Home Blog Page 237

बिस्कुट खाना प्रेगनेंसी में फायदेमंद है या नुकसानदायक

गर्भावस्था के दौरान महिला को कभी खट्टा कभी मीठा तो कभी नमकीन व् चटपटा खाने की इच्छा हो सकती है। ऐसे में यदि मीठा खाने की बात की जाये तो महिला अपनी इस इच्छा को पूरी करने के लिए घर में कुछ अन्य मीठी चीज न हो तो बिस्कुट का सेवन करने के बारे में सोचती है। लेकिन प्रेग्नेंट महिला को बिस्कुट का सेवन करने से पहले यह जानना बहुत जरुरी होता है की प्रेगनेंसी में बिस्कुट का सेवन करना चाहिए या नहीं।

क्योंकि बिस्कुट एक तरह के नहीं होते है बल्कि इसमें बहुत से फ्लेवर होते हैं, कुछ ऐसी चीजों के बिस्कुट बने होते हैं जो महिला के लिए फायदेमंद होती है तो कुछ ऐसी भी होती है जो महिला को नुकसान पहुंचा सकती है। और यदि महिला ऐसे बिस्कुट का सेवन करती है जिससे महिला को नुकसान पहुँच सकता है तो उसके कारण बच्चे को भी नुकसान हो सकता है।

प्रेगनेंसी में बिस्कुट खाना चाहिए या नहीं?

जी हाँ, प्रेगनेंसी के दौरान महिला बिस्कुट का सेवन कर सकती है। लेकिन बिस्कुट का सेवन करने से पहले उसके पैकेट पर पढ़ लेना चाहिए की बिस्कुट को बनाने में किन चीजों का इस्तेमाल किया गया है। यदि बिस्कुट बनाने में उन चीजों का इस्तेमाल किया गया है जिनका सेवन प्रेगनेंसी में नहीं करना चाहिए तो उन बिस्कुट को नहीं खाना चाहिए। यदि बिस्कुट बनाने में उन चीजों का इस्तेमाल किया गया है जो प्रेगनेंसी के दौरान सेफ हैं तो गर्भवती महिला उनका सेवन कर सकती है।

प्रेगनेंसी में कौन से बिस्कुट का सेवन नहीं करना चाहिए?

  • जिन बिस्कुट को बनाने में मैदा, आर्टिफिशल मीठा, तेल, ग्लूटेन आदि का इस्तेमाल का होता है तो उन बिस्कुट का सेवन प्रेग्नेंट महिला को नहीं करना चाहिए। इसके अलावा यदि क्रीम वाले बिस्कुट है वह खाने में गर्भवती महिला को टेस्टी लग सकते हैं लेकिन उन बिस्कुट का सेवन भी प्रेग्नेंट महिला को नहीं करना चाहिए।
  • प्रेगनेंसी में बेसन से बने बिस्कुट का सेवन भी महिला को नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसके कारण प्रेग्नेंट महिला को पेट फूलने, सीने में जलन की समस्या हो सकती है।
  • प्रेगनेंसी में आर्टिफिशल शुगर व् क्रीम से बने बिस्कुट का सेवन भी प्रेग्नेंट महिला को नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसका सेवन करने से गर्भवती महिला का वजन जरुरत से ज्यादा बढ़ सकता है। जिसे डिलीवरी के बाद भी महिला के लिए मुश्किल हो सकता है साथ ही इससे प्रेगनेंसी में गेस्टेशनल शुगर होने का खतरा बढ़ जाता है।

कौन से बिस्कुट का सेवन प्रेग्नेंट महिला कर सकती है?

  • गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान आटे से बने बिस्कुट जिनमें फाइबर की मात्रा की अधिकता होती है उन बिस्कुट का सेवन कर सकती है क्योंकि इससे प्रेग्नेंट महिला को पाचन तंत्र से सम्बंधित समस्या जैसे की कब्ज़, एसिडिटी आदि से बचे रहने में मदद मिलती है।
  • गर्भावस्था के दौरान प्रोटीन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, जैसे पोषक तत्वों से भरपूर बिस्कुट आपके पेट में पल रहे बच्चे की आहार संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद कर सकते हैं। ऐसे में आप इन बिस्कुट का सेवन भी कर सकती है।

प्रेगनेंसी में कितने बिस्कुट खाने चाहिए

जिस तरह हर खाद्य पदार्थ का सेवन प्रेग्नेंट महिला सिमित मात्रा में करती है उसी तरह बिस्कुट का सेवन भी प्रेग्नेंट महिला को सिमित मात्रा में ही करना चाहिए। ताकि प्रेग्नेंट महिला को बिस्कुट का सेवन करने से किसी तरह के नुकसान न हो। ऐसे में एक दिन में दो से चार बिस्कुट का सेवन प्रेग्नेंट महिला कर सकती है।

तो यह है प्रेगनेंसी में बिस्कुट का सेवन करने से सम्बंधित टिप्स, यदि आप भी प्रेगनेंसी में बिस्कुट का सेवन करना चाहती हैं तो इन बातों का अच्छे से ध्यान रखें। ताकि बिस्कुट का सेवन करने से आपको सेहत सम्बन्धी परेशानी न हो।

अनुलोम विलोम से क्या फायदे होते हैं?

Anulom Vilom Ke Fayde

अनुलोम विलोम से क्या फायदे होते हैं, अनुलोम विलोम को करने का सही तरीका, अलोम विलोम के फायदे, प्राणायाम को करने के क्या फायदे है, Anulom vilom Pranayam

पहले के समय में लोग योग के प्रति बहुत सजग रहते है और शायद यही कारण था की आज की तुलना में पहले के लोग अधिक स्वस्थ और सुन्दर हुआ करते थे। लेकिन वर्तमान में लोग अपनी दिनचर्या में इतना व्यस्त रहते है की योग के लिए समय ही नहीं निकाल पाते। जिसके कारण हर दूसरे व्यक्ति को कोई न कोई बीमारी हो ही जाती है।

हालांकि पिछले कुछ सालों में प्रधानमंत्री जी के द्वारा चलाये गए अभियानों से लोगों में योग के प्रति जागरूकता आयी है। और काफी हद तक लोग योग करने भी लगे है। ऐसे ही कुछ योगों में से एक है अनुलोम विलोम। जो की बहुत ही महत्वपूर्ण प्राणायाम है। इस प्राणायाम में सांस लेने की क्रिया को बार-बार किया जाता है।

अनलोम का अर्थ होता है सीधा जबकि विलोम का अर्थ होता है उल्टा। इस प्राणयाम में नाक के दाएं छिद्र से सांस को खींचते है और बायीं नाक के छिद्र से सांस को बाहर निकाला जाता है।

अनुलोम विलोम प्राणायाम :-anulom vilom

इस प्राणायाम को नाड़ी शोधक प्राणायाम भी कहा जाता है। इस योग को करने के लिए कोई विशेष उम्र निहित नहीं है, इसे हर उम्र के लोग कर सकते है और इसका फायदा उठा सकते है।

नियमित रूप से इस आसान को करने से साड़ी नदियां शुद्ध और निरोगी रहती है। इसके अलावा इसे करने से सर्दी, जुखाम दमा आदि की समस्या में भी राहत मिलती है।

इस प्राणायाम को करते समय तीन क्रियाएं की जाती है : पूरक कुम्भक और रेचक। स्वस्थ और निरोगी जीवन जीने के लिए आपको रोजाना 10 मिनट के लिए इस आसान को करना होगा। यहाँ हम आपको अनुलोम विलोम प्राणायाम को करने के फायदे और उसका तरीका बताने जा रहे है जिसकी मदद से आप इस आसान को आराम से कर पायेंगे।

अनुलोम विलोम प्राणायाम के फायदे :-

1. नियमित रूप से रोजाना इस योग को करने से फेफड़े मजबूत होते है और उनके कार्य करने की क्षमता बढ़ती है।

2. अनुलोम विलोम प्राणायाम को करने से स्किन एलर्जी और त्वचा से संबंधित सभी प्रकार की समस्याएं खत्म हो जाती है।अनलोम विलोम

3. इस प्राणायाम को करने से शरीर में रक्त का प्रवाह बढ़ता है जिससे ब्लड प्रेशर की समस्या दूर होती है।

4. वजन घटाने के लिए भी यह योग बहुत लाभकारी है। इसे करने से चर्बी घटती है जिससे मोटापा कम होता है।

5. सर्दियों में शरीर का तापमान बहुत कम होता है जिसके कारण सर्दियों के मौसम में सर्दी जुखाम जैसी समस्याएं होती है। परन्तु अगर ठंड के दिनों में इस योग को किया जाए तो शरीर का तापमान संतुलित रहता है और जुखाम आदि नहीं होता।

6. यह आसान शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। और साथ ही मधुमेह जैसी समस्यायों को भी खत्म करने में मदद करता है।

7. अनुलोम विलोम को करने से ब्रेन ट्यूमर जैसी समस्याएं भी ठीक हो जाती है और मस्तिष्क की याद रखने की क्षमता भी बढ़ती है।

8. इसकी मदद से सायनस की समस्या भी ठीक हो जाती है और टॉन्सिल्स में भी आराम मिलता है।

9. इस आसान को करने से आर्थराइटिस, कार्टिलेजका घिसना आदि जैसी बीमारियां भी ठीक हो जाती है।

10. वृद्धावस्था में अनुलोम विलोम करने से स्वस्थ और निरोगी जीवन मिलता हैं। साथ ही जोड़ों के दर्द में भी आरम्म मिलता है।

अनुलोम विलोम प्राणायाम करने की सही विधि :-Yoga

  • इस प्राणायाम को करने के लिए सबसे पहले, सुखासन, सिद्धासन या वज्रासन में बैठ जाएं।
  • याद रखें अनुलोम विलोम योग की शुरुवात हमेशा नाक के बाएं छिद्र से करें।
  • आसान करने के लिए हाथों की उँगलियों की सहायता से नाक के दाए छिद्र को बंद करें और बाएं छिद्र से लंबी सांस लें।
  • इस प्रक्रिया को कम से कम 10 से 15 मिनट तक करें।
  • सांस लेते समय आपको अपना ध्यान दोनों आंखों के बीच में स्थित आज्ञा चक्र पर एकत्रित करें।
  • बस लम्बी सांस लें और मन में ॐ मंत्र का जाल करते रहे।
  • शुरुवात में अगर किसी योग प्रशिक्षक के निर्देशन में किया जाए तो बेहतर होगा।
  • यदि आपको एनीमिया है तो इसे करने से पूर्व डॉक्टरी परामर्श लें लें।
  • सांसों को लेने और छोड़ने का काम आराम से करें गलत तरीके या जल्दी बाजी करने से शरीर को नुकसान भी पहुंच सकता है।

इनका भी रखें ध्यान :

ऊपर हमने आपको अनुलोम विलोम करने के फायदे और उसे करने की सही विधि बताई है। अगर आप इस आसान का पूर्ण फायदा उठाना चाहते है तो इसे सही तरीके से ही करें। एक बात और, अगर आप कमजोर और एनीमिया से पीड़ित है तो शुरुवात में सांस लेने में कुछ परेशानी हो सकती है। ऐसे में इसे अधिक बार न करें और शुरुवात में कम करें। जिसके बाद धीरे धीरे उसे बढ़ाएं।

प्रेगनेंसी में भिंडी खाना सही या गलत

गर्भावस्था में भिंडी

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को अपनी डाइट में उन सभी खान पान की चीजों को शामिल करने की सलाह दी जाती है जो न केवल पोषक तत्वों से भरपूर हो, बल्कि जिनका सेवन करने से गर्भवती महिला के स्वास्थ्य को बेहतर रहने, प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियों को कम करने के साथ ही गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर शारीरिक और मानसिक विकास में मदद मिल सके। तो लीजिये आज हम ऐसी ही एक सब्ज़ी के बारे में आपको बताने जा रहे हैं जो है भिंडी। प्रेगनेंसी के दौरान भिंडी का सेवन करना चाहिए या नहीं इसे लेकर बहुत सी गर्भवती महिलाओं के मन में सवाल आ सकता है। तो इसका जवाब है हाँ, गर्भवती महिला भिंडी का सेवन कर सकती है क्योंकि भिंडी को अपनी डाइट में शामिल करने से गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी में भिंडी का सेवन करने से होने वाले फायदे

विटामिन सी, विटामिन बी9, फोलेट, डाइट्री फाइबर, एंटी ऑक्सीडेंट्स से भरपूर भिंडी का सेवन करने से गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को बहुत फायदे मिलते हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की भिंडी का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान करना कितना लाभदायक होता है।

फाइबर

फाइबर से भरपूर भिंडी का सेवन करने से गर्भवती महिला की पाचन क्रिया को बेहतर रहने में मदद मिलती है। क्योंकि यह आंतो में मौजूद विषैले तत्वों को बॉडी से बाहर निकालने में मदद करती है, जिससे पेट को साफ़ रहने में मदद मिलती है साथ ही भिंडी का सेवन करने से प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली कब्ज़ की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

वजन

भिंडी में कैलोरी की मात्रा बहुत कम होने के साथ पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं, जो प्रेगनेंसी के दौरान वजन को नियंत्रित रखने के साथ बॉडी को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। साथ ही फाइबर से भरपूर होने के कारण पाचन क्रिया को सुचारु रूप से काम करने में भी फायदा होता है।

गर्भपात

जिन महिलाओं को गर्भधारण करने में समस्या आती है या बार बार गर्भपात होने की समस्या होती है तो यह उन महिलाओं को गर्भधारण में मदद करने के साथ गर्भपात जैसी समस्या से भी महिला को सुरक्षित रखने में मदद करती है।

कोलेस्ट्रॉल

बॉडी में कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना हदय सम्बन्धी समस्या होने का कारण बन सकता है। ऐसे में भिंडी का सेवन करने से इसमें मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट्स और पैक्टिन नामक घुलनशील फाइबर गर्भवती महिला के शरीर में कोलेस्ट्रॉल के लेवल को नियंत्रित रखने में मदद करता है। जिससे प्रेग्नेंट महिला को कोलेस्ट्रॉल के बढ़ने या हदय सम्बन्धी समस्या होने के खतरे से बचे रहने में मदद मिलती है।

ब्लड शुगर लेवल

प्रेगनेंसी के दौरान भिंडी का सेवन करने से रक्त में शुगर के लेवल को सामान्य बनाएं रखने में मदद मिलती है, जिससे प्रेगनेंसी के दौरान गेस्टेशनल शुगर जैसी परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

इम्यून सिस्टम

विटामिन सी, एंटी ऑक्सीडेंट्स से भरपूर भिंडी का सेवन करने से भी गर्भवती महिला के इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाएं रखने में मदद मिलती है। जिससे प्रेग्नेंट महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को प्रेगनेंसी के दौरान होने वाले संक्रमण से सुरक्षित रखने में मदद मिलती है।

विटामिन के

भिंडी में विटामिन के भरपूर मात्रा में मौजूद होता है, साथ ही भिंडी में होने वाला लसलसा पदार्थ दोनों ही प्रेग्नेंट महिला की हड्डियों और गर्भ में पल रहे शिशु की हड्डियों को मजबूती प्रदान करने में मदद करता है।

एनीमिया

आयरन की कमी के कारण गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान एनीमिया जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन भिंडी का सेवन करने से गर्भवती महिला के शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है जिससे एनीमिया जैसी परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

शिशु का विकास

फोलेट, से भरपूर भिंडी का सेवन करने से केवल गर्भवती महिला को ही नहीं बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर मानसिक विकास में भी मदद मिलती है। साथ ही भिंडी में मौजूद अन्य पोषक तत्व गर्भवती महिला के बेहतर शारीरिक विकास में भी मदद करते हैं।

प्रेगनेंसी में भिंडी का सेवन करने के नुकसान

गर्भवती महिला यदि भिंडी का सेवन बहुत अधिक मात्रा में करती है तो इसके कारण गर्भवती महिला को पथरी जैसी समस्या के कारण परेशान होना पड़ सकता है। साथ ही जो गर्भवती महिलाएं पथरी की समस्या से परेशान हो उन्हें अधिक मात्रा में भिंडी का सेवन करने से बचना चाहिए।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान भिंडी का सेवन करने के कुछ फायदे और नुकसान, ऐसे में गर्भवती महिला को पर्याप्त मात्रा में इसे अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए। ताकि गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को बेहतरीन फायदे मिलने में मदद मिल सके।

10 सब्जियां जो प्रेग्नेंट महिला को जरूर खानी चाहिए

प्रेगनेंसी के दौरान खाने पीने का बहुत ज्यादा महत्व होता है क्योंकि खान पान से ही प्रेग्नेंट महिला शरीर को पोषण मिलता है जिससे शिशु का विकास भी अच्छे से होता है। प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने महिला को सब्जियों व् फलों का भरपूर सेवन करने की सलाह दी जाती है। लेकिन गर्भवती महिला को केवल उन्ही फलों व् सब्जियों का सेवन करना चाहिए जो न केवल पोषक तत्वों से भरपूर हो बल्कि जिन्हे खाने से माँ व् बच्चे को किसी तरह का नुकसान न हो।

साथ ही सब्जियों को खाने के लिए प्रयोग में लाने से पहले प्रेग्नेंट महिला को सब्जियों को अच्छे से धो लेना चाहिए, क्योंकि बिना धुली सब्जियों पर बैड बैक्टेरिया मौजूद होता है जो महिला व् बच्चे को संक्रमित कर सकता है, और प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स को बढ़ा सकता है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको ऐसी दस सब्जियों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका सेवन प्रेग्नेंट महिला को जरूर करना चाहिए।

पालक

पालक का सेवन प्रेग्नेंट महिला को जरूर करना चाहिए। क्योंकि पालक में फाइबर, आयरन, विटामिन, फोलिक एसिड, कैल्शियम व् अन्य पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। जो प्रेग्नेंट महिला की स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानियों को खत्म करने महिला को स्वस्थ रखने के साथ बच्चे के शारीरिक व् दिमागी विकास को बेहतर करने में मदद करते हैं। साथ पालक में मौजूद जिंक बच्चे के अंगो को बनाने में मदद करता है। पालक के साथ अन्य हरी सब्जियां जैसे मेथी, सरसों, बथुआ आदि का सेवन भी प्रेग्नेंट महिला को जरूर करना चाहिए।

ब्रोकली

गर्भवती महिला को ब्रोकली का सेवन भी जरूर करना चाहिए क्योंकि ब्रोकली कैल्शियम व् फोलेट का बेहतरीन स्त्रोत होती है। जो गर्भ में बच्चे के शारीरिक विकास के साथ दिमाग के विकास को बढ़ाने में भी मदद करती है। इसके अलावा फोलेट जब बच्चे को भरपूर मात्रा में मिलता है तो इससे बच्चे को जन्म दोष से बचाव करने में भी मदद मिलती है।

चुकंदर

आयरन, फोलिक एसिड, विटामिन ए जैसे पोषक तत्व चुकंदर में भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। जो गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी को पूरा करने, बच्चे के बेहतर शारीरिक व् दिमागी विकास में मदद करते हैं।

टमाटर

टमाटर एंटी ऑक्सीडेंट गुण यानी विटामिन सी से भरपूर होता है ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला सब्जियों, सलाद, सूप, आदि के रूप में यदि टमाटर का सेवन करती है। तो इससे प्रेग्नेंट महिला व् शिशु की इम्युनिटी बढ़ती है जिससे महिला व् बच्चे को को हर प्रकार के संक्रमण से बचे रहने में मदद मिलती है।

हरी मटर

प्रेग्नेंट महिला को हरी मटर का सेवन भी जरूर करना चाहिए क्योंकि हरी मटर फाइबर, विटामिन सी, विटामिन के जैसे पोषक तत्वों का बेहतरीन स्त्रोत होती है। जो माँ व् बच्चे दोनों को स्वस्थ रखने में मदद करता है।

शकरकंद

प्रेग्नेंट महिला को शकरकंद का सेवन भी जरूर करना चाहिए। क्योंकि शकरकंद विटामिन्स का बेहतरीन स्त्रोत होता है। जो माँ व् बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं।

पत्‍तागोभी

पत्तागोभी में विटामिन ए, विटामिन ई, विटामिन के, मैगनीशियम, जिंक, पोटैशियम आदि पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते है जो गर्भवती महिला के साथ बच्‍चे के स्‍वास्‍थ्‍य के लिए भी बहुत फायदेमंद होते हैं।

बेल पेप्पर

हरी के साथ लाल पीली शिमला मिर्च का सेवन भी प्रेग्नेंट महिला को जरूर करना चाहिए। क्योंकि यह विटामिन्स का बेहतरीन स्त्रोत होती है। खासकर इसमें विटामिन सी की अधिकता होती है जो प्रेग्नेंट महिला की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है। साथ ही विटामिन सी बॉडी के सभी हिस्सों तक खून के प्रवाह को अच्छे से होने में मदद करता है। जिससे महिला व् बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद करता है।

एवोकाडो

एवोकाडो फाइबर, विटामिन के, फोलेट, पोटैशियम, विटामिन बी 6 व् अन्य पोषक तत्वों से भरपूर होता हैं। जो गर्भ में बच्चे के मस्तिष्क, ऊतक के बेहतर विकास में भी मदद करते हैं। साथ ही फाइबर गर्भवती महिला के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इसीलिए गर्भवती महिला को एवोकाडो का सेवन भी भरपूर मात्रा में करना चाहिए।

गाजर

गाजर एक ऐसी सब्ज़ी है जिसे प्रेग्नेंट महिला सलाद व् सब्ज़ी दोनों के रूप में खा सकती है इसके अलावा महिला इसका जूस बनाकर भी पी सकती है। गाजर में आयरन, विटामिन्स, कैल्शियम जैसे पोषक तत्वों की अधिकता होती है, जो गर्भवती महिला व् बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होता है। ऐसे किसी न किसी रूप में गाजर को गर्भवती महिला को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए।

तो यह हैं वो सब्जियां जिनका सेवन प्रेग्नेंट महिला को जरूर करना चाहिए। ताकि गर्भवती महिला को भरपूर मात्रा में पोषक तत्व मिल सके। जिससे प्रेग्नेंट महिला को फिट रहने और बच्चे के विकास को शुरुआत से लेकर जन्म लेने तक बेहतर होने में मदद मिलें।

प्रसव के बाद कमर में दर्द रहता है?

प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में बहुत से बदलाव आते है, जैसे वजन का बढ़ना, स्वभाव का बदलना, शरीर में हार्मोनल बदलाव आना, आदि और इस समय महिला को अपना बहुत अच्छे से ध्यान देना पड़ता है, ताकि महिला और उसके गर्भ में पल रहे शिशु को स्वस्थ रहने में मदद मिल सकें, इसके अलावा ऐसा नहीं है की प्रसव के बाद आप बिलकुल ठीक हो जाती है, प्रसव के ठीक बाद भी आपके शरीर में हार्मोनल बदलाव आते है, जिसके कारण आपको शरीर के कई अंगो, जैसे की पेट, कमर, स्तन में दर्द महसूस होता है, ऐसे में महिला को प्रसव के बाद भी अपना अच्छे से ख्याल रखना पड़ता है, क्या आप डिलीवरी के बाद होने वाले कमर के दर्द से परेशान है? यदि हाँ तो आइये आज हम आपको डिलीवरी के बाद होने वाले पेट कमर दर्द से निजात पाने के लिए आपको कुछ उपाय बताते है।

इन्हें भी पढ़ें:- डिलीवरी के बाद मालिश करना बहुत जरुरी होता है! ये फायदे होते है

प्रसव के बाद कमर दर्द होने के कारण:-

  • शिशु के जन्म के बाद भी महिला के शरीर में बहुत से परिवर्तन होते है, जिसके कारण महिला को कमर दर्द की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
  • प्रेगनेंसी के दौरान गर्भाशय का आकार बड़ा हो जाता है, जिससे मांसपेशियों में खिंचाव होता है, और डिलीवरी के बाद एक दम से मांसपेशियों में आए ढीलेपन के कारण आपको ये परेशानी हो सकती है।
  • शरीर में हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण भी महिला को कमर दर्द हो सकता है।
  • महिला के शरीर में आई कमजोरी के कारण भी ऐसा हो सकता है।

प्रसव के बाद कमर में होने वाले दर्द से राहत पाने के उपाय:-

सिकाई करें:-

यदि आपकी कमर में दर्द रहता है, तो आपको दिन में दो से तीन बार गरम पानी से अच्छे से सिकाई करनी चाहिए और नहाने के लिए भी गुनगुने पानी का इस्तेमाल करना चाहिए, इससे आपकी मांसपेशियों को आराम मिलता है, जिससे आपको कमर दर्द से राहत पाने में मदद मिलती है।

आहार का ध्यान रखें:-

डिलीवरी के बाद महिला को अपने आहार का खास ध्यान रखना चाहिए महिला को हरी सब्जियां, फल आदि भरपूर मात्रा में खाने चाहिए और थोड़े थोड़े समय बाद कुछ न कुछ खाना चाहिए ऐसा करने से उनके शरीर में पोषक तत्वों की मात्रा भरपूर रहती है, जिससे उन्हें कमर दर्द की समस्या से बचाव करने में मदद मिलती है।

नींद को भरपूर लें:-

महिला को डिलीवरी के बाद एक दम से अपने शरीर पर किसी दबाव को नहीं डालना चाहिए, क्योंकि उस समय शरीर काफी कमजोर होता है, और महिला को अपनी नींद को भरपूर लेना चाहिए ताकि उसके शरीर को आराम मिल सकें और उसे कमर दर्द की समस्या से राहत मिल सकें।

इन्हें भी पढ़ें:- अगर आप डिलीवरी के बाद भी पहले जैसी दिखना चाहती है? तो ये करें

किसी क्रीम या स्प्रे का इस्तेमाल करें:-

कमर दर्द से राहत के लिए महिला अपनी कमर पर किसी क्रीम या स्प्रे का भी इस्तेमाल कर सकती है, इसे भी उसे कमर दर्द की समस्या से राहत मिलती है, आप चाहे तो अपनी डॉक्टर से राय लेकर दवाई लिखवा सकती है।

ज्यादा देर तक बैठे नहीं:-

अधिक देर तक एक ही स्थान पर बैठने के कारण आपको ये समस्या हो सकती है, इसीलिए डिलीवरी के बाद थोड़े दिन तक आपको अधिक बैठना नहीं चाहिए, यदि आप शिशु को स्तनपान भी करवाती हैं तो आपको आरामदायक जगह का चुनाव करके कमर का सहारा लेकर बैठना चाहिए ताकि आपको भी आराम मिलें और शिशु भी आराम से दूध पीलें।

मालिश करवाएं:-

डिलीवरी के बाद शरीर में आई कमजोरी के कारण भी आपको कमर दर्द की समस्या हो सकती है, और इस समस्या से राहत पाने के लिए आपको मालिश जरूर करवानी चाहिए, इससे महिला के शरीर में आई कमजोरी दूर होती है, रक्त संचार अच्छे से होता है, मांसपेशियों को मजबूती मिलती है, जिससे कमर दर्द से भी राहत मिलने में मदद मिलती है।

उठने बैठने का रखें ध्यान:-

डिलीवरी के बाद महिला को कभी भी एक पैर के भार नहीं उठना चाहिए, बल्कि दोनों पैरों को जमीं पर रखने के बाद उठना चाहिए, लेटते समय, या उठते समय आराम से उठना चाहिए ज्यादा झुकना नहीं चाहिए, क्योंकि इससे कमर दर्द और बढ़ता है, जबकि यदि आप अपने शरीर को पूरा रेस्ट देते हैं तो आपको इस समस्या से छुटकारा मिलता है।

तो ये हैं कुछ टिप्स जिनका इस्तेमाल करके आप डिलीवरी के बाद होने वाले कमर दर्द की समस्या से राहत पा सकते है, इसके अलावा आप चाहे तो इस बारे में अपने डॉक्टर से भी राय ले सकते है, और यह भी याद रखें की ऐसे में अपने साथ कोई लापरवाही न करें, क्योंकि डिलीवरी के बाद आपके शरीर में बहुत कमजोरी आती है, इसीलिए अपना अच्छे से ध्यान रखें।

इन्हें भी पढ़ें:- डिलीवरी के बाद भी अगर आपका बेबी बम्प नहीं जा रहा है तो ये अपनाएँ

क्या आपके स्तनों में दर्द रहता है?

स्तनों में दर्द, ब्रैस्ट पेन, चेस्ट पेन, छाती में दर्द, मासिक धर्म में स्तन में दर्द, स्तन में दर्द के कारण, स्तनों में दर्द की समस्या, स्तन में दर्द क्यों होता है, स्तन में दर्द के क्या कारण है, ब्रैस्ट में पेन क्यों होता है, ब्रैस्ट के बड़े होने पर भी दर्द होता है

आज के समय में महिलाएं में होने वाली परेशानियों की लिस्ट बहुत लम्बी है। मासिक धर्म से लेकर कमर दर्द, थाईराइड और मोटापे की समस्या अधिकतर महिलाओं में ही देखने को मिलती है। पहले के समय में महिलाओं को इतनी परेशानियां नहीं हुआ करती थी लेकिन आज कल के समय में हर दूसरी महिला किसी न किसी बीमारी से पीड़ित है। जिसका मुख्य कारण अव्यवस्थित जीवन शैली और खान पान की सही देखभाल न करना है।

महिलाओं की इन्ही समस्याओं में से एक समस्या है स्तनों में दर्द। महिलाओं के स्थानों में दर्द होना आजकल आम होता जा रहा है। देश की लगभग 70 % महिलाओं को स्तनों में दर्द की शिकायत रहती है। ये दर्द एक या दोनों स्तनों में हो सकता है। महिलाओं की ब्रैस्ट में पेन होने के बहुत से कारण होते है। जिनमे से एक कारण पीरियड्स से पहले होने वाले हार्मोनल असंतुलन होता है। इस तरह के दर्द को चक्रीय दर्द कहा जाता है।

यह दर्द माहवारी शुरू होने से एक या दो हफ्ते पहले शुरू हो जाता है और माहवारी खत्म होने के बाद ठीक हो जाता है। इसके अलावा स्तनों में दर्द के कुछ गैर-चक्रीय कारण भी होते है, जिनके कारण स्तनों में दर्द रहता है। लेकिन सभी को इन कारणों के बारे में नहीं पता होता। इसीलिए आज हम आपको स्तनों में दर्द के कुछ कारण बताने जा रहे है जिनकी मदद से आप भी इस दर्द के कारणों को पहचान पाएंगी।

स्तनों में दर्द के निम्नलिखित कारण होते है :-

महिलाओं के स्तन में होने वाले दर्द के कारणों को दो हिस्सों में बांटा गया है। जिनके बारे में नीचे विस्तार से बताया गया है।

1. चक्रीय दर्द 2. गैर चक्रीय दर्द
 चक्रीय दर्द सभी महिलाओं में होता है। यह दर्द मासिक धर्म प्रारंभ होने के पहले होता है। इसे चक्रीय मसतालगिया कहते है। इस दर्द के होने का कारण हॉर्मोन में परिवर्तन होता है। सामान्य तौर पर ये दर्द स्तनों के बाहरी और ऊपरी हिस्से में होता है। ये दर्द सामान्य होता है इसीलिए इसमें घबराने की जरूरत नहीं है। यह दर्द पीरियड्स शुरू होने के पहले आता है और उनके खत्म होने के साथ ही चला जाता है।  यह दर्द 30 से 50 वर्ष की उम्र की महिलाओं में अधिक होता है। इस दर्द के होने पर ऐसा लगता है मानो आपके स्तन में चोट लग गयी हो। इस दर्द में महिलाओं की ब्रेस्ट में दर्द, भारीपन, स्तनों में कोमलता, जकड़न और स्तनों के उत्तकों में जलन आदि का अनुभव होता है। गैर-चक्रीय दर्द के बहुत से कारण होते है ऐसे में किसी निश्चित कारण का पता लगा पाना थोड़ा मुश्किल है। इसीलिए नीचे हम आपको स्तनों में गैर-चक्रीय दर्द के कुछ कारणों के बारे में बता रहे है।

स्तनों में दर्द के कारण :-

1. हॉर्मोन में परिवर्तन :small breast

मासिक धर्म और गर्भावस्था के दौरान स्तनों में दर्द होना आम है। चक्र में परिवर्तन होने के कारण अक्सर ऐसे दर्द होते है जिनसे स्तनों में कोमलता भी बनी रहती है। इसके अलावा मीनोपॉज के बाद हॉर्मोन में परिवर्तन के कारण भी स्तनों में दर्द हो सकता है। अत्यधिक तनाव लेने से भी हॉर्मोन में परिवर्तन आने लगते है जिसके कारण भी यह हो सकता है।

2. दवाएं :

बहुत सी महिलाएं गर्भधारण नहीं होने के कारण उपचार की मदद लेती है जिसके लिए वे दवाओं का सेवन करती है। कई बार इन दवाओं की वजह से भी स्तनों में दर्द की शिकायत रहती है। इसके अतिरिक्त गर्भनिरोधक गोलियों का अधिक सेवन करने या हॉर्मोन को बैलेंस करने की लिए मिलने वाली दवाएं का सेवन करने से भी ब्रैस्ट पेन शुरू होता है। रजोनिवृत्ति के समय उपयोग की जाने वाली एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन थेरेपी भी दर्द का कारण बनती है।

3. स्तनों की संरचना व् उनका आकार :breast pain in middel

महिलाओं में गैर चक्रीय दर्द होने का एक कारण स्तनों की संरचना भी होता है। कई बार दुग्ध नलिकाओं और दुग्ध ग्रंथियों में परिवर्तन होता है जिसके कारण स्तनों में अल्सर का विकास होने लगता है। इसके अलावा स्तनों की संरचना अलग होने से छाती के आस-पास मांसपेशियों, छाती के जोड़ो और दिल पर भी दर्द होने की शिकायत रहती है।

4. फैटी एसिड :

हमारे शरीर के भीतर बहुत से तत्व और एसिड पाए जाते है। जो शरीर के स्वास्थ्य के लिए उत्तरदायी होते है। इन्ही में से एक फैटी एसिड जो शरीर की कोशिकाओं में होता है। अगर फैटी एसिड मियाउ असंतुलन हो जाए तो स्तन के हॉर्मोन में प्रवाह में अन्य उत्तकों की संवेदनशीलता प्रभावित होती है जिससे दर्द हो सकता है।

5. कैफीन :

चाय, कॉफ़ी, सोडा, दवाएं और चॉक्लेट जैसी कैफीन युक्त चीजों का अधिक सेवन करने से भी स्तनों में दर्द की शिकायत रहती है। क्योंकि इनमे कैफीन की बहुत मात्रा पाई जाती है जो रक्त वाहिकाओं के फैलाव का कारण बनती है जिससे दर्द और उनकी कोमलता बढ़ती है।

6. सर्जरी :

बहुत सी महिलाएं अपने स्तनों को अच्छा आकार देने के लिए सर्जरी करवाती है लेकिन शायद आप नहीं जानती की आगे चलकर यही सर्जरी आपके ब्रैस्ट में पेन में कारण बन सकती है।

7. ब्रा :tight fitted bra

कई बार हम बहुत अधिक टाइट फिटिंग के कपडे पहनते है जिसके कारण हमारे स्तनों पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। अगर आप अपने से छोटे साइज की ब्रा पहनती है और उसे पहनने में आपको टाइट लगता है तो हो सकता है आपके स्तन में दर्द का यही कारण हो। क्योंकि ऐसा करने से स्तनों पर दबाब पड़ता है जिससे उनमें दर्द होने लगता है।

8. एक्सरसाइज :

ब्रैस्ट पेन का एक कारण एक्सरसाइज भी होता है। बहुत से स्तनों का आकार बड़ा होता है और जब वे एक्सरसाइज करती है तो उन्हें पूरा सपोर्ट नहीं मिल पाता जिससे दर्द की समस्या उतपन्न हो सकती है। हाल ही में किए एक रिसर्च में पता चला है की तीन में से एक मैराथॉन धावक के स्तनों में दर्द रहता है।

इन बातों का रखें ध्यान :

अगर आपके स्तनों के दर्द का कारण इन्ही में से एक है तो इसके लिए आपको विशेष सावधानियां बरतनी होंगी और साथ कुछ बातों का ध्यान रखना होगा जिनके बारे में हम नीचे बता रहे है।

1. हमेशा अपने साइज और फिटेड ब्रा ही पहने। जो न तो ज्यादा तंग हो और न हो अधिक ढीली।

2. रोजाना अपनी ब्रा को अच्छे से धोएं ताकि संक्रमण से बचा जा सके।

3. रात को सोते समय कम्फ़र्टेबल ब्रा पहने।

4. व्यायाम और एक्सरसाइज के दौरान स्पोर्ट्स ब्रा पहनें।

5. अपने आहार में फलों और सब्जियों को शामिल करें।

पेट में शिशु को कष्ट देने वाली गलतियां जो गर्भवती महिला करती है

गर्भवती महिला के लिए टिप्स, गर्भ में शिशु को नुकसान पहुंचाती है यह गलतियां, गर्भ में शिशु के बेहतर विकास के लिए टिप्स, प्रेगनेंसी टिप्स, गर्भवती महिला भूलकर भी न करे यह काम, प्रेगनेंसी के दौरान महिला इन बातों का ध्यान रखे

हर गर्भवती महिला ही चाहती है की उसके गर्भ में पल रहा शिशु हमेशा स्वस्थ रहे, और जन्म के बाद भी उसे किसी तरह की कोई भी परेशानी न हो। और इसके लिए प्रेगनेंसी के दौरान महिला अपना दुगुना ध्यान भी रखती है। और यदि महिला प्रेगनेंसी के दौरान अपना अच्छे से ध्यान नहीं रखती है तो इसके कारण केवल गर्भवती महिला को ही नहीं बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसीलिए शिशु के बेहतर विकास और गर्भ में पल रहे शिशु को हर परेशानी से सुरक्षित रखने के लिए कुछ ऐसे काम है जो महिला को नहीं करने चाहिए। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं ही पेट में शिशु को कष्ट देने वाली गलतियां जो गर्भवती महिला करती है और उसे ऐसा नहीं करना चाहिए।

भूखे रहना

खान पान का प्रेगनेंसी के दौरान सबसे ज्यादा महत्व होता है, क्योंकि महिला के द्वारा अपने आहार में सम्मिलित पोषक तत्वों की मदद से ही शिशु का विकास अच्छे से हो पाता है। ऐसे में महिला का खान पान के प्रति लापरवाही करना, भूखे रहना, न केवल प्रेग्नेंट महिला को परेशानी में दाल सकता है बल्कि इसके कारण शिशु को भी नुकसान पहुँचता है। हार्मोनल बदलाव की वजह से हो सकता है की महिला को भूख कम लगे, लेकिन फिर भी महिला को थोड़े थोड़े समय बाद कुछ न कुछ खाते रहना चाहिए।

जंक फ़ूड खाना और पौष्टिक आहार न लेना

यदि गर्भवती महिला गर्भावस्था के दौरान पौष्टिक आहार लेने की बजाय जंक फ़ूड, ज्यादा मसालेदार खाने, ऑयली फ़ूड आदि का सेवन करती है तो इसके कारण महिला को पेट से सम्बंधित परेशानी जैसे की कब्ज़, गैस आदि की समस्या हो सकती है। साथ ही इसमें पोषक तत्व न होने के कारण शिशु के विकास पर भी इसका बुरा असर देखने को मिलता है। इसीलिए महिला को स्वस्थ व् पौष्टिक आहार का सेवन ही प्रेगनेंसी के दौरान करना चाहिए।

प्रदूषण, ज्यादा भीड़भाड़, व् शोर वाली जगह पर जाना

गर्भावस्था के समय यदि महिला प्रदूषण वाली जगह पर जाती है, ज्यादा भीड़भाड़ में रहती है, तेज आवाज़ वाली जगह पर जाती है तो इसके कारण शिशु को प्रदूषण के कारण इन्फेक्शन की समस्या होने के साथ शिशु की सुनने की क्षमता में भी कमी आ सकती है। साथ ही शिशु को विकलांगता जैसी समस्या के साथ भी जूझना पड़ सकता है। और शिशु के शारीरिक के साथ मानसिक विकास में भी कमी आ सकती है, ऐसे में शिशु को इन सभी समस्याओं से बचाने के लिए महिला को ऐसी जगह पर जाने से परहेज करना चाहिए।

नशीली चीजों का सेवन करना

नशीली चीजे न केवल प्रेगनेंसी के दौरान महिला के लिए परेशानी का कारण बनती है बल्कि इसके कारण शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास में कमी आ सकती है। क्योंकि महिला द्वारा ली गई नशीली चीजों का असर गर्भनाल के रास्ते गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ता है जो की शिशु के लिए बहुत नुकसानदायक हो सकता है।

गलत तरीके से सोना

प्रेगनेंसी के तीन महीने के बाद महिला का वजन बढ़ने लगता है, और पेट भी बाहर आने लगता है, जिसके कारण महिला को सोने में परेशानी का अनुभव करना पड़ सकता है। इसके अलावा प्रेगनेंसी के दौरान पेट के बल सोना, या किसी एक ही पोजीशन में सोना महिला के साथ शिशु को भी परेशान कर सकता है, जैसे की यदि महिला पेट के बल सोती है तो शिशु परेशान हो सकता है।

ज्यादा भागदौड़

बॉडी में हार्मोनल बदलाव, और शारीरिक समस्याओं के कारण प्रेगनेंसी के दौरान महिला को कमजोरी व् थकान होना आम बात होती है। ऐसे में महिला को आराम करने की सलाह दी जाती है ताकि शिशु को भी आराम मिल सके लेकिन यदि महिला ज्यादा भागदौड़ करती है, लम्बी यात्रा करती है तो इसके कारण केवल महिला को ही दिक्कत नहीं होती है, बल्कि महिला को होने वाली परेशानी का असर शिशु पर भी पड़ता है।

तनाव लेना

प्रेगनेंसी के समय शरीर में हो रही परेशानियों के कारण का बार महिलाएं तनाव में भी आ जाती है। और तनाव के कारण शिशु के विकास में कमी आने के साथ शुरुआत के दिनों में यह गर्भपात का कारण भी बन सकता है। ऐसे में महिला को इस बात को ध्यान रखना चाहिए की जितना हो सके महिला को अपनी परेशानियों को शेयर करके उनका समाधान करना चाहिए और तनाव लेने की बजाय प्रेगनेंसी के समय खुश रहना चाहिए।

पेट पर जोर

भारी सामान उठाना, पैरों के भार बैठना, पेट के बल किसी काम को करना आदि के कारण पेट पर जोर पड़ता है। जिसके कारण गर्भ में शिशु को परेशानी हो सकती है। ऐसे में गर्भवती महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की पेट पर जोर पड़ने वाले किसी भी काम को नहीं करना चाहिए।

पानी की कमी

गर्भवती महिला को पानी व् अन्य पेय पदार्थ जैसे की घर में बना ताजा जूस, नारियल पानी आदि का भरपूर सेवन करना चाहिए। क्योंकि बॉडी में होने वाली पानी की कमी के कारण गर्भ में शिशु को परेशानी का अनुभव हो सकता है।

तो यह हैं कुछ गलतियां जो यदि गर्भवती महिला करती है तो इसके कारण गर्भ में शिशु को परेशानी का अनुभव हो सकता है। इसीलिए गर्भ में शिशु को किसी भी तरह की परेशानी न हो और शिशु का बेहतर विकास हो सके इसके लिए महिला को ऐसी गलतियां नहीं करनी चाहिए।

यूट्यूब विडिओ –

आपकी ये आदतें गर्भ में शिशु को परेशान करती हैं? इन आदतों से गर्भ में शिशु परेशान होता है?

कॉपर टी निकालने के तरीके

कॉपर टी निकालने के तरीके, कॉपर टी महिलाओं को अनचाहे गर्भधारण से बचाने का एक आसान और असरदार तरीका होता है। कॉपर टी को डॉक्टर की मदद से महिला के गर्भाशय में फिट कर दिया जाता है। जिससे महिला के अंडे और पुरुष के शुक्राणु का आपस में नहीं मिल पाते हैं। और महिला को अनचाहे गर्भ से बचे रहने में मदद मिल सकती है। कॉपर टी को महिला तीन, पांच, दस साल तक के लिए लगवा सकती है। साथ ही महिला कॉपर टी को अपनी मर्ज़ी से महिला कभी भी निकलवा सकती है। तो आइये अब जानते हैं की महिला इस डिवाइस को कब और कैसे निकलवा सकती है।

कॉपर टी को निकालने का तरीका

  • जिस तरह महिला को इस डिवाइस को लगवाने के लिए डॉक्टर की मदद की जरुरत होती है।
  • उसी तरह इसे निकलवाने के लिए भी महिला को डॉक्टर के पास ही जाना चाहिए।
  • इस डिवाइस के नीचे की तरफ एक धागा लगा होता है।
  • जिसको बाहर की तरफ खींचने से यह डिवाइस बाहर आ जाती है।
  • डॉक्टर फोरसेप जो की एक छोटा सा चिमटा होता है।
  • उसकी मदद से धागे को बाहर की तरफ खींच लेते हैं।
  • जिससे आसानी से यह डिवाइस बाहर आ जाती है।
  • कॉपर टी को निकलवाते समय महिला को थोड़ा खून का प्रवाह, दर्द आदि होना आम बात होती है।
  • ऐसे में आप अपनी मर्ज़ी से जब भी चाहे तब कॉपर टी को निकलवा सकते हैं।

Copper T को कब निकलवाना चाहिए

  • महिला ने जितने समय के लिए कॉपर टी लगवाई थी यदि वो समय पूरा हो गया है तो महिला को कॉपर टी निकलवा देनी चाहिए, फिर यदि आप चाहे तो दुबारा भी लगवा सकती हैं।
  • यदि महिला को कॉपर टी लगवाने के बाद दर्द, एलर्जी, चोट, घाव जैसी परेशानी अधिक होती है तो महिला को जल्द से जल्द कॉपर टी निकलवानी चाहिए।
  • यदि महिला गर्भधारण करने की सोच रही है तो इस केस में भी महिला को कॉपर टी निकलवा देनी चाहिए।

तो यह हैं कॉपर टी निकलवाने का तरीका व् कॉपर टी कब निकलवाने की जरुरत पड़ती है। उससे जुड़े कुछ टिप्स, यदि आपको भी कॉपर टी लगवाने के बाद कुछ ऐसा महसूस हो रहा है तो आपको भी जल्दी से जल्दी डॉक्टर से बात करके इसे निकलवा देना चाहिए। साथ ही किसी अच्छे डॉक्टर की मदद से इसे निकलवाएं।

गर्भवती हैं तो इन दस बातों का खास ध्यान रखें

गर्भवस्था किसी भी महिला के लिए एक ऐसी स्थिति होती है जहां उसे अपने साथ गर्भ में पल रही नन्ही जान का भी ख्याल अच्छे से रखना पड़ता है। ताकि प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली किसी भी परेशानी से बचाव के साथ गर्भ में शिशु का विकास भी बेहतर तरीके से हो सके। और इसके लिए महिला को अपने खान पान, उठने बैठने, चलने फिरने, सोचने, और अपने व्यव्हार तक का अच्छे से ध्यान रखना पड़ता है। क्योंकि महिला जो भी करती है, जो भी खाती है, जैसा सोचती है उसका सीधा असर उसके गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ता है। ऐसे में महिला को प्रेगनेंसी के दौरान बिल्कुल भी लापरवाही न बरतने की सलाह दी जाती है। तो लीजिये आज हम आपको कुछ ऐसी बातों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनका गर्भवती महिला को खास ध्यान रखना चाहिए।

सम्पूर्ण आहार

प्रेगनेंसी के दौरान पोषक तत्वों से भरपूर आहार को यदि आवश्यकता अनुसार लिए जाए तो यह गर्भवती महिला की प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियों को कम करने से साथ, गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को स्वस्थ रखने में मदद करता है। ऐसे में महिला को प्रेगनेंसी के दौरान सम्पूर्ण आहार लेना चाहिए, जिसमे फल, हरी सब्जियां, ड्राई फ्रूट्स, जूस, दालें, अन्य पोषक तत्वों से भरपूर आहार को शामिल करना चाहिए। और दिन में बड़े बड़े मील लेने की बजाय छोटे छोटे अंतराल पर कुछ न कुछ खाते रहना चाहिए, इससे बॉडी में एनर्जी को बने रहने में मदद मिलती है।

वैक्सीनेशन नहीं भूलें

गर्भवती महिला को समय पर डॉक्टर से जांच करवाते रहना चाहिए, वैक्सीनेशन समय से करवानी चाहिए। वैसे तो लेट होना नहीं चाहिए लेकिन यदि किसी कारण वैक्सीनेशन में थोड़ा देरी हो गई है तो उसके बाद तुरंत लगवा लें। साथ ही अल्ट्रासॉउन्ड भी समय से करवाएं, और डॉक्टर द्वारा दी गई कैल्शियम, आयरन, आदि की दवाइयों का समय से सेवन करें।

साफ़ सफाई का रखें ध्यान

प्रेगनेंसी के दौरान यदि आप किसी भी चीज का इस्तेमाल करते है तो अच्छे से साफ़ की गई चीजों का इस्तेमाल ही करना चाहिए। खाने में इस्तेमाल की जाने वाली सब्जियों व् फलों को अच्छे से धोने के बाद ही प्रयोग में लाना चाहिए। और गली हुई, बायसी सब्जियों आदि के सेवन से बचना चाहिए, ऐसा करने से प्रेगनेंसी के दौरान होने वाले इन्फेक्शन की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

नॉन वेज खाते हुए ध्यान रखें

यदि गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान नॉन वेज का सेवन करती है तो अधपके, बासी, ज्यादा तले भुने, बेकार दूकान से लाए नॉन वेज का सेवन नहीं करना चाहिए। कच्चे अंडे भी प्रेग्नेंट महिला की सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं, और यदि आप मछली का सेवन करती है तो ध्यान रखें की मर्क्युरी युक्त मछली का सेवन न करें, क्योंकि इसके सेवन से शिशु के विकास में समस्या उत्त्पन्न हो सकती है।

जंक फ़ूड न खाएं

बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण प्रेगनेंसी के दौरान मुँह के स्वाद में बदलाव आना भी आम बात होती है। ऐसे में हो सकता है महिला का चटपटा खाने का मन करें, लेकिन महिला को जंक फ़ूड का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि इससे बॉडी में बैड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ सकती है, जिसके कारण गर्भवती महिला को सेहत सम्बन्धी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। खासकर चाइनीज़ का सेवन तो बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए क्योंकि इसमें मर्करी की मात्रा अधिक होती है जिससे शिशु के विकास में कमी आ सकती है।

प्रोटीन और कैल्शियम ले भरपूर

गर्भवती महिला को प्रोटीन व कैल्शियम युक्त आहार का सेवन भी भरपूर मात्रा में करना चाहिए। क्योंकि इससे गर्भवती महिला की हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूती मिलती है। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान महिला को फिट रहने में मदद मिलती है, साथ ही प्रोटीन और कैल्शियम की मात्रा भरपूर होने के कारण गर्भ में शिशु की हड्डियों को मजबूती मिलती है जिससे शिशु के बेहतर शारीरिक विकास में मदद मिलती है।

आयरन और फोलिक एसिड ले भरपूर

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला के शरीर में होने वाली आयरन की कमी के कारण गर्भवती महिला को परेशानी होने के साथ गर्भ में शिशु के विकास में भी कमी आ सकती है। ऐसे में गर्भवती महिला को भरपूर मात्रा में आयरन युक्त आहार का सेवन करना चाहिए जिससे बॉडी में आयरन की कमी को पूरा करने में मदद मिल सके। साथ ही गर्भवती महिला को फोलिक एसिड भी भरपूर मात्रा में लेनी चाहिए जिससे शिशु को जन्म के होने होने वाले खतरों से बचाने में मदद मिल सके।

प्रदूषण से बचाव

गर्भावस्था के दौरान महिला को किसी भी ऐसी जगह पर जाने से बचना चाहिए जहां प्रदूषण की मात्रा अधिक हो, भीड़भाड़ हो, ज्यादा शोर हो, क्योंकि ऐसी जगह पर जाने के कारण इन्फेक्शन होने का खतरा रहता है। जिसके कारण इन्फेक्शन का वायरस शिशु तक पहुंचने की भी सम्भावना रहती है। और इसके दुष्प्रभाव के कारण शिशु शारीरिक के साथ मानसिक रूप से भी प्रभावित हो सकता है।

सारा दिन आराम न करें

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को भरपूर आराम की सलाह दी जाती है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है की महिला सारा दिन आराम ही करती रहे। क्योंकि सारा दिन एक ही जगह बैठे रहने से महिला का वजन बढ़ने व अन्य शारीरिक समस्याएँ बढ़ सकती है। ऐसे में महिला को हल्का व्यायाम, वॉक, योगासन आदि करते रहना चाहिए, ऐसा करने से शारीरिक रूप से फिट रहने के साथ गर्भवती महिला को मानसिक रूप से भी फ्रैश रहने में मदद मिलती है, जिससे तनाव जैसी समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

पेट के बल कोई काम ना करें

गर्भवती महिला का प्रेगनेंसी के चौथे महीने के बाद पेट बढ़ने लगता है, ऐसे में महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की गर्भवती महिला पेट के बल कोई भी काम न करें। जैसे की उल्टा होकर न सोएं, झुककर काम न करें, पैरों के भार बैठकर कोई काम न करें, पेट पर दबाव न पड़ने दें, आदि। क्योंकि पेट पर दबाव पड़ने के कारण पेट में दर्द जैसी परेशानी होने के साथ गर्भ में शिशु को भी परेशानी का अनुभव हो सकता है। ऐसे में जरुरी है की गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान ऐसी कोई भी लापरवाही न करें।

तो यह हैं कुछ बातें जिनका ख्याल गर्भवती महिला को रखना चाहिए क्योंकि इन टिप्स का ध्यान रखने से गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी में आ रही परेशानियों से बचाव करने में मदद मिलती है, साथ ही गर्भ में शिशु के विकास से सम्बंधित समस्या का सामना भी महिला को नहीं करना पड़ता है, जिससे माँ और शिशु दोनों ही प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रहते हैं।

Hindi Video : Pregnant women must follow 10 advice

10 Tips for Pregnant Women

प्रेगनेंसी में इन कास्मेटिक का इस्तेमाल नहीं करें?

प्रेगनेंसी में महिलाओ को बहुत सी ऐसी चीजो से परहेज करना पड़ता है, या आप कह सकते है की उन्हें कुर्बानी देनी पड़ती है, क्योंकि यदि आप इनका इस्तेमाल करती है, तो इसके कारण आपकी बॉडी का हार्मोनल स्तर प्रभावित होता है, जिसके कारण शिशु और उसके विकास पर बुरा असर पड़ सकता है, जैसे की आपका मन कई बार कुछ चटपटा या तीखा खाने का करता है, तो आप जंक फ़ूड का सेवन नहीं कर सकते है क्योंकि कई बार इसका असर आपके गर्भ में पल रहे शिशु पर बुरा असर पड़ता है, और घर में महिलाओ को वो स्वाद नहीं आ पाता है, तो आपको इससे परहेज करना पड़ता है।

इन्हें भी पढ़ें:- प्रेगनेंसी चेक करने के ये घरेलु तरीके! यहाँ तक की टूथपेस्ट से भी आप चेक कर सकती है

make up

आप ये तो जानते ही है, की महिलायें अपनी ख़ूबसूरती का कितना ध्यान रखती है, परन्तु उन्हें प्रेगनेंसी में इन चीजो के प्रयोग से भी परहेज करना पड़ता है, क्योंकि इनमे केमिकल अधिक मात्रा में होता है, जो की आपके हॉर्मोन को प्रभावित कर सकता है, और गर्भ में पल रहे शिशु की सेहत पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है, जैसे की इसमें एंडोक्राइन डिस्रप्टर्स जैसे केमिकल्स होते है, जो की हार्मोनल स्तर को खराब करते है, बीपीए, एट्रेज़ाइन, फ्थालेट्स, डाइऑक्सिन और पेरिक्‍लोरेट आदि कुछ एंडोक्राइन डिस्रप्टर्स है जो आपके लिए प्रेगनेंसी में नुकसानदायक हो सकते है, इसीलिए आपको इनके इस्तेमाल से परहेज करना चाहिए, और यदि आप इनका इस्तेमाल करना चाहते है तो ध्यान रखें की आप ऐसे प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल न करें जिनमे एंडोक्राइन डिस्रप्टर्स की मात्रा अधिक हो, और आप चाहे तो इस बारे में अपने डॉक्टर से भी राय ले सकते है, तो आइये अब जानते है की आपको प्रेगनेंसी में कौन कौन से कॉस्मेटिक का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

परफ्यूम का इस्तेमाल नहीं करें:-

परफ्यूम्स में फ्थालेट्स नामक एंडोक्राइन डिस्रप्टर होता है, जो की महिलाओ के एंडोक्राइन सिस्टम को प्रभावित करता है, और जिसके कारण महिला को डिलीवरी में परेशानी, ट्यूमर या फिर गर्भ में पल रहे शिशु का ठीक तरह से विकास नहीं हो पाता है।

लोशन या क्रीम का इस्तेमाल नहीं करें:-

प्रेगनेंसी के दौरान आपको डॉक्टर की सलाह के बिना किसी तरह की क्रीम या लोशन का इस्तेमाल भी नहीं करना चाहिए, क्योंकि इनका इस्तेमाल भी आपके गर्भ मे पल रहे शिशु पर बुरा असर डालता है, जिसके कारण आपको समस्या हो सकती है।

हेयर डाई का इस्तेमाल न करें:-

हेयर डाई में अमोनिया की मात्रा अधिक होती है, इसीलिए आपको प्रेगनेंसी के समय में हेयर डाई का इस्तेमाल भी नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसके कारण फेफड़ो, और त्वचा को नुकसान पहुचता है, और यदि आप डाई का इस्तेमाल करना चाहती है तो आप ऐसी डाई का इस्तेमाल करें जो की अमोनिया से रहित हो।

नेल पेंट का इस्तेमाल भी नहीं करना चाहिए:-

प्रेगनेंसी के दौरान नेल पेंट का प्रयोग आपके लिए और भी हानिकारक हो सकता है, क्योंकि इसमें मिथाइलबेंजीन और टॉल्यून जैसे हानिकारक तत्व मौजूद होते है, जो की आपके शरीर में कैंसर के कारक की मात्रा को बढाते है, और जिसके कारण आपको नुकसान होने के साथ शिशु पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ता है।

इन्हें भी पढ़ें:- प्रेगनेंसी में पहले तीन महीने तक ये सावधानी बरतें

हेयर रिमूवल क्रीम  का इस्तेमाल भी न करें:-

हेयर रिमूवल क्रीम में भी जहरीले तत्व होते है, और साथ ही शिशु पर भी इनमें थाइओग्लाइकोलिक एसिड मौजूद होता है, इसीलिए जितना हो सकें आपको इनके इस्तेमाल से प्रेगनेंसी में परहेज करना चाहिए।

लिपस्टिक और आई शेडो का इस्तेमाल न करें:-

लिपस्टिक और आई शेडो में भी सीसा की मात्रा बहुत अधिक होती है, जो की जहरीले तत्व का काम आपके शरीर में करता है, और गर्भवती महिलाओ में और स्तन पान कराने वाली महिलाओ में यह तत्व प्लेसेंटा और दूध ग्रंथियों से गुजरता है, जिसके कारण शिशु के विकास पर इसका बहुत बुरा असर पड़ता है, इसीलिए जितना हो सकें महिलाओ को इसके इस्तेमाल से परहेज करना चाहिए।

अपने डॉक्टर से राय लें:-

आप चाहे तो इस बारे में अपने डॉक्टर से भी राय ले सकती है, और उनसे विस्तार से पूछ भी सकती है की ऐसे कौन से कास्मेटिक है जिनका इस्तेमाल उन्हें नहीं करना चाहिए, जिनसे उन्हें शिशु पर बुरा असर पड़े, और कौन से ऐसे प्रोडक्ट है जिनका इस्तेमाल वो कर सकती है, और उसका बुरा असर भी उनके शिशु पर नहीं पड़ेगा।

तो ये कुछ कास्मेटिक है जिनका इस्तेमाल आपको प्रेगनेंसी में नहीं करना चाहिए, इसके अलावा आपको अपने खान पान या स्वास्थ्य का भी अच्छे से ध्यान रखना चाहिए, और ऐसा कोई भी काम या लापवाही नहीं करनी चाहिए जिसका बुरा असर आपकी सेहत या फिर आपके गर्भ में पल रहे शिशु पर इसका बुरा असर पढ़ें।

इन्हें भी पढ़ें:- प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने तक भूल कर भी क्या-क्या नहीं करना चाहिए