प्रेगनेंसी के आठवें महीने में महिला किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए

प्रेगनेंसी के आठवें महीने में गर्भ में शिशु का शारीरिक विकास तेजी से बढ़ रहा होता है। साथ ही महिला का पेट भी पूरी तरह बाहर आ जाता है। और वजन बढ़ने के कारण महिला को सांस लेने में तकलीफ, सोने में परेशानी, सूजन की समस्या, कब्ज़ के कारण दिक्कत, पीठ व् पेट के निचले हिस्से में दर्द, स्तनों में से रिसाव, थोड़ा थोड़ा संकुचन, बार बार यूरिन पास करने की इच्छा, जैसी दिक्कतें होती है। लेकिन इन परेशानियों के होने की वजह से आपको अपनी केयर में किसी तरह की लारपरवाही नहीं करनी चाहिए।

क्योंकि प्रेगनेंसी का आठवां महीना आने के बाद आपके बच्चे के जन्म लेने में बहुत कम वक्त ही रह जाता है। ऐसे में इस दौरान बरती गई थोड़ी सी लापरवाही आपको और बच्चे दोनों को परेशान कर सकती है। ऐसे में प्रेगनेंसी के आठवें महीने में महिला को अपनी ज्यादा अच्छे से केयर करनी चाहिए ताकि महिला व् बच्चे को कोई परेशानी न हो।

क्या खाएं क्या नहीं

प्रेगनेंसी के आठवें महीने में महिला को विटामिन्स, आयरन, फाइबर, प्रोटीन जैसे पोषक तत्वों से भरपूर आहार लेना चाहिए। साथ ही महिला को कैफीन, नशे युक्त पदार्थ, कच्चा अंडा, कच्चा मास, मर्करी युक्त मछली, कच्चा दूध, कच्ची व् बिना धुली सब्जियों व् फलों का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके अलावा महिला को तरल पदार्थ जैसे की पानी, जूस, नारियल पानी आदि का भी भरपूर सेवन करना चाहिए। यदि खान पान से जुडी इन बातों का ध्यान महिला आठवें महीने में रखती है तो ऐसा करने से महिला को फिट रहने में मदद मिलती है।

उठने बैठने की पोजीशन

वजन बढ़ने और पेट बाहर आने के कारण महिला को उठने बैठने में दिक्कत हो सकती है साथ ही महिला यदि गलत पोजीशन या तेजी से उठती बैठती तो इस कारण महिला को दिक्कत हो सकती है। ऐसे में आठवें महीने में महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए और महिला को अपने उठने बैठने का ध्यान रखना चाहिए। इसके अलावा महिला को बहुत देर तक एक ही पोजीशन में नहीं बैठना चाहिए साथ ही ऐसी किसी भी पोजीशन में नहीं बैठना चाहिए जिसमे आपके पेट, पैर आदि पर दबाव पड़े।

आरामदायक कपडे व् जूते चप्पल

गर्भावस्था के आठवें महीने में महिला को स्वस्थ रहने के लिए अपने पहनावें का भी अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। जैसे की खुले व् आरामदायक कपडे पहनने चाहिए। साथ ही महिला को आरामदायक जूते चप्पल भी पहनने चाहिए ताकि महिला को गिरने या फिसलने का डर न रहे।

टैंशन न लें

डिलीवरी को लेकर, बच्चे के विकास को लेकर, शारीरिक परेशानियों की वजह से महिला को प्रेगनेंसी के आठवें महीने में बिल्कुल भी तनाव नहीं लेना चाहिए। क्योंकि तनाव लेने के कारण महिला की दिक्कतें बढ़ सकती है। ऐसे में गर्भावस्था के आठवें महीने में फिट रहने के लिए महिला को टेंशन नहीं लेनी चाहिए और खुश रहना चाहिए। साथ ही अपनी सोच को सकारात्मक रखना चाहिए।

वजन का ध्यान रखें

गर्भावस्था के आठवें महीने में महिला की भूख ज्यादा बढ़ सकती है ऐसे में महिला को अपने वजन का अच्छे से ध्यान रखना है। क्योंकि वजन यदि जरुरत से ज्यादा बढ़ जाता है तो महिला की कॉम्प्लीकेशन्स बढ़ सकती है। ऐसे में फिट रहने के लिए महिला को अपने वजन को नियंत्रित रखना चाहिए।

गर्भ में शिशु की हलचल का ध्यान रखें

आठवें महीने में महिला को अपने शिशु की हलचल का भी ध्यान रखना चाहिए। यदि आपको ऐसा महसूस हो की गर्भ में शिशु कम हलचल कर रहा है तो आपको तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।

ज्यादा देर खड़ी न रहें

प्रेगनेंसी के आठवें महीने में पेट बाहर आने के कारण पैरों तक ब्लड फ्लो अच्छे से न होने के कारण महिला को सूजन की परेशानी हो सकती है। साथ ही महिला यदि बहुत देर तक किसी काम को करते हुए या वैसे खड़ी रहती है। तो इस कारण पैरों पर दबाव अधिक पड़ता है। जिसके कारण महिला को पैरों व् जोड़ो में दर्द महसूस होने के साथ सूजन की समस्या भी बढ़ सकती है। इसके अलावा इस कारण महिला के पीठ में दर्द भी बढ़ सकता है। ऐसे में इन परेशानियों से बचे रहने के लिए महिला को प्रेगनेंसी के दौरान ज्यादा देर तक एक ही जगह पर खड़े नहीं रहना चाहिए।

बाईं और करवट लेकर सोएं

पेट बाहर आने के कारण महिला को इस दौरान सोने में बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन महिला को अच्छी नींद के लिए बाईं को करवट लेकर सोना चाहिए। इस पोजीशन में सोने से महिला को नींद भी अच्छी आती है, बच्चा भी स्वस्थ रहता है और साथ ही पैरों तक ब्लड फ्लो भी अच्छे से होता है। साथ ही एक दिन में महिला को आठ से दस घंटे की नींद भी जरूर लेनी चाहिए।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिनका ध्यान प्रेगनेंसी के आठवें महीने में महिला को रखना चाहिए। ताकि गर्भवती महिला व् बच्चे को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके। और डिलीवरी का समय आने पर आपको किसी तरह की दिक्कत न हो। साथ ही यदि महिला को किसी भी तरह की दिक्कत होती है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए क्योंकि इस दौरान बरती गई थोड़ी सी लापरवाही माँ व् बच्चे दोनों के लिए खतरा हो सकती है। इसके अलावा महिला को अपना रूटीन चेकअप समय से करवाना चाहिए और बिल्कुल भी आना कानि नहीं करनी चाहिए।