इन छोटी सी भूल से ही सातवें महीने में बच्चा पैदा हो जाता है?

किसी भी महिला के लिए माँ बनने का अहसास बहुत ही खास होता है। और इस दौरान महिला को अपना बहुत ज्यादा ख्याल रखने की जरुरत होती है क्योंकि महिला यदि अपना अच्छे से ध्यान रखती है तो इससे माँ व् बच्चा दोनों को ही स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। लेकिन कई बार प्रेगनेंसी के ऐसी स्थिति आ जाती है की नौ महीने से पहले ही शिशु का जन्म हो जाता है और ऐसी डिलीवरी को प्रीमैच्योर डिलीवरी या समय से पूर्ण डिलीवरी होना कहा जाता है।

वैसे माँ के गर्भ में शिशु का विकास लगभग चालीस हफ़्तों तक होता है और उसके बाद शिशु जन्म लेता है। लेकिन यदि किसी केस में शिशु सैंतीसवें हफ्ते या उससे पहले ही जन्म ले लेता है तो इसे प्रीमैच्योर डिलीवरी कहा जाता है। और कुछ महिला को सातवें महीने में ही लेबर पेन शुश्रु हो जाता है तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको सातवें महीने में डिलीवरी होने या समय से पहले डिलीवरी होने के कुछ कारण बताने जा रहे हैं।

गर्भाशय के कमजोर होने के कारण

कुछ महिलाओं का गर्भाशय कमजोर होता है जिसकी वजह से महिला को गर्भधारण करने में दिक्कत आ सकती है। ऐसे में यदि महिला का गर्भधारण हो भी जाता है तो महिला की समय से पहले डिलीवरी होने की आशंका भी अधिक हो जाती है।

गर्भ में एक से अधिक शिशु का होना

यदि महिला के गर्भाशय में एक से अधिक शिशु होता है तो भी कई बार महिला को समय से पहले ही प्रसव पीड़ा शुरू हो सकती है, एमनियोटिक फ्लूड की थैली फट सकती है, आदि। जिसकी वजह से महिला की डिलीवरी समय से पहले हो जाती है।

उम्र

समय से पहले डिलीवरी होने का एक कारण महिला की उम्र भी हो सकता है। यदि महिला की उम्र अठारह से कम या फिर पैंतीस से ज्यादा होती है। और महिला इस उम्र में गर्भधारण करती है तो ऐसे में भी महिला को समय से पहले डिलीवरी होने के चांस अधिक होते हैं।

नशीले पदार्थों का सेवन

यदि प्रेग्नेंट महिला नशीले पदार्थ जैसे की धूम्रपान, शराब, या अन्य किसी भी तरह ड्रग्स लेती है। तो इन चीजों का सेवन करने के कारण न केवल बच्चे के विकास में कमी आती है बल्कि प्रीमैच्योर डिलीवरी होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

पहले भी प्रीमैच्योर डिलीवरी हुई हो

समय से पहले डिलीवरी होने का एक कारण यह भी होता है की यदि महिला का पहले बच्चा भी समय से पहले पैदा हुआ था तो दूसरी डिलीवरी के समय भी महिला के साथ ऐसा होने के चांस बढ़ जाते हैं।

संक्रमण

यदि प्रेगनेंसी के दौरान किसी कारण माँ या बच्चे किसी को भी कोई संक्रमण हो गया हो और उस संक्रमण का प्रभाव ज्यादा पड़े। तो ऐसा होने पर भी महिला की डिलीवरी से पहले हो सकती है।

वजन

महिला का वजन जरुरत से कम हो या बहुत ज्यादा हो तो इसका असर भी डिलीवरी पर पड़ सकता है और महिला की डिलीवरी समय से पहले होने के चांस बढ़ जाते हैं।

शारीरिक समस्या

प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला को हाई ब्लड प्रैशर, हदय से जुडी समस्या, शुगर या अन्य कोई भी शारीरिक परेशानी अधिक हो तो भी महिला को समय से पहले प्रसव पीड़ा शुरू हो सकती है।

पेट पर दबाव

यदि गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के समय अपना अच्छे से ध्यान नहीं रखती है और ऐसे काम करती है जिससे पेट पर ज्यादा दबाव पड़ता है। जैसे की भारी सामान उठाना, पेट के बल काम करना, पैरों के भार काम करना, लम्बे समय तक खड़े रहना, आदि काम करती है। तो इनके कारण भी महिला को समय से पहले समय से पहले लेबर पेन शुरू हो जाता है।

शिशु का विकास

यदि गर्भ में शिशु का विकास अच्छे से नहीं हो रहा है और शिशु के विकास में किसी तरह की कमी होती है। तो इसके कारण भी महिला की डिलीवरी समय से पहले होने का खतरा होता है।

खून की कमी

प्रेगनेंसी के दौरान महिला के शरीर में खून की मात्रा का सही होना बहुत जरुरी है क्योंकि यदि महिला के शरीर में खून की कमी होती है तो इसके कारण प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स बढ़ जाती है। जिसकी वजह से महिला की डिलीवरी समय से पहले होने का खतरा भी होता है।

एमनियोटिक फ्लूड ज्यादा होना

गर्भाशय में यदि एमनियोटिक फ्लूड की मात्रा बढ़ जाती है और गर्भाशय कसा हुआ सा हो जाता है तो ऐसे केस में भी एमनियोटिक बैग के समय से पहले फटने का खतरा होता है। जिसकी वजह से महिला की डिलीवरी समय से पहले ही हो जाती है।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से महिला की डिलीवरी समय से पहले हो जाती है ऐसे में महिला को प्रेगनेंसी के दौरान अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। ताकि महिला को समय से पहले डिलीवरी होने की समस्या से बचे रहने में मदद मिल सकें।

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