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गर्भवती महिला को किस महीने में पति से अलग सोना चाहिए

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गर्भावस्था में सम्बन्ध

प्रेगनेंसी किसी भी महिला के लिए बहुत ही प्यारा अनुभव होता है, और इस अनुभव के दौरान किसी भी तरह की परेशानी न हो इसके लिए गर्भवती महिला को छोटी से छोटी बात का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। प्रेग्नेंट महिला को इस दौरान न केवल अपने उठने बैठने और खाने पीने का ध्यान रखना चाहिए बल्कि अपने पार्टनर से भी थोड़ा दूरी बनाकर रखनी चाहिए, नहीं नहीं हम यह नहीं कह रहे हैं की आप उनसे बात करना बंद कर दें। बल्कि हमारे कहने का मतलब है की पति और पत्नी को सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए। वैसे तो स्वस्थ प्रेगनेंसी होने पर सम्बन्ध बनाया जा सकता है, लेकिन कुछ ऐसा समय भी होता है प्रेगनेंसी के दौरान जिस समय सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए क्योंकि इससे गर्भवती महिला को समस्या हो सकती है।

प्रेग्नेंट महिला को किस महीने में पति से अलग सोना चाहिए

प्रेगनेंसी के दौरान पति और पत्नी बेड शेयर कर सकते हैं, लेकिन एक दूसरे से शारीरिक रूप से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। क्योंकि प्रेगनेंसी में कुछ समय ऐसा आता है जब सम्बन्ध बनाना केवल गर्भवती महिला को ही नहीं बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु को भी नुकसान पहुंचा सकता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी के किस महीने में गर्भवती महिला को पति से अलग सोना चाहिए।

तीसरा महीना

पहले महीने में तो महिला को पता ही नहीं होता है की महिला का गर्भ ठहर गया है, लेकिन दूसरे महीने में पीरियड्स के मिस होने के एक हफ्ते महिला चेक कर सकती है की महिला का गर्भ ठहरा है या नहीं। और यदि महिला का परिणाम पॉजिटिव आता है तो ऐसे में महिला को अपने पार्टनर से दूरी बनाकर रखना चाहिए, और यही राय आपको डॉक्टर भी देते हैं जब आप डॉक्टर से चेक करवाते हैं। क्योंकि यह प्रेगनेंसी का बहुत ही नाजुक समय होता है इस दौरान गर्भाशय पर लगी थोड़ी सी चोट ब्लीडिंग की समस्या या गर्भपात जैसी परेशानी को खड़ी कर सकती है ऐसे में गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी का पता चलने के तीसरे महीने तक सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए।

प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही

गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में शिशु का आकार भी बढ़ जाता है साथ ही महिला के पेट का आकार भी बढ़ जाता है। ऐसे में सम्बन्ध बनाने के कारण पेट पर दबाव पड़ने या गर्भाशय पर चोट लगने खतरा और अधिक हो जाता है। जिसके कारण गर्भाशय में संकुचन होने के चांस बढ़ जाते हैं और तेज गति से गर्भाशय में संकुचन होने के कारण समय पूर्व प्रसव जैसे खतरे का सामना भी करना पड़ सकता है, जिससे शिशु काफी कमजोर होता है। ऐसे में शिशु के गर्भ में बेहतर विकास और डिलीवरी को समय से पहले होने जैसी समस्या से बचने के लिए महिला को अपने पार्टनर के करीब नहीं आना चाहिए।

प्रेगनेंसी में अपने पार्टनर के किन किन परिस्थितियों में करीब नहीं आना चाहिए

गर्भावस्था में कोई एक कारण नहीं होता है जब गर्भवती महिला अपने पार्टनर के करीब नहीं आ सकती है। बल्कि ऐसी बहुत सी परिस्थितियां होती है जब गर्भवती महिला को अपने पार्टनर के करीब आने से बचना चाहिए। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की और कौन से परिस्थितियां है जब गर्भवती महिला को कब अपने पार्टनर के करीब नहीं आना चाहिए।

  • गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान कोई कॉम्प्लीकेशन्स हो तो महिला को अपने पार्टनर के साथ सोने से बचना चाहिए, प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स के होने पर डॉक्टर भी आपको ऐसा करने की सलाह देते है और साथ ही पूरी तरह से बेड रेस्ट करने की सलाह देते हैं।
  • पहले गर्भपात हो चूका हो या गर्भपात का खतरा हो।
  • ब्लीडिंग की समस्या रहती हो।
  • गर्भ में एक से ज्यादा शिशु के होने पर।
  • शिशु के गर्भ में नीचे की तरफ होने पर।
  • बहुत मुश्किलों के बाद गर्भधारण हुआ हो।
  • उम्र अधिक होने पर गर्भधारण करने पर भी प्रेगनेंसी में मुश्किलें बढ़ सकती है ऐसे में भी डॉक्टर सम्बन्ध न बनाने की सलाह देते हैं।
  • सम्बन्ध बनाने पर यदि आपको गर्भवती महिला को कोई तकलीफ या असहज महसूस होता है तो भी प्रेग्नेंट महिला को सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए।
  • पहला शिशु यदि समय से पहले हो गया हो या समय पूर्व प्रसव होने का खतरा हो तो भी महिला को सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए।

तो यह हैं वो समय जब प्रेग्नेंट महिला को अपने पार्टनर के साथ सोने से बचना चाहिए। इसके अलावा यदि आप प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध बनाते भी हैं तो आपको इसके लिए एक बार डॉक्टर से जरूर राय लेनी चाहिए। साथ ही सम्बन्ध बनाते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए की गर्भवती महिला को इससे कोई परेशानी न हो और पेट पर भी जोर न पड़े।