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दूसरी बार माँ बनने पर शरीर में क्या लक्षण महसूस होते हैं?

प्रेगनेंसी किसी भी महिला के लिए उसकी जिंदगी का सबसे बेहतरीन अनुभव होता है लेकिन साथ ही इस दौरान महिला को कई परेशानियों का सामना भी करना पड़ता है। ऐसे में जब कोई भी महिला दूसरी बार माँ बनने के बारे में सोचती है तो उसकी पहली प्रेगनेंसी का एक्सपीरियंस जरूर उसके सामने आता है। लेकिन ऐसा जरुरी नहीं होता है की जैसा आपके साथ पहली प्रेगनेंसी में हुआ है वैसा ही दूसरी प्रेगनेंसी में भी हो।

जो लक्षण या बदलाव आपको पहली प्रेगनेंसी में महसूस हुए थे वो दूसरी प्रेगनेंसी में भी महसूस हो। बल्कि ऐसा भी हो सकता है की आपकी दोनों प्रेगनेंसी का एक्सपीरियंस बिल्कुल अलग हो या फिर कुछ लक्षण दोनों प्रेगनेंसी में ही मिलते जुलते हो। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको दूसरी बार माँ बनने पर शरीर में क्या लक्षण महसूस होते हैं और किस तरह दूसरी प्रेगनेंसी पहली प्रेगनेंसी से अलग होती है इस बारे में बताने जा रहे हैं।

डर और तनाव होता है कम

पहली प्रेगनेंसी के दौरान महिला को हर छोटी से छोटी बात को लेकर डर व् तनाव महसूस होता है जबकि दूसरी प्रेगनेंसी में महिला का यह डर और तनाव कम हो जाता है।

पेट जल्दी दिखाई देता है

दूसरी प्रेगनेंसी के दौरान महिला का पेट पहली प्रेगनेंसी की अपेक्षा जल्दी दिखाई देता है। और इसका कारण पहली प्रेगनेंसी होने पर महिला की पेट की मांसपेशियों में कमजोरी आना होता है।

वजन ज्यादा बढ़ता है

दूसरी प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला का वजन भी पहले की अपेक्षा ज्यादा तेजी से बढ़ता है क्योंकि पहली प्रेगनेंसी के बाद महिला की बॉडी में बहुत बदलाव आ जाता है।

दर्द

यदि आपने दूसरी बार गर्भधारण किया है तो आपको जोड़ो में दर्द, पीठ में दर्द आदि की समस्या पहली प्रेगनेंसी के दौरान अधिक होता है। इसका कारण पहली प्रेगनेंसी के दौरान मांसपेशियों में आई कमजोरी होती है।

ब्रेस्ट में बदलाव

दूसरी प्रेगनेंसी में महिला को ब्रेस्ट में ज्यादा दर्द, ब्रेस्ट के आकर के ज्यादा बढ़ने, ब्रेस्ट के अगले हिस्से का रंग ज्यादा गहरा होने जैसे लक्षण महसूस होते हैं। इसका कारण पहली प्रेगनेंसी के बाद शिशु को स्तनपान करवाने के कारण ब्रेस्ट में आया ढीलापन होता है।

शिशु की मूवमेंट

पहली प्रेगनेंसी के दौरान शिशु की हलचल को समझने में आपको थोड़ा समय लग सकता है जबकि दूसरी प्रेगनेंसी के दौरान आपको शिशु की हलचल का बहुत आराम से पता चल जाता है। और आपको यह भी समझ आ जाता है की कब शिशु की हलचल ज्यादा होती है और कब शिशु कम हलचल करता है।

थकान

पहली प्रेगनेंसी में आपका ध्यान सभी रखते हैं लेकिन दूसरी प्रेगनेंसी में आपको अपने पहले बच्चे का भी ध्यान रखना पड़ता है। और यदि आपका बच्चा अभी ज्यादा छोटा है तो आपको ज्यादा दिक्कत हो सकती है। ऐसे में आपको पहली प्रेगनेंसी के मुबाबले ज्यादा थकान व् कमजोरी का अनुभव होता है।

डिलीवरी में लगता है कम समय

पहली डिलीवरी के समय प्राइवेट पार्ट की मांसपेशियों के टाइट होने के कारण और बच्चेदानी के मुँह कम खुलने के कारण आपको डिलीवरी में ज्यादा समय लगता है। जबकि दूसरी बार बच्चेदानी का मुँह खुलने में ज्यादा समय नहीं लगता है क्योंकि मांसपेशियां उतनी टाइट नहीं होती है।

प्रसव के बाद शिशु की केयर और स्तनपान

डिलीवरी के बाद शिशु की केयर को लेकर, स्तनपान करवाने को लेकर महिला बहुत परेशान हो जाती है। जबकि दूसरी डिलीवरी के बाद महिला के मन में ऐसा कोई डर नहीं होता है।

तो यह हैं कुछ लक्षण जो दूसरी प्रेगनेंसी के दौरान महिला को बॉडी में महसूस हो सकते हैं, यदि आप भी पहली प्रेगनेंसी में आई कॉम्प्लीकेशन्स को लेकर दूसरी बार गर्भधारण से घबरा रही है तो बिल्कुल मत घबराइए, क्योंकि जितनी बार भी महिला गर्भधारण करती है उतनी बार महिला को बॉडी में अलग अलग लक्षण महसूस होते हैं।

ब्रैस्ट के लिए आवश्यक पोषण क्या होते है?

Breast Care Tips 

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महिलाओं को हमेशा अपनी ब्रैस्ट को स्वस्थ रखने के लिए पोषण की आवश्यकता होती है। अगर सही पोषण न मिले, तो ब्रैस्ट के आकार, बनावट में फर्क पड़ जाता है। आपने देखा होगा की बहुत सी महिलाओं की ब्रैस्ट बिलकुल न के बराबर होती है जबकि कुछ की बहुत अधिक बड़ी होती है। ब्रैस्ट का सही साइज में होना सुंदरता में चार चाँद लगाने जैसा होता है। इसलिए आज हम आपको अपने ब्रैस्ट को सुंदर, सुडौल, सही साइज और हेल्थी कैसे बनायें? इसे इन पॉइंट्स के माध्यम से बताने जा रहे है।

वैसे तो सभी महिलाऐं अपनी-अपनी सूझ बुझ के अनुसार अपनी ब्रैस्ट की देखभाल करती रहती है लेकिन कई बार उनके द्वारा की गयी देखभाल उनके लिए परेशानी का कारण बन जाती है। क्योंकि हर महिला को सही देखभाल और पोषण के बारे में ठीक से पता नहीं होता। जिसके कारण वे ये गलती कर बैठती है। हमारी इन टिप्स की मदद से आप अपनी ब्रैस्ट की देखभाल तो कर ही पाएंगी साथ-साथ उन्हें भरपूर पोषण भी दे पाएंगी। तो आइये जानते है क्या है वे टिप्स?

स्तनों के लिए आवश्यक पोषण :-

1. प्रोटीन :

स्तनों के विकास और उनके पोषण के लिए भरपुर मात्रा में प्रोटीन का सेवन करना बहुत लाभकारी होता है। क्योंकि यह उन्हें सही आकार देने में मदद करता है। इसके लिए आप सोयाबीन, दूध, अंडे, लीन फैट, पीनट बटर और चिकन आदि का सेवन कर सकती है। इनमे भरपूर मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है जो स्तनों के विकास में मदद करता है।

2. साइटोएस्ट्रोजन :

यह एक प्रकार का पोषक तत्व होता है जो स्तनों के विकास के लिए बहुत अच्छा होता है। यह अधिकतर जीरे, फल, नट्स आदि में भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इसके लिए आप नट्स में काजू, पिस्ता, बादाम आदि का सेवन कर सकते है जबकि फलों में पीच, स्ट्रॉबेरी और रसभरी का सेवन कर सकती है। यह आपके स्तनों को सुडौल बनाने में मदद करेगा।

3. आयरन :

आयरन भी शरीर के अंगों के विकास के लिए जरुरी पोषक तत्वों में से एक है जिसकी कमी स्वास्थ्य के लिए अच्छी नहीं होती। अगर आप चाहती है की आपके स्तनों का विकास ठीक प्रकार से हो तो चुकंदर हरी पत्तेदार सब्जियों आदि का सेवन करें। इनमे आयरन की भरपूर मात्रा पाई जाती है जो स्तनों के लिए लाभकारी होती है।

4. एस्ट्रोजेन :

स्तनों की वृद्धि करने में एस्ट्रोजन का बेहद खास महत्व होता है। यह शरीर में मांसपेशियों को मजबूत करके उन्हें सही आकार देने में भी मदद करता है। इसके लिए आप चिक pieces, गाजर, दूध और दही आदि का सेवन कर सकती है। इनके सेवन से स्तनों के आकार पर काफी फर्क पड़ता है। इनमे एस्ट्रोजन की अच्छी मात्रा पाई जाती है जो ब्रैस्ट के लिए लाभकारी होती है।

स्तनों की देखभाल कैसे करें?

1. सही नाप की ब्रा :perfect bra shape

स्तनों को सही शेप और आकार देने के लिए सबसे जरुरी है की आप सही नाप की ब्रा पहने। ब्रा का चुनाव करते समय ध्यान रखें की आपके स्तन उछले यही और न ही बाहर की तरफ नहीं निकलें। यदि आपको अपने स्तनों के नाप का आकार नहीं पता है तो जानकारी के लिए आप हमारे इस लेख को पढ़ सकती है।

Read More : Breast का नाप लेने का सही तरीका और जानकारी।

2. मसाज :

स्तनों को सुडौल बनाए रखने के लिए रोजाना 10 मिनट तक ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर मसाज करनी चाहिए। ऐसा करने से कोशिकाओं में रक्त का बेहतर संचार होता है जिससे स्तनों में लचकता बनी रहती है। मसाज के लिए आप एलोवेरा जेल या बादाम के तेल या किसी अन्य वनस्पति तेल का इस्तेमाल कर सकती है। यह मसाज उन्हें सही आकार देने और खूबसूरत बनाने में मदद करेगी।

3. वजन :

स्तनों को बेहतर और सुंदर बनाने के लिए नियमित व्यायाम करें और साथ ही संतुलित आहार खाएं। ताकि आपके शरीर का वजन स्थिर बना रहे। वजन कम या ज्यादा होने से उत्तकों में खिचाव होता है जो सीधे सीधे स्तनों के लचीलेपन को प्रभावित करता है। इसीलिए अपना वजन नियंत्रित रखें।

4. जल :

शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए भरपूर मात्रा में पानी का सेवन करना चाहिए। अगर आपको पानी पीना पसंद नहीं है तो आप इसके स्थान पर अन्य तरल पदार्थों का सेवन कर सकती है। जैसे की फलों का रस, दही, छाछ, लस्सी, आदि।

5. ब्रैस्ट मसाज आयल :

यह आयल आजकल सभी मेडिकल स्टोर पर उपलब्ध होता है। इसकी कीमत के साथ साथ इसकी वैरायटी और परिणामों में भी फर्क होता है। इसीलिए इसे खरीदने से पहले अच्छी कंपनी को देख लें, साथ ही इसकी सही कीमत और एक्सपायर डेट के बारे में भी जान लें। रोजाना नियम अनुसार इसका इस्तेमाल करती रहे ताकि वह शेप में रहे। ऐसा नहीं है इसे आपको हमेशा लगाना है। इसका कोर्स कुछ महीने का होता है जिसे बाद फर्क आप स्वयं महसूस कर सकती है।

हींग कैसे बनता है? और इसके क्या फायदे होते है

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वैसे तो आप अपने रसोई घर में बहुत से मसालों का इस्तेमाल करते है, और उसमे हींग का भी इस्तेमाल करते है, हींग का इस्तेमाल करने से केवल आपके व्यंजनों में खुशबू ही नहीं आती है, बल्कि उसका स्वाद भी दुगुना हो जाता है, हींग केवल मसाला ही नहीं है बल्कि इसके औषधीय गुण आपके लिए बहुत फायदेमंद होते है, जैसे की कान में दर्द की समस्या हो, फोड़े फुंसी की परेशानी हो, छाती में बलगम या दर्द की समस्या हो, ऐसी ही कई तरह की समस्या का समाधान करने में ये आपकी मदद करता है।

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हींग की सबसे ज्यादा खेती बलूचिस्तान, ईरान और अफगानिस्तान आदि देशों में होती है, वही से इसे मंगवाया जाता है, इसके अलावा पेट से जुडी परेशानी, पुरुषो की ताकत को बढ़ाने, आपकी बॉडी में रक्त से जुडी समस्या का समाधान करने में भी ये आपकी मदद करता है, इसके साथ और भी बहुत सी परेशानियां है जिनका समाधान करने में ये आपकी मदद करता है, तो आइये अब विस्तार से जानते है की हींग आपको कौन कौन से फायदे देती है, परन्तु उससे पहले ये जानते है की इसे बनाया कैसे जाता है।

हींग कैसे बनता है:-

 

पहाड़ी क्षेत्रों में एक पौधा जिसका नाम फेरुल फोइटिडा होता है, वो पाया जाता है, और उसी के पौधे से रस को निकालकर उसे किसी बर्तन में डालकर अच्छे से सुखा लिया जाता है, और उसे सुखा लेने के बाद ही स्वादिष्ट हींग प्राप्त होती है, जिसका इस्तेमाल आप अपनी रसोईघर और अन्य परेशानियों के समाधान के लिए करते है।

हींग के क्या क्या फायदे होते है:-

हिचकी से राहत मिलती है:-

हिचकी आने से व्यक्ति बहुत परेशान हो जाता है, लेकिन हींग का इस्तेमाल करने से आपको इस समस्या से तुरंत राहत मिलने में मदद मिलती है, इसके इस्तेमाल के लिए आप हिचकी आने पर थोड़े से गुड़ के साथ या केले में इसे मिक्स करके इसका सेवन करें आपको राहत मिलेगी।

पेशाब की समस्या से राहत मिलती है:-

कई बार आपको काफी समय तक पेशाब नहीं आता है, और बहुत कोशिश करने पर भी इस समस्या का समाधान नहीं होता है, और इसके कारण पेट में दर्द आदि भी होने लगते है. लेकिन यदि आप हींग को सौंफ के अर्क के साथ मिलाकर इसका सेवन करते है तो आपको इस समस्या से आराम मिलता है।

कान के दर्द से आराम मिलता है:-

कान का दर्द असहनीय होता है, परन्तु यदि आप हींग का इस्तेमाल करते है, तो आपको कान के दर्द से आराम मिलता है, इसके इस्तेमाल के लिए आप तेल में हींग को डालकर अच्छे से पका लें, उसके बाद उस तेल को छान लें, और बाद में नियमित सुबह शाम एक एक बून्द कान में डालें, ऐसा करने से आपको कान के दर्द से आराम मिलता है।

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दांत के दर्द से आराम मिलता है:-

यदि आपके दांत में दर्द है तो भी हींग का इस्तेमाल करने से आपकी इस समस्या का समाधान होता है, इसके इस्तेमाल के लिए आप हींग को पानी में उबालकर उसके गुनगुना होने के बाद कुल्ला करें, दिन में तीन से चार बार इसे करें, ऐसा करने से आपको दांत के दर्द से राहत मिलती है।

हैज़ा से निपटने में मदद मिलती है:-

हैज़ा होने पर यदि आप हींग, आम की गुठली के अंदर की गिरी, कपूर को बराबर मात्रा में लेकर अच्छे से पीस लें, उसके बाद इसमें पुदीने का रस मिलाएं, और इतनी मात्रा में मिलाएं की इसकी गोलियां तैयार हो सकें, उसके बाद आप हैज़ा होने पर इन गोलियों का सेवन करें, आपको हैजे से राहत मिलने में मदद मिलती है।

फोड़े फुंसी की समस्या से राहत दिलाता है:-

हींग का इस्तेमाल करने से फोड़े फुंसियों की समस्या से भी राहत पाने में मदद मिलती है, इसकेइतेमाल के लिए नीम की पत्तियों से साथ इसे पीस कर फोड़े फुंसी पर लगाने से आपको कुछ ही दिनों में इससे राहत मिलती है, साथ ही चोट लगने पर भी आप इसका इस्तेमाल यदि करते है, तो आपको फायदा होता है।

खांसी से राहत मिलती है:-

हींग का इस्तेमाल करने से आपको खांसी और अस्थमा की समस्या से भी आराम मिलता है, इसके इस्तेमाल के लिए आप हींग को पीसकर एक पेस्ट के रूप में तैयार करें, और उसे अपनी छाती पर लगाएं, आपको राहत का अहसास होगा।

मासिक धर्म के दर्द से राहत मिलती है:-

मासिक धर्म के दौरान महिलाओ को पेट या कमर दर्द की समस्या से परेशान होना पड़ता है, इसके सेवन से महिलाओ को इस परेशानी से भी राहत मिलती है, इस दर्द से निजात पाने के लिए आप तीन दिन तक नियमित आधा ग्राम भुनी हुई हींग को सुबह पानी के साथ लें, आपको दर्द से राहत मिलेगी।

कामेच्छा को बढ़ाने में मदद करती है:-

कई बार किसी न किसी कारणवश पुरुषो में कामेच्छा की कमी आने लगती है, परन्तु हींग के सेवन से पुरुषो से जुडी इस परेशानी का समाधान करने में मदद मिलती है, और पुरुषो में कामेच्छा की ताकत को बढ़ाने में भी मदद मिलती है।

दाद की समस्या को खत्म करता है:-

यदि आपको केहि दाद खाज, खुजली की समस्या है तो उससे निजात दिलाने में भी ये आपकी मदद करता है, इसके इस्तेमाल के लिए आप हींग को पीस कर उसका पेस्ट तैयार करें, उसके बाद इसे उस स्थान पर लगाएं, जहां आपको दाद, खुजली की समस्या है सूखने के बाद इसे साफ़ कर दें, आपको इस समस्या से राहत पाने में मदद मिलेगी।

स्किन पर होने वाले दाग धब्बो की समस्या से भी राहत मिलती है:-

आपको जानकार हैरानी होगी की हींग का इस्तेमाल करने से आपको अपनी स्किन से जुडी परेशानियों को भी खत्म करने में मदद मिलती है, इसके इस्तेमाल के लिए आप दही में थोड़ी सी हींग मिलाएं और इसे अच्छे से मिक्स कर लें, उसके बाद इसे पैक के रूप में अपने चेहरे पर लगाएं, और सूखने के बाद धो दें, कुछ दिनों तक नियमित इसका इस्तेमाल करने से आपको इसका असर साफ़ दिखाई देगा, और आपका चेहरा बिलकुल साफ़ हो जाएगा।

हींग से मिलने वाले अन्य फायदे:-

  • शरीर में रक्त के थक्के जमने पर हींग के सेवन से आपको फायदा मिलता है।
  • लौ ब्लड प्रैशर की समस्या में हींग का सेवन करने से आपके ब्लड प्रैशर को सामान्य रखने में मदद मिलती है।
  • गले में खराश होने पर या टॉन्सिल्स की समस्या होने पर हींग को पानी में मिलाकर उबाल लें, और उसके बाद उस पानी से गरारे करें, आपको फायदा होगा।
  • पेट में होने वाले दर्द की समस्या से निजात पाने में आपको मदद मिलती है साथ ही गैस, एसिडिटी होने पर भी आप इसका इस्तेमाल कर सकते है।
  • उलटी डकार की समस्या में भी हींग के इस्तेमाल से आपको फायदा मिलता है, इसके इस्तेमाल के लिए आप केले को पीस कर उसमे हींग को मिलाकर उसका सेवन करें, या फिर थोड़ा से गुड़ को पीसकर उसमे बाजरे के दाने के समान हींग मिलाकर इसका सेवन करने से आपको फायदा मिलता है।
  • नीम के तेल में हींग को डालकर फटी एड़ियों पर लगाने से भी आपको अपनी एड़ियों को कोमल बनाने में मदद मिलती है।

हींग के नुकसान:-

हींग के सेवन से आपको बहुत फायदे होते है, परन्तु यदि आप इसका सेवन आवश्यकता से अधिक मात्रा में करते है, तो इसके कारण आपको परेशानी का अनिभव भी हो सकता है, इसके ज्यादा सेवन से आपके होंठ सूज सकते है, गैस की समस्या हो सकती है, आपकी स्किन लाल पड़ने लगती है, सरदर्द चक्कर जैसी परेशानी का भी अनुभव करना पड़ सकता है, इसीलिए इसका सेवन करते समय आपको ध्यान रखना चाहिए की आप इसे उपरोक्त मात्रा में ही लें।

तो ये है कुछ फायदे जिनको आप हींग के इस्तेमाल करने के बाद उठा सकते है, साथ ही आप यदि इसका इस्तेमाल दालों में करते है तो न केवल उसकी सुगंध अच्छी होती है, बल्कि आपको स्वाद भी मिलता है, और यदि अब तक आप हींग का इस्तेमाल नहीं करते थे तो इन फायदों को जानने के बाद आपको इनका इस्तेमाल जरूर करना चाहिए।

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दाद, खाज, खुजली से राहत के घरेलू इलाज

कई लोग कहते है की दाद, खाज खुजली एक ही बात है, लेकिन ऐसा नहीं है दाद एक प्रकार का फंगल इन्फेक्शन है, और खुजली उसका ही एक लक्षण है, ऐसे ही खाज का मतलब होता है, जब खुजली करके आपकी स्किन में जलन उत्त्पन्न होती है, यह एक ऐसी समस्या है जो किसी को भी, किसी उम्र में और शरीर के किसी हिस्से में भी हो सकती है, और हर कोई इससे होने वाली इर्रिटेशन से जल्द से जल्द राहत पाना चाहता है, और कई बार तो यदि किसी के सामने आपको बार बार खुजली होती है, तो इसके कारण आपको हंसी का पात्र भी बनना पड़ता है, तो आइये आज हम सबसे पहले इस परेशानी के कारणों पर चर्चा करेंगे और उसके बाद इससे बचने के लिए कुछ उपाय आपको बताएंगे।

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खुजली के क्या क्या कारण हो सकते है:-

  • जिनकी स्किन ड्राई या खुश्क होती है, उन्हें इससे ज्यादा परेशानी होती है।
  • किसी भी तरह की क्रीम, दवा, कॉस्मेटिक, मेटल, पर्फ्यूम, सोप, डी ओ, सिंथेटिक कपड़े आदि के कारण एलर्जी होने पर।
  • फंगल या बैक्टेरियल इन्फेक्शन की समस्या होने पर।
  • साफ़ सफाई न रखने पर ( खासकर अंडरआर्म्स प्राइवेट पार्ट आदि की )।
  • अधिक पसीना आने पर।
  • तनाव या शुगर की बिमारी होने के कारण।
  • मौसम में बदलाव होने पर भी आप्कोये परेशानी हो सकती है।
  • किसी भी कीड़े मकोड़े के काटने पर।
  • जो महिलाएं ज्यादा टाइट इनर वियर पहनती हैं, उन्हें ये परेशानी होती है।
  • कमजोर इम्यून सिस्टम के होने पर।
  • धूप में ज्यादा घूमने के कारण।
  • शरीर में खून की कमी होने पर।

दाद, खाज, खुजली से बचने के उपाय:-

बेकिंग सोडा का इस्तेमाल करें:-

यदि आपको खुजली या दाद की समस्या है तो आपको एक चम्मच बेकिंग सोडा में पानी मिलाकर एक पेस्ट तैयार कर लेना चाहिए और उसके बाद उसे खुजली या दाद पर लगाएं, और पांच मिनट तक रहने के बाद फिर उसे साफ़ कर दें, आपको उसी समय खुजली से राहत पाने में मदद मिलेगी, और दाद से राहत के लिए जब तक वो ठीक न हो जाएँ तब तक इस्तेमाल करते रहें।

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एलोवेरा का इस्तेमाल करें:-

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एलोवेरा आपकी स्किन के लिए किसी वरदान से कम नहीं होता है, इसके इस्तेमाल से आपको स्किन पर होने वाले किसी भी तरह के इन्फेक्शन, जलन, खुजली आदि की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है, इसके इस्तेमाल के लिए आप एलोवेरा के ताजे रस को अच्छे से उस स्थान पर लगाएं जहां आपको खुजली, जलन, व् दाद की समस्या है और सूखने के बाद धो दें, या आप चाहे तो इसमें थोड़ा मुल्तानी मिट्टी और गुलाबजल भी मिक्स करें इससे आपको दाद से जल्दी आराम पाने में मदद मिलेगी।

तुलसी का इस्तेमाल करें:-

तुलसी आपकी स्किन के लिए आयुर्वेदिक औषधि के जैसे काम करती है, इसकी एंटीसेप्टिक प्रॉपर्टीज आपकी स्किन से जुडी समस्या का समाधान करने में मदद करती है, इसके इस्तेमाल के लिए आप तुलसी के पत्तों को पीस कर उसमे हल्का सा पानी मिलाएं, और उसके बाद उसे वही पर लगे रहने दें, और थोड़ी देर बाद साफ़ कर दें, इसे आपकी दाद खाज खुजली सभी तरह की परेशानियों को दूर होने में मदद मिलेगी।

पुदीने के तेल का इस्तेमाल करें:-

बाजार से आपको पुदीने का तेल बहुत ही आसानी से मिल जाता है, यह आपकी स्किन से जुडी हर परेशानी का समाधान करने में आपकी मदद करता है, जलन, सूजन, खुजली की समस्या से भी इसके कारण आपको राहत मिलती है, इसके लिए आप पुदीने के तेल को अच्छे से खुजली वाली जगह पर मसाज करें, और दाद पर रुई की मदद से लगाकर छोड़ दें, ऐसा करने से आपको इस समस्या से राहत मिलने के साथ स्किन को सॉफ्ट बनाने में भी मदद मिलेगी।

सेब के सिरके का इस्तेमाल करें:-

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सेब का सिरका भी आपको खाज खुजली और दाद से बचाने में मदद करता है, साथ ही जलन व् स्किन इन्फेक्शन से भी राहत दिलाता है, इसके इस्तेमाल के लिए आप सीधे ही इसमें रुई को भिगोकर दिन में दो से तीन बार अपने दाद और खुजली के स्थान पर लगाएं, और यदि आपको पूरे शरीर में खुजली महसूस होती है, तो एक बाथ टब पानी से भरकर तीन से चार कप सेब का सिरका उसमे मिलाएं और दस मिनट तक उसे रहें, ऐसा करने से आपके स्किन पर जमे बैक्टेरिया से राहत पाने में आपको मदद मिलेगी, और साथ ही खुजली से भी आराम मिलेगा।

ओटमील का इस्तेमाल करें:-

ओटमील भी आपको खुजली व् दाद की समस्या से राहत दिलाने में मदद करता है, इसके इस्तेमाल के लिए आप बाथ टब में दो बड़े चम्मच ओटमील के मिलाएं, उसके बाद उसमे कम से कम बीस मिनट के लिए बैठें, इसके अलावा आप दूध में ओटमील मिलाकर उसे अपने दाद पर लगाएं, और आधे घंटे के लिए छोड़ दें, इस तरीके का इस्तेमाल करने से भी आपको दाद खाज खुजली की समस्या से निजात मिल जाता है।

ठन्डे पानी का इस्तेमाल करें:-

यदि आपको खुजली व् जलन महसूस हो रही हो तो आपको ठन्डे पानी से दिन में दो से तीन बार नहाना चाहिए और यदि आपको एक ही जगह पर खुजली या दाद की समस्या हो तो आइस क्यूब की मदद से उसकी सिकाई करनी चाहिए, ऐसा करने से भी आपको खुजली व् दाद की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

निम्बू का प्रयोग करें:-

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यदि आप खुजली के कारण परेशान है तो आपको जहां खुजली महसूस हो रही है, वहीँ पर सीधा निम्बू का रस लगाना चाहिए, क्योंकि इसमें एंटी इनफ्लमेटरी, इरिटेशन, और एंटीसेप्टिक गुण होते है जो आपको खुजली से बचाने में मदद करते है, साथ ही यदि आपकी स्किन अधिक सेंसिटिव है तो आपको किसी और अन्य उपाय का इस्तेमाल करना चाहिए।

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दाद, खाज, खुजली से बचने के अन्य घरेलू नुस्खे:-

  • पान के पत्ते का पेस्ट बनाकर उसमे थोड़ा शहद मिलाएं और खुजली व् दाद के स्थान पर लगाएं आपको इस परेशानी से राहत पाने में मदद मिलेगी।
  • पुदीने के पत्तों के पेस्ट को का भी इस्तेमाल करने से आपको इस समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।
  • यदि किसी कीड़े ने काट लिए हो तो आपको केले के छिलके को वहां रगड़ने से आराम मिलता है।
  • खीरे का रस त्वचा पर लगाने या टमाटर के जूस को पीने से आपको इस समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है
  • नारियल के तेल में कपूर मिलाकर लगाने से आपको इस समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।
  • नीम के पत्तों को पानी में उबालकर उसे ठंडा करके उस पानी से नहाने, या नीम के पत्तों के पेस्ट को खुजली व् दाद के स्थान पर लगाने से आपको इस परेशानी से राहत मिलने में मदद मिलती है।

दाद से बचने के कुछ आयुर्वेदिक उपाय:-

  • लहसुन के पेस्ट को दाद पर लगाने से आपको इस समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।
  • टी ट्री आयल में थोड़ा गुनगुना पानी मिलाकर उसे दाद पर दिन में दो से तीन बार लगाएं आपको इस समस्या से राहत पाने में मदद मिलेगी।
  • सरसों के बीज को कुछ देर तक पानी में भिगोकर रखें, उसके बाद उन्हें पानी में से निकालकर अच्छे से पीस कर पेस्ट तैयार करें, और उसे दाद पर लगाएं, इससे भी आपको आराम मिलेगा।
  • सिरके और नमक का पेस्ट बनाकर दाद पर लगाने से दाद खत्म होता है।
  • हल्दी का रस निकालकर उसे दाद के स्थान पर लगाएं, और ऐसा दिन में तीन से चार बार करें इससे भी आपको दाद से राहत पाने में मदद मिलती है।

दाद, खाज, खुजली से बचने के लिए ध्यान रखें ये बातें:-

  • यदि आपको साबुन, डी ओ, परफ्यूम, क्रीम, पाउडर, लोशन, मेटल, या सिल्की कपडे डालने के कारण खुजली होती हो, तो इन्हे डालने और इन कॉस्मेटिक का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।
  • यदि आपको ड्राई स्किन के कारण इस समस्या से परेशान होना पड़ता है, तो इससे बचने के लिए आपको अपनी स्किन के लिए किसी लोशन या मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल करना चाहिए, धूप से बचना चाहिए।
  • अपने प्राइवेट पार्ट की साफ़ सफाई, टाइट इनर वियर आदि का भी ध्यान रखना चाहिए।
  • प्रेगनेंसी और मेनोपॉज़ होने पर आपको यदि ये समस्या होती है, तो इससे बचने के लिए आपको डॉक्टर से राय लेनी चाहिए।

तो ये हैं कुछ कारण जिनके कारण आपको दाद खाज खुजली की समस्या हो जाती है, साथ ही इस परेशानी से बचने के लिए आपको कुछ उपाय बताएं गए है, जिनसे आपको इस समस्या से बचने में मदद मिलती है, तो यदि आप भी इस समस्या से बचना चाहते है, तो अपनी साफ़ सफाई का ख्याल रखें, और आपको यदि ये समस्या हो जाती है, तो ऊपर दिए गए किसी भी तरीके से आपको इस समस्या से बचने में मदद मिलेगी।

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प्रेगनेंसी में सम्बन्ध कब नहीं बनाना चाहिए?

प्रेगनेंसी में कब सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए, प्रेगनेंसी एक ऐसा समय होता है जहां कुछ भी करने से पहले महिला को उसकी पूरी जानकारी इक्कठी करनी चाहिए। की जो आप कर रही हैं वो प्रेगनेंसी के दौरान सही है या नहीं। चाहे फिर वो घर का काम करना हो, बाहर घूमना हो या फिर प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध बनाना हो। क्योंकि किसी भी चीज में बरती गई लापरवाही का बुरा असर प्रेगनेंसी के दौरान महिला व् उनके गर्भ में पल रहें पर पड़ सकता है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला व् उनके पार्टनर बाकी सब चीजों के बारे में तो खुलकर डॉक्टर से बात कर लेते हैं।

लेकिन सम्बन्ध बनाने को लेकर खुलकर बात नहीं करते हैं। जो की गलत होता है। क्योंकि प्रेग्नेंट महिला को इस बारे में जानकारी होनी चाहिए की आखिर प्रेगनेंसी के दौरान कब सम्बन्ध बनाना सेफ होता है और कब नहीं। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको गर्भवती महिला की कुछ ऐसी स्थितियों के बारे में बताने जा रहें हैं की आखिर कब प्रेग्नेंट महिला को सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए।

प्रेगनेंसी के पहले तीन महीनों में

  • गर्भावस्था की पहली तिमाही बहुत अहम होती है क्योंकि इस समय शिशु का विकास शुरू हो रहा होता है।
  • ऐसे में सम्बन्ध बनाने पर पेडू की मांसपेशियों में सिकुड़न आ सकती है।
  • जिसके कारण गर्भ पर बुरा असर पड़ सकता है और गर्भपात होने का खतरा बढ़ जाता है।

प्रेगनेंसी में कब सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए जब ब्लीडिंग की समस्या हो

  • प्रेगनेंसी के समय कुछ महिलाएं ब्लीडिंग की समस्या से ग्रसित होती है।
  • शुरुआत में हल्का फुल्का ब्लड का धब्बा लगना गर्भ में शिशु के प्रत्यारोपण के समय हो सकता है।
  • लेकिन यदि महिला को थोड़ी ज्यादा ब्लीडिंग की समस्या हुई है तो महिला को डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए।
  • और उसके बाद यदि आराम आ जाता है तो ब्लीडिंग की समस्या होने के बाद महिला को प्रेगनेंसी के बचे हुए समय में सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए।

गर्भ में पल रहें शिशु को कोई दिक्कत हो

  • अल्ट्रासॉउन्ड के बाद यदि डॉक्टर आपको बताते हैं की गर्भ में पल रहें शिशु के विकास में कोई कमी है या कोई अन्य दिक्कत है।
  • तो भी प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए।

प्रेगनेंसी में कब सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए जब पहले गर्भपात हुआ हो

  • यदि महिला का पहले कभी गर्भपात हुआ हो या गर्भपात का खतरा हो।
  • तो भी प्रेगनेंसी के दौरान महिला व् पुरुष को सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए।
  • क्योंकि ऐसे में सम्बन्ध बनाने से गर्भपात का खतरा बढ़ सकता है।

गर्भ में एक में ज्यादा शिशु के होना पर

  • यदि प्रेग्नेंट होने पर महिला को पता चलता है की महिला के गर्भ में एक से ज्यादा शिशु हैं।
  • तो ऐसे में भी प्रेग्नेंट महिला को सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए।

समय पूर्व प्रसव पहले हुआ हो

  • यदि महिला का दूसरी बार गर्भधारण हुआ है और पहला शिशु समय से पहले हो गया था।
  • तो भी महिला को प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए।
  • क्योंकि सम्बन्ध बनाने के कारण भी आपका दूसरी बार भी समय पूर्व प्रसव होने का खतरा हो सकता है।

प्रेगनेंसी में कब सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए जब सफ़ेद पानी की समस्या अधिक हो

  • प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला को सफ़ेद पानी की समस्या अधिक हो तो महिला को इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए।
  • इस समस्या के इलाज के लिए आपको डॉक्टर से जरूर मिलना चाहिए।
  • साथ ही इस समस्या के होने पर सम्बन्ध बनाने से भी गर्भवती महिला को बचना चाहिए।
  • क्योंकि इससे गर्भवती महिला को इन्फेक्शन जैसी समस्या से परेशान होना पड़ सकता है।

गर्भ में शिशु के नीचे होने पर

  • यदि गर्भ में शिशु क भार नीचे की तरफ होता है।
  • तो ऐसे में भी प्रेग्नेंट महिला को सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए।
  • क्योंकि इसके कारण गर्भ में शिशु को असहज महसूस हो सकता है।

प्रेग्नेंट महिला की इच्छा न हो

  • गर्भावस्था के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिला को मूड स्विंग्स हो सकते हैं।
  • जिसके कारण हो सकता है की प्रेग्नेंट महिला की सम्बन्ध बनाने की इच्छा में कमी आए।
  • और महिला का सम्बन्ध बनाने का मन न हो तो प्रेग्नेंट महिला के पार्टनर को महिला को समझने की कोशिश करनी चाहिए।
  • और महिला के साथ सम्बन्ध बनाने को लेकर जबरदस्ती नहीं करनी चाहिए।

पेट बाहर आने पर

  • दूसरी तिमाही के बाद महिला के पेट का आकार ज्यादा बढ़ जाता है।
  • ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए।
  • या फिर सम्बन्ध बनाते समय सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि पेट पर किसी तरह का दबाव पड़ने पर महिला के साथ शिशु को भी गर्भ में असहज महसूस हो सकता है।

तो यह हैं कुछ स्थितियां जब प्रेग्नेंट महिला को अपने पार्टनर के साथ सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए। क्योंकि इन सब स्थितियों के होने पर प्रेग्नेंट महिला को सम्बन्ध बनाने में दिक्कत हो सकती है। और इस बारे में आपको डॉक्टर से शर्माना नहीं चाहिए बल्कि प्रेगनेंसी के दौरान जिस तरह सेहत से जुडी बातों को आप डॉक्टर से शेयर करते हैं। उसी तरह से इन बातों को भी डॉक्टर से एक बार जरूर पूछना चाहिए।

प्रेगनेंसी में जब बहुत ज्यादा प्यास लगने लगे तो यह दिक्कत हो सकती है

एक स्वस्थ आदमी को दिन में कम से कम आठ गिलास पानी पीने की सलाह दी जाती है लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान महिला को इसे ज्यादा पानी पीने की जरुरत होती है। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। और बॉडी के हाइड्रेट रहने से गर्भवती महिला को इन परेशानियों को कम करने व् बच्चे के बेहतर विकास में मदद मिलती है।

साथ ही पानी का भरपूर सेवन गर्भवती महिला को ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद करता है। लेकिन गर्भवती महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की कहीं वो जरुरत से ज्यादा पानी तो नहीं पी रही है या महिला को बार बार प्यास तो नहीं लग रही है? क्योंकि ऐसा होना भी प्रेगनेंसी के दौरान महिला के लिए परेशानी का कारण होता है। तो आइये अब जानते हैं प्रेगनेंसी के दौरान बार बार प्यास लगने से जुडी कुछ खास बातें:

प्रेगनेंसी में बार बार प्यास लगने के कारण

  • गर्भावस्था के दौरान जिन महिलाओं का ब्लड प्रेशर लौ रहता है उन महिलाओं के साथ ऐसा हो सकता है।
  • प्रेगनेंसी में बॉडी में रक्त की मात्रा बढ़ती है और रक्त की मात्रा को सही रखने के लिए पानी का भरपूर सेवन बहुत जरुरी होता है जिसके कारण महिला को पहले के मुकाबले अधिक प्यास लगती है।
  • यदि गर्भवती महिला भरपूर पानी का सेवन नहीं करती है तो इसके कारण भी महिला को बार बार प्यास लगती है।
  • जो गर्भवती महिला खड़े होकर पानी का सेवन करती है उन्हें भी बार बार पानी पीने की इच्छा होती है।
  • यदि प्रेग्नेंट महिला नमकीन, तेलीय, मसालेदार भोजन का सेवन अधिक करती है तो इस कारण भी महिला को बार बार प्यास लगने की समस्या होती है।
  • प्रेगनेंसी के दौरान पेट का भार नीचे की तरफ होने के कारण महिला की बार बार यूरिन करने की इच्छा होती है और बार बार यूरिन पास करने के कारण भी महिला की प्यास में वृद्धि होती है।

प्रेगनेंसी में बार बार प्यास लगने के कारण हो सकती हैं यह दिक्कतें

गर्भावस्था के दौरान कोई भी लक्षण असहज महसूस हो तो उसे अनदेखा नहीं करना चाहिए क्योंकि वह बाद में आपके लिए परेशानी खड़ी कर सकता है। जैसे की जरुरत से ज्यादा प्यास लगना भी प्रेगनेंसी के दौरान नुकसानदायक हो सकता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी में बार बार प्यास लगने से कौन सी परेशानियां होती है।

गेस्टेशनल शुगर

यदि गर्भवती महिला को बार बार प्यास लग रही है और उतनी ही ज्यादा बार महिला को यूरिन पास की इच्छा भी हो रही है तो यह गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली शुगर की समस्या का संकेत होता है। ऐसे में इसे अनदेखा न करते हुए तुरंत डॉक्टर से एक बार जरूर जांच करवानी चाहिए।

डीहाइड्रेशन

गर्भवती महिला की बार बार पानी पीने की इच्छा होने का एक कारण गर्भवती महिला के शरीर में तरल पदार्थों की कमी का होना भी होता है। और गर्भवती महिला को यदि डीहाइड्रेशन की समस्या होती है तो महिला को इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए और पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए।

थकान व् कमजोरी

गर्भवती महिला जितना ज्यादा पानी का सेवन करती है उतना ही ज्यादा महिला को यूरिन आता है। और जितनी ज्यादा बार महिला यूरिन पास करती है उतना ही ज्यादा महिला को थकान व् कमजोरी की दिक्कत अधिक होती है।

तो यह हैं कुछ कुछ कारण जिनकी वजह से महिला को ज्यादा प्यास लगती है साथ ही कुछ दिक्कतें भी हैं जो गर्भवती महिला को ज्यादा पानी पीने के कारण होती है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए और यदि बहुत ज्यादा प्यास लगे तो इसे अनदेखा न करते हुए तुरंत डॉक्टर से मिलें।

प्रेगनेंसी में घी खाने के फायदे

प्रेगनेंसी में घी का सेवन, गर्भावस्था में घी खाने के फायदे, प्रेगनेंसी में कब करें घी का सेवन, घी का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान कितना करें, प्रेगनेंसी के दौरान अधिक घी खाने के नुकसान, प्रेगनेंसी के दौरान घी क्यों खाना चाहिए

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला के आहार का विशेष रूप से ध्यान रखा जाता है क्योंकि जो भी गर्भवती महिला खाती है उसका असर उसके शिशु पर भी पड़ता है जिससे उसे पोषण मिलता है। आज हम आपको प्रेगनेंसी में घी खाने से जुडी कुछ बातों को बताने जा रहें है। घी का सेवन करने से स्वास्थ्य सम्बन्धी बहुत से फायदे होते हैं, लेकिन ऐसा तभी होता है जब आप इसे उचित मात्रा में लेते हैं अधिक घी के सेवन से आपको मोटापे जैसी समस्या से परेशान होना पड़ सकता है। प्रेगनेंसी के दौरान घी के सेवन को अच्छा माना जाता है लेकिन इसका अधिक सेवन गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को नुकसान भी पहुंचा सकता है। पहले दादी नानी घी खाने की खूब सलाह देती थी, लेकिन आज कल लोग डॉक्टर्स की राय के अनुसार चलते हैं और डॉक्टर उनकी शारीरिक फिटनेस के अनुसार उन्हें खाने पीने की सलाह देते हैं।

प्रेगनेंसी में घी का सेवन

प्रेगनेंसी के दौरान विशेष रूप से आठवें महीने के आखिर से लेकर डिलीवरी के बाद तक घी खाने की सलाह दी जाती है। क्योंकि इससे सर्विक्स में चिकनाहट उत्पन्न होती है जिससे डिलीवरी के समय परेशानी नहीं होती है। साथ ही डिलीवरी के बाद महिला के शरीर में आई कमजोरी को दूर करने के लिए इसके सेवन की सलाह दी जाती है। इसके अलावा यदि महिला का शरीर कमजोर है तो प्रेगनेंसी के दौरान महिला को फिट रहने के लिए और शिशु के बेहतर विकास के लिए घी खाने के लिए कहा जाता है लेकिन उचित मात्रा में। इसके अलावा जिन महिलाओं का वजन सही होता है उन्हें प्रेगनेंसी के आखिरी महीनो में घी खाने की सलाह दी जाती है। क्योंकि यदि वो घी का सेवन करती है तो इससे शिशु और महिला दोनों का वजन तेजी से बढ़ता है जिससे मोटापा होने के कारण महिला को प्रसव के समय बहुत ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

गर्भावस्था में घी खाने के फायदे

घी में सैचुरेटेड फैट, ओमेगा 9 फैटी एसिड, ओमेगा 3 फैटी एसिड, विटामिन, खनिज, एंटी-ऑक्सीडेंट आदि भरपूर मात्रा में होते हैं। जो बॉडी को फिट रखने के लिए बहुत जरुरी होते हैं खासकर प्रेगनेंसी के दौरान महिला को फिट रहने की बहुत जरुरत होती है।

  • गर्भ में पल रहे शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास में मदद करता है।
  • मेटाबोलिज्म को बेहतर बनाता है।
  • पाचन क्रिया में सुधार लाने के साथ कब्ज़ जैसी समस्या से भी प्रेगनेंसी के दौरान निजात दिलाता है।
  • घी का सेवन करने से सर्विक्स में चिकनाहट बनी रहती है जिससे डिलीवरी के समय आने वाली परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।
  • घी का सेवन करने से डिलीवरी के बाद आने वाली कमजोरी की समस्या और दर्द आदि से राहत पाने में मदद मिलती है।
  • प्रसव के दौरान होने वाले दर्द की समस्या से निजात दिलाने में भी घी का सेवन बहुत फायदेमंद होता है।

प्रेगनेंसी में कब करें घी का सेवन

जो महिलाएं शारीरिक रूप से कमजोर होती है उन्हें थोड़ा बहुत घी का सेवन कर लेना चाहिए। लेकिन वैसे घी का खाने की सलाह आठवें महीने के आखिर से लेकर प्रसव होने तक दी जाती है, और नौवें महीने में घी की मात्रा को बढ़ाने की सलाह दी जाती है। और उसके बाद घी का सेवन आपकी डिलीवरी पर निर्भर करता है यदि आपकी नार्मल डिलीवरी होती है तो आप घी का सेवन कर सकती हैं। लेकिन यदि सिजेरियन डिलीवरी होती है तो थोड़े दिन तक घी न खाने की सलाह दी जाती है।

घी का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान कितना और कैसे करें

प्रेगनेंसी के समय जितना हो सके आपको घी का सेवन तरल चीजे जैसे दूध में डालकर, सब्जी में डाल कर, दालों में डाल कर करना चाहिए। क्योंकि बॉडी तरल पदार्थो को बहुत जल्दी अवशोषित करता है जिससे आपको फायदा मिलता है। और आप एक गिलास दूध या सब्ज़ी में एक या दो चम्मच घी को पिघलाकर उसका सेवन कर सकती है।

प्रेगनेंसी के दौरान अधिक घी खाने के नुकसान

यदि आप प्रेगनेंसी के दौरान आवश्यकता से अधिक घी का सेवन करते हैं तो इससे आपके शरीर में मोटापा बढ़ता है, साथ ही शिशु का वजन भी बहुत ज्यादा होने लगता है। जिससे गर्भवती महिला के साथ शिशु को भी परेशानी हो सकती है खासकर डिलीवरी के समय आपको बहुत ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। और मोटापा बढ़ने के कारण मेटाबोलिज्म रेट भी कम होने लगता है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी में घी खाने से जुडी कुछ बातें ऐसे में आपको घी का सेवन कब और कितना करना चाहिए और कौन से महीने में करना चाहिए, इस बात का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए ताकि प्रेगनेंसी के दौरान घी खाने के आपको फायदे मिले नाकि नुकसान हो।

गर्भवती महिला के शरीर पर लाल-लाल दाने होना

प्रेगनेंसी में स्किन में बदलाव

गर्भावस्था के दौरान बॉडी में लगातार हार्मोनल बदलाव होते रहते हैं, जिसके कारण गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान बहुत सी शारीरिक परेशानियां जैसे की उल्टियां, बॉडी पार्ट्स में दर्द, थकान, कमजोरी, सूजन आदि का सामना करना पड़ सकता है। और बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव का प्रभाव स्किन पर भी देखने को मिलता है, जैसे की प्रेगनेंसी के दौरान स्ट्रेचमार्क्स की समस्या का होना, झाइयां आना, पेट से लेकर प्राइवेट पार्ट तक एक लम्बी लाइन का आना, मुहांसे आदि का होना। ऐसे में कुछ महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान स्किन पर छोटे छोटे लाल दानो की समस्या के कारण भी परेशान हो सकती है, क्योंकि इसके कारण खुजली, जलन, आदि का अनुभव हो सकता है।

प्रेगनेंसी के दौरान स्किन पर लाल दाने क्यों होते हैं?

गर्भावस्था के दौरान एस्ट्रोजन, प्रोजेस्ट्रोन, मेलानोसाईट व् अन्य हॉर्मोन के स्तर में बदलाव आ सकता है। जिसके कारण इनका असर स्किन पर देखने को मिल सकता है, जैसे की स्किन पर लाल या भूरे रंग के दाग महसूस होना, लाल लाल छोटे दाने होना, आदि। ऐसे में इन्हे लेकर गर्भवती महिला को घबराने की कोई बात नहीं होती है क्योंकि कई महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान यह समस्या हो सकती है। और डिलीवरी के बाद आपको अपने आप ही इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है। इसके अलावा प्रेगनेंसी के दौरान जिस तरह महिला अपने खान पान का बेहतर तरीके से ध्यान रखती है।

उसी तरह अपनी स्किन की भी अच्छे से केयर करनी चाहिए ताकि स्किन की कोमलता और ख़ूबसूरती को बनाये रखने में मदद मिल सके, जैसे की धूप व् प्रदूषण से बचाव रखना चाहिए। साथ ही यदि आपकी प्रेगनेंसी के दौरान गर्मी का मौसम चल रहा है तो इन दानो का होना गर्मी भी हो सकती है। क्योंकि गर्मियों के दौरान शरीर पर छोटे छोटे लाल बारीक दाने जिन्हे की पित्त के नाम से भी जाना जाता है होना बहुत ही आम बात है। और इससे निजात पाने के लिए आपको बॉडी पर पाउडर आदि का इस्तेमाल करना चाहिए जिसके कारण स्किन को ठंडक महसूस हो और ज्यादा गर्मी में रहने से बचना चाहिए।

तो यह है प्रेगनेंसी के दौरान स्किन पर छोटे छोटे लाल दाने के कारण, ऐसे में यदि लाल दाने होने के साथ इन दानों में दर्द, खुजली जलन आदि का अधिक अनुभव हो तो इन्हे अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि यह स्किन पर होने वाली एलर्जी का लक्षण हो सकता है, और यदि आपको एलर्जी का कोई लक्षण महसूस हो तो इसके लिए एक बार डॉक्टर से जरूर बात करनी चाहिए। ताकि एलर्जी के कारण होने वाली परेशानी से बचने में आपको मदद मिल सके।

प्रेग्नेंट महिला को कितना फ्रूट खाना चाहिए और कब खाएं

गर्भावस्था के दौरान फ्रूट्स का सेवन करना बहुत फायदेमंद होता है। क्योंकि फलों में पोषक तत्व व् पानी का भरपूर मात्रा में मौजूद होता है। जो गर्भवती महिला को स्वस्थ रखने के साथ गर्भ में बच्चे के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास में भी मदद करता हैं। साथ ही फलों में मौजूद फोलेट गर्भ में शिशु को जन्म के समय होने वाली बिमारियों से भी सुरक्षित रखने में मदद करता है। इसके अलावा फलों में मौजूद अन्य पोषक तत्व भी माँ व् बच्चे के लिए फायदेमंद होते हैं।

प्रेग्नेंट महिला अनार, सेब, केले, कीवी, संतरा, आम, तरबूज, अमरुद, आदि फलों का सेवन गर्भावस्था के पूरे नौ महीने तक कर सकती है। क्योंकि हर एक फल के अलग अलग फायदे होते हैं जो माँ व् बच्चे को मिलते हैं। लेकिन फलों का सेवन यदि समय पर और सही मात्रा में किया जाये तभी इससे आपको फायदा मिलता है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान कब और कितनी मात्रा में करें फलों का सेवन।

प्रेगनेंसी में फलों का सेवन कब करना चाहिए

  • प्रेगनेंसी के दौरान महिला नाश्ते में खाने के साथ थोड़े फलों को भी शामिल कर सकती है।
  • यदि आपका पराठें खाने या अन्य कोई चीज खाने के मन नहीं है तो आप नाश्ते में भरपूर फलों का सेवन करें क्योंकि फलों का सेवन भी बेहतरीन नाश्ता होता है।
  • यदि महिला में नाश्ते में फलों का सेवन नहीं करती है तो नाश्ते में डेढ़ से दो घंटे के बाद महिला किसी न किसी फल का सेवन कर सकती है।
  • लेकिन ध्यान रखें की सुबह के समय फलों का सेवन भरपूर मात्रा में में करें क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अतिरिक्त कैलोरी की जरुरत होती है और फलों में कैलोरीज़ मौजूद होती है जो प्रेग्नेंट महिला को एनर्जी से भरपूर रखने में मदद करती है।
  • दोपहर के खाने के एक घंटे बाद या शाम के समय भी महिला स्नैक्स के रूप में फलों का सेवन कर सकती है।
  • इसके अलावा ऐसा नहीं है की फिक्स टाइम पर ही गर्भवती महिला को फल खाना चाहिए बल्कि जब भी महिला को भूख लगे तो महिला फल खा सकती है।

प्रेग्नेंट महिला कितनी मात्रा में करें फलों का सेवन

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान फलों का सेवन उतनी मात्रा में ही करना चाहिए जितना महिला आसानी से हज़म कर सकें और जितने फल महिला की खाने की इच्छा है उतने फल खाएं। यदि महिला का कुछ और खाने का मन नहीं है तो फलों का सेवन समय समय पर करें।। और यदि महिला की फल खाने की इच्छा नहीं है तो महिला घर में ताजे फलों का रस निकालकर उनका सेवन कर सकती है। इसके अलावा महिला को सभी फलों को मिलाकर एक साथ सेवन नहीं करना चाहिए। यदि महिला को सेब का सेवन करना है तो महिला एक या दो का सेवन करें।

और उसके बाद जब महिला दूसरी बार फल खाएं तो फल को बदल दें, जैसे की पहले सेब खाया था तो अब एक अनार का सेवन करें। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान पाचन क्रिया धीमी होती है जिसके कारण सभी फलों का साथ में सेवन करने से महिला को पेट सम्बन्धी परेशानी होने का खतरा रहता है। ऐसे में महिला एक बार में एक ही फल का सेवन करें ताकि महिला सभी फलों का लुत्फ़ उठाने के साथ बेहतरीन फायदे भी ले सके। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान माँ व् बच्चे को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

प्रेगनेंसी के दौरान फलों का सेवन करते समय महिला को इन बातों का ध्यान रखना चाहिए

  • गर्भवती महिला को बिना धुले फलों का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • बहुत देर तक कटे पड़े रखे फलों का सेवन प्रेग्नेंट महिला को नहीं करना चाहिए।
  • गले सड़े फलों का सेवन भी प्रेग्नेंट महिला को नहीं करना चाहिए।
  • यदि महिला दूध पी रही है तो महिला को फल नहीं खाने चाहिए, फलों को खाने और दूध पीने में कम से कम आधे घंटे का गैप होना चाहिए।
  • प्रेग्नेंट महिला को मौसमी फलों का सेवन ही करना चाहिए।
  • फलों को लेते समय ध्यान रखें की वह कच्चे या इंजेक्शन से पके हुए न हो।
  • उन फलों का सेवन बिल्कुल न करें जिनका सेवन प्रेगनेंसी में करने की मनाही होती है जैसे की कच्चा पपीता, अधिक मात्रा में अंगूर, अनानास, आदि।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान फलों का सेवन करने से जुड़े कुछ टिप्स, यदि आप भी प्रेगनेंसी के दौरान फलों का सेवन कर रही है तो आपको भी फलों के फायदे के लिए इन सभी बातों का ध्यान रखना चाहिए।

प्रेगनेंसी में सम्बन्ध बनाने से क्या दिक्कत हो सकती है?

अक्सर कपल के मन में यह सवाल आता ही की प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध बनाना सेफ होता है या नहीं? तो इसका जवाब होता है की प्रेगनेंसी की पहली तिमाही बहुत ही नाजुक होती है। ऐसे में डॉक्टर्स भी प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में सम्बन्ध बनाने के लिए मना कर सकते हैं। दूसरी तिमाही में यदि महिला को प्रेगनेंसी के दौरान किसी भी तरह की कॉम्प्लीकेशन्स नहीं है तो भी महिला अपने पार्टनर के साथ सम्बन्ध बना सकती है।

लेकिन इसके लिए बेहतर होगा की एक बार आपको डॉक्टर की राय जरूर लेनी चाहिए। क्योंकि यदि महिला की प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स है या डॉक्टर ने किसी कारण आपको सम्बन्ध न बनाने की सलाह दी है। और फिर भी प्रेग्नेंट महिला अपने पार्टनर के साथ सम्बन्ध बनाती है। तो इसके कारण गर्भवती महिला के साथ गर्भ में शिशु को भी दिक्कत हो सकती है।

प्रेगनेंसी में सम्बन्ध बनाने से क्या परेशानियां हो सकती है

गर्भावस्था के दौरान यदि महिला पूरी सावधानी के साथ सम्बन्ध नहीं बनाती है। या डॉक्टर ने आपको सम्बन्ध न बनाने की सलाह दी है और आप सम्बन्ध बना रही है। तो इसके कारण प्रेग्नेंट महिला को दिक्कत हो सकती है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में सम्बन्ध बनाने से क्या दिक्कत हो सकती है।

पेट में दर्द

  • प्रेग्नेंट महिला यदि प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध बनाती है।
  • और यदि महिला के पेट पर थोड़ा सा भी दबाव पड़ता है।
  • तो इसके कारण महिला को पेट में दर्द आदि की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

ब्लीडिंग

  • प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध बनाने के कारण महिला को ब्लीडिंग जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
  • खासकर प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में सम्बन्ध बनाने के कारण यह खतरा और भी बढ़ जाता है।
  • और प्रेग्नेंट महिला को ब्लीडिंग होना प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली परेशानियों को बढ़ा सकता है।

प्रेगनेंसी में सम्बन्ध बनाने से हो सकता है इन्फेक्शन

  • गर्भावस्था एक ऐसी स्थिति होती है जहां महिला और पुरुष दोनों को पूरी सावधानी बरतनी होती है।
  • ऐसे में यदि महिला और पुरुष प्रेगनेंसी के दौरान बिना सुरक्षा के सम्बन्ध बना लेते हैं। तो इसके कारण महिला को इन्फेक्शन होने का खतरा हो सकता है।
  • और महिला का अस्वस्थ होना शिशु पर भी प्रभाव डाल सकता है।

समय पूर्व प्रसव

  • यदि प्रेगनेंसी के दौरान महिला को किसी तरह की समस्या है।
  • जैसे की ब्लीडिंग, शिशु का भार नीचे की तरफ होना, आदि।
  • और ऐसे में यदि महिला और पुरुष आपस में सम्बन्ध बनाते हैं।
  • तो ऐसे में महिला के गर्भाशय में थोडी सी चोट भी गर्भाशय में संकुचन पैदा कर सकती है।
  • जिसके कारण समय पूर्व प्रसव का खतरा हो सकता है।
  • और समय पूर्व प्रसव के कारण शिशु को जन्म के समय होने वाली परेशानियां होने का खतरा बढ़ जाता है।

शिशु को असहजता

  • जब पुरुष महिला के साथ प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध बनाता है।
  • तो यदि जोश में होश खोने पर अचानक से प्रेग्नेंट महिला के पेट पर दबाव पड़ जाता है।
  • या पुरुष तेजी से सम्बन्ध बनाने लगता है।
  • तो इसके कारण गर्भाशय पर चोट लगने या दबाव पड़ने की समस्या हो सकती है।
  • जिसके कारण गर्भ में शिशु असहज महसूस कर सकता है।

प्रेगनेंसी में महिला को कब सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए?

  • गर्भ में एक से ज्यादा शिशु होने पर, क्योंकि गर्भ में एक से ज्यादा शिशु होने पर महिला का पेट ज्यादा बड़ा होता है जिसके कारण महिला को दिक्कत होने की सम्भावना बढ़ जाती है।
  • यदि महिला को ब्लीडिंग की समस्या है।
  • प्रेग्नेंट महिला को वजाइनल डिस्चार्ज अधिक हो रहा है तो भी महिला को सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए।
  • महिला को प्राइवेट पार्ट में इन्फेक्शन या आपके पार्टनर को किसी तरह का इन्फेक्शन है तो भी प्रेगनेंसी में सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए।
  • डॉक्टर्स द्वारा प्रेगनेंसी में यदि कॉम्प्लीकेशन्स बताई गई है तो भी प्रेग्नेंट महिला को सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए।
  • डिलीवरी का समय पास हो।

तो यह है प्रेगनेंसी में सम्बन्ध बनाने से जुड़े कुछ टिप्स। तो यदि आप भी प्रेगनेंसी में अपने पार्टनर के साथ सम्बन्ध बनाने की सोच रहे हैं। तो प्रेग्नेंट महिला व् शिशु को इसके कारण किसी भी तरह की दिक्कत न हो इससे बचाव के लिए एक बार डॉक्टर से जरूर राय लें।