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अपने शिक्षक को कैसे प्रभावित करें?

“जो पिता के पैरों को छूता है
वो कभी गरीब नहीं होता।
                                              जो मां के पैरों को छूता है
                                             वो कभी बदनसीब नही होता।
जो भाई के पैरो को छूता है
वो कभी गमगीन नही होता।
                                               जो बहन के पैरों को छूता है
                                               वो कभी चरित्रहीन नहीं होता।
जो गुरू के पैरों को छूता है
उस जैसा कोई
                 खुशनसीब नहीं होता…….”

छोटा हो या बड़ा हर किसी के जीवन में गुरु का अपना ही महत्व होता है. जहां एक ओर बचपन में गुरु हमें पढना लिखना सिखाते है वहीं दूसरी ओर बडे होने पर गुरु ही हमारे जीवन की सही रह चुनने में हमारी मदद करते है. शिक्षक केवल वो नहीं होता जो आपको पैसे के बदले ज्ञान दे बल्कि शिक्षक तो वो होता है जो आपको ये बताये की जीवन क्या है, जीवन का क्या अर्थ है और जीवन जीने का सही मार्ग क्या है.

कहते है गुरु ही है जो जिन्होंने पशुओ से इंसान को बनाया. आज कल तो शिक्षा को व्यापार बना दिया है लेकिन सही मायने में तो शिक्षक वे है जो आपको ये बताये की आज हम जो है, उससे बेहतर कैसे बन सकते है. शायद इसीलिए ही गुरु व् शिक्षक का दर्जा भगवन से भी ऊपर रखा गया है. कहते है एक अच्छा शिक्षक बच्चा की जिन्दगी सवार सकता है लेकिन उसके लिए जरुरी है की आपका आपके गुरु से अच्छा ताल मेल हो ताकि आपको उनका स्नेह मिल सके.

लेकिन अक्सर हम जैसे कई बच्चे इसी दुविधा में फंसे रहते है की अखिरकार गुरु जी को खुश कैसे किया जाये. इसीलिए आज हम आपको कुछ ऐसे अनमोल टिप्स देने जा रहे है जिनकी मदद से आप अपने शिक्षक को प्रभावित कर सकते है और उनके पसंदीदा विद्यार्थी बन सकते है.

अपने शिक्षक को प्रभावित करने की टिप्स :- 

ड्रेस हो परफेक्ट :

कपडे आपके व्यक्तित्व को दर्शाने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है. इसीलिए स्कूल या कॉलेज जाते समय इस बात की पुष्टि कर ले की आपने ड्रेस सलीके से और सही तरीके से पहनी है या नहीं. इसके अलावा अगले दिन स्कूल में जिन कपड़ो को पहनना है उन्हें अच्छे से धोकर प्रेस कर लें. ज्यदा स्टाइलिश ड्रेस से बेहतर होगा की सही ड्रेस पहनी जाये. ड्रेस का चयन करते समय इस बात का जरुर ध्यान रखे की आपके शिक्षक को किस प्रकार की ड्रेस अच्छी लगती है. इसके अलावा अपने बाल, चेहरा अच्छे से धोएं और रोज नहायें.

समय के पाबंद बने :

ये बात तो हर कोई कहता है की समय का पाबंद बनना चाहिए. लेकिन अक्सर हम इस बात को भूल जाते है. यदि आप वाकई आपने शिक्षक को प्रभावित करना चाहते है तो स्कूल में कभी भी लेट न हो क्योंकि यदि आप रोज-रोज लेट होते है तो आपको स्कूल के बाहर रोका जायेगा और क्लास से बाहर भी कर दिया जायेगा. इसके अलावा स्कूल में सुस्ती दिखाना दर्शाता है की आप जिम्मेदार नहीं है, इसीलिए हमेशा स्कूल जल्दी पहुंचे. यदि कभी गलती से लेट हो भी गए है तो बहाने न बनाये. क्योंकि आपके शिक्षक को वर्षो से उन्हें ऐसे सुस्त बच्चो के बहाने सुनने का तजुर्बा होता है.

शिक्षक से करें हलकी फुलकी बातचीत :

बातचीत दो व्यक्तिओ के बीच किसी रिश्ते की शुरुआत का पहला चरण होता है. इसीलिए अपने शिक्षक से धीरे-धीरे हलकी फुलकी बात-चित करना प्रारंभ कर दे. आप उनसे कह सकते है,”नमस्ते! आपका वीकेंड कैसा रहा? इसके साथ ही उन्हें अपने बारे में भी बताये. अपने शिक्षक के लिए क्लासरूम के दरवाजे आदि खोले और हॉल या गलियारे में उनके नजदीक से गुजरते वक्त उन्हें हैलो कहे. कहीं पर भी अपने शिक्षक की बुरे न करें, चाहे आप उन्हें नापसंद ही क्यों न करते हो.

क्लास में जाएँ पूरी तैयारी के साथ :

क्लासरूम में जाने से पहले अपनी सभी चीजो को इक्कठा कर लें और हमेशा किसी भी चीज के लिए तैयार रहे. हर सब्जेक्ट से जुड़ा जरुरी समान बैग में अपने साथ लेकर जाएँ. क्लास में शीषक जिन चीजो का जिक्र कर रहे है या उनके बारे में बात कर रहे है उन्हें नोट करते रहे और उनके नोट्स लें क्योंकि नोट्स आपको अध्यन करने में मदद करते और और जब आप अध्यन करते है तो आपके टेस्ट में बेहतर मार्क्स आयेंगे जिससे आपके शिक्षक खुश होंगे.

क्लास की कतार में बैठे आगे (संभव हो तो) :

क्लास में आगे की कतारों में बैठना पिछली कतारों में बैठने की तुलना में ज्यादा लाभकारी होता है. क्योंकि पीछे बैठने से मन एकाग्रचित नहीं हो पाता और आपका ध्यान पढाई में नहीं लगता. अध्ययनों ने दिखाया है की आमतौर पर शिक्षको का आगे की ओर बैठने वाले बच्चो के प्रति अधिक रुझान होता है क्योंकि वे बच्चे अपना वक्त बर्बाद नहीं करते. सीधा बैठे और झुके नहीं. यदि आप बोर्ड को ठीक तरह से नहीं देख पाते तो चश्मे या कांटेक्ट लेंस लगाने के बारे में सोचे.

अटेंडेंस को रखें बेहतर :

बहुत ही जरुरी हो तभी स्कूल से छुट्टी लें. अन्यथा रोजाना स्कूल जाये. इसके साथ ही आप क्यों नहीं आ सकते है, इस बात के बारे में अपने शिक्षक को सच बता दें इसमें किसी प्रकार का संकोच और झिझक न करें. छुट्टी से आने के बाद अपने क्लास के दोस्तों से नोट्स, असाइनमेंट और होमवर्क प्राप्त करें. और सारा काम पूरा कर लें. बाद में इस काम को अपने शिक्षक को दिखाना न भूलें.

कक्षा में अपना ध्यान कंसन्ट्रेट करें :

क्लास में यदि शिक्षक आपसे बात कर रहे है तो उनकी आँखों में देखकर बात करे, बोर्ड पर देखे और नोट्स बनाये. भले ही आपके शिक्षक इसके लिए मना करें. इसके अलावा जिन चीजो पर उन्होंने जोर दिया था उसे नोट्स में हाईलाइट कर लें या उनके चारो ओर घेरा बना दे. आपको भटकने वाली सभी चीजो से दूर रहे. अपना मोबाइल फ़ोन बंद रखे. जब शिक्षक बोल रहे हो तो ओना ipad न सुने या आस-पास किसी से बात न करें. यदि ऐसा मुश्किल हो तो क्लास में अपने दोस्तो से दूर बैठे.

क्लास की गतिविधियों में भाग लें :

जब teacher किसी टॉपिक पर बात कर रहे हो तो उनसे उससे जुड़े सवाल पूछे और टिपण्णी करे. रोज की क्लास में कम से कम तीन चार बार भाग लेने का उद्देश्य रखे. लेकिन उन चर्चो में हावी न bane क्योंकि उन्हें ध्यान खीचने वाला बच्चा नहीं अपितु हर कार्य में भाग लेने वाले विद्यार्थियो की जरुरत है. यदि शिक्षक किसी अन्य विषय पर बात करने लगे है तो उन्हें टोककर उनसे टॉपिक पर वापस लौटने का अनुरोध करने से न डरे. आपको सब कुछ समझ नहीं आया इस बात को स्वीकार करने से आपके शिक्षक आपका सम्मान करेगे.

सहायता लेने के लिए कक्षा के बाद भी रुके :

स्पेशल तसत या exams के दौरान आपके पढाई के प्रति रुझान्ता को दर्शाता है. इसके साथ ही ये आपके टेस्ट के लिए भी बेहद उपयोगी होता है. अगर आपको क्लास में किसी question में कोई समस्या हो रही है तो स्कूल के बाद कम से कम आधा घंटे रुके. लेकिन आपके शिक्षक को भी किसी कार्य की वजह से अचानक जाना पड़ सकता है इसीलिए उनसे इस बारे में पहले ही बात कर लें.

होमवर्क पूरा रखे :

होमवर्क क्लास में आपकी छवि बनाने में बेहद महत्वपूर्ण योगदान निभाता है. और एक बड़ा assignment आपके फाइनल ग्रेड को बाधा और घटा भी सकता है. इसीलिए थोडा समय निकालें असुर जितनी जल्दी हो सके अपना होमवर्क पूरा कर लें. इससे आपको अच्छे अंक को मिलेंगे ही साथ-साथ शिक्षक से भी विशेष सम्मान प्राप्त होगा.

क्लास को मेन्टेन रखने में मदद करे :

क्लास को मेन्टेन रखने में क्लास के बच्चे का सबसे बड़ा सहयोग होता है. लेकिन कुछ बच्चे ऐसे होते है जो साफ़-सफाई तो नहीं करते लेकिन क्लासरूम को गन्दा करते रहते है. आप उनमे से न बने. अपनी क्लास को साफ़ रखे. डेस्क आदि को ठीक करना और किताबो को सहेज कर रखने में अपनी शिक्षक की मदद करें.

अन्य छात्रो की भी पसंद बने :

अगर क्लास के दौरान उन्हें कोई विषय समझ नहीं आ रहा है और आप इसे जानते है तो क्लास खत्म होने के बाद उन्हें इसे समझा दें. मतलबी और स्वार्थी न बनें. नए बच्चो को उनकी कक्षा ढूढने में सहयोग करें. इससे सिर्फ शिक्षक के बीच ही नहीं, हर किसी के बीच में एक अच्छे इन्सान के रूप में आपकी प्रतिष्ठा बनेगी.

अन्य गतिविधियों में ले भाग :

क्लास के अलावा स्कूल की अन्य गतिविधिओ जैसे खेल, कूद, संगीत और नाटक आदि में भी भाग लें. इससे आप शिक्षक की नजरो में एक बेहतर बच्चे के रूप में उभरेंगे.

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डिलीवरी के बाद बड़ा हुआ पेट कैसे कम करें

हर महिला अपनी ख़ूबसूरती और फिटनेस को लेकर अपना बहुत ख्याल रखती है। लेकिन प्रेगनेंसी होने के बाद महिला के शरीर में शारीरिक रूप से बहुत से बदलाव आते हैं। जैसे की वजन का बढ़ना, पेट बाहर आना, ब्रैस्ट का बढ़ना, आदि। और प्रसव के बाद भी महिला को थोड़े समय तक ऐसेबदलाव अपने शरीर में देखने को मिलते हैं। क्योंकि महिला का शरीर पूरी तरह से फिट नहीं होता है साथ ही बच्चे की देख रेख में महिला अपना ख्याल उतना अधिक नहीं रख पाती है।

डिलीवरी के तुरंत बाद भी महिला किसी भी तरह का व्यायाम नहीं कर सकती है, क्योंकि महिला के शरीर में बदलाव होने के कारण काफी कमजोरी होती है, और कई बार इसके कारण महिला को परेशानी का अनुभव भी करना पड़ सकता है। और सिजेरियन डिलीवरी के बाद तो महिला को अपना रूटीन बनाने में काफी समय लगता है। ज्यादातर महिलाएं डिलीवरी के बाद बड़े हुए पेट की समस्या से परेशान होती है।

क्योंकि बड़ा हुआ पेट न केवल उनकी पर्सनैल्टी को खराब करता है, बल्कि महिलाएं समझती है की अब वो खूबसूरत नहीं लगेंगी। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है क्योंकि डिलीवरी के कुछ दिन बाद ही आप धीरे धीरे अपना रूटीन वापिस से बना सकती है लेकिन आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए की आप जल्दी में कोई ऐसी गलती न करे जिससे आपके शिशु पर कोई बुरा प्रभाव पड़े, तो आइए हम आपको कुछ ऐसे टिप्स देते है जिससे आप डिलीवरी के बाद अपने बड़े हुए पेट को कम कर सकते है।

डिलीवरी के बाद पेट बढ़ने के क्या क्या कारण होते हैं:-

  • जिन महिलाओ को थायरॉयड की समस्या होती है उन्हें यह समस्या अधिक होती है।
  • किसी भी तरह का शारीरिक व्यायाम न होने के कारण भी महिला के पेट पर चर्बी जमने लगती है।
  • ऐसा भी कहा जाता है की सिजेरियन डिलीवरी में यह समस्या ज्यादा होती है।
  • प्रेगनेंसी के दौरान महिला का खान पान बढ़ जाता है जिसके कारण भी महिला को प्रसव के बाद यह परेशानी हो सकती है।
  • पाचन क्रिया में होने वाले बदलाव के कारण भी महिला को पेट बढ़ने की समस्या के कारण परेशान होना पड़ सकता है।

डिलीवरी के बाद बड़े हुए पेट को कम करने के टिप्स:-

छोटे छोटे मील लें:-

यदि आप डिलीवरी के बाद अपने बड़े हुए पेट को कम करना चाहते है तो आपको अपने आहार का बहुत अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। यदि आप तीन बड़े मील लेने की बजाय कहते छोटे में मील दिन में पांच से छह बार लेते हैं तो इससे आपके भोजन को जल्दी हज़म होने में मदद मिलती है। जिससे आपको वजन कम करने में मदद मिलती है, साथ ही आपको अपने भोजन को खूब चबा चबा कर खाना चाहिए।

स्तनपान करवाएं:-

breastfeeding

कई महिलाओं को ऐसा लगता है की ब्रेस्टफीडिंग करवाने से उनका फिगर खराब हो जायेगा तो ऐसा बिलकुल भी नहीं होता है। बल्कि स्तनपान करवाने से महिला के शरीर की कैलोरी बर्न होती है जिससे उसके पेट पर जमी चर्बी को कम करने में मदद मिलती है। साथ ही इससे शिशु के विकास में मदद मिलती है और महिला को भी ब्रैस्ट कैंसर जैसी परेशानी से बचाव में मदद मिलती है।

योगासन करें:-

योगासन करने से महिला को शरीर में स्ट्रेचिंग करने में मदद मिलती है। जिसके कारण शरीर पर जमी अतिरिक्त चर्बी कम होती है। और इससे आपके शरीर पर कोई बुरा प्रभाव भी नहीं पड़ता है और मानसिक रूप से भी आप स्ट्रेस फ्री रहते हैं। इसके लिए आप दिन में एक बार पंद्रह से बीस मिनट के लिए जरूर योगासन करे।

तनाव न लें:-

डिलीवरी के बाद कई बार महिला बच्चे की केयर को लेकर परेशान हो जाती है की वो उसकी अच्छे से केयर कर भी पाएगी न नहीं। या फिर शरीर में आ रहे बदलाव को लेकर महिला कई बार तनाव ले लेती है। जो की महिला के लिए नुकसानदायक होता है और इससे भी महिला का वजन कम नहीं होता है इसीलिए महिला को मानसिक रूप से स्ट्रेस फ्री रहना चाहिए।

पेय पदार्थो का सेवन भरपूर मात्रा में करें:-

पेय पदार्थ न केवल आपके शरीर को भरपूर एनर्जी देते हैं बल्कि आपके बढ़ते हुए पेट को कम करने में भी आपकी मदद करते हैं। आपको दिन में आठ से दस गिलास पानी का सेवन करने के साथ फलो के रस का भी भरपूर मात्रा में सेवन करना चाहिए। ऐसा करने से भी आपको अपने बढे हुए पेट को कम करने में मदद मिलती है।

नींद को भरपूर मात्रा में लें:-

sleeping women

डिलीवरी के बाद रात और दिन के समय कई बार महिला को जागना पड़ता है। क्योंकि शिशु आपको परेशान कर सकता है जिसके कारण भी महिला की सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ता है। लेकिन महिला को नींद के प्रति लापरवाही न करते हुए जितना हो सके अपनी नींद को पूरा करना चाहिए। यदि रात के समय में नींद पूरी नहीं होती है तो महिला दिन में भी सो सकती है।

मालिश करवाएं:-

डिलीवरी के बाद महिला को अपने शरीर की मालिश भी जरूर करवानी चाहिए। यदि आप ऐसा करती है तो इससे न केवल आपके शरीर को ऊर्जा मिलती है बल्कि आपक शरीर पर जमी चर्बी को भी कम करने में मदद मिलती है। इसीलिए नार्मल में शुरुआत में ही आप मालिश करवा सकते है लेकिन यदि टाँके लगे हो या सिजेरियन डिलीवरी हो तो आपको एक बार डॉक्टर की राय जरूर लेनी चाहिए।

व्यायाम करें:-

जॉगिंग, थोड़ी देर साइकिलिंग व् अन्य व्यायाम करने से भी आपको अपने बड़े हुए पेट को कम करने में मदद मिलती है। लेकिन डिलीवरी के बाद आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए की आप ज्यादा कड़ा व्यायाम न करें बल्कि आपको हलके फुल्के व्यायाम से शुरुआत करनी चाहिए। और धीरे धीरे इसे बढ़ाना चाहिए इससे भी आपके बड़े हुए पेट को कम करने में मदद मिलती है।

डिलीवरी के बाद बड़े हुए पेट को कम करने के अन्य उपाय:-

  • खाने के बाद वॉक जरूर करें।
  • जितना हो सकें पानी को उबालकर पीने की कोशिश करें।
  • खाने में ज्यादा तेलीय चीजों का सेवन न करें।
  • जितना हो सकें अपनी नींद को पूरा करें।
  • खुश रहने की ज्यादा से ज्यादा कोशिश करें।
  • अपने साइज की ब्रा पहने, ज्यादा बड़ी ब्रा पहनने या न न पहनने से आपका ब्रैस्ट शेप खराब हो सकता है।
  • अपने चेहरे की ख़ूबसूरती का भी ध्यान रखें।
  • ज्यादा तेजी से वॉक न करें।
  • फलों के रस का सेवन भरपूर मात्रा में करें इससे भी आपको एनर्जी मिलती है।

तो यदि आप भी डिलीवरी के बाद अपने बड़े हुए पेट की समस्या को लेकर परेशान हैं तो अब आपको परेशान होने की जरुरत नहीं है। क्योंकि ऊपर दिए गए टिप्स का इस्तेमाल करके आप अपने आप को फिट कर सकते है। साथ ही यदि आप चाहे तो व्यायाम आदि शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से भी राय ले सकते है।

प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में कैल्शियम, आयरन और हीमोग्लोबिन बढ़ाने के टिप्स

प्रेगनेंसी में दौरान फिट रहने के लिए और बच्चे के बेहतर विकास के लिए कैल्शियम, आयरन, हीमोग्लोबिन जैसे पोषक तत्वों का गर्भवती महिला के शरीर में भरपूर मात्रा में होना बहुत जरुरी होता है। क्योंकि यदि इन पोषक तत्वों की कमी प्रेग्नेंट महिला के शरीर में होती है। तो इनकी कमी से गर्भवती महिला की प्रेगनेंसी व् डिलीवरी के दौरान परेशानियां बढ़ने के साथ गर्भ में बच्चे का विकास पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको विस्तार से बताने जा रहे हैं की प्रेगनेंसी में कैल्शियम, आयरन, हीमोग्लोबिन की कमी के कारण क्या दिक्कतें हो सकती है। और प्रेग्नेंट महिला इन पोषक तत्वों की कमी को पूरा करने के लिए क्या कर सकती है।

प्रेगनेंसी में कैल्शियम

गर्भावस्था के दौरान कैल्शियम गर्भवती महिला की हड्डियों को मजबूत करने में मदद करता है। जिससे गर्भवती महिला को थकान व् कमजोरी को दूर करने में मदद मिलने के साथ प्रेगनेंसी के दौरान फिट व् एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिलती है। साथ ही कैल्शियम गर्भ में बच्चे की हड्डियों व् दांतों के बेहतर विकास के लिए भी बहुत जरुरी होता है।

गर्भावस्था में कैल्शियम की कमी के कारण होने वाले नुकसान

  • प्रेग्नेंट महिला को थकान व् कमजोरी की परेशानी हो सकती है।
  • जोड़ो में दर्द, बॉडी पेन की समस्या का सामना गर्भवती महिला को अधिक करना पड़ता है।
  • गर्भ में पल रहे बच्चे के शारीरिक विकास में कमी आती है खासकर बच्चे की हड्डियों व् दांतों के विकास में कमी आ सकती है।
  • बच्चे का समय से पहले जन्म होने का खतरा होने के साथ जन्म के समय बच्चे के वजन में कमी की समस्या होती हैं।
  • गर्भवती महिला के शरीर में कैल्शियम की कमी होने के कारण महिला को डिलीवरी के बाद ज्यादा ब्लीडिंग होने के खतरा होता है।

प्रेगनेंसी में कैल्शियम की कमी को कैसे पूरा करें

  • डेयरी उत्पाद का भरपूर सेवन करें जैसे दूध, दही, पनीर आदि। क्योंकि डेयरी उत्पाद में कैल्शियम भरपूर मात्रा में मौजूद होता है।
  • हरी सब्जियों, ब्रोकली, गोभी, सरसों का साग, शलगम का साग आदि का भरपूर सेवन करें।
  • कीवी, संतरा, अमरुद, जामुन आदि फलों में कैल्शियम भरपूर मात्रा में होता है ऐसे में शरीर में कैल्शियम की कमी को पूरा करने के लिए इन फलों का सेवन भरपूर करें।
  • सोया, टोफू आदि का सेवन करें।
  • डॉक्टर द्वारा बताई गई कैल्शियम की दवाई जरूर लें।

प्रेगनेंसी में आयरन

गर्भावस्था के दौरान बॉडी में आयरन की कमी का होना एनीमिया या खून की कमी कहलाता है। और गर्भवती महिला के शरीर में प्रेगनेंसी के दौरान अधिक खून की जरुरत होती है। ऐसे में गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी को पूरा करने के लिए डॉक्टर आयरन की दवाई का सेवन करने की सलाह भी देते हैं।

क्योंकि बॉडी में ब्लड की कमी का होना, या ब्लड फ्लो का अच्छे से न होना माँ व् बच्चे दोनों के लिए नुकसानदायक होता है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में आयरन की कमी के कारण क्या परेशानियां होती है। और किस तरह प्रेग्नेंट महिला शरीर में आयरन की कमी को पूरा कर सकती है।

प्रेगनेंसी में आयरन की कमी के कारण होने वाले नुकसान

  • खून की मदद से ही पूरी बॉडी में ऑक्सीजन का फ्लो अच्छे से होता है जिससे आपको स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। लेकिन खून की कमी होने के कारण बॉडी में ब्लड फ्लो के साथ ऑक्सीजन का फ्लो भी अच्छे से नहीं होता है। जिसकी वजह गर्भवती महिला व् बच्चे दोनों को परेशानी होती है।
  • थकान, कमजोरी, बॉडी में दर्द, तनाव जैसी दिक्कतें गर्भवती महिला को अधिक होती है।
  • सिर दर्द, चक्कर जैसी परेशानियों का होना।
  • गर्भ में बच्चे के विकास में कमी।
  • स्किन का पीला होना।
  • डिलीवरी के दौरान कॉम्प्लिकेशन होना और समय से पहले बच्चे के जन्म का खतरा।

आयरन की कमी को पूरा करने के लिए प्रेग्नेंट महिला क्या करें

  • नॉन वेज, अंडे का भरपूर सेवन करें।
  • सफ़ेद बीन्स व् किडनी बीन्स का सेवन करें।
  • दालों का भरपूर सेवन करें काले चने जरूर खाएं।
  • हरी सब्जियों का भरपूर सेवन करें खासकर पालक।
  • ड्राई फ्रूट्स का सेवन करें।
  • सेब, अनार जैसे आयरन युक्त फलों का भरपूर सेवन करें।

प्रेगनेंसी में हीमोग्लोबिन

हीमोग्लोबिन खून में मौजूद एक प्रोटीन होता है जो बॉडी के सभी अंगो तक ऑक्सीजन को पहुंचाने और कार्बन डाई ऑक्साइड को बाहर निकालने में मदद करता है। और प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला के खून में हीमोग्लोबिन का स्तर यदि सही रहता है। तो इससे गर्भवती महिला व् बच्चे को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। जबकि हीमोग्लोबिन स्तर में कमी गर्भवती महिला व् बच्चे के लिए समस्या कड़ी कर सकता है।

गर्भावस्था में हीमोग्लोबिन की कमी के कारण होने वाली दिक्कतें

  • थकान, कमजोरी, सिर दर्द, चक्कर, जैसी परेशानियां प्रेगनेंसी के दौरान अधिक होना।
  • जन्म के समय बच्चे के वजन में कमी और समय से पहले शिशु के जन्म के खतरे का बढ़ना।
  • सांस फूलने की समस्या अधिक होना।
  • दिल की धड़कन बढ़ना।
  • हाथों पैरों का ठंडा रहना।

प्रेगनेंसी में हीमोग्लोबिन की कमी को पूरा करने के टिप्स

  • हरी पत्तेदार सब्जियों जैसे पालक, ब्रोकली का भरपूर सेवन करें।
  • बादाम, किशमिश व् अन्य ड्राई फ्रूट्स का सेवन भरपूर मात्रा में करें।
  • आडू, अमरुद, कीवी, सेब, अनारं संतरा जैसे फलों का भरपूर सेवन करें।
  • टमाटर, गाजर, चुकंदर, गाजर का भरपूर सेवन करें।

तो यह है प्रेगनेंसी के दौरान कैल्शियम, आयरन, हीमोग्लोबिन की कमी के कारण होने वाले नुकसान व् किस तरह आप इन पोषक तत्वों की कमी को शरीर में पूरा कर सकते हैं। उससे जुड़े कुछ खास टिप्स, तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी इन सभी बातों का ध्यान रखना चाहिए।

क्या अल्ट्रासॉउन्ड से बेबी को कोई नुकसान होता है

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प्रेगनेंसी पीरियड हर महिला की जिंदगी का सबसे ख़ास लम्हा होता है। और गर्भ में शिशु क्या कर रहा है और उसका विकास कैसे हो रहा है हमेशा गर्भवती महिला यह जाने के लिए उत्सुक रहती है। प्रेगनेंसी के दौरान शिशु के दिल की धड़कन को सुनने, शिशु के विकास को देखने, गर्भ में कितने शिशु है इसे जानने, डिलीवरी की तारीख का अनुमान लगाने आदि के लिए अल्ट्रासॉउन्ड किया जाता है। लेकिन प्रेगनेंसी में कितनी बार अल्ट्रासॉउन्ड करवाना चाहिए, क्या अल्ट्रासॉउन्ड करवाना साफे होता है इसे लेकर गर्भवती महिला के मन में बहुत से सवाल होते हैं, तो लीजिए आज हम आपको प्रेगनेंसी में अल्ट्रासॉउन्ड कब और कितनी बार करवाना चाहिए जानते हैं।

प्रेगनेंसी में अल्ट्रासॉउन्ड क्या होता है

सोनोग्राफी या अल्ट्रासॉउन्ड एक ही बात होती है जो की प्रेगनेंसी के दौरान गर्भ में शिशु से सम्बंधित बातों को जानने के लिए किया जाता है। अल्ट्रासाउंड मशीन के द्वारा हाई फ्रिक्वेंसी वाली तरंगों का इस्तेमाल किया जाता है, जो की प्रेग्नेंट महिला के पेट और उसके गर्भ में पल रहे बच्चे को पूरी तरह पिक्चराइज करने में मदद करता है। इसे करने से पहले पेट पर एक विशेष तरह का जैल लगाया जाता है। उसके बाद ट्रांसड्यूसर जो की हाथ में पकड़ने की मशीन होती है उसे पेट पर लगाए गए जैल पर रखते हैं, और यह जेल ट्रांसड्यूसर से निकलने वाली तरंगो को गर्भ में पहुँचाने में मदद करता है जिससे गर्भ में शिशु को आप स्क्रीन पर देख पाती है। इस दौरान महिला को किसी भी तरह का दर्द आदि नहीं होता है।

प्रेगनेंसी में अल्ट्रासॉउन्ड करवाने से शिशु को कोई नुकसान होता है या नहीं

ट्रांसड्यूसर तरंगो को छोड़ता है जो की जैल की मदद से गर्भ में शिशु को छूकर वापिस आ जाती हैं। जिससे आप शिशु को देख सकते हैं, इस दौरान यदि ट्रांसड्यूसर का ज्यादा तापमान बढ़ाया जाता है तो शिशु को नुकसान पहुँच सकता है। लेकिन जिस अल्ट्रासॉउन्ड के तरीके का इस्तेमाल प्रेगनेंसी के दौरान किया जाता है उसका तापमान कम प्रबलता वाला होता है जिससे शिशु पर किसी भी तरह का कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता है। इसके अलावा माँ के गर्भ में शिशु एमनियोटिक फ्लूड में रहता है। और जब यह ताप गर्भ तक पहुँचता है तो एमनियोटिक फ्लूड के कारण पूरे गर्भ में फ़ैल जाता है, जिससे शिशु पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता है।

साथ ही यदि ट्रांसड्यूसर को यदि ज्यादा समय के लिए एक ही जगह पर रखा जाता है तो इसके कारण तापमान बढ़ सकता है, इसीलिए जब भी गर्भवती महिला का अल्ट्रासॉउन्ड किया जाता है तो ट्रांसड्यूसर को कभी भी एक जगह पर नहीं रखा जाता है। बल्कि इसे धीरे धीरे पूरे पेट पर घुमाया जाता है ताकि शिशु के गर्भ में विकास को अच्छी तरह से देखा जा सकें। साथ ही अल्ट्रासॉउन्ड आप अपनी मर्ज़ी से नहीं बल्कि डॉक्टर के राय देने के बाद ही करवा सकते हैं।

प्रेगनेंसी में अल्ट्रासॉउन्ड कितनी बार करवाना चाहिए

गर्भवती महिला और पहली, दूसरी, तीसरी तीनो तिमाही में अल्ट्रासॉउन्ड करवाने की सलाह दी जाती है, और किस महीने अल्ट्रासॉउन्ड करवाना है यह भी आपको डॉक्टर द्वारा बता दिया जाता है। लेकिन कुछ मामलों में डॉक्टर तीन या चार से ज्यादा बार भी अल्ट्रासॉउन्ड के लिए बोल सकते हैं। आइये जानते हैं एक से ज्यादा बार अल्ट्रासॉउन्ड करवाने की जरुरत क्यों पड़ती है।

  • यदि आपके गर्भ में दो या तीन शिशु हैं तो आपको ज्यादा स्कैन करवाने पड़ सकते हैं।
  • गर्भवती महिला का यदि पगले दो या तीन बार गर्भपात हो चूका हो तो भी डॉक्टर आपको यह राय दे सकते हैं।
  • यदि एक बार अल्ट्रासॉउन्ड करवाने पर अच्छे से आपकी समस्या का पता न चल पाया हो।
  • उम्र अधिक होने के कारण।
  • यदि गर्भवती महिला की उम्र अधिक होती है तो भी ऐसा हो सकता है।

तो यह है गर्भवती महिला के अल्ट्रासॉउन्ड स्कैन से जुड़े कुछ टिप्स, इसके अलावा आपको कितनी बार स्कैन करवाना चाहिए, इस बारे में आपको डॉक्टर आपकी गर्भावस्था की स्थिति को देखकर बता देते हैं।

हथेली में पसीना आने के कारण और उपाय

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हथेली में पसीना आने के कारण, हथेली के पसीने की समस्या को दूर करने के उपाय, हथेली में पसीना क्यों आता है, हथेली में पसीने से छुटकारा

शरीर से पसीना आना एक सामान्य प्रक्रिया है जिसके द्वारा शरीर की गंदगी और टॉक्सिन्स बाहर निकलते है। पसीना आना शरीर के लिए बहुत ही जरुरी होता है। कई लोग तो शरीर से पसीना बहाने के लिए एक्सरसाइज भी करते है।

परन्तु यही पसीना अगर जरूर से ज्यादा आये तो भी समस्या हो जाती है। ज्यादा पसीना आने से शरीर में नमी की परेशानी हो जाती है। यही पसीना अगर हथेली से आये तो और भी कई गंभीर समस्याएं हो जाती है।

हथेली में पसीना क्यों आता है?

  • बहुत से लोगो को हथेली और पैरो के तलवो पर भी पसीना आता है।
  • कभी कभार हथेलियों पर पसीना आना सामान्य हो सकता है।
  • पर जरुरत से ज्यादा पसीना आना और कम टेम्परेचर पर भी हथेलियों में पसीना आने के कई अन्य कारण हो सकते है।
  • हथेलियों में ज्यादा पसीना हाइपरहाइड्रोसिस बीमारी के कारण भी आता है।
  • ज्यादा पसीना या हाथों में पसीना लो ब्लड प्रेशर और तनाव के कारण भी आता है।
  • ऐसा माना जाता है के नार्मल या कम तापमन में हथेलियों पर पसीना हाइपरहाइड्रोसिस नामक बीमारी के कारण ही आता है।

 हथेलियों में पसीने की समस्या को दूर करने के उपाय

हाथ में आने वाले पसीने के कारण जानने के बाद जरुरी है के उनको दूर करने के उपाय भी हम जाने।

साफ़ सफाई:

  • जिन लोगों को हाथो में ज्यादा पसीना आता है जरुरी है के साफ़ सफाई का ध्यान रखें।
  • हाथों को एक अंतराल के बाद पानी से जरूर धोये।
  • नहाने के लिए एंटी बैक्टीरियल सोप का इस्तेमाल करें।
  • पसीने वाले हाथ कभी भी खुद नहीं सूखेंगे।
  • हाथो को धोने के बाद ड्राई करना ना भूले।

हैंड सेनिटाइज़र:

  • अल्कोहल बेस्ड हैंड सेनिटाइज़र का इस्तेमाल करें।
  • इससे आपके हाथो के बैक्टीरिया भी खत्म होंगे।
  • इसके प्रयोग से कुछ देर के लिए हाथ भी सूखे रहेंगे।

हाथों को ठंडा रखें:

  • अपने हाथो पर ग्लव्स का इस्तेमाल ना करें।
  • जितनी देर हो सके हाथो को खुला रखिये।
  • पसीना सूखाने के लिए हाथो को पंखे या एयर कंडीशनर के आगे रखिये ताकि कम पसीना आये।

टैल्कम पाउडर:

  • अपने हाथो पर समय समय पर पाउडर का इस्तेमाल करे।
  • इसके प्रयोग से आपके हाथो का पसीना पाउडर सोख लेगा।

टी बैग:

  • एक बाउल में टी बैग के साथ पानी डालिये।
  • इस पानी में अपने हाथो को कुछ देर तक भिगो कर रखे।
  • यह उपाय आपके हाथो में पसीना कण्ट्रोल करेगा।

भोजन:

  • अपने भोजन में मसालों का प्रयोग कम करें।
  • भोजन में लहसुन, प्याज और अदरक को भी कम ही शामिल करें।
  • यह सब पसीने के कारक होते है।
  • हो सके तो ठंडी तासीर वाली चीजों का सेवन करें।
  • टमाटर का रस पिए यह आपके शरीर को ठंडा रखेगा।

बेकिंग सोडा:

  • बेकिंग सोडा और गर्म पानी को मिलाइये।
  • इस पानी में अपने हाथो को डुबोकर रखिये।
  • यह उपाय करने से भी आपके हाथो को बहुत राहत मिलेगी।

इनमे से कोई भी उपाय आप अपनी सुविधानुसार इस्तेमाल कर सकते है। पर इसके बाद भी अगर आपके हाथो में पसीने की समस्या खत्म ना हो तो डॉक्टर से जरूर सलाह ले।

10 अजीब तरीके गर्भ में लड़का और लड़की जानने के

अजीब तरीके गर्भ में लड़का और लड़की जानने के, माँ बनना किसी भी महिला के लिए बहुत ही खूबसूरत अनुभव होता है। लेकिन गर्भ में पल रहा शिशु लड़का है या लड़की इसे जानने की चाह कहीं न कहीं महिला के मन में होती है। हालांकि इस बात से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता है क्योंकि आने वाला नन्हा मेहमान आपकी जिंदगी में खुशियां ही लेकर आता है। लेकिन घर के सदस्य फिर भी यही अंदाजा लगाते रहते हैं। की हो सकता है की आने वाला मेहमान लड़का होगा या लड़की होगी। और इसका अंदाजा प्रेग्नेंट महिला के बॉडी में होने वाले बदलाव व् लक्षणों से लगाया जाता है। तो आइये आज हम भी आपको 10 अजीब तरीके बताने जा रहे हैं जिनसे आप अंदाजा लगा सकते हैं की गर्भ में लड़का है या लड़की।

स्किन

  • प्रेग्नेंट महिला अपनी स्किन को देखकर भी यह अंदाजा लगा सकती है की गर्भ में पल रहा शिशु लड़का है या लड़की है।
  • यदि प्रेग्नेंट महिला के चेहरे की सुंदरता बढ़ जाती है।
  • और दाग धब्बे, दाने, मुहांसे आदि नहीं होते हैं तो यह गर्भ में लड़का होने का लक्षण होता है।
  • लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला के चेहरे की चमक फीकी पड़ने लगती है।
  • और महिला के चेहरे पर दाग धब्बे, मुहांसे आदि अधिक होने लग जाते हैं।
  • तो यह गर्भ में लड़की होने की तरफ इशारा करते हैं।

जीभ का स्वाद

  • गर्भावस्था के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिला के जीभ के स्वाद में भी फ़र्क़ आता है।
  • जिसके कारण महिला का कुछ न कुछ अलग खाने की इच्छा हो सकती है।
  • ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला की मीठा खाने की इच्छा अधिक होती है तो ये इस बात की और इशारा करता है।
  • की गर्भ में पल रहगा शिशु नन्ही राजकुमारी है।
  • और यदि महिला का खट्टा व् नमकीन खाने की इच्छा होती है तो यह गर्भ में लड़का होने का लक्षण होता है।

वैक्सिंग

  • प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला वैक्सिंग करवाती है।
  • और वैक्सिंग करवाने पर महिला के बाल बहुत जल्दी आते हैं।
  • तो यह गर्भ में लड़का होने की तरफ इशारा करता है।
  • जबकि गर्भ में लड़की होने पर वैक्सिंग करवाने के बाद बाल सामान्य गति से आते हैं।

सिर के बाल

  • यदि गर्भवती महिला के बाल पहले की अपेक्षा सूंदर व् चमकदार हो जाते हैं।
  • और महिला को बालों से जुडी कोई परेशानी नहीं होती है।
  • तो यह गर्भ में लड़का होने का संकेत होता है।
  • जबकि प्रेगनेंसी के दौरान महिला के बालों का अधिक झड़ना गर्भ में लड़की होने का संकेत होता है।

मूड स्विंग्स

  • गर्भवस्था के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण मूड स्विंग्स की समस्या होना आम बात होती है।
  • यदि किसी महिला को मूड स्विंग्स यानी की गुस्सा, चिड़चिड़ेपन की समस्या अधिक नहीं होती है।
  • तो यह गर्भ में लड़का होने की तरफ इशारा करता है।
  • जबकि प्रेग्नेंट महिला को मूड स्विंग्स अधिक होता है।
  • जैसे की महिला को बहुत अधिक चिड़चिड़ापन महसूस होना, गुस्सा अधिक आना, आदि।
  • तो यह गर्भ में लड़की होने का लक्षण होता है।

मॉर्निंग सिकनेस

  • मॉर्निंग सिकनेस का मतलब होता है की सुबह के समय उल्टी, जी मिचलाना, चक्कर, आलस आदि का अधिक महसूस होना।
  • यदि किसी प्रेग्नेंट महिला को यह परेशानी अधिक महसूस नहीं होती है तो यह गर्भ में लड़का होने की तरफ इशारा करता है।
  • जबकि मॉर्निंग सिकनेस की समस्या का अधिक होना गर्भ में लड़की होने की तरफ इशारा करता है।

चर्बी

  • गर्भावस्था के दौरान महिला का वजन बढ़ना आम बात होती है।
  • लेकिन यदि किसी महिला के कूल्हे व् टांगो के पिछले हिस्से की चर्बी अधिक बढ़ती है।
  • तो यह गर्भ में लड़की होने के चांस का लक्षण होता है।
  • जबकि गर्भ में यदि लड़का है तो महिला के शरीर में ऐसे एक ही जगह चर्बी बढ़ने की समस्या नहीं होती है।

भूख

  • प्रेगनेंसी के दौरान कुछ महिलाओं को भूख बहुत ज्यादा लगती है तो कुछ महिलाओं का खाने का मन भी नहीं करता है।
  • जिन महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान भूख बहुत ज्यादा लगती है।
  • तो यह गर्भ में लड़का होने की तरफ इशारा करता है।
  • जबकि गर्भ में लड़की के होने पर महिला को भूख अधिक नहीं लगती है।

पेट का आकार

  • गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला के पेट का आकार बढ़ता ही है।
  • यदि प्रेग्नेंट महिला के पेट का आकार कम बढ़े और पेट नीचे की तरफ हो।
  • तो यह इस बात का संकेत होता है की गर्भ में पल रहा शिशु लड़का है।
  • जबकि महिला का पेट बड़ा होने के साथ आगे की और ज्यादा निकला हुआ हो।
  • तो यह इस बात की और इशारा करता है की गर्भ में पल रहा शिशु लड़की है।

सोने का तरीका

  • वजन बढ़ने के कारण प्रेग्नेंट महिला को सोते समय बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
  • ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला हमेशा बाईं और करवट लेकर सोये तो यह इस बात की और इशारा करता है की गर्भ में शिशु लड़का है।
  • जबकि सोते समय महिला का बार बार पोजीशन बदलना इस बात की और इशारा करता है की गर्भ में पल रहा शिशु लड़की है।

तो यह हैं वो तरीके जिनसे आप अंदाजा लगा सकते हैं की गर्भ में पल रहा शिशु लड़का है या लड़की है। तो यदि आपको भी बॉडी में होने वाले ऐसे कुछ बदलाव महसूस हो रहे हैं तो आप भी इन्हे देखकर अंदाजा लगा सकते हैं। और आप लड़के को जन्म देने वाली हैं या नन्ही परी आपके घर आने वाली है।

दालचीनी (Cinnamon) खाने के फायदे

दालचीनी (Cinnamon) एक बेहतरीन मसाला है जो खाने का स्वाद बढ़ाने में मदद करता है, यह तो आप सभी जानते हैं। लेकिन आयुर्वेद के अनुसार दालचीनी एक बेहतरीन औषधि है। जो आपको स्वस्थ रखने में बहुत फायदेमंद होने के साथ ही शरीर में होने वाली बहुत सी बीमारियों के इलाज में भी फायदेमंद होती है। दिखने में दालचीनी भूरे रंग की पतली सी लकड़ी की तरह होती है। साथ ही इसकी खुशबू भी बहुत अच्छी होती है। लेकिन दालचीनी भोजन का स्वाद बढ़ाने के साथ और कौन कौन से फायदों से भरपूर होती है आइये इस आर्टिकल में जानते हैं।

डाइबिटीज़ (Diabetes) रहती है कण्ट्रोल

जिन लोगो को शुगर की समस्या होती है यदि वो लोग रोजाना एक से डेढ़ चम्मच दालचीनी का सेवन करते हैं। तो ऐसा करने से ब्लड में शुगर के लेवल को कण्ट्रोल में रहने में मदद मिलती है। जिससे डाइबिटीज़ कण्ट्रोल रहती है साथ ही रोजाना दालचीनी का सेवन करने से आपको शुगर जैसी परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

ब्लड फ्लो (Blood Flow) होता है बेहतर

यदि किसी भी कारण शरीर में ब्लड फ्लो अच्छे से नहीं होता है तो इससे शरीर के सभी अंगो तक ब्लड न पहुँचने के कारण शारीरिक परेशानियां होने का खतरा बढ़ जाता है। लेकिन यदि आप दालचीनी का सेवन करते हैं तो इससे ब्लड पतला होता है जिससे शरीर के सभी अंगों तक ब्लड अच्छे से पहुंचता है और सभी अंगो तक पर्याप्त ऑक्सीजन भी पहुँचती है। जिससे आपको फिट रहने में मदद मिलती है। इसीलिए रोजाना चाय, सब्ज़ी, पानी में डालकर दालचीनी का सेवन जरूर करना चाहिए।

कोलेस्ट्रॉल (Cholesterol) रहता है कण्ट्रोल

दालचीनी का सेवन करने से आपके शरीर में कोलेट्रल कण्ट्रोल रहने में भी मदद मिलती है। क्योंकि दालचीनी में मौजूद गुण शरीर में बेड कोलेस्ट्रॉल को कण्ट्रोल करने और गुड़ कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित रखने में मदद करते हैं।

हदय स्वस्थ (Healthy Heart) रहता है

दालचीनी में मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट्स हदय के आस पास की धमनियों को सुरक्षित रखने, ब्लड फ्लो को बेहतर रखने में मदद करते हैं। जिससे हदय सम्बन्धी परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

इनफर्टिलिटी ट्रीटमेंट (Infertility Treatment)

जिन पुरुषों में शुक्राणु की कमी या शुक्राणु की गुणवत्ता बेहतर नहीं होती है उन पुरुषों को दालचीनी का सेवन जरूर करना चाहिए। क्योंकि दालचीनी का सेवन करने से शुक्राणु की संख्या को बढ़ाने में मदद मिलती है।

वजन कण्ट्रोल (Weight Management)

दालचीनी का सेवन करने से बढे हुए वजन को नियंत्रित करने में भी मदद मिलती है। क्योंकि दालचीनी पाचन क्रिया को दुरुस्त रखती है, भूख को कण्ट्रोल करने में भी मदद करती है।

कैंसर से बचाव (Cancer Prevention)

दालचीनी का सेवन करने से शरीर में कैंसर की कोशिकाओं के विकास को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। साथ ही बॉडी में मौजूद विषैले पदार्थों को भी बाहर निकालने में मदद मिलती है। जिससे कैंसर जैसी भयंकर बीमारी से आपको सुरक्षित रखने में मदद मिलती है।

फूड पॉइजनिंग (Food Poisoning) से बचाव

कई बार गलत खान पान के कारण फूड पॉइजनिंग होने का खतरा बढ़ जाता है। या फूड पॉइजनिंग की समस्या हो जाती है ऐसे में दालचीनी का सेवन करने से इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है। क्योंकि दालचीनी में एंटी बैक्टेरियल गुण मौजूद होते हैं जो आपको इस परेशानी से बचे रहने में मदद करते हैं।

स्ट्रेस (Stress) से मिलता है आराम

दालचीनी में मौजूद गुण केवल शारीरिक रूप से ही नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी आपको फायदा पहुंचाते हैं। दालचीनी का सेवन करने से तनाव, घबराहट, बेचैनी, चिंता जैसी परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है। जब आप आपको मानसिक रूप से परेशानी का अनुभव करें तो एक कप दालचीनी की चाय पीएं आपको खुद इसका असर महसूस होगा।

गठिया रोगो के लिए है फायदेमंद

गठिया की समस्या होने के कारण उठने, बैठने, चलने फिरने में परेशानियों का अनुभव करना पड़ता है। ऐसे में दालचीनी का सेवन करने से गठिया के कारण होने वाली परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है। और इसके लिए रोजाना सुबह शाम आप आधा चम्मच शहद और आधा चम्मच दालचीनी का पाउडर मिलाकर उसका सेवन कर सकते है।

दालचीनी से मिलने वाले अन्य फायदे

  • दालचीनी का सेवन करने से ज्यादा हिचकी आने की परेशानी से आराम मिलता है।
  • पेट फूलने की समस्या से बचने के लिए दालचीनी का सेवन बहुत फायदेमंद होता है।
  • उल्टी, दस्त, जैसी परेशानियों के लिए दालचीनी का सेवन बहुत फायदेमंद होता है।
  • खांसी, जुखाम, बुखार से राहत के लिए भी आप इसका सेवन कर सकते हैं।
  • स्किन पर होने वाले दाग धब्बों, फोड़े फुंसी आदि पर दालचीनी पीसकर लगाएं आपको फायदा मिलेगा।
  • दालचीनी का इस्तेमाल चेहरे के लिए करने से चेहरे पर मौजूद मृत कोशिकाओं को हटाकर चेहरे की चमक को बढ़ाने में मदद मिलती है।
  • यदि आपको भूख में कमी की परेशानी है तो आपको दालचीनी का सेवन करना चाहिए क्योंकि इससे आपकी भूख बढ़ाने में मदद मिलती है।

कैसे करें दालचीनी का सेवन?

दालचीनी का सेवन आप एक नहीं बल्कि कई तरीको से कर सकते हैं जैसे की:

  • दालचीनी की चाय बनाकर पी सकते हैं।
  • दूध में डालकर दालचीनी का सेवन कर सकते हैं।
  • सब्जियों का जायका बढ़ाने के लिए मसाले के रूप में दालचीनी का इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • गुनगुने पानी में शहद और दालचीनी डालकर उसका सेवन किया जा सकता है।
  • दालचीनी का पाउडर बनाकर आप रायता, सलाद आदि के ऊपर डालकर आप इसका सेवन कर सकते हैं।

तो यह हैं कुछ बेहतरीन फायदे जो दालचीनी का सेवन करने से मिलते हैं। यदि आप भी इनमे से किसी भी परेशानी का समाधान चाहते हैं तो आपको भी दालचीनी का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए। साथ ही आपको सब्जियों का जायका बढ़ाने और स्वस्थ रहने के लिए इन्हे अपने मसालों में भी इस्तेमाल करना चाहिए। लेकिन स्तनपान करवा रही महिलाओं को और जिन लोगो को दालचीनी खाने से किसी तरह की एलर्जी होती है उन्हें दालचीनी का सेवन नहीं करना चाहिए। साथ ही दालचीनी का सेवन करने से आपको केवल फायदे ही मिलें इसीलिए जरुरत से ज्यादा दालचीनी का सेवन भी न करें।

Benefits of Cinnamon

प्रेगनेंसी में वजन कम करने के उपाय

गर्भावस्था के दौरान महिला का वजन बढ़ना आम बात होती है। और गर्भवती महिला का वजन 11 से 15 किलो तक बढ़ सकता है। यदि गर्भ में जुड़वां बच्चे को तो महिला का वजन 18 किलो तक बढ़ सकता है। यदि प्रेगनेंसी के दौरान इतना वजन बढ़ता है तो कोई बात नहीं होती है। लेकिन यदि इससे ज्यादा वजन बढ़ जाता है तो इसके कारण गर्भवती महिला और बच्चे दोनों को परेशानी का अनुभव करना पड़ सकता है। जैसे की:

गर्भावस्था के दौरान ज्यादा वजन बढ़ने के कारण बच्चे को होने वाली दिक्कत

  • गर्भपात का खतरा होता है।
  • वजन बढ़ने के कारण जो परेशानियां माँ को होती है वो बच्चे को होने का भी खतरा होता है जैसे की शुगर, हदय सम्बन्धी परेशानी आदि।
  • बच्चे के दिमागी विकास पर भी असर पड़ सकता है।
  • बच्चे का वजन भी जरुरत से ज्यादा हो सकता है जिसकी वजह से गर्भ में शिशु को दिक्कत होती है।

गर्भावस्था में अधिक वजन बढ़ने के कारण महिला को होने वाली दिक्कत

  • जेस्टेशनल डाइबिटीज़ का खतरा होता है।
  • हाई ब्लड प्रैशर की समस्या होती है।
  • उठने, बैठने, लेटने में परेशानी का अनुभव।
  • प्रेगनेंसी के दौरान और डिलीवरी के समय होने वाली परेशानियां बढ़ जाती हैं।
  • समय से पहले बच्चे का जन्म का खतरा।
  • सिजेरियन डिलीवरी के चांस बढ़ते हैं।
  • महिला का वजन जरुरत से ज्यादा होने पर डॉक्टर को गर्भ में बच्चे की सही जांच करने में ज्यादा दिक्कत होती है।

क्या प्रेगनेंसी के दौरान वजन घटाया जा सकता है?

गर्भावस्था के दौरान वजन बढ़ना अच्छी बात होती है लेकिन जरुरत से ज्यादा वजन बढ़ना अच्छी बात नहीं होती है। ऐसे में यदि महिला का वजन ज्यादा बढ़ जाये तो महिला चाहे तो अपने वजन को नियंत्रित कर सकती है। ऐसे में महिला को वजन नियंत्रित करते समय इस बात का ध्यान रखना जरुरी होता है कि वजन कम करने के लिए महिला जो भी टिप्स ट्राई करती हैं उनसे माँ या बच्चे को कोई दिक्कत न हो।

जैसे की वजन कम करने के लिए प्रेगनेंसी में भूखें रहना, गरम पानी पीना, ग्रीन टी पीना, बहुत ज्यादा व्यायाम करना, आदि प्रेग्नेंट महिला को नहीं करना होता है। साथ ही वजन कम करने के लिए महिला को एक बार डॉक्टर से राय लेना भी जरुरी होता है। प्रेगनेंसी के दौरान वजन कम करने के लिए महिला किन किन तरीको का इस्तेमाल कर सकती है जो महिला को नुकसान भी नहीं पहुंचाते हैं आइये जानते हैं।

गर्भावस्था के दौरान वजन कम करने के टिप्स

प्रेग्नेंट महिला का वजन प्रेगनेंसी के दौरान अधिक बढ़ जाता है या प्रेग्नेंट महिला का वजन पहले से ही ज्यादा होता है। तो ऐसे में गर्भावस्था के दौरान कुछ छोटे छोटे टिप्स का ध्यान रखने से महिला को प्रेगनेंसी के दौरान अपने वजन को सही रखने में मदद मिलती है। जैसे की:

थोड़ा थोड़ा खाएं

अधिकतर गर्भवती महिलाएं यही सोचती है की प्रेगनेंसी के दौरान महिला को को दो लोगो के जितना खाना खाना चाहिए। जबकि ऐसा नहीं है क्योंकि जरुरत से ज्यादा खाने के कारण महिला का वजन जरुरत से ज्यादा बढ़ सकता है। ऐसे में महिला को खाना खाते समय ध्यान रखना है की महिला ज्यादा तेल मसाले वाला आहार, जरुरत से ज्यादा खाना न खाएं। महिला को थोड़ा थोड़ा करके खाना चाहिए जिससे खाना अच्छे से हज़म भी हो जाये और महिला को पोषक तत्व भी मिलें। यदि महिला इस बात का ध्यान रखती है तो ऐसा करने से प्रेग्नेंट महिला के वजन को सही रहने में मदद मिलती है।

फाइबर युक्त डाइट

प्रेगनेंसी के दौरान वजन को कण्ट्रोल रखने के लिए महिला को ऐसी चीजें खानी चाहिए जिसमें फाइबर की मात्रा भरपूर हो। क्योंकि फाइबर युक्त आहार पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में मदद करता है। जिससे शरीर पर फैट का जमाव नहीं होता है और गर्भवती महिला के वजन को नियंत्रित रहने में मदद मिलती है।

पानी पीएं भरपूर

गर्भावस्था के दौरान पानी का भरपूर सेवन करें पानी का सेवन करने से आपको भरा भरा महसूस होता है जिससे जरुरत से ज्यादा भूख लगने की समस्या नहीं होती है। और महिला को अपने वजन को सही रहने में मदद मिलती है।

फलों का रस कम पीएं

गर्भावस्था के दौरान फलों का सेवन तो करें लेकिन ऐसे फलों व् उनके रस का कम सेवन करें जो अधिक मीठे होते हैं। और जूस तो जितना हो सके कम पीएं, क्योंकि जूस में मीठे की मात्रा अधिक होती है जो वजन को तेजी से बढ़ाती है।

व्यायाम

गर्भावस्था कोई बीमारी नहीं होती है की जिसमें केवल आपको आराम ही करना है। बल्कि प्रेगनेंसी के दौरान आपको यदि फिट रहना है तो थोड़ी देर व्यायाम या योगासन भी जरूर करें। क्योंकि व्यायाम करने से प्रेग्नेंट महिला को फिट रहने में मदद मिलती है और बॉडी पर फैट का जमाव भी नहीं होता है। लेकिन ध्यान रखें की जरुरत से ज्यादा और ऐसा व्यायाम बिल्कुल न करें जिससे प्रेगनेंसी के दौरान आपकी परेशानी बढे। यदि आपको व्यायाम करने में दिक्कत है तो सुबह शाम वॉक जरूर करें।

स्विमिंग

यदि आपको स्विमिंग आती है तो हफ्ते में एक या दो बार स्विमिंग जरूर करें। क्योंकि स्विमिंग प्रेगनेंसी के दौरान सेफ भी होती है और स्विमिंग करने से वजन को नियंत्रित रखने में भी मदद मिलती है।

तनाव नहीं लें

गर्भावस्था के दौरान तनाव लेना न केवल गर्भवती महिला की मुश्किलों को बढ़ाता है। बल्कि तनाव लेने के कारण महिला का वजन भी ज्यादा हो सकता है।

प्रेगनेंसी में वजन कम करने के अन्य तरीके

  • खाने के तुरंत बाद सोएं नहीं।
  • जब भी खाना खाएं उसके साथ पानी पीने से बचें।
  • ज्यादा मीठी चीजों का सेवन नहीं करें।
  • खाने में ज्यादा लम्बे लम्बे गैप नहीं रखें।
  • ऐसा आहार खाने से बचें जिसे आपको पचाने में दिक्कत हो।
  • नींद भरपूर लें।
  • सलाद जरूर खाएं।
  • दिन में एक कटोरी दही का सेवन जरूर करें।
  • अपने प्रीनेटल विटामिन्स जरूर लें ताकि शरीर को जरुरी पोषक तत्व मिल सकें जिससे आपको जरुरत से ज्यादा कैलोरी युक्त आहार न खाने पड़े।

गर्भवती महिला कब नहीं करें वजन कम करने की कोशिश?

  • गर्भवस्था में यदि कॉम्प्लीकेशन्स हो।
  • डॉक्टर ने बेड रेस्ट बोला हो।
  • बहुत मुश्किल से प्रेगनेंसी हुई हो।
  • उम्र अधिक हो।
  • थकान, कमजोरी जैसी शारीरिक परेशानियां अधिक हो।

तो यह हैं गर्भावस्था में वजन कम करने से जुड़े कुछ टिप्स, यदि आप भी माँ बनने वाली है और आपका भी वजन जरुरत से ज्यादा बढ़ रहा है तो आपको भी इन सभी बातों का ध्यान रखना चाहिए। ताकि प्रेगनेंसी के दौरान माँ व् बच्चे दोनों को किसी भी तरह की दिक्कत न हो।

Weight Loss in Pregnancy

छठे महीने में ही जानिए डिलीवरी नोर्मल होगी या नहीं

प्रेगनेंसी का छठा महीना प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही का आखिरी चरण होता है इस समय शिशु के अंगो का विकास तेजी से हो रहा होता है। साथ ही शिशु के वजन भी पहले की अपेक्षा तेजी से बढ़ता है और जैसे जैसे डिलीवरी का समय आगे बढ़ रहा होता है महिला के मन में केवल एक ही सवाल चल रहा है होता है की महिला की डिलीवरी नोर्मल होगी या सिजेरियन। अब यह तो गर्भवती महिला की शारीरिक स्थिति पर निर्भर करता है की महिला यदि स्वस्थ है तो इससे नोर्मल डिलीवरी के चांस बढ़ जाते हैं, लेकिन यदि प्रेगनेंसी में किसी भी तरह की कॉम्प्लीकेशन्स होती है तो डिलीवरी सिजेरियन होने के चांस होते हैं। कुछ ऐसे केस भी होते हैं जहां सब कुछ नोर्मल होता है और ऐसा लगता है की महिला की डिलीवरी नोर्मल होगी।

लेकिन डिलीवरी के दौरान ऐसी कुछ दिक़्कतें आ जाती है जिससे महिला की डिलीवरी सिजेरियन करनी पड़ती है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान जितना महिला स्वस्थ रहती है अपना अच्छे से ध्यान रखती है, एक्टिव रहती है, तनाव नहीं लेती, शिशु के गर्भ में विकास का अच्छे से ध्यान रखती है तो इससे महिला की नोर्मल डिलीवरी होने के चांस बढ़ जाते हैं। और ऐसा नहीं है की नौवें महीने में ही महिला यह अंदाजा लगा सकती है की डिलीवरी नोर्मल होगी या नहीं, बल्कि इसका अंदाजा प्रेगनेंसी के छठे सातवें महीने में भी लगाया जा सकता है। साथ ही डॉक्टर्स भी आपकी शारीरिक स्थिति को जानने के बाद आपको राय दें सकते हैं की आपकी डिलीवरी नोर्मल होगी या नहीं।

छठे महीने में यह लक्षण बढ़ाते हैं नोर्मल डिलीवरी के चांस

प्रेगनेंसी के छठे महीने में कुछ ऐसे लक्षण हैं जो यदि गर्भवती महिला को महसूस हो, तो वो लक्षण यह बताते हैं की महिला की डिलीवरी नोर्मल होगी या नहीं। तो आइये अब जानते हैं की ऐसे कौन से लक्षण हैं जो छठे महीने में ही बताने में मदद करते हैं की महिला की डिलीवरी नोर्मल होगी या नहीं।

प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स

गर्भावस्था के दौरान छोटी छोटी शारीरिक परेशानियों का होना आम बात होती है। और इसका कारण बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव हो सकते हैं। लेकिन यदि गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी में कोई बड़ी दिक्कत नहीं हैं, यानी की गर्भवती महिला या शिशु की सेहत को लेकर किसी भी तरह की कम्प्लीकेशन नहीं है। और गर्भवती महिला प्रेगनेंसी की पहली तिमाही के साथ दूसरी तिमाही में भी किसी भी तरह की कम्प्लीकेशन से परेशान नहीं होती है तो इससे प्रेगनेंसी के छठे महीने में अंदाजा लगाया जा सकता है की महिला की डिलीवरी नोर्मल होने के चांस अधिक हैं।

खून की कमी

बहुत सी गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान खून की कमी की समस्या से परेशान रहती है। और प्रेगनेंसी के दौरान महिला के साथ शिशु के विकास के लिए भी महिला के शरीर में खून का पूरा होना जरुरी होता है। इसीलिए गर्भवती महिला को डॉक्टर आयरन की दवाई देने के साथ आयरन को अपनी डाइट में भरपूर मात्रा में शामिल करने की सलाह भी देते हैं। और यदि गर्भवती महिला के शरीर में खून की मात्रा पर्याप्त होती है तो इससे महिला और शिशु को स्वस्थ रहने के साथ डिलीवरी के दौरान आने वाली दिक्कतों को कम करने में मदद मिलती है। ऐसे में गर्भवती महिला को खून से सम्बंधित किसी भी समस्या का न होना भी नोर्मल डिलीवरी का ही लक्षण होता है।

गर्भ में शिशु की हलचल

गर्भ में शिशु की हलचल गर्भवती महिला के लिए प्रेगनेंसी का सबसे बेहतरीन अहसास होता है। और गर्भ में यदि शिशु बेहतर तरीके से हलचल करता है, तो इससे डिलीवरी के लिए शिशु को अपनी सही पोजीशन में आने में मदद मिलती है। ऐसे में गर्भ में शिशु की हलचल का बेहतर तरीके से होना ही नोर्मल डिलीवरी का एक लक्षण होता है।

शिशु का स्वस्थ होना

अल्ट्रासॉउन्ड के माध्यम से आपको शिशु के अंगो के विकास, शिशु के वजन, सभी के बारे में पूरी जानकारी मिल जाती है। और यदि आपको ऐसा पता चलता है की शिशु का विकास सही तरीके से हो रहा है, और शिशु स्वस्थ है तो शिशु का स्वस्थ होना भी नोर्मल डिलीवरी होने का ही एक लक्षण होता है।

शिशु का भार

प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में महिला का पेट बाहर दिखना शुरू हो जाता है ऐसे में यदि आपको ऐसा महसूस हो की शिशु का भार थोड़ा नीचे की तरफ अधिक है। तो यह भी नोर्मल डिलीवरी का ही एक लक्षण होता है।

महिला का एक्टिव रहना

गर्भवती महिला यदि अपने स्वास्थ्य का अच्छे से ध्यान रखती है, वजन को जरुरत से ज्यादा बढ़ने नहीं देती, और वजन कम भी नहीं होने देती, सैर करती है, मानसिक रूप से स्वस्थ रहती है, हल्का फुल्का व्यायाम करती है, तो इससे बॉडी में ब्लड फ्लो बेहतर होने के साथ महिला को स्वस्थ रहने और शिशु के बेहतर विकास में मदद मिलती है। ऐसे में यदि गर्भवती महिला प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में भी एक्टिव रहती है तो यह भी नोर्मल डिलीवरी का ही लक्षण होता है।

तो यह हैं कुछ टिप्स जो यदि गर्भवती महिला को महसूस हो तो इनसे नोर्मल डिलीवरी होने के चांस बढ़ जाते हैं। और साथ ही महिला को अपने स्वास्थ्य का बेहतर तरीके से ध्यान प्रेगनेंसी के दौरान रखना चाहिए ताकि गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने और शिशु के बेहतर विकास में मदद मिल सके। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान महिला का स्वस्थ रहना नोर्मल डिलीवरी के चांस को बढ़ाने में मदद करता है।

प्रेगनेंसी में सेब खाने के फायदे

प्रेगनेंसी में सेब

प्रेगनेंसी के दौरान हर कोई प्रेग्नेंट महिला को अपने आहार का अच्छे से ध्यान रखने के साथ भरपूर मात्रा में आहार का सेवन करने की सलाह देता है। क्योंकि इससे गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है। तो लीजिए आज हम भी एक ऐसे ही पोषक तत्वों से युक्त फल के बारे में बताने जा रहे हैं जो गर्भवती महिला के साथ भ्रूण के विकास में भी बहुत फायदेमंद होता है। और वो है सेब, सेब में एंटी ऑक्सीडेंट, आयरन, फाइबर, विटामिन्स व् अन्य फाइबर भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। जो प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियों से महिला को सुरक्षित रखने के साथ भ्रूण के सम्पूर्ण विकास में भी मदद करते हैं।

प्रेगनेंसी में सेब खाने के फायदे

गर्भवती महिला यदि नियमित अपनी डाइट में यदि एक सेब का सेवन करती है तो इससे महिला और शिशु को बहुत से फायदे मिलते हैं। क्योंकि सेब पोषक तत्वों की खान होता है, तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की गर्भवती महिला यदि सेब का सेवन करती है तो महिला को इससे कौन कौन से फायदे मिलते हैं।

आयरन

एनीमिया यानी की गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी का कारण बॉडी में आयरन की कमी होती है। जिससे प्रेगनेंसी और डिलीवरी के दौरान महिला को परेशानियों का सामना करने के साथ शिशु के विकास में भी कमी आ सकती है। लेकिन यदि महिला सेब का नियमित सेवन करती है तो महिला को इस परेशानी से निजात मिल सकता है। क्योंकि सेब में आयरन प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है।

फाइबर

प्रेगनेंसी के दौरान वजन बढ़ने, बॉडी में हार्मोनल बदलाव होने के कारण पाचन क्रिया धीमी पड़ सकती है। जिसके कारण गर्भवती महिला को पेट सम्बन्धी समस्या जैसे की कब्ज़, एसिडिटी, भूख में कमी जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में इस परेशानी से निजात पाने के लिए गर्भवती महिला सेब का सेवन कर सकती है। क्योंकि सेब में मौजूद फाइबर पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने के साथ मेटाबोलिज्म रेट को बढ़ाने में भी मदद करता है।

विटामिन सी

बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण गर्भवती महिला की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ सकती है। जिसके कारण महिला और शिशु को संक्रमण का खतरा रहता है। लेकिन यदि महिला प्रेगनेंसी में सेब का सेवन करती है तो सेब का सेवन करने से महिला को विटामिन सी भरपूर मात्रा में मिलता है। जो की एक बेहतरीन एंटीऑक्सीडेंट होता है जिससे प्रेग्नेंट महिला की प्रतरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद मिलती है। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान महिला और भ्रूण दोनों को हर तरह के संक्रमण से बचे रहने में मदद मिलती है।

कैल्शियम

सेब में कैल्शियम की मात्रा भी भरपूर होती है जिससे गर्भवती महिला की हड्डियों को मजबूती मिलने के साथ गर्भ में भ्रूण की हड्डियों के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है। साथ ही सेब का सेवन करने से थकान, कमजोरी को दूर करने के साथ प्रेगनेंसी के दौरान महिला को एनर्जी से भरपूर रहने में भी मदद मिलती है।

पोटैशियम

बहुत सी गर्भवती महिला महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान ब्लड प्रैशर के घटने या बढ़ने की समस्या से परेशान हो सकती हैं। जिसके कारण महिला के साथ भ्रूण को भी परेशानी हो सकती है लेकिन यदि महिला सेब का सेवन करती है तो उसे पोटैशियम भरपूर मात्रा में मिलता है। और गर्भवती महिला की बॉडी में पोटैशियम की मात्रा का भरपूर होना महिला के ब्लड प्रैशर को कण्ट्रोल करने के साथ दिल को स्वस्थ रखने में भी मदद करता है।

डेटोक्सिफिकेशन

गर्भवती महिला के बॉडी में विषैले पदार्थ की मात्रा का अधिक होना गर्भवती महिला की प्रेगनेंसी के दौरान परेशानी को बढ़ा सकता है। लेकिन यदि महिला सेब का सेवन नियमित रूप से करती है तो इससे बॉडी में मौजूद मरकरी जैसे अन्य विषैले पदार्थो को बाहर निकालने में मदद मिलती है। जिससे गर्भवती महिला और शिशु दोनों को स्वस्थ रखने में मदद मिलती है।

फोलेट

फोलेट गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास के लिए बहुत जरुरी होता है। और सेब में फोलेट प्रचुर मात्रा में पाया जाता है और यदि गर्भवती महिला सेब का सेवन भरपूर मात्रा में करती है। तो इससे न केवल शिशु के बेहतर विकास में मदद मिलती है बल्कि शिशु को जन्म दोष से सुरक्षित रखने में भी मदद मिलती है।

गेस्टेशनल डाइबिटीज़

गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला को गेस्टेशनल डाइबिटीज़ होने का खतरा रहता है, लेकिन सेब का सेवन करने से महिला को इस खतरे से सुरक्षित रहने में मदद मिलती है।

विटामिन ए

विटामिन ए आँखों के लिए बहुत अच्छा होता है और सेब में यह भरपूर मात्रा में मौजूद होता है। ऐसे में सेब का सेवन यदि गर्भवती महिला करती है तो इससे महिला की आँखों की क्षमता को बढ़ाने के साथ गर्भ में शिशु की आँखों के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी के दौरान सेब खाने के नुकसान

गर्भावस्था के दौरान सेब का सेवन करने से गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को बहुत से फायदे मिलते हैं। लेकिन यदि गर्भवती महिला सेब का सेवन जरुरत से ज्यादा करती है तो इससे गर्भवती महिला को परेशानी भी हो सकती है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में सेब का सेवन करने से कौन से नुकसान हो सकते हैं।

कैलोरी

सेब में कैलोरी की मात्रा अधिक होती है ऐसे में जरुरत से ज्यादा यदि महिला सेब का सेवन करती है तो इससे बॉडी में कैलोरी बढ़ने के कारण महिला को वजन बढ़ने की समस्या हो सकती है।

मेटाबोलिज्म

सेब का अधिक सेवन करने से पाचन क्रिया धीमी पड़ सकती है, जिसके कारण महिला को पेट सम्बन्धी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

तो यह हैं कुछ फायदे और नुकसान जो प्रेगनेंसी के दौरान सेब का सेवन करने से हो सकते हैं। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को जितना हो सके सेब का सेवन जरुरत के अनुसार करना चाहिए, दिन में एक सेब का सेवन गर्भवती महिला के लिए ठीक होता है। ताकि महिला और भ्रूण को सेब का सेवन करने के भरपूर फायदे मिल सकें और किसी तरह का नुकसान न हो। और एक बात का और भी ध्यान रखना चाहिए की गलती से भी महिला को सेब के बीज का सेवन करना चाहिए।