गर्भवती महिला को अपने आहार में हर उस खाद्य पदार्थ को शामिल करना चाहिए। जो पोषक तत्वों से भरपूर हो और जिसे खाने से माँ व् बच्चे दोनों को फायदा मिलें। ऐसे में गर्भवती महिला को अपनी डाइट में दाल, सब्ज़ी, फल, चावल, रोटी, आदि सभी को शामिल करना चाहिए। लेकिन कुछ गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान चावल का सेवन ज्यादा फायदेमंद होता है या रोटी का इस बारे में जानना चाहती है। क्योंकि हो सकता है की प्रेग्नेंट महिला की रोटी से ज्यादा चावल खाने की इच्छा होती है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में रोटी खानी चाहिए या चावल, किसे खाने से ज्यादा फायदे मिलते हैं।
प्रेगनेंसी में रोटी खाने के फायदे
रोटी खाने से गर्भवती महिला को एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिलती है।
बॉडी में खून की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है।
फाइबर होने का कारण रोटी खाने से पाचन क्रिया दुरुस्त रहती है।
कैल्शियम व् प्रोटीन से भरपूर होने के कारण रोटी का सेवन से हड्डियों व् मांसपेशियों को दुरुस्त रहने में मदद मिलती है।
रोटी में पोटैशियम मौजूद होता है जो गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला के ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद करता है।
गर्भवती महिला रोजाना यदि अपनी डाइट में रोटी का सेवन करती है तो इससे महिला को ब्रेस्ट कैंसर की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।
गर्भावस्था में चावल खाने के फायदे
कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होने के कारण चावल का सेवन करने से गर्भवती महिला को एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिलती है।
कैल्शियम से भरपूर चावल खाने से गर्भवती महिला व् गर्भ में शिशु की हड्डियों को मजबूती मिलती है।
आयरन की मात्रा भी चावल में मौजूद होती है जो की गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी को दूर करने में मदद करती है।
फाइबर की मौजूदगी होने के कारण चावल का सेवन करने से गर्भवती महिला के पाचन तंत्र को दुरुस्त रहने में मदद मिलती है।
ऐसे में चावल और रोटी दोनों ही पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, इसीलिए गर्भवती महिला दोनों ही चीजों का सेवन अपने आहार में कर सकती है। लेकिन गर्भवती महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की जो भी चीज महिला खाये उसे जरुरत से ज्यादा न खाए। क्योंकि जरुरत से ज्यादा किसी भी चीज का सेवन गर्भवती महिला के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है।
वर्ष भर न जाने कितने ही मौसम आते जाते रहते है और इसी बीच हम भी तरह-तरह की परेशानियो से परेशान रहते है। जहां एक तरफ सर्दियों में खांसी जुखाम की समस्या पीछा नहीं छोड़ती वहीं दूसरी ओर बरसात में होने वाली खाज खुजली को कौन भूलता है। लेकिन इसके अलावा भी एक मौसम है जो हमारे स्वास्थ्य के साथ-साथ हमारी त्वचा को भी काफी प्रभावित करता है। और वो मौसम है गर्मियां। गर्मियां आते ही सभी के दिमाग में यही चलता रहता है की बाहर चलने वाली लू और उसके थपेड़ों से खुद को कैसे बचाया जाए?
गर्मियों में होने वाली स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से तो सभी को झेलनी पड़ती है लेकिन इस दौरान होने वाली त्वचा संबंधी बीमारियाँ दर्दनाक तो होती ही है साथ-साथ आप इन्हें दूसरों को बताने से भी शर्माते है। जी हां, हम बात कर रहे है गर्मियों में होने वाले फोड़े-फुंसी या रैशेज की। गर्मी के मौसम में शरीर से निकलने वाला पसीना इस समस्या के कारणों में से एक है। क्योंकि इस दौरान निकलने वाले पसीने में बहुत से बैक्टीरिया और जीवित विषाणु मौजूद होते है और यदि उन्हें अच्छे से साफ़ न किया जाए तो ये हमारे रोमछिद्रों में घुस कर फोड़े-फुंसी आदि का रूप ले लेते है।
इन फुंसियों में दर्द तो होता ही है साथ-साथ इनमे होने वाली खुजली और जलन किसी के लिए भी असहनीय हो सकती है। एक बार को इंसान इसका दर्द झेल कर इन्हें ठीक कर भी ले लेकिन इनके चले जाने के बाद रह जाने वाले दाग़ बहुत तकलीफदेह होते है।
क्या होते है फोड़े-फुंसी?
फोड़े-फुंसी एक तरह का बैक्टीरियल इन्फेक्शन होता है जो स्टैफिलोकोकस और यूस नामक बैक्टीरिया के कारण होता है। ये बैक्टीरिया मनुष्य के शरीर में प्रवेश कर छोटे लाल-दाने का रूप ले लेते है जो बाद में धीरे-धीरे बड़ा होता है। शुरू शुरू में ये दाना काफी छोटा होता है लेकिन समय के साथ-साथ ये बढ़ता हुआ लाल रंग का होने लगता है। परन्तु इसका मध्य भाग कुछ सफ़ेद रंग का होता है जिसे पस कहा जाता है। इस स्थिति के आने के बाद ये काफी तकलीफदेह होने लगता है। ऐसे में इससे छुटकारा पाना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। वैसे देखा जाए तो फोड़े-फुंसी से छुटकारा पाना कोई मुश्किल कार्य नहीं है इसे आप खुद घर बैठे भी हटा सकते है।
गर्मियों में फोड़े-फुंसी होने के क्या कारण होते है?
ऐसे तो त्वचा पर फोड़े फुंसी होने का मुख्य कारण staphylococcal नमक बैक्टीरिया होता है जो त्वचा पर आये किसी भी घाव के द्वारा त्वचा के रोमछिद्रों में प्रवेश कर जाता है। और भीतर से त्वचा को नुकसान पहुँचाने लगता है जो बाद में फोड़े फुंसी का रूप ले लेता है। इसके अलावा भी और कई कारण है जिनकी वजह से गर्मियों में फोड़े फुंसी होते है। वे कारण निम्नलिखित है :
बालों की जड़ों में एक सूक्ष्म कीटाणु के संक्रमण के कारण।
खून में खराबी होने से।
गर्मियों में आम का अधिक सेवन करने से भी फोड़े फुंसी उत्पन्न होते है।
इस मौसम में कच्ची आमिया मिलती है तो उनके सेवन से भी ये समस्या हो सकती है।
मच्छर के काटने।
अधिक मिर्च मसाले का सेवन करने से।
आस पास के प्रदूषित वातावरण के कारण
इसके अतिरिक्त विभिन्न बीमारियों की दवाओं के दुष्प्रभावो के कारण भी ये आपकी त्वचा पर आ सकते है।
बालतोड़ भी हो सकती है एक वजह।
फोड़े-फुंसी के घरेलू उपचार :-
1. आलू :
कच्चे आलू का रस निकालकर उसे फुंसियों पर लगाएं। इसके साथ ही सुबह खाली पेट बिना कुछ खाए चार चम्मच रस का सेवन भी करें। इस उपाय से आराम मिलेगा।
2. गाजर और तेल :
इस उपाय के लिए गाजर को पीस कर उसे तवे पर जरा से तेल के साथ डालकर गर्म कर लें। अब इस सामग्री को फोड़े-फुंसी पर किसी कपडे से बांध दें।
3. इमली और पानी :
गर्मी में होने वले फोड़े आदि की समस्या में इमली के रस का सेवन करने से फायदा मिलता है। इसके लिए 25-30 ग्राम इमली के गुदे को पानी में भिगो दें। जब गुदा पूरी तरह फूल जाए तो उसे पानी में मथकर छान लें और इस रस का सेवन करें।
4. कालीमिर्च और पानी :
अगर आपकी त्वचा पर फुंसी निकल गई है तो कालीमिर्च को पानी में घिस लें। और इस मिश्रण को फुंसी पर लगायें। फुंसी अपने आप बैठ जाएगी।
5. अनानास :
इसके लिए अनानास का रस लेकर उसे फोड़े या फुंसी पर लगाना है। कुछ ही प्रयोग करने पर आपकी समस्या हल हो जाएगी।
6. हल्दी और तेल :
इस उपाय के लिए हल्दी को पीसकर थोड़े से तेल के साथ तवे पर गर्म कर लें। अब इसे रुई पर रखकर फोड़े पर बांध दें। समस्या ठीक होने तक इसका प्रयोग करते रहे।
7. अमरुद :
अमरुद की तीन से चार पत्तियों को पाने में उबालकर पीस लें। अब इस लेप को फोड़े पर लगायें। लगातार प्रयोग से कुछ ही दिनों में फोड़ा अपने आप फुट जाएगा।
8. नीम :
नीम की छाल या उसकी पत्तियों का लेप फोड़े-फुंसी पर लगाने से काफी आराम मिलता है। आप चाहे तो इसके लिए नीम की निबोली का भी इस्तेमाल कर सकते है।
9. खरबूजा :
खरबूजे के बीजों को छिलके सहित पीसकर फोड़े पर लगायें। दिन में तीन से चार बार प्रयोग से समस्या दूर हो जाएगी।
10. करेला :
करेले के रस का प्रयोग करके भी आप इस समस्या से निजात पा सकते है। इसके लिए करेले को पीसकर उसका रस निकाल लें और उसे फोड़े पर लगायें।
11. सरसों और तारपीन :
फोड़े फुंसी की समस्या में सरसों का तेल भी काफी लाभकारी होता है। इसके लिए सरसों के तेल में थोडा सा तारपीन का तेल मिला लें और इसका प्रयोग फोड़े-फुंसी पर करें। आराम मिलेगा।
12. मुल्तानी मिट्टी :
मुल्तानी मिट्टी की ठंडी तासीर फोड़े को ठंडक देकर उसे ठीक करने में मदद करेगी। इसके लिए मुल्तानी मिट्टी को पानी में भिगो लें और फुंसियों पर लगायें। दो तीन दिन तक लगातार प्रयोग करने से आपका फोड़ा बैठ जाएगा।
13. पानी और मेहंदी :
दो कप पानी में थोड़ी सी मेहंदी डालकर उबाल लें। अब इस पानी को छानकर रुई के फोहे से फुंसी को धोएं। दो से तीन दिन के प्रयोग से फुंसी में आराम आ जाएगा।
14. चंदन, मुल्तानी मिट्टी और नींबू :
गर्मी ने निकली फुंसी को ठीक करने के लिए एक चम्मच पिसे हुए चंदन, एक चम्मच पीसी हुई मुल्तानी मिट्टी, एक चम्मच चोकर और 4-5 बूंद नींबू के रस की डालकर अच्छे से मिलाकर लेप बना लें। इस लेप का इस्तेमाल फुंसियों पर करें।
15. केला और गौमूत्र :
यदि फोड़ा पक गया है तो फुट नहीं रहा है तो केले की जड़ की एक गांठ धोकर पीस लें। और उसमे थोडा सा गौमूत्र मिलाकर फोड़े पर लगायें। उसपर पट्टी जरुर बांध लें। फायदा मिलेगा।
फोड़े-फुंसी ठीक करने के अन्य उपाय :
मसूर की दाल पीसकर उसकी पुल्टिस बना लें और उसका इस्तेमाल फोड़े पर करें, आराम मिलेगा।
कद्दू की बेल के पत्तों को पीसकर उसका रस निकालकर लगाने से फोड़े फुंसी जल्दी सुख जाते है।
शरीफे के गुदा भी फोड़े-फुंसी के लिए अच्छा होता है।
बकायन की पत्तियों को पीसकर उन्हें फोड़े पर लगाने से आराम मिलता है।
फुंसी पर नारियल तेल और कपूर मिलाकर लगाने से लाभ मिलता है।
तुलसी के पत्तों को पीसकर फुंसियों पर लगाने से वे बैठ जाती है।
नींबू और अजवायन के लेप की मदद से भी आप इस समस्या से निजात पा सकते है।
एलोवेरा के गुदे को गर्म करके उसमे थोड़ी सी पीसी हुई हल्दी मिलाकर लगाने से फुंसी में आराम मिलता है।
फोड़े-फुंसी होने पर इन बातों का भी रखें ध्यान :-
त्वचा पर फोड़े-फुंसी हो जाने पर यदि उनका समय पर इलाज और सही देखभाल न की जाए तो वे गंभीर रूप ले सकते है। इसीलिए उपचार के साथ-साथ कुछ बातों का ध्यान रखना भी बेहद जरुरी है। वे बातें निम्नलिखित है –
1. शरीर की सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
2. रोज साफ़ पानी से ही नहाना चाहिए। गर्मियों के दिनों में जरुरी हो तो दिन में 3 से 4 बार भी नहा सकते है।
3. नहाने के लिए नीम की पतियाँ उबालकर उसके पानी का प्रयोग करना चाहिए।
4. आप चाहे तो अपने नहाने के पानी में एंटी सेप्टिक या डेटॉल का भी इस्तेमाल करा सकते है।
5. पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करना चाहिए।
6. नित्य व्यायाम करें। सम्भव हो तो सुबह ताज़ी हवा में सैर करें।
7. भोजन में ताजे फल और सलाद आदि को जरुर सम्मिलित करें।
8. तले भुने आदि भोजन से दूर रहे। अन्यथा ये तक्लीफ को बढ़ा भी सकते है।
प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओ को नौ महीने तक ब्लीडिंग नहीं होती है, कई महिलाओ को प्रेगनेंसी के दौरान स्पॉटिंग की समस्या हो जाती है, परन्तु आप इसे पीरियड्स नहीं कह सकते हैं, ऐसे में डिलीवरी के बाद महिलाओ को ब्लीडिंग होती है, और इस समय ब्लड फ्लो भी तेजी से होता है, साथ ही यह हर महिला की शारीरिक गतिविधियों पर निर्भर करता है की उन्हें ब्लीडिंग कब तक होती है, सामान्य यह ब्लीडिंग दो से तीन हफ्तों तक होती है, परन्तु कई महिलाओ को यह चार हफ्ते तक भी होती है, सीए में महिलाओ को अधिक श्रम नहीं करना चाहिए, नहीं तो समस्या बढ़ सकती है, तो आइये जानते है डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग से जुड़े कुछ सवाल और उनके जवाब क्या है।
महिलाओ को डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग कम से कम दो और ज्यादा से ज्यादा चार से पांच हफ्तों तक हो सकती है, शुरुआत के दस दिन तक महिलाओ को खून के थक्के जैसे ब्लीडिंग में दिखाई दे सकते हैं, लेकिन धीरे धीरे यह कम हो जाती है, इसके अधिक दिन तक होने का कारन होता है, महिलाओ का अधिक शरीरिकश्रम करना, ऐसे में आपको शरीर में दर्द की समस्या भी हो जाती है, नार्मल डिलीवरी के बाद कम से कम महिलाओ को पंद्रह दिन तक बिलकुल भी अपने शरीर पर जोर नहीं डालना चाहिए, इस दौरान अपने प्राइवेट पार्ट की साफ़ सफाई का ध्यान जरूर रखें।
डिलीवरी के बाद दुबारा पीरियड्स का चक्र कब शुरू होता है:-
डिलीवरी के बाद जब ब्लीडिंग बंद होती है, तो उसके बाद माहवारी का चक्र एक दम से शुरू नहीं होता है, बल्कि कुछ महीने बाद आपको पीरियड्स आते है, और यह इस बात पर निर्भर करता है की महिला स्तनपान करवा रही है या नहीं, और यदि करवा रही है तो कितनी मात्रा में, यदि महिला शिशु को अपना ही दूध देती है और वो भी भरपूर मात्रा में तो इसका फायदा यह होता है की आपकी माहवारी शुरू होने में एक साल तक का समय भी लग सकते है, परन्तु यदि आप अपने शिशु को स्तनपान करवाना बंद कर देती हैं तो आपको माहवारी जल्दी शुरू हो जाती है, इसका मतलब यह आपके स्तनपान करवाने पर निर्भर करता है, की आपको मासिक चक्र कब शुरू होगा।
क्या आप इस समय में गर्भवती हो सकती है:-
डिलीवरी के बाद जैसे ही पीरियड्स ख़त्म होते हैं तो उसके बाद महिला गर्भवती हो सकती है या नहीं यह सवाल भी महिलाएं करती है, तो इसका जवाब होता है हां, इसीलिए महिलाओ को माहवारी के आने से पहले भी अपनी सुरक्षा का ख़ास ध्यान रखना चाहिए, कई बार महिलाओ के साथ ऐसा हो जाता है, और उन्हें दो से तीन महीने बाद शारीरिक लक्षणों को देखकर इस बात का पता चलता है की वो गर्भवती हैं।
डॉक्टर से कब मिलें:-
यदि आपको ब्लीडिंग के दौरान अपने प्राइवेट पार्ट से बहुत अधिक बदबू आ रही है, तो इसका कारण इन्फेक्शन हो सकता है, ऐसे में इसे अनदेखा न करते हुए जितना जल्दी हो अपने डॉक्टर से मिलें, साथ ही अपने सेनेटरी पैड को समय समय पर बदलते रहे, लम्बे समय तक एक ही पैड को न लगाएं रखें, और किसी क्रीम आदि का इस्तेमाल भी न करें।
तो ये हैं कुछ बातें जो डिलीवरी के बाद महिलाओ के मन में आती हैं इसके बारे में एक बार चाहे तो अपने डॉक्टर से भी राय ले सकती है।
शरीर को स्वस्थ रखने के लिए हर एक चीज का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए, चाहे फिर वो आपके खाने से सम्बंधित हो या पीने से, जैसे हर व्यक्ति को दिन में कम से कम आठ से दस गिलास पानी का सेवन करना चाहिए चाहे गर्मियां हो या फिर सर्दियां हो, इसके कारण आपकी बॉडी के तापमान और त्वचा की नमी को बरकरार रहने में मदद मिलती है, जिसके कारण आपको बीमारियों से बचाव और अपनी ख़ूबसूरती को कायम रखने में मदद मिलती है।
पानी दिखने में पारदर्शी होता है परन्तु इसमें भी बहुत से ऐसे मिनरल्स होते है जो आपकी बॉडी को फिट रखने में मदद करते है पानी का सेवन करने से आपके शरीर में होने वाले हंकारक तत्वों को यूरिन और पसीने के जरिये बाहर निकलने में मदद मिलती है, जिसके कारण आपकी प्रतिरोधक क्षमता बढती है, और आपको फिट रहने में मदद मिलती है, साथ ही गर्मियों में तो पानी को हमेशा पने पास रखना चाहिए क्योंकि गर्मियों में आपकी बॉडी को सर्दियों की पेशा ज्यादा नमी को जरुरत होती है, इसके अलावा आप अन्य पेय पदार्थो का भी सेवन कर सकते है जैसे निम्बू पाबी, फलों का रस आदि, परन्तु पानी को भी भरपूर पीये और आइये आज हम आपको सुबह सुबह उठकर पानी पीने के फायदे बताने जा रहे है, यदि आप भी इन फायदों को उठाना चाहते है तो पानी का सेवन जरुर करें, और वो भी कम से कम आठ से दस गिलास का।
विषैले तत्वों को बाहर निकालता है:-
पानी का सेवन यदि आप सुबह खाली पेट करते है, तो इसके कारण आपके पेट को अच्छे से साफ़ होने में मदद मिलती है, और साथ ही पानी की मदद से आपके शरीर से सभी टॉक्सिन्स यूरिन और पसीने की मदद से बाहर निकलते है जिसके जिसके कारण आपको बिमारियों से बचने में मदद मिलती है।
तनाव से राहत मिलती है:-
यदि आप सुबह उठकर खाली पेट पानी का सेवन करते है, तो इसके कारण आपको शारीरिक रूप से ही नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी फिट रहने में मदद मिलती है, क्योंकि जब आप सोकर उठते है तो आपका दिमाग शांत होता है, और ऐसे समय में पानी पीने से दिमाग को ऑक्सीजन मिलती है, जिसके कारण आप मानसिक रूप से तरोताजा महसूस करते है, इसके अलावा आपको पूरा दिन यदि भरपूर पानी का सेवन करते है तो आपको तनाव से राहत मिलने में मदद मिलती है।
पेट सम्बन्धी समस्या से राहत मिलती है:-
कई लोगो को हमेशा कब्ज़ की समस्या बनी रहती है, जिसके कारण उनका पेट अच्छे से साफ़ नहीं हो पाटा है, और कई बार दर्द भी होने लगता है, सुबह उठकर यदि आप एक से दो गिलास पानी का सेवन कर लेते है, तो ऐसा करने से आंतो में जमे मल को निकलने में आसानी होती है, जिसकी वजह से आपका पेट अच्छे से साफ़ होता है, तो पेट सम्बन्धी समस्या से राहत के लिए आपको सुनाह उठकर पानो का सेवन जरुर करना चाहिए।
यूरिन सम्बन्धी समस्या का समाधान करता है:-
रात भर शरीर में जमा होने वाले बेक्टेरिया को सुबह एक बार पानी पीने के बाद यूरिन करने से आपके शरीर के सभी विषैले तत्व बाहर आते है, और यदि आपको यूरिन करते समय जलन या इन्फेक्शन की समस्या है तो इससे निजात पाने के लिए आप दिन भर में भरपूर पानी का सेवन करना चाहिए इसके कारण इस समस्या का समाधान भी हो जाएगा, और साथ ही आपको ये समस्या कभी होगी भी नहीं।
आपका वजन कम करने में मदद करता है:-
सुबह उठकर यदि अप एक गिलास ठन्डे पानी का सेवन करते है,तो इसके कारण आपकी बॉडी में मेटाबोलिज्म चौबिस प्रतिशत तक बढ़ जाता है,जिसके कारण आपका वजन कम होने में मदद मिलती है, वाही यदि आप सुबह उठकर एक गिलास गरम पानी का सेवन करते है, तो इसके कारण आपके शरीर पर होने वाली अतिरिक्त चर्बी को कम होने में मदद मिलती है।
शरीर का तापमान सही रहता है:-
शारीर का तापमान यदि सही रहता है तो इसके कारण आपकी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ावा मिलता है, जिसके कारण आपको छोटी छोटी बीमारियों से बचाव करने में मदद मिलती है, और यदि आप सुबह उठकर खाली पेट पानी का सेवन करते है, तो इसके कारण आपके शरीर के तापमान को सही रहने में मदद मिलती है।
त्वचा को स्वस्थ व् उनकी नमी को बरकरार रहने में मदद मिलती है:-
यदि आप पानी का सेवन करते है तो ऐसा करने से आपकी कोशिकाओ को ऑक्सीजन मिलती है, जिसके कारण उन्हें सक्रिय होने में मदद मिलती है, और आपकी त्वचा में जान आती है, जिसके कारण उन्हें खिला खिला रहने में मदद मिलती है, साथ ही जब आपके चेहरे से पसीना निकलता है, तो उसे अच्छे से साफ़ करलेना चाहिए क्योंकि इसमें त्वचा पर जमी धुल मिट्टी को बाहर निकालने में मदद मिलती है, जिसके कारण आपकी स्किन की नमी को बरकरार रहने में मदद मिलती है, साथ ही आपकिस किन को ग्लोविंग बने रहने में मदद मिलती है।
नई कोशिकाओ का निर्माण करने में मदद मिलती है:-
रक्त में यदि हानिकारक तत्व घुल जाते है तो इसके कारण आपके शरीर में कोशिकाओ का निर्माण होने में समस्या का सामना करना पड़ता है और यदि आप पानी का सेवन भरपूर मात्रा में करते है तो पानी रक्त में हानिकारक तत्वों को घुलने नहीं देता है जिसके कारण आपके शरीर में नई कोशिकाओ और उत्तक का निर्माण होने में मदद मिलती है।
प्रतिरोधक क्षमता बढती है:-
सभी अंगो को स्वस्थ बनाएं रखने और शरीर को फिट रखने में मापनी के सेवन से बहुत फायदा होता है, इसका सेवन भरपूर मात्रा में करने से आपको बीमारियों से बचने में मदद मिलती है, और आपकी प्रतिरोधक क्षमता को बढाने में मदद मिलती है।
तो ये कुछ फायदे है जो आपको पानी का सेवन करने से होते हो, इसीलिए आपको पानी का सेवन भरपूर करना चाहिए साथ ही हो सकें तो एक पानी का बोतल हमेशा अपने पास रखना चाहिए और थोड़े थोड़े समय में पानी पीना चाहिए खास कर धूप में निकलते समय इस बात को कभी नहीं भूलना चाहिए, क्योंकि उस समय ये आपके शरीर के लिए उर्जा के स्त्रोत का काम करता है।
माँ के गर्भ में पूरे नौ महीने तक लगातार बच्चे का विकास होता है। और जब बच्चे का विकास गर्भ में पूरा हो जाता है। तो बच्चा जन्म लेने के लिए अपनी सही पोजीशन में आने लगता है। बच्चा जब जन्म लेने की सही पोजीशन में आता है तो बच्चे का सिर नीचे की तरफ और पैर ऊपर की तरफ हो जाते हैं। (जरुरी नहीं है की सभी बच्चे एक ही पोजीशन में आएं)
ऐसे में बच्चे का सिर नीचे की तरफ होने से महिला को पेट के निचले हिस्से में अधिक भार महसूस होता है। और नीचे की तरफ भार अधिक बढ़ने के कारण महिला को बार बार यूरिन आने जैसी परेशानी, पेट के निचले हिस्से में दर्द जैसी परेशानी हो जाती है। ऐसे में इस दौरान महिला को घबराना नहीं चाहिए। बल्कि अपना ज्यादा ख्याल रखना चाहिए। तो आइये अब जानते हैं की जब शिशु का सिर नीचे की तरफ हो जाये तो क्या करना चाहिए।
घबराएं नहीं
बच्चे का सिर नीचे की तरफ होने पर आपको बिल्कुल भी घबराना नहीं चाहिए। क्योंकि बच्चे का सिर नीचे होने का यह मतलब नहीं है की तुरंत डिलीवरी हो जाएगी। लेकिन इस दौरान आपको अपने शरीर में होने वाले बदलाव पर ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि बच्चे का सिर नीचे की तरफ होने पर डिलीवरी कभी भी होने के चांस होते हैं।
शरीर में होने वाले बदलाव पर रखें ध्यान
यदि आपको ऐसा महसूस हो रहा की बच्चे का सिर नीचे की तरफ हो गया है। तो ध्यान रखें की पेट ज्यादा दर्द तो नहीं हो रहा है, पेट व् सीने में हल्कापन महसूस तो नहीं हो रहा है, प्राइवेट पार्ट से खून या एमनियोटिक फ्लूड तो नहीं निकल रहा है, आदि। क्योंकि यदि बच्चे का सिर नीचे होने के साथ यह बदलाव भी आपको महसूस हो रहे हैं। तो यह इस बात का संकेत होता है की अब डिलीवरी किसी भी समय हो सकती है।
किसी भी तरह की लापरवाही न करें
बच्चे का सिर नीचे की तरफ होने पर आपको ध्यान रखना चाहिए की आप किसी भी तरह की लापरवाही न करें। जैसे की पेट के बल कोई काम न करें, सम्बन्ध न बनाएं, भारी वजन न उठायें, बहुत देर तक खड़ी न रहें आदि। क्योंकि इन सभी के कारण आपको परेशानी हजो सकती है।
एक बार डॉक्टर से राय लें
यदि आपके पेट के निचले हिस्से में भार अधिक महसूस हो तो आपको एक बार डॉक्टर से भी राय लेनी चाहिए। और लगातार डॉक्टर के संपर्क में रहें। ताकि आपको सही जानकारी मिल सकें।
तो यह हैं कुछ टिप्स जिनका ध्यान आपको बच्चे के सिर नीचे की तरफ होने पर रखना चाहिए। ताकि डिलीवरी के दौरान आपको किसी भी तरह की परेशानी न हो और बच्चा भी स्वस्थ रहे।
शिशु के जन्म के बाद हर माँ शिशु के बेहतर शारीरिक विकास और शिशु के स्वस्थ रहने के लिए उसे बेहतर से बेहतर केयर देना चाहती है, और शिशु की केयर के बेहतर तरीको में से एक शिशु की मालिश करना भी है। पुराने समय से ही शिशु के जन्म के बाद नियमित रूप से शिशु को नहलाने से आधा या एक घंटा पहले मालिश की जाती है। कई लोग जैसे की जिन्हे मालिश करनी नहीं आती है वो तो मालिश करने वाली को अपने घर में बुलवाते भी हैं। साथ ही शिशु की मालिश करने से नवजात के शरीर को पोषण मिलता है, शिशु आराम महसूस करता है, आदि। ऐसे ही और बहुत से फायदे हैं जो जन्म के बाद शिशु को मालिश करने से मिलते हैं।
शिशु को मालिश करने के फायदे
जन्म के बाद शिशु को माँ का मालिश करना बहुत जरुरी होता है क्योंकि न केवल यह शिशु के विकास को बढ़ाते हैं बल्कि ऐसा करने से शिशु को और भी बहुत से फायदे मिलते हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की शिशु को मालिश करने से कौन कौन से फायदे मिलते हैं।
शिशु का शारीरिक विकास बेहतर होता है
जन्म के बाद यदि शिशु की मालिश की जाती है तो इससे शिशु के शारीरिक विकास को बेहतर तरीके से होने में मदद मिलती है। जैसे की मांसपेशियों को मजबूती मिलती है, शिशु की ग्रोथ बढ़ती है, साथ ही इससे शिशु का शरीर मजबूत बनता है।। ऐसे में शिशु के शरीर को मजबूत बनाने के लिए जन्म के बाद नहाने से पहले नियमित रूप से शिशु की मालिश करनी चाहिए।
हड्डियां मजबूत होती है
हड्डियों का विकास बेहतर होने का मतलब होता है की शिशु के अंग अच्छे से विकसित हो रहें हैं, और शिशु के अंगो का मजबूती से विकास हो रहा है। और शिशु की हड्डियों के बेहतर विकास के लिए शिशु की तेल मालिश करना बहुत जरुरी होता है।
शिशु एक्टिव बनता है
शिशु के हाथ पैरों की मालिश होने से शिशु के अंगो की मजबूती को बढ़ाने में मदद मिलती है, जिससे शिशु एक्टिव होता है। साथ ही जितनी अच्छी आप शिशु की मालिश करते हैं, उतना जल्दी शिशु बैठना, खड़े होना, चलना सीखता है।
नींद अच्छी आती है
यदि शिशु की नींद पूरी होती है और शिशु अच्छे से सोता है, तो इससे शिशु की ग्रोथ को बढ़ाने में मदद मिलती है। और मालिश करने से शिशु को आराम महसूस होता है, जिससे शिशु को बेहतर नींद लेने में मदद मिलती है।
ब्लड फ्लो बेहतर होता है
मालिश करने से शिशु के शरीर में ब्लड फ्लो को बेहतर तरीके से होने में मदद मिलती है, और यदि बॉडी में ब्लड फ्लो बेहतर तरीके से होता है तो इससे शिशु के विकास को भी बढ़ावा मिलने में मदद मिलती है।
आराम महसूस होता है
शिशु की मालिश करने से शिशु के अंग, थकी हुई मांसपेशियों, आदि को आराम पहुंचाने में मदद मिलती है, जिससे शिशु रिलैक्स महसूस करता है।
स्किन को पोषण मिलता है
शिशु की तेल मालिश करने से शिशु की स्किन को पोषण मिलता है जिससे स्किन की नमी को बरकरार रखने में मदद मिलती है। साथ ही स्किन की कोमलता को बरकरार रखने में भी मदद मिलती है।
शिशु की मालिश के लिए कौन से तेल का इस्तेमाल करें
एंटी फंगल, एंटी बैक्टीरियल गुणों से भरपूर नारियल का तेल हल्का होने के साथ स्किन को भरपूर मात्रा में पोषण युक्त रखने में भी मदद करता है। साथ ही इससे मालिश करने पर शिशु की स्किन को ठंडक का अहसास पहुंचाने में भी मदद मिलती है।
जैतून का तेल भी शिशु की मालिश करने के लिए एक बेहतरीन विकल्प है केवल भारत ही नहीं बल्कि बाहर विदेशो में भी इसका इस्तेमाल शिशु की मालिश के लिए किया जाता है।
विटामिन इ से भरपूर बादाम का तेल भी शिशु की स्किन को कोमल बनाएं रखने में मदद करता है, साथ ही बादाम के तेल से मालिश करने के बाद शिशु को अच्छी नींद लेने मद मदद मिलती है।
सरसों का तेल भी शिशु की मालिश के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन यह तासीर में गर्म होता है ऐसे में इसे किसी अन्य तेल के साथ मिलाकर शिशु की मालिश के लिए उपयोग में लाना चाहिए, और हो सकें तो गर्मियों में शिशु को सरसों की तेल मालिश करने से बचना चाहिए।
बहुत से लोग कैस्टर ऑयल का इस्तेमाल भी शिशु की मालिश के लिए करते हैं, कैस्टर ऑयल से मालिश करने पर शिशु की स्किन की कोमलता को बरकरार रहने में मदद मिलती है।
तो यह हैं शिशु की मालिश से जुड़े कुछ टिप्स और फायदे, ऐसे में जन्म के बाद हर माँ को शिशु की मालिश जरूर करनी चाहिए। ताकि जन्म के बाद शिशु के शारीरिक विकास को बेहतर तरीके से होने में मदद मिल सके। इसके अलावा शिशु की मालिश कैसे करनी चाहिए और कौन से तेल का इस्तेमाल करना चाहिए इसके लिए आप एक बार डॉक्टर से भी राय ले सकती है।
महिलाओं की फर्टिलिटी बढ़ाने के टिप्स, स्वास्थ्य व्यक्ति के लिए सबसे बड़ी पूंजी होती है। क्योंकि जब आप स्वस्थ होते हैं तभी आप शारीरिक रूप से सभी परेशानियों से बचे रहते हैं। और माँ बनना महिलाओं के लिए इस जीवन का सबसे बड़ा सुख होता है। लेकिन भागदौड़ से भरी इस जिंदगी में तनाव, गलत आदतें व् दिनचर्या, मासिक धर्म से जुडी परेशानी, आदि होने के कारण महिला को माँ बनने में भी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि यह सभी कारण महिला की प्रजनन क्षमता और स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकते हैं। लेकिन यह कोई ऐसी परेशानी नहीं है की जिसका कोई इलाज न हो। बल्कि आपके स्वस्थ रहने और अपनी आदतों को सही करने से आपको इस परेशानी से निजात मिल सकता है।
महिलाओं की फर्टिलिटी बढ़ाने के आहार
यदि आप माँ बनना चाहती है तो इसके लिए पहले बॉडी का फिट होना और आपका स्वस्थ होना सबसे ज्यादा जरुरी होता है। और इसके लिए महिला को सबसे पहले अपने खान पान को सही करना चाहिए। क्योंकि इससे आपको भरपूर मात्रा में पोषक तत्व मिलते हैं। जो आपको स्वस्थ रखने व् आपकी फर्टिलिटी को बढ़ाने में भी मदद कर सकते हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की महिलाएं फर्टिलिटी बढ़ाने के लिए क्या क्या खा सकती है।
हरी पत्तेदार सब्जियां
प्रजनन क्षमता बढ़ाने के लिए प्रेग्नेंट महिला को हरी पत्तेदार सब्जियों का भरपूर सेवन करना चाहिए।
क्योंकि इनमे आयरन, फोलेट, फोलिक एसिड, एंटी ऑक्सीडेंट्स व् अन्य पोषक तत्व भरपूर मात्रा में शामिल होते हैं।
आयरन बॉडी में खून की कमी को पूरा करने व् बॉडी में ब्लड फ्लो को सही रखने में मदद करता है।
वहीँ फोलिक एसिड व् फोलेट महिला की प्रजनन क्षमता को बढ़ाने में मदद करने के साथ महिला के गर्भ ठहरने के बाद शिशु के लिए बहुत फायदेमंद होता है।
और हरी पत्तेदार सब्जियों में महिला पालक, मेथी, बथुआ आदि का सेवन कर सकती है।
महिलाओं की फर्टिलिटी बढ़ाने के लिए खाएं सूखे मेवे
सूखे मेवों में ओमेगा 3 फैटी एसिड की मात्रा मौजूद होती है।
जो महिला की प्रजनन क्षमता को बढ़ाने के साथ प्रेगनेंसी के दौरान महिला व् शिशु के लिए भी बहुत जरुरी होता है।
इसीलिए महिला गर्भधारण में आ रही परेशानियों को दूर करने के लिए सूखे मेवों का सेवन भरपूर मात्रा में कर सकती है।
डेयरी प्रोडक्ट्स
कैल्शियम से भरपूर डेयरी प्रोडक्ट्स का सेवन करने से भी महिला की प्रजनन क्षमता को बढ़ाने में मदद मिलती है।
इसीलिए महिला को दूध, दही, पनीर, आदि का भरपूर सेवन करना चाहिए।
साथ ही कैल्शियम से महिला की हड्डियों को मजबूती मिलती है जिससे महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।
कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट
कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट जैसे की साबुत अनाज, बीन्स, सब्जियां व् फलों का सेवन महिला को फर्टिलिटी को बढ़ाने के लिए करना चाहिए।
और व्हाइट ब्रेड, व्हाइट राइस, डिब्बाबंद स्नैक्स, का सेवन कम करना चाहिए।
क्योंकि इनके कारण बॉडी में ब्लड में शुगर व् इंसुलिन में वृद्धि होती है।
और इंसुलिन का स्तर प्रजनन हार्मोन व् मासिक धर्म चक्र पर बुरा असर डाल सकता है।
जिससे महिला को माँ बनने में समस्यें आ सकती है।
महिलाओं की फर्टिलिटी बढ़ाने के लिए खाएं वसायुक्त मछली
महिलाएं प्रजनन क्षमता को बढ़ाने के लिए वसायुक्त मछली जैसे सैल्मन, सार्डिन, हेरिंग आदि का सेवन कर सकती है।
क्योंकि इनमे ओमेगा 3 फैटी एसिड मौजूद होता है जो महिला की प्रजनन क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है ।
लेकिन यदि आप नॉन वेज नहीं खाती है तो ओमेगा 3 फैटी एसिड के लिए अलसी, अखरोट, कद्दू के बीज ,अंडे आदि का सेवन कर सकती है।
केला
प्रजनन क्षमता में कमी का एक कारण मासिक धर्म का अनियमित होना हो सकता है।
ऐसे में मासिक धर्म को नियमित करने के लिए महिला को विटामिन बी 6 युक्त आहार का सेवन करना चाहिए।
और केले में विटामिन बी 6 प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है।
जो मासिक धर्म को नियमित करने व् प्रजनन क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है।
हल्दी
एंटी ऑक्सीडेंट्स गुणों से भरपूर हल्दी का सेवन भी सब्जियों में महिला को जरूर करना चाहिए।
क्योंकि हल्दी भी प्रजनन क्षमता को बढ़ाने में मदद करती है।
साथ ही हरी मिर्च या लाल मिर्च का सेवन भी महिला को जरूर करना चाहिए।
क्योंकि मिर्च बॉडी के सभी अंगो के साथ प्रजनन अंगो में ब्लड फ्लो को सही रखने में मदद करती है।
महिलाओं की फर्टिलिटी बढ़ाने के लिए खाएं लहसुन
लहसुन न केवल प्रजनन क्षमता को बढ़ाता है बल्कि गर्भपात जैसी परेशानी से भी महिला को बचे रहने में मदद करता है।
क्योंकि लहसुन में सेलेनियम मौजूद होता है जो प्रजनन क्षमता को सही रखने में मदद करता है।
महिलाओं की फर्टिलिटी बढ़ाने के लिए खाएं खट्टे फल
विटामिन सी बॉडी में आयरन को अच्छे से अवशोषित करने में मदद करता है।
बॉडी में विटामिन सी का होना महिला को इन्फेक्शन जैसी परेशानी से बचाव करने में भी मदद करता है।
और नियमित विटामिन सी युक्त किसी न किसी आहार का सेवन महिला की प्रजनन क्षमता को बढ़ाने में भी फायदेमंद होता है।
यह तीनों चीजे महिला के माँ बनने में आ रही परेशानियों को दूर करने में मदद करती है।
इसीलिए प्रजनन क्षमता को बढ़ाने के लिए महिला को विटामिन सी युक्त आहार का सेवन जरूर करना चाहिए।
और खट्टे फलों में विटामिन सी भरपूर मात्रा में मौजूद होता है।
और इसके लिए महिला संतरे, कीवी, स्ट्रॉबेरी आदि फलों का सेवन कर सकती है।
फर्टिलिटी बढ़ाने के लिए अन्य टिप्स
वजन पर नियंत्रण रखें।
तनाव से दूर रहें खुश रहें।
अल्कोहल का सेवन न करें।
धूम्रपान से दूरी रखें।
मासिक धर्म से जुडी परेशानी होने पर इसका इलाज जरूर करवाएं।
शरीर में पानी की कमी न होने दें।
नींद को भरपूर मात्रा में लें।
माँ बनने का निर्णय लेते ही एक बार अपने शरीर की अच्छे से जांच करवाएं ताकि गर्भावस्था में आने वाली परेशानियों से बचे रहने में मदद मिल सके।
तो यह हैं कुछ आहार व् टिप्स जो महिला की प्रजनन क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं। जिससे महिला को माँ बनने का सुख लेने में मदद मिलती है।
जैसे ही पता चलता है की महिला गर्भवती है उसी समय से ही डॉक्टर से मिलने का सिलसिला शुरू हो जाता है। ताकि प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली परेशानियों से बचने के साथ गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके। और महिला की शारीरिक स्थिति को जानने के लिए और गर्भ में शिशु के विकास को देखने के लिए बहुत सी जांच यानी टेस्ट करवाने जरुरी होते हैं। और इन टेस्ट को करवाने में देरी या लापरवाही नहीं करनी चाहिए। क्योंकि इन टेस्ट को करवाने से यदि कोई समस्या है तो उसका पता चल जाता है।
जैसे की गर्भाशय ठीक है या नहीं, गर्भपात की कोई आशंका तो नहीं है, किसी तरह का इन्फेक्शन तो नहीं है, गर्भ में शिशु की स्थिति, आदि। और यदि कोई समस्या होती भी है तो समय रहते उसे ठीक करने में मदद मिलती है। ताकि प्रेगनेंसी के दौरान महिला की सेहत या शिशु के विकास में कोई कमी न आये। साथ ही कुछ महिलाएं उम्र ज्यादा होने पर प्रेगनेंसी प्लान करती है ऐसे में उन्हें ज्यादा जांच करवाने की जरुरत भी पड़ सकती है। तो लीजिये आज हम आपको कुछ ऐसे टेस्ट के बारे में बताने जा रहे हैं, जो प्रेगनेंसी के दौरान करवाने जरुरी होते हैं ताकि गर्भवती महिला और शिशु को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।
ब्लड टेस्ट
ब्लड टेस्ट करवाने से ब्लड ग्रुप, Rh यानी रीसस फैक्टर, हीमोग्लोबिन, ग्लूकोस लेवल, गेस्टेशनल डाइबिटीज़ आदि की जांच की जाती है। क्योंकि जो महिलाएं अधिक उम्र में माँ बनने का फैसला लेती है, उन्हें यह परेशानी होने के चांस ज्यादा होते हैं। ऐसे में यदि यह समस्या होती है तो समय से इसका इलाज करने में मदद मिलती है।
ब्लड प्रैशर
प्रेगनेंसी के समय प्रेग्नेंट महिला का एक बार ब्लड प्रैशर चेक नहीं करते हैं, बल्कि समय समय पर ब्लड प्रैशर को चेक करने की डॉक्टर सलाह देते है। क्योंकि इससे पता चल जाता है की गर्भवती महिला को हाइपरटेंशन तो नहीं है। और यदि गर्भवती महिला को हाई ब्लड प्रैशर की समस्या होती है, तो यह प्रीक्लेम्पसिया का लक्षण हो सकता ही, साथ ही हाई ब्लड प्रैशर होने के कारण केवल गर्भवती महिला को ही नहीं बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु को भी समस्या हो सकती है। ज्यादा उम्र होने पर माँ बनने वाली महिलाओं को यह समस्या होने के चांस ज्यादा होते हैं।
यूरिन टेस्ट
गर्भवती महिलाओं को यूरिन इन्फेक्शन की समस्या का होना आम बात होती है, और यूरिन टेस्ट के माध्यम से बॉडी में प्रोटीन, एल्ब्यूमिन, आदि की जाँच की जाती है। और यदि यूरिन में प्रोटीन की मात्रा अधिक आती है तो यह प्रीक्लेम्पसिया का संकेत हो सकता है।
अल्ट्रासॉउन्ड
अल्ट्रासॉउन्ड प्रेगनेंसी के दौरान होने वाला एक बहुत ही अहम टेस्ट होता है, क्योंकि इस टेस्ट के करने से पता चल जाता है की गर्भ में शिशु का विकास बेहतर तरीके से हो रहा है या नहीं, या शिशु के शारीरिक विकास में किसी तरह की कोई कमी तो नहीं है। यह टेस्ट हर महिला की प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली परिस्थिति के अनुसार बताते हैं की अल्ट्रासॉउन्ड कितनी बार करवाना है।
एनीमिया
एनीमिया प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली एक ऐसी समस्या है जिसमे शरीर में खून की कमी हो जाती है और नया खून नहीं बनता। यह टेस्ट डॉक्टर प्रेगनेंसी के शुरुआती समय में ही करवाने की सलाह देते हैं। और इसकी समय पर जांच करवा लेनी चाहिए। क्योंकि यदि गर्भवती महिला को यह समस्या होती है तो इसके कारण गर्भ में पल रहा शिशु भी प्रभावित हो सकता है।
शुगर टेस्ट
प्रेगनेंसी हॉर्मोन्स के असंतुलन के कारण कई बार बॉडी में इन्सुलिन का बनना कम हो जाता है, जिसके कारण गर्भवती महिला को शुगर होने के चांस भी बढ़ जाते हैं। और इसकी सही जानकारी के लिए यूरिन टेस्ट के माध्यम से पता लगाया जाता है की बॉडी में कितना इन्सुलिन बन रहा है, ऐसे में सही समय पर शुगर टेस्ट करवाना चाहिए।
यौन संचारित रोगो के लिए टेस्ट
गर्भावस्था के शुरूआती समय में ही यौन संचारित रोगो की जांच करवाने की सलाह दी जाती है। क्योंकि यदि गर्भवती महिला या उनका पार्टनर इस रोग से ग्रसित होता है तो इसके शिशु को होने के चांस भी बढ़ जाते हैं।जो की शिशु के लिए बहुत हानिकारक हो सकता है ऐसे में इस जांच में देरी न करते हुए समय से यह टेस्ट करवाना चाहिए।
क्रोनिक विल्ली सैंपलिंग टेस्ट
इस टेस्ट को करने से गर्भ में पल रहे शिशु में होने वाली जेनेटिक गड़बड़ियों के साथ जन्मजात दोषों की जांच की जाती है। इसमें प्लेसेंटा से सेल्स निकाल कर, जाँच की जाती है, और यदि इस टेस्ट में किसी तरह की कोई समस्या आती है तो आप डॉक्टर से इसके बारे में राय ले सकते हैं।
एमिनोसेंटसिस टेस्ट
प्रेगनेंसी के दौरान इस जाँच के लिए भी डॉक्टर कह सकते है, इस टेस्ट में एमनियोटिक फ्लूड की मदद से, डाउन सिंड्रोम की जाँच की जाती हैं।
प्लेटलेट्स जांच
गर्भवती महिला के शरीर में यदि प्लेटलेट्स की संख्या कम होती है तो डॉक्टर इसका इलाज करते हैं। क्योंकि यह बॉडी में ब्लड से जुडी समस्याओं के समाधान के लिए बहुत जरुरी होता है, ऐसे में प्लेटलेट्स का टेस्ट भी गर्भवती महिला के लिए जरुरी होता है।
तो यह हैं कुछ टेस्ट जो गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान करवाने की सलाह दी जाती है, इसके अलावा और भी टेस्ट महिला को करवाने के लिए कहा जा सकता है। यह पूरी तरह से गर्भवती महिला की स्थिति पर निर्भर करता है, साथ ही महिला को यह सभी टेस्ट समय से करवाने चाहिए, ताकि गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को हर तरह की परेशानी से बचाव करने में मदद मिलती है।
मुँह में छाले की समस्या होना आम बात होती है, लेकिन यदि यह परेशानी हो जाए तो व्यक्ति काफी परेशान रहता है। क्योंकि इसके कारण व्यक्ति न कुछ अच्छे से खा सकता है, दर्द भी होता है, और कई बारे बोलने में भी परेशानी होती है। यह जीभ के साथ होंठों पर भी जाते है जिसके कारण और परेशानी होती है। कई बार इसके कारण थोड़ा बहुत खून भी आने लगता है। लेकिन यह कोई ऐसी परेशानी नहीं है जिसका कोई इलाज न हो। आइये आज हम आपको इस समस्या से बचने के लिए कुछ उपाय बताने जा रहे है जिससे आपको सी समस्या से बचने में मदद मिलेगी।
मुँह में छाले होने के क्या क्या कारण होते है:-
जिन लोगो को कब्ज़ की समस्या अधिक रहती है उन्हें यह परेशानी हो सकती है।
दांतो की साफ़ सफाई न करने के कारण भी मुँह में छाले हो जाते है।
अधिक गरम भोजन का सेवन करने से भी ऐसा हो सकता है।
पेट से जुडी परेशानी या गर्मी होने के कारण भी मुँह में छाले हो जाते है।
विटामिन्स की कमी होने के कारण, और आयरन की कमी होने पर भी इस समस्या का सामना करना पड़ता है।
जीभ काटने, या ब्रश करते समय मुँह में लगने के कारण भी आपको इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
मुँह में छाले की समस्या से बचने के उपाय:-
तुलसी के पत्तो का इस्तेमाल करें:-
तुलसी के तीन से चार पत्ते लेकर अच्छे से पीस लें। उसके बाद इसका रस निकालकर अच्छे से अपने मुँह में छालों पर दिन में दो बार लगाएं। ऐसा करने से आपको आराम मिलेगा, और इसे तब तक लगाएं जब तक आपके छाले अच्छे से ठीक न हो जाए।
अमरुद के पत्ते का इस्तेमाल करें:-
दस से बारह साफ़ और छोटे अमरुद के पत्ते लेकर पानी में अच्छे से उबाल लें। उसके बाद उस पानी के गुनगुने रहने पर उससे कुल्ला करें, दिन में दो से तीन बार इस उपाय को करें इससे आपके छालों की समस्या को दूर करने में मदद मिलेगी।
बर्फ के टुकड़ो का प्रयोग करें:-
बर्फ के टुकड़े को अच्छे से अपने छालों पर अच्छे से दिन में दो से तीन बार मुँह के छालें ठीक होने तक रगड़ें। ऐसा करने से भी आपको इस समस्या से आसानी से राहत पाने में मदद मिलते है लेकिन ध्यान रखें ज्यादा तेजी से न रगड़ें।
हल्दी का उपाय करें:-
एक चम्मच हल्दी को एक गिलास पानी में अच्छे से उबाल लें, और उसके गुनगुने होने पर अच्छे से कुल्ला करें। कुल्ला करने के बाद थड़ी देर तक कुछ न खाएं पीएं। दिन में दो बार इस उपाय को करने से ही आपको फ़र्क़ दिखाई देगा।
शहद और नारियल के दूध का प्रयोग करें:-
एक चम्मच शहद में एक चम्मच नारियल का दूध मिलाकर पेस्ट तैयार करें उसके बाद इस पेस्ट को अच्छे से अपने छालों पर लगाएं। और थोड़ी देर बाद साफ़ पानी से कुल्ला कर लें। इस उपाय को करने से भी आपको मुँह के छालों की समस्या को दूर करने में मदद मिलती है।
अरहर की दाल का प्रयोग करें:-
दो चम्मच अरहर की दाल में थोड़ा सा पानी मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें। उसके बाद इस पेस्ट को अच्छे से अपने छालों पर लगाएं। और थोड़ी देर के लिए छोड़ दें, और मुँह की लार को बाहर निकाल दें। ऐसा करने से भी आपको मुँह के छालों की समस्या को दूर करने में मदद मिलती है।
हरे धनिये का उपयोग करें:-
हरा धनिया भी मुँह के छालों की समस्या को दूर करने में आपकी मदद करता है। इसके लिए आप थोड़े से धनिये के पत्ते लेकर अच्छे से पीस कर उसका रस निकाल लें। उसके बाद इस रस को अच्छे से अपने मुँह के छालों पर लगाएं आपको फायदा जरूर मिलेगा।
एलोवेरा का उपयोग करें:-
एलोवेरा जैल या एलोवेरा के रस को अपने मुँह में छालों पर लगाएं। और ऐसा दिन में दो बार तब तक करें जब तक की मुँह के छालें अच्छे से ठीक न हो जाए। इससे आपको जल्दी राहत मिलने में मदद मिलेगी।
मुलहठी का प्रयोग करें:-
थोड़ी सी मुलहठी को अच्छे से पीस लें, उसके बाद इसमें एक चम्मच शहद मिलाकर अच्छे से अपने छालों पर लगाएं। और मुँह से निकलने वाली लार को बाहर निकाल दें। इस उपाय को करने से भी आपको मुँह के छालों की समस्या से राहत मिलती है।
इलायची का प्रयोग करें:-
दो तीन इलायची के दाने निकालकर पीस लें, उसके बाद इसमें थोड़ा सा शहद मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें उसके बाद इस पेस्ट को अपने छालों पर लगाएं। और थोड़ी देर बाद पानी से कुल्ला कर लें इस उपाय को करने से भी आपको मुँह के छालों की समस्या से राहत पाने में मदद मिलता है।
मुँह के छालों के लिए अन्य टिप्स:-
पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए, इससे आपको पेट से जुडी परेशानी से राहत मिलती है, जिससे मुँह के छालों की समस्या से राहत पाने में भी आपको मदद मिलती है।
जितना हो सकें अधिक मसालेदार, व् चटपटे खाने से मुँह के छालों में परहेज करना चाहिए।
स्मोकिंग नहीं करनी चाहिए इससे इन्फेक्शन का खतरा रहता है।
कच्चे दूध से कुल्ला करने पर भी आपको इस समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।
ग्लिसरीन को छालों पर लगाएं आपको आराम मिलेगा।
ब्रश करते समय सावधानी बरते।
बेकिंग सोडा में पानी मिलाकर उसका पेस्ट बनाएं उसे अपने छालों पर लगाएं इससे भी आपको इस समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।
तो ये है कुछ कारण जिनकी वजह से आपको मुँह में होने वाले छाले की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। और ऊपर दिए गए किसी भी टिप्स का दो या तीन दिन तक इस्तेमाल करने से आपको मुँह में छाले की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है। तो यदि आपको भी मुँह के छाले की परेशानी है तो आप भी इन टिप्स का इस्तेमाल कर सकते है।
पटाखों से जलने पर तुरंत राहत पाने के लिए क्या करें, पटाखे से जलने पर ये उपाय करें, पटाखे से जलने पर क्या करें, पटाखे चलाते समय जलने पर क्या करें उपाय, जलने पर ये करें तुरंत, पटाखों से जल जाए तो ये करें, पटाखों से जलने के बाद क्या करना चाहिए, पटाखे या दीये से जल जाए तो फ़ौरन करें उपचार, पटाखे से जलने पर क्या करें क्या न करें, दीपावली में पटाखों से जलने पर ये करें
दिवाली बहुत ही खुश और उमंग भरा त्यौहार है जिसे सभी अपने हिसाब से एन्जॉय करते है। जहां एक तरफ परिवार वाले आसपास में मिठाइयां बांटकर अपनी खुशिया बढ़ाते है वहीं दूसरी तरफ घर के बच्चे पटाखे आदि में अपनी मस्ती ढूढ़ते है। लेकिन कई बार यही मस्ती उनके लिए परेशानी का कारण बन जाती है।
दिवाली पर पटाखे आदि फोड़ना बहुत पुरानी रीत है लेकिन रीत के साथ-साथ सेफ्टी रखना भी बहुत जरुरी है। लेकिन आजकल के जिद्दी बच्चे इन बातों का समझते नहीं और अकेले ही पटाखे फोड़ने चले जाते है जिसके परिणामस्वरूप कई बार उनके साथ कुछ ऐसी समस्याएं हो जाती है जिनसे निकलना काफी मुश्किल होता है।
वैसे तो पटाखे जलाने से हमारे पर्यावरण को काफी नुकसान पहुँचता है लेकिन बच्चों की जिद के आगे माता पिता को उनकी यह बात माननी पड़ती है। इस दिन आपको अपने बच्चों पर कड़ी निगरानी रखनी चाहिए विशेषकर तब जब वह पटाखे जला रहे हो।
पटाखों के साथ होने वाली सबसे बड़ी परेशानी हाथ जल जाने की होती है। इसीलिए आज हम आपको दिवाली पर पटाखे से जल जाने के लिए कुछ घरेलू उपचार बताने जा रहे है। जिनकी मदद से बिना किसी परेशानी से घर बैठे जलने का इलाज किया जा सकता है। इन उपायों को आप पटाखे से जलने के बाद घाव को ठीक करने के अपना सकते है।
पटाखे से हाथ जल जाने पर क्या करें?
1. कपड़ें और ज्वैलरी :
पटाखे से जलने के बाद सबसे जरुरी होता है जले हुए स्थान को खुला रखना। इसके लिए उस स्थान पर से कपडा और ज्वैलरी हटा दें। क्योंकि अगर आपने कोई अंगूठी, कंगन आदि पहना हुआ है तो ये आपके लिए हानिकारक हो सकता है।
2. पानी से धोएं :
पटाखे से जलने के बाद सबसे पहले जाली हुई जगह पर पानी डालें। ऐसा करने से जले हुए भाग में राहत मिलेगी और दर्द भी नहीं होगा। पानी से धोने पर छाले भी नहीं पड़ते।
3. ठंडी चीज रखें :
जलन में आराम देने के लिए जले हुए स्थान पर कोई ठंडी चीज रखें। आप चाहे तो जले हुए हिस्से तो सीधे नल के नीचे रखकर पानी चला दें। इसके अलावा आप बर्फ, मक्खन या ठंडे पानी में भिगोएं कपडे का भी इस्तेमाल कर सकते है।
4. दवा :
अगर आपके पास कोई स्किन ओइंमेंट है तो जले हुए हिस्से को ठंडा होने के बाद उस पर ओइंमेंट को लगाएं और किसी साफ़ कपड़ें या बैंडेज से ढक दें।
5. आँखों पर दें ध्यान :
अगर समस्या आखों के आसपास के हिस्से में है तो सबसे पहले ठंडे और साफ़ पानी से अपनी ऑंखें साफ़ करें और जितनी शीघ्र हो सके डॉक्टर के पास जाए। अगर आप कांटेक्ट लेंस पहनते है तो सबसे पहले उन्हें निकालें और फिर आँखें धोएं।
6. कपड़ों में लगी आग :
अगर पटाखे के कारण आपके कपड़ों में आग लग जाए तो तुरंत जमीन पर लेट कर गोल गुलाटियां लेने लगें इससे आग बुझ जाएगी। उसके बाद किसी जैकेट या कम्बल से खुद को अच्छी तरह कवर कर लें और तुरंत डॉक्टर से मिलें।
पटाखें से जल जाने पर इन घरेलू उपायों को आजमाएं :-
1. टूथपेस्ट :
जलने के बाद प्रभावित हिस्से को धोकर उसपर टूथपेस्ट या फाउंटेन पैन की इंक लगानी चाहिए। ऐसा करने से जलने पर होने वाले दर्द में राहत मिलेगी और छाले भी नहीं होंगे।
2. तिल का लेप :
इसके लिए तिल को पीसकर उसका लेप बनाये। इस लेप को त्वचा के प्रभावित हिस्से पर लगाएं। ये उपाय जलन के साथ साथ दर्द कम करने में भी मदद करता है।
3. शहद :
शहद त्वचा को ठंडक देने में मदद करता है। प्रयोग के लिए शहद को घाव पर रख दें रगड़े नहीं। ऐसा करने से घाव जल्दी भर जाएगा। पटाखों से जलने पर ये उपाय काफी लाभदायक होता है।
4. हल्दी :
हल्दी बहुत एंटी सेप्टिक होती है। प्रयोग के लये हल्दी के पेस्ट को चोट वाले हिस्से पर लगाएं। घाव जल्द भर जाएगा।
5. सेब का सिरका :
सिरके में थोड़ा सा पानी मिलाकर उसे किसी छोटे कपड़ें में भिगो कर जलने वाले स्थान पर लगाएं। ऐसा करने से जलन में काफी राहत मिलेगा।
6. गाय का घी :
प्रयोग के लिए सरसों के तेल, नीम की छाल और पानी को मिलाएं। अब इसमें गाय का घी मिलाएं। इस पेस्ट को जलने वाले स्थान पर लगाएं घाव जल्द भरेगा।
7. एलोवेरा :
एलोवेरा जेल लगाने से भी जलने की पीड़ा को समाप्त किया जा सकता है। इसके लिए एलोवेरा जेल को फ्रिज में रखकर उसे ठंडा कर ले और प्रयोग में लाये या यूँ ही पत्ती तोड़कर जेल लगा लें। यह छाले नहीं पड़ने देगा।
8. तुलसी के पत्ते :
तुलसी के पत्तों को पीसकर उसका रस निकालकर भी आप प्रयोग में ला सकते है। यह एक बेहतर एंटीसेप्टिक के रूप में कार्य करता है। इसके प्रयोग से त्वचा पर दाग भी नहीं पड़ता और संक्रमण होने का खतरा भी नहीं रहता।