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क्या धूप में निकलने पर आपकी त्वचा खुजलाती है? ये हैं कारण और उपाय

धूप में निकलने के बाद सूर्य से निकलने वाली अल्ट्रावॉयलट रेडिएशन आपकी त्वचा के लिए काफी हानिकारक होती है, यदि ये किरणे सीधा आपकी त्वचा के संपर्क में आती है, तो इसके कारण आपकी त्वचा रूखी सुखी व् बेजान होने लगती है, साथ ही त्वचा काली भी पड़ने लगती है, और जब त्वचा रूखी हो जाती है, इसके कारण आपको कभी कभी खुजली भी होने लगती है, परंतु क्या आप जानते है की धूप में निकलने के कारण आपको किन किन वजह से त्वचा पर खुजली की समस्या होती है।

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त्वचा बहुत ही कोमल और नाजुक होती है, इसकी देखभाल के लिए भी आपको बहुत ध्यान रखना पडता है, फिर चाहे मौसम कोई सा भी हो, चाहे गर्मी हो या सर्दी, कई लोगो की त्वचा बहुत ही सेन्सिटिव होती है, जिसके कारण जब भी वह धूप में निकलती है तो उनकी त्वचा पर खुजली होने लगती है, ऐसा भी जरुरी नहीं है की केवल ऐसा गर्मी में ही हो बल्कि सर्दियों में भी ज्यादा धूप में बैठने या रहने के कारण उनकी त्वचा पर खुजली होने लगती है, तो आइये आज हम आपको कुछ ऐसे कारण बताते है जिनके कारण धूप में निकलने पर आपको खुजली की समस्या होती है और फिर इसके कुछ उपचार के बारे में भी जानेगें।

पानी की कमी के कारण:-

त्वचा पर खुजली का सबसे बड़ा कारण होता है, आपका पानी का भरपूर मात्रा में सेवन न करना, जब भी आप कम पानी का सेवन करते है, तो इसके कारण आपकी त्वचा भी नमी खोने लगती है, जिसके कारण आप जब भी धूप में निकलते है, तो धूप की किरणे बहुत तेजी से आपकी त्वचा पर बुरा प्रभाव डालती है, फिर चाहे वो गर्मी का मौसम हो या सर्दी का, इसके कारण त्वचा रूखी सुखी होने लगती है, जिसके कारण त्वचा पर खुजली होने लगती है।

गर्मी में होने वाली घमौरिया की समस्या के कारण:-

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जब भी आप गर्मी में चिलचिलाती धूप में बाहर निकलते है, तो या तो आपको अपने आपको को अच्छे से ढक कर निकलना चाहिए, या फिर सनस्क्रीन का इस्तेमाल करके परंतु फिर भी गर्मियों में चलने वाली लू के कारण और ज्यादा धूप में निकलने के कारण आपको घमोरिया की समस्या हो जाती है, इसके कारण आपके शरीर के कुछ भागों पर लाल लाल दाने निकलने लगते है, जिसके कारण भी आपको खुजली की समस्या हो जाती है।

सर्दी हो या गर्मी त्वचा को मॉइस्चराइज न करने के कारण:-

त्वचा बहुत ही कोमल व् मुलायम होती है, परंतु यदि आप अपनी त्वचा की अच्छे से देखभाल नहीं करते है, तो इसके कारण आपको त्वचा से जुडी समस्या का सामना करना पड़ सकता है, जैसे की त्वचा को यदि अच्छे से पोषित न किया जाएँ, उदाहरण के लिए किसी मॉइस्चराइजर, बॉडी लोशन या फिर सनस्क्रीन का इस्तेमाल न करने के कारण, तो त्वचा धीरे धीरे अपनी प्राकृतिक नमी खोने लगती है, और शुष्क हो जाती है, जिसके कारण आपको त्वचा पर खुजली का अहसास होने लगता है।

शरीर पर पसीना सूखने के कारण:-

धूप में चलने पर आपके शरीर पर अधिक मात्रा में पसीना आता है, परंतु कई बार जब आप पसीने से सीधा आकर पंखे कूलर आदि में बैठ जाते है, तो शरीर पर आया पसीना वही जम जाता है, जिसके कारण वहां मैल यानि बैक्टेरिया का जमाव होता है, जिसके कारण आपकी त्वचा पर होने वाली खुजली की समस्या हो जाती है, इसीलिए जब भी आप बाहर धूप से आएं तो अच्छे से अपने पसीने को साफ़ करना चाहिए, उसके बाद ही आपको पंखे आदि में बैठना चाहिए, इसके कारण जर्म्स नहीं जमते है।

शरीर को अच्छे से ढक कर न निकलने के कारण:-

जब आप धूप में निकलते है और आपने अपनी त्वचा को अच्छे से ढक कर नहीं रखा होता है, तो इसके कारण आपकी त्वचा धूप से निकलने वाली अल्ट्रावॉयलेट रेडिएशन के संपर्क में सीधा आती है, जिसके कारण त्वचा अपनी नमी खोने लगती है, और धीरे धीरे शुष्क हो जाती है, इसके कारण भी आपको त्वचा पर होने वाली खुजली की समस्या हो जाती है।

त्वचा पर होने वाली खुजली से बचने के उपाय:-

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निम्बू का इस्तेमाल करें:-

त्वचा पर होने वाली खुजली से बचने के लिए आप निम्बू के रस से त्वचा की मसाज करनी चाहिए, इसके कारण त्वचा के बैक्टेरिया खत्म हो जाते है, जिसके कारण आपको खुजली नहीं होतो है, साथ ही त्वचा पर निखार भी आता है।

तुलसी का इस्तेमाल करें:-

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तुलसी का इस्तेमाल करने से आपको खुजली की समस्या से राहत मिलती है, इसके लिए आप तुलसी के पत्तों को अच्छे से पीस कर आप अपनी त्वचा पर लगाएं, या फिर आप तुलसी के पत्तों को पानी में उबाल कर अच्छे से खुजली वाली जगह को साफ़ करें इसके कारण भी आपको इस समस्या से राहत मिलती है।

बेकिंग सोडा का इस्तेमाल करें:-

एक या दो चम्मच बेकिंग सोडा को पानी में डाल कर अपनी त्वचा को अच्छे से साफ़ करें, या आप बेकिंग सोडा का पेस्ट बनाकर अपनी त्वचा पर लगाएं, और पांच मिनट बाद अच्छे से हल्के गरम पानी से अपनी त्वचा को अच्छे से साफ़ करें, ऐसा करने से आपको खुजली की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

दालचीनी के पत्तों का इस्तेमाल करें:-

दालचीनी के पत्तों को अच्छे से पीस कर एक पेस्ट तैयार करें, उसके बाद इस पेस्ट को अच्छे से अपने खुजली वाले स्थान पर लगाएं, और उसके बाद अच्छे से पानी की मदद से उसे साफ़ कर दें, ऐसा करने से आपको इस समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

ओटमील का इस्तेमाल करें:-

ओटमील का इस्तेमाल करने से भी आपको खुजली की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है, इसके लिए आप ओटमील को आधे घंटे के लिए पानी में भिगो दें, और उसके बाद कम से कम आधे घंटे के लिए इसे खुजली वाले स्थान पर लगे रहने दें, और उसके बाद इसे धो दें, इसके कारण आपको खुजली की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

नीम का इस्तेमाल करें:-

नीम में मौजूद एंटी बैक्टेरियल गुण आपको खुजली की समस्या से राहत दिलाने में मदद करते है, इससे बचने के लिए आप नीम को पीस कर खुजली वाले स्थान पर लगाएं, या फिर नीम की पत्तियों को उबाल कर उसके पानी से अपने खुजली वाले स्थान को अच्छे से साफ करें, ऐसा करने से आपको इस समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

नारियल के तेल का इस्तेमाल करें:-

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नारियल के तेल का इस्तेमाल करने से आपको त्वचा से जुडी परेशानियों से राहत पाने में मदद मिलती है, इसके लिए आप नारियल के तेल की अच्छे से अपने खुजली वाले स्थान की मसाज करें, ऐसा करने से आपको खुजली से आराम मिलता है।

एप्पल साइडर विनेगर का इस्तेमाल करें:-

एप्पल साइडर विनेगर में एंटीसेप्टिक और एंटी फंगल गुण मौजूद होते है, जिसके कारण आपको खुजली की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है, इसके लिए आप थोड़ा सा एप्पल साइडर विनेगर रुई की मदद से अपने खुजली वाले स्थान पर लगाएं, इसके कारण आपको खुजली की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

एलोवेरा जेल का इस्तेमाल करें:-

एलोवेरा जेल का इस्तेमाल करने से भी आपको इस समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है, इसके लिए आप एलोवेरा जेल को अच्छे से अपने खुजली वाले स्थान पर लगाएं, और जब वह जैल सूख जाएँ उसके बाद आप अच्छे से पानी धो दें, ऐसा करने से आपको खुजली की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

पुदीने का इस्तेमाल करें:-

पुदीने का इस्तेमाल करने से भी आपको खुजली की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है, इसके लिए आप पुदीने के पत्तों को अच्छे से पीस कर खुजली वाले स्थान पर लगाएं, उसके बाद अच्छे से उस स्थान को धो दें, ऐसा करने से आपको खुजली की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

तो ये कुछ कारण है जब आप धूप में बाहर निकलते है तो इनके कारण आपको खुजली की समस्या हो जाती है, और इस समस्या से बचने के लिए कुछ उपचार भी बताएं गए है, इसके अलावा आप जब भी धूप में निकले तो अच्छे से अपनी बॉडी को ढक कर निकलें, और उसे मॉइस्चराइज करके या सनस्क्रीन का इस्तेमाल करके इस समस्या से राहत पा सकते है।

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पहली बार माँ बनने का क्या अहसास होता है?

माँ बनने का अहसास

माँ बनना किसी भी महिला के लिए उसकी जिंदगी में मिलने वाला सबसे बड़ा उपहार होता है, जो महिला की जिंदगी को एक दम से बदल देता है। क्योंकि अब महिला की लाइफ में कोई ऐसा आने वाला होता है जिसके बारे में पहले और अपने और बाकी सब चीजों के बारे में महिला बाद में सोचती है। केवल प्रेगनेंसी की पॉजिटिव रिपोर्ट को देखकर ही महिला मन में तरह तरह के सपने बुनना शुरू कर देती है। ख़ुशी के साथ महिला के लिए यह पल बहुत से सवालों से भी घिरा होता है, क्योंकि महिला के मन में सिर्फ यही होता है की वो उन सभी चीजों का ध्यान रखे जिससे गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में मदद मिल सके। माँ बनने की खबर ही महिला के अंदर मातृत्व के अहसास को जगा देती है।

अकेले में बैठकर गर्भ पर हाथ फेरते हुए गर्भवती महिला अपने शिशु को महसूस करने की कोशिश करती है। और यह अहसास तब और भी खूबसूरत बन जाता है जब गर्भ में पल रहे शिशु की हलचल महसूस होती है। प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली परेशानियों के कारण महिला को दिक्कत तो होती है, लेकिन गर्भ में पल रहे शिशु के बारे में सोचकर महिला को मजबूत रहने में मदद मिलती है। घर में या बाहर हर कोई गर्भवती महिला को बहुत सी सलाह देता है, और महिला भी शिशु की बेहतरी के लिए हर किसी से उनके अनुभव को जानने की कोशिश करती है। और गर्भ में शिशु के होने से ही उसकी बेहतर केयर और परवरिश का ध्यान देना शुरू कर देती है।

पहली बार माँ बनने का क्या अहसास कैसा होता है?

पहली बार माँ बनना किसी भी महिला के लिए उसकी जिंदगी का सबसे अनमोल लम्हा होता है, और इस अनमोल लम्हे का अहसास ही महिला में माँ की ममता को जागृत कर देता है। गर्भवती महिला अपने कमरे में सूंदर सूंदर शिशु की तस्वीरें लगाकर अपने गर्भ में पल रहे शिशु की आकृति को महसूस करने लगती है। माँ बनने का अहसास एक गर्भवती महिला से बेहतर कोई नहीं बता सकता है, क्योंकि गर्भ में नौ महीने शिशु को रखकर, हर दिन हर पल हर नए अनुभव का अहसास केवल एक महिला ही महसूस कर सकती है।

शिशु का विकास पूरी तरह से महिला के शरीर पर निर्भर करता है, क्योंकि शिशु के विकास के लिए सभी जरुरी पोषक तत्व गर्भ में पल रहा शिशु महिला के शरीर से ही लेता है। ऐसे में यह कहना बिल्कुल गलत नहीं होता है की एक महिला के लिए प्रेगनेंसी किसी जंग से कम नहीं होती है। लेकिन फिर भी जैसे जैसे प्रेगनेंसी के दिन आगे बढ़ते हैं, शिशु की हलचल बढ़ने लगती है वैसे वैसे महिला के माँ बनने का अहसास और भी ज्यादा बढ़ने लगता है। और महिला चाहे पहली बार माँ बनने का अनुभव ले या दूसरी बार माँ बनने का अहसास दोनों में किसी तरह का फर्क नहीं होता है।

बस फर्क इतना होता है की दूसरी बार गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के बारे में जानकारी हो जाती है, जबकि पहली बार महिला के मन में ख़ुशी के साथ घबराहट और डर भी होता है। ऐसे में यदि माँ बनने के अहसास को शब्दों में बताया जाए यह थोड़ा मुश्किल होगा, क्योंकि यह हर महिला के लिए अलग होता है। और हर महिला प्रेगनेंसी के दौरान अलग अलग तरह की चीजों का एक्सपीरियंस करती है, लेकिन इन सब में सिर्फ एक बात एक जैसी होती है वो है माँ बनने का अहसास, और मातृत्व की भावना।

तो यह है पहली बार माँ बनने का क्या अहसास होता है, इससे जुडी कुछ बातें, ऐसे में इस अहसास को गर्भवती महिला को अपने पार्टनर अपने परिवार के साथ शेयर करना चाहिए। ताकि वह चाहे इस अहसास का अनुभव न ले सके, लेकिन आपकी बातों से इन्हे महसूस कर सकें।

असमय बाल सफ़ेद होने की समस्या से निजात पाने के टिप्स

असमय बाल सफ़ेद होने की समस्या से निजात पाने के टिप्स:-

बाल आपकी ख़ूबसूरती को बढ़ाने में और भी मदद करते है, साथ ही इससे आपकी पर्सनैलिटी भी अलग ही निखर कर सामने आती है, परन्तु आज कल प्रदुषण के कारण हमारी सेहत के साथ हमारे बालों पर भी बुरा असर पड़ रहा है, जिसके कारण असमय बालों के सफ़ेद होने की समस्या सामने आ रही है, बाल सफ़ेद होने के कारण केवल प्रदुषण ही नहीं होता है, बल्कि और भी कई से ऐसे कारण है, जिनकी वजह से आपको बालों की रौनक कही गुम सी हो जाती है, और आपकी पर्सनालिटी पर भी इसका सीधा असर पड़ता है।

बालों के असमय सफ़ेद होने के अन्य कारण, जैसे की आनुवंशिकता के कारण, इसका मतलब होता है की शायद ये आपके परिवार में किसी सदस्य के साथ इस समस्या के होने के कारण आपको ये परेशानी हो रही है, इसके लावा आज के समय में लोग और आकर्षित दिखने के लिए प्राकृतिक बालों के ऊपर कई प्रकार के केमिकल्स का इस्तेमाल करते है, जिसके कारण बालों के प्राकृतिक गुण कही खो जाटव है, और आपको असमय बालों के सफ़ेद होने की समस्या से गुजरना पड़ता है।

इसके अलावा बालों के असमय सफ़ेद होने के कारण आपका ज्यादा तनाव में रहना भी हो सकता है, इसीलिए आपको तनाव ,में नहीं रहना चाहिए, नहीं तो आप समय से पहले बूढे हो सकते है, तो आइये आज हम आपके लिए ऐसी ही समस्या का समाधान लाएं है, जिसके कारण आपको असमय बालों के सफ़ेद होने की समस्या से निजात मिल जायेगा, और आपके बाल काले व् घने होने के साथ उनकी प्राकृतिक रूप से जान भी उनमे वापिस आ जाएगी, परंतु आपको इन उपाय का इस्तेमाल धैर्य और नियमित रूप से करना है।

असमय बालों को सफ़ेद होने की समस्या से बचाने के लिए टिप्स:-

प्याज के पेस्ट का इस्तेमाल करें:-

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प्याज़ के पेस्ट का इस्तेमाल करने से आपके सफ़ेद बालों को काले होने में मदद मिलती है, इसके इस्तेमाल के लिए आप प्याज का पेस्ट बनाकर अच्छे से अपने बालों में लगाएं, और इसे थोड़ी देर के लिए छोड़ दें, कुछ दिन तक रोजाना आप नहाने से पहले अपने बालों में प्याज का पेस्ट ऐसे ही लगाते रहें, और फिर बालों को अच्छे से धो लें, तो थोड़ी दिनों में ही आपको इसका असर दिखने लगेगा, और आपके बाले सफ़ेद से काले होने लग जायेंगे।

निम्बू और आंवले का इस्तेमाल करें:-

निम्बू और आवला बालों के लिए जादू का काम करते है, और साथ ही बालों को हमेशा खूबसूरत बनाएं रखने में मदद भी करते है, इसके लिए आपको नीबू के रस में आंवले का पाउडर मिलाकर अच्छे से उसे अपने बालों में लगाएं, इसमें विटामिन सी की मात्रा भरपूर होने के कारण ये सफ़ेद बालों को काले होने में मदद मिलती है, इसके आलावा आपको शैम्पू के बाद भी आंवले के पानी से ही सर को धोना चाहिए, ऐसा करने से आपके बाल कंडीशन भी हो जाते है। और साथ ही इनका रंग भी बरक़रार रहता है। आप सूखे आंवले को उबाल कर जब पानी आधा रह जाये तो उस पानी में मेहँदी और नीबू का रस मिलाकर बालों में लगा सकती है, इससे भी आपके बालों को काला होने में मदद मिलती है।

तिल का इस्तेमाल करें:-

यदि आप बालों के सफ़ेद होने की समस्या से परेशान है तो इस समस्या से निजात पाने के लिए आपको तिल का सेवन भी बहुत फायदा पंहुचा सकता है, इसके लिए आपको तिल को अपने आहार में शामिल करना चाहिए, इसके अलावा बालों में आपको तिल के तेल की मालिश भी अच्छे से करनी चाहिए, ताकि आपको असमय बालों के सफ़ेद होने की समस्या से निजात मिल सकें, और आपके बाल घने व् काले हो सकें।

काली मिर्च और दही का उपयोग करें:-

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काली मिर्च और दही का उपयोग करने से भी आपको बालों को सफ़ेद से काल करने में मदद मिल सकती है, इसके लिए आप हफ्ते में तीन से चार बार थोड़ी सी काली मिर्च और एक चमच्च नीबू के रस को अच्छे से मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें, और उसके बाद इसे अच्छे से अपने बालों में लगायें, और 20 मिनट के बाद अच्छे से अपने बालों को धो लें, ऐसा करने से आपको थोड़े ही दिनों में इसका असर दिखने लगेगा, और आपके बालों को सफ़ेद से काल होने में मदद मिलेगी।

कड़ी पत्ते का इस्तेमाल करें:-

कड़ी पत्ते का इस्तेमाल करके भी आप सफ़ेद हो रहे बालों को काला बना सकते है, इसके लिए आप जब भी नहाने जा रहें हो उससे एक घंटे पहले आप कड़ी पत्ते को पानी में डुबाकर रख दें, और फिर उसी पानी से आचे से सर को धो लें, थोड़े ही दिनों में आपको इसका असर दिखने लगेगा, और आपके बालों का रूखापन भी दूर होने के साथ बाल मुलायम व् चमकदार भी बन जायेंगे।

मेहँदी का इस्तेमाल करें:-

मेहँदी और दही को बराबर मात्रा में मिलाकर अच्छे से एक पेस्ट तैयार करें, और हफ्ते में कम से कम एक दिन ही आप इस उपचार को अपने बालों पर इस्तेमाल करे, आपको इसका असर खुद ही दिखेगा, साथ ही आपके बालों को प्राकृतिक रूप से काला करने में बहुत मदद मिलेगी, और बालों की अन्य परेशानियों से भी निजात मिलेगा।

ब्लैक टी कॉफ़ी का इस्तेमाल करें:-

यदि आपके बाल सफ़ेद हो रहें है तो आपकी इस परेशानी के लिए ब्लैक टी कॉफ़ी आपकी बहुत मदद कर सकती है, इसके लिए आपको ब्लैक टी या कॉफ़ी के अर्क से अपने बालों को अच्छे से धोएं इससे आपके बाल शाइनी होने के साथ काले होने में भी मदद मिलेगी, और बालों को प्राकृतिक रूप से फायदा भी मिलेगा।

काली मिर्च का इस्तेमाल करें:-

काली मिर्च को पानी में अच्छे से उबाल लें, और फिर जब आप सर धो ले, तो आखिरी में इस पानी को अपने सर में डालें, और बालों को धोएं, ऐसा करने के बाद आपगली बार फिर इसी तरह से करें, थोड़े ही दिनों में इसका असर आपको दीखनेलग जायेगा, और साथ ही आपके सफ़ेद बालों को काला होने में मदद मिलेगी, और आपके बाल रेशमी व् चमकदार हो जायेंगे।

नारियल के तेल का इस्तेमाल करें:-

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वैसे तो यदि आप अपने बालों में मालिश करते है, और अच्छे से अपने बालों का ध्यान रखते है, तो आपके बाल हमेशा चमकदार व् स्वस्थ रहते है, लेकिन यदि आपके बाल सफ़ेद हो रहें है तो आप नारियल के तेल में नीबू मिलाकर सर धोने से थोड़ी देर पहले अपने बालों में अच्छे से लगाएं, ऐसा करने से आपको इस समस्या का धीरे धीरे समय मिल जायेगा, और आपके बालों को सफ़ेद से काला होने में मदद मिलेगी।

बालों को सफ़ेद से काल बनाने के लिए अन्य टिप्स:-

  • बालों में देसी घी की मालिश को नियमित रूप से करने पर आपको बालों को काला करने में मदद मिलती है।
  • लौकी को सुखाकर नारियल के तेल में पकाकर उसे छान ले, अब इस तेल से यदि आप हफ्ते में दो दिन भी मसाज करते है, तो अभी आपके सफ़ेद बालों को काला होने में मदद मिलेगी।
  • अमरुद की पत्तियो का पेस्ट बनाकर बालों में लगाने से भी आपके सफ़ेद बालों को काले होने में मदद मिलती है।
  • तोरई को नारियल के तेल में पकाकर काला होने तक अच्छे से पकाएं और उसके बाद उसे छान ले, अब इस तेल से यदि आप हफ्ते में दो दिन भी मसाज करते है, तो अभी आपके सफ़ेद बालों को काला होने में मदद मिलेगी।
  • आंवले और आम की गुठली को पानी के साथ अच्छे से पीस लें, इससे भी आपके बालों को काला होने में मदद मिलती है।
  • आंवले का रस, नींबू का रस और बादाम का तेल मिलाकर बालों की जड़ों में लगाएं, इससे भी आपकी इस समस्या का समाधान हो जायेगा।
  • अदरक को कद्दूकस करके उसमे शहद को मिलाकर अपने बालों में अच्छे से लगाने पर भी आपको इस समस्या से आराम मिलता है।
  • अदरक को कद्दूकस करकर उसमे दूध मिलाकर एक गाढ़ा पेस्ट तैयार करके उसे अपने बालों में अच्छे से लगाएं, ऐसा करने से आपको थोड़े ही दिनों में इस परेशानी से छुटकारा मिल जायेगा।
  • बालों ,में शहद को लगाने से भी बालों को काला होने में मदद मिलती है।
  • गाय के कच्चे दूध को अच्छे से अपने बालों में लगाएं और फिर अगले दिन अपने बालों को अच्छे से धो लें, आपके बाल सूंदर व् कामिल होने के साथ काले भी हो जायेंगे।

असमय बालों के सफ़ेद होने की समस्या से निजात पाने के टिप्स, सफ़ेद बालों को काला करने के नुस्खे, क्या आप सफ़ेद बालों से परेशान है? अपनाएं ये तरीके, सफ़ेद बालों को काला करने के आसान टिप्स, safed baalon ko kaala karne ke tips, tips to turn white hair into black

मलेरिया के घरेलू उपाय

Home Remedies for Malaria

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बारिशों और गर्मियों के मौसम में फैलने वाली सबसे बड़ी बिमारियों में से एक है वायरल बुखार जिसे मलेरिया, डेंगू और स्वाइन फ्लू के नाम से भी जाना जाता है। मलेरिया और डेंगू के पीछे कुछ विशेष प्रजाति के मच्छर होते है जबकि स्वाइन फ्लू सूयर में पाए जाने वाले बैक्टीरिया से फैलता है। परन्तु इनमे से सबसे दुखदाई और परेशान करने वाला बुखार मलेरिया होता है जो की एक तरह संक्रामक रोग होता है। यह बुखार प्रोटोज़ोआ परजीवी के द्वारा फैलता है। इस बीमारी को फैलाने का काम मादा एनोफिलेज मच्छर करता है।

यह प्रक्रिया कुछ इस प्रकार होती है, जब कोई मादा एनोफिलीज मच्छर किसी मलेरिया ग्रस्त व्यक्ति को काटती है तो व्यक्ति के शरीर से मलेरिया संक्रमित खून खींच लेती है है जिसमे मलेरिया के कीटाणु मौजूद होते है। और जब यही मच्छर किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटता है तो मलेरिया के कीटाणु उसके शरीर में प्रवेश कर जाते है और व्यक्ति बुखार से ग्रसित हो जाता है।

क्या है मलेरिया?malaria

मलेरिया, बेहद खतरनाक बुखार है जिसमे जरा सी लापरवाही बरतने पर रोगी की जान भी जा सकती है। गर्मी और बरसात के मौसम में यह बुखार बहुत तेजी से फैलता है। मलेरिया परजीवी विशेष रूप से व्यक्ति की लाल रक्त कोशिकाओं को प्रभावित करता है जिससे रोगी के शरीर में खून की कमी हो जाती है और वह कमजोर हो जाता है। इसके अलावा यदि समय पर ध्यान नहीं दिया जाए तो इसे बीमारी से लिवर भी प्रभवित हो सकता है जिससे वह पीलिया जैसी खतरनाक बीमारी के चपेट में आ सकता है। इस बुखार के होने के बाद रोगी के शरीर का तापमान 101 से 105 डिग्री तक रहता है। और क्योंकि यह एक संक्रमक रोग है तो इसके होने के पश्चात रोगी का विशेष ध्यान रखा जाता है और उसे मच्छरों के काटने से बचाया जाता है। ताकि रोग और बढे नहीं।

वैसे तो इस बीमारी में सभी डॉक्टरी परामर्श लेना बेहतर समझते है लेकिन डॉक्टरी सलाह के अलावा स्वयं देखभाल करना और उसका उपचार करना भी बेहद जरुरी है ताकि अगर समस्या बढे तो उसे समय रहते कंट्रोल किया जा सके। यहाँ हम आपको मलेरिया बुखार के कुछ घरेलू उपायों के बारे में बताने जा रहे है जिनकी मदद से इस बीमारी को जड़ से खत्म किया जा सकता है। लेकिन एक बात का ध्यान रखे की इनका इस्तेमाल तभी करें जब आपका डॉक्टर इसकी सलाह दें। क्योंकि अगर आपने बिना डॉक्टरी सलाह के रोगी पर इनका इस्तेमाल किया तो हो सकता है इन उपायों के नकारात्मक प्रभाव आपके सामने आ जाएं।

मलेरिया के घरेलू उपाय :-

1. तुलसी :

तुलसी का जितना महत्व पूजा में है उतना ही आयुर्वेद में भी। इसकी मदद से कई बिमारियों का इलाज आसानी से किया जा सकता है। इसीलिए हर घर में तुलसी का पौधा अवश्य होता है। मलेरिया के उपचार के लिए 10 ग्राम तुलसी के पत्ते और 7 से 8 मिर्च को पानी में पीसकर सुबह और शाम रोगी को खिलाएं। इससे बुखार दूर करने में मदद मिलेगी। आप चाहे तो इसमें शहद भी मिला सकते है। इसके अलावा तुलसी के पौधे से आने वाली खुशबु मच्छरों को भगाने में भी मदद करती है।

2. अदरक :malaria

अदरक का सेवन करने से कई बीमारियां छू मंतर हो जाती है और उन्ही बिमारियों में से एक है मलेरिया जिनमे अदरक का प्रयोग करना बहुत लाभकारी होता है। इसके लिए थोड़ी सी अदरक में 2 से 3 चम्मच किशमिश डालकर पानी के साथ उबाल लें। जब पानी उबल उबल कर आधा रह जाए तो इसे गैस से उतारकर ठंडा कर लें। अब दिन में दो बार इसका सेवन करें। इसके अलावा अदरक के रस के साथ हरसिंगार के पत्तों और शक़्कर को खाने से भी मलेरिया में फायदा होता है।

3. नीम :

नीम का पेड़ मलेरिया और अन्य बहुत सी बिमारियों को दूर करने में आपकी मदद कर सकता है। इस पेड़ की खुशबु वायरस को फैलने से रोकती है। इस बिनारी में नीम के तने की छाल को उबालकर काढ़ा बनाकर पीने से लाभ होता है। और बुखार में आराम मिलता है। इसके अलावा नीम के हरे पत्ते और चार काली मिर्च को पीसकर पानी में उबालकर और छानकर पीने से भी फायदा होता है। इसके अतिरिक्त नीम के तेल में नारियल या सरसों के तेल को मिलाकर शरीर पर मालिश करने से भी बुखार उतर जाता है।

4. गिलोय :

यह एक आयुर्वेदिक बेल है, जिसमे सभी प्रकार के बुखार विशेष कर मलेरिया के रोगों से लड़ने के गुण मौजूद होते है। गिलोय के काढ़े या रस में शहद मिलाकर 40 से 70 मिलीलीटर की मात्रा का नियमित सेवन करने से बुखार में आराम मिलता है।बुखार होने पर 40 ग्राम गिलोय को कुचलकर मिटटी के बर्तन में पानी मिलाकर रात भर के लिए ढक कर रख दें। सुबह इसे मसलकर, छानकर रोगी को 80 ग्राम की मात्रा दिन में तीन बार देने से बुखार ठीक हो जाता है।

5. अमरुद :

अमरुद भी मलेरिया की समस्या में बहुत लाभकारी होता है। यदि किसी व्यक्ति को मलेरिया हो जाए तो उसे रोजाना दिन में तीन बार अमरुद खिलाना चाहिए।अमरुद की तुलना में इसके छिलके में बहुत अधिक मात्रा में विटामिन सी पाया जाता है जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है। इसलिए कभी भी अमरुद का छिलका हटाकर नहीं खाना चाहिए।

6. धतूरा :

हिन्दुओं में इसका इस्तेमाल शिव जी की पूजा के लिए किया जाता है, परन्तु इसका इस्तेमाल करके मलेरिया बुखार को भी ठीक किया जा सकता है। जी हां, यह शरीर के अंदर से मलेरिया के वायरस को खत्म करके इसबुखार से निजात दिलाने में मदद करता है। प्रयोग के लिए दो धतूरे के पत्ते लेकर उनका रस निकाल लें और फिर इसमें इतना गुड़ मिलाएं की छोटी छोटी गोलिया बनाई जा सके। उसके बाद रोजाना सुबह जागकर इनका सेवन करें। इससे मलेरिया ठीक होगा।

7. दालचीनी :dalchini

दालचीनी का इस्तेमाल करके भी मलेरिया की बीमारी से राहत पाई जा सकती है। इसके लिए एक ग्लास पानी में एक चम्मच शहद, आधा चम्मच काली मिर्च का पाउडर और एक चम्मच दालचीनी पाउडर मिलाएं और अच्छे से उबाल लें। अब पानी को ठंडा करके इसका सेवन करें। दो बार इस उपाय का प्रयोग करने से मलेरिया में जल्द राहत मिलेगी।

8. जीरा :

इसके इस्तेमाल के लिए एक चम्मच जीरा लें और उसे अच्छे से पीस लें और अब इसमें तीन गुना गुड़ मिला लें। अच्छे से मिला कर इनकी गोलिया बना लें। अब इन गोलियों को दिन में तीन बार पानी के साथ लें। नियमित रूप से सेवन करने से बुखार ठीक हो जाएगा। अगर आपको गोलिया नही बनानी है तो मिश्रण को तीन हिस्सों को बांटकर पानी के साथ इसका सेवन करें फायदा मिलेगा।

परवल गर्भवती महिला के लिए कितना फायदेमंद है?

प्रेगनेंसी में परवल

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान हरी सब्जियों का भरपूर सेवन करने की सलाह दी जाती है और हरी सब्जियों में परवल भी शामिल होता है। साथ ही परवल में विटामिन सी, विटामिन बी 1, विटामिन बी 2, विटामिन ए, एंटीऑक्सीडेंट्स, पोटैशियम, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, फाइबर, कैल्शियम आदि पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। जो प्रेग्नेंट महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं, इसीलिए प्रेग्नेंट महिला को परवल को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए ताकि इसमें मौजूद पोषक तत्वों के बॉडी में होने के कारण प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु को भी स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

प्रेगनेंसी में परवल खाने के फायदे

गर्भवती महिला यदि परवल का सेवन करती है तो इसका सेवन करने से प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली बहुत सी परेशानियों से गर्भवती महिला को निजात मिलने के साथ, बहुत से सेहत सम्बन्धी फायदे भी मिलते हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की गर्भवती महिला को परवल खाने से कौन से फायदे मिलते हैं।

पाचन क्रिया

फाइबर, पोटैशियम, फॉस्फोरस की मात्रा परवल में भरपूर मात्रा में मौजूद होती है, ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान परवल का सेवन करने से पाचन क्रिया को दुरुस्त रहने में मदद मिलती है। साथ ही इसके सेवन से कब्ज़, पेट में गैस, पेट में जलन जैसी परेशानियों से भी निजात पाने में मदद मिलती है, साथ ही महिला को भूख की कमी की समस्या को दूर करने में भी फायदा मिलता है।

ब्लड की सफाई

परवल में विटमिन ए, विटामिन सी, पोटैशियम, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस जैसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं। जो बॉडी में उत्तकों को साफ़ करने के साथ ब्लड की सफाई करने में मदद करते हैं, और उसमे मौजूद विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करते हैं। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान ब्लड इन्फेक्शन जैसी परेशानी से गर्भवती महिला को बचे रहने में मदद मिलती है।

कोलेस्ट्रॉल कण्ट्रोल

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला के स्वस्थ रहने के लिए बॉडी में कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखना बहुत जरुरी होता है। और परवल का सेवन करने से गर्भवती महिला के कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में मदद मिलती है क्योंकि इसमें कैलोरी की मात्रा कम होती है।

इम्युनिटी

इम्यून सिस्टम का बेहतर होना गर्भवती महिला के लिए बहुत जरुरी होता है, क्योंकि इम्युनिटी के बेहतर होने के कारण गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को हर तरह के संक्रमण से बचे रहने में मदद मिलती है। और परवल में एंटी ऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं जो गर्भवती महिला के इम्यून सिस्टम की मजबूती को बनाए रखने में मदद करते है।

कैल्शियम

परवल में कैल्शियम भी भरपूर मात्रा में मौजूद होता है जो गर्भवती महिला की हड्डियों को मजबूत रखने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु की हड्डियों के बेहतर विकास में भी मदद करता है।

परवल खाने के नुकसान

प्रेगनेंसी के दौरान हर चीज का सेवन पर्याप्त मात्रा में ही करना चाहिए, क्योंकि जरुरत से ज्यादा यदि किसी भी चीज का सेवन किया जाए तो यह गर्भवती महिला के लिए नुकसानदायक हो सकता है। ऐसे की यदि जरुरत से ज्यादा यदि गर्भवती महिला परवल का सेवन करती है तो इसके कारण गर्भवती महिला को पेट खराब होने जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

तो यह हैं कुछ फायदे जो गर्भवती महिला को परवल का सेवन करने से मिलते हैं, ऐसे में गर्भवती महिला को परवल का सेवन भी प्रेगनेंसी के दौरान जरूर करना चाहिए।

प्रेगनेंसी के दौरान घी कब खाना चाहिए

गर्भवस्था महिला के लिए एक ऐसा समय होता है जहां क्या खाना है। केवल इसी चीज का ध्यान नहीं रखना होता है। बल्कि कितनी मात्रा में और प्रेगनेंसी के दौरान कब उस चीज का सेवन सही होता है। इन बातों का ध्यान रखना भी जरुरी होता है। क्योंकि महिला द्वारा खान पान में बरती थोड़ी सी लापरवाही से केवल महिला का स्वास्थ्य ही प्रभावित नहीं होता है। बल्कि गलत खान पान और गलत समय पर खान पान शिशु पर भी नकारात्मक असर डाल सकता है। तो आइये आज हम प्रेगनेंसी के दौरान देसी घी का सेवन गर्भवती महिला को कब करना चाहिए इसके बारे में बात करने जा रहे हैं।

प्रेगनेंसी में कब करें घी का सेवन

  • गर्भवती महिला वैसे तो प्रेगनेंसी की पहली तिमाही से ही घी का सेवन कर सकती है।
  • और प्रेगनेंसी के आखिर तक इसे अपने आहार में ले सकती है।
  • क्योंकि घी में मौजूद पोषक तत्व गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी फायदेमंद होते हैं।
  • लेकिन महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की वो घी का सेवन करने से पहले एक बार डॉक्टर से जरूर राय लें।

प्रेगनेंसी के दौरान कितनी मात्रा में करें घी का सेवन

  • एक दिन में गर्भवती महिला दो से तीन चम्मच घी का सेवन कर सकती है।
  • लेकिन महिला को रोटी पर लगाकर, सब्ज़ी या दाल में डाल कर, दूध में डालकर ही घी का सेवन करना चाहिए।

प्रेगनेंसी के दौरान घी का सेवन कब नहीं करना चाहिए

  • यदि महिला का वजन ज्यादा है तो महिला को घी का सेवन करने से बचना चाहिए।
  • क्योंकि घी का सेवन करने से महिला के वजन में और ज्यादा बढ़ोतरी हो सकती है।
  • और महिला का बढ़ता वजन केवल प्रेगनेंसी के दौरान महिला की मुश्किलें नहीं बढ़ाता है बल्कि इससे शिशु की सेहत को नुकसान भी हो सकता है।
  • यदि गर्भवती महिला को उल्टी, जी मिचलाने जैसी समस्या अधिक है तो भी महिला को घी का सेवन करने से बचना चाहिए।
  • कुछ महिलाओं को घी की सुगंध से एलर्जी होती है।
  • ऐसे में यदि गर्भवती महिला को भी यह समस्या है।
  • तो भी प्रेग्नेंट महिला को घी का सेवन करने से बचना चाहिए।

तो यह है प्रेगनेंसी में घी का सेवन कब करना चाहिए उससे जुड़े कुछ टिप्स, ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला घी का सेवन करती है। तो महिला को इन बातों का ध्यान जरूर रखना चाहिए। ताकि प्रेग्नेंट महिला और शिशु को घी का सेवन करने के केवल फायदे ही मिल सकें। और किसी भी तरह का नुकसान न हो।

त्वचा पर बने चकत्ते के घरेलू इलाज

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स्किन पर चकत्ते होने के कारण और उपाय

त्वचा पर लाल रंग के दाने या निशान जिनमे खुजली, जलन या सूजन हो उन्हें चकत्ते कहते हैं। सामान्यतौर पर यह समस्या गर्मियों के मौसम में अधिक होती है। इस समय की गर्मी, तेज धूप और पसीना इस समस्या का कारण बनते हैं। चकत्ते होने पर त्वचा में लालिमा दिखती है, कई बार सूजन भी आ जाती है और त्वचा के उस हिस्से में तेज जलन महसूस होती है। जो बैक्टीरिया के संक्रमण के कारण होती है। त्वचा पर चकत्ते होने पर लाल दानें भी दिखने लगते हैं। सामान्य भाषा में इसे रैशेस भी कहा जाता है।

चकत्ते होने के कारण

त्वचा पर चकत्ते होने के कई कारण हो सकते हैं यहाँ उन्ही के बारे में बताया गया है।

  • एलर्जी
  • कोई विशेष रोग
  • किसी वस्तु से रिएक्शन
  • दवाएं
  • बैक्टेरियल संक्रमण
  • वायरल संक्रमण
  • प्रतिरक्षा प्रणाली का कमजोर होना आदि।

इसके अलावा भी कुछ खास कारण होते हैं जिनकी वजह से त्वचा पर चकत्ते हो जाते हैं।

चिकनपॉक्स या चेचक

यह एक विशेष प्रकार के विषाणुओं से फैलने वाली संक्रामक बिमारी है। जिसकी शुरुवात में छाती, पीठ पर किसी हिस्से में खुजली महसूस होती है उसके बाद लाल, फुंसियां और फोड़े निकलने लगते हैं। इस समस्या के दौरान बुखार और गले में खराश की समस्या भी हो जाती है।

रूबेला

यह बिमारी भी विषाणुओं से होने वाले संक्रमणों में से एक है। यह किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है। रूबेला होने पर लाल पर लाल चकत्ते दिखने लगते हैं। इस बीमारी को खसरा के नाम से भी जाना जाता है। रूबेला होने पर सिर दर्द, गले में खरास, बुखार और सूजन की समस्या भी हो सकती है।

पित्ती उठना

बहुत से लोगों को एलर्जी की वजह से पित्ती उठने लगती है। पित्ती उठने पर त्वचा गुलाबी रंग की हो जाती है। उसमे जलन और सूजन के साथ-साथ खुजली भी होती है।

दवाओं का साइड-इफ़ेक्ट

कुछ लोगों को दवाओं से रिएक्शन हो जाता है जिसके कारण त्वचा पर लाल दाने या चकत्ते दिखने लगते हैं। इस समस्या के होने पर त्वचा हल्की बैंगनी रंग की हो जाती है।

इसके अलावा कपड़ों की डाई, विषैले पौधों से संपर्क, बालों में रुसी, घमौरी, एक्ज़िमा, जहरीले कीड़े के काटने, सोरायसिस और हेयर डाई आदि के कारण भी त्वचा पर चकत्ते हो सकते हैं।

चेहरे पर चकत्ते के घरेलू इलाज

ओलिव आयल

ओलिव आयल रैशेज की समस्या से निजात दिलाने में बहुत लाभकारी होता है। इसके इस्तेमाल से तुरंत राहत महसूस होती है। एलर्जी के कारण हो रही खुजली, जलन और सूजन को खत्म करने में भी ओलिव आयल बहुत लाभदायक है।

विटामिन ई और कॉड लिवर आयल

रैशेज होने पर इन दोनों को अच्छे से मिलाकर त्वचा पर मालिश कर लें। और रात भर ऐसे ही छोड़ दें। कुछ ही दिनों के प्रयोग में रैशेज खत्म हो जाएंगे।

तुलसी के पत्ते और ओलिव आयल

तुलसी के पत्तों का रस निकालकर उसमे काली मिर्च,लहसुन, नमक और ओलिव आयल मिला लें। और त्वचा के चकत्तों पर लगाएं। थोड़ी जलन हो सकती है, पर उपाय को करके आपको काफी राहत मिलेगी। और जलन भी ठीक हो जाएगी।

विनेगर और शहद

त्वचा पर चकत्ते होने पर शहद में एक चम्मच विनेगर मिलाकर एक ग्लास पानी में मिलाएं और इसे प्रभावित हिस्से पर लगाएं। जलन से राहत मिलेगी। और समस्या ठीक होगी।

इन बातों का खास ध्यान रखें

अगर त्वचा के किसी भी हिस्से में चकत्ते हैं तो इन बातों का खास ध्यान रखें। क्यूंकि जरा सी लापरवाही समस्या को और बढ़ा सकती है।

  • साबुन का इस्तेमाल करने से बचें।
  • बिलकुल गर्म पानी का प्रयोग करने की बजाए हल्के गुनगुने पानी का इस्तेमाल करें।
  • किसी भी तरह के कॉस्मेटिक या लोशन का इस्तेमाल नहीं करें।
  • जिस स्थान पर समस्या है उसे खुला रखें, पट्टी ना बांधे और खुजाएं नहीं।
  • बहुत ज्यादा टाइट फिटिंग के कपडे नहीं पहनें। जितना हो सके लूज फिटिंग के कपडे पहनें।
  • इस माय सूती वस्त्र पहनने चाहिए जो पसीना सोख लें।
  • साफ़-सफाई का खास ध्यान रखें। त्वचा को साफ़ रखें और आस-पास बिलकुल भी गंदगी नहीं रहने दें।
  • प्रिकली हीट पाउडर का इस्तेमाल करें। इससे जलन और खुजली में आराम मिलेगा।
  • ठंडे और मसालेदार खाद्य पदार्थों के सेवन से बचें। यह जलन बढ़ा सकते हैं।
  • पर्याप्त मात्रा में पानी पियें और तेज धुप में निकलने से बचें।

चेहरा गोरा करने के तरीके

चेहरे का गोरापन

चाहे महिला हो या पुरुष चेहरे की सुंदरता को बढ़ाने के लिए तरह तरह के ब्यूटी ट्रीटमेंट लेते हैं, महंगे से महंगे फेस वाश व् अन्य ब्यूटी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं। और इसके बाद भी यदि चेहरे की ख़ूबसूरती कम होने लग जाये तो यह उन्हें परेशान कर सकता है। इसीलिए वो शरीर के बाकी हिस्सों के अलावा चेहरे की सुंदरता का खास ख्याल रखते हैं ताकि चेहरे की ख़ूबसूरती कम न हो। और यह सच भी है की खूबसूरत और गोरा चेहरा किसे पसंद नहीं होता है, लेकिन कई बार चेहरे की अच्छे से देखभाल न करने के कारण, धूप के कारण, प्रदूषण के बुरे प्रभाव के कारण चेहरे का गोरापन कम होने लगता है, यानी की चेहरा काला पड़ने लगता है। और चेहरे का कालापन आपकी ख़ूबसूरती को कम कर सकता है।

चेहरे को गोरा करने के टिप्स

चेहरे की ख़ूबसूरती को बरकरार रखने और इसकी ख़ूबसूरती को निखारने के लिए आप बहुत से तरीको का इस्तेमाल कर सकती हैं। तो लीजिये आज हम आपको कुछ ऐसे ही खास टिप्स बताने जा रहे हैं जो चेहरे के गोरेपन को बढ़ाने में आपकी मदद करते हैं।

निम्बू

निम्बू डेड स्किन को हटाकर चेहरे के कालेपन को दूर करने में मदद करता है, इसके लिए आप निम्बू में टमाटर का रस या निम्बू और बेसन या निम्बू में खीरे का रस मिलाकर इसका इस्तेमाल कर सकती है। तीनो में से किसी भी उपाय को नियमित करें आपको इस असर जरूर दिखाई देगा। इसके इस्तेमाल के लिए आप निम्बू के रस में बराबर मात्रा में टमाटर का रस या खीरा का रस मिलाएं उसके बाद इसे स्किन पर लगाकर स्किन को सूखने के लिए छोड़ दें। सूखने के बाद चेहरे को अच्छे से धो लें, इसके अलावा बेसन में निम्बू का रस और हल्का पानी मिलाकर एक महीन पेस्ट तैयार करके मास्क के रूप में चेहरे पर लगाएं और सूखने के बाद चेहरे को साफ़ कर दें इस उपाय को करने से भी चेहरे के रंग को निखारने में मदद मिलती है।

हल्दी

सदियों से हल्दी का इस्तेमाल चेहरे की ख़ूबसूरती को निखारने के लिए किया जाता है। इसके इस्तेमाल के लिए एक चम्मच बेसन में एक चम्मच का चौथा हिस्सा हल्दी, थोड़ा कच्चा दूध, थोड़ा निम्बू का रस मिलाकर अच्छे से मिक्स कर लें। अब इस पेस्ट को पतली लेयर के रूप में चेहरे पर लगाएं, और सूखने के बाद चेहरे को धो दें, हफ्ते में दो बार इस उपाय को नियमित रूप से करें।

आलू

आलू की स्लाइसेस काटकर चेहरे पर मसाज करें या आलू के रस से चेहरे मसाज करें, और मसाज करके थोड़ी देर छोड़ दें, और फिर साफ़ पानी से मुँह धो लें, इस उपाय को भी नियमित रूप से दिन में एक बार करने से आपको चेहरे को निखारने में मदद मिलती है।

टमाटर

एंटी ऑक्सीडेंट व् अन्य पोषक तत्वों से भरपूर टमाटर का सेवन करने से भी चेहरे का गोरापन बढ़ाने में मदद मिलती है। इसके लिए टमाटर को अच्छे से पीसकर एक पेस्ट तैयार करें, और उससे चेहरे पर मसाज करें या थोड़ी देर चेहरे पर लगाकर छोड़ दें, और फिर मुँह को धो लें, ऐसा नियमित करने से आपको फायदा मिलता है।

शहद

शहद में मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट चेहरे पर होने वाली मृत कोशिकाओं को हटाकर चेहरे की ख़ूबसूरती को बढ़ाने में मदद करते हैं। इसके इस्तेमाल के लिए एक चम्मच शहद में एक चम्मच निम्बू का रस डालकर अच्छे से मिक्स कर लें। अब इसे अपने चेहरे पर लगाएं और सूखने के लिए छोड़ दें, सूखने के बाद चेहरे को अच्छे से धो लें। हफ्ते में दो से तीन बार इस उपाय को जरूर करें।

अंडे की जर्दी

अंडे की जर्दी को चेहरे पर लगाने से भी चेहरे की ख़ूबसूरती को बढ़ाने में मदद मिलती है। इसके लिए आप अंडे की जर्दी, थोड़ा निम्बू, थोड़ा शहद एक कटोरी में डालकर अच्छे से मिक्स कर लें, अब इस पेस्ट को अपने चेहरे पर लगाएं और उसके बाद सूखने के लिए छोड़ दें। सूखने के बाद चेहरे को साफ़ पानी से धो लें और इस उपाय को हफ्ते में दो बार करें।

एलोवेरा

एलोवेरा के ताजे पत्ते को काटकर उसमे से जैल को निकाल लें, जैल निकालने के बाद चेहरे की अच्छे से मसाज करें। मसाज करने के बाद इसे सूखने के लिए छोड़ दें, उसके बाद साफ़ पानी का इस्तेमाल करके चेहरे को अच्छे से धो लें। इस उपाय को करने से चेहरे पर होने वाले दाग धब्बो को कम करने, चेहरे के कालेपन को दूर करके चेहरे की ख़ूबसूरती को बढ़ाने में मदद मिलती है।

केसर

आसान होने के साथ यह उपाय असरदार भी है, और इसमें आपको ज्यादा मेहनत भी नहीं करनी पड़ती है, इस तरीके का इस्तेमाल करने के लिए तीन से चार चम्मच कच्चे दूध में आठ दस केसर के रेशे डालकर अच्छे से मिक्स कर लें। उसके बाद इस दूध से अपने चेहरे की अच्छे से मसाज करें, मसाज करने के बाद इसे चेहरे पर सूखने के लिए छोड़ दें, और फिर चेहरे को ठन्डे पानी से धो लें।

दही

पोषक तत्वों से भरपूर दही का इस्तेमाल करने से भी चेहरे में निखार लाने में मदद मिलती है इसके लिए आप नियमित सुबह एक चम्मच दही से अपने चेहरे की अच्छे तरीके से मसाज करें। उसके बाद चेहरे को सूखने के लिए छोड़ दें, और सूखने के बाद चेहरे को साफ़ पानी से धो लें, ऐसा करने से चेहरे की डेड स्किन को हटाने और चेहरे का निखार बढ़ाने में मदद मिलती है।

तुलसी

औषधीय गुणों से भरपूर तुलसी का इस्तेमाल करने से भी चेहरे की ख़ूबसूरती को बढ़ाने में मदद मिलती है। इसके इस्तेमाल के लिए आप तुलसी के पत्तों को पीसकर उसका रस निकाल लें। अब इस रस से चेहरे पर अच्छे से मसाज करें, उसके बाद इसे सूखने के लिए छोड़ दें। और इसके सूखने के बाद गुनगुने पानी से चेहरे को साफ़ कर लें। ऐसा करने से भी चेहरे के गोरेपन को बढ़ाने में मदद मिलती है।

खीरा

खीरे का पेस्ट बनाकर या इसका रस निकालकर हफ्ते में दो से तीन बार इससे चेहरे की अच्छे तरीके से मसाज करें। मसाज करने के बाद चेहरे को सूखने के लिए छोड़ दें, चेहरे के सूखने के बाद चेहरे को साफ़ पानी से धो दें। ऐसा करने से भी चेहरे की रंगत को निखारने में मदद मिलती है।

नारियल

नारियल को अच्छे से पीसकर चेहरे पर लगाएं और उसे सूखने के लिए छोड़ दें, सूखने के बाद ताजे पानी से चेहरे को धो लें। ऐसा करने से भी चेहरे की रंगत को निखारने में मदद मिलती है, नियमित चेहरे को नारियल पानी से धोने से भी फायदा मिलता है।

तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिन का इस्तेमाल करने से चेहरे को गोरा करने में मदद मिलती है। तो यदि आप भी अपने चेहरे के गोरेपन को बढ़ाना चाहती हैं तो ऊपर दिए गए उपाय में से किसी भी एक उपाय का नियमित कुछ दिनों तक इस्तेमाल करें, आपको जरूर इसका असर अपने चेहरे पर दिखाई देगा। इसके अलावा यदि ऊपर दिए गए उपाय में से किसी चीज को स्किन पर लगाने से आपको एलर्जी की समस्या हो तो उस उपाय को न करके बल्कि किसी और उपाय का इस्तेमाल करें।

डायबिटीज के मरीज़ क्या-क्या खा सकते है?

डायबिटीज के मरीज क्या-क्या खा सकते है :- आज के समय में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिसे किसी प्रकार की कोई बीमारी नहीं होगी. कोई थाइराइड का मरीज है तो किसी को लगातार घुटनो में दर्द रहता है. लेकिन इसके अलावा एक और बीमारी ऐसी है जिससे शायद अधिकतर लोग परेशान रहते है. जी हां, हम बात कर है डायबिटीज यानी मधुमेह की. जो शरीर में इन्सुलिन के स्त्राव के कम हो जाने के कारण होती है.

ये समस्या किसी भी उम्र के व्यक्ति या बच्चे में भी हो सकती है. मधुमेह की समस्या को पूरी तरह से ठीक तो नहीं किया जा सकता लेकिन उचित देखभाल और कुछ परहेजों के बाद इसे नियंत्रित जरूर किया जा सकता है. इस बीमारी के विषय में कुछ लोगो का मानना होता है की हम ये नहीं खा सकते, हम वो नहीं खा सकते. जबकि ऐसा कुछ भी नहीं है.

हां, कुछ खाद्य पदार्थ ऐसे है जिनका सेवन डायबिटीज के मरीजों को नहीं करना चाहिए. लेकिन इसका मतलब ये नहीं है की आप खाना-पीना ही छोड़ दे. डायबिटीज को नियंत्रित करने के लिए संतुलित भोजन के साथ-साथ, समय पर खाना,सुबह की वाक और सुबह की थोड़ी सी योग भी बहुत फायदेमंद रहती है.

लेकिन अधिकतर लोग इसे नियंत्रित करने के लिए अपने पसन्दीदा भोजन को त्याग देते है. क्योंकि वे नहीं जानते की डायबिटीज में कौन-कौन से खाद्य पदार्थो का सेवन किया जा सकता है. इसीलिए आज हम आपको डायबिटीज के मरीज क्या-क्या खा सकते है इस बारे में बताने जा रहे है. ताकि आप भी अपनी पसन्द के खाद्य पदर्थो का सेवन कर सके.

डायबिटीज के मरीज़ इस बात का रखें ध्यान?

खाने के साथ-साथ मरीज़ को कुछ अन्य बातों पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए. ताकि समस्या बढ़े न. लेकिन सभी को इस बात की पूर्ण जानकारी नहीं होती. इसीलिए आज हम आपको उन सभी तथ्यों से अवगत कराने जा रहे है जिन्हें आपको ध्यान रखना चाहिए.

  • डायबिटीज के मरीज़ को खाना हमेश समय पर खाना चाहिए.
  • अधिक देर तक भूखा नहीं रहना चाहिए.
  • बार-बार खाने से बेहतर है की खाने का एक समय निर्धारित कर लें.
  • डायबिटीज के रोगी को व्रत रखने से परहेज करना चाहिए.
  • तले भुने खाने से बचें.
  • खाने के लिए शुगर फ्री टेबलेट्स का प्रयोग करें.
  • मिठाईया खाने से बचें. आप चाहे तो sugar free tablet से बनी मिठाईया खा सकते है लेकिन वो भी सीमित मात्रा में.
  • शराब से रहें दूर. या किसी प्रकार के अल्कोहल के सेवन से भी बचें.
  • डायबिटीज के मरीज़ को एक अलग तरह के आटे का निर्माण करना चाहिए और उसी से बनी रोटी का सेवन करना चाहिए.
  • अपने खाने में हरी सब्जियों को सम्मिलित जरूर करें.
  • अधिक से अधिक सलाद खाएं.

डायबिटीज के मरीज़ क्या-क्या खा सकते है?

कौन सी दालों का करें सेवन :

ऐसे तो डायबिटीज के मरीज़ को कोई भी दाल मना नहीं होती लेकिन फिर भी आपको ये पता होना चाहिए की आप कौन-कौन दालों का सेवन कर सकते है.

अरहर की दाल , चने की दाल, मूंग की दाल , मसूर की दाल, छोले (काबुली चना), काला चना, उड़द की दाल, राजमा , सोयाबीन और लोबिया.

ऊपर बताई गयी दालों में से राजमा, काबुली चना, सोयाबीन और लोबिया का सेवन अधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए. मतलब केवल आधा कटोरी आपके लिए उपयुक्त है. जबकि अन्य डालें 1 कटोरी फायदेमंद रहेंगी.

डायबिटीज के मरीज़ कौन से फलों का करें सेवन?

डायबिटीज के रोगियो के लिए इस बात पर भी ध्यान देना बेहद जरुरी है की वे कौन से फल खा सकते है और कौन से नहीं. वैसे तो डायबिटीज में किसी भी फल को खाने की अनुमति नहीं है लेकिन यदि आप खाना चाहते है तो पुरे दिन में केवल 100 gram फल का ही सेवन कर सकते है. लेकिन कुछ फल ऐसे भी है जिन्हें आपको इसका सेवन नहीं करना चाहिए.

क्या खा सकते है?

अमरुद, नाशपाती, सेब, संतरा, मौसमी, पपीता आदि फलों का सेवन आप कर सकते है.

क्या नहीं खा सकते?

आम, केला, तरबूज, चीकू, लीची, अनार, शरीफा, चेरी, अंगूर, अनानास और गन्ना आदि का सेवन डायबिटीज के मरीज़ को नहीं करना चाहिए. लेकिन एक बात का ध्यान रखें की आप चाहे कोई फल खाएं या नहीं परंतु उसके रस का सेवन कभी नहीं करना चाहिए.

कौन सी सब्जियों का करे सेवन?

ऐसे तो बहुत सी सब्जियां है जिन्हें आप खा सकते है लेकिन फिर भी आपको इस बारे में भी पता होना चाहिए की कौन सी सब्जियों को आप खा सकते है. नीचे हम उन सभी सब्जियों के नाम देने जा रहे है जिनका सेवन डाइबिटीज के मरीज़ कर सकते है.

पता गोभी, गाजर, बैंगन, भिंडी, करेला, शिमला मिर्च, कुंदरू, टिंडा, लौकी, तोरई, पालक, सोया भाजी, प्याज़, लहसुन, परवल, पत्तेदार मूली, बीन्स, मटर और सेम कुछ सब्जिया है जिनका आप सेवन कर सकते है.

कौन-कौन से अनाज का सेवन कर सकते है डाइबिटीज के मरीज़?

अनाज के विषय में आपको विशेष ध्यान रखना चाहिए क्योंकि अनाज में ग्लूकोस पाया जाता है जो शुगर लेवल को बढ़ाता है. और इन मरीजों को किसी भी पइसे हुए अनाज को छानना नहीं चाहिए. आपके लिए बेहतर होगा की आप मोटे और अंकुरित अनाजों का प्रयोग करें. नीचे हम कुछ अनाजो के नाम बताने जा रहे है जिनका सेवन आपके लिए हानिकारक नहीं होगा.

  • रोटी का सेवन आप कर सकते है.
  • लेकिन मैदे से बना कोई भी पदार्थ आप नहीं खा सकते.
  • ओटस, दलिया, अंकुरित डालें, हाई फाइबर वाले बिसकिट्स, मांड निकले हुए चावल, आटा ब्रेड या ब्राउन ब्रेड का सेवन आप कर सकते है.

आगे हम आपको उस रोटी के आटे की विधि बताने जा रहे है जिसका सेवन आप कर सकते है.

रोटी का आटा :

रोटी का आटा बनाने के लिए आप 3 से 4 तरह के अनाजो का प्रयोग कर सकते है. यहाँ हम आपको 3 अनाजो से मिलकर बनी रोटी की विधि बताने जा रहे है. जिसमे कुल 10kg आटा बनकर तैयार होगा.

सामग्री – 7kg गेंहू, 2kg काला चना, 1kg जौ.

इसके लिए सबसे पहले इन सभी अनाज को अच्छे से धो कर सूखा लें. सुखाने के बाद इन सभी को चक्की में पिसवा ले या फिर खुद पीस लें. लीजिये आपका आटा तो तैयार है लेकिन अब बारी रोटी बनाने की है. लेकिन इस समर आपको ध्यान रखना है की आटे को छाने नहीं ऐसे ही गूँथ लें. अब इसकी रोटी बना कर खाएं आपके लिए लाभकारी रहेगी.

क्या डायबिटीज के मरीज़ नॉन-वेज खा सकते है?

जी हां, आप नॉन-वेज खा सकते है लेकिन इसकी मात्रा बहुत कम होनी चाहिए. और मटन का सेवन आप नहीं कर सकते. लेकिन चिकन, फिश और अंडे का सेवन किया जा सकता है.

इसके अलावा निम्नलिखित खाद्य पदार्थो का भी सेवन किया जा सकता है :

  • आप दिन में 2 बार बिना चीनी की चाय का सेवन कर सकते है.
  • इसके अलावा बिना शुगर की कॉफ़ी दिन में दो बार पी सकते है.
  • डायबिटीज के मरीज़ आइस क्रीम का सेवन नहीं कर सकते.
  • आप मट्ठा पी सकते है.
  • टमाटर का सूप भी पी सकते है.
  • आप चाहे तो बिना चीनी का नींबू पानी भी पी सकते है.

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पूरे महीने में प्रेगनेंसी के चांस कब-कब होते हैं?

पूरे महीने में प्रेगनेंसी के चांस, हर महिला को माँ बनने की चाह होती है। क्योंकि माँ बनना जिंदगी के बेहतरीन अहसास में से एक होता है। और इसका अनुभव केवल महिला को ही होता है। ऐसे में जिन महिलाओं की माँ बनने की चाह होती है और जो गर्भधारण करना चाहती हैं। उन महिलाओं के मन में यह सवाल जरूर आ सकता है। की पीरियड्स के खत्म होने के बाद पूरे महीने में गर्भधारण के चांस कब सबसे अधिक होते हैं।

अब इसके बारे में पूरी तरह जानना तो थोड़ा मुश्किल हो सकता है। लेकिन हाँ, यह भी सच है की पूरे महीने में कुछ ऐसा समय होता है। जब महिला और पुरुष के बेहतर सम्बन्ध बनाने से महिला का गर्भ ठहरने के चांस बढ़ सकते हैं। तो आइये आज हम इस आर्टिकल में पूरे महीने में गर्भधारण के चांस कब होते हैं इस बारे में बताने जा रहे हैं।

पीरियड्स शुरू होने से लेकर पहले दस दिन

  • हर महिला को अठाइस से पेंतीस दिनों के अंतराल पर हर महीने पीरियड्स आ सकते हैं।
  • ऐसे में जब पीरियड्स आते हैं तो तीन से पांच दिन तो पीरियड्स में खत्म हो जाते हैं।
  • उसके बाद बचे पांच दिनों में सम्बन्ध यदि आप बनाते हैं।
  • तो इन दिनों में गर्भ ठहरने के चांस लगभग न के बराबर ही होते हैं।
  • क्योंकि इस दौरान अंडाशय में अंडा परिपक्व हो रहा होता है।
  • और अंडे को परिपक्व होने में कम से कम एक हफ्ते का समय लग सकता है।

ग्यारह से बीस दिनों का समय

  • और पीरियड्स खत्म होने के बाद जब अंडा परिपक्व होकर फैलोपियन ट्यूब में अंडाशय से बाहर आता है।
  • तो ऐसे में पीरियड्स शुरू होने से लेकर जो तेरह से अठारह दिन का समय होता है।
  • यह महिला का ओवुलेशन पीरियड होता है।
  • इस दौरान अंडाशय से अंडे के बाहर आने पर यदि पुरुष और महिला के बीच बेहतर सम्बन्ध बनते हैं।
  • और दोनों ही सम्बन्ध के सुख तक पहुँचते हैं।
  • तो फैलोपियन ट्यूब में मौजूद अंडे को पुरुष के शुक्राणु द्वारा निषेचित होने के चांस बढ़ जाते हैं।
  • साथ ही पुरुष के शुक्राणु भी लगभग अड़तालीस घंटे तक जिन्दा रह सकते हैं।
  • तो इस दौरान यदि कभी भी अंडा बाहर आता है तो ऐसे में निषेचन होने के चांस रहते हैं।
  • इसीलिए यदि आप गर्भधारण के लिए सोच रही हैं।
  • तो यह समय गर्भधारण के लिए सबसे सही समय होता है।

महीने के आखिरी दस दिन

  • गर्भधारण के लिए पीरियड्स खत्म होने के बाद महीने के आखिरी दस दिन में प्रेगनेंसी होने के चांस लगभग न के बराबर होते हैं।
  • क्योंकि इस दौरान बॉडी में मासिक चक्र की शुरुआत के दोबारा होने के लिए हार्मोनल बदलाव शुरू हो जाते हैं।
  • साथ ही यदि आपका गर्भ ठहर गया है तो भी बॉडी में हार्मोनल बदलाव शुरू हो जाते हैं।
  • ऐसे में यदि आपको प्रेगनेंसी के शुरूआती लक्षण बॉडी में महसूस हो या कुछ अलग सा महसूस हो तो हो सकता है की खुशखबरी हो।

तो यह है पीरियड्स के बाद पूरे महीने में प्रेगनेंसी के चांस सबसे ज्यादा कब होते हैं इससे जुड़े कुछ खास टिप्स। ऐसे में गर्भधारण के लिए ओवुलेशन पीरियड का ध्यान रखना बहुत जरुरी होता है। साथ ही इसके लिए आप चाहे तो एक बार डॉक्टर से भी राय ले सकती हैं।