Home Blog Page 255

गर्भधारण का प्रयास कैसे करें?

शादी के बाद हर कोई चाहता है की उनकी फैमिली आगे बड़े और वो दो से तीन हो जाएँ। और इसके लिए कपल गर्भधारण का प्रयास करने लगता है। प्रेगनेंसी के लिए सबसे जरुरी होता है की पति पत्नी दोनों इसके लिए तैयार हो। इसके अलावा प्रेगनेंसी के लिए महिला व् पुरुष का स्वस्थ होना भी जरुरी होता है, क्योंकि कई बार महिला या पुरुष की गलत आदतों, गलत जीवनशैली, खराब दिनचर्या, शारीरिक समस्या, उम्र सही न होने के कारण, मासिक धर्म चक्र से जुडी समस्या, आदि के कारण महिला का गर्भ ठहरने में मुश्किल हो सकती है। साथ ही ऐसा भी नहीं है की महिला और पुरुष यदि एक बार करीब आ जाते हैं तो इससे महिला का गर्भ ठहर जाता है। प्रेगनेंसी का मतलब ही पुरुष और महिला दोनों के बराबर सहयोग से से जुड़ा होता है। इसीलिए जब कपल चाहता है की उनकी फैमिली आगे बढे तो इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत जरुरी होता है।

प्रेग्नेंट होने के लिए टिप्स

गर्भवती होने के लिए एक नहीं बल्कि बहुत सी बातों का ध्यान रखना जरुरी होता है, और इसका ख्याल केवल महिला को ही नहीं बल्कि पुरुष को भी रखना जरुरी होता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की महिला के गर्भ को ठहरने के लिए किन किन बातों का ध्यान रखना सबसे ज्यादा जरुरी होता है।

मासिक चक्र

मासिक धर्म में अनियमितता के कारण महिला का गर्भ ठहरने के समस्या हो सकती है, ऐसे में यदि महिला को मासिक धर्म से जुडी कोई समस्या होती है तो सबसे पहले महिला को उसका उपचार ढूँढना चाहिए या उसके लिए डॉक्टर से राय लेनी चाहिए। ताकि महिला की मासिक धर्म से जुडी समस्या का उपचार हो और महिला का गर्भ ठहरने में किसी भी तरह की कोई समस्या न हो।

खान पान

माँ बनने के लिए महिला को शारीरिक रूप से स्वस्थ होना चाहिए और महिला के शरीर में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होने चाहिए। क्योंकि यदि महिला स्वस्थ होती है तो इससे गर्भधारण में आसानी होती है, ऐसे में बॉडी में पोषक तत्वों की मात्रा को भरपूर रखने के लिए महिला को अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। भरपूर मात्रा में न्यूट्रिएंट्स का सेवन करना चाहिए। खासकर प्रेगनेंसी से तीन महीने पहले से ही महिला को फोलिक एसिड लेना शुरू कर देना चाहिए।

शादी के बाद तुरंत कंसीव होने पर गर्भ न गिराएं

यदि आपकी अभी -अभी शादी हुई है और आपने कंसीव कर लिया है तो आपको उस शिशु को जन्म देना चाहिए। बहुत सी महिलाएं शादी के बाद तुरंत कंसीव करने पर शिशु को अबो्र्ट करने का सोच सकती है, लेकिन आपको यह जानकार हैरानी होगी की यदि आप ऐसा करती है तो इसके कारण आपको बाद में गर्भधारण से जुडी बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में महिला को गर्भ को गिराने से बचना चाहिए।

गर्भनिरोधक गोलियों के सेवन से बचें

यदि आप माँ बनने का प्रयास कर रही है तो आपको गर्भनिरोधक गोलियों के सेवन से परहेज करना चाहिए, क्योंकि इसके सेवन से महिला का गर्भ नहीं ठहरता है। साथ ही इसके कारण महिला के मासिक धर्म चक्र पर भी असर पड़ता है, ऐसे में गर्भनिरोधक गोलियों के सेवन को छोड़ने के बाद मासिक धर्म चक्र को नियमित करने का प्रयास करना चाहिए इससे महिला का गर्भ ठहरने में आसानी होती है।

सही उम्र का ध्यान रखें

माँ बनने के लिए और गर्भधारण के लिए आने वाली मुश्किलों से बचने के लिए सही उम्र में गर्भधारण करना बहुत जरुरी होता है। क्योंकि उम्र यदि बहुत कम हो या बहुत ज्यादा हो जाये तो गर्भधारण में महिला को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। और गर्भधारण के लिए बीस से अठाइस वर्ष की उम्र सबसे सही होती है, उम्र सही होने के साथ महिला का शारीरिक रूप से स्वस्थ होना भी बहुत जरुरी होता है।

ओवुलेशन पीरियड की जानकारी लें

मासिक धर्म के पहले दिन से गिने, और उसके बाद ग्यारह से अठारह दिनों के बीच में का जो समय होता है वो ओवुलेशन पीरियड होता है। और इस दौरान गर्भधारण के चांस सबसे अधिक होते हैं ऐसे में आप यदि इन दिनों में सम्बन्ध बनाते हैं तो इससे महिला का गर्भ ठहरने के चांस बढ़ जाते हैं। यदि आपको अपने ओवुलेशन के बारे में समझ न आये तो इसके लिए आप एक बार डॉक्टर से भी राय ले सकती है।

सम्बन्ध

माँ बनने के लिए सबसे जरुरी होता है की महिला और पुरुष के बीच बेहतर सम्बन्ध हो, ऐसे में यदि आप गर्भधारण का प्रयास कर रही है तो नियमित रूप से सम्बन्ध बनाएं। क्योंकि बेहतर सम्बन्ध बनाने से भी प्रेगनेंसी के चांस को बढ़ाने में मदद मिलती है।

लुब्रिकेंट्स को कहे न

कई कपल सम्बन्ध बनाते समय लुब्रिकेंट्स का इस्तेमाल करते हैं जिससे पुरुष के शुक्राणु अंडे तक नहीं पहुँच पाते हैं और महिला के गर्भधारण में समस्या आ सकती है। ऐसे में जल्दी गर्भधारण के लिए कपल को सम्बन्ध बनाते समय लुब्रिकेंट्स के इस्तेमाल से बचना चाहिए।

वजन

प्रेगनेंसी के लिए सही वजन का होना भी बहुत जरुरी होता हैं यदि महिला का वजन जरुरत से ज्यादा या फिर कम होता है तो इसके कारण महिला का गर्भ ठहरने में समस्या हो सकती है। ऐसे में जल्दी प्रेगनेंसी के लिए महिला को अपने वजन को नियंत्रित रखना चाहिए, यानि यदि महिला का वजन अधिक है तो उसे कम करना चाहिए और यदि महिला का वजन कम है तो उसे सामान्य करना चाहिए।

नशे से दूरी

नशा शरीर को अंदर से थोड़ा- थोड़ा करके पूरी तरह से ख़राब कर देता है, ऐसे में यदि महिला गर्भधारण करना चाहती है। तो इसके लिए महिला को किसी भी तरह के नशे से दूरी रखनी चाहिए, और साथ ही पुरुष को भी नशे के सेवन से बचना चाहिए। क्योंकि नशे का सेवन करने से पुरुष के शुक्राणु की गुणवत्ता और संख्या में कमी आ सकती है जिसके कारण महिला का गर्भ नहीं ठहर पाता है। इसीलिए जल्दी गर्भधारण के लिए महिला और पुरुष दोनों को नशे के सेवन से परहेज करना चाहिए।

तनाव नहीं

यदि आप गर्भधारण करना चाहती है तो आपको बिल्कुल भी तनाव नहीं लेना चाहिए, क्योंकि गर्भधारण न होने का एक कारण तनाव भी हो सकता है। इसीलिए यदि आप माँ बनना चाहती है तो तनाव न लें, और जितना हो सके खुश रहें। और दिमाग को शांत रखने के लिए मैडिटेशन व् योगासन करें, इससे आपको मानसिक रूप से रिलैक्स रहने में मदद मिलती है।

डॉक्टर से ले राय और करवाएं जांच

यदि बहुत कोशिश करने के बाद भी आप गर्भधारण नहीं कर पा रही है तो आपको एक बार डॉक्टर से मिलना चाहिए। और डॉक्टर्स द्वारा बताई गई सभी जरुरी जांच भी करवानी चाहिए, क्योंकि कई बार किसी शारीरिक समस्या जैसे की थायरॉइड के चलते महिला को गर्भ न ठहरने की समस्या हो सकती है। ऐसे में डॉक्टर से इसका अच्छे से इलाज करवाने के बाद आपको गर्भधारण में आ रही समस्याओं को दूर करने में मदद मिलती है। और सभी जांच केवल महिला को ही नहीं बल्कि पुरुष को भी करवानी चाहिए क्योंकि कई बार पुरुष में होने वाली कमी के कारण भी महिला का गर्भ ठहरने में समस्या हो सकती है।

गर्भपात होने पर थोड़ा ध्यान रखें

यदि आपने गर्भधारण किया था लेकिन किसी कारण आपका गर्भपात हो गया है, तो गर्भपात होने के तुरंत बाद प्रेगनेंसी के लिए न सोचें। क्योंकि इससे दोबारा गर्भपात का खतरा हो सकता है, ऐसे में शारीरिक रूप से फिट होने के बाद ही गर्भधारण के लिए प्रयास करें।

तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिनकी मदद से महिला को आसानी से गर्भधारण करने में मदद मिलती है। लेकिन ऐसा जरुरी नहीं है की महिला का गर्भधारण एक ही महीने में हो जाये इसमें थोड़ा समय लग सकता है, ऐसे में आपको अपनी जीवनशैली और दिनचर्या को बेहतर रखे जिससे आपको स्वस्थ रहने में मदद मिल सके और जितना आप स्वस्थ रहती है उतना ही ज्यादा आपको जल्दी गर्भधारण में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी में पीठ के दर्द की समस्या से राहत पाने के टिप्स

गर्भावस्था में पीठ का दर्द

बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को बहुत से शारीरिक बदलाव से गुजरना पड़ता है। बदलाव होने के साथ बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना भी गर्भवती महिला को करना पड़ सकता है। जैसे की पीठ में दर्द, पीठ में दर्द प्रेगनेंसी के शुरूआती समय में गर्भाशय के आकार में बढ़ने के कारण, वहीँ जैसे जैसे गर्भवती महिला का वजन बढ़ता है तो पीठ की मांसपेशियों में खिंचाव होने के कारण भी इस दर्द का अहसास हो सकता है। डिलीवरी के समय के पास आने पर पीठ में अधिक दर्द का होना डिलीवरी होने का संकेत भी हो सकता है। ऐसे में इसका ध्यान रखना बहुत जरुरी होता है।

प्रेगनेंसी में पीठ में दर्द के कारण

  • गर्भावस्था के दौरान वजन बढ़ने के कारण मांसपेशियों में खिंचाव होता है जिसके कारण पीठ में दर्द का अनुभव हो सकता है।
  • सही पोजीशन में न सोने, उठने, बैठने के कारण भी पीठ में दर्द की परेशानी का सामना गर्भवती महिला को करना पड़ सकता है।
  • गर्भाशय के आकार के बढ़ने के कारण भी मांसपेशियों में खिंचाव आ सकता है जिसके कारण गर्भवती महिला को पीठ में दर्द का अनुभव करना पड़ सकता है।
  • तनाव के कारण भी गर्भवती महिला को पीठ में दर्द या ऐंठन का अहसास हो सकता है।

गर्भावस्था में पीठ में दर्द से राहत पाने के टिप्स

प्रेगनेंसी में होने वाली पीठ की दर्द की समस्या के कारण अधिक परेशानी हो सकती है। ऐसे में जितना हो सके गर्भवती महिला को इससे निजात पाने के लिए कुछ खास टिप्स का इस्तेमाल करना चाहिए, तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में पीठ में दर्द की समस्या से बचने के लिए आप क्या कर सकते हैं।

मसाज

रात को सोने से पहले गुनगुने तेल का इस्तेमाल करके हल्के हाथों से मसाज करें, साथ ही एक्यूप्रेशर प्वाइंट्स पर हल्की मसाज करनी चाहिए। ऐसा करने से गर्भवती महिला को पीठ में दर्द की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

योगासन

गर्भवती महिला यदि नियमित सुबह या शाम को थोड़ी देर योगासन करती है, तो इससे मांसपेशियों को आराम मिलता है। साथ ही मांसपेशियों में लचीलापन आता है जिससे प्रेगनेंसी में होने वाली पीठ के दर्द की समस्या से राहत मिलने में फायदा होता है।

भारी सामान

भारी सामान को प्रेगनेंसी में न उठाने की सलाह दी जाती है, क्योंकि प्रेगनेंसी में भारी सामान उठाने के कारण पीठ में दर्द के साथ गर्भ में शिशु को भी समस्या ही सकती है। ऐसे में गर्भवती महिला को पीठ दर्द से बचाव के लिए भारी सामान को नहीं उठाना चाहिए।

तंग कपडे

तंग कपड़ो को पहनने से भी ब्लड सर्कुलेशन पर असर पड़ता है, साथ ही इसके कारण मांसपेशियों में भी खिंचाव हो सकता है। जिसके कारण पीठ में दर्द की समस्या बढ़ सकती है, इसीलिए प्रेग्नेंट महिला को पीठ की दर्द की समस्या से बचे रहने के लिए तंग कपडे नहीं पहनने चाहिए।

सोने की जगह व् तरीका

गर्भवती महिला के सोने का स्थान ऊँचा नीचा नहीं होना चाहिए, क्योंकि ऐसी जगह पर सोने के कारण भी गर्भवती महिला को पीठ में दर्द का अनुभव हो सकता है। साथ ही महिला को सीधा होकर, या एक ही पोजीशन में बहुत देर तक नहीं सोना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से भी महिला को पीठ में दर्द की समस्या हो सकती है।

उठने बैठने का तरीका

एक ही पोजीशन में बहुत देर तक बैठे रहने के कारण भी महिला की पीठ की मांसपेशियों में अकड़न हो सकती है, जिसके कारण पीठ में दर्द की परेशानी का अनुभव हो सकता है। ऐसे में गर्भवती महिला को उठने बैठने के तरीके का ध्यान रखना चाहिए। और बहुत देर तक एक ही पोजीशन में नहीं बैठे रहना चाहिए। ऐसा करने से भी गर्भवती महिला को पीठ में दर्द की समस्या से बचाव करने में मदद मिलती है। और जब भी कहीं पर बैठना या उठना होता है, तो आराम से और किसी चीज का सहारा लेना चाहिए इससे पीठ में दर्द की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

चप्पल जूते

गर्भवती महिला को ज्यादा ऊँचे जूते चप्पल आदि भी नहीं पहनने चाहिए, क्योंकि ज्यादा ऊँचे जूते चप्पल पहनने के कारण भी गर्भवती महिला को इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

मेटरनिटी बेल्ट

मेटरनिटी बेल्ट का इस्तेमाल करने से भी गर्भवती महिला को पीठ में दर्द की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है। क्योंकि यह बेल्ट पेट के बड़े हुए भार को संभाल लेती है जिससे पीठ के दर्द से राहत पाने में मदद मिलती है।

सहारा लेकर बैठें

पीठ के दर्द की समस्या से बचे रहने के लिए और आराम पाने के लिए गर्भवती महिला को बैठते समय सहारा लेकर बैठना चाहिए और सहारा लेने के लिए पीठ के पास तकिया रख सकते है। इस टिप्स का इस्तेमाल करने से भी पीठ के दर्द से आराम मिलता है।

तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिनका इस्तेमाल करने से प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली पीठ के दर्द की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है। तो यदि आप भी गर्भवती है और पीठ के दर्द से परेशान हैं तो आप भी इन आसान टिप्स का इस्तेमाल करके आसानी से इस परेशानी से निजात पा सकती है।

बार बार गर्भपात होने के क्या कारण होते हैं? गर्भपात रोकने के लिए क्या करें

गर्भावस्था किसी भी महिला के लिए बहुत ही ख़ास समय होता है। लेकिन कई महिलाओं को प्रेगनेंसी होने के बाद भी बार बार गर्भपात की समस्या होती है। और बार बार गर्भपात का होना किसी भी महिला के लिए अच्छी बात नहीं होती है क्योंकि इसके बाद महिला को बाद में माँ बनने में परेशानी का अनुभव करना पड़ सकता है। गर्भपात से बचने के लिए सबसे पहले जरुरी है की आपको यह पता होना चाहिए की बार बार गर्भपात होने का क्या कारण है। क्योंकि इसके भी बहुत से कारण हो सकते है।

जैसे की महिला का शुरूआती दिनों में कोई न कोई लापवाही करना, हार्मोनल का बैलेंस सही न होने के कारण, गर्भाशय में होने वाली कोई कमजोरी, या अन्य। इसके अलावा और भी कई कारण हो सकते हैं जिसके कारण महिला को इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन यदि महिला को बार बार यह समस्या हो रही है तो इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए और अच्छे से अपनी जांच कवानी चाहिए। तो आइये अब विस्तार से जानते है की बार बार गर्भपात होने के क्या क्या कारण हो सकते हैं और आप किस प्रकार इस समस्या से राहत पा सकते हैं।

बार बार गर्भपात होने के क्या क्या कारण होते हैं:-

हॉर्मोन्स में होने वाली गड़बड़ी के कारण:-

यदि महिला के शरीर में हॉर्मोन्स में कुछ गड़बड़ी होती है तो महिला को इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। जैसे की जो महिलाएं शुगर या थायरॉयड की समस्या से परेशान होती है उन्हें इस समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

गर्भाशय से जुडी परेशानी होने पर:-

यदि महिला का गर्भाशय बच्चे को जन्म देने के लिए पूरी तरह से फिट नहीं होता है यानी यदि महिला की गर्भाशय की झिल्ली कमजोर होती है। तो भी महिलाओं को गर्भपात की सम्भावना बनी रहती है।

तनाव होने के कारण:-

दिमागी रूप से तैयार न होने पर, या किसी सदमे के कारण यदि महिला तनाव में है तो भी महिला की प्रेगनेंसी पर बुरा असर पड़ता है। और ऐसी समस्या होने पर भी महिला के गर्भ गिरने के चांस बढ़ जाते हैं।

ज्यादा भागदौड़ या यात्रा करना:-

पहले तीन महीने महिलाओं को न तो अधिक भागदौड़ करनी चाहिए, यात्रा से परहेज करना चाहिए, ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए जिससे की पेट पर दबाव पड़े, या महिला को अधिक थकावट हो, यदि महिला ऐसा करती है तो भी महिला को गर्भपात से जुडी इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

इन्फेक्शन के कारण:-

कई बार महिला किसी रोग से परेशान हो, या वजाइना में किसी तरह का इन्फेक्शन हो तो इसके कारण भी महिला का गर्भाशय प्रभावित होता है। और इससे भी महिला को गर्भपात से जुडी इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

पेट पर दबाव पड़ने पर:-

यदि महिला को पेट पर कोई चोट लगती है, या पेट पर दबाव पड़ता है, जिसके कारण कई बार खून के धब्बे भी लग जाते हैं, ऐसा होने पर भी महिला के गर्भपात के चांस अधिक हो जाते है।

विटामिन सी का सेवन करना:-

कई बार महिलाओं को इस बात की जानकारी भी नहीं होती है की प्रेगनेंसी में कैसे आहार का सेवन करना चाहिए और किन किन चीजों से परहेज करना चाहिए। यदि महिला किसी ऐसे आहार का सेवन करती है जिसमे विटामिन सी की अधिकता होती है तो इसके कारण भी महिला को इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

गर्भपात से कैसे बचें:-

अपनी अच्छे से जांच करवाएं:-

यदि आप बार बार गर्भपात की समस्या से जूझ रहे हैं तो प्रेगनेंसी के लिए जल्दी न करें। सबसे पहले किसी अच्छे से डॉक्टर से अपनी सम्पूर्ण जांच करवाएं। ताकि बार बार गर्भपात होने की समस्या का कारण पता चलें। और आप उसका अच्छे से इलाज कर सकें ताकि आपको बाद में किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।

तनाव न लें:-

शारीरिक रूप से तैयार होने के साथ जरुरी है की आप माँ बनने के लिए मानसिक रूप से भी अपने आपको तैयार करें। और गर्भपात की समस्या से बचने के लिए आपको जितना हो सकें खुश रहना चाहिए अपने दिमाग पर किसी भी तरह का दबाव नहीं डालना चाहिए।

सावधानी बरतें:-

महिलाओं को गर्भपात से बचने के लिए बहुत जरुरी है की वो ऐसा कोई भी काम न करे जिससे उसके पेट पर दबाव पड़े, न ही ऐसा कोई काम करें जिससे उससे थकावट हो, भारी सामान न उठाएं, यात्रा से परहेज रखें, व् अन्य। यदि महिला अपनी प्रेगनेंसी में इन सब सावधानियों को बरतती है तो इससे महिला को गर्भपात की समस्या से बचने में मदद मिलती है।

खान पान का ध्यान रखें और आराम करें:-

प्रेगनेंसी के दौरान आपको अपने खान पान का भी दुगुना ध्यान रखना चाहिए। थोड़े थोड़े समय के बाद कुछ न कुछ खाते रहना चाहिए। ताकि आपकी बॉडी को फिट रहने के लिए सभी जरुरी मिनरल्स मिल सकें। इसके अलावा जरुरी है की आप अपने शरीर को पूरा आराम भी दें क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में बहुत से बदलाव हो रहे होते है जिसके कारण आपको थकावट महसूस होती है इसीलिए अपना ख़ास ध्यान रखें।

गर्भपात होने के बाद बरते ये सावधानियां:-

  • यदि किसी महिला को ऐसा लगता है की एक दम से उसे मासिक धर्म की तरह रक्त आने लग गया है। तो उसे उसी समय किसी किसी दाई या डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
  • यदि किसी महिला का गर्भ गिर जाता है तो उसके बाद उसे अच्छे से भ्रूण की सफाई करवानी चाहिए ताकि बाद में आपको किसी तरह की कोई परेशानी न हो।

रोजाना सम्बन्ध बनाना क्यों जरुरी है प्रेग्नेंट महिला के लिए

प्रेगनेंसी में रोजाना सम्बन्ध बनाने के फायदे, गर्भावस्था किसी भी महिला के लिए बहुत ही खास होती है। क्योंकि इस दुनिया का सबसे प्यारा अहसास ही मातृत्व का अनुभव करना होता है। और हर माँ यही चाहती है की उसके शिशु को कभी कोई दिक्कत न हो वो हमेशा स्वस्थ रहे। और ऐसा केवल महिला शिशु के जन्म के बाद ही नहीं सोचती है। बल्कि गर्भ में शिशु के आने पर ही वो शिशु की बेहतर केयर का ध्यान रखती है। इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान वो किसी भी तरह की लापरवाही से बचे रहना चाहती है।

लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान खान, पान, उठने, बैठने, सोने के साथ कपल के मन में सम्बन्ध बनाने को लेकर भी तरह तरह के विचार आते हैं। लेकिन सम्बन्ध बनाना भी लाइफ का एक हिस्सा होता है। और प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध बनाने को लेकर कोई दिक्कत तो नहीं होगी इसे लेकर कपल परेशान हो सकता है। औरआज हम इस आर्टिकल से आपकी इन सभी परेशानियों को दूर कर सकते हैं। क्योंकि मेडिकल के अनुसार प्रेगनेंसी के कपल का सम्बन्ध बनाना बहुत फायदेमंद होता है। तो आइये अब उन फायदों के बारे में विस्तार से जानते हैं।

प्रेगनेंसी में रोजाना सम्बन्ध बनाने से मिलता है तनाव से आराम

  • प्रेगनेंसी एक ख़ुशी का पल होता है और ऐसे में महिला को तनाव में नहीं रहना चाहिए।
  • लेकिन बॉडी में हो रहे बदलाव, शारीरिक परेशानियों व् प्रेगनेंसी में किसी तरह की लापरवाही न हो इसे लेकर डर के कारण प्रेग्नेंट महिला तनाव में आ सकती है।
  • और तनाव गर्भवती महिला व् शिशु दोनों की सेहत पर नकारात्मक असर डाल सकता है।
  • ऐसे में सम्बन्ध बनाने से महिला को इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।
  • क्योंकि लव मेकिंग के समय ऑक्सीटोसिन हॉर्मोन महिला की बॉडी से रिलीज़ होता है जिसे आप लव हॉर्मोन भी कह सकते हैं।
  • और यह हॉर्मोन प्रेग्नेंट महिला को तनाव से दूर रखने के साथ अच्छी व् गहरी नींद लेने में भी मदद करता है।

प्रेगनेंसी में रोजाना सम्बन्ध बनाना करता है कॉम्प्लीकेशन्स को करता है कम

  • सम्बन्ध बनाने के बाद बॉडी से जो शुक्राणु रिलीज़ होते हैं।
  • वह शुक्राणु गर्भवती महिला की प्रतिरक्षा प्रणाली यानी इम्यून सिस्टम को मजबूत रखने में मदद करते हैं।।
  • जिससे गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने और प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली कॉम्प्लीकेशन्स को कम करने में मदद मिलती है।

ब्लड प्रैशर

  • गर्भावस्था के दौरान बहुत सी प्रेग्नेंट महिलाएं ब्लड प्रैशर की समस्या से परेशान हो सकती है।
  • और यह समस्या गर्भवती महिला के साथ शिशु पर भी प्रभाव डाल सकती है।
  • लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला रोजाना सम्बन्ध बनाती है।
  • तो इससे प्रेग्नेंट महिला के ब्लड प्रैशर को सामान्य रखने में मदद मिलती है।
  • जिससे प्रेग्नेंट महिला को दिक्कतों को कम किया जा सकता है।

बाथरूम जानें की समस्या

  • वजन बढ़ने व् बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिला को बार बार यूरिन पास करने की इच्छा हो सकती है।
  • वजन जैसे जैसे बढ़ता है वैसे वैसे ये दिक्कत ज्यादा बढ़ सकती है।
  • और कई बार तो यूरिन कण्ट्रोल न होने पर, हंसने या छींकने पर थोड़ा सा यूरिन का रिसाव अपने आप ही हो जाता है।
  • और इसका कारण प्राइवेट पार्ट की मांसपेशियों का मजबूत न होना हो सकता है।
  • लेकिन सम्बन्ध बनाने से पेल्विक एरिया की मांसपेशियों को मजबूत होने में मदद मिलती है।
  • जिससे गर्भवती महिला को इस समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

प्रसव और प्रसव के बाद

  • यदि प्रेग्नेंट महिला व् कपल प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध बनाते हैं।
  • तो इससे पेल्विक एरिया की मांसपेशियों को मजबूत रहने में मदद मिलती है।
  • जिससे गर्भवती महिला को प्रसव के दौरान आने वाली परेशानियों को कम करने में मदद मिलती है।
  • साथ ही प्रसव के बाद महिला की मांसपेशियों की मजबूती को बने रहने में फायदा होता है।
  • जिससे डिलीवरी के बाद महिला को बहुत जल्दी रिकवर होने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ फायदे जो प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध बनाने से हो सकते हैं। लेकिन सुरक्षा व् महिला की सेहत का ध्यान रखकर ही सम्बन्ध बनाएं। साथ ही प्रेगनेंसी की पहली तिमाही के बाद ही सम्बन्ध बनाएं। इसके अलावा आप चाहे तो तसल्ली के लिए एक बार डॉक्टर से भी पूछ सकते हैं। क्योंकमी सम्बन्ध बनाने के लिए महिला की सेहत की जानकारी होना बहुत जरुरी होता है।

प्रेगनेंसी नहीं होने के क्या क्या कारण हो सकते हैं

महिला शादी के एक वर्ष के बीच यदि गर्भवती नहीं होती है तो लोगो का ऐसा मानना होता है की जरूर कोई समस्या हो गई है। लेकिन आज कल लोग शादी के कम से कम दो साल तक अपनी शादीशुदा लाइफ को एन्जॉय करना चाहते है और उसके बाद फैमिली प्लानिंग के बारे में सोचते हैं। लेकिन कुछ जोड़े ऐसे भी होते है जो शादी के बाद जल्दी ही माँ बाप बनने का सुख लेते है। ऐसे में परिवार वाले लोगो के ताने सुनने के डर से अपने बच्चों पर जोर डालने लगते हैं की उन्हें भी जल्दी से जल्दी अपने परिवार को आगे बढ़ाना चाहिए। लेकिन यदि वो माँ बाप बनने का फैसला लेने में देरी कर देते हैं तो बढ़ती उम्र के कारण कई बार महिला को प्रेग्नेंट न होने की समस्या से परेशान होना पड़ सकता है।

इसके अलावा बदलते लाइफस्टाइल का असर भी आज कल फर्टिलिटी की समस्या पर बहुत अधिक देखा जाता है। लोगो की गलत दिनचर्या, गलत आदतें और खराब जीवनशैली के कारण कई बार उन्हें माँ बाप बनने के सुख से वंचित रहना पड़ सकता है। कुछ लोग इन विट्रो फर्टिलाइजेशन का सहारा भी माँ बाप बनने के लिए लेते है। लेकिन फिर भी प्राकृतिक तरीको से प्रेगनेंसी न होने के कई कारण हो सकते है। तो आज हम ऐसे ही कुछ कारणों को आपको बताने जा रहे हैं जिनकी वजह से हो सकता है महिला को प्रेगनेंसी से जुडी समस्या का सामना करना पड़ रहा हो।

प्रेगनेंसी नहीं होने के क्या क्या कारण हो सकते हैं:– प्रेगनेंसी न होने के कई कारण हो सकते हैं ऐसे में आप चाहे तो इसका कारण पता करके इस समस्या का समाधान भी कर सकती है। तो आइये अब हम विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी न होने के क्या क्या कारण हो सकते हैं।

शुक्राणु से जुडी हो समस्या होने के कारण नहीं होता गर्भधारण:- गर्भधारण के लिए जरुरी होता है की महिला के अंडाणुओं तक पुरुष के शुक्राणु पर्याप्त मात्रा में पहुंचें जिससे की गर्भधारण हो सके। लेकिन कई बार ऐसा होता है की पुरुष के शुक्राणु का निर्माण कम होता है जिसके कारण यह समस्या हो सकती है। इसके अलावा ऐसा भी हो सकता है की पुरुष के शुक्राणु तो पर्याप्त होते है लेकिन वो महिला के अंडाणुओं तक पहुँच कर निषेचन नहीं कर पाते हैं जिसके कारण महिला का गर्भधारण नहीं होता है।

फैलोपियन ट्यूब या गर्भाशय से जुडी समस्या होने के कारण:- यदि महिला को गर्भाशय या फैलोपियन ट्यूब से जुडी कोई समस्या होती है। तो इसके कारण भी महिला को प्रेग्नेंट होने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। और इसका कारण कई बार महिला का अधिक मात्रा में गर्भपात के लिए दवाइयों का सेवन करना, अधिक नशा करना आदि हो सकता है। जिसके कारण महिला की गर्भाशय की झिल्ली कमजोर होने लगती है या फिर फैलोपियन ट्यूब से जुडी परेशानी महिला को हो सकती है।

गलत खान पान के कारण भी नहीं होता है है गर्भधारण:- महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान कुछ ऐसे आहार बताए जाते हैं जिनका सेवन उनके लिए वर्जित होता है। ऐसे में यदि महिला उन आहार का अधिक मात्रा में सेवन करती है तो इसके कारण भी महिला का गर्भ नहीं ठहरता है, जैसे की कच्चा पपीता आदि। ऐसे में यदि महिला गर्भधारण करना चाहती है तो उसे उन चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए जो उनकी प्रेगनेंसी के दौरान दखल दे सकती है।

अच्छे सम्बन्ध बनाना भी होता है जरुरी:- प्रेगनेंसी के लिए महिला और पुरुष के सम्बन्धों का बेहतर तरीके से बनना भी जरुरी होता है। ऐसा नहीं होता है की आपने एक बार सम्बन्ध बना लिए हैं तो आप प्रेग्नेंट हो जाएंगी। इसके लिए अच्छे सम्बन्ध या फिर महिला को उस दौरान सम्बन्ध बनाने चाहिए जब उसका ओवुलेशन पीरियड (पीरियड के बाद ग्यारह से सत्रह दिन तक का समय ) चल रहा होता है। इस दौरान यदि महिला और पुरुष सम्बन्ध बनाते हैं तो महिला के गर्भ ठहरने के चांस बहुत ज्यादा होते हैं। और यदि महिला और पुरुष के सम्बन्ध बेहतर तरीके से नहीं बनते हैं तो भी महिला के गर्भ ठहरने में परेशानी हो सकती है।

तनाव भी है महिला को प्रेगनेंसी न होने के कारण:- महिला के गर्भपात का सबसे बड़ा कारण तनाव माना जाता है। ऐसे में यदि आप तनाव के लिए दवाइयों का सेवन करते हैं तो इसकी वजह से भी आपको प्रेगनेंसी नहीं होती है। और यदि आप प्रेग्नेंट होने चाहते हैं तो इसके लिए आपको अपनी डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

उम्र भी है प्रेग्नेंट न होने का एक कारण:- आज कल बदलते लाइफस्टाइल के कारण शादी लोग लेट ही करते हैं ऐसे में प्रेगनेंसी को भी तीस की उम्र के बाद ही सही मानते हैं। लेकिन महिला की अधिक उम्र उसके प्रेग्नेंट न होने के कारण होती है। क्योंकि यदि आपकी उम्र तीस से अधिक होती है तो उसके बाद महिला के गर्भाशय में अंडे बनने कम होने लगते हैं। ऐसे में आज कल कई लोग प्राकृतिक रूप से माँ बाप बनने की बजाय मेडिकल द्वारा दी गई सुविधा इन विट्रो फर्टिलाइजेशन का इस्तेमाल करते हैं। इसीलिए यदि आप प्रेग्नेंट होना चाहती है तो पच्चीस की उम्र में भी आप यह निर्णय ले सकते है।

अंडाशय में अंडे न बनने के कारण:- कुछ महिलाएं होती है जो किसी शारीरिक बिमारी जैसे की थायरॉइड आदि से ग्रसित होती है, जिसके कारण महिला के गर्भ में आवश्यक अंडो का निर्माण नहीं हो पाता है। और महिला को प्रेगनेंसी से जुडी परेशानी का सामना करना पड़ता है। अधिक मात्रा में गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करने से भी महिला को इस समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

अनियमित माहवारी का होना:- जो महिलाएं अनियमित माहवारी की समस्या से जूझ रही होती है, तो इसका असर उनके ओवुलेशन चक्र पर भी पड़ता है। जिसके कारण अंडा अच्छी तरह से विकसित नहीं हो पाता है। और अंडे के अच्छे से विकास न होने के कारण निषेचन क्रिया भी नहीं हो पाती है, जिसके कारण महिला को गर्भधारण से जुडी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

बदलती जीवनशैली भी है महिला के प्रेग्नेंट न होने का कारण:- आज कल लोगो की बदलती जीवनशैली जैसे की खान पान में लापरवाही, आराम में लापरवाही, फिटनेस में लापरवाही, गलत आदतें आदि के कारण भी महिला का शरीर प्रभावित होता है जिसके कारण भी महिला को इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

तो यह हैं कुछ कारण जिसकी वजह से महिला गर्भवती नहीं हो पाती है। ऐसे में यदि आपको भी प्रेगनेंसी से जुडी कोई समस्या होती है, तो इसके लिए सबसे पहले आपको अपने डॉक्टर से राय लेनी चाहिए। और प्रेगनेंसी के न होने के कारण का पता करना चाहिए। ताकि आपको पता चल सके की आपके प्रेग्नेंट न होने का क्या कारण है। और यदि उसका इलाज संभव है तो आप उसका इलाज करके माँ बनने का सुख प्राप्त कर सकें।

बचना है रंगों के दुष्प्रभाव से तो ये अपनाएं!

होली के समय सभी यही सोचते है की काश! हम खुद को होली के रंगों के दुष्प्रभाव से बचा पाएं। लेकिन चाहते हुए भी हम इसे सम्भव नहीं कर पाते। इसीलिए आज हम आपको होली के रंगों के दुष्प्रभाव से बचने के कुछ खास उपाय बताने जा रहे है।

होली का त्यौहार आने में बहुत कम समय रह गया है। और इसी के साथ लोगों ने इस त्यौहार के लिए अपनी तैयारियां और शौपिंग करना भी शुरू कर दिया है। आजकल बाजारों में भी एक नइ रौनक देखने को मिलती है। वैसे तो ये त्यौहार खान पान और मौज मस्ती से भरपूर होता है लेकिन इसके खत्म होने के बाद होने वाली परेशानियाँ कोई नहीं भूलता। जिनमे सबसे पहला नाम रंगों के प्रभाव का आता है।

होली खेलने के दौरान हम बहुत से अच्छे और बुरे रंगों का इस्तेमाल करते है। लेकिन इन रंगों में मिले केमिकल आपकी त्वचा और आपके बालों को बहुत नुकसान पहुंचाते है। जिसे ठीक करने में हफ़्तों लग जाते है। त्वचा पर लगा ये कलर देखने में अच्छा नहीं लगता साथ-साथ आपकी त्वचा को भी खराब करता है। इसीलिए बेहतर होगा की होली से पहले खुद को अच्छे से तैयार कर लें।

क्योंकि होली खेलने का असली मजा पूरी मस्ती के साथ ही आता है। अब होली है तो रंग भी होंगे और रंग है तो त्वचा और बाल भी खराब होंगे। ऐसे में चिंता के साथ होली खेलना आपके मजे को खराब कर सकता है। तो बेहतर है की इसके लिए कुछ तैयारियां पहले ही कर लें। तो आइये जानते है होली के रंगों के हानिकारक प्रभावों से बचने के तरीके।

रंगों के हानिकारक प्रभावों से बचने के तरीके :- 

त्वचा के लिए आयल और मॉइस्चराइजर :

होली के समय रंगों का सबसे ज्यादा प्रभाव हमारी त्वचा पर भी पड़ता है। ऐसे में अपनी स्किन को रंगों से बचाने का सबसे असरदार और आसान तरीका है की आपकी बॉडी को मॉइस्चराइज करने से पहले थोडा ऑइलिंग कर लें। ये थोडा चिपचिपा हो सकता है लेकिन आपकी त्वचा को बचाने का सबसे बेहतरीन उपाय है। होली खेलने से पहले नहाना न भूलें।

और नहाने के तुरंत बाद गीले शरीर में ही सरसों का तेल या नारियल का तेल लगा लें। ऐसा करने से आयल पूरी तरह बॉडी में absorb हो जाएगा। और आपको चिपचिपेपन का एहसास भी नहीं होगा। तेल लगाने के बाद हमेशा की तरह मॉइस्चराइजर लगाना न भूलें। ये आपकी त्वचा को रंगों के हानिकारक प्रभाव से बचाने में मदद करेगा।

बालों में शैम्पू :

होली खेलने के दौरान आपके बालों में बहुत से रंग भर जाते है जिन्हें बाद में हटाना काफी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में आपके लिए यही बेहतर होगा की होली के एक दिन पहले की शाम या होली खेलने के पहले अपने बालों की देखभाल करने के लिए कुछ करें। कुछ लोग सोचते है की जब बालों को गंदा होना ही है तो उनमे शैम्पू करने का कोई फायदा नहीं है। जबकि ऐसा बिलकुल भी नहीं है, क्योंकि बालों में पड़ी गंदगी और कलर मिलकर आपके बालों को कमजोर कर सकते है।

साथ ही कलर में मिले रासयन आपके बालाओं को डैमेज भी कर सकते है। इसके लिए सबसे पहले बालाओं को अच्छे से धो लें। बाल धोने के लिए शैम्पू की मदद जरुर लें। इसके बाद उन्होंने कंडीशनिंग भी करें। बालों के पूरी तरह सुख जाने के बाद उनमे ओलिव आयल या नारियल का तेल जरुर लगायें। इससे कलर आपके बालों की जड़ों तक नहीं पहुंचेगा और आपकी स्कैल्प को पूरा पोषण भी मिल जाएगा।

नाखूनों के लिए :

होली खेलने पर सबसे बुरा प्रभाव हमारे नाखूनों पर ही पड़ता है। क्योंकि होली खेलने पर हमारे नाखूनों पर रंग लग जाता है जो लाभ कोशिशों के बाद भी नहीं जाता। साथ ही ये रंग लगे नाख़ून दिखने में भी भद्दे लगते है। साथ ही हमारे हाथों की खूबसूरती में भी ग्रहण लगते है। इससे बचने के लिए बेहतर होगा की होली खेलने से पहले ही इनक सुरक्षा के लिए कुछ किया जाए।

इसके लिए ट्रांसपेरेंट नेल पेंट का सहारा ले सकते है। सबसे पहले अपने हाथ और पैर अच्छे से धो लें। उसके बाद हाथ और पैर के नाखूनों पर ट्रांसपेरेंट नेल पेंट लगायें। और आराम से होली खेले। होली खेलने के बाद जब आप नेल पेंट रिमोवर से नेल पेंट हटायेंगे तो आपके नाख़ून पहले की तरह सुन्दर और खुबसुरत बने रहेंगे।

अच्छे कपडे पहने :

खुद को रंगों से बचाने का सबसे अच्छा तरीका यही है अपने आप को पूरी तरह कवर करके ही होली खेलें। हमारे कहने के मतलब है की शार्ट ड्रेसेस के बजाय फूल स्लीव के कपडे पहने। ये आपकी त्वचा पर रंग नहीं लगने देंगे। इसके लिए आप फुल जीन्स, फुल स्लीव टी-शर्ट और बंद गले के कुर्तो का चयन कर सकते है।

लंबे बाल वाली लड़कियां इस बात का ध्यान रखे की उनके बालों में अधिक रंग न लगे। इसके लिए आप अपने बालों को गुंथकर रखे साथ ही उनमे deep ओइलिंग भी करें। छोटे बाल वाली लड़कियां कैप पहनकर होली खेल सकती है। अगर आपका जुड़ा बन सकता है तो वो और भी बेहतर होगा।

डैमेज कंट्रोल टिप्स :-

ये तो थी, होली से पहले करने वाली कुछ प्रीपरेशंस जिन्हें करके आप खुद को होली के रंगों के प्रभाव से बचा सकते है। लेकिन होली के बाद होने वाले बॉडी डैमेज से बच पाना थोडा मुश्किल है। इसीलिए नीचे हम आपको कुछ टिप्स देने जा रहे है, जिनकी मदद से होली के बाद होने वाली थकान और बॉडी डैमेज से बचा जा सकता है।

घरेलू उत्पाद :holi

त्वचा को बेहतर करने के लिए चने का आटा, शहद और दूध को मिलाकर एक स्क्रब तैयार कर लें और इससे अपनी बॉडी और फेस पर स्क्रब करें। ये आपके शरीर पर मौजूद कलर को आसानी से हटाने में मदद करेगा। साथ ही आपकी त्वचा मुलायम और चमकदार भी होगी। त्वचा को नमी देने के लिए मॉइस्चराइजिंग से पहले फ्रेश एलोवेरा जूस का इस्तेमाल करें।

बालों के लिए :

होली के तुरंत बाद ही अपने बालों में deep कंडीशनिंग कर लें। अगर आपके पास समय नहीं है तो आप इसे दुसरे दिन भी कर सकते है। लेकिन एक बार ऐसा जरुर करें। ये रंगों के द्वारा बालों को होने वाले नुकसान से बचाता है। इसके लिए दो बड़े चम्मच शहद में दो अंडे और एक बड़े चम्मच नारियल का तेल मिला लें। अच्छे से मिलाने के बाद बालों में लगा और कम से कम 1 घंटा लगे रहने दे। उसके बाद माइल्ड शैम्पू और एक अच्छे कंडीशनर से बाल धो लें। इससे आपके बाल खुबसुरत तो होंगे ही साथ-साथ उनको पोषण भी मिलेगा।

वजन बढ़ाने के तरीके

वजन में कमी की समस्या

आपने बहुत से लोगो के मुँह से सुना होगा की मेरा वजन बढ़ गया है, और इसे कम करने के लिए वह कौन कौन से तरीको का इस्तेमाल करती है। लेकिन क्या आप जानते हैं की जिस तरह कुछ लोग वजन के बढ़ने की समस्या से परेशान होते हैं उसी तरह कुछ लोग वजन में कमी की समस्या के कारण भी परेशान रहते हैं। और जरुरत से ज्यादा वजन का कम होना कई बार आपको हास्य का विषय भी बना सकता है, जैसे की कपड़ो की फिटिंग न आने पर आपको लोग हेंगर कहकर चिढ़ा सकते हैं तो कई लोग इसे कुपोषण का शिकार भी बोल सकते हैं। ऐसे में वजन की कमी की समस्या को दूर करने के लिए आपको अपने खान पान, अपने लाइफस्टाइल में थोड़ा बदलाव लाना चाहिए जिससे आपको फिट रहने में मदद मिल सके।

वजन बढ़ाने के लिए अपनाएँ यह टिप्स

जिस तरह वजन घटाने के लिए आपको अपनी दिनचर्या, अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखना पड़ता है। उसी तरह वजन बढ़ाने के लिए भी इन चीजों का ध्यान रखना बहुत जरुरी होता है, तो लीजिये अब विस्तार से जानते हैं की वजन बढ़ाने के लिए आप कौन कौन से टिप्स का इस्तेमाल कर सकती है।

खान पान का ध्यान रखें

वजन बढ़ाने के लिए सबसे जरुरी है खान पान क्योंकि कई बार शरीर के विकास के लिए जरुरी पोषक तत्व न मिलने के कारण शरीर कमजोर हो सकता है, जिसके कारण दुबलेपन की समस्या हो सकती है। ऐसे में वजन बढ़ाने के लिए पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन दिन में पांच से छह बार करना चाहिए, और ऐसी चीजों का सेवन करना चाहिए जिससे आपका वजन बढ़ने में मदद मिल सके, जैसे की हरी पत्तेदार सब्जियां, आलू, केला, बीन्स, अनार, ड्राई फ्रूट, चावल, फलियां, आदि। यह सभी चीजें वजन को तेजी से बढ़ाने में मदद करती है। लेकिन इस बात का ध्यान रखें की थोड़ा थोड़ा करके की खाएं क्योंकि एक दम से अधिक भोजन का सेवन करने से पाचन क्रिया से जुडी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

प्रोटीन और कैल्शियम

मांसपेशियों और हड्डियों के विकास के लिए बॉडी में भरपूर मात्रा में प्रोटीन और कैल्शियम का होना बहुत जरुरी होता है, यदि आप शरीर में प्रोटीन और कैल्शियम की मात्रा को भरपूर बनाएं रखते हैं तो इससे भी वजन को तेजी से बढ़ाने में मदद मिलती है। इसके लिए आप अंडे, पनीर, दूध व् दूध से बनी चीजें, सोया, दालें, बीन्स, हरी सब्जियों, मछली, चिकन आदि का भरपूर सेवन कर सकते हैं।

व्यायाम

ध्यान रखें की वजन को बढ़ाने के लिए व्यायाम करना भी बहुत जरुरी होता है, क्योंकि व्यायाम करने से मांसपेशियों को मजबूती मिलती है, बॉडी में ब्लड फ्लो बेहतर तरीके से होता हैं, हड्डियों को फिट रहने में मदद मिलती है, आदि। लेकिन जितना शारीरिक श्रम करें उतना ही बॉडी को पोषक तत्व भी दे, जैसे की व्यायाम करने के बाद प्रोटीन शेक, बनाना शेक, दूध आदि का सेवन करें। और साथ ही वजन बढ़ाने के लिए व्यायाम करने के लिए आप चाहे तो किसी जिम ट्रेनर की राय भी ले सकते है।

पर्याप्त मात्रा में नींद

जिस तरह खाना, व्यायाम करना जरुरी है उसी तरह से भरपूर नींद लेना भी बहुत जरुरी है, ताकि आपके शरीर को आराम मिलें, और आपका खाया हुआ आपके शरीर को लग सके। और इसके लिए दिन में कम से कम आठ घंटे की नींद लेना बहुत जरुरी होता है। इसीलिए खान पान के साथ नींद में भी किसी तरह की लापरवाही न बरतें।

दूध और केला

वजन बढ़ाने के लिए नियमित कम से कम दो केले का सेवन जरूर करना चाहिए। क्योंकि केले का सेवन करने से न केवल शरीर को ऊर्जा मिलती है, बल्कि इससे बॉडी को कैलोरी मिलती है जो वजन बढ़ाने में मदद करती है। आप चाहे तो केले का सेवन दूध के साथ कर सकते हैं, क्योंकि इससे इसका फायदा जल्दी दिखाई देता है। इसके अलावा दिन में दो से तीन गिलास दूध का सेवन करना भी वजन बढ़ाने में मदद करता है। साथ ही दूध में आप फलों या ड्राई फ्रूट्स को मिलकर उसका सेवन भी कर सकती है इससे भी बॉडी को एनर्जी मिलती है जिससे दुबलेपन से निजात मिलने में मदद मिल सकती है।

डार्क चॉकलेट

डार्क चॉकलेट खासकर जिसमे कोकोआ की मात्रा अधिक होती है उसका सेवन करने से भी आपको वजन बढ़ाने में मदद मिलती है। क्योंकि इसमें मौजूद कैलोरी बॉडी को फिट रखने के साथ वजन को बढ़ाने में मदद करती है। इसीलिए आप चाहे तो दिन में एक या दो बार थोड़ा थोड़ा डार्क चॉकलेट का सेवन भी कर सकते हैं।

अंडे

अंडे में कैलोरी, फैट, प्रोटीन आदि भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो की मांसपेशियों को मजबूत करने के साथ, बॉडी को ऊर्जा से भरपूर रखने और वसा की मात्रा को बॉडी में भरपूर रखने में मदद करता है जिससे वजन को आसानी से बढ़ाने में मदद मिलती है। इसीलिए आप चाहे तो अंडे को भी अपनी डाइट में शामिल कर सकते है।

दही

पोषक तत्वों से भरपूर दही का सेवन करने से भी वजन को बढ़ाने में मदद मिलती है, क्योंकि दही में भी फैट, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन आदि भरपूर मात्रा में होते हैं। इसीलिए दिन में एक कटोरी दही का सेवन वजन को बढ़ाने के लिए जरूर करना चाहिए। इसके अलावा दही का इस्तेमाल आप अपने खाने वाली चीजों में करने के साथ, दही में फल, ड्राई फ्रूट्स आदि डालकर भी इसका सेवन कर सकते हैं।

नॉन वेज

रेड मीट, चिकन, मछली, आदि में भी फैट, आयरन व् अन्य पोषक तत्वों की मात्रा भरपूर होती है। जो तेजी से वजन को बढ़ाने में मददगार साबित होते हैं। ऐसे में यदि आप नॉन वेज का सेवन करते हैं तो आपको भी अपनी डाइट में नॉन वेज को शामिल करना चाहिए ताकि आपको तेजी से वजन बढ़ाने में मदद मिल सके।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिन्हे नियमित करने से आपको अपने वजन को बढ़ाने में मदद मिलती है। और एक बार आपको वजन कम होने के बारे में किसी डॉक्टर से भी जरूर जांच करवानी चाहिए, क्योंकि बार शरीर में किसी शारीरिक के होने के कारण वजन में कमी की समस्या का सामना आपको करना पड़ सकता है। एक बात का और ध्यान रखें एक दम से वजन को भी न बढ़ाएं क्योंकि इसके कारण भी परेशानी हो सकती है, साथ ही जो भी वजन बढ़ाने के लिए खाएं या करें वो जरुरत के अनुसार ही करें क्योंकि आवश्यकता से अधिक कोई भी चीज आपको नुकसान पहुंचा सकती है।

गर्भावस्था में ऐसे सम्बन्ध बनाएंगे तो शिशु को बहुत नुकसान होगा

प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध बनाना चाहिए या नहीं इसे लेकर कपल बहुत परेशान रहते हैं। और इस बारे में अक्सर देखा जाता है की गर्भवती महिला और पुरुष दोनों डॉक्टर से पूछते हुए भी हिचकिचाते हैं। लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान आपको शर्म या हिचकिचाहट न रखते हुए डॉक्टर से खुलकर बात करनी चाहिए। क्योंकि यदि महिला को कोई दिक्कत है और आप सम्बन्ध बनाते हैं तो इसे महिला के साथ गर्भ में शिशु को भी दिक्कत हो सकती है। और यदि महिला स्वस्थ है महिला को कोई दिक्कत नहीं है तो आप बिना किसी परेशानी के सम्बन्ध बना भी सकते हैं। लेकिन सम्बन्ध बनाते समय महिला की शारीरिक स्थिति, महिला की मर्ज़ी, डॉक्टर की राय, सही तरीका, पूरी सावधानी का ध्यान रखना जरुरी होता है। ताकि सम्बन्ध बनाने के कारण महिला या शिशु को कोई दिक्कत न हो।

प्रेगनेंसी में किस तरह सम्बन्ध बनाने से शिशु को दिक्कत हो सकती है

गर्भवती महिला यदि अपने पार्टनर के साथ सम्बन्ध बनाती है तो महिला और उनके पार्टनर को बहुत सी बातों का ध्यान रखना जरुरी होता है। क्योंकि यदि आप गलत तरीके से एक दूसरे के करीब आते हैं तो इसका असर गर्भ में पल रहे शिशु पर भी पड़ सकता है। तो आइये अब जानते हैं की गर्भावस्था में किस तरह सम्बन्ध बनाने से शिशु को नुकसान हो सकता है।

ब्लीडिंग

यदि प्रेगनेंसी के दौरान महिला को ब्लीडिंग की समस्या हैं और आप महिला को इस परेशानी के होने के बाद भी सम्बन्ध बना रहे हैं। तो इसके कारण ब्लीडिंग का खतरा बढ़ सकता है, जिसकी वजह से प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में गर्भपात जैसा खतरा हो सकता है।

प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स

गर्भावस्था के दौरान यदि गर्भवती महिला को परेशानियां है और डॉक्टर ने भी महिला को रेस्ट की सलाह दी है, और ऐसे में यदि आप महिला के साथ सम्बन्ध बनाने की सोच रहे हैं तो आपको ऐसा नहीं करना करना चाहिए। क्योंकि प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स होने के बाद भी यदि आप सम्बन्ध बनाते हैं तो इससे महिला की दिक्कत ही नहीं बढ़ सकती है बल्कि गर्भ में शिशु को भी नुकसान पहुँच सकता है।

पेट पर दबाव

प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध बनाते समय महिला और पुरुष को इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए की महिला के पेट पर दबाव न पड़े। क्योंकि यदि महिला के पेट पर दबाव पड़ता है तो इसके कारण गर्भ में शिशु असहज महसूस कर सकता है।

तेजी

यदि गर्भवती महिला और उनका पार्टनर सम्बन्ध बनाना चाहते हैं तो उन्हें एक बात का खास ध्यान रखना चाहिए की जोश में होश न खोएं। और धैर्य रखें, क्योंकि यदि सम्बन्ध बनाते समय थोड़ी सी भी तेजी की जाती है तो इसके कारण गर्भाशय पर चोट लगने का खतरा रहता है, जिसके कारण गर्भ में शिशु को असहज महसूस हो सकता है।

इन्फेक्शन

यदि महिला या पुरुष दोनों में से कोई भी प्राइवेट पार्ट के इन्फेक्शन की समस्या से परेशान हैं, तो भी प्रेग्नेंट महिला को सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए। क्योंकि इन्फेक्शन का असर गर्भ में पल रहे शिशु तक भी पहुँच सकता है जिसके कारण शिशु को गर्भ में खतरा हो सकता है।

सुरक्षा

प्रेग्नेंट महिला और उनके पार्टनर को सम्बन्ध बनाते समय सुरक्षा का इस्तेमाल भी जरूर करना चाहिए। क्योंकि महिला और पुरुष यदि सम्बन्ध बनाते हैं और सुरक्षा का इस्तेमाल नहीं करते हैं तो इसके कारण भी इन्फेक्शन का खतरा रहता है जिसके कारण गर्भ में पल रहे शिशु को परेशानी हो सकती है।

गलत तरीके

प्रेगनेंसी एक ऐसा समय होता है जहां छोटी से छोटी बात का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए क्योंकि महिला द्वारा बरती गई थोड़ी सी लापरवाही गर्भवती महिला और शिशु दोनों को नुकसान पहुंचा सकती है। ऐसे में सम्बन्ध बनाते समय किसी भी गलत तरीके या कोई नया एक्सपेरिमेंट नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे महिला ही नहीं शिशु भी प्रभावित हो सकता है।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिनका ध्यान प्रेग्नेंट महिला और उनके पार्टनर को सम्बन्ध बनाते समय रखना चाहिए। क्योंकि यदि ऐसी कोई भी गलती यदि उनके द्वारा की जाती है तो इससे शिशु को नुकसान पहुँच सकता है। साथ ही सम्बन्ध बनाने से पहले आपको एक बार डॉक्टर से भी जरूर राय लेनी चाहिए की प्रेगनेंसी के किस महीने में सम्बन्ध बनाना सही होता है और साथ ही आपको महिला की शारीरिक स्थिति के बारे में भी अच्छे से जानने में मदद मिल सके।

मिसकैरिज रिस्क को कैसे कम करें? जानिए

मिसकैरिज रिस्क, माँ बनना किसी भी महिला के लिए उसकी जिंदगी का सबसे बेहतरीन अहसास होता है। लेकिन उतना ही दुखद अहसास तब होता है जब महिला बच्चे को जन्म देना चाहती है। और किसी कारण महिला का गर्भपात हो जाता है। बहुत सी महिलाओं को इस सदमे से उभरने में बहुत समय लग जाता है। और ऐसा भी जरुरी नहीं होता है की हर महिला का गर्भपात होने का एक ही कारण हो। बल्कि मिसकैरिज होने के भी कई कारण हो सकते हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की मिसकैरिज होने के क्या कारण होते हैं? और किस तरह से महिला मिसकैरिज के रिस्क को प्रेगनेंसी के दौरान कम कर सकती है।

मिसकैरिज क्या होता है?

जब गर्भ में 20 हफ्ते पूरे होने से पहले ही गर्भ में शिशु ख़त्म हो जाए। तो उसे गर्भपात कहते हैं। कुछ महिलाओं को गर्भपात अपने आप ही हो जाता है। तो कुछ महिलाएं जिनका अनचाहा गर्भ होता है वो गर्भपात करवा देती है।

मिसकैरिज होने के कारण

  • बॉडी में हार्मोनल अंसतुलन होना।
  • महिला का मैसक रूप से बहुत अधिक परेशान रहना।
  • शारीरिक रूप से महिला का बहुत कमजोर होना।
  • गर्भाशय से जुडी कोई समस्या होना।
  • शुगर, थायरॉयड जैसी समस्या से महिला ग्रसित होना।
  • इम्युनिटी कमजोर होना।
  • महिला को किस तरह का गर्भ से जुड़ा संक्रमण होने के कारण ऐसा हो सकता है।
  • बहुत अधिक धूम्रपान, कैफीन, नशीले पदार्थों का सेवन करने के कारण।
  • महिला द्वारा बरती गई लापरवाही भी गर्भपात का कारण हो सकती है।
  • बढ़ती उम्र में गर्भधारण करने से भी मिसकैरिज होने के चांस अधिक होते हैं।

गर्भपात के लक्षण

  • महिला को पीरियड्स की तरफ ब्लीडिंग शुरू हो जाती है।
  • पेट या पीठ में असहनीय दर्द शुरू हो जाता है।
  • पेट के निचले हिस्से में ऐंठन का अधिक महसूस होना भी गर्भपात का लक्षण होता है।

मिसकैरिज रिस्क से बचने के उपाय

यदि आप गर्भधारण करना चाहती हैं और चाहती है की आपकी प्रेगनेंसी में किसी भी तरह की समस्या न आए। और मिसकैरिज जैसी परेशानी भी न हो। तो इस समस्या से बचाव के लिए महिला को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की मिसकैरिज से बचने के लिए महिला को क्या क्या करना चाहिए।

मिसकैरिज रिस्क को कम करने के लिए जांच करवाएं

  • सबसे पहले महिला को अपने शरीर की अच्छे से जांच करवानी चाहिए।
  • जैसे की कोई शारीरिक बिमारी तो नहीं है, गर्भाशय से जुडी कोई समस्या तो नहीं है, किसी तरह का संक्रमण तो नहीं है, आदि।
  • यदि इनमे से कोई समस्या है तो उसका इलाज करवाए और उसके बाद प्रेगनेंसी का फैसला लें।
  • ताकि गर्भपात जैसी परेशानी से बचाव होने में मदद मिल सके।

लापरवाही से बचे

  • यदि आपके पीरियड मिस हो गए हैं और प्रेगनेंसी की जाँच करवाने पर परिणाम पॉजिटिव आता है।
  • तो जितना हो सके आपको भरपूर आराम करना चाहिए।
  • किसी भी तरह की लापरवाही से बचना चाहिए।
  • क्योंकि महिला द्वारा बरती गई लापरवाही जैसे की भारी सामान उठाना, यात्रा करना, भागादौड़ी अधिक करना, खाने में लापरवाही, आदि गर्भपात का कारण हो सकती है।

फिट रहें और उम्र का ध्यान रखें

  • वजन में कमी और अधिक उम्र में गर्भधारण यह दोनों कारण मिसकैरिज का कारण हो सकते हैं।
  • ऐसे में यदि आपका गर्भधारण करना चाहते हैं तो वजन को सही करने के साथ सही उम्र में माँ बनने का फैसला लेना चाहिए।

मिसकैरिज रिस्क को कम करने के लिए न लें तनाव

  • केवल शारीरिक स्वस्थता ही माँ बनने के लिए काफी नहीं है।
  • बल्कि माँ बनने के लिए महिला को मानसिक रूप से भी स्वस्थ होना चाहिए।
  • क्योंकि महिला यदि तनाव लेती है, हमेशा छोटी छोटी बातों को लेकर परेशान हो जाती है।
  • तो महिला द्वारा ऐसी हरकतें गर्भ पर नकारात्मक असर डालती है।
  • ऐसे में यदि आप चाहती है की आपको मिसकैरिज जैसी समस्या न हो तो इससे बचाव के लिए आपको तनाव लेने से बचना चाहिए।

प्राइवेट पार्ट की सफाई

  • कुछ महिलाओं के गर्भपात का कारण प्राइवेट पार्ट में संक्रमण का होना भी हो सकता है।
  • ऐसे में यदि आप चाहती है की आपको मिसकैरिज जैसी समस्या न हो तो प्रेगनेंसी के दौरान प्राइवेट पार्ट की साफ़ सफाई का ध्यान रखें।

मिसकैरिज रिस्क को कम करने रखें नशे से दूरी

  • यदि कोई महिला किसी भी तरह के नशे का सेवन करती है तो इसके कारण भी महिला को गर्भपात जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
  • ऐसे में मिसकैरिज से बचाव के लिए जरुरी होता है की महिला किसी भी तरह के नशे का सेवन नहीं करें।

थोड़ा रुकें

  • यदि आपका पहले भी गर्भपात हो चूका है तो दोबारा गर्भधारण करने के लिए थोड़ा इंतज़ार करना चाहिए।
  • क्योंकि बहुत जल्दी जल्दी गर्भधारण करने के कारण भी मिसकैरिज का रिस्क बढ़ जाता है।

तो यह हैं मिसकैरिज के कारण व् उनसे बचने के कुछ आसान तरीके। और यदि प्रेग्नेंट महिला पूरी केयर के साथ प्रेगनेंसी के दौरान अपना ध्यान रखती है। हर छोटी से छोटी बात में पूरी सतर्कता बरतती है। तो प्रेग्नेंट महिला को इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी में क्या दिनचर्या होनी चाहिए

प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में बहुत से बदलाव आते है, और यह बदलाव केवल शारीरिक रूप से ही नहीं मानसिक रूप से भी आते है। ऐसे में महिला के गर्भवती होने पर उसे अपना दुगुना ध्यान रखना पड़ता है। ताकि प्रेग्नेंट महिला को और उसके गर्भ में पल रहे शिशु को स्वस्थ रहने में और उसका विकास भी अच्छे से होने में मदद मिल सके। और इसके लिए जरुरी है की प्रेगनेंसी के दौरान महिला की दिनचर्या सही होनी चाहिए। जैसे की महिला को अपने सोने और खाने के समय का ध्यान रखना चाहिए, व्यायाम कब करना चाहिए, आदि।

पूरे नौ महीने महिला को कोई न कोई परेशानी लगी रहती है, ऐसे में कई महिलाएं परेशान हो जाती है। जिसकी वजह से वो तनाव में भी आ सकती है, लेकिन महिला को जितना हो सके प्रेगनेंसी के समय खुश रहने की कोशिश करनी चाहिए। ऐसा करने से बच्चे के विकास में मदद मिलने के साथ महिला भी स्वस्थ रहती है। क्या आप भी प्रेग्नेंट हैं? तो आपके लिए बहुत जरुरी है की प्रेगनेंसी के दौरान आप अपनी दिनचर्या का अच्छे से ध्यान रखें, तो आइये आज हम आपको बताते है की प्रेगनेंसी के दौरान आपकी दिनचर्या कैसी होनी चाहिए।

प्रेगनेंसी में दिनचर्या को सही रखने के कुछ टिप्स:-

सुबह समय से उठे और सैर करें:-

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को सुबह समय से उठना चाहिए, और सैर करनी चाहिए। ऐसा करने से महिला को प्राकृतिक द्वारा फ्रेश ऑक्सीजन मिलती है, साथ ही महिला का मन शांत रहता है। और इससे महिला का शरीर भी फिट रहता है, और इसे महिला को और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों को ही फायदा मिलता है। शुरुआत में महिला को प्रेगनेंसी में सुबह उठते समय परेशानी हो सकती है लेकिन फिर भी आपको धीरे धीरे इसे अपने रूटीन में शामिल करना चाहिए।

दांत और मुँह की सफाई:-

सुबह सैर पर जाने से पहले या आने के बाद महिला को अपने मुँह और दांतो की सफाई अच्छे से करनी चाहिए। क्योंकि मुँह में जमा हुआ बैड बैक्टेरिया यदि आपके शरीर में जाता है तो इसके कारण शरीर पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में महिला को प्रेगनेंसी के दौरान अपने मुँह और दांतो की साफ सफाई का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए।

डाइट पर ध्यान दें:-

स्वस्थ शिशु को जन्म देने के लिए जरुरी है की महिला भी स्वस्थ हो। और इसके लिए महिला को अपनी डाइट का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। महिला को हर दो से तीन घंटे में कुछ न कुछ खाते रहना चाहिए। क्योंकि गर्भ में पल रहा शिशु भी महिला के भोजन से ही अपना विकास करता है। इसके लिए महिला को भरपूर मात्रा में मिनरल्स जैसे की आयरन, फोलिक एसिड, कैल्शियम और विटामिन आदि लेना चाहिए।

हल्का फुल्का व्यायाम और योगासन करें:-

प्रेगनेंसी के दौरान जितना आराम जरुरी होता है, उतना ही महिला को थोड़ा बहुत व्यायाम भी करना चाहिए। लेकिन व्यायाम न तो ज्यादा कड़ा करना चाहिए और न ही ऐसा व्यायाम करना चाहिए जिससे आपको परेशानी हो। हल्का फुल्का व्यायाम इसीलिए करना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से आपके शरीर में ब्लड फ्लो अच्छे से होता है साथ ही आपकी बॉडी को भी फिट रहने में मदद मिलती है।

पानी भरपूर पीए:-

पानी का सेवन वैसे भी दिन में कम से कम आठ से दस गिलास करना चाहिए। इससे आपके शरीर को ऊर्जा मिलती है साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में पानी की कमी को पूरा करने में भी मदद मिलती है। पानी के भरपूर सेवन से आपको प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली परेशानियों से बचाव करने में भी फायदा मिलता है। पानी के अलावा आपको घर में बनाएं ताजे जूस का भी सेवन करना चाहिए।

कैफीन और नशीले पदार्थो से बचें:-

कई महिलाओ की आदत होती है की उन्हें चाय पीने का या कॉफ़ी पीने का बहुत शौक होता है। ऐसे में महिलाओ को अपनी इस आदत कोछोड देना चाहिए, क्योंकि यदि महिला प्रेगनेंसी के दौरान किसी भी तरह नशे का या अधिक मात्रा में कैफीन का सेवन करती है तो इसके कारण महिला और गर्भ में पल रहे शिशु के विकास पर भी बुरा असर पड़ता है। इसीलिए महिला को जितना हो प्रेगनेंसी के दौरान इन चीजों से परहेज करना चाहिए।

फोलिक एसिड व् अन्य मिनरल्स लें:-

कई महिलाओ को प्रेगनेंसी के दौरान आयरन की कमी की समस्या हो जाती है। ऐसे में महिलाओ को प्रेगनेंसी की शुरुआत से ही प्रतिदिन फोलिक एसिड और विटामिन व् ने मिनरल्स का भरपूर सेवन करना चाहिए। क्योंकि यह मिनरल्स केवल प्रेग्नेंट महिला के लिए ही नहीं बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी फायदेमंद होते है। और इसे शिशु का विकास भी अच्छे से होने में मदद मिलती है, साथ ही शिशु के शारीरिक विकास के साथ मानसिक विकास भी अच्छे से होता है। साथ ही इससे महिला यदि आयरन का भरपूर सेवन करती है तो इससे महिला में खून की कमी को भी पूरा किया जा सकता है।

नींद भरपूर लें:-

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपनी नींद का भी अच्छे से ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि शरीर में हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण महिला का शरीर काफी कमजोर हो जाता है, और थकावट बहुत जल्दी होती है। ऐसे में महिला को नींद भरपूर लेनी चाहिए और यदि आपको ऐसा लगता है की रत को सोने से आपकी नींद पूरी नहीं हुई है तो आपको दिन में सो जाना चाहिए। इससे आपको फ्रेश महसूस होता है।

डॉक्टर से जांच:-

प्रेगनेंसी की शुरुआत में जैसे ही अआप अपने लिए एक डॉक्टर का चुनाव करते है, तो ऐसे में यदि आपके लिए वो डॉक्टर ठीक है तो उसे बदलना नहीं चाहिए। साथ ही जितनी भी जांच और टेस्ट आपको करवाने होते है उन्हें नियमित करवाएं। अल्ट्रासाउंड को समय से करवाएं, और यदि किसी भी समय आपको असहज महसूस होता है तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इसके अलावा डिलीवरी का समय पास आने पर आपको डॉक्टर के पास जाते रहना चाहिए।

प्रेगनेंसी के दौरान इन बातों का भी रखें खास ध्यान:-

  • महिला को मानसिक तनाव नहीं लेना चाहिए बल्कि खुश रहने की कोशिश करनी चाहिए।
  • डॉक्टर से नियमित जांच जरूर करवानी चाहिए, और उनके द्वारा दी गई दवाइयों का सेवन जरूर करना चाहिए।
  • महिला को यात्रा नहीं करनी चाहिए, ज्यादा भागदौड़ से बचना चाहिए।
  • झुककर या पेट के बल किसी भी काम को नहीं करना चाहिए इससे आपको परेशानी का अनुभव हो सकता है।
  • खान पान का ध्यान रखना चाहिए, मिनरल्स भरपूर लेने चाहिए।
  • कच्चे मीट या अधपके मीट का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • महिला को सीधा होकर नहीं सोना चाहिए बल्कि करवट लेकर सोना चाहिए।
  • महिला को प्रेगनेंसी के आखिरी महीनो में सूजन भी हो जाती है लेकिन यदि यह ज्यादा हो तो तुरत डॉक्टर से राय लेनी चाहिए।
  • साफ़ सफाई का भी ध्यान रखना चाहिए, चाहे वो खाने को लेकर हो या महिला के शरीर की सफाई हो।
  • पपीते, कटहल, इलायची, या ने चीजे जिनकी तासीर अधिक गर्म होती है, उनका सेवन नहीं करना चाहिए।
  • महिला को तनाव नहीं लेना चाहिए, बल्कि प्रेगनेंसी के दौरान खुश रहना चाहिए इससे महिला और शिशु का विकास बेहतर तरीके से होने में मदद मिलती है।
  • प्रेगनेंसी के दौरान कोई भी ऐसा काम नहीं करना चाहिए जिससे आपको परेशानी हो, और साथ ही यदि कोई भी परेशानी हो तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
  • प्रेगनेंसी के दौरान यदि आखिरी महीनो में कभी भी आपको ऐसा महसूस हो की बच्चा मूवमेंट नहीं कर रहा है, और काफी समय हो गया है तो आपको तुरंत डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

तो यह है कुछ टिप्स जिनका ध्यान आपको प्रेगनेंसी के दौरान रखना चाहिए। इसके अलावा आपको प्रेगनेंसी की शुरुआत में एक और बात का खास ध्यान रखना चाहिए की आप अपने लिए एक अच्छे डॉक्टर का चुनाव करें। ताकि प्रेगनेंसी की शुरुआत से ही आपका इलाज सही हो सके। और इसके साथ महिला को ऊपर दिए गए टिप्स का भी खास ध्यान रखना चाहिए। ऐसा करने से प्रेग्नेंट महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों को ही स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।