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प्रेगनेंसी में पहले तीन महीने तक ये सावधानी बरतें

प्रेगनेंसी हर महिला को दुबारा जन्म लेने के लिए एक नया अवसर होता है, और साथ ही ये भी सच है की कोई भी औरत पूरी तभी होती है जब वो माँ बनती है, जब भी शादी के बाद घर में पता चलता है की उनके घर में नया मेहमान आने वाला है, तो पूरे घर में ख़ुशी की लहर दौड़ जाती है, और साथ ही हर कोई आने वाले नए मेहमान के लिए सपने संजोने लगता है, ऐसे में महिला जब पहली बार माँ बनती है, तो वो बहुत से ऐसे अनुभवों से गुजरती है, जो उसके लिए बिलकुल नए और अनोखे होते है।

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महिला को गर्भावस्था के समय बहुत ज्यादा केयर की जरुरत होती है, ऐसे में खास कर शुरूआती तीन महीने महिला को बहुत ज्यादा सावधानी बरतनी पड़ती है, क्योंकि इस समय में महिला के गर्भपात का खतरा सबसे ज्यादा होता है, जैसे की महिला को ऐसा कोई भी काम नहीं करना चाहिए जिसके कारण उसके पेट पर दबाव पडे, महिला को अपने खान पान के प्रति लापवाही नहीं बरतनी चाहिए, क्योंकि इसके कारण गर्भ में पल रहे शिशु के साथ महिला के स्वास्थ्य पर भी बहुत बुरा असर पड़ता है, इसके अलावा और भी बहुत सी ऐसी चीजे है जिसका ध्यान महिला को प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने में रखना चाहिए, ताकि उसे किसी भी तरह की कोई परेशानी न हो, तो आइये हम आपको बताते है जिसके कारण आपको प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने सेफ रहने में मदद मिलेगी, और आपको पूरे नौ महीने इसी तरह अपनी केयर करनी चाहिए, ताकि उसके बाद एक स्वस्थ शिशु आपकी गोद में हो, और महिला स्वास्थ्य को भी किसी तरह का कोई नुकसान न हो।

ज्यादा भागादौड़ी नहीं करनी चाहिए:-

प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने महिलाओ को ज्यादा भागा दौड़ी नहीं करनी चाहिए, इसके कारण महिला को थकान की समस्या हो सकती है, साथ ही इसके असर महिला के पेट पर भी पड़ता है, और साथ ही महिलाओ को सीढ़िया भी ध्यान से चढ़नी चाहिए, ऐसा करने से भी कई बार स्पॉटिंग होने का डर रहता है, जिसके कारण गर्भपात का खतरा भी बढ़ जाता है।

दवाइयों का सेवन न करें:-

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प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने महिला के शरीर में होने वाले बदलाव को कई बार महिला नहीं समझ पाती है, कमजोरी का अहसास, उलटी, सर दर्द, चक्कर आदि की परेशानी हो जाती है, और इस समस्या से बचने के लिए कई महिलाये गोलियों का सेवन करने लगती है, जो की उनके लिए हानिकारक हो सकता है, और इसके कारण गर्भ में पल रहे शिशु पर भी बुरा असर पड़ता है, इसीलिए महिलाओ को बिना डॉक्टर के परामर्श के दवाइयों का सेवन नहीं करना चाहिए।

तनाव नहीं लेना चाहिए:-

प्रेगनेंसी का समय किसी भी महिला के लिए बहुत ख़ास होता है, ऐसे में जितना हो सकें खुश रहने की कोशिश करनी चाहिए, किसी भी तरह का स्ट्रेस नहीं लेना चाहिए, इसका बुरा असर महिला पर पड़ता है, साथ ही गर्भ में पल रहा शिशु भी इसके कारण प्रभावित होता है, या तो उसके विकास पर असर पड़ जाता है, और यदि महिला बहुत ज्यादा तनाव में रहती है, तो इसके कारण भी गर्भपात हो सकता है।

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ज्यादा व्यायाम न करें:-

गर्भावस्था के पहले तीन महीने महिला के लिए बहुत की अहम होते है, क्योंकि इस समय की गई थोड़ी सी लापवाही कई बार गर्भपात का कारण बन सकती है, इसीलिए महिला को जितना हो सकें ध्यान रखना चाहिए की वो ज्यादा कड़ा व्यायाम न करें, क्योंकि इसके कारण महिला को थकावट हो सकती है, कमजोरी महसूस हो सकती है, और कई बार ऐसा करने से महिलाओ को खून का थक्का भी लग सकता है।

विटामिन सी युक्त आहार का सेवन नहीं करना चाहिए:-

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महिलाओ के लिए प्रेगनेंसी के तीन महीने सबसे ज्यादा अहम होती है, ऐसे में आपको बहुत ज्यादा सावधानी बरतने की जरुरत होती है, यदि आप शुरूआती दिनों में खासकर विटामिन सी युक्त आहार जैसे पपीता, अनानास, कटहल, आदि का सेवन करते है, तो इसके कारण गर्भपात की संभावना बढ़ जाती है, इसीलिए महिलाओ को जितना हो सकें प्रेगनेंसी में इस आहार को नहीं लेना चाहिए।

पेट के बल कोई काम या भारी सामान आदि नहीं उठाना चाहिए:-

प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने खास कर महिला को जितना हो सकें न तो पैरों के भार बैठना चाहिए, न ही पेट के बल कोई काम करना चाहिए, न ही भारी सामान उठाना चाहिए, क्योंकि इसका सीधा असर महिला के पेट पर पड़ता है, जिसके कारण कई बार खिचाव या दर्द जैसी समस्या शुरू हो जाती है, और गर्भपात का खतरा भी बना रहना है, इसीलिए महिलाओ को जितना हो सकें प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने ऐसा कोई भी काम नहीं करना चाहिए।

सम्बन्ध बनाते समय रखे ध्यान:-

प्रेगनेंसी के समय खास कर पहले तीन महीने आपको जितना हो सकें सम्बन्ध बनाने से परहेज रखना चाहिए, और यदि आप ऐसा कुछ करना भी चाहते है, तो आपको इस बारे में डॉक्टर से परामर्श जरूर लेना चाहिए, क्योंकि कई महिलायें जो मुश्किल से गर्भवती होती है, या उनकी प्रेगनेंसी में किसी तरह की कॉम्प्लीकेशन्स होती है, खास उनके लिए सम्बन्ध बनाना नुकसानदायक हो सकता है।

अपने खान पान का ध्यान रखें:-

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प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओ के शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण कम भूख लगती है, या महिला खाने से परहेज करने लगती है, जिसके कारण महिला के शरीर में कमजोरी आ सकती है, इसीलिए महिला को पहले तीन महीने ही नहीं बल्कि पूरी प्रेगनेंसी में ऐसे आहार का सेवन करना चाहिए, जिसके कारण बच्चे और महिला के स्वास्थ्य को सही रहने में मदद मिल सकें, और वो आहार सभी पूरे पोषक तत्वों से भरपूर होना चाहिए, इसके अलावा महिला को ज्यादा तले भुने और मसालेदार भोजन का सेवन भी नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसके कारण पेट से जुडी परेशानी का अनुभव हो सकता है, और गरम चीजे जैसे ड्राई फ्रूट आदि का सेवन भी अधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए।

अपनी डॉक्टर से जांच करवाएं:-

महिला को जैसे ही पता चले की वो प्रेग्नेंट है, उसी समय उसे एक अच्छे डॉक्टर का चुनाव करके अपने सभी टेस्ट करवाने चाहिए, ताकि शरीर में कोई कमजोरी या कोई परेशानी हो तो उसे समय रहते सुलझा लिया जाएँ, और महिला के साथ गर्भ में पल रहा शिशु भी स्वस्थ रहे।

तो ये कुछ काम है जो महिला को गर्भावस्था के पहले तीन महीने नहीं करने चाहिए, क्योंकि माँ बनना किसी भी महिला के लिए बहुत ही खास होता है, ऐसे में महिला के द्वारा की गई थोड़ी सी लापरवाही के कारण महिला को बुरा परिणाम भुगतना पड़ सकता है, और यदि आप इन टिप्स का इस्तेमाल करते है तो आपको प्रेग्नेंसी के पहले तीन महीने ही नहीं बल्कि पूरी प्रेगनेंसी स्वस्थ और सुरक्षित रहने में मदद मिलती है।

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प्रेगनेंसी में वाइट डिस्चार्ज होना

प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने गर्भवती महिला रोजाना किसी न किसी नए अनुभव या नई परेशानी से भरे हुए होते हैं। क्योंकि बॉडी में लगातार होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिला किसी न किसी नई परेशानी का सामना कर सकती है। और ऐसी ही एक परेशानी के बारे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं जिसके बारे में प्रेगनेंसी के दौरान पूरी जानकारी होना बहुत जरुरी होता है। और वो है महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली वाइट डिस्चार्ज की समस्या जिसे सफ़ेद पानी या ल्यूकोरिया के नाम से भी जाना जाता है। यह प्राइवेट पार्ट से निकलता हुआ सफ़ेद, गाढ़ा, चिपचिपा, गंधहीन पदार्थ होता है। प्रेगनेंसी के दौरान सफ़ेद पानी का आना आम बात होती है लेकिन जरुरत से ज्यादा इस परेशानी का होना नुकसानदायक भी हो सकता है।

प्रेगनेंसी के दौरान सफ़ेद पानी आने के कारण

गर्भावस्था के दौरान सफ़ेद पानी के आने के बहुत से कारण हो सकते हैं तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान ल्यूकोरिया की समस्या होने के क्या कारण हो सकते हैं।

  • प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण यह समस्या हो सकती है।
  • गर्भावस्था में बॉडी में एस्ट्रोजन हॉर्मोन की वृद्धि होने के कारण भी सफ़ेद पानी आने की समस्या हो सकती है।
  • यदि गर्भवती महिला किसी यौन संचारित रोग से ग्रसित है, तो भी महिला को यह परेशानी हो सकती है।
  • प्रेगनेंसी की दूसरी और तीसरी तिमाही में यीस्ट संक्रमण होने के कारण भी महिला को सफ़ेद पानी निकल सकता है।
  • गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में रक्त का प्रवाह ज्यादा तेजी से होता है जिसके कारण भी महिला को सफ़ेद पानी अधिक आ सकता है।
  • गर्भाशय की ग्रीवा में बदलाव आने के कारण भी गर्भवती महिला को तीसरी तिमाही में सफ़ेद पानी अधिक निकलने की समस्या हो सकती है।

गर्भावस्था में सफ़ेद पानी आने पर किन चीजों को अनदेखा न करें

  • यूरिन की तरह सफ़ेद पानी का निकलना।
  • पानी गिरने के साथ गंध का आना।
  • खुजली, जलन, रैशेस का होना और साथ में सफ़ेद पानी का गिरना।
  • सफ़ेद की जगह चिपचिपे पदार्थ का रंग गुलाबी, भूरा या पीला होने लगे।
  • सफ़ेद पानी के साथ खून के धब्बे महसूस होने पर।

सफ़ेद पानी आने पर शिशु को कोई नुकसान पहुँचता है?

ल्यूकोरिया की समस्या होने पर बहुत सी गर्भवती महिलाओं के मन में यह सवाल आ सकता है की क्या सफ़ेद पानी के कारण शिशु को कोई नुकसान होता है। तो इसका जवाब है, यदि सफ़ेद पानी गंधहीन है और उसके रंग में कोई बदलाव नहीं है तो यह शिशु को नुकसान नहीं पहुंचाता बल्कि संक्रमण से शिशु का बचाव करता है। लेकिन यदि सफ़ेद पानी में कोई भी असामान्य लक्षण महसूस हो तो यह महिला के साथ शिशु के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है। इसीलिए जिन महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान यह समस्या होती है उन्हें इस बात का ध्यान रखना जरुरी होता है।

सफ़ेद पानी की समस्या होने पर किन बातों का ध्यान रखें

  • प्राइवेट पार्ट की साफ सफाई रखें।
  • साफ़ कॉटन का अंडरवियर पहने।
  • किसी भी तरह के केमिकल का इस्तेमाल प्राइवेट पार्ट के लिए न करें।
  • ज्यादा टाइट कपडे न पहने।
  • सम्बन्ध बनाने में सावधानी और सुरक्षा का ध्यान रखें।
  • सफ़ेद पानी के रंग का ध्यान रखें क्योंकि रंग में बदलाव संक्रमण के कारण हो सकता है।
  • किसी भी तरह की दवाई का सेवन डॉक्टर से बिना पूछें न करें। किसी भी असामान्य लक्षण के महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर से राय लें।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान सफ़ेद पानी से जुडी समस्या के लिए कुछ टिप्स, ऐसे में महिला को प्रेगनेंसी के दौरान इन बातों का पूरा ध्यान रखना चाहिए। ताकि गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को प्रेगनेंसी के दौरान इसके कारण होने वाली हर परेशानी से बचाव करने में मदद मिल सके।

गर्भ में शिशु एक दिन में कितनी बार किक करता है?

प्रेगनेंसी में शिशु की हलचल

प्रेगनेंसी की खबर किसी भी महिला के लिए बेहद ख़ुशी का लम्हा होता है, और यह ख़ुशी और भी बढ़ जाती है जब गर्भ ने महिला शिशु की हलचल का अनुभव करती है। क्योंकि शिशु की पहली हलचल शिशु के गर्भ में होने के अहसास को महिला को महसूस करवाने में मदद करती है। गर्भ में शिशु की हलचल का अनुभव गर्भवती महिला को पांचवें महीने में महसूस हो सकता है। जो महिलाएं पहली बार माँ बन रही होती है उनके लिए इस हलचल को समझना थोड़ा मुश्किल हो सकता है लेकिन दूसरी बार माँ बन रही महिला को इसकी समझ होती है और वो इसे अच्छे से समझ जाती है। कुछ महिलाएं चौथे महीने के आखिर में इस हलचल को महसूस कर सकती है।

गर्भ में शिशु का विकास जैसे जैसे बढ़ता है, जैसे जैसे शिशु के सुनने की क्षमता का विकास होता है, शिशु बाहर की चीजों पर प्रतिक्रिया देनी शुरू करता है, डिलीवरी का समय पास आने वाला होता है, आदि। वैसे वैसे गर्भवती महिला शिशु की हलचल का अनुभव अधिक कर सकती है। इसके अलावा महिला के गर्भ में शिशु के हलचल का अनुभव होना शिशु के बेहतर विकास और शिशु के स्वस्थ होने की निशानी होती है। साथ ही शिशु की गर्भ में हलचल महसूस केवल माँ को ही होती है, लेकिन घर के अन्य सदस्यों से महिला जब शिशु की गर्भ में हलचल के बारे में शेयर करती है। तो उनके लिए इन बातों को सुनना ही उन्हें शिशु के होने का अहसास करवाने में मदद करता है।

शिशु एक दिन में कितनी बार हलचल करता है?

दिन भर में काम करते समय, या जब आपका ध्यान कहीं और लगा हो, तो हो सकता है की शिशु हलचल तो कर रहा हो लेकिन उस तरफ आपका ध्यान न जाए। लेकिन जब आप आराम करती है, पेट पर हाथ फेरती है, ज्यादा रौशनी में जाती है, बहुत ज्यादा आवाज़ वाली जगह होती है, आदि। तो आपको शिशु की हलचल महसूस होती है क्योंकि गर्भ में पल रहा शिशु बाहर की चीजों पर अपनी प्रतिक्रिया देनी शुरू कर देता है। केवल बाहर की चीजों पर ही नहीं आपका शिशु जो आप खाती है इस पर भी प्रतिक्रिया दे सकता है क्योंकि जो भी महिला खाती है वह गर्भनाल के रास्ते शिशु तक पहुंचाया जाता है। और यदि महिला बहुत अधिक मिर्ची का सेवन करती है तो हो सकता है की शिशु गर्भ में हलचल करने लगे।

इसके अलावा हर शिशु गर्भ में एक ही समय हलचल करे या एक जितनी हलचल करें ऐसा जरुरी नहीं होता है। क्योंकि यह हर भ्रूण के गर्भ में हो रहे विकास पर निर्भर करता है। इसके अलावा गर्भ में शिशु एक दिन में या एक घंटे में कितनी बार किक करता है इसका अनुमान लगाना थोड़ा मुश्किल होता है। क्योंकि गर्भ में शिशु के किक कारण शिशु पर ही निर्भर करता है। लेकिन आप चाहे तो प्रेगनेंसी के दौरान गिन सकती है की शिशु एक घंटे या एक दिन में कितनी बार किक करता है, लेकिन हर घंटे या हर दिन एक जितनी ही बार शिशु किक करे ऐसा जरुरी नहीं होता है। तो पूरी तरह से आप इस गिन तो नहीं सकते लेकिन आप इस अनुभव का भरपूर आनंद प्रेगनेंसी के दौरान जरूर उठा सकते हैं।

गर्भ में शिशु की हलचल का गर्भवती महिला को अच्छे से ध्यान रखना भी चाहिए, और यदि आपको कभी ऐसा महसूस हो की गर्भ में शिशु हलचल नहीं कर रहा है। या बहुत समय हो गया शिशु की कोई हलचल नहीं हुई तो इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसके कारण शिशु को गर्भ में रिस्क हो सकता है इसीलिए गर्भ में शिशु की हलचल न महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर से राय लेनी चाहिए।

चांदी के गहनों और बर्तनो को चमकाने के तरीके

चांदी एक ऐसी धातु है जो हम सभी के घरो में भगवान की मूर्तियों, बर्तनो और गहनों में इस्तेमाल होती है। नए नए बर्तनो और आभूषणों की चमक जितनी हमे लुभाती है उतना ही हम इसकी तरफ खींचे चले जाते है। हमारी समाज में शादीशुदा महिलाओं का चाँदी की पायल, बिछुए व अंगूठी पहनना अनिवार्य भी माना जाता है। इसी चांदी को देख रेख में बहुत सी सावधानी बरतनी पड़ती है, क्योकि अन्य धातु के मुकाबले चांदी बहुत ही कोमल होती है और समय बितने के साथ साथ अपनी चमक भी खोने लगती है। यदि चांदी की पोलिश के लिए हम दुकानदार के पास जाए तो वो हम से अच्छी खासी रकम ऐंठ लेता है, जो की पूरी तरह बेकार भी है , क्योकि एक समय के अंतराल पर चांदी फिर से काली पड़ ही जाएगी। इसकी पोलिश के लिए हम बार बार तो खर्चा नहीं कर सकते ना, तो क्यों न हम घर पर ही चांदी की चमक वापस लाने के उपाय जाने।

  • नमक : किसी गहरे बर्तन में २ कप तेज गरम पानी और २ चम्मच नमक डालकर मिला ले। अब इस घोल में चांदी का बर्तन या गहना डाल दीजिये। १५ मिनट बाद भर निकालेंगे तो आपका चांदी की चीज़ आपको एकदम साफ़ चमकती हुई मिलेगी।
  • टूथपेस्ट : सभी के घरो में टूथपेस्ट या टूथपॉवडर तो आसानी से मिल ही जाता है। किसी भी साफ़ कपडे पर टूथपेस्ट लगा कर चांदी के बर्तन पर रगड़े। और फिर साफ़ पानी से धो ले। आप देख्नेगे की चांदी के खोई हुई चमक फिर से लोट आयी है।
  • डिटर्जेंट : उबलते हुए पानी में डिटर्जेंट डाल कर, चांदी की चीज़ को डुबो दे। कुछ देर बाद बहार निकाल कर ब्रश लेकर हलके हाथो से रगड़े और फिर साफ़ पानी से धो ले।
  • हैंड सैनिटाइज़र : हैंड सैनिटाइज़र न केवल हाथो के कीटाणु मारने में बल्कि चांदी को चमकाने में भी बहुत ही सहायक है। एक स्पंज हैंड सैनिटाइज़र में भिगो ले और उससे चांदी के बर्तन या आभूषण को रगड़े, आपको दिखेगा की चांदी पहले की तरह चमकने लगी है।
  • टोमैटो सॉस : चांदी के बर्तनो को टोमेटो सॉस से रगड़ने से भी उनकी चमक लौट आती है। यदि चांदी बहुत ही काली पड़ गयी है तो थोड़ी देर सॉस में डिप करके रखने के बाद रगड़े, चाँद बिलकुल पहले जैसी हो जायगी ।
  • हेयर कंडीशनर : जी है बिलकुल सही पढ़ा आपने हेयर कंडीशनर, हेयर कंडीशनर को स्पंज पर लेकर चांदी हल्के हाथ से रगड़े, आपके गहने बिलकुल साफ़ हो जाएगी।
  • चॉक : चॉक के छोटे पीस को लेकर चांदी को ५ मिनट तक रगड़े, और फिर देखे की चांदी की चमक वापस आने लगेगी।

तो हमने देखा घर पर ही हम चांदी की मूर्तियों, बर्तनो और आभूषणों को कैसे चमका सकते है। इन उपायों पर ना तो ज्यादा खर्चा होगा और साथ हम चांदी रखी हुई चीजों का इस्तेमाल भी कर सकते है। महंगाई को देखते हुए बार बार तो चांदी खरीदी नहीं जा सकती।

प्रेगनेंसी के दौरान ये होना सामान्य बात होती है?

प्रेगनेंसी जहां महिला को एक नया अनुभव दिलाता है, वही इस दौरान महिला को कई प्रकार की जटिलताओं का सामना भी करना पड़ता है, जिससे की महिला को थोड़ी परेशानी भी हो सकती है, और ऐसा भी जरुरी नहीं है की हर महिला को एक ही तरह की दिक्कत हो, यह हर महिला के हॉर्मोन्स पर निर्भर करता है, जैसे की कई महिलाओ को तीन महीने तक तो कई महिलाओ को पूरे नौ महीने उलटी की समस्या रहती है, कई महिलाओ को इस दौरान ब्लीडिंग की भी परेशानी का अनुभव करना पड़ता है, तो कई महिलाएं पेट के दर्द से भी परेशान रहती है, उलटी आना, शरीर के भागो में दर्द रहना, वजन बढ़ना, चक्कर आना, स्वभाव में परिवर्तन आना, नींद आना, जल्दी थकावट का अनुभव होना, गंध से एलर्जी होने, यह सब सामान्य होता है।

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लेकिन यदि आपको कोई भी परेशानी बहुत अधिक होने लगें, जैसे की रक्तस्त्राव का होना, पेट में अधिक दर्द का अनुभव होना, तो इन्हे अनदेखा न करते हुए आपको समय रहते अपने डॉक्टर को दिखाना चाहिए क्योंकि कई बार पेट में अधिक दर्द या रक्तस्त्राव गर्भपात का कारण भी बन सकता है, लेकिन महिला इन सब परेशानियों को बिलकुल भूल जाती है जब वो नन्ही सी जान आपके हाथो में आती है, इसके अलावा जैसे ही आपकी डिलीवरी होती है उसके बाद आपको इन सब जटिलताओं से निजात पाने में भी मदद मिलती है, तो आइये अब विस्तार से आपको बताते है प्रेगनेंसी में क्या होना सामान्य बात होती है।

मुँह के स्वाद में फ़र्क़ आना:-

प्रेगनेंसी के दौरान महिला के मुँह का स्वाद कड़वा और कसैला हो जाता है, कई महिलाओ को ऐसा शुरूआती दिनों में ही होता है, और इसके कारण उन्हें कुछ खाने का मन नहीं करता है, लेकिन खट्टी चीजों का सेवन महिलाएं खूब शौक से करती हैं।

उलटी आना:-

शरीर में होने वाले बदलाव और मुँह का स्वाद अजीब होने के कारण महिलाओ को उलटी होना आम बात होती है, खासकर सुबह के समय अधिकतर महिलाएं परेशान होती है, इसके अलावा कई महिलाओ को शुरूआती दिनों में तो कई महिलाएं पूरे नौ महीने तक इस समस्या से परेशान रहती है।

सर दर्द व् चक्कर आना:-

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शरीर में तेजी से हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण महिलाओ का सर भारी रहता है, जिसके कारण कई बार सर दर्द के साथ चक्कर जैसी समस्या के कारण भी आपको परेशान होना पड़ता है, लेकिन ये यदि अधिक हो तो इस बारे में आपको घर पर पड़ी पेन किलर का सेवन नहीं करना चाहिए बल्कि आप चाहे तो एक बार इस बारे में डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

गंध से एलर्जी होना:-

इस समय पर महिलाओ को कई चीजों की स्मेल से भी एलर्जी होती है, कई महिलाएं तो सब्ज़ी की गंध को तो कई रोटी की महक को भी बर्दाश नहीं कर पाती है, और ऐसा शुरूआती दिनों में अधिक, समय के साथ धीरे धीरे ये समस्या ठीक होने लगती है।

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ब्लीडिंग या स्पॉटिंग होना:-

प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने में कई महिलाओ को स्पॉटिंग की समस्या हो जाती है, इस दौरान महिला को जितना हो सकें आराम करना चाहिए इसके अलावा महिला को यदि मासिक धरम के दौरान होने वाला दर्द या अधिक ब्लीडिंग लगे तो बिना देर किए आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, ताकि गर्भपात होने की समस्या का सामना आपको न करना पड़े।

सेक्स के प्रति अरुचि उत्त्पन्न होना:-

महिला के गर्भवती होने के दौरान महिला के शरीर में इंटरनल बदलाव के साथ ही उसका वजन भी बढ़ने लगता है, इसके कारण महिला बहुत परेशान रहती है, जिससे उसका सेक्स करने का मन भी नहीं करता है,और ऐसे समय पर सेक्स करते समय सावधानी व् डॉक्टर से राय लेनी भी बहुत जरुरी होती है।

स्वभाव में परिवर्तन आना:-

प्रेगनेंसी के कारण शरीर में हो रहे बदलाव के कारण महिलाओ को कई बाद चिड़चिड़ापन और गुस्सा भी आने लगता है, कई बार महिलाएं मानसिक रूप से भी परेशान होने लगती है, और उन्हें तनाव भी होने लगता है, परन्तु ऐसे में महिला को जितना हो सकें खुश रहना चाहिए ताकि उसके बच्चे को स्वस्थ रहने में मदद मिल सकें।

वजन बढ़ने लगता है:-

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जैसे जैसे प्रेगनेंसी के दिन आगे बढ़ने लगते है वैसे वैसे गर्भ में शिशु का विकास भी तेजी से होने लगता है, जिसके कारण उसका वजन भी बढ़ने लगता है, यह हर महिला के साथ होता है, परन्तु शुरूआती तीन महीनो में कई बार आपका वजन थोड़ा कम भी हो सकता है, उसके बाद निरंतर आपका वजन बढ़ता रहता है।

अधिक पेशाब आने की समस्या हो जाती है:-

प्रेगनेंसी के दौरान कई महिलाओ को अधिक पेशाब आने की समस्या भी हो जाती है, क्योंकि इस दौरान आपकी किडनी दुगुना काम करना शुरू कर देती है, साथ ही प्रेगनेंसी में कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन नामक हॉर्मोन शरीर में बनता है जो की पेल्विक भाग में रक्‍त के प्रवाह को बढ़ाता है, जिसके कारण आपको ये समस्या हो सकती है।

त्वचा में फ़र्क़ आना:-

इस दौरान महिला की त्वचा में भी फ़र्क़ आता है, कई महिलाओ का प्रेगनेंसी में रूप निखार जाता है, तो कुछ महिलाएं आँखों के नीचे डार्क सर्कल, त्वचा पर दाग धब्बे, और रूखी स्किन के कारण भी परेशान हो जाती है।

थकान की समस्या हो जाती है:-

प्रेगनेंसी के समय हर महिला को थकान का अनुभव होना बहुत ही आम बात होती है, क्योंकि इस दौरान शरीर में रक्त बनने की वृद्धि तेजी से होने लगती है, ताकि गर्भ में पल रहे शिशु तक सभी पोषक तत्वों को भरपूर मात्रा में पहुंचाया जा सकें, और इसी तेजी से हो रहें परिवर्तन के कारण महिला को बहुत अधिक थकान का अनुभव होता है।

तो ये कुछ परेशानियां है जो महिलाओ को प्रेगनेंसी के समय उठानी पड़ती है, लेकिन उस नन्ही सी जान के आते ही आपकी जिंदगी में आने वाले नए बदलाव से आपको उनका अहसास भी नहीं होता है, इसके अलावा आपको इस दौरान अपनी डॉक्टर से अच्छे से नियमित जांच भी करवाते रहना चाहिए ताकि कोई समस्या हो तो उसका समाधान किया जाएँ साथ ही माँ और गर्भ में पाक रहे शिशु को स्वस्थ रखने में मदद मिल सकें।

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प्रसव होने के लक्षण

प्रसव के लक्षण, डिलीवरी होने के संकेत, प्रसव से पहले बॉडी में आने वाले बदलाव, प्रसव शुरू होने के लक्षण, प्रसव के लिए टिप्स, Signs of Labor pain, Labor pain tips 

पहली बार माँ बनने वाली महिलाओं के मन में जैसे जैसे डिलीवरी का समय पास आने लगता है तो बेचैनी बढ़ने लगती है। क्योंकि उनके मन में कुछ सवाल होते हैं जैसे की उन्हें कैसे पता चलेगा की उनका प्रसव का समय आ गया है, दर्द कितना होगा, आदि। ऐसे में आपको घबराने की जरुरत नहीं होती है क्योंकि प्रेग्नेंट महिला का शरीर अपने लिए प्रसव को डिलीवरी से पहले तैयार करने लगता है, जिससे की आप अंदाजा लगा सकती है की प्रसव होने वाला है। ऐसे बहुत से लक्षण और संकेत आपकी बॉडी में दिखने लगते हैं। तो आइये जानते हैं प्रसव से जुडी कुछ विशेष बातें।

प्रसव के लक्षण

प्रसव का समय नजदीक आने पर बच्चा भी अधिक मूव करने लगता है, जिससे आप नौवे महीने में जान सकते हैं की आपको प्रसव होने वाला है। इसके अलावा और भी बहुत से ऐसे लक्षण होते हैं आइये उनके बारे में विस्तार से जानते हैं।

बच्चे का भार नीचे आना

प्रसव का समय नजदीक आने पर बच्चे का भार नीचे की तरफ होने लगता है, क्योंकि वो अपनी सही पोजीशन में आने लगता है। ऐसा होने पर आपको ब्रेस्ट के नीचे काफी हल्का महसूस होता है, साथ ही बच्चे का भार नीचे का तरफ होने पर मूत्राशय पर दबाव भी पड़ता है जिसके कारण आपको बार बार यूरिन पास करने की इच्छा होने लगती है।

दर्द का अनुभव होना

पेट में हल्का फुल्का दर्द का अनुभव होना प्रेगनेंसी के दौरान आम बात होती है, लेकिन आखिरी दिनों में पेट के निचले हिस्से में दर्द का अधिक अनुभव होना गर्भाशय में संकुचन होने के कारण होता है। ऐसे में यदि यह दर्द असहनीय होता है तो इसके लिए आपको एक बार डॉक्टर से जरूर बात करनी चाहिए। क्योंकि यह प्रसव के दौरान होने वाली लेबर पेन भी हो सकती है।

गर्भाशय ग्रीवा का बढ़ना

गर्भाशय की ग्रीवा जब पूरी तरह से खुल जाती है तभी महिला की डिलीवरी होती है, ऐसे में आपको नौवे महीने में डॉक्टर से चेकअप के दौरान यह पता चलता रहता है। यदि कभी आपको ऐसा महसूस होता है की गर्भाशय में बाहर की तरफ फैलाव हो रहा है, और पेट के निचले हिस्से में अधिक दबाव महसूस होता है, तो यह भी लेबर पेन का संकेत होता है।

प्राइवेट पार्ट से पानी का निकलना

वैसे प्रेगनेंसी के दौरान महिला के प्राइवेट पार्ट से पानी निकलना आम बात होती है। लेकिन यदि आपको यह तरल पदार्थ ज्यादा मात्रा में प्राइवेट पार्ट से बहता हुआ महसूस होता है। तो यह एमनियोटिक थैली के फटने का संकेत होता हैं जिसका मतलब होता है की आपका डिलीवरी का समय नजदीक आ गया है।

बार बार बाथरूम में जाना

बच्चे का भार नीचे की तरफ आ जाने के कारण मूत्राशय पर दबाव पड़ता है जिसके कारण बार बार यूरिन पास करने की इच्छा होती है। ऐसे में प्रोस्टैगलैंडइन हॉर्मोन भी बढ़ने लगता है जिसके कारण आपको घबराहट व् दस्त की समस्या भी अधिक होने लगती है जिसके कारण आपको लेबर पेन हो सकता है। ऐसा अधिक होने पर एक बार आपको तुरंत डॉक्टर से जरूर राय लेनी चाहिए।

रक्त स्त्राव

कुछ महिलाओं को डिलीवरी से पहले वजाइनल डिस्चार्ज के साथ रक्तस्त्राव भी होने लगता है, ऐसा ज्यादातर उन महिलाओं के साथ होता है जिन्हे समय से पहले प्रसव होने वाला होता है। ऐसे में आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए ताकि आपको इस समस्या से निजात दिलाने के साथ प्रसव को समय से पहले होने से रोकने में मदद मिल सके।

कमर में दर्द

कमर के निहले हिस्से में बहुत अधिक खिंचाव महसूस होना, और दर्द का लगातार बढ़ना भी प्रसव पीड़ा का संकेत होता है। ऐसे में आपको इसे इग्नोर नहीं करना चाहिए।

संकुचन अधिक होना

यदि आपको गर्भशय में थोड़ी थोड़ी देर में अधिक संकुचन होने लगता है, और धीरे धीरे यह और तेजी से होने लगता है तो यह इस बात का संकेत होता है की गर्भाशय की ग्रीवा खुल रही है और डिलीवरी का समय नजदीक है।

पेट के आकार में बदलाव आना

जैसे जैसे प्रसव का समय आता है पेट का आकार बदलता है, क्योंकि बच्चे के दबाव नीचे की तरफ होने लगता है। और जब आपको ऐसा महसूस होने लगे तो समझ लीजिये की बच्चा धीरे धीरे अपनी पोजीशन ले रहा है और उसका प्रसव का समय नजदीक आ रहा है।

तो यह हैं कुछ खास लक्षण जिनसे आप अंदाजा लगा सकते हैं की आपकी डिलीवरी का समय पास आ गया है, इसके अलावा यदि आपको डॉक्टर के अनुसार दी गई डेट पर भी कुछ अहसास नहीं होता है तो इसके लिए डॉक्टर से राय जरूर लेनी चाहिए। और यदि नौवें महीने में कुछ भी अलग संकेत या परेशानी आपके शरीर में दिखाई दे तो इसके लिए एक बार डॉक्टर से जरूर बात करनी चाहिए।

विडिओ प्रसव के लक्षण

सूरज की किरणों से काली पड़ी त्वचा को ठीक करने के तरीके!

सूरज की अल्ट्रावॉयलेट किरणे त्वचा की नमी को छीन लेती है, साथ ही उसके ग्लो को भी खत्म कर देती है, क्योंकि धूप जैसे ही आपकी त्वचा के संपर्क में आती है तो इसके कारण आपकी त्वचा पर कार्बन जमने लगता है, जिसके कारण मृत कोशिकाएं त्वचा पर इकट्ठी होने लगती है, और आपकी त्वचा धीरे धीरे काली पड़ने लगती है, खास कर जब आपके चेहरे के साथ ये समस्या होती है, तो इसके कारण आपकी पर्सनैल्टी पर भी बुरा असर पड़ता है, परन्तु इससे बचने के लिए आप घर में तो नहीं बैठ सकते है, चाहे गर्मी हो काम के लिए आपको बाहर तो जाना ही पड़ता है।

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खास कर गर्मी के मौसम के दौरान आपकी त्वचा जब भी धूप के संपर्क में आती है, तो सूरज की किरणों के कारण आपकी त्वचा का रंग फीका लगने लगता है, सांवले लोग धूप में ज्यादा देर रहने के कारण और काले लगने लगते है, जबकि गोर रंग के लोग धूप में आते ही लाल हो जाते है, इसका कारण त्वचा में होने वाली मेलेमिन की मात्रा पर निर्भर करता है, इसीलिए जब आपकी त्वचा धूप के संपर्क में आती है, तो त्वचा में मेलेमिन की मात्रा अधिक होने लगती है, जिसके कारण त्वचा का रंग बदलने लगता है, और त्वचा काली पड़ने लगती है, तो आइये आज हम आपको इस समस्या का समाधान करके आपको धूप की किरणों के कारण होने वाले त्वचा के कालेपन, को दूर करने के लिए उपाय बताने जा रहें है जो आपकी इस समस्या का समाधान करके आपकी त्वचा में निखार लाने में आपकी मदद करेंगे।

बेसन का इस्तेमाल करें:-

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बेसन के साथ दूध या पानी का इस्तेमाल करके आप चेहरे पर सूरज की किरणों के कारण हुए कालेपन को दूर कर सकते है, इसके लिए आप चार चम्मच बेसन में आवश्यकता अनुसार दूध या पानी मिक्स करके एक लेप तैयार करें, और उसके बाद अच्छे से अपने चेहरे पर लगाएं, और सूखने के बाद चेहरे को धो दें, एक ही बार के इस्तेमाल से आपको फ़र्क़ दिखाई देगा, आप इसे हफ्ते में दो से तीन बार भी कर सकते है, इसी प्रकार आप हल्दी में भी दूध या पानी मिलाकर इसका इस्तेमाल कर सकती है।

खीरे के रस, गुलाबजल, और निम्बू एक इस्तेमाल करें:-

इसके लिए आप एक कटोरी में दो चम्मच खीरे के रस में, दो चम्मच निम्बू का रस और हल्का सा गुलाबजल मिलाएं, उसके बाद इसे अच्छे से मिक्स करें और रुई की मदद से इसे अच्छे से अपने चेहरे पर लगाएं, और इसे जब तक अपने चेहरे पर लगा रहने दें, जब तक की आपके चेहरे की त्वचा इसे अच्छे से सोख नहीं लेती है, ऐसा करने से भी आपकी त्वचा की रंगत को हल्का होने में मदद मिलती है।

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मलाई या दूध का इस्तेमाल करें:-

मलाई या दूध का इस्तेमाल करने से आपके चेहरे पर सूरज की किरणों के कारण जमे कार्बनिक कणों को दूर करके आपकी स्किन को बेहतर बनाने में मदद मिलती है, इसके इस्तेमाल के लिए आप रात को सोने से पहले अच्छे से अपने चेहरे पर लगा लें, और उसके बाद इसे छोड़ दें, और सुबह उठ कर अपने चेहरे को धो लें, टैनिंग को दूर होने के साथ चेहरे को नमीयुक्त होने में भी मदद मिलती है।

संतरे के छिलके, हल्दी, बेसन का इस्तेमाल करें:-

इसे इस्तेमाल करने के लिए सबसे पहले एक बाउल लें, उसके बाद उसमें दो चम्मच बेसन, एक चम्मच संतरे के छिलको का पाऊडर, एक चम्मच कच्चा दूध, चुटकी भर हल्दी, और थोड़ा सा गुलाबजल को मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें, उसके बड़ा इस पेस्ट को अच्छे से अपने चेहरे पर लगाएं, और सूखने के लिए छोड़ दें, उसके बाद धो दें, और इस उपाय को एक दिन छोड़कर नियमित करें, इसके कारण आपके चेहरे की मृत कोशिकाओं को हटाकर चेहरे की चमक को बढ़ाने में मदद मिलती है।

एलोवेरा, मसूर दाल, और और टमाटर के फेस पैक का इस्तेमाल करें:-

इसके इस्तेमाल के लिए एलोवेरा की ताज़ी पत्तियों का रस निकाल कर उसमें मसूर दाल को अच्छे से पीस कर एक पेस्ट तैयार करें, उसके बाद उसमें दो चम्मच टमाटर का रस मिलाएं, उसके बाद इस पेस्ट को अच्छे से अपने चेहरे पर लगाएं, और सूखने के लिए छोड़ दें, सूखने के बाद पानी की मदद से अपने चेहरे को धो लें, इस तरीके का इस्तेमाल हफ्ते में दो से तीन बार करने पर आपको अपने चेहरे के कालेपन को दूर करने में मदद मिलती है।

आलू और निम्बू के रस का इस्तेमाल करें:-

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आलू को कदूकस करके उसका रस निकाल लें, उसके बाद इसे थोड़ा सा निम्बू का रस मिलाएं, और अच्छे से अपने चेहरे पर रुई की मदद से लगाएं, और इसे तब तक अपने चेहरे पर लगा रहने दें, जब तक की आपकी त्वचा इसे अच्छे से सोख न लें, उसके बाद अपने चेहरे को धो लें, आप इस उपाय को रोजाना कर सकते है, और चाहे तो रात के समय आप इसे लगाकर सो जाएँ और सुबह उठ कर मुँह धो लें, तब भी आपको इससे फायदा मिलता है।

दही, टमाटर और निम्बू के रस का इस्तेमाल करें:-

एक कटोरी में थोड़ा सा दही लें, उसके बाद उसमें दो चम्मच टमाटर का रस मिलाएं, और थोड़ा सा निम्बू का रस मिलाएं, तीनो ही प्राकृतिक रूप से ब्लीचिंग एजेंट का काम करते है, इन तीनो को अच्छे से मिक्स करें, और उसके बाद अपने चेहरे पर लगाएं, और पंद्रह से बीस मिनट के बाद साफ़ कर दें, ऐसा करने से त्वचा के कालेपन को दूर करने में मदद मिलती है, आप इस उपाय को हफ्ते में यदि एक या दो बार भी करते है तो भी ये आपके लिए बहुत फायदेमंद होता है।

स्ट्रॉबेरी और दूध की मलाई का फेस पैक बनाएं:-

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स्ट्रॉबेरी और दूध से बने फेस पैक का इस्तेमाल करने से भी आपकी त्वचा के कालेपन को दूर करने में मदद मिलती है, इसके इस्तेमाल के लिए आप स्ट्रॉबेरी को अच्छे से पीस लें, उसके बाद उसमें दो चम्मच दूध की मिलाई मिलाकर अच्छे से मिक्स करें, अब इस पेस्ट को अपने चेहरे पर लगाएं, और सूखने के बाद धो दें, ऐसा करने से आपकी स्किन पर पड़े काले धब्बे और सूरज की किरणों के कारण डल पड़ी स्किन में निखार लाने में मदद मिलती है।

शहद, दूध पाउडर और बादाम तेल का इस्तेमाल करें:-

एक चम्मच दूध पाउडर में थोड़ा सा शहद और कुछ बुँदे बादाम के तेल की मिलाएं, और उसके बाद एक पैक तैयार करें, उसके बाद इस पैक को अच्छे से अपने चेहरे पर लगाएं, और सूखने के लिए छोड़ दें, उसके बाद पानी की मदद से इसे धो दें, ऐसा करने से भी सूरज की किरणों के कारण काली पड़ी स्किन की रंगत निखारने में मदद मिलती है।

सूरज की किरणों के कारण काली पड़ी त्वचा को ठीक करने के अन्य उपाय:-

  • त्वचा पर निम्बू के रस का इस्तेमाल रुई के साथ भी नियमित करने से आपको काली पड़ी त्वचा को ठीक करने में मदद मिलती है।
  • आटे में पानी को मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें, और इसे अच्छे से अपनी त्वचा पवार लगाएं ऐसा करने से भी आपकी स्किन के कालेपन को दूर करने में मदद मिलती है।
  • एक चम्मच हल्दी में दूध और संतरे का रस मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें इस पेस्ट का इस्तेमाल करने से भी आपको फायदा मिलता है।
  • शहद और ताजे संतरे के रस का इस्तेमाल चेहरे पर करें, और थोड़ी देर इसके लगे रहने के बाद इसे साफ़ कर दें, ऐसा करने से भी आपकी स्किन के कालेपन को दूर करने में मदद मिलती है।
  • आलू की स्लाइसेस काट कर या आलू के रस को चेहरे पर लगाने से भी त्वचा को सूर्य की किरणों के कारण हुए कालेपन को हटाने में मदद मिलती है।
  • ककड़ी के रस, संतरे के रस और निम्बू के रस को मिलाकर चेहरे पर लगाएं, ऐसा करने से भी आपकी स्किन की मृत कोशिकाओं को हटाकर आपकी त्वचा में निखार लाने में मदद मिलती है।
  • पपीते को अच्छे से पीस कर उसमें शहद मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें, उसके बाद इस पेस्ट का इस्तेमाल अपने चेहरे के लिए करने से आपको अपनी स्किन की रंगत को साफ़ करने में मदद मिलती है।
  • दलिये और मलाईदार दूध को मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें, और उसके बाद इस पेस्ट को अपने चेहरे पर लगाएं ऐसा करने से भी आपकी त्वचा का रंग साफ होता है।
  • चीनी और निम्बू के रस को प्राकृतिक स्क्रब की तरह इस्तेमाल करके भी आप अपने चेहरे को निखार सकते है।
  • शहद और ताजे संतरे के रस को मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें, उसके बाद इसके सूखने पर गुनगुने पानी से अपने चेहरे को धोडें, इसके कारण भी आपके चेहरे को साफ़ होने में मदद मिलती है।

तो ये कुछ उपाय है जिनका इस्तेमाल करके आप धूप की किरणों के कारण काली पड़ी त्वचा को निखार सकते है, साथ ही आपको धूप में निकलने से पहले अपनी त्वचा पर सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना चाहिए, अपने आप को अच्छे से ढक कर धूप में बाहर निकलना चाहिए, ऐसा करने से भी आप अपनी त्वचा पर पड़ने वाली सूर्य की किरणों के असर को थोड़ा कम कर सकते है, जिससे आपकी त्वचा पर ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ता है।

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रूखे और बेजान बालों में चमक लाने के लिए करें ये उपाय

आज कल की भागदौड़ भरी ज़िन्दगी और प्रदूषण के कारण बालो की प्राकतिक चमक खोती जा रही है। अपने बालो को सुन्दर बनाने के लिए न जाने हम कौन कौन से प्रोडक्ट्स और हानिकारक् चीज़ो का इस्तेमाल करके अपने बालों को और भी बेजान और रुखा बना लेते हैं। तो आज मैं आपसे शेयर कर रही की आप अपने बालो का किस प्रकार ध्यान रखें की वह खूबसूरत और घने व मुलायम बन जाएं।

1 बालों की सफाई का विशेष रूप से ध्यान रखें। बाल भी हमारी खूबसूरती के लिए उतने ही जरुरी है जितने की हमारा चेहरा। तो इस लिए हमे आपने बालो की भी सफाई उसी प्रकार रखनी चाहिए जैसे हम अपने शरीर के सभी अंगो की सफाई रखते हैं।

2 अपने बालों की सफाई के लिए आप किसी भी अच्छे शैम्पू का इस्तेमाल कर सकती हैं । जो भी शैम्पू बाजार में उपलब्ध है आप उसमे से कोई भी अच्छा शैम्पू जो आपके के बालो को सूट करे आप उसका इस्तेमाल कर सक्ति हैं और इस बात का अवशय ध्यान रखें की आप बार बार शैम्पू को न बदलें।

3 15 दिन में आप सेब के सिरके का भी इस्तेमाल करें। इससे आपके बाल और भी जायदा मजबूत होंगें।

4 सप्ताह में 2 बार बालों में शैम्पू का इस्तेमाल जरूर करें। क्यूंकि बालों की साफ़ सफाई का भी बहुत ध्यान रखना जरुरी है,यदि बालो को साफ़ न रखने तो वह चिपचपे और गंदे दिखाई देने लगते है.

5 आप बालों की चमक को बरकरार रखने के लिए हफ्ते में एक बार किसी भी अच्छे तेल से अपने सिर की मालिश करें। इसके लिए आप किसी कटोरी में तेल को गरम करके अच्छे से अपनी उंगलिओं की मद्दद से हलके हाथ से मालिश करें।

6 बालो को ज्यादा खुला न रखें। इससे बाल जल्दी गंदे होते हैं और रूखे भी बहुत जल्दी हो जातें है। बालों को हमेशा धुप और धूल से बचाएं। इसके लिए आप सकाफ का भी इस्तेमाल करें। ये थे कुछ टिप्स जिससे आप आपने बालो को हेल्दी और खूबसूरत रख सकते हैं।

अपने बालों को परमानेंट खूबसूरत बनाने के लिए हम अपने रसोई घर से कुछ चीज़ो के इस्तेमाल कर सकते जिससे हम अपने बालों की खूबसूरती को और निखार सकते हैं।

क्या लगाएं बालों में

1 अंडे को आप आपने बालों में लगा सकते हैं इसके लिए एक कटोरी मई अंडे को अच्छी तरह से मिला लें और फिर अपने हाथों की मद्दद से अपने बालो में लगाएं। उसके आधे घंटे बाद सिर को धो लें। इससे आपके बाल मुलायम हो जायेंगें।

2 मेहँदी को रात भर लोहे की कड़ाही में भिगो कर रख दें उसके बाद सुबह मेहँदी को आप आपने सिर में लगा लें। मेहँदी आपके बालों को खूबसूरत रंग तो देगी ही साथ ही आपके बालो को घाना भी बना देंगी।

3 शहद भी आपके बालो को चमक देता हैं। इसके लिए आप एक कटोरी में थोड़ा सा शहद और थोड़ा सा नीबू का रस ले लें। और अपने बालों की जड़ों में अच्छे से लगा लें। यह आपके बालो को प्राकर्तिक रूप से चमक देता है।

4 दही हमारे बालों के लिए सबसे अच्छे कंडीशनर का काम करता हैं। इसकेलिए हम थोड़ा दही और थोड़ा सा नीबू का रस मिलकर इस्तेमाल कर सकते हैं इससे हमारे बाल मुलायम होने के साथ रुसी की समयसा से भी निजात पातें हैं।

गर्भ में शिशु की आदत क्या-क्या होती है?

माँ के गर्भ में शिशु

किसी भी महिला के लिए गर्भ में शिशु को महसूस करना और उसे जन्म देना उसकी जिंदगी का सबसे बेहतरीन लम्हा होता है। और पूरे नौ महीने गर्भ में शिशु क्या कर रहा है क्या नहीं, शिशु का विकास कैसे हो रहा है इसे जानने की उत्सुकता गर्भवती महिला को होती रहती है। लेकिन गर्भ में शिशु किस समय क्या कर रहा है इसे जानना थोड़ा मुश्किल होता है, क्योंकि आप गर्भ में शिशु को महसूस तो कर सकती है लेकिन उसे देख नहीं सकती। परन्तु शिशु के जन्म के बाद उसकी हर पहली आदत और हरकत को आप देख भी सकती है, और उसे हमेशा यादगार लम्हो में कैद करके भी रख सकती है। लेकिन आपको यह जानकार हैरानी होगी की गर्भ में भी शिशु की बहुत सी ऐसी आदतें होती है जिन्हे वो करता है, और आपको पता भी नहीं चलता।

गर्भ में शिशु क्या क्या करता है

माँ के गर्भ में शिशु पांचवे महीने तक हलचल करना शुरू कर देता है, और जैसे जैसे शिशु का विकास होता है वैसे वैसे शिशु की हलचल बढ़ने लगती है, साथ ही गर्भवती महिला ज्यादा समय के लिए इस अनुभव को एन्जॉय कर सकती है। हाथ पैर मरने के अलावा और भी ऐसी बहुत सी हरकते हैं जो शिशु माँ के गर्भ में करता है, तो आइये आज हम आपको माँ के गर्भ में शिशु को क्या क्या आदत होती है इस बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं।

हिचकियाँ लेना

प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में गर्भ में शिशु हिचकियाँ लेना शुरू कर देता है। गर्भवती महिला इसे महसूस नहीं कर सकती है लेकिन गर्भ में शिशु कभी कभी हिचकी ले सकता है।

अंगूठा चूसता है

जैसे जैसे शिशु का आकार बढ़ता है वैसे वैसे उसकी हरकतें भी बढ़ने लग जाती है। और विशेषज्ञों की मानें तो गर्भ में शिशु अपने अंगूठे को चूसने की कोशिश करता है। और कई बच्चे तो गर्भ में अंगूठा चूसते भी हैं।

अंगड़ाई लेता है

शिशु गर्भ में घूमता भी है और चौबीसवें हफ्ते के अस पास आप शिशु की हलचल महसूस भी कर सकती है। और जब गर्भ में शिशु घूमकर थक जाता है तो थकावट के कारण शिशु अंगड़ाई भी ले सकता है।

गर्भ में रोना

अल्ट्रासॉउन्ड टेस्ट के दौरान कई बार देखा गया है की गर्भ में शिशु बहुत सी हरकतें करता है, लेकिन हो सकता है की आपको यह जानकार बुरा लगे की गर्भ में शिशु मूवमेंट करने के साथ कई बार रोता भी है।

गर्भ में हंसना

गर्भ में शिशु केवल रोता ही नहीं है बल्कि हँसता भी है, डॉक्टर्स के अनुसार छठे महीने के आस पास शिशु अपनी प्रतिक्रिया देने लगता है, और कई बार हँसता भी है।

बाहरी चीजों को महसूस करना

शिशु का शारीरिक विकास बढ़ने के साथ शिशु के अंगो का विकास भी बढ़ने लगता है, शिशु के अंग काम करने लगते हैं। जैसे की शिशु की सुनने की क्षमता में वृद्धि होना, ऐसे में तेज आवाज़ सुनकर कई बार शिशु गर्भ में चौकता भी है जिसके कारण गर्भ में वह ज्यादा मूवमेंट करने लगता है, ऐसे में महिला को ज्यादा शोरगुल वाली जगह पर जाने से बचना चाहिए। साथ ही गर्भ में शिशु आस पास की आवाज़ भी महसूस कर सा सकता है, इसीलिए गर्भवती महिला को गर्भ में ही अपने शिशु से बातें करनी चाहिए ताकि उसके मानसिक विकास को बेहतर तरीके से होने में मदद मिल सके।

आँखे खोलना

अठाईसवें हफ्ते के आस पास शिशु अपनी आँखे भी खोल सकता है, और गर्भ पर तेज रौशनी पड़ने पर शिशु उसे महसूस भी कर सकता है।

हाथ पैर मारना

शिशु का जैसे जैसे शारीरिक विकास होता है वैसे वैसे शिशु के हाथ पैर अच्छे से मूव करने लगते हैं, जिसके कारण प्रेगनेंसी के आखिरी महीने शिशु की हलचल अधिक महसूस हो सकती है। और यह पल गर्भवती महिला की प्रेगनेंसी के सबसे बेहतरीन पलों में से एक होता है।

मूत्र भी करते हैं

जी हाँ, आपको यह जानकार हैरानी होगी की गर्भ में शिशु भी यूरिन करता है, और यह शिशु पहली तिमाही के आखिर तक शुरू कर देता है।

खाने का स्वाद

गर्भवती महिला जो भी आहार खाती है उसके मौजूद पोषक तत्व शिशु के बेहतर शारीरिक विकास में मदद करते है ऐसा तो आपने बहुत बार सुना होगा। लेकिन शिशु उस खाने के स्वाद का अनुभव भी कर सकता है, ऐसे में महिला को आहार का सेवन करते समय बहुत ज्यादा सावधानी बरतने की जरुरत होती है।

अपनी पोजीशन में बदलाव लाना

प्रेगनेंसी के दौरान शिशु गर्भ में मूवमेंट करता है, लेकिन डिलीवरी का समय जैसे जैसे पास आता है वैसे वैसे शिशु अपनी सही पोजीशन में आने लगता है। जैसे की शिशु का सिर नीचे की तरफ और टाँगे ऊपर की तरफ हो जाती है।

सांस लेता है

गर्भावस्था की पहली तिमाही में शिशु एमनियोटिक फ्लूड अपने अपने अंदर लेना व् बाहर निकालना शुरू करता है, जिससे शिशु के फेफड़ों का विकास होता है। और प्लेसेंटा के माध्यम से शिशु तक पर्याप्त ऑक्सीजन पहुंचाई जाती है जिससे शिशु को सांस लेने में मदद मिलती है। ऐसे में गर्भवती महिला को बॉडी में एमनियोटिक फ्लूड की मात्रा को पर्याप्त बनाए रखने के लिए पानी का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए, ताकि शिशु के विकास में किसी भी तरह की कमी न आए।

तो यह हैं कुछ आदतें जो गर्भ में शिशु करता है, ऐसे में शिशु स्वस्थ रहे और उसक विकास बेहतर तरीके से हो इसके लिए प्रेग्नेंट महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने के साथ मानसिक रूप से भी फ्री रहना चाहिए, ताकि शिशु का भी शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर तरीके से हो सके। इसके अलावा कोई भी परेशानी हो, शिशु की हलचल लम्बे समय के लिए महसूस न हो, दर्द महसूस हो, तो ऐसे लक्षणों को अनदेखा न करते हुए जितना जल्दी हो सके एक बार डॉक्टर से राय लेनी चाहिए।

दांतो में दर्द रहता हैं? ये हैं कारण और उपचार

दांतो में दर्द रहता हैं? ये हैं कारण और उपचार:-

शरीर के किसी भी अंग में दर्द हो वो आपको बहुत ही परेशान करता हैं| चाहे वो सर में होने वाला दर्द हो, या फिर जोड़ो में होने वाला दर्द हर एक दर्द होने के कारण आप असहज महसूस करते हैं| दांतो के दर्द से केवल स्त्री या पुरुष ही नहीं बल्कि छोटे उम्र में बच्चे भी बहुत परेशान हो जाते हैं, यदि सही ढंग से उनके दांतो की देखभाल न की जाएँ| कई बार तो ये दर्द इतना असहनीय होता हैं, की आपसे न तो कुछ खाया जाता हैं, न पीया जाता हैं, और मन करता हैं बस इस दांत को निकाल दिया जाएँ|

दांतो में दर्द के बहुत से कारण हो सकते हैं| जैसे की जो बच्चे या बड़े अपने दांतो में ब्रश नहीं करते हैं, रात के समय मीठा खाकर सोते हैं, गरम ठन्डे का सेवन एक साथ करते हैं, ब्रश करते हैं, परंतु वो भी ढंग से नहीं करते हैं, जिससे दांतो की सफाई अच्छे से नहीं होती हैं, और कैविटी जमने लगती हैं, और उसके कारण मसूड़ो में तकलीफ शुरू हो जाती हैं| जिसके कारण दांत में दर्द शुरू हो जाता हैं| और फिर ये समस्या बढ़ती ही जाती हैं यदि इसका समय से इलाज़ न किया जाएँ|

आज के समय में ज्यादातर लोगो से यदि आप बात करेंगे तो आपसे बड़ा खुश होकर कहते हैं, अरे हमारी तो जाड़ ही नहीं हैं| और भी भी कम उम्र में, यदि आप चाहते हैं की आपके साथ ये समस्या न हो, या इसके कारण आपके बच्चे परेशान न हो, तो इसके उपचार के लिए आपको अपने दांतो की साफ़ सफाई काध्यान रखना चाहिए| जैसे कि बिना ब्रश किये सुबह कुछ न खाएं, और रात में खाना खाने के बाद ब्रश जरूर करें| ऐसा करने से आपकी इस परेशानी का समाधान हो जायेगा|

तो आइये हम, आज आपकोइस समस्या के क्या कारण होते हैं, और इससे बचने के उपचार बताते हैं, जो की मजबूत दांतो के लिए बहुत जरुरी हैं| साथ ही आपकी मुस्कराहट को भी दांत  बहुत अच्छा बनाते हैं, तो क्या आप चाहते हैं की आपकी मुस्कराहट ख़राब हो, नहीं, तो इन तरीको का इस्तेमाल करें| जिससे आपके दांतो के दर्द को दूर करने में मदद मिल सकें और साथ ही पहले से ही अपने दांतो की साफ़ सफाई का ध्यान रखें, ताकि आपके साथ ये समस्या हो ही न, तो आइये जानते हैं दांतो के दर्द के कारण, व् उपचार जो की इस प्रकार हैं|

दांतो में दर्द के कारण:-

  • दांतो में दर्द रहने का सबसे बड़ा कारण होता हैं, दांतो की साफ सफाई का ध्यान न रखना|
  • दांतो में ब्रश न करने के कारण भी दांतो में दर्द रहता हैं|
  • दांतो में दर्द का एक कारण ज्यादा मीठे का सेवन होता हैं|
  • दांतो में कैविटी के जमने के कारण दांतो ने दर्द की समस्या हो जाती हैं|
  • ज्यादा गरम ठन्डे का सेवन एक साथ करने से भी दांत में दर्द की परेशानी हो जाती हैं|
  • ज्यादा तेजी से ब्रश करने से भी मसूड़ो में दर्द होने लगता हैं|

दांत में दर्द होने पर करें ये उपचार:-

लौंग का सेवन करें:-

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सब्जियों में स्वाद के साथ दातो का खेल रखने के लिए भी लौंग बहुत काम आता हैं| साथ ही ये शरीर के लिए भी बहुत फायदेमंद होता हैं| दांतो में दर्द का कारण बैक्टीरिया के कारण जमने वाली कैविटी होती हैं| जिसके कारण दातो में दर्द होता हैं, और लौंग में वो गुण होते हैं, जो बैक्टीरिया को ख़त्म करने में आपकी मदद करता हैं| इसीलिए दांत के जिस हिस्से में दर्द हो वह पर आप लौंग रख कर दबा दे, थोड़ी ही देर में आपको आराम मिलेगा, बच्चे कई बार इसे नहीं कर पाते हैं, तो आप लौंग के तेल को उस स्थान पर लगाएं जहाँ दर्द हैं, बड़े भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं इससे भी आपको आराम मिलता हैं|

हींग का सेवन करें:-

हींग का सेवन करने से भी दांत में होने वाले दर्द से राहत मिलती हैं| क्योंकि हींग भी दांतो में होने वाले बैक्टीरिया को ख़त्म करने में मदद करता हैं| इसका उपयोग आप मौसमी के या नीबू के रस में कर सकते हैं| इसके उपयोग के लिए आप थोड़ी सी हींग को अच्छे से नीबू या मौसमी के रस में मिला कर तैययर कर लें| उसके बाद उसमे रुई को डाल कर अच्छे से भिगाकर उसे अपने उस दांत में रखें जहाँ पर आपको दर्द हो रहा हैं| थोड़ी ही देर में आपको इस समस्यस से आराम मिलेगा|

सरसो के तेल का करें इस्तेमाल:-

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सरसो के तेल का इस्तेमाल करने से आपके दांतो का रंग भी साफ़ किया जाता हैं| और यदि आप दांत में होने वाले दर्द की समस्या से परेशान हैं तो इस परेशानी से बचने के लिए सरसो के तेल में नमक मिलाकर अच्छे से दांतो में रगड़े, ऐसा करने से आपको दांत में हो रहे दर्द की समस्या से राहत मिलेगी| और आपको हो सकें तो ये रोजाना करना चाहिए, क्योंकि इसके कारण दांतो में होने वाली कोई भी समस्या नहीं पनपती हैं| और इसके बाद आप नमक वाले गुनगुने पानी से कुल्ला करें| ऐसा करने से आपको जरूर राहत मिलेगी|

लहसुन का इस्तेमाल करे:-

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लहसुन के इस्तेमाल से भी दांतो में होने दर्द की समस्या से राहत दिलाने में बहुत मदद करता हैं| लहसुन को नमक में अच्छे से डुबोकर अपने दांतो से चबाएं| इससे भी दांत में होने वाले दर्द से राहत मिलती हैं| साथ ही रोजाना ऐसा करने से दांतो में होने वाले दर्द से राहत के साथ दांत भी मजबूत होते हैं| सुबह उठकर यदि आप रोजाना ऐसा करते हैं तो दांत के दर्द से राहत मिलती हैं|

प्याज का सेवन करें:-

प्याज़ सब्ज़ी का जायका बढ़ाने में जितनी मदद करता हैं| उतनी ही मदद दांत के दर्द से आराम दिलाने में करता हैं| प्याज का सेवन करने से मुह में होने वाले कीटाणु मर जाते हैं| जिससे बैक्टेरिया नहीं जमता हैं| और दांत में होने वाला दर्द भी नहीं होता हैं| इसीलिए प्याज का सेवन तो आप रोजाना कर सकते हैं, साथ ही जब भी आपको दांत में दर्द हो, तो अच्छे से प्याज को चबाकर उसका सेवन करना चाहिए| आपको तुरंत आराम मिलेगा|

काली मिर्च पाउडर का इस्तेमाल करें:-

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काली मिर्च पाउडर का इस्तेमाल करने से भी आपको दांत में होने वाले दर्द की समस्या से राहत मिलती हैं| इसके उपयोग के लिए आप काली मिर्च पाउडर में थोड़ा सा नमक मिलाकर दांत में उस स्थान पर लगाएं जहाँ आपको दर्द हो रहा हो| यदि आप ऐसा करते हैं तो आपको तुरंत ही आराम मिलता हैं, साथ ही आप चाहिए तो ये समस्या आपको न हो, तो एक हफ्ते में एक बार इस तरीके को दोहरा सकते हैं|

बर्फ का इस्तेमाल करें:-

बर्फ ठंडी होती हैं| परंतु दांत के दर्द में बहुत आरामदायक भी होती हैं| इसीलिए यदि आपको दांत में दर्द की समस्या होती हैं| तो इस समस्या से आराम पाने के लिए आप बर्फ की सिकाई कर सकती हैं| यदि आप दिन में तीन से चार बार बर्फ की सिकाई करते हैं| तो आपको दांतो में होने वाले दर्द की समस्या से राहत मिलता हैं| और साथ ही आपको आराम भी आ जाता हैं| आप चाहिए तो बाहर कपडे में बांध कर भी मसूड़ो पर इसे लगा सकते हैं|

दांत के दर्द से बचने के अन्य उपाय:-

  • दांत की साफ़ सफाई का ध्यान रखें|
  • नीम का इस्तेमाल करें|
  • आलू की स्लाइस को दांत के दर्द वाले भाग पर थोड़ी देर के लिए रखें आपको जरूर आराम मिलेगा|
  • नीबू का इस्तेमाल करें|
  • रुई को ब्रांडी में डुबोएं और दांतों में दर्द वाले स्थान पर लगाएं, इससे भी दांत का दर्द मे राहत मिलती है|
  • हल्दी और भूनी हुई फिटकरी के पाउडर का मंजन करने से दाँत दर्द मे राहत मिलती है|
  • नमक के पानी से दातो की सफाई करें|
  • आम के पत्तो को चबाएं, ये भी दांत के दर्द से राहत दिलाती हैं|
  • रात के समय मीठा खाकर न सोएं|
  • ब्रश कम से कम दिन में दो बार करें|
  • गरम ठन्डे का सेवन एक साथ न करें|
  • आइस का इस्तेमाल करें|
  • सरसो के तेल का इस्तेमाल करें|

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