलती से गिर गया है तो उसे तुरन्त साफ़ कर दें और उस जगह फिनाइल या साबुन का पोंछा लगा दें। क्योंकि दूध की स्मेल काफी अजीब होती है।
पीरियड्स महिलाओ को होने वाली एक प्रक्रिया है, जिसमें महिलाओ के प्राइवेट पार्ट से रक्त का प्रवाह होता है, और इस मामले में न तो महिलायें किसी से बात करना चाहती है, और न ही इस विषय में कुछ शेयर करना चाहती है। परन्तु पीरियड्स के दौरान ऐसी बहुत सी बातें है जिनका महिलाओ को ध्यान रखना चाहिए, जैसे की अपने प्राइवेट पार्ट की साफ़ सफाई का क्योंकि यदि आप इस बात का ध्यान नहीं रखती है, तो इसके कारण आपको इन्फेक्शन होने का खतरा होता है, और साथ ही खुजली, जलन, और रैशेस जैसी समस्या हो जाती है तो आइये जानते है इस बारे में कुछ और बातें।
पीरियड्स के दौरान आपको अपनी साफ़ सफाई का ध्यान और भी ज्यादा देना पड़ता है, जैसे की आप कौन सा सैनिटरी पैड का इस्तेमाल कर रही है, आप अपने पैड को कितने समय के बाद बदलती है, अपने प्राइवेट पार्ट के लिए ज्यादा गंध वाले प्रोडक्ट का इस्तेमाल तो नहीं करती है, ऐसी ही कुछ बातों का ध्यान आपको पीरियड्स के समय रखना पड़ता है, क्योंकि यदि आप इन बातों का ध्यान नहीं रखते है, तो आपको इन्फेक्शन का खतरा होता है, पीरियड्स आपको हर महीने तीन से पांच दिन के लिए होता है, ऐसे में आपके प्राइवेट पार्ट को बहुत ज्यादा साफ सफाई की जरुरत होती है, साथ ही कई महिलायें आज भी पीरियड्स में कपडे का इस्तेमाल करती है, जो भी इन्फेक्शन का कारण बनता है, तो आइये विस्तार से आपको बताते है की आपको पीरियड्स में साफ़ सफाई के लिए किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
सैनिटरी पैड का रखें ध्यान:-
आज के समय में बाजार में आपको बहुत से सैनिटरी पैड मिल जाते है, जिसका इस्तेमाल करके आप पीरियड्स में अपने आप को हाईजीन रह सकती है, और पीरियड्स के समय के लिए ज्यादातर कॉटन लेयर के स्लिम सैनिटरी पैड का इस्तेमाल करने की सलाह हर किसी को दी जाती है, इनका इस्तेमाल करने से आपको रैशेस की समस्या से राहत मिलती है, और साथ ही ये गीलेपन को भी अच्छी तरह से सोख लेता है, जिसके कारण आपको आरामदायक महसूस होता है, और आप किसी और भी अच्छे पैड का इस्तेमाल भी कर सकती है, परन्तु बस इतना ध्यान रखें की उस पैड का इस्तेमाल करें, जो गीलेपन को जैल में परिवर्तित कर दे।
पैड को बदलते रहें:-
पीरियड्स के समय आपको पैड को कम से कम छह घंटे के बाद बदल देना चाहिए, क्योंकि पीरियड्स के समय में आपके शरीर में बैक्टेरिया के फैलने के खतरा ज्यादा होता है, और प्राइवेट पार्ट से तेजी से हो रही ब्लीडिंग के कारण अंदर नमी आ जाती है, जिसके कारण इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है, और चाहे आपको ब्लीडिंग कम भी हो रही हो तो भी आपको छह घंटे से ज्यादा पैड का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, कई महिलाओ को ज्यादा तेजी से रक्त का स्त्राव होता है, उन्हें दो या तीन घंटे में अपने पैड को बदल लेना चाहिए, खास कर पहले दो दिन ब्लीडिंग की समस्या ज्यादा होती है।
पीरियड्स के समय आपको प्राइवेट पार्ट में खुजली, जलन, व् रैशेस जैसी समस्या हो सकती है, इसीलिए आपको अपनी साफ़ सफाई का खास ख्याल रखना चाहिए आप पीरियड्स में जितनी बार भी बाथरूम में जाते है, उतनी बार अपने प्राइवेट पार्ट को पानी से अच्छे से धोना चाहिए, और साथ ही आपको ज्यादा गंध वाले साबुन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, बल्कि आपको बैक्टेरिया मुक्त साबुन का इस्तेमाल करना चाहिए, इसके अलावा आपको पीरियड्स में नियमित नहाना भी जरूर चाहिए, क्योंकि जितना आप अपनी साफ़ सफाई का ध्यान रखेंगे, उतना ही आप इन्फेक्शन से बचे रहेंगे।
प्राइवेट पार्ट के लिए ज्यादा केमिकल वाली चीजों का इस्तेमाल न करें:-
मासिक धर्म के समय महिलाओ को अपने प्राइवेट पार्ट की साफ़ सफाई के लिए ज्यादा केमिकल या गंध वाली चीजों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, बल्कि आपको बैक्टेरिया मुक्त साबुन का इस्तेमाल करना चाहिए, क्योंकि ज्यादा गंध वाली चीजों का इस्तेमाल करने से आपके प्राइवेट पार्ट के गुड बैक्टेरिया खत्म हो जाते है, और गंदे बैक्टेरिया पैदा होने लगते है, जिसके कारण आपको इन्फेक्शन होने की सम्भावना बढ़ जाती है, इसीलिए आपको अपने प्राइवेट पार्ट को साफ़ करने के लिए इनकी जगह गरम पानी का इस्तेमाल करना चाहिए।
एक ही तरीके से करें सैनिटेशन का इस्तेमाल:-
कई महिलायें ऐसी होती है, जिन्हे पीरियड्स के समय बहुत अधिक रक्त का फ्लो होता है, इसके लिए वो एक साथ दो पैड या फिर पैड और कपडे का इस्तेमाल करती है, परन्तु ये बिलकुल सही तरीका नहीं होता है, इसके कारण न तो आपके पैड का सही ढंग से इस्तेमाल हो पाता है, और न ही आपको आरामदायक मह्सूस होता है, इसके कारण आपको रैशेस की समस्या होने का ज्यादा खतरा होता है, इसीलिए आपको कभी भी ऐसा नहीं करना चाहिए, इसकी जगह आप थोड़ी थोड़ी देर बाद पैड को बदलते रहे ये सही उपाय है, इसके कारण आपको संक्रमण की समस्या भी नहीं होती है।
सफाई के सही तरीके का इस्तेमाल करें:-
इन दिनों में आपको अपने प्राइवेट पार्ट की साफ़ सफाई के लिए भी बहुत सी बातों का ध्यान रखना चाहिए, जाइए की प्राइवेट पार्ट की सफाई करते समय वजाइना से शुरु करके एनस की तरफ जाएं, उलटी दिशा में सफाई न करें, यदि आप उलटी दिशा में सफाई करते है तो इसके कारण बैक्टेरिया वजाइना से मूत्रमार्ग तक फ़ैल जाता है, जिसके कारण आपको इन्फेक्शन की सम्भावना भी बढ़ जाती है, इसीलिए आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए।
तो ये कुछ बातें है जिनका ध्यान आपको पीरियड्स के समय साफ सफाई को लेकर रखना चाहिए, इसके साथ आपको जब भी कही बाहर भी जाना हो तो भी इन दिनों की जरुरत का सामान अपने साथ रख कर लेकर जाना चाहिए, जैसे की एक्स्ट्रा पैड, एक नरम तौलिया, थोड़े टिश्यू पेपर, हैंड सैनिटाइज़र, ऐंटिसेप्टिक क्रीम आदि, और अपने लिए खाने पीने का सामान भी रखना चाहिए, ताकि आपको इन दिनों में बहार जाकर किसी परेशानी का सामना न करना पड़े, तो ये कुछ बातें है जिनका आपको ध्यान रखना चाहिए, इसके कारण आपको पीरियड्स के दिनों में इन्फेक्शन से बचने में मदद मिलती है।
आज के समय में लोग अपने शरीर की शेप और व्यक्तित्व पर बहुत अधिक ध्यान देने लगे है फिर चाहे वो लड़के हो या लड़कियां। जहां एक तरफ लड़के सिक्स पैक ऐब रखना पसंद करते है वहीं दूसरी तरफ लड़किया खुद को जीरो फिगर में रखना चाहती है। पहले के समय ये इतना लोकप्रिय नहीं था लेकिन आज कल जीरो फिगर होना हर लड़की की चाह बन चुका है।
पहले के समय की तुलना में आज की पीढ़ी अपनी कमर को पतला और जीरो साइज बनाना चाहती है। क्योंकि ये उनकी पर्सनालिटी को अच्छा बनाने के साथ-साथ खूबसूरत भी दिखाती है। परन्तु कई बार लाख कोशिशे करने के बावजूद भी कमर एक इंच भी कम नहीं होती। ऐसे में हताश होकर बैठने के अलावा और कोई उपाय नहीं सूझता।
लेकिन क्या आप जानती है की कुछ तरीके है जिनकी मदद से आप अपनी कमर को पतली और सेक्सी बना सकती है। और इसके लिए आपको बहुत से पैसे खर्च करके जिम ज्वाइन करने की भी जरूरत नहीं है। लेकिन सभी को इन तरीकों के बारे में पता नहीं होता इसीलिए आज हम आपको पतली कमर पाने के कुछ टिप्स देने जा रहे है जिनकी मदद से आप भी पतली और बेहतरीन कमर पा सकेंगी।
पतली कमर पाने के लिए सबसे जरुरी है की आप अपने खान पर विशेष ध्यान दें। क्योंकि कई बार खाने में की गयी लापरवाही आपके शरीर को खराब करने में सबसे बढ़ा योगदान देती है। बेहतर डाइट के लिए सब्जियां और फल खाना उचित होगा। उसके विपरीत बाहर की चीजें और तले भुने पदार्थ आपकी चर्बी बढ़ा सकते है। इसके अलावा खट्टे फल जिनमे विटामिन सी की अच्छी मात्रा हो उनका सेवन अधिक करें। और पॉलिशड अनाज की बजाय सादे अनाज का सेवन करें। खाने में प्रोटीन और फैट की सही मात्रा लें। ये शरीर को सुडौल बनाने में मदद करेगा।
2. पेय पदार्थ :
शरीर में होने वाले बहुत से रोग और परेशानियां कम पानी पीने की वजह से होती है। और चर्बी का बढ़ना उन्ही में से एक समस्या है। अगर आप पतली कमर पाना चाहती है तो उसके लिए आपको अपनी इस आदत को बदलना होगा। इसके लिए आप दिन में अधिक से अधिक पानी का सेवन करें। बाहर मिलने वाले पेय पदार्थों का सेवन करना छोड़ दें। साथ ही पीने वाले पदार्थों में शक्कर की मात्रा कम कर दें। कोको से भी मोटापा बढ़ता है तो कॉफ़ी आदि के अधिक सेवन से भी बचें।
3. रोजाना व्यायाम :
किसी भी समस्या से छुटकारा पाने के लिए और सुखी जीवन जीने के लिए रोजाना व्यायाम करना बेहद जरुरी है। तो अगर आप अपनी कमर को पतली बनाना चाहती है तो आपको रोजाना कुछ देर व्यायाम करना होगा। जिससे शरीर की मांसपेशियों पर दबाब पड़े और वे कार्य करें। लेकिन एक बात का ध्यान रखें एक दिन करने से बात नहीं बनेगी इसे कई महीनों तक लगातार करना होगा। कमर को सुडौल बनाने के लिए कंधे, कमर और जांघो की कसरत करनी होगी।
4. खानपान में बदलाव :
अगर आपको लगता है की आपके द्वारा खाया जाने वाला भोजन आपके लिए उचित परिणाम नहीं दे पा रहा है तो अपने खान पान में कुछ बदलाव करके देखें। अगर आपको समझ नहीं आ रहा है की किस प्रकार का भोजन करने की कमर पतली करने में आसनी हो तो आप किसी डायटीशियन या स्वास्थ्य निर्देशक की मदद ले सकती है। इसके लिए अच्छे और स्वस्थ भोजन का सेवन करें हैवी और पचने में मुश्किल खाद्य पदार्थों का सेवन कतई न करें।
5. कपड़ों का चुनाव :
बहुत बार आपके पहनावे से भी आपके शरीर के आकार पर फर्क पड़ता है। यदि आपकी कमर थोड़ी भारी है और आप उसे पतला दिखाना चाहती है तो उसके लिए बेल्ट का प्रयोग करें। ये मांस को संकुचित कर उसे पतला दिखाने में मदद करती है। शायद आप नहीं जानती, लेकिन आपके पहनावे की मदद से भी आप पतली और अच्छी दिख सकती है।
6. दिन की शुरुआत :
क्या वाकई आप अपनी कमर को पतला करना चाहती है? अगर हां, तो इसके लिए केवल कमर ही नहीं बल्कि शरीर के अन्य हिस्सों पर भी ध्यान देना होगा। बहुत से लोग अक्सर नाश्ता नहीं करते जो की स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत ही हानिकारक होता है। क्योंकि रात के खाने के 8 से 10 घंटे बाद आप नाश्ता करते है और जब आप उसे ही मना करते है तो ये आपके पाचन तंत्र के लिए अच्छा नहीं। उसके विपरीत यदि आप रोजाना सुबह समय से नाश्ता आदि करती है तो इससे आप पुरे दिन ऊर्जावान रहती है जिससे आपके शरीर में मेटाबोलिज्म संतुलित रहता है और आपकी कमर स्वतः ही पतली हो जाती है।
7. पतली कमर के लिए डाइट :-
अगर आप अपनी कमर को पतला और सुडौल बनाना चाहती है तो इसके लिए आपको कुछ चीजों का विशेष ख्याल रखना है होगा जैसे की आपका भोजन। पतली कमर पाने के लिए आपको हेल्थी और स्वच्छ भोजन करना होगा। इसके लिए –
अधिक कैलोरी वाले फ़ूड को न कहें। दिन भर में केवल उतनी कैलोरी का ही सेवन करें जितने की जरूरत है।
रोजाना सुबह हेल्थी ब्रेकफास्ट लें। उस समय तला-भुना खाने से बचें।
मसालेदार चीजें न खाएं। ये आपका फैट बढ़ाने का काम करती है।
चीनी का उपयोग काम कर दें क्योंकि चीनी में बहुत अधिक कैलोरी होती है।
फलों और सब्जियों का अधिक से अधिक सेवन करें।
8. व्यायाम :
पतली कमर पाने के लिए आपको कुछ व्यायाम करने होंगे जिनके बारे में नीचे दिया गया है। शुरू में आप इन्हे थोड़ी थोड़ी देर के लिए। हैबिट बन जाने पर इनका समय और गिनती दोनों ही बढ़ा लें।
तो ये है कुछ तरीके जिनकी मदद से आप भी घर बैठे पा सकती है पतली और सुडौल कमर। इसके लिए आपको पैसे खर्च करने की भी आवश्यकता नहीं है क्योंकि इन सभी तरीकों का इस्तेमाल घर पर बिना पैसे खर्च किये भी किया जा सकता है।
वैसे तो लड़के और लड़कियों के जीवन में बहुत से परिवर्तन आते हैं| चाहे वो शारीरिक रूप से हो या मानसिक रूप से| उसी तरह जीवन में सबसे बड़ा बदलाव तब आता हैं| जब शादी होती हैं| दोनों ही लड़के और लड़की के जीवन में ये बदलाव आता हैं| परंतु सभी के मन में ये सवाल आता हैं| की शादी के लिए क्या उम्र होनी चाहिए| क्योकि शादी एक ऐसा बदलाव हैं| जहाँ से जिंदगी में सबसे बड़ा परिवर्तन आता हैं| लड़के और लड़की की शादी की सही उम्र क्या होनी चाहिए| ये बात बहुत सी चीजो को देखकर सोची जाती हैं| शादी का कदम उठाने के लिए सबसे जरुरी हैं| कि दोनों शादी के बाद उनके जीवन में आने वाले बदलाव को समझ सके|
आज की इस भागदौड़ वाली जिंदगी में शादी का सवाल बहुत ही जरुरी हो गया हैं| पहले समय में लोग छोटी उम्र में ही शादी कर लेते हैं| उस समय पर उन्हें किसी तरह के शादी के बाद होने वाले बदलाव की समझ ही नहीं होती थी| आज के समय में हिंदुस्तान में 20 से 25 की उम्र को बिलकुल सही माना गया हैं| परंतुइ आज के समय में लोगो की सोच में काफी बदलाव आ गया हैं| उनके लिए अपने कैरियर को सैट करने की उम्र ही 20 से 30 हो गई हैं| वो लोग इस उम्र के बीच में शादी करना ही नहीं चाहते| कई लोग तो 30 के बाद ही शादी को सही मानते हैं| और इससे पहले तो वो बस अपने काम में मगन रहना चाहते हैं|
शादी का बदलाव जिंदगी में आना वाला सबसे बड़ा बदलाव हैं| भारत सरकार ने वैसे तो लड़के की 21 और लड़की की 18 वर्ष की आयु को शादी के लिए बिलकुल सही बताया हैं| परंतु आज के इस बदलते युग में इस उम्र में शादी करना बिलकुल भी संभव नहीं हैं| क्योंकि आज के समय में हर किसी का पहला काम अपने आप को जिंदगी में अच्छे ढंग से सैटल करना होता हैं| और इस सब से सबसे ज्यादा परेशानी माँ बाप को उठानी पड़ती हैं| क्योंकि यदि समय से शादी नहीं होगी तो लोग बाते बनाने लग जाते हैं| और इस बात का सबसे ज्यादा प्रभाव घरवालो पर पड़ता हैं| और घर वाले हर समय उसे परेशां करते हैं जिसकी शादी वो करवाना चाहते हैं|
लड़कियों के लिए करियर बनाना भी बहुत जरुरी होता हैं| और शादी का सवाल और भी अहम हो जाता है| शानदार करियर बनाने की आशा हर किसी की हो सकती है चाहे फिर वो लड़का को या फिर लड़की| लेकिन परिवार को भी एक महिला की ही जिम्मेदारी समझा जाता है| और फिर लड़कियों पर कई तरह के बबाव भी डालदिये जाते हैं| जबकि लड़को के साथ ऐसा कुछ नहीं होता| वैसे भी भारतीय समाज में कामकाजी महिला की जिम्मेवारियां भी ज्यादा हो जाती है| आज के समाज में भी कही न कही पुरुष प्रधान समाज की मानसिकता है| और महिलाओ को कई बार झुकना पड़ता हैं|
आज के समय में एक नया प्रचलन सामने आया हैं| जिसमे लोग “लिव इन रिलेशनशिप” में रहते हैं| इसका मतलब हैं की लड़का और लड़की शादी से पहले ही एक साथ रहते हैं| इस प्रचलन आज के मॉडर्न समाज में हुआ हैं| परंतु आज भी इसे भारत की मान्यता नहीं दी गयी हैं| कुछ लोग लिव इन रिलेशनशिप में रहते भी हैं| और लोग इससे इसलिए ज्यादा प्रभावित होते हैं क्योंकि इसमें शादी जैसी कोई जिम्मेवारियां नहीं हैं| शहरों में ऐसे युवाओं की संख्या बढ़ रही है| जिन्हें लिव इन रिलेशनशिप का ये रिश्ता पसंद आ रहा है| क्योंकिं आज के समय में लोग ज्यादा रोक टोक पसंद नहीं करते|
शादी की सही उम्र तब होती हैं| जब व्यक्ति मानसिक रूप से तैयार हो| इसके साथ शादी ज्यादा उम्र होने पर करने से आपको कई बार वो खुशिया नहीं मिल पति| जो आपने सोची होती हैं| क्योंकि ज्यादा उम्र होने पर तो बच्चा पैदा करना भी किसी समस्या से काम नहीं होता| इसलिए शादी की एक सही उम्र होनी चाहिए| तो आइये जानते हैं कुछ ऐसी ही बातो के बारे में जो कई बार हमारी शादी की सही उम्र बताने में आपकी मदद कर सकती है| और जीवन में आने वाले इस बदलाव के लिए आपको तैयार कर सकती हैं| तो वो सब इस प्रकार हैं|
शादी की सही उम्र क्या होणी चाहिए इसके लिए कुछ टिप्स:-
मानसिक रूप से तैयार होना चाहिए:-
जब भी किसी लड़के या लड़की की शादी होती हैं| तो जरुरी हैं की वो मानसिक रूप से तैयार हो| शादी के बाद जीवन में आने वाले बहुत से बदलाव होते हैं| जिन्हें पूरा करने के लिए व्यक्ति को मानसिक रूप से तैयार होना बहुत जरुरी हैं| चाहे वो लड़का हो या फिर लड़की ये दोनों के लिए बहुत जरुरी हैं| यदि आप मानसिक रूप से किसी रिश्ते को बनाने में सक्षम नहीं हैं तो आपको बहुत सी कठिनाईओ का सामना करना पड़ सकता हैं| इसीलिए शादी करने के लिए सही उम्र तब हैं जब आप मानसिक रूप से किसी रिस्ते को अपनाने के लिए तैयार हैं|
करियर और शादी में संतुलन:-
भारत सरकार ने वैसे तो लड़के की 21 और लड़की की 18 वर्ष की आयु को शादी के लिए बिलकुल सही बताया हैं| परंतु आज के इस बदलते युग में इस उम्र में शादी करना बिलकुल भी संभव नहीं हैं| और इसके साथ ये भी हैं की इस उम्र में कोई सैटल भी नहीं हो पाता| और आज के समय में हर किसी का पहला काम अपने आप को जिंदगी में अच्छे ढंग से सैटल करना होता हैं| क्योंकि शादी के बाद बहुत सी जिम्मेवारियो का भी सामना करना पड़ता हैं| जिसके लिए अपने आप की सैटल करना बहुत जरुरी हैं| इसलिए किसी भी रिस्ते को बनाने के लिए कैरियर और शादी में संतुलन होना बहुत जरुरी हैं|
नई सोच में परिवर्तन:-
आज की नई पीढ़ी कुछ भी सोचे, लेकिन भारत शादी के मामले में थोड़ा अलग है| यदि वक्त से शादी न हो तो लोग बातें बनाने लग जाते हैं| अब ऐसे में माँ-बाप भी चाहे कितने भी नई सोच के हो| उन्हें आखिर रहना तो समाज में ही पड़ता है| कई बार तो जब भी आप ऑफिस से घर जाते हैं| तो आपको लगता है कि कहीं आज फिर शादी को लेकर नई टेंशन न खड़ी हो| और इससे सबसे ज्यादा प्रभवित माँ बाप होते हैं| क्योंकि वो सोचते हैं| यदि हमारे बच्चे की शादी सही उम्र में नहीं हुई तो कही लोग बाते न बनाये| इसलिए वो भी एक सही उम्र में अपने बच्चो की शादी कर देना चाहते हैं|
लड़कियों के लिए अहम:-
चाहे आज समय कितनी ही तेजी से बढ़ रहा हो| परंतु आज के समय में भी महिलाओ के लिए शादी को लेकर कुछ ऐसी सोच हैं| के जितनी जल्दी हो सके उतनी जल्दी लड़की की शादी हो जानी चाहिए| लड़कियों के लिए करियर और शादी का सवाल और भी अहम हो जाता है| जहाँ लडकिया भी अपना कैरियर बनाना चाहती हैं| कई बार उन्हें लोगो की बाते सुनकर शादी के फैसले को प्राथमिकता देनी पड़ती हैं| पर ऐसे में भी जरुरी हैं| की लड़की मानसिक रूप से शादी के लिए तैयार हो|
तो ये कुछ बाते हैं जिनके आधार पर आप कह सकते हैं की शादी की उम्र जब सही होती हैं| जब लोग मानसिक रूप से तैयार हो, उनकी निजी जिंदगी और कैरियर के बीच संतुलन हो, वो हर रिश्ते को निभाने के लिए तैयार हो, जिम्मेवारियां उठाने में सक्षम हो, आदि| ऐसा दोनों तरफ से होना जरुरी हैं| क्योंकि शादी की गाड़ी एक पहिये पर नहीं चलती| उसके लिए भी दो पहिये की जरुरत होती हैं| यानि जब लड़का और लड़की दोनों ही इस रिस्ते में आने वाली जिम्मेवारियां उठाने के लिए तैयार हो तभी उन्हें शादी जैसा बड़ा फैसला लेना चाहिए| नहीं तो उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता हैं|
वैसे शादी के लिए 23 से 25 की उम्र को बिलकुल सही बताया गया हैं| क्योंकि इस उम्र में व्यक्ति जीवन में आने वाले बहुत से अनुभवो से परिचित हो जाता हैं| और ज्यादा उम्र पर शादी होने के बाद कई बार आपकी इच्छाये पूरी नहीं हो पाती| आप केवल परिवार को पूरा करने के चक्कर में रह जाते हैं| और सबसे अहम बात ज्यादा उम्र होने पर कई बार गर्भ आने में भी परेशानियों का सामना करना पड़ता हैं| और आज के समय में लड़के और लड़की दोनों को ही बराबर हक़ हैं| की वो अपने लिए फैसला ले सके| इसीलिए शादी जैसा अहम फैसला लेने के लिए आपको पूर्ण रूप से अपने आप को तैयार करना चाहिए|
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प्रेगनेंसी किसी भी महिला के लिए खास लम्हा होता है और उससे भी अहम होता है उसका डिलीवरी का समय, क्योंकि उस समय वो नन्हा मेहमान महिला के हाथों में आता है। लेकिन यह बहुत अहम होता है की महिला की डिलीवरी नार्मल तरीके से होती है या सिजेरियन तरीके से। वैसे देखा जाए तो नार्मल डिलीवरी की बेहतर होती है क्योंकि उसमे आपको थोड़ी देर बहुत दर्द सहन करना पड़ता है। लेकिन बाद में आपको बहुत जल्दी फिट होने में भी मदद मिलती है। लेकिन आज कल बदलता लाइफस्टाइल और दर्द से बचने के लिए महिलाएं सिजेरियन डिलीवरी करवा लेती है,और नार्मल डिलीवरी का चांस भी नहीं लेती है।
जबकि आपको यह जानकर हैरानी होगी की उस समय तो आप दर्द से बच जाती है लेकिन उसके बाद आपको पूरी तरह से फिर होने में लगभग छह महीने का समय लग जाता है। लेकिन देखा जाए तो आज भी ज्यादातर महिलाएं नार्मल डिलीवरी को ही बेहतर समझती हैं, लेकिन समस्या के कारण यदि उनका पहला बच्चा सिजेरियन डिलीवरी से होता है। तो दूसरे बच्चे को जन्म देने से पहले वो यह भी सोचती है की क्या उनका दूसरा बच्चा नार्मल डिलीवरी से हो सकता है। तो इसका जवाब हाँ होता है, ऐसा हम नहीं कह रहे हैं बल्कि डॉक्टर भी यह बात कहते है, और ऐसे बहुत से केस होते भी हैं।
की ऐसा बिल्कुल भी जरुरी नहीं होता है की यदि आपका पहला बच्चे सिजेरियन डिलीवरी से हुआ है तो दूसरा बच्चा भी सिजेरियन डिलीवरी से ही होगा। बल्कि यदि आप दूसरी बार प्रेग्नेंट होते है तो बहुत चांस होते है की आपका बच्चा नार्मल तरीके से हो। तो आइये अब जानते है की पहली सिजेरियन डिलीवरी के बाद दूसरे बच्चे के नार्मल होने के लिए किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। साथ ही आपको यदि दूसरी बार नार्मल डिलीवरी करनी होती है तो ऐसे में महिला का अपनी फिटनेस का दुगुना ध्यान रखना पड़ता है।
क्या सिजेरियन के बाद भी हो सकती है नार्मल डिलीवरी:-
जी हाँ यह बिल्कुल सच है की यदि आपका पहला शिशु सिजेरियन डिलीवरी से हुआ है तो आपका दूसरा बच्चा नार्मल डिलीवरी से हो सकता है। बस इसके लिए यह सबसे जरुरी होता है की महिला शारीरिक रूप से फिट होने के साथ मानसिक रूप से भी नार्मल डिलीवरी के लिए तैयार होनी चाहिए। साथ ही समय समय पर गर्भ में पल रहे शिशु की स्थिति भी सही होनी चाहिए। और यदि पूरी प्रेगनेंसी के दौरान आपकी स्थिति सही रहती है तो ऐसे में आपके पहली सिजेरियन डिलीवरी के बाद भी दूसरी बार नार्मल डिलीवरी होने के चांस बढ़ जाते है। और इसके लिए आप चाहे तो एक बार अपने डॉक्टर से भी विचार विमर्श कर सकते है।
सिजेरियन के बाद कब हो सकती है नार्मल डिलीवरी:-
महिला के स्वास्थ्य पर करता है निर्भर:-
यदि किसी महिला का पहले बच्चा सिजेरियन हुआ है और दूसरा बच्चा वह नार्मल तरीके से करना चाहती है। तो ऐसा संभव हो सकता है लेकिन ऐसा तभी होता है जब महिला शारीरिक रूप से बिल्कुल फिट होती है और मजबूत होती है। यदि महिला फिट होती है तो ऐसा हो सकता है की उसका दूसरा बच्चा नार्मल डिलीवरी से हो।
बच्चे का वजन होना चाहिए सही:-
शिशु का विकास गर्भ में होता रहता है, ऐसे में यदि आपके बच्चे का वजन सामान्य से अधिक होता है तो बहुत कम चांस होते है की आपकी डिलीवरी नार्मल हो। लेकिन यदि आपके बच्चे का वजन गर्भ में सामान्य होता है तो बहुत चांस होते है की पहली सिजेरियन डिलीवरी के बाद आपका दूसरा बच्चा नार्मल हो सकता है।
महिला को न हो इन्फेक्शन:-
सिजेरियन डिलीवरी के समय पेट में इन्फेक्शन होने के चांस बहुत ज्यादा होते है, ऐसे में यदि महिला को पेट में किसी तरह का इन्फेक्शन होता है तो नार्मल डिलीवरी के चांस कम होते है। लेकिन यदि महिला को किसी भी तरह का इन्फेक्शन नहीं होता है तो महिला के नार्मल डिलीवरी के चांस भी बढ़ जाते है।
बच्चे की गर्भ में पोजीशन भी रखती है मायने:-
जब भी आप अल्ट्रासाउंड करवाते है तो आपको बच्चे की गर्भ में क्या स्थिति है इसके बारे में पता चलता रहता है। ऐसे में बच्चे की पोजीशन यदि प्रेगनेंसी के समय सही रहती है और डिलीवरी के समय शिशु बिल्कुल सही पोजीशन में होता है तो उसके नार्मल डिलीवरी के चांस बढ़ जाते है।
प्रेगनेंसी में न हो कोई परेशानी:-
जिन महिलाओं की उम्र ज्यादा होती है, या उन्हें गर्भधारण करने में परेशानी का सामना करना पड़ा है। तो ऐसे में भी कहीं न कहीं महिला के नार्मल डिलीवरी होने के चांस कम हो जाते है। और साथ ही ऐसे में महिला को नार्मल डिलीवरी के लिए ज्यादा रिस्क उठाना भी नहीं चाहिए, बल्कि इसके लिए अपने डॉक्टर से राय लेनी चाहिए। और यदि महिला को प्रेगनेंसी के दौरान ऐसी कोई भी परेशानी नहीं होती है तो ऐसे में महिला के नार्मल डिलीवरी होने के चांस भी बढ़ जाते है।
तो यह है कुछ बातें जिन्हे ध्यान में रखकर आप भी पहली सिजेरियन डिलीवरी के बाद नार्मल डिलीवरी करवा सकती है। और डॉक्टर्स यह भी कहते है उसके बाद यदि आप दुबारा गर्भधारण करना चाहे तो वो भी कर सकती है, और आपको किसी तरह की कोई परेशानी भी नहीं होती है। लेकिन इसके लिए सबसे जरुरी महिला की फिटनेस के साथ गर्भ में पल रहे शिशु की स्थिति होती है। और आपको दूसरी बार प्रेगनेंसी होने पर डॉक्टर की राय भी जरूर लेनी चाहिए ताकि आपको अपनी शारीरिक स्थिति का अच्छे से पता चल सके।
बालों की ख़ूबसूरती आपकी पर्सनैलिटी को और भी निखार देती है, और ज्यादातर महिलाओ को लम्बे बाल पसंद होते है, इसके अलावा हर महिला चाहती है की उसके बाल घने, चमकदार, डैंड्रफ रहित, मजबूत हो, और इसके लिए जरुरी होता है की जिस तरह आप अपने चेहरे की ख़ूबसूरती को बढ़ाने के लिए उस पर एक्स्ट्रा ध्यान देती है, उसी तरह बालों की चमक को बरकरार रखने के लिए आप बालों की भी एक्स्ट्रा केयर करें, ऐसा करने से आपके बालों को भी आकर्षित लगने में मदद मिलती है।
प्रदूषण, गलत खान पान के कारण, बालों को अच्छे से पोषण न मिलने के कारण आज कल बालों से जुडी कोई न कोई समस्या लगी ही रहती है, जिसके कारण आपके बाल कमजोर होने लगते है, लेकिन आज हम आपको ऐसे एक उपाय के बारे में बताने जा रहे है जो की आपके बालों से जुडी हर एक समस्या जैसे की बालों का पतला होना, अतिरिक्त फ्रिज़, रूखापन, तैलीयपन आदि होना, इन सब परेशानियों से राहत के लिए आप एलोवेरा जैल का इस्तेमाल कर सकते है, एलोवेरा जैल का इस्तेमाल करने से आपको बालों से जुडी हर समस्या का समाधान होता है, इसके लिए आप बालों के और अपने स्कैल्प पर ताजे एलोवेरा के पत्ते को तोड़ कर उसका जैल निकाल लें, और अपने सर में अच्छे से लगाएं, आपको इससे बहुत फायदा मिलता है, तो आइये विस्तार से आपको बताते है की एलोवेरा का इस्तेमाल करने से आपको कौन कौन से फायदे होते है।
बालों की लम्बाई बढ़ाने में मदद करता है:-
बालों को लम्बा करने के लिए एलोवेरा जैल का प्रयोग करने से आपको बहुत फायदा होता है, इसके इस्तेमाल के लिए आप एक बाउल लें, उसके बाद उसमें आधा कप एलोवेरा जैल का ड़ालें, दो चम्मच मेथी के बीज को पीस कर पाउडर मिला लें, एक चम्मच तुलसी का पाउडर, और दो चम्मच कैस्टर ऑयल डाल कर अच्छे से मिक्स करें, अब इस पास्ट को रात को सोने से पहले अच्छे से अपने स्कैल्प पर और अपने बालों में लगाएं, उसके बाद अपने सिर को शॉवर कैप से ढक लें, और सुबह उठ कर शैम्पू की मदद से इसे धो दें, हफ्ते में एक बार इस प्रयोग का इस्तेमाल करने से अप्पके बालों को लम्बा होने मे मदद मिलती है।
डैंड्रफ की समस्या से राहत मिलती है:-
डैंड्रफ के कारण भी बालों के झड़ने की समस्या शुरू हो जाती है, और बाल कमजोर भी हो जाते है, इसके इस्तेमाल के लिए आप एलोवेरा जैल से हफ्ते में दो से तीन बार अच्छे से अपने स्कैल्प पर मसाज करें, ये बालों के लिए शैम्पू की तरह काम करता है, ऐसा करने से आपके बालों से डैंड्रफ की समस्या से भी राहत दिलाने में मदद करता है।
खुजली से राहत के लिए:-
कई बार सिर में गर्मियों में पसीने के कारण या दाने होने के कारण खुजली होने लगती है, इससे राहत के लिए भी आप एलोवेरा का इस्तेमाल कर सकते है, क्योंकि एलोवेरा में एंटी बैक्टेरियल, एंटीसेप्टिक और एंटीफंगल गुण भरपूर मात्रा में पाएं जाते है, इसके इस्तेमाल के लिए एलोवेरा की पत्तियों से जैल को सीधा निकाल कर अपने सिर में लगाएं, और थोड़ी देर के लिए छोड़ दें, उसके बाद पानी से सिर को धो लें, ऐसा करने से आपको सिर में होने वाली खुजली को दूर करने में मदद मिलती है।
कई लोग ऐसे होते है जिनके बालों में ऑयल होता है, जैसे की आपने सिर धोया और एक दिन बाद ही ऐसा लगने लगता है की आपके बालों में तेल है, इससे राहत के लिए भी आप एलोवेरा का इस्तेमाल कर सकते है, यदि आप हफ्ते में दो बाद भी एलोवेरा के जैल से अपने सिर की मसाज करते है, तो इसके कारण आपके बालों में एक्स्ट्रा ऑयल को खत्म होने में मदद मिलती है।
बालों के लिए कंडीशनर का काम करता है:-
बालों में कंडीशनर का इस्तेमाल करने से बालों को मुलायम और चमकदार हो जाते है, एलोवेरा का इस्तेमाल भी आप बालों के लिए कंडीशनर के रूप में कर सकते है, इसके इस्तेमाल के लिए आप एलोवेरा की पत्तियों को तोड़ कर उनका जैल निकाल लें, और उसके बाद तोलिये को गरम करके अच्छे से अपने बालों को दस से पंद्रह मिनट के लिए ढक दें, और उसके बाद अपने बालों को धो दें, इससे आपके बालों को पोषण मिलता है, और आपके बालों पर इसका असर भी साफ़ दिखाई देता है।
बालों को घना बनाने के लिए करें एलोवेरा का इस्तेमाल:-
बालों को चमकदार, घना और लम्बा बनाने के लिए भी आप एलोवेरा का इस्तेमाल कर सकते है, इसके लिए आपको घर पर ही एलोवेरा शैम्पू बनाना पड़ेगा, इसके लिए आप एलोवेरा के जूस में नारियल को पीस कर थोड़ा सा दूध, गेहूँ, और थोड़ा सा तेल मिलाकर आप अच्छे से शैंपू की तरह इससे भी सिर को धोएं, कुछ ही दिनों में प्रयोग के बाद आपको इसका असर दिखने लगेगा, और आपके बालों को लम्बा और घना बनने में भी मदद मिलेगी।
गंजेपन की समस्या दूर करता है:-
कई लोग ऐसे होते है जिनके बाल उम्र से पहले ही झड़ जाते है, और कई बार तो नौबत ऐसी आ जाती है, की वो गंजेपन का शिकार हो जाते है, यदि आप भी इस समस्या से परेशान है तो इससे राहत के लिए आप एलोवेरा जैल से नियमित सिर पर उस जगह की मसाज करें, जहां से आपको बाल उड़ने की समस्या है, ऐसा करने से आपको गंजेपन की समस्या से राहत दिलाने में मदद मिलती है।
बालों में एलोवेरा ऐसे लगाएं:-
सबसे पहले आप एलोवेरा के ताजे पत्ते तोड़े, और उसका जैल निकाल लें।
और अच्छे से अपने बालों के स्कैल्प से लेकर बालों तक अच्छे से मसाज करें।
थोड़ी देर के लिए इसे अपने बालों में छोड़ दें, या रात भर के लिए इसे अपने बालों में लगा कर रखें।
उसके बाद शैम्पू की मदद से अपने बालों को धो लें, ऐसा करने से आपके बालों से जुडी बहुत सी परेशानियों का हल करने में मदद मिलती है।
तो ये कुछ फायदे जिनका इस्तेमाल आप करके आप एलोवेरा की मदद से अपने बालों को घना, रेशमी, चमकदार, मुलायम और लम्बा बना सकते है, ऐसा करने से आपके बालों को कोई नुकसान भी नहीं होता है, क्योंकि यह भी एक प्राकृतिक औषधी की तरह है जो आपके बालों को फायदा करने में आपकी मदद करता है, तो यदि आप भी बालों से जुडी किसी भी समस्या से परेशान है तो आप भी इसके लिए अपने एलोवेरा का इस्तेमाल कर सकते है।
मूँछ दाढ़ी झड़ने के क्या कारण होते हैं, मूँछ दाढ़ी को मर्दों की शान माना जाता है। और आज कल तो मूँछ दाढ़ी रखने का बहुत ज्यादा ट्रेंड भी चल रहा है। कुछ पुरुष तो ऐसे होते हैं जो अपने सिर के बालों से ज्यादा अपनी मूँछ दाढ़ी की केयर करते हैं। जिस तरह सिर के बालों के लिए आयल, जैल आदि का इस्तेमाल किया जाता है। वैसे ही मूँछ दाढ़ी की लुक को बेहतर बनाने के लिए भी आयल का इस्तेमाल करना, कंघी करना, जैल आदि का प्रयोग करना, मूँछ दाढ़ी को सेट आदि किया जाता है।
लेकिन ऐसा नहीं है की हर पुरुष की दाढ़ी मूँछ घनी व् बेहतरीन होती है। बल्कि कुछ पुरुषों की दाढ़ी मूँछ के बाल भी झड़ जाते हैं। जिसकी वजह से दाढ़ी मूँछ बहुत हल्की लगने लगती है। जिसके कारण यदि पुरुष दाढ़ी मूँछ रखना भी चाहते हैं तो दाढ़ी मूँछ के बाल झड़ने के कारण दाढ़ी मूँछ नहीं रख पाते हैं। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको पुरुषों की दाढ़ी मूँछ के झड़ने के क्या कारण होते हैं और आप इस समस्या से बचने के लिए क्या कर सकते हैं इस बारे में बताने जा रहे हैं।
दाढ़ी मूँछ झड़ने के क्या कारण होते हैं
बॉडी में हार्मोनल अंसतुलन होने के कारण दाढ़ी मूँछ के बाल झड़ सकते हैं।
तनाव लेने के कारण।
इम्युनिटी कमजोर होने के कारण।
अनुवांशिक कारण, यानी यदि आपके घर में यदि किसी की दाढ़ी मूँछ ऐसी है तो हो सकता है की यह परेशानी आपको भी हो।
किसी बिमारी से जुडी दवाइयों का सेवन करने के कारण।
जो पुरुष कैंसर का ट्रीटमेंट करवा रहे होते हैं उन्हें भी यह समस्या हो सकती है।
दाढ़ी मूँछ के बालों को बढ़ाने के उपाय
यदि आप दाढ़ी मूँछ के बालों के झड़ने से परेशान हैं। तो लीजिये अब हम आपको कुछ ऐसे उपचार बताने जा रहे हैं जिनका इस्तेमाल करने से आपको इस परेशानी से निजात मिल सकता है।
आंवले का तेल
नियमित सुबह नहाने से पहले या रात को सोने से पहले अपने दाढ़ी मूँछ के बालों के आंवले का तेल लेकर मसाज करें।
मसाज ज्यादा तेजी से न करें, लेकिन मसाज ऐसे करें की दाढ़ी मूँछ की जड़ तक आंवले का तेल पहुँच जाए।
उसके बाद इसे पंद्रह से बीस मिनट के लिए छोड़ दें और उसके बाद साफ़ पानी से चेहरे को धो लें।
जल्दी फायदे के लिए ऐसा नियमित करें आपको जरूर फायदा मिलेगा।
सरसों की पत्तियां
सरसों की आठ दस पत्तियों को अच्छे से पीसकर इसमें थोड़ा सा निम्बू का रस मिलाएं।
अब इस मिश्रण को अच्छे से मिक्स करें और अपनी दाढ़ी मूँछ के बालों के लगाएं।
और आधे घंटे के लिए छोड़ दें।
उसके बाद साफ पानी से चेहरे को धो लें।
ऐसा नियमित करें आपको जरूर फायदा मिलेगा।
दाढ़ी मूँछ सेट करवाते रहें
यदि आपकी दाढ़ी मूँछ के बाल झड़ रहे हैं तो पूरी तरह से दाढ़ी मूँछ न कटवाएं।
लेकिन आप उनकी अच्छे से केयर करें, आयल लगाएं, सेट करवाते रहें।
ऐसा करने से भी दाढ़ी मूँछ के बालों की ग्रोथ को बढ़ाने में मदद मिलती है।
इसके अलावा ऐसा भी माना जाता है की दाढ़ी मूँछ को उल्टी दिशा में करवाने से बालों को ग्रोथ को बढ़ाने में मदद मिलती है।
अपनी आदतें सुधारें
अपने खान पान को सही रखें और अपने आहार में जिंक, विटामिन, आयरन से भरपूर पोषक तत्वों को शामिल करें।
तनाव नहीं लें।
पानी का भरपूर सेवन करें।
नींद भरपूर लें।
तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से पुरुषों को दाढ़ी मूँछ के बाद झड़ने की समस्या हो सकती है। व् कुछ उपाय भी है जिनका इस्तेमाल करने से पुरुष इन परेशानियों से निजात पा सकते है। तो यदि आपको भी यह परेशानी हैं तो आप भी इन आसान टिप्स का इस्तेमाल करके आसानी से इस परेशानी से निजात पा सकते हैं।
फलों का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान बहुत फायदेमंद माना जाता है। क्योंकि फलों में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। जो प्रेग्नेंट महिला व् होने वाले शिशु को स्वस्थ रहने में मदद करते हैं। लेकिन फलों का असली फायदा तभी मिलता है जब आप फलों का सेवन सही समय पर करते हैं।
अब आप सोच रहे होंगे की फलों का सेवन करने का भी कोई समय होता है। तो इसका जवाब है हाँ, फलों का सेवन करने का फायदा तब तक नहीं मिलता है जब तक सही तरीके और सही समय पर फलों का सेवन न किया जाएँ। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम फलों से जुड़े कुछ टिप्स बताने जा रहे हैं।
किस समय फल खाना है सबसे ज्यादा फायदेमंद?
फलों को खाने का सबसे सही समय होता है सुबह का समय। और खाली पेट फलों का सेवन बहुत फायदेमंद होता है बस ध्यान रखें की खट्टे फलों का सेवन खाली पेट नहीं करें। फलों में कैलोरी उच्च मात्रा में मौजूद होती है ऐसे में फलों का सेवन सुबह के समय करने से महिला को पूरा दिन ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है। साथ ही फलों को पचाने में भी कोई दिक्कत नहीं होती है। ऐसे में यदि आप प्रेग्नेंट हैं तो दोपहर बारह बजे से पहले जितना आपकी इच्छा हो उतना फल खाएं लेकिन ध्यान रखें की जितनी भूख और जितना खाया जाये उतना ही फल खाएं।
फलों का सेवन किस समय करने से होता है नुकसान
प्रेग्नेंट महिला फलों का सेवन तो भरपूर करती है लेकिन गलत चीज के साथ और गलत समय पर यदि फलों का सेवन करती है तो इसके कारण महिला को दिक्कत हो सकती है। जैसे की:
खाने के बाद या पहले
जब आप अपना आहार लेती है और उसके तुरंत पहले या बाद में फलों का सेवन करती है तो इसके कारण आपको पाचन तंत्र से जुडी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। क्योंकि आप जो डाइट ले रही है उसमे कैलोरी की मात्रा मौजूद होती है साथ ही फलों में भी कैलोरी उच्च मात्रा में मौजूद होती है। ऐसे में बॉडी में कैलोरी की मात्रा ज्यादा बढ़ने के कारण भोजन और फलों को पचाने में दिक्कत होती है जिसकी वजह से पाचन क्रिया से जुडी परेशानियों जैसे की कब्ज़, गैस, सीने में जलन आदि का सामना करना पड़ता है।
दूध दही के साथ
फलों के साथ दूध दही का सेवन करने से भी पेट में गैस, उल्टी, दस्त जैसी परेशानी होती है। क्योंकि फल और दूध एक साथ लेने से इन्हे हज़म करने में दिक्कत होती है।
खाली पेट खट्टे फल
खाली पेट फलों का सेवन करना बहुत फायदेमंद होता है लेकिन खट्टे फलों जैसे की संतरा, निम्बू, आंवला, मौसम्बी, आदि का सेवन खाली पेट करने से बचना चाहिए। क्योंकि इनके सेवन से पेट में गैस, खट्टे डकार, पेट फूलना, जैसी परेशानियां हो जाती है।
बिना मौसम के फल
गर्भवती महिला को बिना मौसम के फलों का सेवन भी नहीं करना चाहिए क्योंकि ज्यादातर ऐसे फलों को बेमौसम पकाने के लिए केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है। जो गर्भवती महिला को बच्चे के लिए नुकसानदायक होते हैं।
गले सड़े फल
कई बार घर में रखे हुए फल थोड़े थोड़े खराब हो जाते हैं और आप सोचते हैं की साइड में से काटकर उनका सेवन कर लेते हैं। लेकिन प्रेग्नेंट महिला को उन फलों का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि ऐसे में फलों में बिल्कुल भी पौष्टिकता नहीं होती है साथ ही सेहत सम्बन्धी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
कटे पड़े फल
यदि ऐसे फल रखें हैं जो की आपने बहुत देर से काट रखें हैं और उन्हें ढककर भी नहीं रखा है तो ऐसे फलों का सेवन भी गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए। क्योंकि ऐसे फलों पर बैक्टेरिया मौजूद होते हैं जो संक्रमण के खतरे को बढ़ा देते हैं।
रात के समय फल
फलों में फ्रुक्टोज़ भरपूर होता है ऐसे में रात में फलों का सेवन करने से इन्हे पचाने में दिक्कत होती है। इसीलिए गर्भवती महिला को रात के समय भी फलों का सेवन नहीं करना चाहिए।
प्रेगनेंसी में फलों का सेवन करते समय किन बातों का ध्यान रखें
फलों को अच्छे से धोने के बाद ही खाने के लिए प्रयोग में लाएं।
बिना मौसम के फलों का सेवन करने से बचें।
जिन फलों को खाने से आपको एलर्जी है उन फलों का सेवन न करें।
तरबूज, खरबूजे जैसे फलों में पानी की अधिकता होती है ऐसे में इन फलों का सेवन करने के बाद पानी का सेवन नहीं करें।
दूध दही या खाने के बाद या पहले फलों का सेवन करने से कम बचे यदि खाने का मन हो तो आधे से एक घंटे पहले या बाद में फलों का सेवन करें।
तो यह हैं वो जरुरी टिप्स जिनका ध्यान गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी में फलों का सेवन करने से पहले रखना चाहिए। ताकि महिला को फलों का सेवन करने के केवल बेहतरीन फायदे मिलें। और किसी भी तरह का नुकसान न हो।