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आपकी डिलीवरी होने वाली है तो महसूस होंगे यह 10 लक्षण?

गर्भावस्था का पूरा समय ऐसा होता है जब महिला किसी न किसी शारीरिक बदलाव, किसी न किसी शारीरिक परेशानी से गुजरती है। ऐसे में महिला जितना प्रेगनेंसी के बारे में जानकारी इक्कठी करती है उतना ही प्रेगनेंसी को आसान बनाने में मदद मिलती है। वैसे तो प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने तक महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है और महिलाएं ऐसा करती भी ताकि माँ और बच्चा दोनों को ही किसी भी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।

लेकिन जैसे ही महिला की डिलीवरी डेट पास आने वाली होती है वैसे ही महिला मानसिक रूप से थोड़ा परेशानी का अनुभव कर सकती है। खासकर जो महिलाएं पहली बार माँ बन रही होती है उन्हें यह दिक्कत ज्यादा हो सकती है। जैसे की उनके मन में कई सवाल आ सकते हैं की कि डिलीवरी होने का वक्त आ गया है इसके बारे में कैसे पता चलेगा, कहीं डिलीवरी में कोई दिक्कत तो नहीं होगी, आदि।

लेकिन महिला को इसमें घबराने कि बिल्कुल भी जरुरत नहीं है। क्योंकि जिस तरह महिला के प्रेग्नेंट होने के कुछ लक्षण होते हैं उसी तरह महिला कि डिलीवरी होने वाली है इसके भी कुछ लक्षण महिला को जरूर महसूस होंगे। तो आइये अब इस आर्टिकल में जानते हैं कि महिला कि डिलीवरी होने वाली है इसके कौन कौन से लक्षण महिला को महसूस हो सकते हैं।

डिलीवरी होने के लक्षण

यदि आपका प्रेगनेंसी का नौवां महिला चल रहा है तो आपको कभी भी डिलीवरी हो सकती है और यदि आपकी डिलीवरी होने वाली तो आपको नीचे दिए गए लक्षणों में से कोई लक्षण महसूस हो सकता है। तो आइये अब उन लक्षणों के बारे में विस्तार से जानते हैं।

पीठ में दर्द

यदि गर्भवती महिला को पीठ में दर्द महसूस हो रहा है और सीने में हल्कापन महसूस हो रहा है। तो आपको इस लक्षण को गंभीरता से लेना चाहिए क्योंकि यह लक्षण इस बात का संकेत होता है की आपका हॉस्पिटल जाने का समय हो गया है। क्योंकि बच्चे का नीचे की तरफ भार पड़ने पर पीठ की मांसपेशियों में खिंचाव ज्यादा हो सकता है जिसकी वजह से महिला को पीठ में ज्यादा दर्द महसूस हो सकता है।

पेट में दर्द

प्रेग्नेंट महिला को यदि पेट में पहले धीरे फिर धीरे धीरे तेज दर्द महसूस हो रहा है तो यह लेबर पेन हो सकता है। या फिर महिला को ऐसा महसूस हो की जैसे महिला को पीरियड्स के दौरान दर्द होता है। तो यह भी डिलीवरी का संकेत होता है ऐसे में महिला को इस लक्षण को बिना अनदेखा किये तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए। क्योंकि यह दर्द इस बता का संकेत होता है की बच्चा अब बहुत जल्दी आने वाला है।

पानी की थैली फटना

गर्भवती महिला के प्राइवेट पार्ट से यदि तरल पदार्थ निकलता हुआ महसूस हो रहा है और ऐसा लग रहा है जैसे वो यूरिन की तरह तेजी से निकल रहा है। तो इसका मतलब यह होता है की पानी की थैली फट चुकी है और अब डिलीवरी किसी भी समय हो सकती है। और महिला को ऐसा महसूस होने पर भी जल्द से जल्द डॉक्टर के पास चले जाना चाहिए।

महिला को पेट के निचले हिस्से में दबाव अधिक महसूस होना

प्रेग्नेंट महिला को यदि ऐसा महसूस हो रहा है की महिला के पेट के निचले हिस्से पर दबाव बढ़ गया है साथ ही यदि महिला उठेगी तो बच्चा गिर जाएगा। तो ऐसा महसूस होने पर भी समझ जाए की बच्चा बाहर आने के लिए पूरी तरह से तैयार है और बिना देरी करते हुए डॉक्टर से मिलें।

यूरिन आने की इच्छा में बढ़ोतरी

डिलीवरी का समय पास आने पर गर्भ में शिशु अपने जन्म लेने की सही पोजीशन में आ जाता है यानी की शिशु का सिर नीचे की तरफ और पैर ऊपर की तरफ हो जाते हैं। और जैसे जैसे पेट के निचले हिस्से पर दबाव बढ़ जाता है वैसे वैसे महिला के यूरिन पास करने की इच्छा में भी बढ़ोतरी होने लगती है। ऐसे में यदि महिला को यह लक्षण महसूस हो तो महिला को समझ जाना चाहिए की महिला की डिलीवरी होने वाली है।

पेट को शेप बदलना

प्रसव का समय नजदीक आने पर आपको अपना पेट ऊपर से खाली और नीचे की तरफ ज्यादा झुका हुआ महसूस हो सकता है। यदि महिला को अपने पेट की शेप में यह बदलाव देखने को मिल रहा है तो समझ जाइये की अब डिलीवरी होने वाली है।

गर्भ में शिशु की मूवमेंट में कमी आना

गर्भ में पल रहा शिशु जब अपने जन्म लेने की सही पोजीशन में आता है तो उसके बाद शिशु की गर्भ में मूवमेंट महिला को पहले की अपेक्षा कम महसूस हो सकती है। ऐसे में महिला को जब भी ऐसा महसूस हो समझ जाना चाहिए की डिलीवरी का समय अब पास है लेकिन ध्यान रखें की थोड़ी बहुत मूवमेंट बच्चे की जरूर होती है। ऐसे में मूवमेंट यदि बिल्कुल भी महसूस नहीं हो तो यह दिक्कत की बात हो सकती है।

पेट खराब होना

यदि प्रेगनेंसी के आखिरी समय में आने पर महिला को पेट में दर्द होने के साथ कब्ज़, डायरिया यानी दस्त जैसी परेशानी अधिक होने लगती है। तो समझ जाइये की यह भी आपके आने वाले बच्चे के जन्म का संकेत है।

मूड स्विंग्स अधिक होना

गर्भवती महिला को डिलीवरी का समय पास आने पर मूड स्विंग्स भी अधिक हो सकते हैं। जैसे की महिला ज्यादा चिड़चिड़ाने लगती है, महिला तनाव में आ सकती है आदि। इसका कारण डिलीवरी को लेकर होने वाली टेंशन भी हो सकता है।

भावनाओं में बदलाव

गर्भवती महिला को माँ बनने का अहसास तभी से महसूस होने लगता है जब गर्भ में शिशु आता है यानी की महिला की प्रेगनेंसी कन्फर्म होती है। ऐसे में बच्चे का जन्म होने वाला है इसका संकेत महिला मानसिक रूप से, अपनी भावनाओं से भी मिलने लगता है, क्योंकि महिला को अंदर ही अंदर यह महसूस होने लगता है की अब बच्चा बाहर आने के लिए पूरी तरह तैयार है।

तो यह हैं वो लक्षण जो महिला की डिलीवरी होने वाली है यह आपको बताते हैं। ऐसे में यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी प्रसव से जुडी यानी कि डिलीवरी से जुडी यह जानकारी पता होनी चाहिए क्योंकि जितनी ज्यादा जानकारी होती है उतना ही प्रसव को आसान बनाने में मदद मिलती है। इसके अलावा यदि आपको कभी भी कुछ भी दिक्कत हो या पूछना हो तो आप उसे बेझिझक अपने डॉक्टर से पूछें ताकि आपको मानसिक रूप से रिलैक्स रहने में मदद मिल सके।

Signs of delivery during pregnancy

वजन कम करने के तरीके

आज कल गलत जीवनशैली, गलत दिनचर्या, गलत आदतों का शिकार होने के कारण अधिकतर लोग एक मिलती जुलती समस्या से परेशान हैं और वो समस्या है बढ़ा हुआ वजन। बढे वजन के कारण आपकी पर्सनैलिटी पर ही बुरा असर नहीं पड़ता है बल्कि इसकी वजह से शरीर में सौ तरह की बीमारियां भी लग जाती है, जो आपको समय से पहले बूढ़ा व् बीमार बना देती है। और फिर लोग वजन घटाने के लिए डाइट करते है।

जिससे वो पतले तो हो जाते हैं लेकिन उनके शरीर में कमजोरी आ जाती है और उसके बाद जब वो फिर से खाना शुरू करते हैं तो उनका वजन और तेजी से बढ़ जाता है। क्या आप भी बढे हुए वजन के कारण परेशान हैं? यदि हाँ, तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको वजन कम करने के कुछ ऐसे नुस्खे बताने जा रहे हैं जो आपके वजन को कम करने के साथ आपको फिट रखने में भी मदद करते हैं।

खाना खाने से जुडी इन बातों का ध्यान रखें

वजन कम करने के लिए आपके खान पान का ध्यान रखना सबसे जरुरी होता है। और इसके लिए ध्यान रखें की आप उतना ही खाएं जितना आप आसानी से हज़म कर सकते हैं भूख से ज्यादा बिल्कुल नहीं खाएं। इसके अलावा वजन नियंत्रित रखने के लिए आपको सुबह का नाश्ता ऐसा करना चाहिए जिससे आपको पूरा दिन एनर्जी मिलें, उसके बाद दोपहर के खाने में आप सुबह के नाश्ते से कम खाएं और फिर रात का भोजन सबसे हल्का लें। साथ ही ध्यान रखें की सोने के दो घंटे पहले आप रात का डिनर कर लें।

खाने को अच्छे से चबाकर खाएं, खाने में ज्यादा लम्बा गैप नहीं खाएं दिन में तीन बड़े मील लेने के साथ फलों का भी सेवन करें। जितना हो सके रात को उबला हुआ खाएं, जिन खाद्य पदार्थों को खाने से गैस बनती है उनका सेवन नहीं करें, ज्यादा मसाले तेल, जंक फ़ूड का सेवन नहीं करें, आदि। यदि आप अपने खान पान से जुडी इन बताओं का ध्यान रखते हैं तो आपको अपने वजन को नियंत्रित रखने व् कम करने में मदद मिलती है।

गर्म पानी

दिन भर में आठ से दस गिलास पानी पीना बहुत जरुरी होता है। इससे आपको स्वस्थ रहने में मदद मिलती है लेकिन वजन कम करने के लिए आपको नोर्मल पानी की जगह गुनगुना पानी पीना चाहिए साथ ही दिन भर में तीन से चार गिलास गर्म पानी पीने चाहिए जैसे की आप गर्म चाय पीते हैं। गर्म पानी शरीर में जमे फैट को पिघलाने और मेटाबोलिज्म को बेहतर रखने में मदद करता है जिससे आपका वजन कम होता है। लेकिन ध्यान रखें खाना खाने के बीच और बाद में कभी पानी नहीं पीएं या तो खाना खाने से आधा घंटा पहले या आधा घंटा बाद में पानी पीएं।

ग्रीन टी

ग्रीन टी की मदद से भी वजन को कम करने में मदद मिलती है क्योंकि ग्रीन टी पीने से मेटाबोलिज्म बेहतर रहता है जिससे वजन को कण्ट्रोल रहने में मदद मिलती है। ऐसे में दिन में चाय कॉफ़ी पीने की बजाय वजन कम करने के लिए दो कप ग्रीन टी पीनी चाहिए।

व्यायाम करें

वजन कम करने के लिए खान पान का ध्यान रखने के साथ व्यायाम करना भी जरुरी होता है। क्योंकि व्यायाम करने से शरीर के हिस्सों पर जमा फैट पसीने के रूप में बाहर निकलता है जिससे वजन कम करने में मदद मिलती है। लेकिन ध्यान रखें की उतना ही व्यायाम करें जिससे आपको दिक्कत नहीं हो। साथ ही आप चाहे तो योगासन भी कर सकते हैं क्योंकि योगासन करने से भी वजन को कम करने में मदद मिलती है।

वाक करें

यदि आप व्यायाम नहीं कर सकते हैं तो दिन भर में सुबह शाम दोनों समय कम से कम आधे घंटे तेजी से वाक करें। और ऐसा एक दिन या एक हफ्ते नहीं बल्कि तब तक करें जब तक की आपको कोई फ़र्क़ नज़र नहीं आएं। वाक करने से वजन कण्ट्रोल करने के साथ वजन को कम करने में मदद मिलती है।

मोटापा कम करने के घरेलू नुस्खे

वजन कम करने के लिए आप चाहे तो कुछ घरेलू नुस्खों को भी ट्राई कर सकते हैं। जैसे की:

दालचीनी: दालचीनी का एक टुकड़ा एक गिलास पानी में डालकर अच्छे से उबाल लें उसके बाद रात को सोने से पहले और सुबह उठने के बाद खाली पेट उस पानी को छानकर उसमे एक चम्मच शहद डालकर पीएं।

जीरा: रात को एक गिलास पानी में एक चम्मच जीरा भिगोकर रख दें उसके बाद सुबह उस पानी को आधा रहने तक उबाल लें। फिर उसे एक कप में छान लें और थोड़ा निम्बू का रस मिलाकर पीएं।

निम्बू पानी: रोजाना सुबह उठने के बाद खाली पेट एक गिलास गुनगुने पानी में एक निम्बू का रस और एक चम्मच शहद डालकर पीएं।

सेब का सिरका: एक गिलास पानी में एक चम्मच सेब का सिरका एक और एक निम्बू का रस मिलाकर पीएं इससे भी शरीर में जमे फैट को कम करने में मदद मिलती है।

इलायची: रात को सोने से पहले दो इलायची खाएं और एक गिलास गुनगुना पानी पीएं इससे भी वजन कम करने में मदद मिलती है।

सौंफ: सुबह खाली पेट सौंफ का पानी पीने से भी मोटापा कण्ट्रोल होता है।

आंवला: आंवला खाने से मेटाबोलिज्म अच्छा रहता है जिससे वजन को नियंत्रित रहने में मदद मिलती है।

पुदीना: खाना खाने के आधे घंटे बाद गुनगुने पानी में आधा चम्मच पुदीने का रस मिलाकर पीएं इससे पाचन करिए बेहतर रहती है जिससे वजन को नियंत्रित रहने में मदद मिलती है।

वजन कम करने के लिए इन टिप्स का ध्यान रखें

  • जंक फ़ूड का सेवन करने से बचें।
  • धूम्रपान व् शराब का सेवन नहीं करें।
  • नींद भरपूर लें।
  • ज्यादा टेंशन नहीं लें क्योंकि ज्यादा टेंशन लेने से भी वजन कम करने में मदद मिलती है।
  • जरुरत से ज्यादा मीठा नहीं खाएं।
  • ठंडी चीजों का सेवन अधिक नहीं करें।
  • खाना खाने के बाद तुरंत नहीं सोएं।
  • जरुरत से ज्यादा नहीं खाएं यानी की ऐसा नहीं है की पेट भर गया है और आप फिर भी सोचें की कोई नहीं खा लेते हैं क्योंकि जरुरत से ज्यादा खाना खाने से बहुत तेजी से वजन बढ़ता है।
  • डिब्बाबंद आहार नहीं खाएं।

तो यह हैं कुछ आसान टिप्स जो वजन को कम करने में मदद करते हैं लेकिन ध्यान रखें की आपको इन टिप्स को रोजाना फॉलो करना है ताकि आपको जल्दी फायदा मिल सकें साथ ही स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

Weight Loss Tips

पिम्पल के काले दाग हटाने के उपाय

केवल लड़कियों या महिलाओं को ही नहीं बल्कि लड़कों व् पुरुषों को भी चेहरे पर पिम्पल्स की समस्या होना आम बात है। और पिम्पल्स तो तीन से चार दिन में ठीक भी हो जाते हैं लेकिन कई बार इनके निशान छूट जाते हैं जो की चेहरे को काफी भद्दा कर देते हैं। और जब चेहरे पर दाग हो और आपको किसी पार्टी या फंक्शन में जाना हो तो इन दाग की वजह से आपके आत्मविश्वास व् सुंदरता दोनों में कमी आ सकती है।

इस परेशानी को कम करने के लिए मार्किट में आपको बहुत से प्रोडक्ट्स भी मिल जाते है लेकिन केमिकल वाली चीजों का अधिक इस्तेमाल करने के कारण कई बार आपकी परेशानी कम होने की बजाय बढ़ जाती है। साथ ही यह प्रोडक्ट्स काफी महंगे भी हो सकते हैं। तो लीजिये आज इस आर्टिकल में हम आपको पिम्पल के कारण स्किन पर होने वाले काले दाग से आप किस तरह निजात पा सकते हैं उसके बारे में बताते हैं।

क्यों हो जाते हैं पिम्पल्स के कारण काले दाग?

  • यदि आप चेहरे पर होने वाले पिम्पल्स को अपने नाखूनों से फोड़ देते हैं तो इसकी वजह से आपको पिम्पल्स अधिक होने और पिम्पल्स के निशान छूटने की समस्या अधिक होती है।
  • ऐसा कहा जाता है की पिम्पल्स को यदि बार बार हाथ लगाया जाये तो इसकी वजह से भी पिम्पल्स निशान छोड़ देते हैं।
  • कई बार आप पिम्पल्स से बचाव के लिए प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं और वो प्रोडक्ट्स आपकी स्किन को सूट नहीं करते हैं जिसकी वजह से भी पिम्पल्स के दाग रह जाते हैं।

पिम्पल्स के काले दाग हटाने के उपाय

चेहरे पर होने वाले पिम्पल्स की समस्या और उनके कारण होने वाले काले दाग की समस्या कोई ऐसी समस्या नहीं है की जिसका कोई इलाज़ नहीं हो। बल्कि कुछ आसान घरेलू नुस्खों को ट्राई करके आप आसानी से इस समस्या से निजात पा सकते हैं। तो आइये अब उन नुस्खों के बारे में जानते हैं।

मसूर दाल का पैक

मसूर दाल का पैक बनाने के लिए आप एक कटोरी दूध में दो से तीन चम्मच मसूरदाल को को भिगोकर रातभर के लिए रख दें। उसके बाद सुबह उठकर इस मिश्रण को पीस लें अब इस पेस्ट को अपने चेहरे पर लगाएं। फिर आधे घंटे के बाद चेहरे को साफ़ पानी से धो लें। यदि आपको ऐसा लगे की दूध ज्यादा है तो उसे अलग कर लें ताकि पेस्ट एक मास्क की तरह बन पाएं। एक हफ्ते तक नियमित इस पेस्ट को अपने चेहरे पर लगाएं आपको जरूर फायदा दिखाई देगा।

निम्बू का रस

निम्बू के रस का इस्तेमाल करके भी आप इस समस्या से निजात पा सकते हैं। इसके लिए आप निम्बू के रस को चेहरे पर लगाएं और पांच से साथ मिनट के बाद चेहरे को गुनगुने पानी से धो लें। ऐसा कुछ दिनों तक रोजाना करें आपको जरूर फायदा मिलेगा। इसके अलावा एक बात का ध्यान रखें की निम्बू के रस को ज्यादा देर तक अपने चेहरे पर नहीं छोड़ें क्योंकि इसकी वजह से स्किन में जलन महसूस होने लग सकती है।

एलोवेरा जैल

एलोवेरा जैल स्किन सम्बन्धी परेशानियों से निजात पाने का बेहतरीन उपाय है। ऐसे में स्किन पर पिम्पल्स के कारण होने वाले निशान की समस्या को दूर करने के लिए आप एलोवेरा जैल का इस्तेमाल कर सकते है। इसके लिए आप एलोवेरा जैल के पत्ते को तोड़कर ताजा जैल निकाल लें उसके बाद इस जैल को चेहरे पर लगाएं और सूखने के बाद मुँह को धो लें। कुछ दिनों तक ऐसा रोजाना करें आपको फ़र्क़ जरूर दिखाई देगा। यदि आपके घर एलोवेरा का पौधा नहीं है तो आप मार्किट से पैकेट वाला जैल भी ला सकते है।

गुलाब जल

गुलाब जल को रुई की मदद से रोजाना रात को सोने से पहले चेहरे पर लगाएं खासकर काले निशान पर, उसके बाद सुबह उठकर चेहरे को धो लें। कुछ दिनों तक नियमित इस उपाय को करने से आपको इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलेगी।

कच्चा दूध

पिम्पल्स के कारण चेहरे पर होने वाले काले निशान की समस्या से निजात पाने के लिए आप कच्चे दूध का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। इसके लिए आप रुई की मदद से कच्चे दूध को चेहरे पर लगाएं और इसे रातभर के लिए चेहरे पर छोड़ दें। फिर सुबह उठकर पानी से मुँह धो लें। ऐसा कुछ दिनों तक रोजाना करें ऐसा करने से आपको चेहरे पर होने वाले काले निशान की समस्या से निजात पाने के साथ चेहरे को ग्लोइंग बनाने में भी मदद मिलेगी।

आलू

आलू को कसकर या पीसकर उसका रस निकाल लें उसके बाद इस रस को रुई की मदद से चेहरे पर होने वाले काले निशान पर लगाएं। उसके बाद इसे दस से पंद्रह मिनट के लिए छोड़ दें। फिर साफ़ पानी से चेहरे को धो लें ऐसा कुछ दिनों तक रोजाना करने से आपको चेहरे पर होने वाले काले निशान की समस्या से निजात पाने में मदद मिलेगी।

टमाटर

टमाटर का इस्तेमाल करने से भी आप इस परेशानी से निजात पा सकते हैं इस उपाय को करने के लिए आप टमाटर की एक स्लाइस को काटकर उन निशान पर अच्छे से मसाज करें। फिर थोड़ी देर के लिए इसे सूखने के लिए छोड़ दें। थोड़ी देर बाद साफ़ पानी से मुँह धो लें ऐसा कुछ दिनों तक रोजाना करें आपको अपने चेहरे में आने वाला वाला फ़र्क़ साफ़ नज़र आएगा।

नारियल तेल

नारियल तेल का इस्तेमाल करने से भी आप चेहरे पर होने वाले काले निशान की समस्या से निजात पा सकते हैं। इसके लिए आप रात को सोने से पहले थोड़ा सा नारियल का तेल लें और उसे अपनी हथेलियों पर रगड़ें और अपने चेहरे पर लगाएं। फिर इसे रातभर के लिए चेहरे पर छोड़ दें उसके बाद सुबह उठकर चेहरे को धो लें। ऐसा कुछ दिनों तक नियमित करें इससे आपकी स्किन की कोमलता को बरकरार रहने और चेहरे पर होने वाले दाग धब्बों की समस्या से निजात पाने में भी मदद मिलेगी।

सेब का सिरका और शहद

दो चम्मच शहद में सेब का सिरका मिलाएं और एक पेस्ट तैयार करें अब इस पेस्ट को चेहरे पर होने वाले काले दाग पर लगाएं और उसके बाद चेहरे को सूखने के लिए छोड़ दें। फिर दस से पंद्रह मिनट के बाद चेहरे को गुनगुने पानी से धो लें ऐसा करने से आपको चेहरे पर होने वाले काले दाग की समस्या से निजात पाने में मदद मिलेगी।

बेसन

दो चम्मच बेसन में गुलाब जल और आधे निम्बू का रस मिलाकर एक पेस्ट बनाएं उसके बाद इस पेस्ट को चेहरे पर लगाएं। पेस्ट लगाने के बाद चेहरे को सूखने के लिए छोड़ दें सूखने के बाद चेहरे को साफ़ पानी से धो लें। ऐसा करने से आपके चेहरे पर होने वाले काले दाग से निजात पाने के साथ चेहरे को ग्लोइंग बनाने में भी मदद मिलती है।

संतरे के छिलके का पाउडर

सबसे पहले कुछ संतरे के छिलकों को धूप में अच्छे से सूखा लें और उसका पाउडर बनाएं। उसके बाद एक कटोरी में दो चम्मच संतरे के छिलकों का पाउडर लें और उसके बाद इसमें थोड़ा सा शहद मिलाएं। उसके बाद इस पेस्ट को चेहरे पर लगाएं और फिर चेहरे को सूखने के लिए छोड़ दें। थोड़ी देर बाद गुनगुने पानी से चेहरे को साफ़ कर लें ऐसा करने से आपको चेहरे पर होने वाले काले निशान की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

चन्दन

चन्दन पाउडर में कच्चा दूध मिलाकर एक पेस्ट बनाएं अब इस पेस्ट को चेहरे पर लगाएं। सूखने के बाद चेहरे को साफ़ पानी से धो लें। ऐसा कुछ दिनों तक रोजाना करें आपको जरूर इसका असर अपने चेहरे पर दिखाई देगा।

दही

एक कटोरी में दो चम्मच बेसन, चुटकी भर हल्दी और एक से दो चम्मच दही मिलाकर एक पेस्ट बनाएं। अब इस पेस्ट को चेहरे पर लगाएं और सूखने के लिए छोड़ दें। सूखने के बाद चेहरे को साफ़ पानी से धो लें ऐसा हफ्ते में दो से तीन बार जरूर करें ऐसा करने से भी आपको पिम्पल्स के कारण चेहरे पर होने वाले काले निशान से निजात पाने में मदद मिलेगी।

तो यह हैं कुछ उपाय जिन्हे ट्राई करने से आप पिम्पल्स के कारण होने वाले काले निशान की समस्या से निजात पा सकते हैं। यदि आपके चेहरे पर भी निशान हैं तो आप भी कुछ दिनों तक ऊपर बताएं गए किसी भी तरीके को ट्राई करें आपको जरूर फायदा मिलेगा।

Remedies to remove black marks of pimples

सम्बन्ध बनाने के बाद खुजली और जलन की समस्या से कैसे पाएं निजात?

शादीशुदा कपल के लिए सम्बन्ध बनाना केवल उन्हें शारीरिक रूप से ही नहीं करीब लाता है बल्कि वह सम्बन्ध बनाने से मानसिक और इमोशनल रूप से भी करीब आते हैं। लेकिन कई बार सम्बन्ध बनाने में महिला या पुरुष को कुछ परेशानियां भी हो जाती है जिनके बारे में कई बार लोग बात भी नहीं करते हैं और फिर उसकी वजह से समस्या बड़ी हो जाती है। और इन्ही परेशानियों की वजह से वो सम्बन्ध बनाने से परहेज करने लगते हैं जैसे की कई बार केवल महिलाओं को ही नहीं बल्कि पुरुषों को भी सम्बन्ध बनाने के बाद खुजली व् जलन की समस्या हो जाती है। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपसे सम्बन्ध बनाने के बाद खुजली व् जलन की समस्या क्यों होती है उसके बारे में बात करने जा रहे हैं।

सम्बन्ध बनाने के बाद खुजली व् जलन होने के कारण

  • यदि महिला या पुरुष दोनों में से कोई भी यौन संचारित रोग से पीड़ित है तो इसकी वजह से सम्बन्ध बनाने के बाद खुजली व् जलन की समस्या हो सकती है।
  • प्राइवेट पार्ट की साफ़ सफाई का ध्यान न रखने के कारण भी सम्बन्ध बनाने के बाद इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
  • कई कपल्स सम्बन्ध बनाते समय सुरक्षा का इस्तेमाल करते हैं और यह अलग अलग तरह की आती है कई बार हो सकता है की वो आपको सूट नहीं करें। ऐसा होने के कारण भी खुजली व् जलन की समस्या हो सकती है।
  • पीरियड्स के दौरान महिला यदि सम्बन्ध बनाती है तो इसकी वजह से भी महिला को यह परेशानी हो सकती है।
  • प्राइवेट में इन्फेक्शन होने के बाद भी यदि सम्बन्ध बनाया जाये तो इसकी वजह से भी खुजली व् जलन की समस्या होने के साथ सूजन भी बढ़ सकती है।
  • यदि आपको यूरिन इन्फेक्शन हैं और उसके बाद भी आप सम्बन्ध बना रहे हैं तो भी आपको यह समस्या हो सकती है।

सम्बन्ध बनाने के दौरान होने वाली जलन व् खुजली की समस्या से बचने के उपाय

यदि आपको सम्बन्ध बनाने के बाद खुजली व् जलन की समस्या होती है तो आपको इसे अनदेखा न करते हुए तुरंत इसका इलाज करना चाहिए। क्योंकि प्राइवेट पार्ट से जुडी समस्या को यदि अनदेखा किया जाये तो बाद में ये आपके लिए और भी बड़ी परेशानी खड़ी कर सकती है। तो आइये अब जानते हैं कुछ उपाय जो आपको इस परेशानी से बचाने में आपकी मदद कर सकते हैं।

साफ़ सफाई का ध्यान रखे

महिला व् पुरुष दोनों को ही अपने प्राइवेट पार्ट की साफ़ सफाई का ध्यान रखना चाहिए ताकि प्राइवेट पार्ट में होने वाले इन्फेक्शन की समस्या से बचे रहने में मदद मिल सकें। और इसके लिए उन्हें साफ़ इनरवेयर पहनने चाहिए, ज्यादा खुशबूदार चीजों का इस्तेमाल प्राइवेट पार्ट के लिए नहीं करना चाहिए, आदि।

इन्फेक्शन है तो इलाज करवाएं

यदि महिला या पुरुष किसी को भी प्राइवेट पार्ट में इन्फेक्शन है तो पहले आप इन्फेक्शन का इलाज करवाएं और उसके बाद सम्बन्ध बनाएं ऐसा करने से आपको इस समस्या से बचाव में मदद मिलेगी। साथ ही कई बार आपकी वजह से आपके पार्टनर को भी इन्फेक्शन हो जाता है ऐसे में आपके पार्टनर को स्वस्थ रखने के लिए आपको इन्फेक्शन का ट्रीटमेंट जरूर करवाना चाहिए।

सुरक्षा का ध्यान रखें

यदि महिला या पुरुष दोनों में से कोई भी यौन संचारित रोगो से पीड़ित है तो आपको अपने पार्टनर को बचाने के लिए सम्बन्ध बनाते समय सुरक्षा का इस्तेमाल करना चाहिए। यदि आप इस बात का ध्यान रखते हैं तो इससे भी आपको व् आपके पार्टनर को खुजली व् जलन की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

एलर्जी से बचें

आपके द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली सुरक्षा के कारण ही कई बार आपको एलर्जी होने का खतरा रहता है। ऐसे में आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए की आप सुरक्षा इस्तेमाल करने में समझदारी बरतें और आपको सूट होने वाली चीजों का ही इस्तेमाल करें।

पीरियड्स में सम्बन्ध नहीं बनाएं

अगर आपको ऐसा लगता है की आपको पीरियड्स के दौरान सम्बन्ध बनाने से खुजली व् जलन की समस्या होती है। तो आपको पीरियड्स के दौरान सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए।

डॉक्टर से मिलें

यदि आपको सम्बन्ध बनाने के बाद खुजली व् जलन की समस्या अधिक रहती है तो आपको एक बार डॉक्टर से जरूर मिलना चाहिए। ताकि आपको जल्द से जल्द इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिल सकें।

तो यह हैं सम्बन्ध बनाने पर खुजली व् जलन होने के कारण व् इस समस्या से बचाव के उपाय, यदि आप भी इस समस्या से परेशान है। तो आपको भी इन टिप्स को याद रखना चाहिए ताकि आपको इस समस्या से बचे रहने में मदद मिल सकें।

क्या प्रेगनेंसी में व्रत कर सकते हैं?

हिन्दू धर्म में व्रत व् उपवास को किसी पर्व से कम नहीं माना जाता है और लोग व्रत पूरी श्रद्धा व् विश्वास के साथ रखते हैं। और उनका मानना होता है की व्रत करने से भगवान् की असीम कृपा परिवार के लोगो पर बनी रहती है। साथ ही पूरा साल व्रत का सिलसिला चलता रहता है जैसे की कुछ लोग सोमवार के व्रत रखते हैं, शुक्रवार, गुरुवार के व्रत रखते हैं इसके अलावा करवाचौथ, अहोई अष्टमी, गणेश चतुर्थी, जितिया व्रत, पूर्णिमा व्रत, नवरात्रि व्रत, एकादशी आदि और भी बहुत से व्रत होते हैं।

ऐसा नहीं है की सभी लोग एक जैसे ही व्रत करते हैं जो जिस व्रत में श्रद्धा रखते हैं या जिनके यहां जिस व्रत की मान्यता अधिक होती है वो वहीँ व्रत करते हैं। साथ ही कई महिलाएं घर में सुख समृद्धि बनी रहे इसके लिए भी व्रत करते रहते हैं। आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान व्रत रखना चाहिए या नहीं और यदि महिला व्रत रखती है तो महिला को किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए इसके बारे में बताने जा रहे हैं।

गर्भावस्था में व्रत करें या नहीं?

प्रेगनेंसी एक ऐसी अवस्था होती है जहां महिला अकेली नहीं होती है बल्कि गर्भ में पल रहा शिशु भी अपने विकास के लिए अपनी माँ पर निर्भर करता है। इसीलिए ऐसा कहा भी जाता है की प्रेगनेंसी के दौरान महिला जो भी करती है उसका सीधा असर शिशु पर पड़ता है। ऐसे में महिला को इस बात का ध्यान रखना जरुरी होता है की महिला ऐसा कोई भी काम नहीं करे जिससे महिला या शिशु की सेहत पर किसी भी तरह का बुरा असर पड़े।

और जब बात व्रत की आती है तो सबसे पहले महिला को अपना स्वास्थ्य देखना चाहिए की महिला व्रत कर सकती है या नहीं, दूसरा महिला को एक बार डॉक्टर से राय जरूर लेनी चाहिए, तीसरा यदि महिला की प्रेगनेंसी में किसी भी तरह की कम्प्लीकेशन है या महिला को शारीरिक परेशानियां अधिक होती है तो महिला को व्रत नहीं करना चाहिए और आखिर में महिला को ऐसा कोई भी व्रत नहीं करना चाहिए जिसमे महिला को पूरा दिन भूखा रहना पड़े, प्यासा रहना पड़े या केवल मीठी चीजों का सेवन ही करना हो।

साथ ही यदि डॉक्टर आपको यदि डॉक्टर व्रत करने के लिए कह देते हैं तो प्रेग्नेंट महिला व्रत कर सकती है, लेकिन व्रत के दौरान भी महिला को अपने खान पान, आराम करना आदि का अच्छे से ध्यान रखने की जरुरत होती है ताकि महिला और शिशु को किसी तरह की स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानी नहीं हो। इसके अलावा व्रत तो आप कभी भी रख सकती है ऐसे में जितना हो सके प्रेगनेंसी के दौरान महिला को सबसे पहले अपने और शिशु की सेहत पर ध्यान देना चाहिए।

ध्यान रखें:

गर्भवती महिला व्रत रखते समय इस बात का ध्यान रखें की व्रत रखने के बाद यदि महिला को सिर दर्द, चक्कर, पेट में दर्द जैसी दिक्कतें होती है तो महिला व्रत को तुरंत छोड़ दें। क्योंकि यदि तबियत खराब होने पर भी व्रत को रखने से महिला की सेहत और खराब हो सकती है।

तो यदि आप भी माँ बनने वाली हैं तो व्रत रखते समय ऊपर बताएं टिप्स का ध्यान रखते हुए आप व्रत कर सकती है। लेकिन ध्यान रखें की अपनी सेहत का ध्यान पहले रखें बाद में व्रत रखें। इसके अलावा व्रत के दौरान भी अपना अच्छे से ध्यान रखें।

Fasting during Pregnancy

रिफाइंड ऑयल क्यों नहीं खाना चाहिए प्रेगनेंसी में?

गर्भावस्था महिला के लिए ऐसा समय होता है जब महिला को हर कदम पर सावधानी बरतने की जरुरत होती है। क्योंकि इस दौरान महिला द्वारा बरती गई थोड़ी सी लापरवाही माँ और बच्चे दोनों की सेहत को नुकसान पहुंचा सकती है। ऐसे में महिला को अपने खान पान, रहन सहन, लाइफस्टाइल, आदतों सभी में थोड़े थोड़े बदलाव की जरुरत होती है। और वो बदलाव माँ और बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं। आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान महिला को खाने में कौन से ऑयल का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए इस बारे में बताने जा रहे हैं।

प्रेगनेंसी में रिफाइंड ऑयल खाएं या नहीं?

गर्भावस्था के दौरान ऐसा नहीं है की महिला रिफाइंड ऑयल का सेवन बिल्कुल नहीं कर सकती है। क्योंकि सिमित मात्रा में यदि महिला रिफाइंड का सेवन करती है तो इससे महिला को कोई दिक्कत नहीं होती है लेकिन वहीँ यदि किसी और ऑयल का इस्तेमाल करने से महिला को यदि सेहत सम्बन्धी फायदे अधिक मिलते हैं।

जैसे की रिफाइंड से ज्यादा सरसों का तेल फायदेमंद होता है ऐसे में महिला को खान पान की चीजों को बनाने के लिए रिफाइंड की जगह सरसों तेल का इस्तेमाल करना चाहिए। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान हमे खाने में उन्ही चीजों का सेवन करना चाहिए जिससे माँ व् बच्चे को फायदा अधिक मिलें। सरसों तेल के अलावा गर्भवती महिला ओलिव ऑयल, नारियल तेल, देसी घी आदि का इस्तेमाल भी कर सकती है।

प्रेग्नेंट महिला को रिफाइंड ऑयल क्यों नहीं खाना चाहिए?

गर्भावस्था के दौरान महिला को केवल उन्ही चीजों का सेवन करना चाहिए जो माँ और बच्चे के लिए फायदेमंद हो, ऐसे में महिला को रिफाइंड ऑयल का इस्तेमाल करने से किसी तरह का फायदा नहीं मिलता है। साथ ही ज्यादा रिफाइंड खाने से महिला को परेशानी ही होती है तो आइये अब जानते हैं की रिफाइंड खाने से गर्भवती महिला को कौन से नुकसान हो सकते हैं।

पोषक तत्व नहीं मिलते

गर्भावस्था के दौरान महिला को पोषक तत्वों से भरपूर चीजों को अपनी डाइट में शामिल करने की सलाह दी जाती है। ताकि महिला को स्वस्थ रहने और गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में मदद मिल सके। लेकिन रिफाइंड का सेवन करने से महिला को किसी तरह के पोषक तत्व नहीं मिलते हैं इसीलिए गर्भावस्था के दौरान और वैसे भी जितना हो सके रिफाइंड ऑयल के सेवन से बचना चाहिए।

जोड़ो में दर्द की समस्या

ऐसा माना जाता है की रिफाइंड का सेवन करने से यह जोड़ो में जमने लगता है जिसके कारण गर्भवती महिला को जोड़ो में दर्द की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में इस परेशानी से बचे रहने के लिए गर्भवती महिला को रिफाइंड ऑयल का सेवन नहीं करना चाहिए।

फैटी एसिड नहीं होते

प्रेगनेंसी के दौरान माँ व् बच्चे दोनों के लिए फैटी एसिड बहुत जरुरी होते हैं लेकिन रिफाइंड ऑयल में फैटी एसिड न के बराबर होते हैं। ऐसे में यह प्रेगनेंसी के दौरान बिल्कुल भी फायदेमंद नहीं होता है इसीलिए गर्भवती महिला को रिफाइंड ऑयल बिल्कुल नहीं खाना चाहिए।

प्रोटीन की कमी

गर्भावस्था के समय माँ व् शिशु दोनों के लिए प्रोटीन एक अहम पोषक तत्व होता है लेकिन रिफाइंड को बनाते समय उसकी गंध को दूर करने के लिए उसमे से प्रोटीन को निकाल दिया जाता है। और अन्य तेलों में प्रोटीन मौजूद होता है इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान रिफाइंड ऑयल न खाने की सलाह दी जाती है।

शरीर में जमता है

रिफाइंड का सेवन करने पर यह शरीर में जाकर जमना शुरू हो जाता है जिसकी वजह से वजन भी बढ़ सकता है ऐसे में वजन को नियंत्रित रखने के लिए प्रेगनेंसी के दौरान महिला को रिफाइंड ऑयल का सेवन नहीं करना चाहिए।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से गर्भावस्था के दौरान रिफाइंड ऑयल का सेवन नहीं करने की सलाह दी जाती है। यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी प्रेगनेंसी के दौरान रिफाइंड ऑयल का सेवन नहीं करना चाहिए। आप चाहे तो सरसों तेल का सेवन कर सकती है, ओलिव ऑयल, देसी घी का सेवन कर सकती है क्योंकि इससे माँ और बच्चे दोनों को फायदा मिलता है।

प्रेगनेंसी में कितना और कैसे खाएं बादाम ताकि नुकसान नहीं हो?

प्रेगनेंसी के दौरान महिला किसी भी चीज का सेवन करने से पहले यह सोचती है की महिला वह खाएं या नहीं। और महिला का ऐसा करना और खान पान में सावधानी बरतना बिल्कुल ठीक भी है। क्योंकि महिला प्रेगनेंसी के दौरान जो भी खाती है उसका सीधा असर गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ता है। आज इस आर्टिकल में हम प्रेगनेंसी के दौरान बादाम का सेवन करने के बारे में बात करने जा रहे हैं। क्योंकि यदि महिला का प्रेगनेंसी के दौरान यदि बादाम खाने का मन करता है तो उससे पहले महिला का बादाम के प्रति सारी जानकारी होना बहुत जरुरी होता है।

गर्भावस्था के दौरान बादाम खाना चाहिए या नहीं?

आयरन, कैल्शियम, फाइबर, फोलेट व् अन्य पोषक तत्वों से भरपूर बादाम का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान किया जा सकता है। और यह सभी पोषक तत्व गर्भवती महिला को हेल्दी रखने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु को स्वस्थ रखने में भी मदद करते हैं। लेकिन यदि महिला को बादाम खाने से किसी भी तरह की सेहत सम्बन्धी परेशानी होती हो तो गर्भवती महिला को बादाम का सेवन नहीं करना चाहिए।

प्रेगनेंसी के दौरान कितने बादाम खाने चाहिए?

गर्भावस्था में प्रतिदिन चार से छह बादाम खाना सेफ होता है। प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में महिला को बादाम का ज्यादा सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इसकी तासीर थोड़ी गर्म होती है ऐसे में महिला दो से तीन बादाम खा सकती है। लेकिन उसके बाद महिला चार से छह बादाम खा सकती है।

किस तरह बादाम का सेवन करना है गर्भवती महिला के लिए फायदेमंद?

गर्भवती महिला एक तरीके से नहीं बल्कि कई तरीके से बादाम का सेवन कर सकती है। जैसे की महिला बादाम को कच्चे खा सकती है, बादाम को भिगोकर महिला बादाम का सेवन कर सकती है, खीर, हलवे आदि में डालकर महिला बादाम का सेवन कर सकती है, बादाम को घी में भुनने के बाद भी महिला बादाम का सेवन कर सकती है। ऐसे में जो भी तरीका महिला को पसंद हो महिला उसी तरीके से बादाम का सेवन कर सकती है। क्योंकि इन सभी तरीको से बादाम खाने पर महिला को किसी तरह का नुकसान नहीं होता है।

प्रेगनेंसी में बादाम खाने के फायदे

गर्भावस्था के दौरान यदि महिला बादाम का सेवन करती है तो इससे एक नहीं बल्कि कई फायदे माँ और बच्चे दोनों को मिलते हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी में बादाम खाने से कौन कौन से फायदे प्रेग्नेंट महिला और शिशु को मिलते हैं।

फोलिक एसिड

बादाम फोलिक एसिड का बेहतरीन स्त्रोत होता है जो गर्भ में पल रहे शिशु के मानसिक विकास को बेहतर करने में मदद करता है। साथ ही इससे गर्भ में पल रहे शिशु को होने वाले जन्म दोष के खतरे को कम करने में मदद मिलती है।

कैल्शियम

कैल्शियम से भरपूर बादाम का सेवन करने से गर्भवती महिला की हड्डियों को मजबूती मिलने के साथ दांतों को भी मजबूत रहने में मदद मिलती है। इसके अलावा कैल्शियम गर्भ में पल रहे शिशु की हड्डियों के बेहतर विकास और दांतों के बेहतर विकास में भी मदद करता है।

आयरन

गर्भावस्था के दौरान आयरन की कमी होने के कारण गर्भवती महिला और शिशु दोनों को परेशानी होने का खतरा होता है। ऐसे में यदि महिला बादाम का सेवन करती है तो इससे महिला के शरीर में आयरन की कमी को पूरा होने में मदद मिलती है जिससे आयरन की कमी के कारण माँ व् बच्चे को होने वाली परेशानियों से निजात मिलता है।

फाइबर

बादाम फाइबर का बेहतरीन स्त्रोत भी होता है ऐसे में बादाम का सेवन करने से गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली पाचन सम्बन्धी परेशानियों से निजात पाने में मदद मिलती है।

ऊर्जा मिलती है

गर्भावस्था के दौरान महिला को थकान व् कमजोरी महसूस होना आम बात होती है लेकिन यदि महिला बादाम का सेवन करती है तो इससे महिला को भरपूर ऊर्जा मिलती है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान बादाम का सेवन करने से जुड़े टिप्स और बादाम खाने के फायदे, ऐसे में यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आप भी प्रेगनेंसी के दौरान बादाम का सेवन जरूर करें। ताकि आपको और आपके होने वाले बच्चे को बादाम के बेहतरीन फायदे मिल सके।

Benefits of eating almond in pregnancy

कैसे जानें गर्भ में बेटा है या बेटी है?

घर में शिशु के आने की खबर से ही पूरा घर ख़ुशी से झूमने लगता है। साथ ही घर का सदस्य यह जानने के लिए भी उत्सुक होता है की घर में प्रिंस आएगा या परी आएगी। क्या आप भी यह जानने की इच्छुक है की आपको कैसे पता चलेगा की गर्भ में बेटा है या बेटी? यदि हाँ, तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसे ट्रिक्स के बारे में बताने जा रहे हैं जिससे आपको यह जानने में मदद मिलेगी की गर्भ में पल रहा शिशु बेटा है या बेटी।

ऐसे जानें गर्भ में बेटा है या बेटी है

प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में बहुत से अलग अलग लक्षण महसूस होते हैं। और यह लक्षण देखकर आपको जानने में मदद मिलती है की आपके गर्भ में बेटा है या बेटी है। पुराने समय में भी जब महिला गर्भवती होती थी तब सभी महिला में दिखाई देने वाले लक्षणों को देखकर आने वाले शिशु को लेकर अंदाजा लगाते थे। तो आइये अब उन लक्षणों के बारे में जानते हैं जिन्हे देखकर आपको भी यह जानने में मदद मिलेगी की आपके गर्भ में बेटा है या बेटी है।

चेहरे पर दाग धब्बे

यदि गर्भवती महिला के चेहरे पर दाग धब्बे, पिम्पल की समस्या होती है तो यह लक्षण गर्भ में बेटी होने का लक्षण होता है। और यदि महिला को ऐसी कोई समस्या नहीं होती है तो यह गर्भ में बेटा होने का लक्षण होता है।

ख़ूबसूरती बढ़ना

गर्भावस्था के दौरान महिला के चेहरे पर निखार का बढ़ना गर्भ में बेटा होने का लक्षण होता है। जबकि गर्भ में बेटी होने पर ऐसा माना जाता है की बेटियां माँ की ख़ूबसूरती को चुरा लेती है।

बालों से जानें

यदि प्रेगनेंसी के दौरान महिला के बाल घने व् चमकदार हो गए हैं तो समझ जाइये की गर्भ में बेटा है लेकिन यदि महिला को बालों में ऐसा कोई बदलाव नज़र नहीं आएं तो गर्भ में बेटी हो सकती है।

बॉडी के बाल

यदि आपको प्रेगनेंसी के दौरान ऐसा महसूस हो की आपके शरीर के किसी हिस्से जैसे की हाथों पैरों के बाल तेजी से बढ़ रहे हैं तो यह गर्भ में बेटा होने का लक्षण होता है। जबकि यदि आपके शरीर के बाल सामान्य गति से बढ़ रहे हैं तो यह गर्भ में बेटी होने लक्षण होता है।

खाने की इच्छा

प्रेगनेंसी के समय महिला को अलग अलग चीजें खाने की इच्छा होती है ऐसे में महिला की खाने की क्रेविंग को देखकर भी यह जानने में मदद मिलती है की गर्भ में पल रहा शिशु बेटा है या बेटी है। यदि प्रेग्नेंट महिला की खट्टा, नमकीन, चटपटा खाने की इच्छा होती है तो यह गर्भ में बेटा होने का लक्षण होता है जबकि यदि महिला की मीठी चीजों को खाने की इच्छा अधिक होती है तो यह गर्भ में बेटी होने का लक्षण होता है।

दिल की धड़कन

गर्भ में पल रहे शिशु के दिल की धड़कन से भी यह अंदाजा लगाया जा सकता है की गर्भ में पल रहा शिशु बेटा होगा या बेटी होगी। यदि गर्भ में शिशु की धड़कन 140 बीट्स प्रति मिनट से अधिक होती है तो यह गर्भ में बेटी होने का लक्षण होता है जबकि यदि गर्भ में शिशु की धड़कन 140 बीट्स प्रति मिनट या फिर उससे कम होती है तो यह गर्भ में बेटा होने का लक्षण होता है।

शरीर का तापमान

गर्भावस्था के दौरान शरीर के तापमान में बदलाव आना भी आम बात होती है। ऐसे में यदि गर्भवती महिला के हाथ पैर प्रेगनेंसी के दौरान ठन्डे रहते हैं तो यह गर्भ में बेटा होने का लक्षण होता है और यदि महिला के हाथ पैर गर्म होते हैं तो यह गर्भ में बेटी होने का लक्षण होता है।

सूजन

यदि प्रेग्नेंट महिला को हाथों पैरों में सूजन ज्यादा रहती है तो यह गर्भ में बेटा होने का लक्षण होता है।

वजन

गर्भावस्था के दौरान यदि महिला का वजन ज्यादा बढ़ जाता है और पेट व् हिप्स बाहर की तरफ ज्यादा हो जाते हैं तो यह गर्भ में बेटी होने का लक्षण होता है। जबकि यदि महिला का वजन ज्यादा नहीं बढ़ता है और पेट का आकार भी गोल होता है तो यह गर्भ में बेटा होने का लक्षण होता है।

मॉर्निंग सिकनेस

प्रेगनेंसी के दौरान यदि मॉर्निंग सिकनेस यानी सुबह के समय उल्टी, जी मिचलाने की समस्या महिला को अधिक होती है तो यह गर्भ में बेटी होने का लक्षण होता है। जबकि यदि महिला को यह समस्या अधिक नहीं होती है या बिल्कुल नहीं होती है तो यह गर्भ में बेटा होने का लक्षण होता है।

पेट पर लाइन

ऐसा माना जाता है की यदि गर्भावस्था के दौरान महिला के पेट पर एक भूरी लाइन बन जाती है यदि यह लाइन नाभि के ऊपर तक और नीचे तकपूरी लम्बी होती है तो यह गर्भ में बेटा होने का लक्षण होता है। लेकिन यदि महिला के पेट पर या तो कोई लाइन नहीं बनती है या लाइन नाभि से नीचे की तरफ होती है तो यह गर्भ में बेटी होने का लक्षण होता है।

ब्रेस्ट साइज

गर्भावस्था के दौरान महिला के ब्रेस्ट साइज में फर्क आना आम बात है लेकिन यदि महिला को ऐसा महसूस हो की महिला का दायां स्तन बाएं स्तन से बड़ा है तो यह गर्भ में बेटी होने का लक्षण होता है। जबकि यदि महिला का बायां स्तन दाएं स्तन से बड़ा हो तो यह गर्भ में बेटा होने का लक्षण होता है।

सीने में जलन

जिन प्रेग्नेंट महिलाओं को सीने में जलन की समस्या अधिक रहती है उन महिलाओं के गर्भ में बेटी होने के चांस अधिक होते हैं।

पेट का आकार

गर्भवती महिला के पेट के आकार से भी यह जानने में मदद मिलती है की गर्भ में पल रहा शिशु बेटा है या बेटी है। यदि प्रेग्नेंट महिला का पेट आगे से गोल और थोड़ा नीचे की तरफ झुका हुआ है तो यह गर्भ में बेटा होने की तरफ इशारा करता है। जबकि यदि महिला का पेट आगे से बाहर की तरफ निकला हुआ और ऊपर की तरफ महसूस होता है तो यह गर्भ में बेटी होने का लक्षण होता है।

सोने का तरीका

यदि प्रेग्नेंट महिला बाईं तरफ होकर सोने में आराम महसूस करती है तो यह गर्भ में बेटा होने का लक्षण होता है। जबकि यदि कोई प्रेग्नेंट महिला दाईं तरफ होकर सोना पसंद करती है तो यह गर्भ में बेटी होने का लक्षण होता है।

यूरिन का रंग

प्रेग्नेंट महिला यदि भरपूर पानी का सेवन करती है लेकिन फिर भी यूरिन यदि ज्यादा पीला आता है तो यह गर्भ में बेटा होने का लक्षण होता है। जबकि यूरिन का सामान्य या थोड़ा गुलाबी सफ़ेद आता है तो यह गर्भ में बेटी होने का लक्षण होता है।

महीने और उम्र से जानें

यदि प्रेग्नेंट महिला की उम्र और गर्भाधारण करने के महीना दोनों ही या तो सम संख्या है या विषम संख्या है तो यह गर्भ में बेटी होने का लक्षण होता है। लेकिन यदि एक संख्या सम है और एक विषम है तो यह गर्भ में बेटा होने का लक्षण होता है।

अंगूठी घुमाकर पता करें की बेटा होगा या बेटी होगी

यह तरीका थोड़ा मज़ाकिया है लेकिन अधिकतर लोग इस तरीके को ट्राई करके भी यह पता करते हैं की गर्भ में पल रह शिशु बेटा होगा या बेटी होगी। इसे ट्राई करने के लिए ध्यान रखें की एक धागे में एक अंगूठी को पेट के ऊपर लटकाएं। अगर यह अंगूठी गोल घूमती है तो यह गर्भ में बेटी होने का लक्षण होता है और यदि अंगूठी आगे पीछे घूमती है तो यह गर्भ में बेटा होने का लक्षण होता है।

तो यह हैं वो लक्षण जिन्हे देखकर आप भी अंदाजा लगा सकते हैं की गर्भ में पल रहा शिशु बेटा है या बेटी है। लेकिन ध्यान रखें की यह केवल अंदाजा ही है ऐसा जरुरी भी नहीं है की यह सच हो और ऐसा भी हो सकता है की आपका अंदाजा सही हो।

Ways to predict baby’s gender during pregnancy

प्रेगनेंसी के 7 से 9 महीने में महिला को कौन-कौन सी सावधानियां बरतनी चाहिए?

गर्भावस्था के 7 से 9 महीने गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में आते हैं और यह महिला बहुत ही नाजुक होने के साथ सबसे अहम भी होते हैं। क्योंकि इस दौरान महिला की शारीरिक परेशानियां बढ़ सकती है साथ ही महिला का वजन बढ़ चूका होता है और पेट बाहर निकलने के कारण भी महिला को दिक्कत हो सकती है। इसके अलावा इस दौरान शिशु का शारीरिक विकास भी तेजी से हो रहा होता है।

ऐसे में महिला के लिए बहुत जरुरी होता है की महिला अपना तिगुना ध्यान रखे ताकि माँ या बच्चे को किसी तरह की दिक्कत नहीं हो साथ ही डिलीवरी में भी किसी तरह की परेशानी का सामना महिला को नहीं करना पड़े। तो आइये अब इस आर्टिकल में प्रेग्नेंट महिला को तीसरी तिमाही में किन किन सावधानियों को बरतना चाहिए उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लें

प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में गर्भ में शिशु का विकास तेजी से हो रहा होता है, महिला की शारीरिक दिक्कतें बढ़ सकती है, डिलीवरी के लिए महिला के शरीर को ज्यादा ऊर्जा की जरुरत होती है। ऐसे में इन सभी के लिए प्रेग्नेंट महिला को अपनी डाइट में पोषक तत्वों को शामिल करना चाहिए और समय से अपने खाने पीने का ध्यान रखना चाहिए।

थोड़ा थोड़ा करके खाएं

गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में महिला की पाचन सम्बन्धी परेशानियां बढ़ सकती है। जिसके कारण महिला को एसिडिटी, कब्ज़ जैसी परेशानियां अधिक हो सकती है। ऐसे में इन परेशानियों से बचे रहने के लिए महिला को फाइबर युक्त डाइट लेनी चाहिए साथ ही थोड़ा थोड़ा करके खाना चाहिए ताकि खाने को आसानी से हज़म होने में मदद मिल सके।

पेट के बल कोई काम नहीं करें

प्रेग्नेंट महिला का सातवें से नौवें महीने में पेट ज्यादा बाहर की और निकल सकता है ऐसे में महिला को बिल्कुल भी पेट के बल काम नहीं करना चाहिए। जैसे की रसोई में काम करते समय महिला शेल्फ के साथ सटकर काम करती है तो महिला को ऐसे कामों को करने से बचना चाहिए। क्योंकि पेट के बल काम करने से पेट पर दबाव बढ़ता है जिसके कारण माँ और बच्चे दोनों को दिक्कत हो सकती है।

कैफीन का सेवन नहीं करें

प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में महिला को कैफीन युक्त चीजों का सेवन करने से भी बचना चाहिए। क्योंकि कैफीन का सेवन करने से गर्भवती महिला को तरह तरह की दिक्कतें हो सकती हैं। जैसे की महिला को पाचन क्रिया से सम्बंधित परेशानी बढ़ सकती है, शिशु के विकास में रूकावट आ सकती है, चक्कर घबराहट आदि महसूस हो सकता है, आदि।

नशे से दूरी रखें

किसी भी तरह का नशा हो चाहे वो धूम्रपान हो, अल्कोहल हो उन सभी से गर्भवती महिला को दूरी रखनी चाहिए साथ ही जहां कोई इन चीजों का सेवन कर रहा हो उस जगह पर भी प्रेग्नेंट महिला को नहीं जाना चाहिए। क्योंकि यह माँ और बच्चे दोनों के लिए नुकसानदायक होता है।

ट्रैवेलिंग से बचें

गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में वजन बढ़ने के कारण महिला को वैसे भी उठने बैठने में दिक्कत होती है। ऐसे में महिला यदि ट्रैवेलिंग करती है तो इससे महिला के साथ शिशु को दिक्कत होने का खतरा भी होता है। इसीलिए गर्भवती महिला को जितना हो सके ट्रैवेलिंग करने से बचना चाहिए।

तनाव से बचें और खुश रहें

प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में महिला को अपने आप को पॉजिटिव रखना चाहिए, अच्छा सोचना चाहिए, खुश रहना चाहिए, बिल्कुल भी टेंशन नहीं लेनी चाहिए। यदि महिला इन बातों का ध्यान रखती है तो इससे माँ और बच्चे दोनों को फायदा मिलता है।

बच्चे की हलचल का ध्यान रखें

गर्भावस्था के आठवें से नौवें महीने में महिला को शिशु की हलचल का भी खास ध्यान रखना चाहिए की शिशु गर्भ में कितनी देर तक हलचल कर रहा है। और यदि कभी आपको लम्बे समय तक शिशु की हलचल महसूस नहीं हो तो आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

प्रसव की जानकारी इक्कठी करें

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान प्रसव की जानकारी इक्कठे करते रहना चाहिए क्योंकि जितना महिला के पास प्रसव की जानकारी होती है उतना ही महिला को प्रसव को आसान बनाने में मदद मिलती है। या फिर महिला के मन में प्रसव को लेकर यदि कुछ सवाल होते हैं तो उनके बारे में भी महिला को डॉक्टर से जरूर पूछना चाहिए।

झुककर काम करने से बचें

प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में महिला को ऐसा कोई भी काम करने से बचना चाहिए जैसे की बाथरूम साफ़ करना, पोछा लगाना, कपडे धोना, आदि। जिसमे महिला को झुकना पड़े क्योंकि इसके कारण पेट पर दबाव पड़ सकता है। जिसके कारण महिला को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

ज्यादा चलना फिरना बंद करें

गर्भवती महिला के लिए थोड़ा बहुत चलना फिरना अच्छी बात होती है लेकिन महिला को ज्यादा चलने फिरने व् भागदौड़ करने से बचना चाहिए। क्योंकि इनके कारण महिला को शारीरिक परेशानियां जैसे की सूजन, जोड़ो में दर्द आदि हो सकता है।

पहनावा सही रखें

इस दौरान महिला को ज्यादा टाइट, चुभने वाले कपडे नहीं पहनने चाहिए साथ ही महिला को ज्यादा ऊँचे जूते चप्पल नहीं पहनने चाहिए। क्योंकि इनके कारण महिला और बच्चे को दिक्कत होने का खतरा रहता है।

अपना रूटीन चेकअप समय से करवाएं

गर्भवस्था की तीसरी तिमाही में महिला के जितने टेस्ट होते हैं, स्कैन होते हैं, रूटीन चेकअप होते हैं उन्हें महिला को समय से करवाना चाहिए। ताकि महिला को प्रेगनेंसी के दौरान किसी भी तरह की दिक्कत नहीं हो।

पीठ के बल नहीं सोएं

गर्भवती महिला को इस दौरान पीठ के बल नहीं सोना चाहिए क्योंकि पीठ के बल सोने से गर्भाशय का सारा भार पीठ पर आ जाता है जिसके वजह से महिला को कमर दर्द की समस्या अधिक हो सकती है। साथ ही सिर से लेकर पैरों तक ब्लड फ्लो सही नहीं होने के कारण महिला को सूजन जैसी समस्या का सामना भी करना पड़ सकता है।

डिलीवरी बैग तैयार रखें

प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में महिला को डिलीवरी बैग भी तैयार कर लेना चाहिए जिसमे प्रसव के समय हॉस्पिटल में जिन जिन चीजों की जरुरत पड़ सकती है उन्हें रखना चाहिए। ताकि जैसे ही हॉस्पिटल जाना पड़े तो महिला को कोई दिक्कत नहो बल्कि बस महिला बैग उठायें और आराम से बिना किसी टेंशन के चली जाये।

प्रसव का कोई भी लक्षण महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर के पास जाएँ

प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में कभी भी महिला को शरीर में प्रसव का कोई भी लक्षण महसूस हो रहा है जैसे की एमनियोटिक बैग फटने के कारण पानी निकल रहा है, ब्लीडिंग हो रही है, पेट या कमर में तेज दर्द हो रहा है, पेल्विक एरिया पर ज्यादा दबाव महसूस हो रहा है तो महिला को इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। और जितना जल्दी हो सके डॉक्टर से मिलना चाहिए ताकि डिलीवरी में किसी भी तरह की कम्प्लीकेशन नहीं आये।

तो यह हैं कुछ सावधानियां जो प्रेगनेंसी के तीसरे ट्राइमेस्टर में महिला को बरतनी चाहिए। यदि महिला इन बातों का ध्यान रखती है तो इससे गर्भवती महिला को शिशु को स्वस्थ रहने, परेशानियों से बचें रहने और डिलीवरी को आसान बनाने में मदद मिलती है।

Precautions during third trimester of pregnancy

क्या स्वस्थ होने के बाद भी प्रेगनेंसी के हर महीने डॉक्टर से मिलना चाहिए?

प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रहने के लिए महिला को अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए, भरपूर नींद लेनी चाहिए, टेंशन नहीं लेनी चाहिए, खुश रहना चाहिए, समय से खाना चाहिए, किसी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए, सही समय पर दवाई लेनी चाहिए, टीकाकरण समय से करवाना चाहिए, आदि।

यदि प्रेग्नेंट महिला इन बातों का ध्यान रखती है तो इससे गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने और गर्भ में पल रहे शिशु को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला पूरी तरह से स्वस्थ रहती है तो क्या गर्भवती महिला को हर महीने डॉक्टर से मिलना चाहिए या नहीं मिलना चाहिए? आज इस आर्टिकल में हम आपको इसके बारे में बताने जा रहे हैं।

स्वस्थ प्रेगनेंसी के दौरान डॉक्टर से मिलें या नहीं?

प्रेगनेंसी के दौरान यदि आप स्वस्थ हैं तो यह अच्छी बात है। साथ ही आप अपना और अच्छी तरह से ध्यान रखें ताकि आपको प्रेगनेंसी में किसी तरह की दिक्कत नहीं आये। लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है की यदि आपको लग रहा है की आप स्वस्थ है तो आप डॉक्टर से नहीं मिलें। बल्कि आपको प्रेगनेंसी के हर महीने होने वाली जांच, टीकाकरण आदि सभी समय से करवाना चाहिए।

ताकि आपको अपने गर्भ में पल रहे शिशु के विकास, आपको आंतरिक रूप से कोई समस्या तो नहीं है, किसी तरह की कम्प्लीकेशन तो नहीं है इसके बारे में विस्तार से पता चल सके। और यदि कोई दिक्कत हो तो उसका समय से पता चल सके। साथ ही उसका इलाज भी समय से हो सके। जिससे महिला और बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सकें।

तो यदि आप भी माँ बनने वाली हैं और आप सोच रही हैं की आपको कोई दिक्कत नहीं है तो डॉक्टर से न मिलें, तो ऐसा बिल्कुल नहीं करें। बल्कि अपनी सभी जांच व् रूटीन चेकअप समय से करवाएं। इसके अलावा डॉक्टर जो भी आपको बताते हैं उन सभी बातों को ध्यान में रखें और उनका पालन करें ताकि आपको प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रहने में मदद मिल सकें।